PSEB Solutions for Class 9 Science Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं
PSEB Solutions for Class 9 Science Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं
PSEB 9th Class Science Solutions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं
→ किसी शुद्ध पदार्थ में एक ही प्रकार के कण होते हैं।
→ मिश्रण एक या एक से अधिक शुद्ध तत्वों या यौगिकों के मिलने से बनता है।
→ किसी तत्व को दूसरे पदार्थ से भौतिक प्रक्रम से पृथक् नहीं किया जा सकता।
→ पदार्थ का स्रोत कोई भी हो उसके अभिलाक्षणिक गुण एक समान होते हैं।
→ मिश्रण अनेक प्रकार के होते हैं। समांगी मिश्रण पृथक्-पृथक् संघटन रख सकते हैं। जिन मिश्रणों के अंश भौतिक दृष्टि से पृथक होते हैं उन्हें विषमांगी मिश्रण कहते हैं।
→ विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण है।
→ मिश्र धातु, ठोस विलयन है जो वायु गैसीय विलयन है।
→ मिश्र धातुएं धातुओं के समांगी मिश्रण हैं जिन्हें भौतिक क्रियाओं से अवयवों में पृथक् नहीं किया जा सकता।
→ विलयन को विलायक और विलेय में बांटा जाता है।
→ विलयन का एक घटक जो दूसरे घटक को विलयन में मिलाता है उसे विलायक कहते हैं। इसकी मात्रा दूसरे से अधिक होती है।
→ विलयन का वह घटक जो विलायक में घुला होता है उसे विलेय कहते हैं। यह प्रायः कम मात्रा में होता है।
→ वायु गैसों का विलयन है। चीनी और जल एवं तरल घोल में ठोस का उदाहरण है। आयोडीन और एलकोहल की विलयन टिंक्चर आयोडीन है।
→ वात युक्त पेय पदार्थ तरल विलयन में गैस के रूप में हैं।
→ विलयन समांगी मिश्रण हैं जिनके कण व्यास में 1nm (10-9m) से भी छोटे होते हैं।
→ विलयन में मौजूद विलेय पदार्थ की मात्रा के आधार पर इसे तनु, सांद्र या संतृप्त घोल कहते हैं।
→ किसी निश्चित तापमान पर पृथक्-पृथक् पदार्थों की विलयन क्षमता पृथक्-पृथक् होती है।
→ निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है जिसमें विलेय पदार्थ कण घुलते नहीं बल्कि माध्यम की समृष्टि में निलंबित रहते हैं।
→ निलंबित कण 100 nm (10-7m) से बड़े होते हैं। कोलाइड के कण विलयन में समान रूप से फैले होते हैं।
→ प्रकाश की किरण का फैलाना टिंडल प्रभाव कहलाता है।
→ कोलाइड के कणों का आकार 1 nm से 100 nm के बीच होता है जो आंखों से दिखाई नहीं देते।
→ यह छानने से अलग नहीं किए जा सकते पर अपकेंद्रीकरण तकनीक से अलग-अलग किए जा सकते हैं।
→ विलायक से विलय पदार्थ को वाष्पीकरण विधि से पृथक् कर सकते हैं।
→ दूध में से क्रीम का पृथक्करण अपकेंद्रीय यंत्र से करते हैं।
→ अमोनियम क्लोराइड, कपूर, नेपथालीन और एंथ्रासीन आदि को ऊर्ध्व पातित किया जा सकता है।
→ मिश्रण से घटकों को पृथक् करने की विधि को क्रोमैटोग्राफ़ी कहते हैं।
→ आसवन का प्रयोग ऐसे मिश्रण को पृथक करने में किया जाता है जिसमें घटकों के क्वथनांकों के बीच काफ़ी अंतर होता है।
→ वायु से विभिन्न गैसों तथा पेट्रोलियम उत्पादों से उनके विभिन्न घटकों का पृथक्करण प्रभाजी आसवन से क्रिस्टलीकरण विधि का प्रयोग ठोस पदार्थों को शुद्ध करने में किया जाता है।
→ किस्टलीकरण विधि साधारण वाष्पीकरण विधि से अच्छी होती है।
→ रंग, कठोरता, दृढ़ता, बहाव, घनत्व, द्रवनांक और क्वथनांक को भौतिक गुण कहा जाता है।
→ अंत: रूपांतरण की अवस्था एक भौतिक परिवर्तन है।
→ रासायनिक परिवर्तन पदार्थ के रासायनिक गुणधर्मों में परिवर्तन लाता है।
→ रॉबर्ट बायल ने सबसे पहले 1661 में तत्व शब्द का प्रयोग किया था।
→ तत्व पदार्थ का वह मूल रूप है जिसे रासायनिक प्रतिक्रिया से छोटे पदार्थों के टुकड़ों में बांटा नहीं जा सकता।
→ तत्वों को धातु, अधातु और उपधातु भागों में बांटा जाता है।
→ पारा धातु होते हुए भी कमरे के तापमान पर द्रव है।
→ उपधातु, सदा धातु और अधातु के बीच गुणों को प्रकट करते हैं।
→ शुद्ध पदार्थ तत्व या यौगिक हो सकते हैं।
→ शुद्ध पदार्थ (Pure Substance)-वह पदार्थ जिसमें एक ही प्रकार के अणु उपस्थित हों, उसे शुद्ध पदार्थ कहते हैं; जैसे-सोना, चांदी आदि।
→ मिश्रण (Mixture)-वह पदार्थ जिसमें एक से अधिक संघटक उपस्थित हों, उसे मिश्रण कहते हैं। इन पदार्थों का अनुपात भिन्न-भिन्न होता है।
→ पृथक्करण (Separation)-मिश्रण के भिन्न-भिन्न अवयवों (अंशों) को अलग करने की विधि को पृथक्करण कहते हैं।
→ हाथ से बीनना (Hand Picking)-अनाज तथा दालों में से पत्थर तथा कंकड़ आदि निकालने की विधि को हाथ से बीनना कहा जाता है।
→ निथारना (Decantation)-तलछटीकरण और विलायक को अलग करने के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली विधि को निथारना कहते हैं। इस विधि द्वारा विलायक को धीरे से अलग कर लिया जाता है।
→ पृथक्कारी कीप (Separating funnel)-दो द्रवों के मिश्रण को अलग करने के लिए जिस कीप का प्रयोग किया जाता है, उसे पृथक्कारी कीप कहते हैं।
→ क्रिस्टल (Crystal)-ठोस पदार्थ के कण जोकि ज्यामितीय आकार के हों, उन्हें क्रिस्टल कहते हैं।
→ आसवन (Distillation)-यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसकी सहायता से किसी विलयन में से शुद्ध पदार्थ प्राप्त किया जाता है।
→ ऊर्ध्वपातन (Sublimation)-वह प्रक्रिया जिसमें कोई ठोस गर्म करने पर द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए बिना सीधे ही वाष्पों में परिवर्तित हो जाए, उसे ऊर्ध्वपातन कहते हैं।
→ यौगिक (Compound)-एक से अधिक प्रकार के परमाणुओं के परस्पर संयोग से बने पदार्थों को यौगिक कहते हैं।
→ विलायक (Solvent)-वह पदार्थ जो किसी अन्य पदार्थ (विलेय) को अपने में घोलता है, विलायक कहलाता है। विलयन में इसकी अधिक मात्रा होती है।
→ विलेय (Solute)-वह पदार्थ जो विलायक में घुलता है, विलेय कहलाता है।
→ विलयन (Solution)-दो या दो से अधिक पदार्थों का समरूप मिश्रण विलयन कहलाता है।
→ संतृप्त विलयन (Saturated Solution)-वह विलयन जिसमें एक निश्चित तापमान पर और अधिक विलेय पदार्थ नहीं घुल सकता, संतृप्त विलयन कहलाता है।
→ असंतृप्त विलयन (Unsaturated Solution)-वह विलयन जिसमें एक निश्चित तापमान पर और अधिक विलयन घुल सकता है, असंतृप्त विलयन कहलाता है।
→ निलंबन (Suspension)-यह वह विषम मिश्रण है जिसमें ठोस पदार्थ के कण पूरे विलायक में बिना घुले फैले हुए होते हैं।
→ कोलायड (Colloid)-कोलायड वह विलयन है जिसमें विलेय के पदार्थों के कणों का आकार 10-7 सें०मी० और 10-5 सें०मी० के बीच होता है।
→ विलेयता (Solubility)-किसी विशेष ताप तथा दाब पर किसी भी विलायक की 100 ग्राम मात्रा में अधिक से अधिक जितना विलेय घोला जा सके, उसे उस विलेय की उस विलेय में दिए गए ताप तथा दाब पर विलेयता (घुलनशीलता) कहते हैं।
→ समांगी (Homogeneous) मिश्रण-वह मिश्रण जिसके गुण तथा संरचना प्रत्येक अवस्था में समरूप हो उसे समांगी कहते हैं।
→ विषमांगी (Heterogeneous)-वह मिश्रण जिसके अंशों के गुण एक-दूसरे से भिन्न हों, उसे विषमांगी मिश्रण कहते हैं।
→ टिंडल प्रभाव (Tyndal Effect)-कोलाइडल द्रवों से प्रकाश की किरणों का पार गुजरते समय बिखर जाना टिंडल प्रभाव कहलाता है।
→ मिश्र धातु (Alloy)-धातुओं के समांगी मिश्रण को मिश्र धातु कहते हैं, जिसे भौतिक क्रिया द्वारा अवयवों में पृथक् नहीं किया जा सकता।
→ क्रोमैटोग्राफ़ी (Chromatography)-यह एक ऐसी विधि है जिसका प्रयोग उन विलेय पदार्थों को पृथक् करने में होता है जो एक ही तरह के विलायक में घुले होते हैं।
→ क्रिस्टलीकरण (Crystalisation)-क्रिस्टलीकरण वह विधि है जिसके द्वारा क्रिस्टल के रूप में शुद्ध ठोस को विलयन से पृथक् किया जाता है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)
प्रश्न 1.
मिश्रण तथा यौगिक में भेद लिखें। उत्तर-मिश्रण तथा यौगिक में भेद (Differences between mixture and compound)-
| मिश्रण (Mechanical Mixture) | यौगिक (Chemical Compound) |
| (i) मिश्रण के अवयव किसी भी अनुपात में हो सकते हैं। | (i) यौगिक के अवयव एक निश्चित अनुपात में होते हैं। |
| (ii) मिश्रण के गुण उसके अवयवों के गुणों के मध्यवर्ती होते हैं। | (ii) यौगिक के गुण उसके अवयवों के गुणों से भिन्न होते हैं। |
| (iii) मिश्रण भौतिक परिवर्तन का परिणाम है। | (iii) यौगिक रासायनिक परिवर्तन का परिणाम है। |
| (iv) मिश्रण के अवयव पास-पास पड़े हुए दिखाई देते हैं। | (iv) यौगिक के अवयव पास-पास पड़े हुए दिखाई नहीं देते हैं। |
| (v) मिश्रण बनाते समय आयतन में परिवर्तन नहीं है। | (v) यौगिक बनाते समय आयतन में परिवर्तन होता होता है। |
| (vi) मिश्रण बनाते समय ऊर्जा में परिवर्तन नहीं होता है। | (vi) जब यौगिक बनाया जाता है, तो ऊर्जा में परिवर्तन होता है। |
| (vii) यह दो या दो से अधिक पदार्थों के मिलने से बनता है जो रासायनिक रूप से संयोग नहीं करते। | (vii) यह दो या दो से अधिक तत्वों के रासायनिक संयोग से बनता है। |
प्रश्न 2.
तत्व और यौगिक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
तत्व और यौगिक में अंतर-
| तत्व (Element) | यौगिक (Compound) |
| (i) तत्व को असमान गुण वाले दो या दो से अधिक सरल भागों में नहीं बांटा जा सकता है।
उदाहरण-ऑक्सीजन को भिन्न गुणों वाले सरल भागों में नहीं बांटा जा सकता है। |
(i) यौगिक को असमान गुण वाले दो या दो से अधिक सरल भागों में अपघटित किया जा सकता है।
उदाहरण-पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अपघटित किया जा सकता है। |
| (ii) तत्व के अणु में केवल एक तरह के परमाणु होते हैं।
|
(ii) यौगिक के अणु में सदा दो या दो से अधिक तरह के परमाणु होते हैं।
|
| (iii) तत्व सभी शुद्ध और अशुद्ध पदार्थों के अवयव हो सकते हैं। | (iii) यौगिक केवल अशुद्ध पदार्थों के अवयव हो सकते हैं। |
प्रश्न 3.
क्रिस्टलीकरण किसे कहते हैं ? आप फिटकरी के रवे (क्रिस्टल) किस प्रकार प्राप्त करोगे ?
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण – यह पृथक्करण की वह विधि है जिसके द्वारा किसी द्रव में विलेय अशुद्ध ठोस पदार्थ के विलयन से शुद्ध पदार्थ प्राप्त किया जाता है। शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए गर्म द्रव में जितना भी अशुद्ध पदार्थ घुल सके, घोल लिया जाता है। इसके पश्चात् घोल में से अघुलनशील अशुद्ध पदार्थों को फिल्टर द्वारा छान लिया जाता है। अब संतृप्त गर्म घोल को ठंडा करने पर शुद्ध ठोस पदार्थ के क्रिस्टल प्राप्त हो जाते हैं।
फिटकरी के क्रिस्टल (रवे) बनाने की विधि – एक बीकर को लगभग आधा पानी से भरो। इसमें थोड़ासा फिटकरी का पाऊडर डाल कर घोल को गर्म करो। फिटकरी का पाऊडर तब तक डालते जाओ जब तक कि वह घोल घुल सके। गर्म घोल को गिलास में छान लो जैसे कि चित्र में दिखाया गया है। अब गिलास को ठंडा होने दीजिए।

