UK 9th Social Science

UK Board 9th Class Social Science – (राजनीति विज्ञान) – Chapter 2 संविधान निर्माण

UK Board 9th Class Social Science – (राजनीति विज्ञान) – Chapter 2 संविधान निर्माण

UK Board Solutions for Class 9th Social Science – सामाजिक विज्ञान – (राजनीति विज्ञान) – Chapter 2 संविधान निर्माण

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1 नीचे कुछ गलत वाक्य हैं। हर एक में की गई गलती पहचानें और इस अध्याय के आधार पर उसको ठीक करके लिखें-
(क) स्वतन्त्रता के बाद देश लोकतान्त्रिक हो या नहीं, इस विषय पर स्वतन्त्रता आन्दोलन के नेताओं ने अपना दिमाग खुला रखा था।
(ख) भारतीय संविधान सभा के सभी सदस्य संविधान में कही गई हरेक बात पर सहमत थे।
(ग) जिन देशों में संविधान है वहाँ लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था ही होगी।
(घ) संविधान देश का सर्वोच्च कानून होता है इसलिए इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता।
उत्तर-
(क) यह वाक्य गलत है। यह बात स्वतन्त्रता के संघर्ष के दौरान ही तय थी कि देश स्वतन्त्रता के पश्चात् लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था वाला ही होगा। कांग्रेस के सभी अधिवेशनों में लोकतान्त्रिक मूल्यों की बात की गई थी।
(ख) यह कथन गलत है। भारतीय संविधान सभा के सभी सदस्य संविधान में कही गई प्रत्येक बात पर सहमत न थे। इस कारण बार-बार संविधान सभा की बैठक बुलानी पड़ी।
(ग) यह वाक्य भी गलत है। जिन देशों में संविधान है वहाँ लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था ही हो यह आवश्यक नहीं है। पाकिस्तान में संविधान है मगर वहाँ लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था नहीं है।
(घ) यह कथन भी गलत है। संविधान देश का सर्वोच्च कानून होता है लेकिन इसमें वैधानिक रूप से बदलाव किया जा सकता है।
प्रश्न 2 – दक्षिण अफ्रीका के लिए लोकतान्त्रिक संविधान बनाने में इनमें से कौन-सा टकराव सबसे महत्त्वपूर्ण था-
(क) दक्षिण अफ्रीका और उसके पड़ोसी देशों का
(ख) स्त्रियों और पुरुषों का
(ग) गोरे अल्पसंख्यक और अश्वेत बहुसंख्यकों का
(घ) रंगीन चमड़ी वाले बहुसंख्यकों और अश्वेत अल्पसंख्यकों का।
उत्तर – (ग) गोरे अल्पसंख्यक और अश्वेत बहुसंख्यकों का
प्रश्न 3 – लोकतान्त्रिक संविधान में इनमें से कौन-सा प्रावधान नहीं रहता?
(क) शासन प्रमुख के अधिकार
(ख) शासन प्रमुख का नाम
(ग) विधायिका के अधिकार
(घ) देश का नाम
उत्तर- (ख) शासन प्रमुख का नाम।
प्रश्न 4 – संविधान निर्माण में इन नेताओं और उनकी भूमिका में मेल बैठाएँ-
(क) मोतीलाल नेहरू           1. संविधान सभा के अध्यक्ष ।
(ख) बी०आर० अम्बेडकर    2. संविधान सभा की सदस्य
(ग) राजेन्द्र प्रसाद                3. प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष
(घ) सरोजिनी नायडू            4. 1928 में भारत का संविधान बनाया
उत्तर-
(क) मोतीलाल नेहरू           4. 1928 में भारत का संविधान बनाया
(ख) बी०आर० अम्बेडकर    3. प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष
(ग) राजेन्द्र प्रसाद                1. संविधान सभा के अध्यक्ष ।
(घ) सरोजिनी नायडू            2. संविधान सभा की सदस्य
प्रश्न 5 – जवाहरलाल नेहरू के नियति के साथ साक्षात्कार वाले भाषण के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों का जवाब दें-
(क) नेहरू ने क्यों कहा कि भारत का भविष्य सुस्ताने और आराम करने का नहीं?
