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PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास

याद रखने योग्य बातें (Points to Remember)

→ जनन प्रक्रमों द्वारा नए जीव उत्पन्न होते हैं जो जन्म देने वाले के समान होते हुए भी उससे कुछ अलग होते हैं।

→ शिशु में मानव के सभी आधारभूत लक्षण होते हैं।

→ माता और पिता दोनों समान मात्रा में आनुवंशिक पदार्थ संतान में स्थानांतरित करते हैं। इसलिए प्रत्येक संतान में हर लक्षण के दो विकल्प हो सकते हैं।

→ मेंडल पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने प्रत्येक पीढ़ी के एक-एक पौधे द्वारा प्रदर्शित लक्षणों का रिकार्ड रखा और गणना की।

→ मेंडल ने मटर के पौधे के अनेक विकल्पी लक्षणों का अध्ययन किया।

→ DNA का वह भाग जिसमें किसी प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचना होती है, उस प्रोटीन का जीन कहलाता

→ पौधे में उपस्थित हॉर्मोन की मात्रा पर उसकी लंबाई निर्भर करती है।

→ जीन लक्षणों (Traits) को नियंत्रित करते हैं।

→ प्रत्येक कोशिका में प्रत्येक गुण सूत्र की दो प्रतिकृति होती है जिनमें से एक उन्हें नर तथा दूसरी मादा जनक से प्राप्त होती है।

→ प्रत्येक जनक कोशिका से गुणसूत्र के प्रत्येक जोड़े का केवल एक गुण सूत्र ही एक जनन कोशिका में जाता है।

→ मानव नर और मादा में 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं।

→ पुरुषों में एक-एक जोड़ी XY तथा स्त्रियों में XX गुणसूत्र होते हैं। .

→ लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों में युग्मक अथवा जनन कोशिकाएँ विशिष्ट जनन ऊतकों में बनती हैं।

→ चार्ल्स डार्विन ने ‘प्राकृतिक वरण द्वारा जैव विकास’ सिद्धांत की कल्पना की थी।

→ हम डार्विन को केवल जैव विकासवाद के कारण जानते हैं।

→ एक ब्रिटिश वैज्ञानिक जे० बी० एस० हाल्डेन ने 1929 में सुझाव दिया कि जीवों की सर्वप्रथम उत्पत्ति उन सरल अकार्बनिक अणुओं से ही हुई होगी जो पृथ्वी की उत्पत्ति के समय बने थे।

→ कोशिका सभी जीवों की आधारभूत इकाई है। जीवाणु कोशिका में केंद्रक नहीं होता जबकि अधिकतर दूसरे जीवों की कोशिकाओं में केंद्रक पाया जाता है।

→ बहुकोशिक जीवों में प्रकाश संश्लेषण का होना या न होना वर्गीकरण का महत्त्वपूर्ण स्तर है।

→ समान जनक से वंशानुगत हुए जीवों में समान लक्षण होते हैं।

→ पक्षियों, सरीसृप, जलस्थल चर और स्तनधारियों के पैरों की संरचना एक समान है चाहे वे भिन्न-भिन्न कार्य करते हैं।

→ चमगादड़ और पक्षी के पंख चाहे उड़ने का काम करते हैं पर दोनों की संरचना एक समान नहीं होती।

→ चट्टानों में जीव के परिरक्षित अवशेष जीवाश्म कहलाते हैं। अधिक गहराई पर मिलने वाले अवशेष उन अवशेषों से अधिक पुराने होते हैं जो कम गहराई पर मिलते हैं।

→ ‘फॉसिल डेटिंग’ से जीवाश्म का समय निर्धारण किया जाता है।

→ प्लैनेरिया नामक चपटे कृमि में अति सरल आँख होती है जो प्रकाश को पहचान सकता है।

→ कोई परिवर्तन जो एक गुण के लिए उपयोगी है वह कालांतर में किसी अन्य कार्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

→ प्राणियों के पँख ऊष्मा रोधन के लिए विकसित हुए थे पर बाद में वे उड़ने में प्रयुक्त होने लगे थे।

→ पक्षी बहुत निकटता से सरीसृप से संबंधित हैं।

→ मनुष्य ने दो हज़ार वर्ष पहले जंगली गोभी को खाद्य पौधे के रूप में उगाना आरंभ किया था। उसके चयन से इससे विभिन्न सब्ज़ियाँ विकसित कीं।

→ कोशिका विभाजन के समय DNA में होने वाले परिवर्तन से उस प्रोटीन में अंतर आएगा जो नए DNA से बनेगी।

→ आण्विक जाति वृत्त दूरस्थ संबंधी जीवों के DNA में विभिन्नताओं की जानकारी देता है।

→ विविधताओं की उत्पत्ति और प्राकृतिक चयन से स्वरूप देना ही विकास है।

→ मानव विकास के अध्ययन के लिए उन्हीं साधनों का उपयोग करते हैं जिनका जैव-विकास के लिए किया था।

→ उत्खनन, समय-निर्धारण, जीवाश्मी अध्ययन और DNA अनुक्रम का निर्धारण मानव विकास के अध्ययन के मुख्य साधन हैं।

→ आधुनिक मानव स्पीशीज़ ‘होमोसेपिएस’ के प्राचीनतम सदस्यों को अफ्रीका में खोजा गया है।

→ मानव की उत्पत्ति अन्य स्पीशीज़ की तरह जैव-विकास की एक घटना मात्र थी।

Science Guide for Class 10 PSEB जीव जनन कैसे करते हैं InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
यदि एक ‘लक्षण-A’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि के 10 प्रतिशत सदस्यों में पाया जाता है तथा ‘लक्षण-B’ उसी समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है, तो कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न होगा?
उत्तर-
लक्षण-B’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है जो ‘लक्षण-A’ प्रजनन वाली समष्टि से 50% अधिक है इसलिए ‘लक्षण-B’ पहले उत्पन्न हुआ होगा।

प्रश्न 2.
विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ जाता है ?
उत्तर-
विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ की उत्तरजीविता की संभावना बढ़ जाती है। प्राकृतिक चयन ही किसी स्पीशीज़ की उत्तरजीविता का आधार बनता है जो वातावरण में घटित होता है। समय के साथ उनमें जो प्रगति की प्रवृत्ति दिखाई देती है उसके साथ उन के शारीरिक अधिकल्प में जटिलता की वृद्धि भी हो जाती है। ऊष्णता को सहन करने की क्षमता वाले जीवाणुओं की अधिक गर्मी में बचने की संभावना अधिक होती है। पर्यावरण द्वारा उत्तम परिवर्तन का चयन जैव विकास प्रक्रम का आधार बनता है। विभिन्ताएँ प्राकृतिक वरण में सहायता देती हैं और विपरीत परिस्थितियों से जूझने में सहायक होती हैं। ये अनुकूलन को बढ़ावा देती हैं।

प्रश्न 3.
मेंडल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं ?
उत्तर-
जब मेंडल ने मटर के लंबे पौधे और बौने पौधे का संकरण कराया तो उसे प्रथम संतति पीढ़ी F, में सभी पौधे लंबे प्राप्त हुए थे। इसका अर्थ था कि दो लक्षणों में से केवल एक पैतृक लक्षण ही दिखाई दिया। उन दोनों का मिश्रित प्रमाण दिखाई नहीं दिया। उसने पैतृक पौधों और F2 पीढ़ी के पौधों को स्वपरागण से उगाया। इस दूसरी पीढ़ी F1 में सभी पौधे लंबे नहीं थे। इसमें एक चौथाई पौधे बौने थे। मेंडल ने लंबे पौधों के लक्षण को प्रभावी और बौने पौधों के लक्षण को अप्रभावी कहा।

