MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

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MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

  MP Board Class 10th Science Chapter 11

           पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न शृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 41

प्रश्न 1.
नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
नेत्र की समंजन क्षमता-“नेत्र द्वारा निकटस्थ से लेकर दूरस्थ वस्तुओं को सुस्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह नेत्र लेन्स की फोकस दूरी को समायोजन करने से सम्भव होता है। नेत्र की इस समायोजन क्षमता को नेत्र की समंजन क्षमता कहते हैं।

प्रश्न 2.
निकट दृष्टि दोष का कोई व्यक्ति 1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त संशोधक लेन्स किस प्रकार का होना चाहिए?
उत्तर:
अवतल (अपसारी) लेन्स।

 

प्रश्न 3.
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिन्दु तथा निकट बिन्दु नेत्र से कितनी दूरी पर होते हैं?
उत्तर:
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए नेत्र से क्रमशः दूर बिन्दु की दूरी अनन्त तथा निकट बिन्दु की दूरी 25 cm होती है।

प्रश्न 4.
अन्तिम पंक्ति में बैठे किसी विद्यार्थी को श्यामपट्ट पढ़ने में कठिनाई होती है। यह विद्यार्थी किस दृष्टि दोष से पीड़ित है? इसे किस प्रकार संशोधित किया जा सकता है?
उत्तर:
वह विद्यार्थी निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है। इस दोष का निवारण उपयुक्त क्षमता के अवतल (अपसारी) लेन्स के उपयोग द्वारा किया जा सकता है।

         पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मानव नेत्र अभिनेत्र लेन्स की फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को फोकसित कर सकता है। ऐसा हो पाने का कारण है?
(a) जरा-दूरदृष्टिता।
(b) समंजन।
(c) निकट दृष्टि।
(d) दीर्घ दृष्टि।
उत्तर:
(b) समंजन।

प्रश्न 2.
मानव नेत्र जिस भाग पर किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाते हैं, वह है – (2019)
(a) कॉर्निया।
(b) परितारिका।
(c) पुतली।
(d) दृष्टि-पटल।
उत्तर:
(d) दृष्टि-पटल।

प्रश्न 3.
सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी होती है, लगभग –
(a) 25 m
(b) 2.5 cm
(c) 25 cm
(d) 2.5 m
उत्तर:
(c) 25 cm

प्रश्न 4.
अभिनेत्र लेन्स की फोकस दूरी में परिवर्तन किया जाता है –
(a) पुतली द्वारा।
(b) दृष्टि-पटल द्वारा।
(c) पक्ष्माभी द्वारा।
(d) परितारिका द्वारा।
उत्तर:
(c) पक्ष्माभी द्वारा।

प्रश्न 5.
किसी व्यक्ति को अपनी दूर की दृष्टि को संशोधित करने के लिए 5.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेन्स की आवश्यकता है। अपनी निकट की दृष्टि को संशोधित करने के लिए उसे +1.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेन्स की आवश्यकता है। संशोधित करने के लिए आवश्यक लेन्स की फोकस दूरी क्या होगी?

  1. दूर की दृष्टि के लिए।
  2. निकट की दृष्टि के लिए।

उत्तर:
1. दूर की दृष्टि के लिए –

अतः लेन्स की अभीष्ट फोकस दूरी = – 18.2 cm (लगभग) – उत्तर

2. निकट की दृष्टि के लिए –

अतः लेन्स की अभीष्ट फोकस दूरी = 66.7 cm (लगभग) – उत्तर

 

प्रश्न 6.
किसी निकट दृष्टि से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिन्दु नेत्र के सामने 80 cm की दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेन्स की प्रकृति तथा क्षमता क्या होगी?
हल:
चूँकि u = – ∞ cm एवं v = – 80 cm (∵ दोनों दूरियाँ नेत्र लेन्स के सामने हैं)

अतः अभीष्ट लेन्स की प्रकृति अपसारी अवतल लेन्स एवं उसकी अभीष्ट क्षमता = – 1.25 D – उत्तर

प्रश्न 7.
चित्र बनाकर दर्शाइए कि दीर्घ दृष्टि दोष कैसे संशोधित किया जाता है? एक दीर्घ दृष्टि दोष युक्त नेत्र का निकट बिन्दु 1 m है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेन्स की क्षमता क्या होगी? मान लीजिए कि सामान्य नेत्र का निकट बिन्दु 25 cm है।
हल:
दीर्घ दृष्टि दोष का संशोधन उपयुक्त क्षमता के उत्तल लेन्स का उपयोग करके किया जाता है।

दीर्घ दृष्टि दोष एवं उसके निवारण का किरण आरेख –



संख्यात्मक भाग –
हम जानते हैं कि स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (एक स्वस्थ नेत्र के लिये) = 25 cm = u = – 25 cm
दिया है: निकट बिन्दु = 1 m ⇒ u = – 100 cm

अतः लेन्स की अभीष्ट क्षमता = 3D एवं प्रकृति अभिसारी उत्तल लेन्स।

प्रश्न 8.
सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते?
उत्तर:
क्योंकि स्वस्थ सामान्य नेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी 25 cm होती है। इसलिए सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख पाते।

प्रश्न 9.
जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं तो नेत्र में प्रतिबिम्ब दूरी का क्या होता है?
उत्तर:
जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं, तो नेत्र में प्रतिबिम्ब दूरी पर नेत्र की समंजन क्षमता के कारण कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रश्न 10.
तारे क्यों टिमटिमाते हैं?
उत्तर:
तारे पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित हैं, अतः तारों से चलने वाले प्रकाश को वायुमण्डल की विभिन्न परतों को पार करना पड़ता है। इन परतों का घनत्व बदलते रहने से इनकी सघनता भी बदलती रहती है। किसी विशेष तारे से आने वाली प्रकाश की किरणें इन विभिन्न परतों से अपवर्तित होकर हमारी आँखों में आती है। परतों के बदलते रहने से तारे के प्रतिबिम्ब की स्थिति भी बदलती हुई प्रतीत होती है। इसलिए तारे टिमटिमाते हैं।

प्रश्न 11.
व्याख्या कीजिए कि ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते?
उत्तर:
ग्रह पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर नहीं होते इसलिए उनसे आने वाले प्रकाश की किरणों को विभिन्न बदलती सघनता वाली वायुमण्डल की परतों से नहीं गुजरना पड़ता तथा उनके प्रतिबिम्ब की स्थिति नहीं बदलती इसलिए ग्रह नहीं टिमटिमाते।

