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PSEB Solutions for Class 10 Social Science Economics Chapter 3 भारत में कृषि विकास

PSEB Solutions for Class 10 Social Science Economics Chapter 3 भारत में कृषि विकास

PSEB 10th Class SST Solutions Economics Chapter 3 भारत में कृषि विकास

भारत में कृषि विकास PSEB 10th Class Economics

  1. कृषि-एक खेत में फसलों व पशुओं के उत्पादन सम्बन्धी कला या विज्ञान को कृषि कहते हैं।
  2. कृषि का महत्त्व-राष्ट्रीय आय में योगदान, खाद्य पूर्ति का साधन, रोज़गार का माध्यम, उद्योग का आधार, जीवन का साधन, कृषि व विदेशी व्यापार, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार, यातायात के लिए आधार, सरकारी आय तथा पूंजी निर्माण आदि में कृषि महत्त्वपूर्ण है।
  3. कृषि की समस्याएं-मानवीय समस्याएं जैसे भूमि पर जनसंख्या का दबाव, सामाजिक वातावरण, संस्थागत समस्याएं जैसे जोतों का छोटा आकार, काश्तकारी व्यवस्था। तकनीकी समस्याएं जैसे सिंचाई की कम सुविधाएं, पुराने कृषि उपकरण, पुरानी उत्पादन तकनीकें, अच्छे बीजों का अभाव, खाद की समस्या, त्रुटिपूर्ण कृषि बाज़ार व्यवस्था, फसलों की बीमारियां व कीड़े-मकौड़े, साख सुविधाओं का अभाव तथा कमज़ोर पशु आदि कृषि की समस्याएं हैं।
  4. हरित क्रांति-हरित क्रांति से अभिप्राय कृषि उत्पादन विशेष रूप से गेहूँ तथा चावल के उत्पादन में होने वाली उस भारी वृद्धि से है जो कृषि में अधिक उपज वाले बीजों के प्रयोग की नई तकनीक अपनाने से सम्भव हुई है।
  5. हरित क्रांति की सफलता के मुख्य तत्त्व-अधिक उपज वाले बीज, रसायन खादें, सिंचाई, आधुनिक कृषि यंत्रीकरण, साख-सुविधाएं, कृषि की नई तकनीक, पौध संरक्षण, कीमत सहयोग, ग्रामीण विद्युतीकरण, भू-संरक्षण, बाज़ार सुविधाएं आदि हरित क्रांति की सफलता के मुख्य तत्त्व हैं।
  6. भूमि सुधार-भूमि सुधार से अभिप्राय मनुष्य तथा भूमि में पाए जाने वाले संबंध के योजनात्मक तथा संस्थागत पुनर्गठन से है।
  7. कृषि नीति-कृषि नीति से अभिप्राय संस्थागत सुधारों को अपनाने से है जिससे कृषि का सर्वांगीण विकास हो सके।

PSEB 10th Class Social Science Guide भारत में कृषि विकास Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

I. उत्तर एक शब्द अथवा एक लाइन में

प्रश्न 1.
कृषि क्या है?
उत्तर-
फसलों को उगाने की कला व विज्ञान है।

प्रश्न 2.
भारत का कोई एक भूमि पुधार बताएं।
उत्तर-
काश्तकारी प्रथा में सुधार।

प्रश्न 3.
दालों का अधिकतम उत्पादक देश कौन-सा है?
उत्तर-
भारत।

प्रश्न 4.
व्यावसायिक कृषि का एक उपकरण बताएं।
उत्तर-
आधुनिक तकनीक।

प्रश्न 5.
भारतीय कृषि विकास के लिए एक उपाय बताएं।
उत्तर-
सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि।

प्रश्न 6.
भारतीय कृषि के पिछड़ेपन का कारण बताएं।
उत्तर-
खेतों का छोटा आकार।

प्रश्न 7.
हरित क्रान्ति का श्रेय किसे दिया जाता है?
उत्तर-
डॉ० नॉरमेन वेरलोग तथा डॉ० एम० एन० स्वामीनाथन।