प्रश्न 4.
मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं ?
उत्तर-
मेंडल ने दो विभिन्न विकल्पों, लक्षणों वाले मटर के पौधों का चयन कर उनसे पौधे उगाए थे। लंबे पौधे तथा बौने पौधे का संकरण करा कर प्राप्त संतति में लंबे एवं बौने पौधों की गणना की। प्रथम संतति पीढ़ी (F1) में कोई पौधा बीच की ऊंचाई का नहीं था। सभी पौधे लंबे थे। दो लक्षणों में से केवल एक पैतृक लक्षण ही दिखाई दिया था लेकिन दूसरी पीढ़ी (F2) में सभी पौधे लंबे नहीं थे बल्कि उनमें से एक चौथाई बौने पौधे थे। इससे स्पष्ट हुआ कि किसी भी लक्षण के दो विकल्प लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न होने वाले जीवों में किसी भी लक्षण के दो विकल्प की स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होती है।

प्रश्न 5.
एक ‘A’- रुधिर वर्ग’ वाला पुरुष एक स्त्री जिसका रुधिर वर्ग ‘0’ से विवाह करता है। उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग ‘0’ है। क्या यह सूचना पर्याप्त है यदि आप से कहा जाए कि कौन-सा विकल्प लक्षणरुधिर वर्ग ‘A’ अथवा ‘0’ प्रभावी लक्षण है ? अपने उत्तर का स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर-
रुधिर समूह ‘O’ प्रभावी लक्षण है क्योंकि वह F-I पीढ़ी में रुधिर समूह ‘O’ प्रकट हुआ है। यह सूचना प्रभावी और प्रभावी लक्षण को प्रकट करने के लिए पर्याप्त है। रुधिर वर्ग-A (प्रतिजन-A) के लिए जीन प्रभावी हैं और जीन प्रारूप IA IA या IAi है। स्त्री का रुधिर वर्ग ‘O’ है इसलिए उसका जीन प्रारूप ‘ii’ समयुग्मी है। पुत्री के रुधिर वर्ग ‘O’ को क्रास से इस प्रकार दिखाया जा सकता है-

रुधिर वर्ग ‘O’ उसी स्थिति में होता है जब रक्त में प्रतिजन A और प्रतिजन B नहीं होता।

प्रश्न 6.
मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता है ?
उत्तर-
मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण-मानवों में लिंग का निर्धारण विशेष लिंग गुण सूत्रों के आधार पर होता है। नर में XY गुण सूत्र होते हैं और मादा में XX गुण सूत्र विद्यमान होते हैं। इससे स्पष्ट है कि मादा के पास Y गुण सूत्र होता ही नहीं है। जब नर-मादा के संयोग से संतान उत्पन्न होती है तो मादा किसी भी अवस्था में नर शिशु को उत्पन्न करने में समर्थ हो ही नहीं सकती क्योंकि नर शिशु में XY गुण सूत्र होने चाहिएँ।

निषेचन क्रिया में यदि पुरुष का X लिंग गुण सूत्र स्त्री के X लिंग गुणसूत्र से मिलता है तो इससे XX जोड़ा बनेगा अतः संतान लड़की के रूप में होगी लेकिन जब पुरुष का Y लिंग गुण सूत्र स्त्री के X लिंग गुण सूत्र से मिलकर निषेचन करेगा तो XY बनेगा। इससे लड़के का जन्म होगा। किसी भी परिवार में लड़के या लड़की का जन्म पुरुष के गुण सूत्रों पर निर्भर करता है क्योंकि Y गुण सूत्र तो केवल उसी के पास होता है।

प्रश्न 7.
वे कौन-से विभिन्न तरीके हैं जिनके द्वारा विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है ?
उत्तर-
यदि जनसंख्या में परिवर्तन उत्पन्न होते हैं और वे परिवर्तन व्यष्टि की सुरक्षा एवं पोषण के प्रति अनुकूल प्राकृतिक अवस्थाएँ उपस्थित करते हैं तो विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है। प्राकृतिक प्रभेद चयन और आनुवंशिक अनुकूलता इस कार्य में विशेष सहयोग प्रदान करते हैं।

प्रश्न 8.
एक एकल जीव द्वारा उपार्जित लक्षण सामान्यतः अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते। क्यों ?
उत्तर-
एक एकल जीव द्वारा उपार्जित लक्षण उसकी जनन कोशिकाओं की जीन पर प्रभाव नहीं डालते इसलिए वे सामान्यतः अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते।

प्रश्न 9.
बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकता के दृष्टिकोण से चिंता का विषय क्यों है ?
उत्तर-
बाघों में आनुवंशिक विभिन्नता लगभग नहीं के बराबर है। यदि अत्यंत तेजी से बदलती पर्यावरणीय स्थितियों में परिवर्तन नहीं आया तो वे सब नाटकीय रूप से समाप्त हो जाएंगे। उदाहरण के लिए-यदि किसी बाघ में किसी भयानक रोग का संक्रमण हो जाए तो सभी बाघ उसी से मर जाएँगे क्योंकि संक्रमण उनकी जीन की आवृत्ति को प्रभावित करेगा। बाघों की निरंतर घटती संख्या भी यही संकेत कर रही है कि पर्यावरण में आया परिवर्तन उनके लिए अनुकूल नहीं रहा है और वे शायद शीघ्र ही समाप्त हो जाएं।

प्रश्न 10.
वे कौन-से कारक हैं जो नई स्पीशीज़ के उद्भव में सहायक हैं ?
उत्तर-
नई स्पीशीज़ के उद्भव में निम्नलिखित कारक सहायक होते हैं –

  • आनुवंशिक अपवहन।
  • लिंगी प्रजनन के परिणामस्वरूप उत्पन्न उत्परिवर्तन।
  • दो उपसमष्टियों का एक-दूसरे से भौगोलिक पृथक्करण जिसके फलस्वरूप समिष्टियों के सदस्य परस्पर एकलिंगी प्रजनन नहीं कर पाते।
  • प्राकृतिक चयन।

प्रश्न 11.
क्या भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीज़ के पौधों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारण हो सकता है ? क्यों या क्यों नहीं ?
उत्तर-
हाँ। विभिन्न भौगोलिक स्थितियों के कारण विभिन्न पौधों में भी भिन्नताएँ होंगी। लक्षण दो प्रकार के होते हैं-जननकीय लक्षण और पर्यावरणीय लक्षण। स्वपरागित प्रजाति की जीन संरचना में कोई परिवर्तन न होने के कारण विभिन्नताएँ उत्पन्न नहीं होतीं पर पर्यावरणीय लक्षणों के कारण ये स्वयं को एक जाति के रूप में स्थापित कर लेती हैं।

प्रश्न 12.
क्या भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन वाले जीवों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारक हो सकता है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
नहीं। अलैंगिक जनन वाले जीवों में पीढ़ियों तक विभिन्नता उत्पन्न नहीं होती। भौगोलिक पृथक्करण से अनेक पीढ़ियों तक उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि अति न्यून विभिन्नताएँ स्पीशीज़ के लिए पर्याप्त नहीं होंगी।