प्रश्न 12.
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है?
उत्तर:
सूर्योदय के समय सूर्य से आने वाली प्रकाश किरणों को वायुमण्डल में वायु की मोटी परतों से गुजरना पड़ता है। इससे प्रकाश का प्रकीर्णन अधिक होता है लेकिन लाल रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं हो पाता। इसलिए हमारी आँखों में लाल रंग की प्रकाश की किरणें ही पहुँच पाती हैं। इसलिए सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है।

प्रश्न 13.
किसी अन्तरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है?
उत्तर:
चूँकि अन्तरिक्ष यात्री पृथ्वी से इतनी अधिक ऊँचाई पर होता है कि उन तक प्रकीर्णित प्रकाश नहीं पहुँच पाता। इसलिए उन्हें आकाश नीले की अपेक्षा काला प्रतीत होता है।

     परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

               वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कोई छात्र आपतन कोण के विभिन्न मानों के लिए काँच के त्रिभुजाकार प्रिज्म से होकर गुजरने वाली प्रकाश किरण का पथ आरेखित करता है। प्रकाश किरण आरेखों का विश्लेषण करने पर उसे निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष निकालना चाहिए?
(a) निर्गत किरण आपतित किरण के समान्तर होती है।
(b) निर्गत किरण आपतित किरण की दिशा से किसी कोण पर मुड़ जाती है।
(c) निर्गत किरण और अपवर्तित किरण एक-दूसरे से समकोण बनाती है।
(d) निर्गत किरण आपतित किरण के लम्बवत् होती है।
उत्तर:
(b) निर्गत किरण आपतित किरण की दिशा से किसी कोण पर मुड़ जाती है।

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए आरेख में सही अंकित कोण कौन-से हैं?

उत्तर:
(d) ∠r, ∠A और ∠D

प्रश्न 3.
निम्नलिखित किरण आरेख का अध्ययन कीजिए –

इस आरेख में आपतन कोण, निर्गत कोण और विचलन कोण को क्रमशः किनके द्वारा निरूपित किया गया है?
(a) y, p, z
(b) x, q, z
(c) p, y, z
(d) p, z, y
उत्तर:
(c) p, y, z

प्रश्न 4.
स्वस्थ मनुष्य के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी है –
(a) 20 cm
(b) 25 cm
(c) 10 cm
(d) 30 cm
उत्तर:
(b) 25 cm

प्रश्न 5.
निकट दृष्टि दोष दूर करने में लेन्स प्रयुक्त होता है –
(a) उत्तल।
(b) अवतल।
(c) बेलनाकार लेन्स/उत्तल दर्पण।
(d) सामान्य लेन्स।
उत्तर:
(d) सामान्य लेन्स।

प्रश्न 6.
दूर दृष्टि दोष दूर करने में लेन्स प्रयुक्त होता है –
(a) उत्तल लेन्स।
(b) अवतल लेन्स।
(c) साधारण लेन्स।
(d) बेलनाकार लेन्स।
उत्तर:
(a) उत्तल लेन्स।

 

प्रश्न 7.
एक व्यक्ति 2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता। यह दोष दूर किया जा सकता है –
(a) + 0.5 D
(b) – 0.5D
(c) + 0.2 D
(d) – 0.2 D
उत्तर:
(b) – 0.5D

प्रश्न 8.
एक छात्र अपनी कक्षा की आखिरी बेंच पर बैठकर श्यामपट (ब्लैकबोर्ड) पर लिखे अक्षरों को पढ़ सकता है, लेकिन अपनी पुस्तकों में लिखे अक्षरों को पढ़ने में असमर्थ है। निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है?
(a) उसकी आँख का निकट बिन्दु दूर चला गया है।
(b) उसकी आँख का निकट बिन्दु उसके समीप आ गया है।
(c) उसकी आँख का दूर बिन्दु उसके पास आ गया है।
(d) उसकी आँख का दूर बिन्दु उससे दूर चला गया है।
उत्तर:
(a) उसकी आँख का निकट बिन्दु दूर चला गया है।

प्रश्न 9.
एक प्रिज्म ABC जिसका आधार BC है, विभिन्न मुद्राओं में रखा गया है। एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश की किरण चित्रानुसार प्रिज्म पर आपतित होती है। निम्न में से किस स्थिति में वर्ण विक्षेपण के बाद ऊपर से तीसरा रंग आसमानी नीला रंग होगा?

उत्तर:

प्रश्न 10.
दोपहर में सूर्य श्वेत दिखाई देता है क्योंकि –
(a) प्रकाश कम प्रकीर्णित होता है।
(b) श्वेत प्रकाश की सभी रंग प्रकीर्णित हो जाते हैं।
(c) नीला रंग का प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है।
(d) लाल रंग का प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है।
उत्तर:
(a) प्रकाश कम प्रकीर्णित होता है।

प्रश्न 11.
निम्न में कौन से प्रकाश की घटनाएँ इन्द्रधनुष के निर्माण में संलिप्त होती हैं?
(a) परावर्तन, अपवर्तन एवं वर्ण विक्षेपण।
(b) अपवर्तन, वर्ण विक्षेपण एवं पूर्ण आन्तरिक परावर्तन।
(c) अपवर्तन, वर्ण विक्षेपण एवं आन्तरिक परावर्तन।
(d) वर्ण विक्षेपण, प्रकीर्णन एवं पूर्ण आन्तरिक परावर्तन।
उत्तर:
(c) अपवर्तन, वर्ण विक्षेपण एवं आन्तरिक परावर्तन।

प्रश्न 12.
तारों का टिमटिमाना निम्न वायुण्डलीय घटना के कारण होता है?
(a) जल की बूंदों के द्वारा प्रकाश का वर्ण विक्षेपण।
(b) वायुमण्डल की विभिन्न अपवर्तनांकों की परतों के द्वारा प्रकाश का अपवर्तन।
(c) धूल के कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन।
(d) बादलों द्वारा प्रकाश का आन्तरिक परावर्तन।
उत्तर:
(b) वायुमण्डल की विभिन्न अपवर्तनांकों की परतों के द्वारा प्रकाश का अपवर्तन।

प्रश्न 13.
स्वच्छ आकाश नीला दिखाई देता है क्योंकि –
(a) नीला प्रकाश वायुमण्डल द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।
(b) वायुमण्डल में पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित कर लिया जाता है।
(c) बैंगनी एवं नीले रंग के प्रकाश का अन्य सभी रंग के प्रकाश की अपेक्षा अधिक प्रकीर्णन होता है।
(d) बैंगनी एवं नीले रंग के प्रकाश को छोड़कर शेष सभी रंगों के प्रकाश का प्रकीर्णन अधिक होता है।
उत्तर:
(c) बैंगनी एवं नीले रंग के प्रकाश का अन्य सभी रंग के प्रकाश की अपेक्षा अधिक प्रकीर्णन होता है।