(ख) नए भारत के सपने किस तरह विश्व से जुड़े हैं?
(ग) वे संविधान निर्माताओं से क्या शपथ चाहते थे ?
(घ) “हमारी पीढ़ी के सबसे महान् व्यक्ति की कामना हर आँख के आँसू पोंछने की है।” वे इस कथन में किसका जिक्र कर रहे थे?
उत्तर-
(क) नेहरू ने ऐसा इसलिए कहा कि स्वतन्त्र होने के बाद देश के विकास की आवश्यकता थी और सुस्ताना व आराम करना इसमें एक बड़ी बाधा है।
(ख) नए भारत के सपने विकास और प्रगति के मानदण्डों को लेकर सम्पूर्ण विश्व से जुड़े हैं।
(ग) भारत, उसके लोगों तथा मानवता की सेवा के समर्पण की प्रतिज्ञा ।
(घ) वे इस कथन में महात्मा गांधी का जिक्र कर रहे थे।
प्रश्न 6 – हमारे संविधान को दिशा देने वाले ये कुछ मूल्य और उनके अर्थ हैं। इन्हें आपस में मिलाकर दोबारा लिखिए-
(क) सम्प्रभु        1. सरकार किसी धर्म के निर्देशों के अनुसार काम नहीं करेगी।
(ख) गणतन्त्र      2. फैसले लेने का सर्वोच्च अधिकार लोगों के पास है।
(ग) बन्धुत्व         3. शासन प्रमुख एक चुना हुआ व्यक्ति है।
(घ) धर्मनिरपेक्ष  4. लोगों को आपस में परिवार की तरह रहना चाहिए।
उत्तर-
(क) सम्प्रभु        2. फैसले लेने का सर्वोच्च अधिकार लोगों के पास है।
(ख) गणतन्त्र      3. शासन प्रमुख एक चुना हुआ व्यक्ति है।
(ग) बन्धुत्व         4. लोगों को आपस में परिवार की तरह रहना चाहिए।
(घ) धर्मनिरपेक्ष  1. सरकार किसी धर्म के निर्देशों के अनुसार काम नहीं करेगी।
प्रश्न 7 – कुछ दिन पहले नेपाल से आपके एक मित्र ने वहाँ की राजनीतिक स्थिति के बारे में आपको पत्र लिखा था। वहाँ अनेक राजनीतिक पार्टियाँ राजा के शासन का विरोध कर रही थीं। उनमें से कुछ का कहना था कि राजा द्वारा दिए गए मौजूदा संविधान में ही संशोधन करके चुने हुए प्रतिनिधियों को ज्यादा अधिकार दिए जा सकते हैं। अन्य पार्टियाँ नया गणतान्त्रिक संविधान बनाने के लिए नई संविधान सभा गठित करने की माँग कर रही थीं। इस विषय में अपनी राय बताते हुए अपने मित्र को पत्र लिखें।
उत्तर- अध्यापक की सहायता से छात्र स्वयं करें।
प्रश्न 8 – भारत के लोकतन्त्र के स्वरूप में विकास के प्रमुख कारणों के बारे में कुछ अलग-अलग विचार इस प्रकार हैं। आप इनमें से हर कंथन को भारत में लोकतान्त्रिक व्यवस्था के लिए कितना महत्त्वपूर्ण कारण मानते हैं?