प्रश्न 4.
एक मिश्रण में से पानी तथा गंधक को कैसे अलग करोगे ?
उत्तर-
पानी तथा गंधक के मिश्रण को बीकर में लो। कीप स्टैंड में कीप को रखो। कीप के नीचे एक साफ़ बीकर रखो। फिल्टर पेपर की इस तरह तहें बनाओ ताकि एक तरफ तीन तथा एक तरफ एक तह हो।

इसको कीप में रखो। मिश्रण को शीशे की छड़ से धीरे-धीरे कीप में डालो। द्रव या पानी नीचे धीरे-धीरे बीकर में आ जाएगा, जो गंधक से बिल्कुल स्वतंत्र होता है। इस द्रव को फिल्ट्रेट कहते हैं। ठोस गंधक फिल्टर पर शेष रह जाएगा।
फिल्टर पेपर को कीप से आराम से अलग करके गंधक को सुखा लिया जाता है।
प्रश्न 5.
निम्नलिखित का पृथक्करण कैसे करोगे ?
(i) सरसों के तेल से जल
(i) दूध से क्रीम।
उत्तर-
(i) जल तथा सरसों के तेल के मिश्रण में से अवयवों को पृथक करना – जल तथा सरसों का तेल भारी होने के कारण एकदूसरे में अघुलनशील हैं। इसलिए ये मिश्रण में अलग-अलग पर्ते बना लेते हैं। इन दोनों द्रवों का घनत्व अलग है। सरसों का तेल हल्का होने के कारण ऊपरी पर्त बनाता है परंतु जल निचली पर्त बनाता है। इस अमिश्रणीय द्रवों के मिश्रण को पृथक्कारी कीप में डाल लिया जाता है। कुछ समय के बाद कीप का स्टॉप कॉक खोल दिया जाता है जिससे जल निकल जाता है और शेष कीप में सरसों का तेल बच जाता है।

(ii) दूध से क्रीम पृथक् करना – इसके लिए अपकेंद्रण विधि का प्रयोग किया जाता है। दूध को एक बंद मुंह वाले बर्तन में डालकर वृत्ताकार पथ पर क्षितिज तल में बड़ी तेज़ गति से घुमाया जाता है जिससे क्रीम हल्की होने के कारण दूध के ऊपर केंद्रीय अक्ष के आस-पास इकट्ठी होकर तैरती रहती है। इसे अलग कर लिया जाता है।
प्रश्न 6.
यौगिक किसे कहते हैं ? यौगिक की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
यौगिक-जब दो या अधिक तत्व परस्पर एक निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग करते हैं, तब वे यौगिक बनाते हैं । किसी यौगिक को उन तत्वों से तोड़ा जा सकता है, जिनसे मिलकर वह बनता है। उदाहरण के लिए, जल का प्रत्येक अणु हाइड्रोजन के दो परमाणुओं तथा ऑक्सीजन के एक परमाणु से मिलकर बनता है। जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात 2 : 1 होता है। जल एक यौगिक है। यह जल के अणुओं से बनता है। इसी प्रकार सोडियम और क्लोरीन के संयोग से सोडियम क्लोराइड बनता है, जिसे साधारण नमक के नाम से जाना जाता है। यौगिक के गुण, उसमें पाए जाने वाले तत्वों के गुणों से अलग होते हैं, जिनसे मिलकर यह बना है। एक अन्य यौगिक का उदाहरण चीनी है। चीनी का एक अणु कार्बन के 12 परमाणुओं; हाइड्रोजन के 22 परमाणुओं तथा ऑक्सीजन के 11 परमाणुओं से मिलकर बनता है। कार्बन डाइ-ऑक्साइड भी यौगिक है। कार्बन डाइऑक्साइड के प्रत्येक अणु में, कार्बन का एक परमाणु तथा ऑक्सीजन के दो परमाणु होते हैं । यौगिक के गुण उसके अवयव तत्वों से भिन्न होते हैं जैसे हाइड्रोजन जलती है, ऑक्सीजन जलने में सहायता करती है और ये दोनों गैसें हैं, परंतु इन दोनों के संयोग से बना यौगिक, पानी, एक द्रव है तथा यह आग को बुझा देता है।
यौगिक की विशेषताएँ-
- यौगिकों का सामांगी संगठन होता है।
- यौगिकों के निर्माण में भाग लेने वाले सभी तत्व एक-दूसरे से निश्चित अनुपात में संयुक्त रहते हैं।
- यौगिकों के गुण उनके अवयवी तत्वों के गुणों से भिन्न होते हैं।
- यौगिकों के अवयवी तत्वों को साधारण विधियों द्वारा अलग-अलग नहीं किया जा सकता है।
- यौगिकों के निर्माण या वियोजन में ऊष्मा के रूप में ऊर्जा निकलती है अथवा अवशोषित होती है।
प्रश्न 7.
उत्पत्ति के आधार पर यौगिक कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
उत्पत्ति के आधार पर यौगिकों को दो भागों में बाँटा गया है-
- अकार्बनिक यौगिक (Inorganic Compound) – वे यौगिक जो पृथ्वी की पर्पटी से प्राप्त किए जाते हैं, उन्हें अकार्बनिक यौगिक कहते हैं; जैसे-कैल्शियम कार्बोनेट (मारबल), नमक, सोडियम नाइट्रेट और सोडियम कार्बोनेट आदि।
- कार्बनिक यौगिक (Organic Compound) – वे यौगिक जिनको पौधे और जंतुओं से प्राप्त करते हैं, उन्हें कार्बनिक यौगिक कहते हैं; जैसे-शक्कर, एसीटिक एसिड, स्टार्च, तेल, वसा तथा प्रोटीन आदि इन सभी तत्वों में कार्बन आवश्यक अवयव है।
प्रश्न 8.
मिश्रण किसे कहते हैं? इनकी विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
मिश्रण – मिश्रण दो या अधिक तत्वों अथवा यौगिकों को किसी भी अनुपात में मिलाने से बनते हैं। मिश्रण में अवयव किसी भी अनुपात में उपस्थित होते हैं तथा मिश्रण में अवयव अपने गुणों को बनाए रखते हैं; जैसे-वायु मिश्रण है। इसमें नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसे तत्व, कार्बन डाइऑक्साइड और जल-वाष्प जैसे यौगिक होते हैं। इसके अतिरिक्त वायु में अन्य गैसें तथा धूल के कण भी उपस्थित होते हैं।
मिश्रण की विशेषताएं-
- मिश्रण में विभिन्न अवयव किसी भी अनुपात में उपस्थित हो सकते हैं।
- मिश्रण के गुण उसके विभिन्न अवयवों के गुणों का अनुपात होता है।
- मिश्रण के विभिन्न अवयवों को आसानी से अलग किया जा सकता है।
- मिश्रण के निर्माण में ऊष्मा नहीं निकलती है।
प्रश्न 9.
मिश्रण कितने प्रकार के होते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
मिश्रण दो प्रकार के होते हैं-
(1) विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixtures)
(2) समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixtures)
1. विषमांगी मिश्रण – वह मिश्रण जिसमें इसके अवयव एक समान रूप से बँटे नहीं होते हैं, असमांग मिश्रण कहलाता है। प्रकृति में पाए जाने वाले मिश्रण अधिकतर असमांग होते हैं । उदाहरण-सल्फर और पोटैशियम नाइट्रेट, मृदा सैंकड़ों यौगिक तथा तत्वों का मिश्रण है। इसकी संरचना एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवर्तित होती है। असमांग मिश्रण के विभिन्न अवयवों को हम अपनी आँखों से देख सकते हैं।
2. समांगी मिश्रण – वह मिश्रण जिसमें इसके अवयव एक समान बँटे होते हैं, समांग मिश्रण कहलाते हैं। जल में शक्कर का विलयन एक समांग मिश्रण है। वायु, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल-वाष्प का समांग मिश्रण है। समुद्री जल, लवण विलयन, शरबत, दूध, फलों का रस, आइसक्रीम, विलयन के रूप में दवाइयाँ, कैरोसीन आदि समांग मिश्रण के अन्य उदाहरण हैं।
| मिश्रण का प्रकार | उदाहरण |
| 1. गैस में गैस | वायु |
| 2. द्रव में गैस | सोडा वाटर, जल जिसमें ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड हैं। |
| 3. द्रव में द्रव | नींबू का रस तथा जल, जल तथा एल्कोहल। |
| 4. द्रव में ठोस | समुद्री जल, चीनी का जलीय विलयन। |
| 5. ठोस में ठोस | मसालों का मिश्रण, मिट्टी, मिश्र धातु। |
आयरन तथा सल्फर तत्व हैं । चूर्ण के रूप में इन दोनों तत्वों को किसी भी अनुपात में मिलाने पर इनका मिश्रण बनता है, परंतु जब इन दोनों तत्वों के एक निश्चित अनुपात से बने मिश्रण को बहुत अधिक गर्म करते हैं, तब एक नया पदार्थ आयरन सल्फाइड बन जाता है। गर्म करने पर दो तत्व आयरन तथा सल्फर रासायनिक अभिक्रिया करके आयरन सल्फाइड यौगिक बनाते हैं। आयरन सल्फाइड यौगिक में आयरन तथा सल्फर का कोई गुण नहीं पाया जाता है, जबकि आयरन और सल्फर के मिश्रण में अपने अवयव आयरन और सल्फर दोनों के ही सभी गुण पाए जाते हैं।
प्रश्न 10.
सिद्ध कीजिए कि वायु मिश्रण है, यौगिक नहीं।
उत्तर-
निम्नलिखित तथ्यों से यह सिद्ध होता है कि वायु एक मिश्रण है-
- वायु बहुत-सी गैसों का मिश्रण है। इनमें से मुख्य नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल-वाष्य हैं, जो कि अपने व्यक्तिगत गुण रखती हैं।
- वायु की संरचना स्थान-स्थान पर परिवर्तित होती है। औद्योगिक क्षेत्रों में कार्बन मोनो-ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, धुएँ के कण आदि अपेक्षाकृत अधिक होते हैं। इसी प्रकार अधिक ऊँचाइयों पर जैसे पर्वतों पर वायु में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इस प्रकार वायु की संरचना विषमांग होती है।
- जलने के दौरान केवल ऑक्सीजन प्रयुक्त होती है, अन्य गैसें नहीं।
- वायु को बहुत कम ताप पर ठंडा करके ऑक्सीजन या नाइट्रोजन को पृथक् किया जा सकता है।
प्रश्न 11.
विलयन किसे कहते हैं ? इसके गुण धर्म लिखिए।
उत्तर-
विलयन-दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण विलयन कहलाता है। नींबू जल, सोडा जल आदि इस के उदाहरण हैं। प्रायः विलयन को ऐसे तरल पदार्थ के रूप में माना जाता है जिसमें ठोस, द्रव या गैस मिला हो पर ठोस विलयन मिश्र धातु और गैसीय विलयन वायु भी होती है। एक विलयन के कणों में समांगीकता होती है।
विलयन के गुण धर्म-
- यह एक समांगी मिश्रण है।
- इसके कण 1 nm (10-10 m) से भी छोटे होते हैं।
- इसके कणों को नंगी आँख से देखा नहीं जा सकता।
- ये टिंडल प्रभाव नहीं दिखाते।
- इसके कण नीचे नहीं बैठते।
प्रश्न 12.
वायु से विभिन्न गैसों को किस प्रकार प्राप्त किया जाता है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
वायु समांगी मिश्रण है जिसके विभिन्न घटकों को प्रभाजी आसवन से प्राप्त किया जा सकता है। पहले वायु पर दबाव बढ़ा कर उसे संपीडित किया जाता है और तापमान कम करके ठंडा किया जाता है। द्रवित वायु को प्रभाजी आसवन स्तंभ में धीरे-धीरे गर्म कर गैसों को भिन्न-भिन्न ऊँचाई पर प्राप्त कर लिया जाता है।