प्रश्न 14.
श्वेत प्रकाश के विभिन्न रंग के प्रकाश के वायु में संचरण के सम्बन्ध में कौन-सा कथन सत्य है?
(a) लाल रंग का प्रकाश सबसे अधिक तेज गति से संचरण करता है।
(b) नीला प्रकाश हरे प्रकाश से अधिक तेजी से गति करता है।
(c) श्वेत प्रकाश के सभी रंग समान चाल से गति करते हैं।
(d) पीला प्रकाश लाल एवं बैंगनी प्रकाश की औसत चाल से गति करता है।
उत्तर:
(c) श्वेत प्रकाश के सभी रंग समान चाल से गति करते हैं।

प्रश्न 15.
ऊँची इमारतों की चोटी पर सबसे ऊपर खतरे के सूचक के रूप में लाल रंग के लगाए जाते हैं। ये दूर से ही आसानी से देखे जा सकते हैं क्योंकि लाल प्रकाश –
(a) धुएँ एवं कोहरे के कारण सर्वाधिक प्रकीर्णित होता है।
(b) धुएँ एवं कोहरे के कारण न्यूनतम प्रकीर्णित होता है।
(c) धुएँ एवं कोहरे के द्वारा अधिकतर अवशोषित कर लिया जाता है।
(d) वायु में सबसे तेज गति करता है।
उत्तर:
(b) धुएँ एवं कोहरे के कारण न्यूनतम प्रकीर्णित होता है।

प्रश्न 16.
सूर्यादय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल दिखाई देना निम्न में से प्रकाश की किस घटना का परिणाम है?
(a) प्रकाश का वर्ण विक्षेपण।
(b) प्रकाश का प्रकीर्णन।
(c) प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन।
(d) प्रकाश का पृथ्वी तल से परावर्तन।
उत्तर:
(b) प्रकाश का प्रकीर्णन।

प्रश्न 17.
गहरे समुद्र का जल नीला दिखाई देने के कारण है –
(a) जल में ऐल्गी एवं अन्य पौधों की उपस्थिति।
(b) आकाश का जल में परावर्तन (प्रतिबिम्ब बनना)।
(c) प्रकाश का प्रकीर्णन।
(d) समुद्र के द्वारा प्रकाश का अवशोषण।
उत्तर:
(c) प्रकाश का प्रकीर्णन।

प्रश्न 18.
जब प्रकाश की किरण नेत्रों में प्रवेश करती है, तो प्रकाश का अधिकतम अपवर्तन होता है निम्न पर –
(a) क्रिस्टलीय लेन्स।
(b) कॉर्निया का बाह्य पृष्ठ।
(c) उपतारा (आइरिस)।
(d) तारा (प्यूपिल)।
उत्तर:
(b) कॉर्निया का बाह्य पृष्ठ।

प्रश्न 19.
नेत्र लेन्स की फोकस दूरी बढ़ती है जब नेत्र की माँसपेशियाँ –
(a) विमोचित होती हैं तथा नेत्र लेन्स पतला हो जाता है।
(b) सिकुड़ती (संकुचित) हैं तथा नेत्र लेन्स मोटा हो जाता है।
(c) विमोचित होती है तथा नेत्र लेन्स मोटा हो जाता है।
(d) सिकुड़ती (संकुचित) होती है तथा नेत्र लेन्स पतला हो जाता है।
उत्तर:
(a) विमोचित होती हैं तथा नेत्र लेन्स पतला हो जाता है।

प्रश्न 20.
निम्न में कौन-सा कथन सत्य है?
(a) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति दूर रखी वस्तुओं को आसानी से देख पाता है।
(b) दूर दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति निकट में रखी हुई वस्तुओं को आसानी से देख सकता है।
(c) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति पास में रखी हुई वस्तुओं को आसानी से देख सकता है।
(d) दूर दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति दूर पर रखी वस्तुओं को आसानी से नहीं देख सकता।
उत्तर:
(c) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति पास में रखी हुई वस्तुओं को आसानी से देख सकता है।

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. प्रिज्म के दो फलकों के बीच का कोण ……… कहलाता है।
  2. प्रिज्म में आपाती किरण एवं निर्गत किरण के बीच का कोण ……… कहलाता है।
  3. श्वेत प्रकाश का रंगों में विभक्त होना ………. कहलाता है।
  4. इन्द्रधनुष जल की सूक्ष्म बूंदों द्वारा प्रकाश के ……….. के कारण प्राप्त होता है।
  5. आकाश का रंग नीला प्रकाश के ………. के कारण दिखाई देता है।
  6. सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी ……. है। (2019)

उत्तर:

  1. प्रिज्म कोण।
  2. विचलन कोण।
  3. वर्ण विक्षेपण।
  4. परिक्षेपण।
  5. प्रकीर्णन।
  6. 25 सेमी।

जोड़ी बनाइए

उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (d)
  3. → (e)
  4. → (a)
  5. → (b)

सत्य/असत्य कथन

  1. सूर्योदय के समय सूर्य लाल प्रतीत होता है।
  2. निकट की वस्तुओं को ठीक से नहीं देख पाना निकट दृष्टि दोष है।
  3. सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखाई देता है।
  4. दूर की वस्तुओं को ठीक से नहीं देख पाना दूर दृष्टि दोष है।
  5. दोपहर के समय सूर्य का रंग श्वेत दिखाई देना।

उत्तर:

  1. सत्य।
  2. असत्य।
  3. सत्य।
  4. असत्य।
  5. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. नेत्र के किस भाग पर वस्तुओं के प्रतिबिम्ब बनते हैं?
  2. नेत्र लेन्स की फोकस दूरी को कौन समंजित करता है?
  3. श्वेत प्रकाश के विक्षेपण में किस रंग के प्रकाश का विचलन सर्वाधिक होता है।
  4. श्वेत प्रकाश के विक्षेपण में किस रंग के प्रकाश का विचलन न्यूनतम होता है।
  5. अन्तरिक्ष यात्रियों को आकाश कैसा दिखाई देगा?