(क) अंग्रेज शासकों ने भारत को उपहार के रूप में लोकतान्त्रिक व्यवस्था दी। हमने ब्रिटिश हुकूमत के समय बनी प्रान्तीय असेम्बलियों के जरिए लोकतान्त्रिक व्यवस्था में काम करने का प्रशिक्षण पाया।
(ख) हमारे स्वतन्त्रता संग्राम ने औपनिवेशिक शोषण और भारतीय लोगों को तरह-तरह की आजादी न दिए जाने का विरोध किया। ऐसे में स्वतन्त्र भारत को लोकतान्त्रिक होना ही था ।
(ग) हमारे राष्ट्रवादी नेताओं की आस्था लोकतन्त्र में थी। अनेक नव स्वतन्त्र राष्ट्रों में लोकतन्त्र का न आना हमारे नेताओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
उत्तर— घटते हुए क्रम में महत्त्व – 1. (ख), 2. (ग), 3. ( क ) ।
प्रश्न 9-1912 में प्रकाशित ‘विवाहित महिलाओं के लिए आचरण पुस्तक’ के निम्नलिखित अंश को पढ़ें-
“ईश्वर ने औरत जाति को शारीरिक और भावनात्मक, दोनों ही तरह से ज्यादा नाजुक बनाया है, उन्हें आत्म-रक्षा के भी योग्य नहीं बनाया है। इसलिए ईश्वर ने ही उन्हें जीवन भर पुरुषों के संरक्षण में रहने का भाग्य दिया है— कभी पिता के, कभी पति के और कभी पुत्र के। इसलिए महिलाओं को निराश होने की जगह इस बात से अनुगृहीत होना चाहिए कि वे अपने आपको पुरुषों की सेवा में समर्पित कर सकती हैं।” क्या इस अनुच्छेद में व्यक्त मूल्य संविधान के दर्शन से मेल खाते हैं या वे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं?
उत्तर— ये संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं। हमारे संविधान ने स्त्री-पुरुष को समान दर्जा दिया है।
प्रश्न 10 – निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए । क्या आप उनसे सहमत हैं? अपने कारण भी बताइए-
(क) संविधान के नियमों की हैसियत किसी भी अन्य कानून के बराबर है।
(ख) संविधान बताता है कि शासन व्यवस्था के विविध अंगों का गठन किस तरह होगा ।
(ग) नागरिकों के अधिकार और सरकार की सत्ता की सीमाओं का उल्लेख भी संविधान में स्पष्ट रूप में है।
(घ) संविधान संस्थाओं की चर्चा करता है, उसका मूल्यों से कुछ लेना-देना नहीं है।
उत्तर—
(क) नहीं। संविधान के नियमों की हैसियत किसी भी अन्य कानून से अधिक है।
(ख) सही।
(ग) सही ।
(घ) नहीं। क्योंकि संविधान मूल्यों को समान महत्त्व देता है, उदाहरण के लिए, मानव मूल्य ।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
• विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – आपके विचार से लोकतान्त्रिक देशों में संविधान का महत्त्व अपेक्षाकृत क्यों अधिक होता है?