प्रश्न 13.
धातुओं और अधातुओं के गुणों में अंतर लिखिए।
उत्तर-
| धातुएं (Metals) | अधातुएं (Non-Metals) |
| (1) धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस होती हैं परंतु केवल पारा सामान्य ताप पर तरल अवस्था में होता है। | (1) अधातुएँ सामान्य ताप पर तीनों अवस्थाओं में पाई जाती हैं। फॉस्फोरस और सल्फर ठोस रूप में, H2, O2, N2 गैसीय रूप में तथा ब्रोमीन तरल रूप में होती हैं। |
| (2) धातुएँ तन्य तथा आघातवर्ध्य होती हैं। | (2) वे प्रायः भंगुर होती हैं। |
| (3) धातुएँ प्राय: चमकदार होती हैं अर्थात् उनमें धात्विक चमक होती है। | (3) अधातुओं में धात्विक चमक नहीं होती। अपवाद-ग्रेफाइट, आयोडीन तथा हीरा। |
| (4) धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत् की सुचालक होती हैं। अपवाद-बिस्मथ। | (4) सभी अधातुएं कुचालक हैं। अपवाद-ग्रेफाइट और गैस कार्बन। |
| (5) धातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक बहुत अधिक होते हैं। | (5) अधातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक कम होते हैं। |
| (6) धातुएँ अधिकांशतः कठोर होती हैं अपवाद-सोडियम तथा पोटाशियम चाकू से काटी जा सकती है। | (6) इनकी कठोरता भिन्न-भिन्न होती है। हीरा सब पदार्थों से कठोरतम है। |
| (7) धातुओं का आपेक्षित घनत्व अधिक होता है परंतु Na, K इसके अपवाद हैं। | (7) अधातुओं का आपेक्षित ताप प्रायः कम होता है। |
| (8) धातुएँ अपारदर्शक होती हैं। | (8) गैसीय अधातुएं पारदर्शक हैं। |
लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1.
मिश्र धातुओं को मिश्रण क्यों माना जाता है ?
उत्तर-
मिश्र धातुएं समांगी मिश्रण होती हैं। इन्हें भौतिक क्रिया से अवयवों में अलग-अलग नहीं किया जा सकता है। ये अपने घटकों के गुणों को प्रकट करते रहते हैं। पीतल, कांसा, स्टील आदि मिश्र धातु हैं।
प्रश्न 2.
रंग वाले घटक (डाई) को नीले या काले रंग की स्याही से पृथक् करना।
उत्तर-
कार्य विधि – एक बीकर को जल से आधा भरो। बीकर के मुंह पर वाच-ग्लास रखकर उस पर कुछ बूंदें स्याही डालो। बीकर को गर्म करना आरंभ करो। वाच ग्लास से वाष्पीकरण होने लगेगा और वाच ग्लास पर डाई का अवशेष बच जाएगा। इससे सिद्ध होगा कि स्याही डाई का पानी में मिश्रण है।

प्रश्न 3.
परख करना कि काली स्याही में डाई एक ही रंग की नहीं होती है।
उत्तर-

कार्य विधि-फिल्टर पेपर की एक पतली परत लो। इसके निचले किनारे से 3 cm ऊपर पैंसिल से एक रेखा खींच लें। उस रेखा के बीच में पानी में घुलनशील
काली स्याही की एक बूंद रखें। इसे सूखने दें। फिल्टर पेपर को चित्रानुसार रखें और बिना हिलाए छोड़ दो। पानी फिल्टर पेपर पर ऊपर चढ़ने लगेगा। उस पर अलग-अलग रंग आ जाएंगे। इससे सिद्ध होता है कि काली स्याही अनेक रंगों की बनी होती है।
प्रश्न 4.
अपकेंद्रण यंत्र का प्रयोग कहाँ किया जाता है ? इस प्रक्रिया का सिद्धांत लिखिए।
उत्तर-
अपकेंद्रण यंत्र का प्रयोग प्रयोगशालाओं में रक्त और मूत्र की जाँच में किया जाता है। डेयरी और घर में क्रीम से मक्खन निकालने तथा वाशिंग मशीनों में इस का प्रयोग किया जाता है। जब कभी किसी द्रव में मौजूद ठोस कण इतने छोटे होते हैं कि ये छानक पत्र से बाहर चले आते हैं । इन कणों को पृथक् करने के लिये छानन विधि का प्रयोग नहीं किया जाता है। ऐसे मिश्रणों को अपकेंद्रण के द्वारा पृथक् किया जाता है। इस सिद्धांत के आधार पर जब मिश्रण को तेजी से घुमाया जाता है, तब भारी कण नीचे बैठ जाते हैं और हल्के कण ऊपर ही रुक जाते हैं।
प्रश्न 5.
क्रोमैटोग्राफ़ी क्या है ? इसका उपयोग किन क्षेत्रों में किया जाता है ?
उत्तर-
क्रोमैटोग्राफ़ी किसी मिश्रण से घटकों को पृथक करने की विधि है। इस विधि से रंगों को पृथक किया जाता है। इसका प्रयोग उन विलेय पदार्थों को पृथक् करने में होता है जो एक ही तरह के विलायक में घुले होते हैं। इस का उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाता है-
- डाई के रंगों को अलग करने में।
- रक्त से दवा को पृथक् करने में।
- प्राकृतिक रंगों से रंग को पृथक करने में।
- मूत्र से चीनी को पृथक् करने में।
प्रश्न 6.
किसी अशुद्ध नमूने में से शुद्ध CuSO4 प्राप्त करना।
उत्तर-