उत्तर:

  1. दृष्टि पटल (रेटिना)।
  2. पक्ष्माभी।
  3. बैंगनी।
  4. लाल।
  5. काला।

           अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निकट दृष्टि दोष किसे कहते हैं?
उत्तर:
निकट दृष्टि दोष:
“जब कोई व्यक्ति पास रखी वस्तुओं को तो आसानी से तथा स्पष्टता के साथ देख पाता है लेकिन दूरी पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता तो उस व्यक्ति का दृष्टि दोष निकट दृष्टि दोष कहलाता है।”

प्रश्न 2.
दूर दृष्टि (दीर्घ दृष्टि) दोष किसे कहते हैं?
उत्तर:
दूर दृष्टि (दीर्घ दृष्टि) दोष:
“जब कोई वस्तु दूरी पर रखी हुई वस्तुओं को तो स्पष्ट रूप से तथा आसानी के साथ देख पाता है लेकिन पास में रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता तो उस व्यक्ति का दृष्टि दोष दूर दृष्टि (दीर्घ दृष्टि) दोष कहलाता है।”

 

प्रश्न 3.
जरा दूरदर्शिता किसे कहते हैं?
उत्तर:
जरा दूरदर्शिता:
“वृद्धावस्था के कारण नेत्र की पेशियाँ कमजोर होने के कारण जब कोई व्यक्ति न तो पास रखी हुई वस्तुओं को स्पष्टतया देख पाता है और न ही दूर रखी हुई वस्तुओं को स्पष्टतया देख पाता है तो उस व्यक्ति के नेत्र दोष को जरा दूरदर्शिता कहते हैं।”

प्रश्न 4.
स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी किसे कहते हैं?
उत्तर:
स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी:
“वह न्यूनतम दूरी जिस पर रखी वस्तु को एक स्वस्थ व्यक्ति स्पष्ट रूप से तथा आसानी से देख पाता है, स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी कहलाती है।” स्पष्ट मनुष्य के लिए इसका मान 25 cm होता है।

प्रश्न 5.
विचलन कोण किसे कहते हैं?
उत्तर:
विचलन कोण:
“जब कोई प्रकाश की किरण किसी त्रिभुजाकार प्रिज्म के पृष्ठ पर आपतित होती है तो उसके दूसरे पृष्ठ से निर्गत हो जाती है तो आपाती किरण एवं निर्गत किरण के बीच का कोण विचलन कोण कहलाता है।”

प्रश्न 6.
प्रकाश का प्रकीर्णन किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रकाश का प्रकीर्णन:
“वायु में उपस्थित धुआँ एवं धूल के कणों के कारण प्रकाश के विभिन्न रंग वायुमण्डल में बिखर (छिटक) जाते हैं प्रकाश की यह घटना प्रकाश का प्रकीर्णन कहलाती है।”

प्रश्न 7.
वर्ण विक्षेपण किसे कहते हैं?
उत्तर:
वर्ण विक्षेपण:
वह प्रकाशीय घटना जिसके फलस्वरूप प्रकाश के विभिन्न अवयवी रंगों के लिए विभिन्न विचलन कोण होने के कारण श्वेत प्रकाश विभिन्न अवयवी रंगों में विभक्त हो जाता है, वर्ण विक्षेपण कहलाती है।

प्रश्न 8.
वर्णक्रम क्या है?
उत्तर:
वर्णक्रम:
“वर्ण विक्षेपण के फलस्वरूप श्वेत प्रकाश का अपने अवयवी रंगों में विभक्त होकर विभिन्न रंगों का प्राप्त अनुक्रम वर्णक्रम कहलाता है।

प्रश्न 9.
स्वच्छ आकाश नीला क्यों दिखाई देता है?
उत्तर:
वायु में उपस्थित वायु के अणु एवं अन्य कण बैंगनी एवं नीले प्रकाश का तीव्रता से प्रकीर्णन कर देते हैं। प्रकीर्णित नीला प्रकाश जब हमारे नेत्रों में पड़ता है तो वह आकाश की ओर से आता प्रतीत होता है इसलिए हमें आकाश नीला दिखाई पड़ता है।

प्रश्न 10.
हम पास की और दूर की वस्तुओं को स्वच्छता के साथ देख सकने में किस प्रकार समर्थ हो सकते हैं?
उत्तर:
हमारे नेत्र की पक्ष्माभि नेत्र लेन्स की क्षमता को कम ज्यादा करने की क्षमता रखती है इसी समंजन क्षमता के कारण हम पास की वस्तुओं को भी देख सकते हैं और दूर रखी वस्तुओं को भी।

प्रश्न 11.
हम किसी तारे को आकाश में देखते हैं, क्या वह उसकी वास्तविक स्थिति है? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
नहीं। वह तारे की वास्तविक स्थिति नहीं है क्योंकि तारे से आने वाला प्रकाश वायुमण्डल की निरन्तर परिवर्तनीय अपवर्तनांक वाली परतों के द्वारा अपवर्तन के बाद हमारे नेत्रों में पड़ता है। इसलिए हम उसका प्रतिबिम्ब ही देखते हैं।

प्रश्न 12.
हम वर्षा होने के बाद ही आकाश में इन्द्रधनुष क्यों देखते हैं?
उत्तर:
वर्षा के समय जो जल की बूंदें हैं वे एक प्रिज्म का कार्य करती हैं जिससे वे प्रकाश का वर्ण विक्षेपण करके वर्णक्रम प्रदान करती हैं जो धनुषाकार होता है। इसलिए हम वर्षा के बाद ही इन्द्रधनुष देखते हैं।

                    लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जब हम उगते (उदय होते), डूबते (अस्त होते) एवं दोपहर के समय सूर्य को देखते हैं तो उसके रंगों में क्या अन्तर होता है? प्रत्येक की व्याख्या कीजिए।
अथवा
हमें सर्योदय एवं सर्यास्त के समय सर्य लाल दिखाई देता है तथा दोपहर के समय सर्य लाल नहीं दिखाई देता अपितु श्वेत एवं चमकीला दिखाई देता है। हम इसकी किस प्रकार व्याख्या कर सकते हैं?
उत्तर:
सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय हमको सूर्य लाल दिखाई देता है लेकिन दोपहर के समय यह लाल दिखाई न देकर श्वेत चमकीला दिखाई देता है क्योंकि सूर्य सूर्यास्त एवं सूर्योदय के समय क्षितिज के पार होता है उस समय उसके प्रकाश को हमारे नेत्रों तक आने में बहुत लम्बी वायुमण्डलीय दूरी तय करनी पड़ती है। इससे वायु के अणुओं के द्वारा प्रकाश के अधिकांश रंगों का प्रकीर्णन हो जाता है लेकिन सर्वाधिक तरंगदैर्घ्य होने के कारण लाल रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं हो पाता और हमारे नेत्रों में लाल रंग का प्रकाश पड़ता है इस कारण हमको सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखाई देता है लेकिन दोपहर के समय सूर्य हमारे ऊपर हमसे बहुत पास होता है और उसके प्रकाश का प्रकीर्णन कम होने के कारण अधिकांश प्रकाश हमारे नेत्रों में पड़ता है इसलिए दोपहर के समय सूर्य लाल दिखाई न देकर श्वेत चमकीला दिखाई देता है।