उत्तर – संविधान का अस्तित्व लोकतान्त्रिक तथा अधिनायकवादी (तानाशाही ) देशों में समान रूप से हो सकता है। तानाशाही देशों में संविधान का अस्तित्व होते हुए भी, शासन सत्ता के व्यावहारिक स्वरूपं में स्वेच्छाचारी शासन को प्रमुखता प्रदान की जाती है तथा संविधान के अनुरूप शासन व्यवस्था को संचालित नहीं किया जाता है। जबकि लोकतान्त्रिक देशों में शासन व्यवस्था का संचालन संविधान के अनुसार ही किया जाता है, इसलिए लोकतान्त्रिक देशों में संविधान का महत्त्व अपेक्षाकृत अधिक होता है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
  1. लोकतान्त्रिक देश की सरकार का निर्माण संविधान के प्रावधानों के अन्तर्गत ही किया जाता है। निर्वाचित सरकार संविधान के अनुसार ही शासन व्यवस्था का संचालन करती है।
  2. लोकतान्त्रिक देशों में नागरिकों को अनेक प्रकार के अधिकार तथा स्वतन्त्रताएँ प्रदान की जाती हैं। इन अधिकारों एवं स्वतन्त्रताओं की सुरक्षा संविधान द्वारा ही सम्भव है।
  3. लोकतान्त्रिक सरकारों की शक्तियों तथा अधिकारों को मर्यादित तथा नियन्त्रित करने के लिए संविधान की आवश्यकता होती है।
  4. लोकतान्त्रिक सरकारों के विभिन्न अंगों के अधिकार क्षेत्रों का वर्णन संविधान में कर दिया जाता है जिससे सरकार के विभिन्न अंगों में मतभेद की सम्भावना समाप्त हो जाती है।
  5. लोकतान्त्रिक देशों में संविधान को पवित्र अभिलेख माना जाता है; अतः इस स्थिति में कोई भी सरकार संविधान का उल्लंघन अथवा अतिक्रमण करने का प्रयास नहीं कर सकती है। इससे सरकार द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग करने की सम्भावना समाप्त हो जाती है।
  6. संविधान एक जीवित आलेख होता है तथा यह देश के | नागरिकों की अपेक्षा व आकांक्षाओं के अनुसार परिवर्तित होता रहता है। लोकतान्त्रिक देशों में संविधान सरकार का मार्गदर्शन करता है।
  7. लोकतन्त्र में सरकार के क्रिया-कलापों में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से नागरिक अपनी सहभागिता सुनिश्चित करते हैं। नागरिकों की सहभागिता के लिए संविधान का होना अत्यन्त आवश्यक है।
प्रश्न 2 – ‘संविधान सभा’ से आप क्या समझते हैं? संविधान सभा के संगठन पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर — संविधान का निर्माण जिस सभा द्वारा किया जाता है, उसे ‘संविधान सभा’ की संज्ञा प्रदान की जाती है; जैसे भारत तथा अमेरिका का संविधान जनता द्वारा निर्वाचित संविधान सभा द्वारा बनाया गया।
संविधान सभा का संगठन
1946 ई० को कैबिनेट मिशन की योजना में इस बात पर अंग्रेजों ने विचार किया कि भारतीयों को भारतीय संविधान के निर्माण की स्वतन्त्रता दी जानी चाहिए, क्योंकि वे ही अपने देश की परिस्थितियों के अनुसार संविधान का निर्माण कर सकते हैं। अतः शीघ्र ही संविधान सभा का गठन करने के उद्देश्य से अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचन कराए गए। निर्वाचन के आधार पर, संविधान सभा के कुल 389 सदस्य चुने गए, जिनमें से 296 सदस्य प्रान्तों का और 93 सदस्य भारतीय रियासतों का प्रतिनिधित्व करने वाले थे। बाद में पाकिस्तान के अलग होने पर 389 सदस्यों में से 79 सदस्य अलग हो गए और 310 सदस्य शेष बचे। इन्हीं सदस्यों को संविधान निर्माण का कार्य सौंपा गया। संविधान का निर्माण करने के दायित्व को वहन करने के कारण ही यह सभा ‘संविधान सभा’ कहलायी।
संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन 9 दिसम्बर, 1946 ई० को डॉ॰ सच्चिदानन्द सिन्हा (डॉ० सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष निर्वाचित किया गया था) की अध्यक्षता में प्रारम्भ हुआ। इसमें मुस्लिम लीग के सदस्यों ने भाग नहीं लिया। उन मुसलमानों ने अवश्य भाग लिया, जो अपने को राष्ट्रभक्त मानते थे। बाद में 11 दिसम्बर, 1946 ई० को इस संविधान निर्माण सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ० राजेन्द्र प्रसाद बने। की समाप्ति तक संविधान सभा के अध्यक्ष रहे।
संविधान सभा की’ अनेक समितियाँ थीं जिन्होंने संविधान के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। इन समितियों में सबसे महत्त्वपूर्ण प्रारूप समिति (Drafting Committee) थी। इस समिति के अध्यक्ष डॉ० बी० आर० अम्बेडकर थे। इस समिति ने ही संविधान का प्रारूप तैयार किया तथा उसे संविधान सभा के गहन विचार-विमर्श तथा वाद-विवाद के आधार पर स्वीकार किया गया। संविधान सभा प्रारूप समिति द्वारा निर्मित प्रारूप में अनेक महत्त्वपूर्ण संशोधन भी किए।
• लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – हम ‘गणतन्त्र दिवस’ क्यों मनाते हैं?