कार्य-विधि – चीनी मिट्टी की एक प्याली । में थोड़ा अशुद्ध CuSO4 लो। इसे न्यूनतम मात्रा में लिए गए पानी में घोल लो। अशुद्धियों को छानकर प्याली को गर्म करो। प्याली में नीले रंग के क्रिस्टल दिखाई देंगे। ये सभी क्रिस्टल एक समान दिखाई देंगे। इन्हें छानकर अलग कर लो।
इस प्रकार CuSO4 के संतृप्त विलयन से शुद्ध CuSO4 को प्राप्त किया जा सकता है।
प्रश्न 7.
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
भौतिक परिवर्तन – ये अस्थाई होते हैं जिनमें केवल भौतिक अवस्था में परिवर्तन होता है। इन परिवर्तनों में रासायनिक परिवर्तन नहीं होते और इन्हें मूल अवस्था में बदला जा सकता है। उदाहरण-पानी को भाप या बर्फ में बदलना, चीनी को पानी में घोलना।
रासायनिक परिवर्तन – ये स्थाई होते हैं जिनमें भौतिक परिवर्तन के साथ रासायनिक परिवर्तन भी होते हैं। इन्हें मूल अवस्था में नहीं लाया जा सकता। उदाहरण-लोहे को जंग लगना, मैग्नीशियम तार को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाना, मोमबत्ती का जलना।
प्रश्न 8.
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन में अंतर लिखिए।
उत्तर-
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन में अंतर-
| भौतिक परिवर्तन | रासायनिक परिवर्तन |
| (1) यह अस्थायी परिवर्तन होता है। | (1) यह स्थायी परिवर्तन होता है। |
| (2) इनमें केवल भौतिक अवस्था, रंग, घनत्व आदि गुणों में अंतर होता है। | (2) इनमें नया रासायनिक पदार्थ बन जाता है। |
| (3) मूल पदार्थ की प्राप्ति सरलता से हो जाती है। | (3) मूल पदार्थ की प्राप्ति सरलता से नहीं होती। |
| (4) रासायनिक गुणों में परिवर्तन नहीं होता। | (4) रासायनिक गुणों में परिवर्तन होता है। |
| (5) पदार्थों के संघटन में परिवर्तन नहीं होता। | (5) पदार्थों के संघटन में परिवर्तन होता है। |
| (6) उदाहरण-बर्फ पिघलना, जल में नमक का घुलना। | (6) उदाहरण-जंग लगना, कागज़ का जलना। |
प्रश्न 9.
मोमबत्ती के जलने पर भौतिक और रासायनिक परिवर्तन दोनों होते हैं। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
जब मोमबत्ती जलती है तो मोम पिघलती है। मोम का पिघलना भौतिक परिवर्तन है। जब मोमबत्ती वायु की उपस्थिति में जलती है तो जल वाष्प और CO2 गैस बनती है। जल वाष्पों और CO2 के गुण मोमबत्ती से भिन्न होते हैं, इसलिए यह रासायनिक परिवर्तन है।
प्रश्न 10.
तत्व किसे कहते हैं ? तत्वों की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
फ्रांस के रसायनज्ञ लैवाइज़र ने पहली बार प्रमाणित किया था कि द्रव्य का सरलतम रूप तत्व है। इसे दो या दो से अधिक भागों में भौतिक या रासायनिक विधि से नहीं बांटा जा सकता। यह एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिल कर बना होता है। हर तत्व के परमाणु दूसरे तत्व से भिन्न होते हैं। तत्वों को धातु, अधातु और उपधातु में बांटा जाता है। सोना, चांदी, लोहा, तांबा आदि धातु हैं; हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, ब्रोमीन आदि अधातु हैं तथा आर्सेनिक, एंटीमनी, बिस्मथ आदि उपधातु हैं। तत्वों को इस विश्व की रचना का आधार माना जाता है। अब तक कुल 112 तत्वों की प्राप्ति हो चुकी है जिन में से 92 प्रकृति द्वारा प्रदत्त हैं तथा शेष 20 मानव-निर्मित हैं। तत्वों में धातुएं तथा अधातुएं सम्मिलित हैं-
धातुएं प्रायः दिए हुए निम्न गुणधर्मों में से सभी को या कुछ को प्रदर्शित करती हैं।
- ये चमकीली होती हैं।
- ये चाँदी जैसी सफ़ेद या सोने की तरह पीले रंग की होती हैं।
- ये ताप तथा विद्युत् की सुचालक होती हैं।
- ये तन्य होती हैं (और इनको तार के रूप में खींचा जा सकता है)।
- ये आघातवर्ध्य होती हैं। इनको पीटकर महीन चादरों में ढाला जा सकता है।
- ये प्रतिध्वनिपूर्ण होती हैं।
सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा, सोडियम, पोटैशियम इत्यादि धातु के उदाहरण हैं। पारा धातु होते हुए भी कमरे के तापमान पर द्रव है।
अधातुएँ दिए गए निम्न गुणों में से प्रायः कुछ को या सभी को प्रदर्शित करती हैं :
- ये विभिन्न रंगों की होती हैं।
- ये ताप और विद्युत् की कुचालक होती हैं।
- ये चमकीली, प्रतिध्वनिपूर्ण और आघातवर्ध्य नहीं होती हैं।
प्रश्न 11.
द्रव की विभिन्न अवस्थाओं के आधार पर समांगी और विषमांगी मिश्रणों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
| मिश्रण | समांगी (Homogeneous) | विषमांगी (Heterogeneous) |
| 1. ठोस में ठोस | पीतल, कांसा, गनमैटल आदि विभिन्न मिश्रधातु | रेत कण + लोह चूर्ण, रेत + अमोनियम क्लोराइड |
| 2. ठोस में द्रव | पारे में सोना | × |
| 3. ठोस में गैस | पैलेडियम में हाइड्रोजन | × |
| 4. द्रव में ठोस | पानी में चीनी | पानी में मिट्टी, पानी में चॉक |
| 5. द्रव में द्रव | इथाइल एल्कोहल में पानी | पानी में तेल |
| 6. द्रव में गैस | पानी में कार्बन डाइऑक्साइड | × |
| 7. गैस में गैस | वायु | × |
प्रश्न 12.
वायुमंडल में कुछ धात्विक कण जैसे कैडमियम, जिंक, पारा आदि कैसे निर्मक्त होते हैं ?
उत्तर-
वायुमंडल में कुछ धात्विक कण जैसे कैडमियम, जिंक, पारा आदि जिंक, तांबे, सीसे तथा स्टील के शोधन के दौरान निर्मुक्त होते हैं। ये कण पीड़कनाशियों, फॉस्फेट उर्वरकों, फंगसनाशियों तथा श्रृंगार प्रसाधनों के उत्पादन या उपयोग के दौरान भी निर्मुक्त होते रहते हैं।
प्रश्न 13.
विलेय, विलायक तथा विलयन की परिभाषाएं बताओ।
उत्तर-
कुछ पदार्थ द्रव में घुल जाते हैं जैसे चीनी पानी में घुल जाती है। अमोनियम क्लोराइड तथा कॉपर सल्फेट भी पानी में घुल जाते हैं। ठोस पदार्थों को, जो द्रव में घुल जाते हैं, विलेय कहलाते हैं। वे द्रव जिसमें ठोस पदार्थ घुल जाते हैं, विलायक कहलाते हैं। विलेय तथा विलायक के बने समांगी मिश्रण को विलयन कहते हैं। नमक तथा पानी के मिश्रण को विलयन कहते हैं, नमक विलेय तथा पानी विलायक कहलाता है।
प्रश्न 14.
जलीय और अजलीय विलयन में अंतर दीजिए।
उत्तर-
जलीय विलयन – विभिन्न पदार्थों के जल में घोल कर बनाए गए विलयनों को जलीय विलयन कहते हैं। जलीय विलयन में विलायक जल होता है।
उदाहरण – नमक का जल में विलयन, कॉपर सल्फेट का जल में विलयन।
अजलीय विलयन – कुछ पदार्थ जल में नहीं घुलते परंतु कार्बनिक द्रवों में घुलकर विलयन बनाते हैं। ऐसे विलयन को अजलीय विलयन कहते हैं। इसमें विलायक प्रायः एल्कोहल, एसीटोन, टेट्राक्लोराइड कार्बन सल्फाइड तथा बेंजीन आदि होते हैं।
उदाहरण-एल्कोहल में आयोडीन का घोल, नैफ्थलीन का बेंजीन में घोल।
प्रश्न 15.
संतृप्त विलयन तथा असंतृप्त विलयन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
संतृप्त विलयन – किसी विशेष ताप पर किसी विलयन में जब और अधिक विलेय न घुल सकें तो वह विलयन संतृप्त विलयन कहलाता है।
असंतृप्त विलयन – ऐसा घोल जिसमें किसी निश्चित ताप पर विलेय की मात्रा उस अधिकतम मात्रा से कम होती है तो उस ताप पर उसके द्वारा घोली जा सकती है, असंतृप्त विलयन कहलाता है। यदि कोई विलयन किसी निश्चित ताप पर संतृप्त हैं, ताप को बढ़ाने पर असंतृप्त हो जाता है।
प्रश्न 16.
वास्तविक विलयन (True solution) क्या होता है ? इसकी विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
वह विलयन जिसमें विलेय के कणों का आकार 10-8 सेमी० तक होता है। इसमें विलेय के कण विलायक के अणुओं के मध्य स्थानों में लुप्त हो जाते हैं। ऐसा विलयन समांगी मिश्रण होता है। इसमें विलेय कणों को परिक्षेपण कण तथा विलायक कणों को परिक्षेपण माध्यम कहते हैं। उदाहरण-नमक तथा चीनी के जलीय विलयन।
विशेषताएं-
(I) वास्तविक विलयन साफ़ और पारदर्शी होता है।
(II) यह समांगी मिश्रण होता है।
(III) इसके कणों का आकार 10-8 सेमी० तक होता है।
(IV) इसे स्थिर करने पर भी कण नीचे नहीं बैठते।
(V) यह प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of light) नहीं करते।
(VI) इन्हें छान कर अलग नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 17.
निलंबन (Suspension) किसे कहते हैं ? इसकी विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
निलंबन- यह किसी विलेय और विलायक का विषमांगी मिश्रण होता है जिसमें विलेय के कणों का आकार 10-5 सेमी० से बड़ा होता है।
विशेषताएं-
(I) निलंबन विषमांगी मिश्रण होता है।
(II) इसमें मिले कणों को सरलता से सूक्ष्मदर्शी के द्वारा देखा जा सकता है।
(III) इसे फिल्टर पेण की सहायता से सरलतापूर्वक छाना जा सकता है।
(IV) निलंबन को कुछ देर स्थिर रखने पर कण द्रव से अलग हो कर नीचे बैठ जाते हैं।
प्रश्न 18.
कोलाइडी विलयन (Colloidal Solution) किसे कहते हैं ? इसकी विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
कोलाइड – यह एक विलयन है जिसमें विलेय के पदार्थ के कणों का आकार 10-7 सेमी० और 10-5 सेमी० के बीच होता है अर्थात् पदार्थ विलयन और निलंबन के बीच होता है । कोलाइडी विलयन को सॉल (Sols) भी कहते हैं। रक्त, टूथपेस्ट, साबुन का घोल, जेम, कोहरा आदि कोलाइडी विलयन के उदाहरण हैं।