प्रश्न 2.
निम्न के लिए किरण आरेख खींचिए –
(a) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित नेत्र।
(b) दूर दृष्टि (दीर्घ दृष्टि) दोष से पीड़ित नेत्र।
उत्तर:
(a) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित नेत्र का किरण आरेख –

(b) दूर दृष्टि (दीर्घ दृष्टि) दोष से पीड़ित नेत्र का किरण आरेख –


प्रश्न 3.
एक छात्रा पीछे की बेंच पर अपनी कक्षा में बैठी है। वहश्यामपट (ब्लैक-बोड) पर लिखे अक्षरों को तो ठीक से पढ़ नहीं पाती लेकिन पुस्तक में लिखे अक्षरों को सुगमता से स्पष्टतया देख पाती है। डॉक्टर इस छात्रा को क्या सलाह देंगे? नेत्र के इस दोष को ठीक करने के लिए प्रयुक्त युक्ति का एक किरण आरेख खींचिए।
उत्तर:
डॉक्टर उस छात्रा को बताएगा कि उसको निकट दृष्टि दोष है उसे दूर की वस्तुओं को देखने के लिए एक चश्मे का प्रयोग करना होगा और वह उसे एक ऋणात्मक लेन्स क्षमता का अवतल लेन्स युक्त चश्मा लगाने को देगा।
निकट दृष्टि दोष के निवारण का किरण आरेख –

प्रश्न 4.
एक महिला को – 4.5D क्षमता के लेन्स के चश्मे की आवश्यकता अपने नेत्र दोष को संशोधन हेतु है।
(a) वह महिला किस प्रकार के दृष्टि दोष से पीड़ित है?
(b) उस दृष्टि दोष के संशोधन हेतु प्रयुक्त लेन्स (संशोधन लेन्स) की फोकस दूरी क्या है?
(c) उस संशोधक लेन्स की प्रकृति क्या है
उत्तर:
(a) महिला निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है। क्योंकि उसे – 4-5 D क्षमता के संशोधक लेन्स की आवश्यकता है और यह लेन्स निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति के लिए ही संशोधक लेन्स की तरह प्रयोग करने की आवश्यकता होती है।

(b) चूँकि फोकस दूरी

अतः संशोधक लेन्स की अभीष्ट क्षमता = – 22.22 cm है।

(c) यह संशोधक लेन्स अपसारी प्रकृति का अवतल लेन्स है। – उत्तर

प्रश्न 5.
आप दो समरूप काँच के प्रिज्मों को कैसे प्रयोग करेंगे जिससे एक प्रिज्म पर आपतित संकीर्ण श्वेत प्रकाश किरण दूसरे प्रिज्म से होकर एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश किरण के रूप में निर्गत हो? सम्बन्धित रेखाचित्र खींचिए।
उत्तर:
हम दोनों प्रिज्मों को एक-दूसरे के समान्तर चित्रानुसार इस प्रकार रखेंगे कि उनमें से एक प्रिज्म का आधार नीचे की ओर तथा दूसरे का आधार ऊपर की ओर रहे तथा उनके बीच में थोड़ा रिक्त स्थान रहे। इससे एक प्रिज्म द्वारा प्रकाश किरण का वर्ण विक्षेपण होगा जो दूसरे प्रिज्म द्वारा संयुक्त होकर एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश की किरण के रूप में निर्गत होगा।

प्रश्न 6.
जब एक प्रिज्म के अपवर्तक तल पर एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश किरण आपतित होती है तो उसका वर्ण विक्षेपण हो जाता है। इस घटना को दर्शाने वाला एक किरण आरेख खींचिए तथा प्राप्त वर्णक्रम के रंगों का अनुक्रम लिखिए।
अथवा
प्रिज्म से श्वेत प्रकाश के विक्षेपण का चित्र बनाइए। (2019)
अथवा
प्रिज्य की सहायता से प्राप्त होने वाली विभिन्न रंगों की किरणों की स्थिति समझाइए।
अथवा
सिद्ध कीजिए कि सूर्य का प्रकाश सात रंगों का बना होता है।
अथवा
क्या होता है जब श्वेत प्रकाश की किरण प्रिज्म से गुजरती है? चित्र द्वारा समझाइए।
अथवा
प्रिज्म द्वारा सूर्य के प्रकाश के वर्ण विक्षेपण को चित्र सहित समझाइए।
उत्तर:
जब श्वेत प्रकाश की किरण प्रिज्म से गुजरती है तो वर्णक्रम प्राप्त होता है। चित्रानुसार सूर्य का प्रकाश एक प्रिज्म पर डालते हैं तथा प्राप्त वर्णक्रम को पर्दे पर लेते हैं तो हम देखते हैं कि वर्णक्रम में सात रंग हैं।

जिनका अनुक्रम है – (आधार से शीर्ष की ओर)

  1. बैंगनी (Violet)
  2. जामुनी (Indigo)
  3. नीला (Blue)
  4. हरा (Green)
  5. पीला (Yellow)
  6. नारंगी (Orange)
  7. लाल (Red)

प्रश्न 7.
एक व्यक्ति दूर स्थित वस्तुओं को स्पष्टता के साथ देख सकता है लेकिन उसे पुस्तक पढ़ने में कठिनाई होती है। वह व्यक्ति किस दृष्टि दोष से पीड़ित है? इसका निवारण करने के लिए क्या करेंगे ? किरण आरेख खींचिए।
उत्तर:
वह व्यक्ति दूर दृष्टि दोष से पीड़ित है। इसके निवारण के लिए उसे उपयुक्त लेन्स क्षमता का उत्तल लेन्स का चश्मा धारण करना होगा।

प्रश्न 8.
प्रकाश के प्रकीर्णन से क्या समझते हो? इस परिघटना की सहायता से व्याख्या कीजिए कि स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों होता है?
अथवा
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है?
उत्तर:
प्रकाश का प्रकीर्णन:
“वायु में उपस्थित धुआँ एवं धूल के कणों के कारण प्रकाश के विभिन्न रंग वायुमण्डल में बिखर (छिटक) जाते हैं प्रकाश की यह घटना प्रकाश का प्रकीर्णन कहलाती है।”