उत्तर— भारतीय संविधान 26 जनवरी को इसलिए लागू किया गया क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा 1930 ई० से ही प्रतिवर्ष 26 जनवरी को सम्पूर्ण भारत में ‘स्वतन्त्रता दिवस’ (स्वतन्त्रता की प्रतिज्ञा के दिवस के रूप में) मनाया जाता था । इस दृष्टि से 26 जनवरी ऐतिहासिक महत्त्व का दिन होने के कारण भारत के गणतन्त्रात्मक संविधान को 26 जनवरी के दिन ही लागू किया गया। अतः इस दिन को हम प्रतिवर्ष ‘गणतन्त्र दिवस’ के रूप में मनाते हैं।
प्रश्न 2 – संविधान की प्रस्तावना के मुख्य लक्षणों अथवा विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर — संविधान की प्रस्तावना के मुख्य लक्षण अथवा विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
  1. भारतीय संविधान की स्रोत जनता है। भारतीय शासन की अन्तिम सत्ता जनता में निहित है।
  2. प्रस्तावना में भारतीय शासन – कार्यपालिका, व्यवस्थापिका तथा न्यायपालिका— के उद्देश्यों की स्पष्ट घोषणा की गई है।
  3. संविधान का महत्त्वपूर्ण उद्देश्य भारत को एक प्रभुत्वसम्पन्न राज्य बनाना है।
  4. भारत को एक लोकतान्त्रिक राज्य घोषित किया गया है।
  5. प्रस्तावना में भारत के लिए लोकतान्त्रिक गणतन्त्र को अपनाने पर बल दिया गया है।
  6. प्रस्तावना में सामाजिक एवं आर्थिक न्याय के उल्लेख का विशिष्ट महत्त्व है।
प्रश्न 3 – हमें संविधान की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर – हमें संविधान की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है—
  1. लोकतन्त्रीय शासन प्रणाली के लिए संविधान का होना अनिवार्य है।
  2. संविधान सरकार की शक्ति तथा सत्ता का स्रोत है।
  3. संविधान सरकार के अंगों में पारस्परिक सम्बन्ध तय करता है।
  4. संविधान से सरकार और नागरिक के सम्बन्ध निर्धारित होते हैं।
  5. संविधान से सरकार की शक्ति की सीमा निर्धारित होती है।
प्रश्न 4 – संविधान से आप क्या समझते हैं?
उत्तर— संविधान उन सिद्धान्तों तथा नियमों का एक समूह. होता है जिनके अनुसार शासन चलाया जाता है। प्रत्येक राज्य में कुछ ऐसे सिद्धान्त तथा नियम निश्चित कर लिए जाते हैं जिनके अनुसार शासन के विभिन्न अंगों का संगठन किया जाता है, उनके आपसी सम्बन्धों को नियमित किया जाता है तथा नागरिकों और राज्य के बीच सम्बन्ध स्थापित किए जाते हैं। इन नियमों के समूह को ही संविधान कहा जाता है।
प्रश्न 5 – संविधान में पंथ निरपेक्षता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर— पंथ – निरपेक्षता या धर्म-निरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य का अपना कोई धर्म नहीं है तथा राज्य के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी अन्तरात्मा की आवाज पर किसी भी धर्म का पालन करने का अधिकार होगा । राज्य, धर्म के आधार पर नागरिकों के साथ कोई भेदभाव नहीं करेगा तथा धार्मिक मामलों में विवेकपूर्ण निर्णय लेगा। इसके अतिरिक्त, राज्य द्वारा सभी व्यक्तियों के धार्मिक अधिकारों को सुनिश्चित एवं सुरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा। राज्य धार्मिक मामलों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगा वरन् धार्मिक सहिष्णुता एवं धार्मिक समभाव की नीति को प्रोत्साहित करने का प्रयास करेगा। धर्म के सम्बन्ध में राज्य सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार करेगा। इस प्रकार की पंथ निरपेक्षता या धर्म-निरपेक्षता का पालन करने वाले शासन को पंथ निरपेक्ष या धर्म-निरपेक्ष शासन कहते हैं।
• अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद वाली शासन व्यवस्था कब समाप्त हुई ?