विशेषताएं-
(I) कोलाइडी विलयन समांगी प्रतीत होते हैं पर वास्तव में वे विषमांगी होते हैं।
(II) कोलाइडी कणों को फिल्टर पेपर से छान कर अलग नहीं किया जा सकता।
(III) कोलाइडी कण स्थिर अवस्था में रखे जाने पर भी तल पर नीचे नहीं बैठते।
(IV) कोलाइडी कण ब्राऊनी गति प्रकट करते हैं।
(V) कोलाइडी विलयन टिंडल प्रभाव दिखाते हैं।
चित्र-कोलाइडी कणों की ब्राऊनी गति
(VI) कोलाइडी कणों पर ऋण या घन आवेश होता है जिस कारण वैद्युत्-कण-संचालन का गुण प्रकट करते हैं।
प्रश्न 19.
बताओ क्या होता है जब प्रकाश किरण पुंज कोलाइडी विलयन में से गुजरता है ?
उत्तर-
कोलाइडी विलयन में से जब तेज प्रकाश किरण पुंज को (साबुन के विलयन) अंधेरे कमरे में पड़ी बीकर में रख कर गुज़ारा जाता है तो इसका पथ प्रकाशित दिखाई देता है। प्रकाश का पथ इसलिए दिखाई देता है कि इसके कणों द्वारा प्रकाश प्रकीर्णन सब दिशाओं में होता है।

यह प्रकीर्णन प्रकाश हमारी आंखों में प्रवेश करता है जिससे प्रकाश का पथ दिखाई देता है। इसे ‘टिंडल प्रभाव’ कहते हैं।
प्रश्न 20.
कुछ कोलाइडों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-

प्रश्न 21.
कोलाइड तथा निलंबन में अंतर लिखो।
उत्तर-
कोलाइड और निलंबन में अंतर-
| कोलाइड (Colloidal) | निलंबन (Suspension) |
| (i) कोलाइड के कणों को सरलता से नहीं देखा जा सकता। | (i) निलंबन के कणों को सरलता से देखा जा सकता है। |
| (ii) कोलाइड के कणों को छान करके अलग किया नहीं किया जा सकता है। | (ii) निलंबन के कणों को छान करके अलग किया जा सकता है। |
| (iii) कोलाइड के कणों का माप 10-7 सें० मी० से 10-5 सें० मी० होता है। | (iii) निलंबन के कणों का माप 10-5 से० मी० या इससे अधिक होता है। |
| (iv) कोलाइड को काफ़ी स्थान तक स्थिर रखने पर भी इनके कण नीचे नहीं बैठते। | (iv) निलंबन को काफ़ी समय तक स्थिर रखने पर इसके कण नीचे बैठ जाते हैं। |
प्रश्न 22.
एक विलयन के 320 g विलायक जल में 40 g साधारण नमक विलेय है। विलयन की सांद्रता का परिकलन करें।
हल :
विलेय पदार्थ (नमक) का द्रव्यमान = 40g
विलायक (जल) का द्रव्यमान = 320g
हम जानते हैं,
विलयन का द्रव्यमान = विलेय पदार्थ का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान
= 40 g + 320 g
= 360g
विलयन का द्रव्यमान प्रतिशत
=
× 100
= 40/360 × 100 = 11.1%
प्रश्न 23.
विलयन की सांद्रता को किस प्रकार प्रदर्शित किया जा सकता है ?
उत्तर-
विलायक की सांद्रता किसी विलायक में विलेय की आपेक्षिक मात्रा होती है। यदि विलेय की मात्रा विलायक की अपेक्षा कम हो तो इसे तनु विलयन कहते हैं और विलेय की मात्रा अधिक होने की अवस्था में उसे सांद्र विलयन कहते हैं। विलयन की सांद्रता को निम्नलिखित ढंग से प्रदर्शित किया जा सकता है-
(i) विलयन की शक्ति – इसके अंतर्गत एक लिटर विलयन में उपस्थित विलेय की ग्राम संख्या को जाना जाता है, इसीलिए इसे ग्राम/लिटर इकाई से प्रदर्शित किया जाता है।

(ii) प्रतिशतता

प्रश्न 24.
निम्नलिखित शब्दों की परिभाषा बताओ-
1. आसवन
2. ऊर्ध्वपातन
3. अपकेंद्रण।
उत्तर-
1. आसवन – वह विधि जिसमें एक द्रव को उबाल कर वाष्पों में परिवर्तित किया जाता है और उन वाष्पों को ठंडा करके शुद्ध द्रव में संघनित किया जाता है, आसवन कहलाती है।
2. ऊर्ध्वपातन – वह विधि जिसमें कोई ठोस गर्म करने पर सीधे गैसीय अवस्था में बिना द्रवीय अवस्था में बदले परिवर्तित हो जाता है, ऊर्ध्वपातन कहलाती है।
3. अपकेंद्रण – इस विधि द्वारा किसी द्रव में निलंबित ठोस पदार्थ के कणों को पृथक किया जाता है। इसमें मिश्रण को वृत्ताकार पथ में क्षैतिज तल में तेज़ी से घुमाया जाता है।
प्रश्न 25.
चार ऐसी उदाहरण दीजिए जिसमें पानी में मिले अवयवों को अपकेंद्रण विधि से अलग किया जाता है।
उत्तर-
पानी से मिले अवयवों को अपकेंद्रण विधि द्वारा अलग करने के उदाहरण-
- रुधिर से रुधिर कोशिकाओं को अलग करना।
- पेशाब में मिले ठोस पदार्थों को अलग करना।
- चीनी की फैक्टरियों में गन्ने के रस से चीनी रवों को अलग करना।
- दूध से मक्खन को अलग करना।
प्रश्न 26.
जब हवा में कपूर की गोलियां रखी जाती हैं, तो वे कुछ देर बाद गायब क्यों हो जाती हैं ?
उत्तर-
कपूर ऊर्ध्वपातीय पदार्थ है। जब इनकी गोलियों को हवा में रखा जाता है, तो वे सीधे वाष्प में बदल जाती हैं। अत: कुछ समय बाद वे गायब हो जाती हैं।
प्रश्न 27.
दही से मक्खन को अलग करने के लिए, दही का मंथन क्यों किया जाता है ?
उत्तर-
जब दही मथा जाता है तो मक्खन के कण अपकेंद्रीय बल द्वारा अलग हो जाते हैं। अब क्योंकि मक्खन के कण शेष कणों से हल्के होते हैं अतः वे लस्सी पर तैरते रहते हैं और आसानी से अलग किये जा सकते हैं। इसलिए दही का मक्खन दही से अलग करने के लिए मंथन किया जाता है।
प्रश्न 28.
तुम पानी से मूंगफली का तेल किस प्रकार पृथक् करोगे ?
उत्तर-

मूंगफली के तेल तथा पानी को उनके मिश्रण से पृथक करना – मूंगफली का तेल तथा पानी अमिश्रणीय द्रव हैं। ये द्रव मिश्रण में अलग-अलग पर्ते बना लेते हैं, क्योंकि मूंगफली का तेल, पानी की अपेक्षा हल्का है। इस मिश्रण के अवयवों को पृथक्कारी कीप की सहायता से अलग किया जा सकता है। इस मिश्रण को पृथक्कारी कीप में डाला जाता है।
कुछ समय के पश्चात् मूंगफली का तेल ऊपरी पर्त तथा पानी निचली पर्त बना लेता है। अब पृथक्कारी कीप का स्टॉप कॉक खोल कर पानी अलग कर लिया जाता है जबकि मूंगफली का तेल कीप में रह जाता है।
प्रश्न 29.
दो घुलनशील पदार्थों के मिश्रण को कैसे पृथक् किया जा सकता है ? नमक के घोल में से शुद्ध पानी को कैसे अलग किया जाता है ?
उत्तर-
जिन पदार्थों के मिश्रण को विघटन हुए बिना उबाला जा सकता है और जिनके क्वथनांकों के मध्य अंतर अधिक होता है, उन्हें आसवन विधि से अलग-अलग किया जा सकता है। ऐसीटोन और जल के मिश्रण को आसवन विधि से अलग-अलग किया जा सकता है । एल्कोहल और जल के मिश्रण को भी इसी विधि से पृथक किया जा सकता है। नमक के घोल से शुद्ध पानी को प्राप्त करने के लिए हम आसवन विधि का प्रयोग करते हैं।
आसवन विधि – रिटार्ट में नमक का घोल लिया जाता है। रिटार्ट का मुंह ढक्कन से बंद कर दिया जाता है तथा इसकी गर्दन ठंडे पानी में रखी फ्लास्क में फिट की जाती है। एक गीला कपड़ा फ्लास्क के ऊपर रखा जाता है और इसका ध्यान रखा जाता है कि कपड़ा गीला रहे।

रिटार्ट में पड़े घोल को अब गर्म किया जाता है। कुछ देर बाद पानी उबलना शुरू कर देता है तथा इस तरह बनी भाप फ्लास्क में से गुजरती है। फ्लास्क में भाप ठंडी होकर पानी के बुलबुलों में परिवर्तित हो जाती है जो फ्लास्क में एकत्रित हो जाती है। इस तरह एकत्रित पानी शुद्ध होता है।
प्रश्न 30.
नमक से कपूर को अलग करने की विधि का नाम बताओ।
उत्तर-
नमक तथा कपूर में से कपूर ऊर्ध्वपातीय पदार्थ है। इसलिए दिए गए मिश्रण में से दोनों अवयवों को ऊर्ध्वपातन विधि द्वारा अलग कर सकते हैं।
प्रश्न 31.
आयोडीन तथा रेत को उनके मिश्रण से आप किस प्रकार पृथक करेंगे ?
उत्तर-