प्रश्न 8.
भारत में हरित क्रान्ति के लिए उत्तरदायी एक तत्त्व बताएं।
उत्तर-
आधुनिक कृषि यन्त्रों का प्रयोग।

प्रश्न 9.
हरित क्रान्ति का एक लाभ बताएं।
उत्तर-
खाद्यान्नों के उत्पादन में वृद्धि।

प्रश्न 10.
हरित क्रान्ति का एक दोष बताएं।
उत्तर-
कुछ फसलों तक सीमित।

प्रश्न 11.
हरित क्रान्ति कब आई थी?
उत्तर-
1967-68 में।

प्रश्न 12.
भारत में सिंचाई का मुख्य साधन क्या है?
उत्तर-
भूमिगत जल।

प्रश्न 13.
भारतीय राष्ट्रीय आय में कृषि का मुख्य अंश कितना है?
उत्तर-
17.4 प्रतिशत।

प्रश्न 14.
2007-08 में जी० डी० पी० में कृषि का योगदान कितना था?
उत्तर-
15.3 प्रतिशत।

प्रश्न 15.
हरित क्रान्ति क्या है?
उत्तर-
एक कृषि नीति जिसका उपयोग फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 16.
भारत की कितने प्रतिशत जनसंख्या अब जीविका के लिए कृषि पर निर्भर है?
उत्तर-
लगभग 49 प्रतिशत।

प्रश्न 17.
भारत में हरित क्रान्ति का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
किसानों की दशा में सुधार।

प्रश्न 18.
औद्योगिक विकास में कृषि के योगदान को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उद्योगों को कच्चा माल कृषि क्षेत्र से प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त कृषि बहुत-सी औद्योगिक वस्तुओं के लिए बाजार का स्रोत है।

प्रश्न 19.
भूमि पर जनसंख्या के बढ़ते दबाव से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
भूमि पर जनसंख्या के बढ़ते दबाव से तात्पर्य है कि प्रति वर्ष आने वाली नई श्रम शक्ति को रोजगार प्राप्त नहीं हो पाता है जिससे वे कृषि पर निर्भर हो जाते हैं।

प्रश्न 20.
आधुनिक कृषि तकनीक से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
आधुनिक कृषि तकनीक से अभिप्राय रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशक दवाइयों, उत्तम बीजों व समय पर सिंचाई के उपयोग से सम्बन्धित है।

प्रश्न 21.
भारत में कृषि के पिछड़ेपन के दो कारण लिखिए।
उत्तर-

  1. सिंचाई सुविधाओं की कमी
  2. अच्छे बीजों और रासायनिक उर्वरकों की कमी।

प्रश्न 22.
भारतीय कृषि के पिछड़ेपन को दूर करने के दो उपाय बताइए।
उत्तर-

  1. वैज्ञानिक कृषि का प्रसार ।
  2. भूमि सुधार।

प्रश्न 23.
चकबन्दी से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
चकबन्दी वह क्रिया है जिसके द्वारा किसानों को इस बात के लिए मनाया जाता है कि वे अपने इधर-उधर बिखरे हुए खेतों के बदले में उसी किस्म और कुल उतने ही आकार के एक या दो खेत ले लें।

प्रश्न 24.
भारत में किए गए तीन भूमि सुधारों के नाम लिखें।
उत्तर-

  1. मध्यस्थों का उन्मूलन
  2. भूमि की चकबन्दी
  3. भूमि की अधिकतम हदबन्दी।

प्रश्न 25.
जोतों की उच्चतम सीमा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
जोतों की उच्चतम सीमा से अभिप्राय यह है कि भूमि-क्षेत्र की एक ऐसी सीमा निश्चित करना जिससे अधिक भूमि पर किसी व्यक्ति अथवा परिवार का अधिकार न रहे।