प्रश्न 13.
उन अभिलक्षणों का एक उदाहरण दीजिए जिनका उपयोग हम दो स्पीशीज़ के विकासीय संबंध निर्धारण के लिए करते हैं ?
उत्तर-
पक्षी, मेंढक, छिपकली, घोड़ा और मानव में चार पाद हैं और उन सभी की आधारभूत संरचना एक समान है चाहे वे सब प्राणी इनसे अलग-अलग काम लेते हैं। ऐसे समजात अभिलक्षणों से भिन्न दिखाई देने वाली अलग-अलग स्पीशीज़ के बीच विकासीय संबंध का निर्धारण करते हैं।

प्रश्न 14.
क्या एक तितली और चमगादड़ के पंखों को समजात अंग कहा जा सकता है ? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर-
तितली और चमगादड़ दोनों जीवों के पंख उड़ने का काम करते हैं पर इन्हें समजात अंग नहीं कहा जा सकता क्योंकि इनके पंखों की मूल रचना और उत्पत्ति एक समान नहीं होती चाहे इनके कार्य एक समान होते हैं। ये इनके समवृत्ति अंग हैं।

प्रश्न 15.
जीवाश्म क्या हैं ? वह जैव-विकास प्रक्रम के विषय में क्या दर्शाते हैं ?
उत्तर-
जीवाश्म- जीवों के चट्टानों में दबे अवशेषों को जीवाश्म कहते हैं। युगों पहले जिन जीवों का अपघटन नहीं हो सका था वे मिट्टी में मिल गए थे। उनके शरीर की छाप गीली मिट्टी पर रह गई थी और वह मिट्टी बाद में चट्टान में बदल गई थी। जीवाश्म पौधों या जंतुओं के अवशेष हैं।
इनसे निम्नलिखित जानकारियां प्राप्त होती हैं –
I. आज पाए जाने वाले जीवजंतुओं से पुरातन काल में पाए जाने वाले जीव-जंतु बहुत भिन्न थे।
II. पक्षियों का विकास सरीसृपों से हुआ।
III. टैरिडोफाइट और जिम्नोस्पर्म से ऐन्जियोस्पर्म विकसित हुए।
IV. सरल जीवों से ही जटिल जीवों का विकास हुआ।
V. विभिन्न पौधों और जंतुओं के वर्गों के विकास क्रम का पता चलता है।
VI. मानव विकास की प्रक्रिया का पता चलता है।

प्रश्न 16.
क्या कारण है कि आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं ?
उत्तर-
विभिन्न स्थानों पर मिलने वाले मानवों की आकृति, आकार, रंग-रूप में भिन्नता वास्तव में आभासी है। इनकी भिन्नता का जैविक आधार तो है पर सभी मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं। उनमें किसी प्रकार का आनुवंशिक विचलन नहीं है। आनुवंशिक विचलन ही किसी स्पीशीज़ को दूसरे से भिन्न करता है।

प्रश्न 17.
विकास के आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि जीवाणु, मकड़ी, मछली तथा चिम्पैंजी में किसका शारीरिक अभिकल्प उत्तम है ? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
जब पृथ्वी पर जीवन का विकास हुआ था तब जीवाणु सबसे पहले बनने वाले जीव थे। युगों बाद वे अभी भी अपना अस्तित्व कायम रखे हुए हैं। उन्होंने पर्यावरण में आने वाले सभी परिवर्तनों को सफलतापूर्वक झेला है और उनके अनुसार अनुकूलन किया है इसलिए वे विस्तार के आधार पर पूर्ण रूप से सफ़ल और समर्थ हैं। इसी प्रकार मकड़ी, मछली तथा चिंपैंजी ने भी अपने-अपने जीवन को विपरीत परिस्थितियों में ढालने के लिए अनुकूलन किया है। इसलिए सभी का शारीरिक अधिकल्प उत्तम है। किसी को भी शारीरिक अधिकल्प निकृष्ट नहीं कहा जा सकता।

PSEB 10th Class Science Guide आनुवंशिकता एवं जैव विकास Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मेंडल के एक प्रयोग में लंबे मटर के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधों जिनके सफ़ेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के सभी पौधों में पुष्प बैंगनी रंग के थे। परंतु उनमें से लगभग आधे बौने थे। इससे कहा जा सकता है, लंबे जनक पौधों की आनुवंशिक रचना निम्न थी –
(a) TTWW
(b) TTww
(c) Tt ww
(c) Tt Ww.
उत्तर-
(c) TtWW.

प्रश्न 2.
समजात अंगों के उदाहरण हैं –
(a) हमारा हाथ तथा कुत्ते के अग्रपाद
(b) हमारे दाँत तथा हाथी के दाँत
(c) आलू एवं घास के उपरिभूस्तारी
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
विकासीय दृष्टिकोण से हमारी किससे अधिक समानता है
(a) चीन के विद्यार्थी
(b) चिम्पैंज़ी
(c) मकड़ी
(d) जीवाणु।
उत्तर-
(a) चीन के विद्यार्थी।

प्रश्न 4.
एक अध्ययन से पता चला कि हल्के रंग की आँखों वाले बच्चे के जनक ( माता-पिता) की आँखें भी हल्के रंग की होती हैं। इसके आधार पर क्या हम कह सकते हैं कि आँखों के हल्के रंग का लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी ? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
सभी बच्चों में अपने माता-पिता के लक्षण प्रकट होते हैं। माता-पिता से हल्के रंग की आँखों का बच्चों में आ जाना सहज स्वाभाविक है। इस अवस्था में तो आँखों के हल्के रंग का लक्षण प्रभावी है पर इसे हर बच्चे की अवस्था में प्रभावी नहीं कह सकते। यह अप्रभावी भी हो सकता है।

प्रश्न 5.
जैव-विकास तथा वर्गीकरण का अध्ययन क्षेत्र परस्पर किस प्रकार संबंधित है ?
उत्तर-
जीवों में वर्गीकरण का अध्ययन उन में विद्यमान समानताओं और भेदों के आधार पर किया जाता है। उनमें समानता इसलिए प्रकट होती है कि वे किसी समान पूर्वज से उत्पन्न हुए हैं और उनमें भिन्नता विभिन्न प्रकार के पर्यावरणों में की जाने वाली अनुकूलता के कारण से है। उनमें बढ़ती जटिलता को जैव विकास के उत्तरोत्तर क्रमिक आधार पर स्थापित कर अंतर्संबंधों का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 6.
समजात तथा समरूप अंगों को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर-
समजात अंग-पौधों और प्राणियों के वे अंग जिनकी आधारभूत रचना एक समान होती है पर उनके कार्य भिन्न-भिन्न होते हैं, उन्हें समजात अंग कहते हैं। जैसे-पक्षियों के पंख, मनुष्य की भुजाएं, कुत्ते की अगली टांगें, मेंढक के अग्रपाद, गाय, घोड़े आदि के अग्रपाद। ये सभी अंग रचना के आधार पर एक समान हैं पर इनका जीवों में कार्य अलग-अलग है।