आयोडीन एक ऐसा पदार्थ है जो गर्म करने पर ठोस अवस्था से गैसीय अवस्था में आ जाता है जबकि रेत यह गुण नहीं दर्शाता। अत: रेत तथा आयोडीन के मिश्रण में से उनको अलग करने के लिए ऊर्ध्वपातन की विधि उपयोग में लाई जाती है।
विधि – दिए गए मिश्रण को पार्सिलेन डिश में डालकर तिकोने स्टैंड पर रखो । अब कांच की कीप को चित्र की भांति पार्सिलेन डिश पर उल्टा करके रखो। कीप का मुंह रूई से बंद कर दीजिए। डिश को तब तक गर्म करिए जब तक कि मिश्रण में से धुआं निकलना न बंद हो जाए। अब गर्म करना बंद कर दें और उसे ठंडा होने दें। आप कीप की सतह पर पीले रंग का ठोस आयोडीन जमा हुआ देखेंगे जबकि पार्सिलेन डिश में केवल रेत बच जाएगा।
प्रश्न 32.
तुम्हें रेत, पानी तथा सरसों के तेल का मिश्रण दिया गया है। तुम मिश्रण के अवयवों को किस प्रकार अलग करोगे ?
उत्तर-
दिए गए मिश्रण को किसी बर्तन में डालकर कुछ समय के लिए छोड़ दें। आप देखेंगे कि रेत अघुलनशील तथा भारी होने के कारण बर्तन की तली में बैठ जाएगी। अब पानी तथा सरसों के तेल के अमिश्रणीय घोल को सावधानीपूर्वक किसी दूसरे बर्तन में उंडेल (अर्थात् निथार) लें। अब पानी तथा सरसों के तेल के अमिश्रणीय घोल को पृथक्कारी कीप में डाल लें। सरसों का तेल तथा पानी अलग-अलग परतें बना लेंगे। अब स्टॉप कॉक को खोल कर पानी तथा सरसों के तेल को पृथक् कर लें।
प्रश्न 33.
प्रभाजी आसवन विधि का प्रयोग किस अवस्था में किया जा सकता है ? चित्र बनाकर इस विधि को समझाइए।
उत्तर-

जब दो या दो से अधिक घुलनशील द्रवों के क्वथनांक का अंतर 25 K से कम होता है, तो मिश्रण को प्रभाजी आसवन विधि से अलग किया जा सकता है। वायु की विभिन्न गैसों का पृथक्करण इसी विधि से किया जाता है। पेट्रोलियम उत्पादों से उनके विभिन्न उत्पादों को प्रभाजी आसवन विधि से प्राप्त किया जाता है।
प्रभाजी आसवन विधि का उपकरण साधारण आसवन विधि की तरह ही होता है। केवल आसवन फ़्लास्क और संघनक के बीच एक प्रभाजी स्तंभ का प्रयोग किया जाता है। साधारण प्रभाजी आसवन में एक नली का प्रयोग किया जाता है, जो शीशे के गुटकों से भरी होती है, जो वाष्प को ठंडा और संघनित होने के लिए सतह प्रदान करती है।
प्रश्न 34.
आसवन और प्रभाजी आसवन में अंतर लिखिए।
उत्तर-
| आसवन | प्रभाजी आसवन |
| 1. मिश्रण को भिन्न-भिन्न ताप पर गर्म करने से अवयव प्राप्त होते हैं। | 1. प्रभावी स्तंभ की अलग-अलग ऊँचाइयों से भिन्न-भिन्न प्रभाजी प्राप्त होते हैं। |
| 2. मिश्रण को सबसे कम तापमान पर उबलने वाले अवयव के क्वथनांक पर गर्म किया जाता है। | 2. मिश्रण को सबसे अधिक क्वथनांक वाले द्रव के क्वथनांक तक गर्म किया जाता है। |
| 3. इस क्रिया से एक ही बार में शुद्ध अवयव प्राप्त नहीं होता है। | 3. इस क्रिया से एक ही बार में शुद्ध अवयव प्राप्त हो जाता है। |
| 4. मिश्रण को बार-बार भिन्न उबाल बिंदुओं तक गर्म करना पड़ता है। | 4. मिश्रण को एक ही बार गर्म कर वाष्पित अवस्था में लाना पड़ता है। |
| 5. मिश्रण में एक बार में केवल एक ही अवयव का वाष्पन होता है। | 5. वाष्पित किए जाने वाले मिश्रण से एक साथ सभी अवयव वाष्पित होते हैं। |
| 6. मिश्रण के वाष्पों को निकास नली से गुजार कर संघनित किया जाता है। | 6. मिश्रण को गर्म करने के बाद वाष्पों को प्रभाजी स्तंभ तक भेजा जाता है। |
| 7. जिन द्रवों के क्वथनांक में 25K से अधिक अंतर हो। उन्हीं के लिए आसवन विधि का प्रयोग किया जाता है। | 7. 25 K से कम क्वथनांक के घुलनशील पदार्थों के मिश्रण के लिए ही इस विधि का उपयोग होता है। |
प्रश्न 35.
संघटन के आधार पर पदार्थ का वर्गीकरण आरेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर-
संघटन के आधार पर पदार्थ का वर्गीकरण-

प्रश्न 36.
पीने योग्य पानी को जल स्रोतों से प्राप्त करने के क्रमों का चित्र बनाइए।
उत्तर-