स्वच्छ अकाश का नीला प्रतीत होने की परिघटना:
वायु में उपस्थित वायु के अणु एवं अन्य कण बैंगनी एवं नीले प्रकाश का तीव्रता से प्रकीर्णन कर देते हैं। प्रकीर्णित नीला प्रकाश जब हमारे नेत्रों में पड़ता है तो वह आकाश की ओर से आता प्रतीत होता है इसलिए हमें आकाश नीला दिखाई पड़ता है।

सूर्योदय के समय सूर्य का रक्ताभ दिखाई देना:
वर्षा के समय जो जल की बूंदें हैं वे एक प्रिज्म का कार्य करती हैं जिससे वे प्रकाश का वर्ण विक्षेपण करके वर्णक्रम प्रदान करती हैं जो धनुषाकार होता है। इसलिए हम वर्षा के बाद ही इन्द्रधनुष देखते हैं।

 

प्रश्न 9.
यह दर्शाने के लिए किसी क्रियाकलाप का वर्णन कीजिए कि किस प्रकार एक प्रिज्म द्वारा विपाटित श्वेत प्रकाश को अन्य सर्वसम प्रिज्म द्वारा पुनर्योजित करके पुनः श्वेत प्रकाश प्राप्त किया जा सकता है? श्वेत प्रकाश के स्पेक्ट्रम के पुनर्योजन को दर्शाने के लिए एक किरण आरेख भी खींचिए।
उत्तर:
हम दोनों प्रिज्मों को एक-दूसरे के समान्तर चित्रानुसार इस प्रकार रखेंगे कि उनमें से एक प्रिज्म का आधार नीचे की ओर तथा दूसरे का आधार ऊपर की ओर रहे तथा उनके बीच में थोड़ा रिक्त स्थान रहे। इससे एक प्रिज्म द्वारा प्रकाश किरण का वर्ण विक्षेपण होगा जो दूसरे प्रिज्म द्वारा संयुक्त होकर एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश की किरण के रूप में निर्गत होगा।

प्रश्न 10.
काँच के किसी प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के विक्षेपण का कारण लिखिए। न्यूटन ने काँच के दो सर्वसम प्रिज्मों द्वारा यह किस प्रकार दर्शाया कि श्वेत प्रकाश सात वर्णों का बना है। किरण आरेख खींचकर दर्शाइए कि जब कोई संकीर्ण श्वेत प्रकाश पुंज एक-दूसरे से उल्टे व्यवस्थित काँच के दो सर्वसम प्रिज्मों के संयोजन के प्रथम प्रिज्म के एक फलक पर तिर्यकतः आपतन करता है, तो इस संयोजन में उस पुंज का क्या होता है?
उत्तर:
काँच के प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के वर्ण विक्षेपण का कारण:
जब कोई प्रकाश किरण किसी प्रिज्म के अपवर्तक तल पर आपतित होती है तो निर्गत किरण आपतित किरण के साथ विचलन कोण बनाती है जो प्रत्येक रंग के प्रकाश के लिए भिन्न-भिन्न होता है। विचलन कोण की इसी विभिन्नता के कारण प्रकाश के अलग-अलग रंग अलग-अलग हो जाते हैं और प्रकाश का वर्ण विक्षेपण हो जाता है।

हम दोनों प्रिज्मों को एक-दूसरे के समान्तर चित्रानुसार इस प्रकार रखेंगे कि उनमें से एक प्रिज्म का आधार नीचे की ओर तथा दूसरे का आधार ऊपर की ओर रहे तथा उनके बीच में थोड़ा रिक्त स्थान रहे। इससे एक प्रिज्म द्वारा प्रकाश किरण का वर्ण विक्षेपण होगा जो दूसरे प्रिज्म द्वारा संयुक्त होकर एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश की किरण के रूप में निर्गत होगा।

प्रश्न 11.
मानव नेत्र का नामांकित चित्र बनाइए। (2019)
उत्तर:

                  दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव नेत्र की संरचना एवं उसकी कार्यविधि की व्याख्या कीजिए। हम स्पष्टता के साथ किस प्रकार पास रखी वस्तुओं को देख सकते हैं उसी स्पष्टता के साथ दूर रखी वस्तुओं को भी देख सकते हैं?
उत्तर:
मानव नेत्र की बनावट-मानव नेत्र कपाल की नेत्र गुहा में सुरक्षित रहता है। इसमें नेत्र लेन्स निकाय एक क्रिस्टलीय लेन्स होता है जिसकी लेन्स क्षमता को पक्ष्माभि पेशियाँ नियन्त्रित करती हैं। नेत्र लेन्स प्रकाश किरण पुंज को एक प्रकाश सुग्राही परदे पर जिसे दृष्टि पटल (रेटिना) कहते हैं पर प्रतिबिम्बित करता है जिस पर दृष्टि तन्त्रिकाएँ होती हैं जो प्राप्त संवेदनाओं को मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं।

लेन्स के आगे एक पारदर्शी उभार होता है जिसे स्वच्छ मण्डल (कॉर्निया) कहते हैं। कॉर्निया से होकर ही प्रकाश नेत्र में प्रवेश करता है। कॉर्निया के पीछे एक संरचना होती है जिसे परितारिका (आइरिस) कहते हैं। यह पुतली (प्यूपिल) के आकार (साइज) को नियन्त्रित करती है।

कार्यविधि:
जब प्रकाश हमारे नेत्रों पर पड़ता है तो प्रकाश की तीव्रता के अनुसार परितारिका पुतली के आकार को कम या अधिक कर देती है। प्रकाश किरण पुंज पुतली में होकर नेत्र लेन्स पर पड़ता है जिसकी लेन्स क्षमता को पक्ष्माभी पेशियाँ वस्तु की स्थिति के अनुसार निश्चित करती है।

लेन्स उन प्रकाश किरण पुंज को दृष्टि पटल पर फोकसित करके बिम्ब का प्रतिबिम्ब बनाता है जहाँ से इसकी संवेदना दृक् (दृष्टि) तन्त्रिकाएँ ग्रहण करती हैं और मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं। मस्तिष्क का दृष्टि पिण्ड इन सिग्नलों की व्याख्या करता है और हमको बिम्ब का आभास होता है।

प्रश्न 2.
हम कैसे निर्धारित करते हैं कि कोई व्यक्ति निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है या दीर्घ दृष्टि दोष से? किरण आरेखों का प्रयोग करके बताइए कि किस प्रकार निकट दृष्टि दोष एवं दीर्घ (दूर) दृष्टि दोष का निवारण कैसे किया जा सकता है?
उत्तर:
अगर कोई व्यक्ति पास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाता है और दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता तो हम निर्धारित करेंगे कि वह व्यक्ति निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है और यदि व्यक्ति दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाता है तथा पास रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता है तो हम निर्धारित करेंगे कि वह व्यक्ति दूर (दीर्घ) दृष्टि दोष से पीड़ित है।