चित्र-समजात अंग समरूप अंग-जीवों के वे अंग जो देखने में एक समान हों, पर उनकी रचना और कार्य भिन्न-भिन्न हों, उन्हें समरूप अंग कहते हैं; जैसे कीटों के पंख, पक्षियों के पंख, चमगादड़ के पंख। इन सभी जीवों में पंख देखने में एक-समान दिखाई देते हैं, परंतु उनकी रचना

कीट के पंख और कार्य भिन्न हैं। मटर, अंगूर आदि पौधों में प्रतान चित्र-समरूप अंग भी इसी के उदाहरण हैं।

प्रश्न 7.
कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग पीढ़ी ज्ञात करने के उद्देश्य से एक प्रोजेक्ट बनाइए।
उत्तर-
काले रंग के नर और सफ़ेद रंग की मादा के संयोग से उत्पन्न यदि सारे पिल्ले युग्मक काले रंग के हों तो कुत्ते की खाल का प्रभावी
रंग काला ही होगा। तीन कुत्ते काले और एक  सभी काली त्वचा वाले लक्षण कुत्ता सफेद होगा। यह दर्शाता है कि काला रंग प्रभावी रंग है।
कुत्तों के अलग-अलग रंगों का कारण अविकल्पी जीनों की आपसी क्रिया के कारण होता है जिसमें F2 अनुपात 12 : 3 : 1 होता है। इसलिए शुद्ध नस्लों के बीच संकरण कराए बिना किसी सही-सटीक निर्णय तक नहीं पहुंचा जा सकता।

प्रश्न 8.
विकासीय संबंध स्थापित करने में जीवाश्म का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
विकासीय संबंध स्थापित करने में जीवाश्म अति महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। युगों पहले जो जीव ऐसे वातावरण में चले गए थे जहां उनका पूरा अपघटन नहीं हुआ था तो उनके शरीर की छाप चट्टानों पर सुरक्षित रह गई। वे परिरक्षित जीवाश्म ही जीवाश्म कहलाते हैं। जब जीवाश्मों की खुदाई से प्राप्ति की जाती है तो उनकी प्राप्ति की गहराई से पता लग जाता है कि वह लगभग कितना पुराना है। ‘फॉसिल डेटिंग’ इस काम में सहायक सिद्ध होती चित्र-जीवाश्मों से विकासीय संबंध है।

जो जीवाश्म जितनी अधिक गहराई से प्राप्त होगा वह उतना ही पुराना होगा। लगभग 10 करोड़ वर्ष पहले समुद्र तल में अकशेरुकी जीवों के जो जीवाश्म प्राप्त होते हैं वे सबसे पुराने हैं। इसके कुछ मिलियन वर्ष बाद जब डायनोसॉर मरे तो उनके जीवाश्म अकशेरुकी जीवों के जीवाश्मों से ऊपरी सतह में बने। इसके कुछ मिलियन वर्ष बाद जब घोड़े के समान जीव जीवाश्मों में बदले तो उन्हें डायनोसॉरों के जीवाश्मों से ऊपर स्थान मिला। इसी से उनका विकासीय संबंध स्थापित होता है।

प्रश्न 9.
किन प्रमाणों के आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है ?
उत्तर-
विभिन्न जातियों के विकासीय संबंधों का अध्ययन यही दर्शाता है कि जीवन की उत्पत्ति एक ही जाति से हुई है। एक ब्रिटिश वैज्ञानिक जे० बी० एस० हाल्डेन ने सबसे पहली बार सुझाव दिया था कि जीवों की उत्पत्ति उन अजैविक पदार्थों से हुई होगी जो पृथ्वी की उत्पत्ति के समय बने थे। सन् 1953 में स्टेनल एल० मिलर और हेराल्ड सी० डरे ने ऐसे कृत्रिम वातावरण का निर्माण किया था जो प्राचीन वातावरण के समान था। इस वातावरण में ऑक्सीजन नहीं थी। इसमें अमोनिया, मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड थे। उसमें एक पात्र में जल भी था जिसका तापमान 100°C से कम रखा गया था। जब गैसों के मिश्रण से चिंगारियाँ उत्पन्न की गईं जो आकाशीय बिजलियों के समान थीं। मीथेन से 15% कार्बन सरल कार्बनिक यौगिक यौगिकों में बदल गए। इनमें एमीनो अम्ल भी संश्लेषित हुए जो प्रोटीन के अणुओं का निर्माण करते हैं। इसी आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है।

प्रश्न 10.
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थायी होती हैं, व्याख्या कीजिए। यह लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों के विकास को किस प्रकार प्रभावित करता है ?
उत्तर-
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थाई होती हैं। अलैंगिक जनन एक ही जीव से होने के कारण केवल उसी के गण उसकी संतान में जाते हैं और वे बिना परिवर्तन हए पीढी दर पीढी समान ही रहते हैं। लैंगिक जनन नर और मादा के युग्मकों के संयोग से होता है जिनमें भिन्न-भिन्न जीन होने के कारण संकरण के समय विभिन्नता वाली संतान उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिए सभी मानव युगों पहले अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे पर जब उनमें से अनेक ने अफ्रीका छोड़ दिया और धीरे-धीरे सारे संसार में फैल गए तो लैंगिक जनन से उत्पन्न विभिन्नताओं के कारण उनकी त्वचा का रंग, कद, आकार आदि में परिवर्तन आ गया।

प्रभावित करने के कारण/आधार-
I. लैंगिक जनन में DNA की प्रतिकृति में हुई त्रुटियों के कारण विभिन्नताएं उत्पन्न हो जाती हैं।
II. नर और मादा के क्रॉसिंग ओवर के समय समजात गुणसूत्रों के समान भाग आपस में बदल जाते हैं।
III. संतान को अपने माता-पिता से बराबर आनुवंशिक पदार्थ प्राप्त होता है जिसमें जीन परस्पर क्रिया कर अनेक नए विकल्पों को जन्म दे सकती है।
IV. संतान के लिंग और विभिन्नताएं सदा इस संयोग पर निर्भर करती हैं कि माता-पिता का कौन-सा मादा युग्मक नर शुक्राणु के साथ संयोजित होगा।

प्रश्न 11.
संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है ?
उत्तर-
प्रत्येक कोशिका में गुणसूत्रों का एक जोड़ा होता है-एक नर से और दूसरा मादा से। जब युग्मक बनते हैं तो गुणसूत्रों के जोड़े से आधे-आधे गुणसूत्र उसे प्राप्त होते हैं। युग्मकों के संलयन से गुणसूत्र फिर से मिल जाते हैं। इसलिए संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवांशिक योगदान में बराबर की भागीदारी होती है। उदाहरणमनुष्य में 23 जोड़े अर्थात् 46 गुण सूत्र पाए जाते हैं। इनमें से 22 जोड़े अलिंगी गुण सूत्र और 23वां जोड़ा लिंगी गुण सूत्र कहलाता है। नर में XY गुण सूत्र और मादा में XX गुण सूत्र होते हैं। प्रजनन कोशिका के निरंतर विभाजन से ही जनन संभव हो पाता है। जब लैंगिक जनन की प्रक्रिया में संतति की रचना होती है तब नर और मादा उसे समान रूप से आनुवंशिक पदार्थ प्रदान करते हैं। इसी कारण संतति में नर और मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।