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1.
शुद्ध पदार्थ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वह पदार्थ जिसमें विद्यमान सभी कण समान रासायनिक प्रकृति के हों, उसे शुद्ध पदार्थ कहते हैं ।
प्रश्न 2.
मिश्रण किस से बनता है ?
उत्तर-
मिश्रण एक या एक से अधिक शुद्ध तत्वों या यौगिकों के मिलने से बनता है।
प्रश्न 3.
जल में घुले नमक (NaCl) के मिश्रण को किस विधि से अवयवों में पृथक् कर सकते हैं ?
उत्तर-
आसवन विधि से।
प्रश्न 4.
समांगी मिश्रण के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
जल में नमक, जल में चीनी।
प्रश्न 5.
विषमांगी मिश्रण के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
नमक और लोहे की छीलन, नमक और गंधक।
प्रश्न 6.
जल और तेल कैसा मिश्रण है-समांगी अथवा विषमांगी ?
उत्तर-
विषमांगी मिश्रण।
प्रश्न 7.
विलयन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण है।
प्रश्न 8.
किसी ठोस विलयन का उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
मिश्रधातु-पीतल, कांसा, बैल मेटल।
प्रश्न 9.
किसी गैसीय विलयन का उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
वायु।
प्रश्न 10.
पीतल मिश्रधातु के कौन-कौन से अवयव हैं ?
उत्तर-
जिंक और कॉपर।
प्रश्न 11.
विलायक क्या है ?
उत्तर-
विलयन का वह घटक जिस की मात्रा दूसरे से अधिक होती है और जो दूसरे घटक को विलयन में मिलाता है उसे विलायक कहते हैं।
प्रश्न 12.
विलयन क्या है ?
उत्तर-
विलयन का वह घटक जो कम मात्रा में होता है और विलायक में घुला होता है उसे विलय कहते हैं।
प्रश्न 13.
जल में चीनी के घोल में विलेय और विलायक के नाम लिखिए।
उत्तर-
चीनी विलेय और जल विलायक है।
प्रश्न 14.
टिंक्चर आयोडीन में विलेय और विलायक के नाम लिखिए।
उत्तर-
आयोडीन विलेय और एल्कोहल विलायक हैं।
प्रश्न 15.
वातयुक्त पेय (सोडा जल, कोक आदि) में विलेय और विलायक के नाम लिखिए।
उत्तर-
कार्बन डाइऑक्साइड गैस विलेय और जल विलायक हैं।
प्रश्न 16.
वायु किस प्रकार का विलयन है ?
उत्तर-
वायु गैस में गैस का विलयन है।
प्रश्न 17.
वायु में विलायक और विलेय का नाम लिखिए।
उत्तर-
नाइट्रोजन को वायु का विलायक और दूसरी गैसों को विलेय का नाम दिया जाता है।
प्रश्न 18.
विलयन के क्षणों का आकार लिखिए।
उत्तर-
विलयन के कण व्यास में 1 nm (10-‘m) से भी छोटे होते हैं।
प्रश्न 19.
संतृप्त विलयन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
किसी दिए हुए निश्चित तापमान पर यदि विलयन में विलेय पदार्थ नहीं घुलता है तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं।
प्रश्न 20.
असंतृप्त विलयन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
यदि एक विलयन में विलेय पदार्थ की मात्रा संतृप्त से कम है तो इसे असंतृप्त कहते हैं।
प्रश्न 21.
विलयन की सांद्रता क्या है ?
उत्तर-
विलायक की मात्रा अथवा आयतन में घुले हुए विलेय की मात्रा को विलयन की सांद्रता कहते हैं।
प्रश्न 22.
निलंबन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
निलंबन वह विषमांगी घोल है जिसमें ठोस द्रव में परिक्षेपित हो जाता है। विलेय पदार्थ कण घुलते नहीं बल्कि माध्यम में समृष्टि में निलंबित रहता है।
प्रश्न 23.
निलंबन अस्थाई क्यों माना जाता है ?
उत्तर-
निलंबन में छानन विधि से कणों को पृथक् किया जा सकता है इसलिए इसे अस्थाई माना जाता है।
प्रश्न 24.
निलंबित कण आँखों से क्यों देखे जा सकते हैं ?
उत्तर-
इस का आकार 100 nm (10-7m) से बड़ा होता है।
प्रश्न 25.
टिंडल प्रभाव क्या है ?
उत्तर-
कोलाइडल कणों के छोटे आकार से प्रकाश की किरण का फैलना टिंडल प्रभाव कहलाता है।
प्रश्न 26.
दूध की कोलाइडल प्रकृति का कैसे पता चलता है ?
उत्तर-
दूध टिंडल प्रभाव दिखाता है।
प्रश्न 27.
कोलाइड के कणों का आकार लिखिए।
उत्तर-
1 nm से 100 nm के बीच।
प्रश्न 28.
कोलाइड किस विधि से मिश्रण से पृथक् किए जा सकते हैं ?
उत्तर-
अपकेंद्रीकरण तकनीक से।
प्रश्न 29.
छानन विधि का प्रयोग कहाँ नहीं किया जाता ?
उत्तर-
जब द्रव में विद्यमान ठोस कण इतने छोटे हों कि छानक पत्र से बाहर चले जाए।
प्रश्न 30.
मिश्रणों के अपकेंद्रण का सिद्धांत क्या है ?
उत्तर-
अपकेंद्रण विधि द्वारा भारी कण नीचे बैठ जाते हैं और हल्के कण ऊपर ही रह जाते हैं।
प्रश्न 31.
अपकेंद्रण यंत्र प्रयोग कहाँ-कहाँ किया जाता है ?
उत्तर-
जाँच प्रयोगशाला में रक्त और मूत्र की जाँच, दूध से क्रीम और मक्खन प्राप्ति तथा वाशिंग मशीन में कपड़ों से जल निकालने के लिए।
प्रश्न 32.
दो अघुलनशील द्रवों के मिश्रण को किस सिद्धांत के आधार पर पृथक् करते हैं ?
उत्तर-
परस्पर न मिलने वाले द्रव अपने पनत्व के अनुसार पृथक्-पृथक् परतों में बंट जाते हैं।
प्रश्न 33.
नमक और अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण को किस विधि से पृथक् किया जा सकता है ?
उत्तर-
ऊर्ध्वपातन विधि से।
प्रश्न 34.
चार ऐसे ठोस पदार्थों के नाम लिखिए जिन का ऊर्ध्वपातन किया जा सकता है ?
उत्तर-
अमोनियम क्लोराइड, कपूर, नेपथालीन, एंथ्रासीन।
प्रश्न 35.
डाई कितने रंगों का मिश्रण होता है ?
उत्तर-
दो या दो से अधिक रंगों का मिश्रण।
प्रश्न 36.
क्रोमैटोग्राफ़ी किसे कहते हैं ?
उत्तर-
मिश्रण से रंगों के पृथक्कीकरण की विधि को क्रोमैटोग्राफ़ी कहते हैं।
प्रश्न 37.
क्रोमैटोग्राफ़ी के क्या उपयोग हैं ?
उत्तर-
डाई में रंगों को पृथक् करने, प्राकृतिक रंगों से रंग को अलग करने, मूत्र से चीनी पृथक् करने तथा रक्त से दवा पृथक् करने के लिए।
प्रश्न 38.
आसवन विधि का प्रयोग मिश्रण के किन घटकों को पृथक् करने के लिए किया जाता है ?
उत्तर-
जिन घटकों के क्वथनांकों के बीच काफ़ी अंतर होता है।
प्रश्न 39.
प्रभाजी आसवन का प्रयोग कहाँ किया जाता है ?
उत्तर-
जब दो या दो से अधिक घुलनशील द्रवों के क्वथनांक का अंतर 25K से कम होता है।
प्रश्न 40.
दो उदाहरण लिखिए जहाँ प्रभाजी आसवन विधि का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
वायु से विभिन्न गैसों तथा पेट्रोलियम उत्पादों से उन के विभिन्न घटकों को पृथक करने के लिए।
प्रश्न 41.
साधारण प्रभाजी स्तंभ में शीशे के गुटके क्या कार्य करते हैं ?
उत्तर-
ये वाष्प को ठंडा और संघनित होने के लिए सतह प्रदान करते हैं।
प्रश्न 42.
वायु कैसा मिश्रण है ?
उत्तर-
समांगी मिश्रण।
प्रश्न 43.
ऑक्सीजन का क्वथनांक कितना है ?
उत्तर-
183°C।
प्रश्न 44.
आर्गन का क्वथनांक क्या है ?
उत्तर-
186°C।
प्रश्न 45.
नाइट्रोजन का क्वथनांक क्या है ?
उत्तर-
196°C।
प्रश्न 46.
क्रिस्टलीकरण विधि का प्रयोग किस लिए किया जाता है ?
उत्तर-
ठोस पदार्थों को शुद्ध करने के लिए।
प्रश्न 47.
शुद्ध कॉपर सल्फेट को किस विधि से प्राप्त करेंगे ?
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण विधि से।
प्रश्न 48.
समुद्र से प्राप्त नमक को शुद्ध रूप में किस विधि से प्राप्त करेंगे ?
उत्तर-
वाष्पीकरण तथा क्रिस्टलीकरण विधि से।
प्रश्न 49.
क्रिस्टलीकरण विधि साधारण वाष्पीकरण से अच्छी क्यों है ?
उत्तर-
साधारण वाष्पीकरण में कुछ ठोस विघटित हो जाते या झुलस जाते हैं या कुछ अशुद्धियां रह जाती हैं।
प्रश्न 50.
फिटकरी को किस विधि से शुद्ध किया जाता है ?
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण से।
प्रश्न 51.
रासायनिक परिवर्तन में क्या-क्या परिवर्तित होता है ?
उत्तर-
रासायनिक संघटन और रासायनिक गुणधर्मों में परिवर्तन होता है।
प्रश्न 52.
जलना किस प्रकार का परिवर्तन है ?
उत्तर-
रासायनिक परिवर्तन।
प्रश्न 53.
रासायनिक संघटन के आधार पर पदार्थ को किन भागों में बांटा जाता है ?
उत्तर-
तत्व और यौगिक।
प्रश्न 54.
फ्रांस के किस वैज्ञानिक ने तत्व के लिए माना था कि वह पदार्थ का मूल रूप है ?
उत्तर-
एंटोनी लॉरेंट लेवाज़िर ।
प्रश्न 55.
पदार्थ का मूल रूप क्या है ?
उत्तर-
तत्व।
प्रश्न 56.
तत्व क्या है ?
उत्तर-
तत्व-यह पदार्थ का वह मूल रूप है जिसे रासायनिक प्रतिक्रिया से छोटे पदार्थों के टुकड़ों में नहीं बांटा जा सकता।
प्रश्न 57.
तत्वों को किन-किन भागों में बांटा जाता है ?
उत्तर-
धातु, अधातु और उपधातु ।
प्रश्न 58.
कौन-सी धातु कमरे के तापमान पर द्रव है ?
उत्तर-
पारा।
प्रश्न 59.
उपधातु किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जो धातु और अधातु के मध्यवर्ती गुणों को दर्शाते हैं उन्हें उपधातु कहते हैं।
प्रश्न 60.
उपधातु के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
बोरान, सिलिकन।
प्रश्न 61.
अधातुओं के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
हाइड्रोजन, आयोडीन, कॉर्बन, कोक, ब्रोमीन, क्लोरीन आदि।
प्रश्न 62.
धातुओं के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
सोडियम, पोटाशियम, लोहा, तांबा, चांदी, सोना आदि।
प्रश्न 63.
ज्ञात तत्वों की संख्या कितनी हैं ?
उत्तर-
112 तत्व ।
प्रश्न 64.
प्राकृतिक तत्व कितने हैं ?
उत्तर-
92 तत्व ।
प्रश्न 65.
कितने तत्व कमरे के तापमान पर गैसें हैं ?
उत्तर-
ग्यारह (11) तत्व ।
प्रश्न 66.
मिश्रण को पृथक् करने की पांच विधियों के नाम बताओ।
उत्तर-
- फिल्टरन
- क्रिस्टलीकरण
- ऊर्ध्वपातन
- आसवन
- वाष्पन।
प्रश्न 67.
चीनी की फैक्टरी में चीनी के क्रिस्टलों को अलग करने के लिए कौन-सी विधि प्रयोग की जाती
उत्तर-
‘अपकेंद्रण’ विधि।
Science Guide for Class 9 PSEB क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं InText Questions and Answers
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1.
शुद्ध पदार्थ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
शुद्ध पदार्थ – वे पदार्थ शुद्ध कहलाते हैं जिनमें विद्यमान सभी कण समान रासायनिक प्रकृति के होते हैं। शुद्ध पदार्थ में सदा एक ही प्रकार के कण होते हैं ; जैसे-सोना, तांबा, सोडियम क्लोराइड, चीनी आदि।
प्रश्न 2.
समांगी और विषमांगी मिश्रणों में अंतर बताएं।।
उत्तर-
समांगी और विषमांगी मिश्रणों में अंतर – समांगी मिश्रण का रूप, गुण तथा संरचना हर अवस्था में समरूप होता है। विषमांगी मिश्रण के अंगों के भौतिक गुण एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। जल में नमक और जल में चीनी समांगी मिश्रण के उदाहरण हैं। जल में तेल, नमक में गंधक, नमक में लोहे की छीलन, रेत में नमक, नमक में चीनी आदि विषमांगी मिश्रण के उदाहरण हैं।
प्रश्न 3.
उदाहरण के साथ समांगी एवं विषमांगी मिश्रणों में अंतर विभेद कीजिए। उत्तर-
| उत्तरसमांगी मिश्रण | विषमांगी मिश्रण |
| (1) इसके अवयव एक समान बंटे होते हैं। | (1) इसके अवयव एक समान रूप में बंटे नहीं होते। |
| (2) इसमें अंशों के गुण तथा संरचना हर अवस्था में समरूप होती है। उदाहरण-पीतल, कांसा, पानी में चीनी, एल्कोहल में पानी, वायु आदि। |
(2) इसमें अंशों के गुण एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। उदाहरण-रेत कण और लोह चूर्ण, रेत + अमोनियम क्लोराइड, पानी में चॉक, पानी में तेल आदि। |
प्रश्न 4.
विलयन, निलंबन और कोलाइड एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं ?
उत्तर-
विलयन, निलंबन और कोलाइड में भिन्नता-

प्रश्न 5.
एक संतृप्त विलयन बनाने के लिए 36g सोडियम क्लोराइड को 100g जल में 293K पर घोला जाता है। इस तापमान पर इसकी सांद्रता प्राप्त करें।
उत्तर-
विलेय पदार्थ का द्रव्यमान (सोडियम क्लोराइड) = 36g
विलायक का द्रव्यमान (जल) = 100g
विलयन का द्रव्यमान = विलेय पदार्थ का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान = 36g + 100g = 136g