प्रश्न 26.
कृषि क्षेत्र को पर्याप्त साख-सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से भारत सरकार की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
कृषि के विकास के लिए किसानों को कम ब्याज पर उचित मात्रा में कर्ज दिलाने के लिए सहकारी साख समितियों का विकास किया गया है।

प्रश्न 27.
भारत में हरित क्रान्ति लाने का श्रेय किन व्यक्तियों को जाता है?
उत्तर-
भारत में हरित क्रान्ति लाने का श्रेय डॉ० नोरमान वरलोग तथा डॉ० एम० एन० स्वामीनाथन को जाता है।

प्रश्न 28.
भारत में हरित क्रान्ति के लिए उत्तरदायी किन्हीं दो कारकों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  1. उन्नत बीजों का प्रयोग
  2. रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग।

प्रश्न 29.
हरित क्रान्ति के कोई दो लाभ बताइए।
उत्तर-

  1. खाद्यान्न के उत्पादन में वृद्धि
  2. किसानों के जीवन स्तर में वृद्धि।

प्रश्न 30.
हरित क्रान्ति के कोई दो दोष बताइए।
उत्तर-

  1. क्षेत्रीय असमानताओं में वृद्धि
  2. केवल बड़े कृषकों को लाभ।

प्रश्न 31.
हरित क्रान्ति किसे कहते हैं?
उत्तर-
हरित क्रान्ति एक कृषि नीति है जिसका प्रयोग फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 32.
HYV का विस्तार रूप बताएँ।
उत्तर-
High Yielding Variety Seeds.

प्रश्न 33.
कौन-सा देश दालों का सबसे अधिक उत्पादक है?
उत्तर-
भारत।

प्रश्न 34.
व्यावसायिक खेती के आगतों के नाम बताएं।
उत्तर-
आधुनिक तकनीकी, HYV बीज।

प्रश्न 35.
कृषि में निम्न भूमि उत्पादकता क्यों है?
उत्तर-
क्योंकि इसमें उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया जाता है।

प्रश्न 36.
पुरातन कृषि की निर्भरता के दो तत्त्व बताएं।
उत्तर-
मानसून और प्राकृतिक उत्पादकता।

प्रश्न 37.
भारत में कितने प्रतिशत संख्या अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर है?
उत्तर-
लगभग 48.9 प्रतिशत।

प्रश्न 38.
तीन क्रियाओं के नाम बताइए जो कृषि सेवक से सम्बन्धित हैं।
उत्तर-

  1. पशुपालन,
  2. वानिकी,
  3. मत्स्यपालन।

प्रश्न 39.
वर्ष 2011-12 में कृषि का GDP में कितना हिस्सा था?
उत्तर-
लगभग 13.9 प्रतिशत।

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. फसलों को उगाने की कला व विज्ञान ……….. है। (कृषि/विनिर्माण)
  2. भारत में हरित क्रान्ति का उद्भव ………… में हुआ। (1948-49/1966-67)
  3. वर्ष 1950-51 में कृषि का भारत की राष्ट्रीय आय में योगदान ………… प्रतिशत था। (48/59)
  4. ……….. दालों का उत्पादक सबसे बड़ा देश है। (पाकिस्तान/भारत)
  5. ………… भारत में सिंचाई का मुख्य साधन है। (भूमिगत जल/ट्यूबवैल)
  6. भारत में हरित क्रान्ति का श्रेय ……….. को दिया जाता है। (जवाहर लाल नेहरू/डॉ० नारमन वरलोग)
  7. वर्तमान में कृषि भारत की राष्ट्रीय आय में ……….. प्रतिशत का योगदान दे रही है। (14.6 / 15.3)

उत्तर-

  1. कृषि,
  2. 1966-67,
  3. 59,
  4. भारत,
  5. भूमिगत जल,
  6. डॉ० नारमन वरलोग,
  7. 15.3.

III. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत का एक भूमि सुधार बताएं।
(A) चकबन्दी
(B) मध्यस्थों का उन्मूलन
(C) भूमि की उच्चतम सीमा
(D) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(D) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2.
वर्ष 2007-08 के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का क्या योगदान था?
(A) 14.6
(B) 15.9
(C) 17.1
(D) इनमें कोई नहीं।
उत्तर-
(A) 14.6

प्रश्न 3.
कौन-सा देश दालों का अधिकतम उत्पादक देश है?
(A) भारत
(B) पाकिस्तान
(C) श्रीलंका
(D) नेपाल।
उत्तर-
(A) भारत

प्रश्न 4.
हरित क्रान्ति का उद्भव कब हुआ?
(A) 1966-67
(B) 1969-70
(C) 1985-86
(D) 1999-2000
उत्तर-
(A) 1966-67

प्रश्न 5.
वर्तमान में कषि का भारत की राष्ट्रीय आय में क्या योगदान है?
(A) 12.6
(B) 15.3
(C) 14.2
(D) 15.8.
उत्तर-
(B) 15.3

प्रश्न 6.
HYV का अर्थ है
(A) Haryana Youth Variety
(B) Huge Yeild Variety
(C) High Yeilding Variety
(D) इनमें कोई नहीं।
उत्तर-
(C) High Yeilding Variety

छोटे उत्तर वाले प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
“कृषि भारतीय अर्थ-व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है।” इस कथन का स्पष्टीकरण कीजिए।
उत्तर-
कृषि का भारतीय अर्थ-व्यवस्था में एक केन्द्रीय स्थान हैं। कृषि भारतीय अर्थ-व्यवस्था में रोजगार की दृष्टि से सबसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। इससे राष्ट्रीय आय में 15.3% की प्राप्ति होती है। कृषि क्षेत्र में कार्यशील जनसंख्या का 46.2% भाग प्रत्यक्ष रूप से लगा हुआ है। इसके अतिरिक्त बहुत-से व्यक्ति कृषि पर निर्भर व्यवसायों में कार्य करके जीविका प्राप्त करते हैं। यह औद्योगिक विकास में भी सहायक है। कृषि जनसंख्या की भोजन आवश्यकताओं को पूरा करती है। यह व्यापार, यातायात व अन्य सेवाओं के विकास में भी सहायक है। वास्तव में, हमारी अर्थ-व्यवस्था की सम्पन्नता कृषि की सम्पन्नता पर निर्भर करती है। अत: यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि कृषि भारतीय अर्थ-व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है।

प्रश्न 2.
भारत में निम्न कृषि उत्पादकता के लिए उत्तरदायी किन्हीं तीन प्रमुख कारकों की व्याख्या करें।
उत्तर-

  1. भूमि पर जनसंख्या के दबाव में वृद्धि-भूमि पर जनसंख्या दबाव में वृद्धि के फलस्वरूप प्रति व्यक्ति भू-उपलब्धता में कमी हुई है, जिससे कृषि में आधुनिक तरीकों को अपनाने में कठिनाई आती है।
  2. कृषकों का अशिक्षित होना-भारत में अधिकांश कृषक अशिक्षित हैं। अत: उन्हें कृषि के उन्नत तरीके सिखाने में समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
  3. साख, विपणन, भण्डारण आदि सेवाओं की कमी-इन सेवाओं की कमी के कारण किसानों को बाध्य होकर अपनी फसल को कम कीमत पर बेचना पड़ता है।