प्रश्न 12.
केवल वे विभिन्नताएँ जो किसी एकल जीव (व्यष्टि) के लिए उपयोगी होती हैं, समष्टि में । अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं। क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? क्यों एवं क्यों नहीं ?
उत्तर-
हाँ, लैंगिक जनन के परिणामस्वरूप जीव में अनेक प्रकार की विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं लेकिन वे सारी विभिन्नताएँ अपना अस्तित्व बनाकर नहीं रख पातीं। जीव के सामाजिक व्यवहार के कारण उन विभिन्नताओं में अंतर आ जाता है। यह संभव है कि सामाजिक जीव चींटी के अस्तित्व को उसकी विभिन्नता प्रभावित करे और वह जीवित न रह पाए लेकिन बाघ जैसे प्राणी के अस्तित्व को संभवतः वह प्रभावित न करे और उसका अस्तित्व बना रहे।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मेंडल के द्वारा मटर के पौधों पर किए गए प्रयोगों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर-
मेंडल ने मटर के पौधे के विभिन्न विकल्पी लक्षणों का अध्ययन किया था। उन्होंने उनके बाहरी लक्षणों की ओर विशेष ध्यान दिया था। गोल/झुरींदार बीज, लंबे/बौने पौधे, सफेद/बैंगनी फूल आदि विभिन्न विकल्पी लक्षणों वाले पौधों का चयन कर उनसे पौधे उगाए थे। उन्होंने लंबे पौधे तथा बौने पौधे का संकरण करा कर प्राप्त संतति पीढ़ी में लंबे एवं बौने पौधों की गणना की।

प्रथम संतति अथवा F1 में कोई पौधा बीच की ऊँचाई का नहीं था। सभी पौधे लंबे थे। इसका अर्थ था कि पहली पीढ़ी में दो लक्षणों में से केवल एक गंबा पीया लंबा पौधा लंबा पौधा लंबा पौधा लंबा पौधा बौना पौधा पैतृक लक्षण ही दिखाई देता है। उन दोनों का मिश्रित प्रभाव दिखाई नहीं देता। मेंडल ने अपने प्रयोगों में दोनों प्रकार के पैतृक पौधों एवं F1 पीढ़ी के पौधों को स्वपरागण द्वारा उगाया। पैतृक पीढ़ी के लंबे पौधों से प्राप्त सभी संतति भी लंबे पौधों की थी। पर F1 पीढ़ी के लंबे पौधों की दूसरी पीढ़ी अर्थात् F2 पीढ़ी के सभी पौधे लंबे नहीं थे। उनमें से एक चौथाई संतति बौने पौधे थे। इससे संकेत मिला कि F, पौधों द्वारा लंबाई एवं बौनेपन दोनों के विकल्पी लक्षणों की वंशानुगति हुई। केवल लंबाई वाला विकल्प अपने आपको व्यक्त कर पाया। इसलिए किसी भी लक्षण के दो विकल्प लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न होने वाले जीवों में किसी भी लक्षण के दो विकल्प की वंशानुगति होती है।

‘TT’ एवं ‘Tt’ दोनों ही लंबे पौधे हैं, लेकिन ‘tt’ बौने पौधे हैं। ‘T’ एक अकेला विकल्प ही पौधे को लंबा बनाने के लिए पर्याप्त है, जबकि संकरण बौनेपन के लिए ‘t’ के दोनों विकल्प ‘t’ ही होने चाहिएं। ‘T’ जैसे विकल्प ‘प्रभावी’ लक्षण कहलाते हैं जबकि जो लक्षण (Trait) ‘t’ की तरह स्वनिषेचन व्यवहार करते हैं, ‘अप्रभावी’ कहलाते हैं।

यदि गोल बीज वाले लंबे पौधों का झरींदार बीजों वाले बौने पौधों से संकरण कराया जाए तो F2 पीढ़ी के सभी पौधे लंबे एवं गोल बीज वाले होंगे। इसलिए लंबाई तथा गोल बीज ‘प्रभावी’ लक्षण हैं। परंतु जब F, P RR yy संतति के स्वपरागण से F2 पीढ़ी की संतति प्राप्त होती है। पहले प्रयोग के आधार पर F2 संतति के कुछ पौधे गोल बीज वाले लंबे पौधे होंगे तथा कुछ F1 झुर्रादार बीज वाले बौने पौधे। परंतु F2 की संतति के कुछ पौधे नए संयोजन प्रदर्शित करेंगे। उनमें से कुछ पौधे लंबे पर झुरींदार तथा कुछ पौधे बौने पर | गोल बीज वाले होंगे। इसलिए लंबे/बौने लक्षण तथा गोल/झुरींदार लक्षण अनुपात स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं।

प्रश्न 2.
डार्विन के विकास के सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
चार्ल्स राबर्ट डार्विन (1809-1882) ने निरंतर अनेक वर्ष तक विभिन्न जगहों पर एच० एम० एस० बीगल नामक समुद्री जहाज़ से घूम-घूम कर जीव-जंतुओं का अध्ययन करने के पश्चात् अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘The Origin of Species’ में जैव-विकास के सिद्धांतों की प्रतिपादता की थी जिन्हें डार्विनवाद के नाम से जाना जाता है।

डार्विन ने अपने मतों को निम्नलिखित आधारों पर स्थापित किया था-
(I) संतान उत्पन्न करने की अपार क्षमता (Enormous Fertility)-संसार में सभी प्राणियों के पास बहुत अधिक संतान उत्पन्न करने की क्षमता होती है। उनमें परिवार वृद्धि की भावना भी विद्यमान होती है।

(II) जीवन-संघर्ष (Struggle for Existence) सभी प्राणी उत्पन्न होते ही जीवन के लिए संघर्ष करते हैं। वे जीवित रहने के लिए पानी, हवा, भोजन, प्रकाश, सुरक्षित स्थान, तापमान आदि को प्राप्त करना चाहते हैं। अधिक संख्या में उत्पन्न प्राणियों में हर प्राणी अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए संघर्ष करते हैं। यह संघर्ष तीन प्रकार का होता है-अंतर्जातीय, अंतर-जातीय और वातावरणीय कारकों के बीच। अंतर्जातीय संघर्ष केवल एक ही जाति के प्राणियों के बीच होता है लेकिन अंतर-जातीय संघर्ष विभिन्न जातियों और प्राणियों के बीच होता है। जीवित रहने के लिए संघर्ष हवा, पानी, दबाव, तापमान आदि के बीच भी चलता है। जो प्राणी इनका विपरीत स्थितियों में सामना नहीं कर पाते, वे मर जाते हैं। जीवन-संघर्ष के लिए अनुकूलन की बहुत आवश्यकता होती है। जो अनुकूलन करने में सफल नहीं हो पाते वे कमज़ोर और असमर्थ होने के कारण नष्ट हो जाते हैं।

(III) नई जातियों की उत्पत्ति (Origin of New Species) – संसार में सभी प्राणियों में भिन्नता होती है। कोई भी प्राणी पूर्ण रूप से एक जैसा नहीं है। उनको गुणों-अवगुणों के भेद के कारण ही पहचाना जाता है। उपयोगी और श्रेष्ठ गुणों के कारण प्राणी सहजता से रह सकते हैं। प्राणियों के श्रेष्ठ गुण उनमें स्थायी बन जाते हैं। वे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में चलते हैं। इसी कारण नई जातियों की उत्पत्ति होती है।