= 36/136 x 100 = 26.47%
प्रश्न 6.
पेट्रोल और मिट्टी का तेल (Kerosene Oil) जोकि आपस में घुलनशील हैं, के मिश्रण को आप कैसे पृथक् करेंगे ? पेट्रोल तथा मिट्टी के तेल के क्वथनांकों में 25°C से अधिक का अंतराल है ?
उत्तर-
पेट्रोल और कैरोसीन के मिश्रण को साधारण आसवन विधि से अलग-अलग क । क्योंकि दोनों द्रव बिना अपघटन के उबल जाएंगे। उनके क्वथनांकों में 25°C के अधिक का अंतराल है।
प्रश्न 7.
पृथक करने की सामान्य विधियों के नाम दें-
(अ) दही से मक्खन
(ब) समुद्री जल से नमक
(स) नमक से कपूर।
उत्तर-
(अ) अपकेंद्रण
(ब) क्रिस्टलीकरण
(स) ऊर्ध्वपातन ।
प्रश्न 8.
क्रिस्टलीकरण विधि से किस प्रकार के मिश्रणों को पृथक् किया जा सकता है ?
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण विधि से ठोस पदार्थों में मिली अशुद्धियों को दूर किया जा सकता है। समुद्री जल में घुले नमक को शुद्ध रूप में प्राप्त करने तथा अशुद्ध नमूने से फिटकरी को पृथक् करने के लिए क्रिस्टलीकरण का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 9.
निम्न को रासायनिक और भौतिक परिवर्तनों में वर्गीकृत करें-
पेड़ों का काटना, मक्खन का एक बर्तन में पिघलना, अलमारी में जंग लगना, जल का उबल कर वाष्य बनना, विद्युत् तरंग का जल में प्रवाहित होना तथा उसका हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित होना, जल में साधारण नमक का घुलना, फलों से सलाद बनाना, लकड़ी और कागज़ का जलना।
उत्तर-
- पेड़ों का काटना = भौतिक परिवर्तन
- मक्खन का एक बर्तन में पिघलना = भौतिक परिवर्तन
- अलमारी में जंग लगना = रासायनिक परिवर्तन
- जल का उबल कर वाष्प बनना = भौतिक परिवर्तन।
- विद्युत तरंग का जल में प्रवाहित होना और उसका हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित होना = रासायनिक परिवर्तन
- जल में साधारण नमक का घुलना = भौतिक परिवर्तन
- फलों से सलाद बनाना = भौतिक परिवर्तन
- लकड़ी और कागज़ का जलना = रासायनिक परिवर्तन ।
प्रश्न 10.
अपने आस-पास की चीज़ों को शुद्ध पदार्थों या मिश्रण से अलग करने का प्रयत्न करें।
उत्तर-
शुद्ध पदार्थ – हाइड्रोजन, तांबा, सोना, नमक, चीनी, जल, लोहा, चांदी आदि।। मिश्रण-सोडा वाटर, नमक का घोल, शर्बत, धुवां, आइसक्रीम, गंधक-लोह चूर्ण का मिश्रण, जल और तेल का घोल।
PSEB 9th Class Science Guide क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं Textbook Questions and Answers
प्रश्न 1.
निम्नलिखित को पृथक् करने के लिए आप किन विधियों को अपनायेंगे ?
(a) सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन से पृथक् करने में।
(b) अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड तथा अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से पृथक् करने में।
(c) धातु के छोटे टुकड़े को कार के इंजन आयल से पृथक करने में।
(d) दही से मक्खन निकालने के लिए।
(e) जल से तेल निकालने के लिए।
(f) चाय से पतियों को पृथक् करने में।
(g) बालू से लोहे की पिनों को पृथक् करने में।
(h) भूसे से गेहूँ के दानों को पृथक् करने में।
(i) पानी में तैरते हुए महीन मिट्टी के कण को पानी से अलग करने के लिए।
(j) पुष्प की पंखुड़ियों के निचोड़ से विभिन्न रंजकों को पृथक् करने में।
उत्तर-
(a) आसवन विधि/वाष्यण से
(b) ऊर्ध्वपातन विधि
(c) फिल्टरीकरण या छानन विधि
(d) अपकेंद्रण विधि
(e) पृथक्करण विधि (पृथक्कारो कीप विधि)
(f) छानन विधि
(g) चुंबकीय पृथक्करण विधि
(h) फटकन विधि
(i) फिल्टरीकरण या अपकेंद्रण विधि
(j) क्रोमैटोग्राफी।
प्रश्न 2.
चाय तैयार करने के लिए आप किन-किन चरणों का प्रयोग करेंगे। विलयन, विलायक, विलेय, घुलना, घुलनशील, अघुलनशील, घुलेय (फिल्ट्रेट) तथा अवशेष शब्दों का प्रयोग करें।
उत्तर-
विलयन का चयन – चाय बनाने के लिए जल आधारभूत विलयन के रूप में चुना जाता है जिसमें चाना और दूध विलेय के रूप में जल रूपी विलायक में सरलता से मिल सकते हैं।
क्वथन – जल को इतने तापमान तक गर्म किया जाता है कि वह क्वथनांक प्राप्त कर उबल जाए। उसमें घुलनशील चीनी और अघुलनशील चाय पत्ती आवश्यक मात्रा में डाल विलेय दूध में मिलाओ।
छानन – अघुलनशील चाय पत्नी को घुलेय पदार्थ मान कर छलनी से छानो। घुलनशीला चीनी और दूध वाय बनारे में प्रयुक्त हो जाएंगे। अवशेष रूप में चाय पत्ती को बाहर निकाल कर फिल्ट्रेट रूप में चाय प्राप्त कर लो ।
प्रश्न 3.
प्रज्ञा ने तीन अलग-अलग पदार्थों की घुलनशीलताओं को अलग-अलग तापमान पर जांचा और नीचे दिये गये आंकड़ों को प्राप्त किया। प्राप्त हुए परिणामों को 100 ग्राम जल में विलेय पदार्थ की मात्रा, जा संतृप्त विलयन बनाने हेतु पर्याप्त है, अग्रलिखित तालिका में दर्शाया गया है।

(a) 50 ग्राम जल में 313 K पर पोटैशियम नाइट्रेट के संतृप्त विलयन को प्राप्त करने हेतु कितने ग्राम पोटैशियम नाइट्रेट की आवश्यकता होगी ?
(b) प्रज्ञा 353 K पर पोटैशियम क्लोराइड का संतृप्त विलयन तैयार करती है और विलयन को कमरे के तापमान पर ठंडा होने के लिए छोड़ देती है। जब विलयन ठंडा होगा तो वह क्या अवलोकित करेगी ? स्पष्ट करें।
(c) 293 K पर प्रत्येक लवण की घुलनशीलता का परिकलन करें। इस तापमान पर कौन-सा लवण सबसे अधिक घुलनशील होगा ?
(d) तापमान के परिवर्तन में लवण की घुलनशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
(a) 100g जल में 313K पर संतृप्त विलयन के लिए आवश्यक KNO3 = 62g
50g जल में 313K पर संतृप्त विलयन के लिए आवश्यक KNO3 = 62/100 x 50 = 31g
(b) 353K पर KCI के संतृप्त विलयन को जब प्रज्ञा ठंडा करने के लिए छोड़ देगी तो तापमान कम होने पर क्रिस्टलीकरण हो जाएगा जिसके परिणामस्वरूप KCI के क्रिस्टल बन जाएंगे।

(d) तापमान में परिवर्तन से लवणों की घुलनशीलता प्रभावित होती है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है वैसे-वैसे लवणों की घुलनशीलता बढ़ती जाती है।
प्रश्न 4.
निम्न की उदाहरण सहित व्याख्या करें :
(a) संतृप्त विलयन
(b) शुद्ध पदार्थ
(c) कोलाइड
(d) निलंबन।
उत्तर-
(a) संतृप्त विलयन – किसी निश्चित तापमान पर यदि विलयन में विलेय पदार्थ नहीं घुलता है तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं। भिन्न पदार्थों की भिन्न तापमानों पर विलयन क्षमता अलग-अलग होती है।
(b) शुद्ध पदार्थ – शुद्ध पदार्थ वह है जिसे केवल एक ही प्रकार के अणु हैं। शुद्ध पदार्थों में भौतिक तथा रासायनिक गुण होते हैं। सभी यौगिक शुद्ध पदार्थ हैं। उदाहरण-साधारण नमक, चीनी, सोना, तांबा, पारा आदि।
(c) कोलाइड – यह एक विषमांगी मिश्रण है जिसमें कणों का आकार 1 nm से 100 nm के बीच होता है जिन्हें आंखों से नहीं देखा जा सकता। ये कण इतने बड़े आकार के होते हैं कि प्रकाश की किरण को फैला सकें। ये कण तल पर नहीं बैठते लेकिन अपकेंद्रीकरण तकनीक से पृथक् किए जा सकते हैं। उदाहरण-कोहरा, बादल, धुआं, दूध, स्पंज, जेली, पनीर, मक्खन आदि।
(d) निलंबन – वह विषमांगी घोल जो ठोस द्रव में परिक्षेपित हो जाता है उसे निलंबन कहते हैं। इसमें विलेय पदार्थ कण घुलते नहीं हैं। बल्कि माध्यम की समष्टि में निलंबित रहते हैं। ये आंखों से देखे जा सकते हैं। छानन विधि से इन्हें मिश्रण से अलग किया जा सकता है। उदाहरण-जल में चाक पाऊडर।
प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से प्रत्येक को समांगी और विषमांगी मिश्रणों में वर्गीकृत करें : सोडा-जल, लकड़ी, बर्फ, वायु, मिट्टी, सिरका, छनी हुई चाय।
उत्तर-
सोडा जल = समांगी
लकड़ी = विषमांगी
बर्फ = समांगी
वायु = समांगी
मिट्टी = विषमांगी
सिरका = समांगी
छनी हुई चाय = समांगी
समांगी प्रश्न 6.
आप किस प्रकार पुष्टि करेंगे कि दिया हुआ रंगहीन द्रव शुद्ध जल है ?
उत्तर-
रंगहीन द्रव में किसी प्रकार के आंखों से दिखाई देने वाले रंग के कण न होने की स्थिति में जल के शुद्ध होने की पुष्टि होती है लेकिन उसमें किसी प्रकार की गंध और स्वाद भी नहीं होना चाहिए। इसे 100°C या 373 K पर उबल जाना चाहिए।
प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-सी वस्तु शुद्ध पदार्थ है ?
(a) बर्फ
(b) दूध
(c) लोहा
(d) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
(e) कैल्सियम ऑक्साइड
(f) पारा
(g) ईंट
(h) लकड़ी
(i) वायु।
उत्तर-
लोहा, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, पारा, कैल्शियम ऑक्साइड।
प्रश्न 8.
निम्नलिखित मिश्रणों में से विलयन की पहचान करें।
(a) मिट्टी
(b) समुद्री जल
(c) वायु
(d) कोयला
(e) सोडा जल।
उत्तर-
समुद्री जल, वायु, सोडा जल।
प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन टिंडल प्रभाव को प्रदर्शित करेगा ?
(a) नमक का घोल
(b) दूध
(c) कॉपर सल्फेट का विलयन
(d) स्टार्च विलयन।
उत्तर-
दुध, स्टार्च विलयन।
प्रश्न 10.
निम्नलिखित को तत्व यौगिक तथा मिश्रण में वर्गीकृत करें :-
(a) सोडियम
(b) मिट्टी
(c) चीनी का घोल
(d) चांदी
(e) कैल्सियम कार्बोनेट
(f) टिन
(g) सिलिकन
(h) कोयला
(i) वायु
(j) साबुन
(K) मीथेन
(l) कार्बन डाइऑक्साइड
(m) रक्त।
उत्तर-
तत्व = सोडियम, चांदी, टिन, सिलिकन
यौगिक = कैल्शियम कार्बोनेट, मिथेन, कार्बन डाइऑक्साइड
मिश्रण = मिट्टी, चीनी का घोल, कोयला, साबुन, वायु, रक्त।
प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से कौन-से परिवर्तन रासायनिक हैं ?
(a) पौधों की वृद्धि
(b) लोहे में जंग लगना
(c) लोहे के चूर्ण और बालू को मिलाना
(d) खाना पकाना
(e) भोजन का पाचन
(1) जल से बर्फ बनना
(५) मोमबत्ती का जलना।
उत्तर-
लोहे में जंग लगना, खाना पकाना, भोजन का पाचन, मोमबत्ती का जलना।