प्रश्न 3.
“कृषि और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं न कि प्रतिद्वन्द्वी।” इस कथन की विवेचना कीजिए।
उत्तर-
कृषि और उद्योग एक-दूसरे के प्रतिद्वन्द्वी नहीं बल्कि पूरक हैं । कृषि द्वारा उद्योगों की आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती है। उद्योग श्रमिकों की पूर्ति करते हैं। कई प्रकार के अनेक उद्योगों को कच्चे माल की पूर्ति कृषि द्वारा ही की जाती है, जैसे-कच्ची कपास, जूट, तिलहन, गन्ना ऐसे ही कृषि उत्पाद हैं जो उद्योगों को कच्चे माल के रूप में दिए जाते हैं। दूसरी ओर भारतीय कृषि हमारे औद्योगिक उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण खरीददार है, कृषि के लिए कृषि उपकरण जैसे-ट्रैक्टर, कम्बाइन, ड्रिल, हार्वेस्टर इत्यादि उद्योगों से प्राप्त होते हैं। कृषि को डीज़ल, बिजली, पेट्रोल उद्योगों से ही तो प्राप्त होते हैं। अतः हम देखते हैं कि कृषि तथा उद्योग एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं।

प्रश्न 4.
हरित क्रान्ति पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
हरित क्रान्ति का अभिप्राय कृषि उत्पादन में उस तेज़ वृद्धि से है जो थोड़े समय में उन्नत किस्म के बीजों तथा रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के फलस्वरूप हुई है। हरित क्रान्ति योजना को कृषि की नई नीति भी कहा जाता है। इसे 1966 में शुरू किया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनाज का उत्पादन बढ़ाकर आत्म-निर्भर होना है। भारत जैसी घनी जनसंख्या और समय-समय पर अनाज की कमी वाले देश में इस योजना का बहुत ही अधिक महत्त्व है।
इस योजना के अधीन विभिन्न राज्यों में कुल बोए जाने वाले क्षेत्र के चुने हुए भागों में गेहूँ तथा चावल की नई , किस्में तथा देश में विकसित अधिक उपज देने वाली मक्का, ज्वार, बाजरा की किस्मों का प्रयोग किया गया है। इसके साथ ही बहु-फसली कार्यक्रम, सिंचाई की व्यवस्था व पानी का ठीक प्रबन्ध तथा सूखे क्षेत्रों का योजनाबद्ध विकास किया गया जिससे अनेक फसलों का उत्पादन बढ़ा।
यह क्रान्ति पंजाब और हरियाणा में आश्चर्यजनक रूप से सफल हुई।

प्रश्न 5.
भारत में जोतों की चकबन्दी के लाभ बताइए।
उत्तर-
भारत में चकबन्दी के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं

  1. चकबन्दी के पश्चात् वैज्ञानिक ढंग से खेती की जा सकती है।
  2. एक खेत से दूसरे खेत में जाने से जो समय नष्ट होता है वह बच जाता है।
  3. किसान को अपनी भूमि की उन्नति के लिए कुछ रुपया व्यय करने का साहस हो जाता है।
  4. चकबन्दी के कारण खेती की मुंडेर बनाने के लिए भूमि बेकार नहीं करनी पड़ती है।
  5. सिंचाई अच्छी प्रकार से की जाती है।
  6. नई प्रकार की खेती करने से व्यय कम होता है और आय बढ़ जाती है।
  7. गांव में मुकद्दमेबाज़ी कम हो जाती है।
  8. चकबन्दी के बाद जो फालतू भूमि निकलती है, उसमें बगीचे, पंचायत, घर, सड़कें, खेल के मैदान बनाए जा सकते हैं।

संक्षेप में चकबन्दी के द्वारा विखण्डन की समस्या सुलझ जाती है। खेतों का आकार बड़ा हो जाता है। इससे कृषि उपज बढ़ाने में बहुत अधिक सहायता मिलती है।

प्रश्न 6.
हरित क्रान्ति को सफल बनाने के लिए सुझाव दें।
उत्तर-

  1. सहकारी साख समितियों को सुदृढ़ बनाना चाहिए तथा कृषकों को साख उत्पादन क्षमता के आधार पर प्रदान करनी चाहिएं।
  2. सेवा सहकारिताओं द्वारा उर्वरक, दवाइयां, उन्नत बीज, सुधरे हुए कृषि यन्त्र तथा अन्य उत्पादन की आवश्यकताएं उपलब्ध करानी चाहिएं। साख कृषकों को सरलता से प्राप्त होनी चाहिए।
  3. चावल, गेहूं और मोटे अनाजों के लिए प्रेरणादायक मूल्य दो वर्ष पूर्व घोषित किए जाने चाहिएं।
  4. कृषि उपज के विपणन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
  5. प्रत्येक गांव को सघन कृषि के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए तथा उनकी शैक्षणिक, तकनीकी और फार्म प्रबन्ध से सम्बन्धित सहायता करनी चाहिए।