(IV) योग्यतम की उत्तर जीविता (Survival of the fittest)-प्राणियों का जीवन संघर्ष निरंतर सारा जीवन चलता रहता है। जो प्राणी वातावरण में रहने के लिए अपने आपको श्रेष्ठ सिद्ध कर लेते हैं, वही रह पाते हैं। जो इस संसार में अपनी रहने योग्य श्रेष्ठता सिद्ध नहीं कर पाते, वे कुछ समय बाद नष्ट हो जाते हैं। वातावरण में वहीं जीवित रह पाता है जो योग्यतम है, इसी को योग्यता की उत्तर जीविता कहते हैं। वातावरण में संघर्ष करते समय प्राणियों के जीवन में कुछ परिवर्तन भी आते हैं।

ये परिवर्तन विभिन्नताएँ कहलाती हैं और वे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के पास पहुंचती हैं। अगली पीढ़ी के प्राणी पिछली पीढ़ी के प्राणियों की अपेक्षा अपने आप को वातावरण के प्रति अधिक अच्छी तरह ढालने की योग्यता रखते हैं। प्रकृति के प्रति अनुकूलन न करना और इन्हें न झेल कर नष्ट हो जाना प्राकृतिक वरण कहलाता है। प्राकृतिक वरण (Natural Selection) जीवन भर चलता रहता है। विभिन्नताओं की प्राप्ति करने से नई जातियाँ विकास करती हैं।

(V) वातावरण के प्रति अनुकूलन (Adaptation to the Environment)-सभी प्राणियों को भिन्न प्रकार के भौतिक वातावरण को झेलना पड़ता है। वे जीवन भर सर्दी-गर्मी, सूखा-बाढ़, भूकंप, तूफान आदि के द्वारा उत्पन्न संकटों का सामना करते हैं। जो प्राणी अपने आप को इनका सामना करने के योग्य बना पाते हैं, वही अपने जीवन संघर्ष में सफल हो पाते हैं। जो प्राणी स्वयं को वातावरण के प्रति अनुकूल नहीं बना पाते वे स्वयं के साथ नष्ट हो जाते हैं।

(VI) विभिन्नताएँ और आनुवंशिकता (Variations and Heredity)-एक जाति और एक ही माता-पिता की संतानों में समानताओं के बावजूद कई तरह के अंतर पाए जाते हैं। कोई भी दो प्राणी पूर्ण रूप से एक जैसे नहीं है। लाभकारी अंतर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
आनुवंशिकी की परिभाषा दीजिएं। जीव विज्ञान की इस शाखा में मेंडल के क्या योगदान हैं ?
उत्तर-
आनुवंशिकी जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत आनुवंशिकता और विभिन्नताओं का अध्ययन किया जाता है। मेंडल ने जीव विज्ञान की इस शाखा आनुवंशिकी को अति महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था इसीलिए उन्हें आनुवंशिकी का जनक माना जाता है। उन्होंने मटर के दानों पर संकरण के तरह-तरह के प्रयोग किए थे और तीन नियमों को प्रतिपादित किया था।
(I) प्रभाविता का नियम (Law of Dominance)-संकरण में भाग लेने वाले पौधों का प्रभावी गुण प्रकट होता है और अप्रभावी गुण छिप जाता है।

(II) पृथक्करण का नियम (Law of Segregation)-युग्मकों की रचना के समय कारकों (genes) के जोड़े के कारक अलग-अलग हो जाते हैं। इन दोनों में से केवल एक युग्मक के पास पहुँचता है। दोनों कारक कभी भी एक साथ युग्मक में नहीं जाते।

(III) अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)-जीवों के गुण के कारक एक-दूसरे को प्रभावित किए बिना अपने आप उन्मुक्त रूप से युग्मकों में जाते हैं और अपने आप को प्रकट करते हैं। उदाहरण के लिए, विसंकर क्रॉस की दूसरी पीढ़ी की संतानों में सभी कारकों के गुण अलग-अलग दिखाई देते हैं पर पहली पीढ़ी में अपने प्रभावी गुण ही प्रकट करते हैं।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
सभी स्पीशीज़ में विभिन्नताओं में अस्तित्व की समान संभावना क्यों नहीं होती ?
उत्तर-
सभी स्पीशीज़ में विभिन्नताओं में अस्तित्व की समान संभावना नहीं होती। प्रकृति के विभिन्न आधारों के कारण जीवों को अलग-अलग लाभ हो सकते हैं। गर्मी को झेलने की क्षमता वाले जीवाणुओं के अधिक गर्मी में बचे ‘ रहने की संभावना अधिक होती है। पर्यावरण उत्तम परिवर्तन (Variants) का जैव विकास प्रक्रम पर प्रभाव डालता

प्रश्न 2.
मानवों में लक्षणों की वंशागति किस बात पर आधारित होती है ?
उत्तर-
मानवों में लक्षणों की वंशागति इस बात पर आधारित होती है कि माता-पिता दोनों अपनी संतान में समान मात्रा में आनुवंशिक पदार्थ को स्थानांतरित करते हैं। संतान का प्रत्येक लक्षण पिता या माता के DNA से प्रभावित होता है।

प्रश्न 3.
F1 संतति और F2 संतति क्या है ?
उत्तर-
प्रथम संतति F1 कहलाती है जिसमें माता-पिता के दो लक्षणों में से एक केवल पैतृक लक्षण दिखाई देता है जिसका अर्थ है कि उन दोनों में से केवल एक पैतृक लक्षण ही दिखाई देता है। स्वपरागण की अवस्था में F2 संतति दोनों के विकल्पी लक्षणों को प्रकट करती है।

प्रश्न 4.
जीन लक्षणों को कैसे नियंत्रित करते हैं ?
उत्तर-
कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण के लिए एक सूचना तंत्र होता है, DNA के जिस भाग में प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचना होती है वह प्रोटीन का जीन कहलाता है। जीवों के लक्षण इसी हॉर्मोन पर निर्भर करते हैं। हॉर्मोन की मात्रा उस प्रक्रम की दक्षता पर निर्भर करती है जिसके द्वारा ये उत्पादित होते हैं। यदि विशिष्ट प्रोटीन दक्षता से कार्य करेगी तो हॉर्मोन पर्याप्त मात्रा में उत्पन्न होगा और यदि प्रोटीन की दक्षता पर कुछ भिन्न प्रभाव पड़ता है तो कम दक्षता के कारण हॉर्मोन कम होगा। जीन ही लक्षणों को प्रभावित और नियंत्रित करते हैं।

प्रश्न 5.
जैव विविधता क्या है ?
उत्तर-
जैव विविधता-जैव विविधता या जीव भिन्नता पृथ्वी पर पाई जाने वाली विविध प्रकार की उन जैवीय प्रजातियों को कहते हैं जो अपने-अपने प्राकृतिक आवास क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इसमें पेड़-पौधे, सूक्ष्म जीव, पशुपक्षी आदि सभी प्राणी सम्मिलित हैं।

प्रश्न 6.
जैव विविधता के विभिन्न स्तर कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-

  • आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity)
  • प्रजाति विविधता (Species Diversity) ।
  • परिस्थितिगत विविधता (Ecosystem Diversity) |

प्रश्न 7.
आनुवंशिक विविधता क्या है ?
उत्तर-
आनुवंशिक विविधता–अलग-अलग जीन की उपस्थिति के कारण उत्पन्न विविधता को आनुवंशिक विविधता कहते हैं। मनुष्यों में यह विविधता मंगोल, नीग्रो आदि में देखी जा सकती है।