डॉक्टर उस छात्रा को बताएगा कि उसको निकट दृष्टि दोष है उसे दूर की वस्तुओं को देखने के लिए एक चश्मे का प्रयोग करना होगा और वह उसे एक ऋणात्मक लेन्स क्षमता का अवतल लेन्स युक्त चश्मा लगाने को देगा।

निकट दृष्टि दोष के निवारण का किरण आरेख –

वह व्यक्ति दूर दृष्टि दोष से पीड़ित है। इसके निवारण के लिए उसे उपयुक्त लेन्स क्षमता का उत्तल लेन्स का चश्मा धारण करना होगा।

प्रश्न 3.
नामांकित किरण आरेख की सहायता से किसी त्रिभुजाकार काँच की प्रिज्म के द्वारा प्रकाश के अपवर्तन की परिघटना को समझाइए। इस प्रकार विचलन कोण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
काँच की त्रिभुजाकार प्रिज्म द्वारा प्रकाश का अपवर्तन-जब प्रकाश की किरण त्रिभुजाकार काँच के प्रिज्म के एक अपवर्तक पृष्ठ पर आपत्ति होती है तो अपवर्तन के बाद दूसरे अपवर्तक तल पर गिरती है जहाँ से पुनः अपवर्तन के पश्चात् निर्गत हो जाती है। यह निर्गत किरण मूल आपतित किरण के साथ एक कोण बनाती है जिसे हम विचलन कोण कहते हैं और इस प्रकार प्रिज्म द्वारा प्रकाश का अपवर्तन होता है।

विचलन कोण की परिभाषा:
“जब कोई प्रकाश की किरण किसी त्रिभुजाकार प्रिज्म के पृष्ठ पर आपतित होती है तो उसके दूसरे पृष्ठ से निर्गत हो जाती है तो आपाती किरण एवं निर्गत किरण के बीच का कोण विचलन कोण कहलाता है।”

प्रश्न 4.
वायुमण्डल में प्रकाश का अपवर्तन किस प्रकार होता है? आकाश में तारे क्यों टिमटिमाते प्रतीत होते हैं जबकि ग्रह नहीं?
उत्तर:
वायुमण्डल में प्रकाश का अपवर्तन-वायुमण्डल में उपस्थित वायु की अनेक विभिन्न सघनता की परतें होती हैं जिनकी सघनता परिवर्तित होती रहती है तथा इनके अपवर्तनांक भी भिन्न-भिन्न होते हैं और वह भी परिवर्तित होते रहते हैं। इसलिए इस अपवर्तक माध्यम (वायु) की अस्थिरता के कारण इसमें होकर देखने पर हमको वस्तु की परिवर्तनशील आभासी स्थिति देखने को मिलती है। इस तरह प्रकाश का वायुमण्डलीय अपवर्तन होता है जो निरन्तर परिवर्तित होता रहता है।

तारे पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित हैं, अतः तारों से चलने वाले प्रकाश को वायुमण्डल की विभिन्न परतों को पार करना पड़ता है। इन परतों का घनत्व बदलते रहने से इनकी सघनता भी बदलती रहती है। किसी विशेष तारे से आने वाली प्रकाश की किरणें इन विभिन्न परतों से अपवर्तित होकर हमारी आँखों में आती है। परतों के बदलते रहने से तारे के प्रतिबिम्ब की स्थिति भी बदलती हुई प्रतीत होती है। इसलिए तारे टिमटिमाते हैं।

ग्रह पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर नहीं होते इसलिए उनसे आने वाले प्रकाश की किरणों को विभिन्न बदलती सघनता वाली वायुमण्डल की परतों से नहीं गुजरना पड़ता तथा उनके प्रतिबिम्ब की स्थिति नहीं बदलती इसलिए ग्रह नहीं टिमटिमाते।

 

प्रश्न 5.
वायुमण्डलीय अपवर्तन क्या है? इस परिघटना का उपयोग करके नीचे दी गयी प्राकृतिक घटनाओं की व्याख्या कीजिए –
(a) तारों का टिमटिमाना।
(b) अग्रिम सूर्योदय और विलम्बित सूर्यास्त।
अपने उत्तरों के स्पष्टीकरण के लिए आरेख खींचिए।
उत्तर:
वायुमण्डलीय अपवर्तननिर्देश:
वायुमण्डल में प्रकाश का अपवर्तन-वायुमण्डल में उपस्थित वायु की अनेक विभिन्न सघनता की परतें होती हैं जिनकी सघनता परिवर्तित होती रहती है तथा इनके अपवर्तनांक भी भिन्न-भिन्न होते हैं और वह भी परिवर्तित होते रहते हैं। इसलिए इस अपवर्तक माध्यम (वायु) की अस्थिरता के कारण इसमें होकर देखने पर हमको वस्तु की परिवर्तनशील आभासी स्थिति देखने को मिलती है। इस तरह प्रकाश का वायुमण्डलीय अपवर्तन होता है जो निरन्तर परिवर्तित होता रहता है।

तारे पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित हैं, अतः तारों से चलने वाले प्रकाश को वायुमण्डल की विभिन्न परतों को पार करना पड़ता है। इन परतों का घनत्व बदलते रहने से इनकी सघनता भी बदलती रहती है। किसी विशेष तारे से आने वाली प्रकाश की किरणें इन विभिन्न परतों से अपवर्तित होकर हमारी आँखों में आती है। परतों के बदलते रहने से तारे के प्रतिबिम्ब की स्थिति भी बदलती हुई प्रतीत होती है। इसलिए तारे टिमटिमाते हैं।

ग्रह पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर नहीं होते इसलिए उनसे आने वाले प्रकाश की किरणों को विभिन्न बदलती सघनता वाली वायुमण्डल की परतों से नहीं गुजरना पड़ता तथा उनके प्रतिबिम्ब की स्थिति नहीं बदलती इसलिए ग्रह नहीं टिमटिमाते।

(a) तारों का टिमटिमाना:
तारे पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित हैं, अतः तारों से चलने वाले प्रकाश को वायुमण्डल की विभिन्न परतों को पार करना पड़ता है। इन परतों का घनत्व बदलते रहने से इनकी सघनता भी बदलती रहती है। किसी विशेष तारे से आने वाली प्रकाश की किरणें इन विभिन्न परतों से अपवर्तित होकर हमारी आँखों में आती है। परतों के बदलते रहने से तारे के प्रतिबिम्ब की स्थिति भी बदलती हुई प्रतीत होती है। इसलिए तारे टिमटिमाते हैं।