उत्तर – दक्षिण अफ्रीका में 26 अप्रैल, 1994 को रंगभेद वाली शासन व्यवस्था समाप्त हुई।
प्रश्न 2 – भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भारत के लिए किन विशेषणों का प्रयोग किया गया है?
उत्तर— भारतीय संविधान की प्रस्तावना के अनुसार भारत ‘एक सम्पूर्ण प्रभुत्वसम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष लोकतन्त्रात्मक गणराज्य’ है।
प्रश्न 3 – भारतीय संविधान में किस भाग को समूचे संविधान की आत्मा कहा जाता है?
उत्तर – संविधान की प्रस्तावना को समूचे संविधान की आत्मा कहा जाता है।
प्रश्न 4 – सम्पूर्ण विश्व में किस देश का संविधान सबसे विस्तृत ( बड़ा ) है?
उत्तर – भारत का संविधान विश्व में सबसे बड़ा संविधान है।
प्रश्न 5 – ‘संविधान सभा’ के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर — ‘संविधान सभा’ के स्थायी अध्यक्ष डॉ० राजेन्द्र प्रसाद थे।
प्रश्न 6- भारत का संविधान कब लागू हुआ ? –
उत्तर- भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 ई० को लागू हुआ।
प्रश्न 7 – संविधान सभा की दो महिला सदस्यों के नाम लिखिए।
उत्तर — (i) श्रीमती सरोजिनी नायडू, (ii) श्रीमती विजयलक्ष्मी पंडित।
प्रश्न 8- भारत को गणतन्त्र क्यों कहते हैं?
उत्तर – भारत को गणतन्त्र इसलिए कहते हैं कि देश का मुखिया अर्थात् राष्ट्रपति एक निर्वाचित व्यक्ति होता है तथा यह पद पैतृक नहीं होता ।
• बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1 – संविधान की आवश्यकता है-
(a) सरकार का गठन करने के लिए
(b) समाज के विभिन्न लोगों में समन्वय स्थापित करने के लिए
(c) सरकार की शक्तियों पर सीमाएँ लगाने के लिए
(d) उपर्युक्त सभी कारणों से।
उत्तर – (d) उपर्युक्त सभी कारणों से।
प्रश्न 2 – भारत के संविधान का प्रारूप तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष थे-
(a) पं० मोतीलाल नेहरू
(b) जवाहरलाल नेहरू
(c) डॉ० बी०आर० अम्बेडकर
(d) सच्चिदानन्द सिन्हा।
उत्तर – (c) डॉ० बी०आर० अम्बेडकर
प्रश्न 3 – संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष थे-
(a) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
(b) डॉ० बी०आर० अम्बेडकर
(c) पं० जवाहरलाल नेहरू
(d) बाल गंगाधर तिलक |
उत्तर – (a) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
प्रश्न 4 – भारत का संविधान लागू किया गया-
(a) 14 जनवरी, 1950
(b) 17 जनवरी, 1950
(c) 26 जनवरी, 1950
(d) 26 दिसम्बर, 1949.
उत्तर – (c) 26 जनवरी, 1950

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