प्रश्न 8.
पक्षियों का विकास डायनोसॉर से क्यों माना जाता है ?
उत्तर-
डायनोसॉर सरीसृप थे। उनके विभिन्न जीवाश्मों में अस्थियों के साथ पंखों की छाप भी स्पष्ट रूप से मिलती है। तब शायद वे सब इन पंखों की सहायता से उड़ नहीं पाते होंगे पर बाद में पक्षियों ने पंखों से उड़ना सीख लिया होगा। इसीलिए पक्षियों को डायनोसॉर से संबंधित मान लिया जाता है।

प्रश्न 9.
आनुवंशिकता क्या है ?
उत्तर-
आनुवंशिकता-सभी जीवधारियों में कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जो उन्हें अपने से पहले पीढ़ियों से प्राप्त होते हैं। ये गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाते हैं। एक जीव से दूसरे जीव में पीढ़ी-दर-पीढ़ी लक्षणों का आगे जाना आनुवंशिकता कहलाती है।

प्रश्न 10.
लिंग गुण सूत्र क्या है ?
उत्तर-
लिंग गुण सूत्र-मानवों में कुल 23 जोड़े गुण सूत्र होते हैं जिनमें से अंतिम तेइसवाँ जोड़ा लिंग गुण सूत्र (Sex Chromosome) कहलाता है। इसी के कारण कोई मानव नर या मादा के रूप में जन्म लेता है। नर में XY लिंग गुण सूत्र होते हैं पर मादा में XX लिंग गुण सूत्र होते हैं।

प्रश्न 11.
समजात अंग (Homologous Organs) को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
समजात अंग-जीव-जंतुओं के वे अंग, जिनकी उत्पत्ति और मूल संरचना में समानता होती है पर समय, परिस्थिति और कार्य के कारण उनकी बाहरी रचना में अंतर आ जाता है, उन्हें समजात अंग कहते हैं। उदाहरण-पक्षी के पंख, मेंढक की टाँगें, सील के फ्लीपर, चमगादड़ के पंख, घोड़े की अगली टाँगें और मनुष्य की बाजू की उत्पत्ति और संरचना समान है पर इनके कार्यों में अंतर है। ये इस बात को प्रमाणित करते हैं कि कभी सभी के पूर्वज एक जैसे ही थे। परिस्थितियों और समय ने उनमें परिवर्तन किए हैं।

प्रश्न 12.
समरूप अंग क्या होते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
समरूप अंगों-समरूप अंगों में कार्य की समानता होती है लेकिन उनकी उत्पत्ति और मूल संरचना में अंतर होता है। कीड़े, पक्षी चमगादड़ और चमगादड़ सभी पँखों का प्रयोग उड़ने के लिए करते हैं पर उनकी उत्पत्ति अलग-अलग ढंग से हुई थी।

प्रश्न 13.
समजात अंग और समरूप अंग में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-

समजात अंग समरूप अंग
(i) इन अंगों की मूल रचना और उत्पत्ति समान नहीं होती। (i) इन अंगों की मूल रचना और उत्पत्ति एक एक समान होती है।
(ii) इनके कार्य समान नहीं होते हैं। उदाहरण-I. पक्षियों के पंख और मेंढक
II. मनुष्य की बाजू और घोड़े की अगली टांगें।
(ii) इनके कार्य समान होते हैं। उदाहरण-I. पक्षी और चमगादड़ के पंख। के अग्रपाद।
II. पक्षियों और कीटों के पंख।

प्रश्न 14.
मेंडल के आनुवंशिकता के प्रबलता के नियम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
प्रबलता का नियम-जब पौधों के विपरीत लक्षणों के बीच संकरण कराया जाता है जो उनकी संतति में उन लक्षणों में से एक लक्षण ही प्रभावी रहता जबकि दूसरा विपरीत लक्षण अप्रभावी रहता है। प्रभावी लक्षण संतान में दिखाई देता है जबकि अप्रभावी लक्षण विद्यमान होते हुए भी दिखाई नहीं देता।

मेंडल के द्वारा किए गए मटरों के प्रयोग में पहली पीढ़ी में सभी पौधे शुद्ध लंबे थे परंतु दूसरी पीढ़ी में एक शुद्ध लंबा पौधा, दो संकरे लंबे तथा एक शुद्ध बौना पौधा था।

प्रश्न 15.
मेंडल के मटर के पौधों पर प्रयोग से क्या परिणाम निकले ?
उत्तर–
मेंडल के मटर के पौधों पर किए प्रयोग से निम्नलिखित परिणाम निकले

  • पौधों में लक्षण कुछ इकाइयों द्वारा नियंत्रित होते हैं। उन्हें कारक कहा जाता है। प्रत्येक लक्षण के लिए युग्मक में एक कारक होता है, जैसे लंबाई, फूल का रंग।
  • एक लक्षण को दो कारकों द्वारा ही व्यक्त किया जाता है, जैसे TT या tt |

प्रश्न 16.
युग्मकों की शुद्धता का नियम क्या है ?
उत्तर-
गुणसूत्रों पर जीन हमेशा जोड़े में विद्यमान होती हैं जैसे TT या tt । युग्मक में ये जीन अलग-अलग हो जाते हैं और अलग हुआ एक जीन एक गुण के लिए बिल्कुल शुद्ध होता है। युग्मक संयोग के बाद युग्मनज में एक जीन पिता से और एक जीन माता से (एक ही गुण वाले) समान जीन एकत्रित हो जाते हैं और ये दोनों जीन एक लक्षण के लिए उत्तरदायी होते हैं। इस नियम को युग्मकों की शुद्धता का नियम कहते हैं।

प्रश्न 17.
जीन कहाँ स्थित होते हैं ? इनकी रासायनिक प्रकृति क्या है ?
उत्तर-
जीन-जीन आनुवंशिकता की अंतिम इकाई है जिसके द्वारा पैतृक गुण संतानों में स्थानांतरित होते हैं। यह DNA के खंड होते हैं। जीन गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं। न्यूक्लियोटाइडस का विशिष्ट क्रम इसकी क्रियात्मक विशिष्टता को निर्धारित करता है। जीन को किसी विशेष एंजाइम से काटा जा सकता है और उसे किसी अन्य जीव के जीन के साथ जोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 18.
लिंग गुणसूत्रों और अलिंग गुणसूत्रों में अंतर लिखिए।
उत्तर-

लिंग गुणसूत्र अलिंग गुणसूत्र
(1) ये लिंग निर्धारण से संबंधित होते हैं। (1) ये लिंग निर्धारण से संबंधित नहीं होते।
(2) मनुष्य में केवल दो लिंग गुणसूत्र X और Y होते हैं। (2) मनुष्य में 44 अलिंग गुणसूत्र होते हैं।
(3) मानव नर में XY तथा मानव मादा में XX लिंग गुणसूत्र होते हैं। (3) इन गुण सूत्रों को 1 से 22 तक संख्या प्रदान की गई है।

प्रश्न 19.
विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ की उत्तरजीविता किस प्रकार बढ़ जाती है?
उत्तर-
लाभकारी विभिन्नताएं जीन को वातावरण की अवश्यकताओं के अनुकूल बनाती हैं। जो उसे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाती है। ऐसा होने पर जीन की उस स्पीशीज़ की उत्तरजीविता में वृद्धि होती है।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मानव नर और मादा में कितने जोड़े गुण सूत्र होते हैं ?
उत्तर-
23 जोड़े।