प्रश्न 7.
सिंचाई किसे कहते हैं? यह आवश्यक क्यों है?
उत्तर-
सिंचाई से अभिप्राय प्रायः मानवकृत स्रोतों के उपयोग से है, जिससे भूमि को जल प्रदान किया जाता है। सिंचाई के साधनों का कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान है। कृषि की नई नीति के अनुसार खाद, उन्नत बीजों का प्रयोग तभी सम्भव हो सकता है जब सिंचाई की व्यवस्था हो। भारत में अभी तक केवल 35% कृषि क्षेत्रफल पर सिंचाई की व्यवस्था है। इसे बढ़ाने के लिए प्रत्येक योजना में विशेष रूप से प्रयत्न किया गया है। सिंचाई के फलस्वरूप देश में बहुफसली खेती सम्भव होगी।

प्रश्न 8.
भारत में सिंचाई के प्रमुख स्रोत लिखें।
उत्तर-
सिंचाई के स्रोत-सिंचाई के लिए जल दो मुख्य साधनों से प्राप्त होता है —

  1. भूमि के ऊपर का जलयह जल नदियों, नहरों, तालाबों, झीलों आदि से प्राप्त होता है।
  2. भूमिगत जल-यह जल भूमि के अन्दर से कुएं या ट्यूबवैल आदि खोद कर प्राप्त होता है। अतएव कुएं, तालाब, नहरें आदि सिंचाई के साधन कहलाते हैं। भारत में सिंचाई के साधनों को तीन भागों में बांटा गया है —
    1. बड़ी सिंचाई योजनाएं-बड़ी योजनाएं उन योजनाओं को कहा जाता है जिनके द्वारा 10 हज़ार हैक्टेयर से अधिक कृषि योग्य व्यापक क्षेत्र में सिंचाई की जाती है।
    2. मध्यम सिंचाई योजनाएं-मध्यम योजनाएं उन योजनाओं को कहा जाता है जिनके द्वारा 2 हज़ार से 10 हज़ार हैक्टेयर तक भूमि पर सिंचाई की जाती है।
    3. लघु सिंचाई योजनाएं-अब लघु योजनाएं उन योजनाओं को कहा जाता है जिनके द्वारा 2 हज़ार हैक्टेयर से कम भूमि पर सिंचाई की जाती है।

प्रश्न 9.
क्या हम उत्पादन को अधिकतम करने में सफल हुए हैं विशेषकर खाद्यान्न के उत्पादन को?
उत्तर-
कृषि के विकास में योजनाओं का योगदान दो प्रकार का है, एक तो कृषि में भूमि सुधार किए गए हैं। इन भूमि सुधारों ने उन्नत खेती के लिए वातावरण तैयार किया है। दूसरे 1966 से कृषि के तकनीकी विकास पर जोर दिया गया है। इसके फलस्वरूप हरित क्रान्ति हो चुकी है। योजनाओं की अवधि में खाद्यान्न का उत्पादन तिगुना बढ़ा है। 1951-52 में अनाज का उत्पादन 550 लाख टन हुआ था जबकि 1995-96 में यह खाद्यान्न का उत्पादन बढ़कर 1851 लाख टन हो गया और 2017-18 में यह उत्पादन बढ़कर 2775 लाख टन हो गया। अतः हम कह सकते हैं कि हम उत्पादन को बढ़ाने में काफ़ी हद तक सफल हुए हैं।