(b) अग्रिम सूर्यादय एवं विलम्बित सूर्याप्त:
सूर्योदय से पहले एवं सूर्यास्त के बाद सूर्य क्षितिज से नीचे होता है लेकिन वायुमण्डलीय अपवर्तन के कारण अनेक अपवर्तन के बाद सूर्य से आने वाला प्रकाश पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के कारण हम तक पहुँचता है और हमको सूर्य का प्रतिबिम्ब दिखाई देता है। इसलिए हमको सूर्योदय अग्रिम तथा सूर्यास्त विलम्बित दिखाई पड़ता है।

प्रश्न 6.
मानव नेत्र में पक्ष्माभी पेशियों का महत्व लिखिए। उस दृष्टि दोष का नाम लिखिए जो वृद्धावस्था में पक्ष्माभी पेशियों के धीरे-धीरे दुर्बल होने के कारण उत्पन्न होता है। इस दोष से पीड़ित व्यक्तियों को सुस्पष्ट देख सकने के लिए किस प्रकार के लेन्सों की आवश्यकता होती है?

अक्षय अपनी कक्षा में अन्तिम पंक्ति में बैठे हुए, ब्लैकबोर्ड पर लिखे शब्दों को स्पष्ट नहीं देख पा रहा था। जैसे ही शिक्षक महोदय को पता चला उन्होंने कक्षा में घोषणा की कि क्या पहली पंक्ति में बैठा हुआ कोई छात्र अक्षय से अपनी सीट बदलना चाहेगा? सलमान तुरन्त ही अपनी सीट अक्षय से बदलने के लिए तैयार हो गया। अब अक्षय को ब्लैकबोर्ड पर लिखा हुआ स्पष्ट दिखाई देने लगा। यह देखकर शिक्षक महोदय ने अक्षय के माता-पिता को सन्देश भेजा कि वे शीघ्र ही अक्षय के नेत्रों का परीक्षण करवायें।

उपर्युक्त घटना के सन्दर्भ में निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(a) अक्षय किस दृष्टि दोष से पीड़ित है? इस दोष के लिए किस प्रकार का लेन्स उपयोग किया जाता है?
(b) शिक्षक महोदय एवं सलमान द्वारा प्रदर्शित मूल्यों का उल्लेख कीजिए।
(c) आपके विचार से अक्षय को शिक्षक महोदय एवं सलमान के प्रति अपनी कृतज्ञता किस प्रकार प्रकट करनी चाहिए?
उत्तर:
मानव नेत्र में पक्ष्माभी पेशियों का महत्व:
मानव नेत्र में पक्ष्माभी पेशियाँ आवश्यकतानुसार नेत्र की लेन्स क्षमता (फोकस दूरी) को परिवर्तित करके उसकी समंजन क्षमता को नियन्त्रित करती है।

वृद्धावस्था में होने वाला दृष्टि दोष एवं उसका निवारण:
वृद्धावस्था में पक्ष्माभी पेशियों के धीरे-धीरे दुर्बल होने के कारण उत्पन्न नेत्र रोग जरा दूरदर्शिता कहलाता है। इसके निवारण के लिए द्विफोकसी लेन्स के उपयोग की आवश्यकता होती है।
(a) अक्षय निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है। इस दोष के संशोधन के लिए उपयुक्त ऋणात्मक क्षमता का अवतल लेन्स प्रयोग किया जाता है।
(b) शिक्षक महोदय और सलमान द्वारा प्रदर्शित मूल्य मानवीय मूल्य है।
(c) हमारे विचार से अक्षय को शिक्षक महोदय एवं सलमान का आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापन करना चाहिए।

 

प्रश्न 7.
(a) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित कोई छात्र 5 m से अधिक दूरी पर स्थित बिम्बों को स्पष्ट नहीं देख पाता। इस दृष्टि दोष के उत्पन्न होने के दो सम्भावित कारणों की सूची बनाइए। किरण आरेखों की सहायता से व्याख्या कीजिए कि
(i) वह छात्र 5 m से अधिक दूरी पर स्थित बिम्बों को क्यों नहीं देख पाता?
(ii) इस दृष्टि दोष के संशोधन के लिए उसे किस प्रकार के लेन्स का उपयोग करना चाहिए और इस लेन्स के उपयोग द्वारा इस दोष का संशोधन किस प्रकार होता है?
(b) यदि इस प्रकरण में संशोधक लेन्स की फोकस दूरी का संख्यात्मक मान 5 m है, तो नयी कार्तीय चिह्न परिपाटी के अनुसार इस लेन्स की क्षमता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(a) निकट दृष्टि दोष होने के सम्भावित कारण:
अभिनेत्र लेन्स की वक्रता का अत्यधिक होना।
नेत्र गोलक का लम्बा हो जाना।
(i) चूँकि छात्र का दूर बिन्दु 5 m है अर्थात् अधिकतम 5 m दूर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब ही उसके दृष्टि पटल पर बनता है, इससे अधिक दूरी के बिम्ब का फोकस दृष्टि पटल से पहले ही हो जाता है। इसलिए उसे 5 m से अधिक दूरी का बिम्ब दिखाई नहीं देता।
किरण आरेख –
(a) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित नेत्र का किरण –

(ii) इस दृष्टि दोष के निवारण (संशोधन) के लिए उपयुक्त ऋणात्मक क्षमता के अवतल लेन्स का प्रयोग करना चाहिए। इससे यह प्रकाश किरणों का अपसरण कर देगा। दूसरे शब्दों में इसके द्वारा नेत्र लेन्स की क्षमता कम हो जायेगी और उसकी फोकस दूरी बढ़ जायेगी जिससे बिम्ब का प्रतिबिम्ब दृष्टि पटल पर बनेगा और दिखाई देगा। इस प्रकार उक्त दोष का संशोधन (निराकरण) हो जाता है।
किरण आरेख –
डॉक्टर उस छात्रा को बताएगा कि उसको निकट दृष्टि दोष है उसे दूर की वस्तुओं को देखने के लिए एक चश्मे का प्रयोग करना होगा और वह उसे एक ऋणात्मक लेन्स क्षमता का अवतल लेन्स युक्त चश्मा लगाने को देगा।
निकट दृष्टि दोष के निवारण का किरण आरेख –

(b) चूँकि फोकस दूरी का संख्यात्मक मान 5 m है और लेन्स अवतल है जिसकी फोकस दूरी एवं लेन्स क्षमता दोनों ऋणात्मक होते हैं अतः f = – 5 m

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