प्रश्न 2.
स्त्रियों में कौन-सा लिंग गुणसूत्र होता है ?
उत्तर-
‘XX’ गुणसूत्र।

प्रश्न 3.
पुरुषों में कौन-सा लिंग गुणसूत्र होता है ?
उत्तर-
‘XY’ गुणसूत्र।

प्रश्न 4.
बच्चे के लिंग का निर्धारण किसके गुणसूत्र पर निर्भर करता है।
उत्तर-
पिता के ‘Y’ गुणसूत्र पर।

प्रश्न 5.
डार्विन ने किस सिद्धांत की परिकल्पना की थी ?
उत्तर-
प्राकृतिक वरण द्वारा जैव विकास।

प्रश्न 6.
जीवाश्म क्या होते हैं ?
उत्तर-
जीवाश्म-जीवों के चट्टानों में परिरक्षित अवशेष जीवाश्म कहलाते हैं।

प्रश्न 7.
आनुवंशिकता किसे कहते हैं ?
उत्तर–
प्राणियों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाले पूर्वजों के लक्षणों और गुणों को आनुवंशिकता कहते हैं।

प्रश्न 8.
विभिन्नता किसे कहते हैं ?
उत्तर-
समान माता-पिता और समान जाति होने पर भी संतानों में रंग-रूप, बुद्धिमता, कद आदि में अंतर पाया जाता है। इसी को विभिन्नता कहते हैं।

प्रश्न 9.
मानव शरीर में लगभग कितनी जीन होती हैं ?
उत्तर-
30000 से 40000 तक।

प्रश्न 10.
जीन कहाँ विद्यमान होती हैं ?
उत्तर-
जीन गुणसूत्रों पर निश्चित स्थान पर विद्यमान होती हैं।

प्रश्न 11.
AIDS का वायरस HIV कैसा होता है ?
उत्तर-
रेट्रो वायरस।

प्रश्न 12.
जीन का क्या कार्य होता है ?
उत्तर-
आनुवंशिक लक्षणों का निर्धारण, नियंत्रण और वहन।

प्रश्न 13.
DNA तथा RNA का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर-
DNA = डी ऑक्सीरिबो न्यूक्लिक अम्ल।
RNA = रिबो न्यूक्लिक अम्ल।

प्रश्न 14.
ऑटोसोम्स किसे कहते हैं ?
उत्तर-
मनुष्य में 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं। लिंग गुणसूत्रों का जोड़ा 23वां होता है। शेष 22 जोड़े ऑटोसोम्स कहलाते हैं।

प्रश्न 15.
समजात अंग क्या होते हैं ?
उत्तर–
समजात अंग –वे अंग जिनकी उत्पत्ति और मूल रचना समान हो पर उनके कार्य भिन्न हों।

प्रश्न 16.
समवृत्ति अंग किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वे अंग जिनके कार्यों में समानता है पर उनकी उत्पत्ति और मूल रचना भिन्न हो।

प्रश्न 17.
मानव शरीर में कौन-कौन से अवशेषी अंग हैं ?
उत्तर–
कर्ण पल्लव की पेशियाँ, कृमि रूप परिशेषिका, पुच्छ कशेरुक, निमेषक पटल।

प्रश्न 18.
बायोजेनेटिक नियम लिखिए।
उत्तर-
जीव जंतु भ्रूण-विकास के समय अपने पूर्वजों के जातीय विकास की उत्तरोतर अवस्थाओं को प्रकट करता है। इस नियम को ‘व्यक्ति वृत्त में जातिवृत्त की पुनरावृत्ति’ (Ontogeny Repeats Phylogeny) भी कहते हैं।

प्रश्न 19.
आनुवंशिक इंजीनियरी में कौन-सी क्रिया की जाती है ? ।
उत्तर-
DNA या जीन के एक टुकड़े को काटकर किसी दूसरे जीवधारी की DNA के साथ विशिष्ट एंजाइम की सहायता से जोड़ने की क्रिया आनुवंशिक इंजीनियरी में की जाती है।

प्रश्न 20. ‘
फॉसिल डेटिंग’ किसे कहते हैं ?
उत्तर-जिसमें जीवाश्म में पाए जाने वाले किसी एक तत्त्व के विभिन्न समस्थानिकों के अनुपात के आधार पर जीवाश्म का समय निर्धारित किया जाता है उसे फॉसिल डेटिंग कहते हैं।

प्रश्न 21.
प्रभावी लक्षण क्या होते हैं ?
उत्तर-
प्रभावी लक्षण-वे विषय जो समयुग्म तथा विषम युग्मजी दोनों अवस्थाओं में प्रकट कर सकते हैं, प्रभावी लक्षण कहलाते हैं।

प्रश्न 22.
चित्र में दर्शाए गए अंग किस प्रकार के अंगों को दर्शाते हैं ?

उत्तर-
समजात अंग।

प्रश्न 23.
नीचे दिए गये चित्र में जीव-विकास के दृष्टिकोण से चित्र में दिखाए अंग किस प्रकार के अंग हैं ?

उत्तर-
दोनों के कार्य करने में समानता है परन्तु इनकी उत्पत्ति तथा मूल रचना में अंतर होता है, इसलिए इन्हें समरूप अंग (Analogous organ) कहते हैं।

प्रश्न 24.
नीचे दर्शाए गए चित्र में (क) और (ख) का लिंग लिखें।

उत्तर-
(क) मादा (ख) नर।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न | (Objective Type Questions)

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मेंडल के एक प्रयोग में लंबे मटर के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधों जिनके सफ़ेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के सभी पौधों में पुष्प बैंगनी रंग के थे। परंतु उनमें से लगभग आधे बौने थे। इससे कहा जा सकता है, लंबे जनक पौधों की आनुवंशिक रचना निम्न थी –
(a) TTww
(b) TTww
(c) Tt ww
(d) Tt Ww.
उत्तर-
(c) TtWW.

प्रश्न 2.
समजात अंगों के उदाहरण हैं
(a) हमारा हाथ तथा कुत्ते के अग्रपाद
(b) हमारे दाँत तथा हाथी के दाँत
(c) आलू एवं घास के उपरिभूस्तारी
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
विकासीय दृष्टिकोण से हमारी किससे अधिक समानता है
(a) चीन के विद्यार्थी
(b) चिंपैंजी
(c) मकड़ी
(d) जीवाणु।
उत्तर-
(a) चीन के विद्यार्थी।

प्रश्न 4.
‘AB’ रक्त वर्ग तथा ‘0’ रक्त वर्ग वाले माता-पिता की सन्तति हो सकती है
(a) ‘A’ रक्त वर्ग की
(b) ‘0’ रक्त वर्ग की
(c) ‘AB’ रक्त वर्ग की।
(d) ‘A’ या ‘B’ रक्त वर्ग की।
उत्तर-
(d) ‘A’ या ‘B’ रक्त वर्ग की।

प्रश्न 5.
अवशेषी अंग का उदाहरण नहीं है
(a) कीवी के पंख
(b) मनुष्य के रदनक दांत
(c) व्हेल का पाद
(d) सर्प की श्रेणी मेखला।
उत्तर-
(c) व्हेल का पाद।

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