प्रश्न 10.
हरित क्रान्ति के बाद भी 1990 तक हमारी 65 प्रतिशत जनसंख्या कृषि क्षेत्र में ही क्यों लगी रही?
उत्तर-
हरित क्रान्ति के बाद भी 1990 तक हमारी 65 प्रतिशत जनसंख्या कृषि क्षेत्र में ही इसलिए लगी रही क्योंकि उद्योग क्षेत्र और सेवा क्षेत्र, कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की अत्यधिक मात्रा को नहीं खपा सके। बहुत से अर्थशास्त्री इसे 1950-1990 के दौरान अपनाई गई नीतियों की असफलता मानते हैं।

प्रश्न 11.
विक्रय अधिशेष क्या है?
उत्तर-
एक देश में किसान अगर अपने उत्पादन को बाज़ार में बेचने के स्थान पर स्वयं ही उपभोग कर लेता है तो उसका अर्थव्यवस्था पर कोई फर्क नहीं पड़ता है और अगर किसान पर्याप्त मात्रा में अपना उत्पादन बाजार में बेच देता है तो अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है। किसानों द्वारा उत्पादन का बाज़ार में बेचा गया अंश ही ‘विक्रय अधिशेष’ कहलाता है।

प्रश्न 12.
कृषि क्षेत्रक में लागू किए गए भूमि सुधारों की आवश्यकता और उनके प्रकारों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय देश की भू-धारण पद्धति में ज़मींदार-जागीरदार आदि का स्वामित्व था। यह खेतों में बिना कोई कार्य किए केवल लगान वसूलते थे। भारतीय कृषि क्षेत्र की निम्न उत्पादकता के कारण भारत को यू० एस० ए० से अनाज आयात करना पड़ता था। कृषि में समानता लाने के लिए भू-सुधारों की आवश्यकता हुई जिसका मुख्य उद्देश्य जोतों के स्वामित्व में परिवर्तन करना था।
भूमि सुधारों के प्रकार —

  1. ज़मींदारी उन्मूलन
  2. काश्तकारी खेती
  3. भूमि की उच्चतम सीमा निर्धारण
  4. चकबंदी इत्यादि।

प्रश्न 13.
हरित क्रान्ति क्या है ? इसे क्यों लागू किया गया और इससे किसानों को कैसे लाभ पहुँचा? संक्षेप में व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
हरित क्रान्ति-भारत में यन्त्रीकरण के फलस्वरूप सन् 1967-68 में अनाज के उत्पादन में 1966-67 की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत वृद्धि हुई। किसी एक वर्ष में अनाज के उत्पादन में इतनी वृद्धि किसी क्रान्ति से कम नहीं थी। इसलिए अर्थशास्त्रियों ने इसे हरित क्रान्ति का नाम दिया।
कारण-इसे लागू करने का मुख्य कारण कृषि क्षेत्र में अच्छे किस्म के बीज, रासायनिक खाद, आधुनिक यन्त्रों का प्रयोग करने कृषि उत्पादन को बढ़ाना था ताकि देश को खाद्यान्न पदार्थों के लिए विदेशों के आयात पर निर्भर न रहना पड़े।
लाभ-

  1. इससे उत्पादन में भारी वृद्धि हुई और किसानों का जीवन स्तर ऊँचा उठा।
  2. किसानों को आत्मनिर्भरता प्राप्त हुई।
  3. हरित क्रान्ति के कारण सरकार, पर्याप्त खाद्यान्न प्राप्त कर सुरक्षित स्टॉक बन सकी।
  4. इसमें किताबों को अच्छे किस्म के बीज, खाद आदि का प्रयोग करने की प्रेरणा दी गई।

प्रश्न 14.
भूमि की उच्चतम सीमा क्या है?
उत्तर-
भूमि की उच्चतम सीमा (Ceiling on Land Holding)-भूमि की उच्चतम सीमा का अर्थ है, “एक व्यक्ति या परिवार अधिक-से-अधिक कितनी खेती योग्य भूमि का स्वामी हो सकता है। उच्चतम सीमा से अधिक भूमि भू-स्वामियों से ले ली जाएगी। उन्हें इसके बदले मुआवजा दिया जाएगा।” इस प्रकार जो भूमि ली जाएगी उसे छोटे किसानों, काश्तकारों या भूमिहीन कृषि मजदूरों में बांट दिया जाएगा। भूमि की उच्चतम सीमा का उद्देश्य भूमि के समान तथा उचित प्रयोग को प्रोत्साहन देना है।

SST Guide for Class 10 PSEB भारत में कृषि विकास Textbook Questions and Answers

I. अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

इन प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दो

प्रश्न 1.
“भारत में कृषि रोजगार का मुख्य साधन है।” इस पर एक नोट लिखिए।
उत्तर-
हमारी अर्थ-व्यवस्था में कृषि रोज़गार का मुख्य स्रोत है। 2014-15 में कार्यशील जनसंख्या का 46.2% भाग कृषि कार्यों में लगा हुआ है।

प्रश्न 2.
भारत के मुख्य भूमि सुधार कौन-से हैं ? कोई एक लिखो।
उत्तर-

  1. ज़मींदारी प्रथा को समाप्त कन्ना।
  2. काश्तकारी प्रथा में सुधार
  3. भूमि की जोतों पर उच्चतम सीमा का निर्धारण
  4. भूमि की पूरे देश में चकबंदी की गई है।
  5. सहकारी खेती
  6. भूदान यज्ञ का आरम्भ।

प्रश्न 3.
हरित क्रान्ति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
हरित क्रान्ति से आशय कृषि उत्पादन विशेष रूप से गेहूँ तथा चावल के उत्पादन में होने वाली उस भारी वृद्धि से है जो कृषि में अधिक उपज वाले 4 जों के प्रयोग की नई तकनीक अपनाने के कारण सम्भव हुई।

प्रश्न 4.
हरित क्रान्ति भारत की खाद्य समस्या के समाधान में किस प्रकार सहायक हुई है?
उत्तर-
हरित क्रान्ति के कारण 1967-68 और उसके बाद के वर्षों में फसलों के उत्पादन में बड़ी तीव्र गति से वृद्धि हुई। वर्ष 1967-68 में, जिसे हरित क्रान्ति का वर्ष माना जाता है, अनाज का उत्पादन बढ़कर 950 लाख टन हो गया था। 2017-18 में अनाज का उत्पादन 2775 लाख टन था।

II. लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

इन प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दें

प्रश्न 1.
भारतीय अर्थ-व्यवस्था में कृषि के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
भारतीय अर्थ-व्यवस्था के लिए कृषि का महत्त्व निम्नलिखित प्रकार है —

  1. आजीविका का प्रमुख स्त्रोत — इस व्यवसाय में भारत की कुल जनसंख्या का 46.2% भाग प्रत्यक्ष रूप से संलग्न है। अतः कृषि भारतीयों की आजीविका का प्रमुख साधन है।
  2. राष्ट्रीय आय में कृषि का योगदान — कृषि राष्ट्रीय आय में एक बड़ा भाग प्रदान करती है। राष्ट्रीय आय का लगभग 15.3% भाग कृषि से ही प्राप्त होता है।
  3. रोज़गार का साधन — भारतीय कृषि भारत की श्रम संख्या के सर्वाधिक भाग को रोज़गार प्रदान करती है और करती रहेगी।
  4. उद्योगों का योगदान — भारत के अनेक उद्योग कच्चे माल के लिए कृषि पर ही आधारित हैं, जैसे-सूती वस्त्र, जूट, चीनी, तिलहन, हथकरघा, वनस्पति घी इत्यादि सभी उद्योग कृषि पर ही तो आधारित हैं।
  5. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में योगदान — भारत अपने कुल निर्यात का प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से 18% भाग कृषि उपजों से बने पदार्थों के रूप में निर्यात करता है।

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