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PSEB Solutions for Class 9 Science Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

PSEB Solutions for Class 9 Science Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

PSEB 9th Class Science Solutions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

→ भूकंप तथा तटवर्ती भाग को प्रभावित करने वाले चक्रवात आसपास के लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।

→ ‘स्वास्थ्य’ वह अवस्था है जिसके अंतर्गत शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कार्य समुचित क्षमता से उचित प्रकार किया जा सके।

→ हमारा सामाजिक पर्यावरण हमारे व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है।

→ स्वास्थ्य के लिए भोजन, अच्छी आर्थिक परिस्थितियां तथा कार्य आवश्यक हैं।

→ सामुदायिक समस्याएं हमारे व्यक्तिगत स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

→ जब कोई रोग होता है तब शरीर के एक या अनेक अंगों एवं तंत्रों में क्रिया या संरचना में खराबी दिखाई देने लगती है।

→ जो रोग लंबी अवधि तक रहते हैं उन्हें दीर्घकालिक रोग कहते हैं।

→ जो रोग कम अवधि तक रहते हैं उन्हें तीव्र रोग कहते हैं।

→ दीर्घकालिक रोग तीव्र रोग की अपेक्षा स्वास्थ्य पर लंबे समय तक विपरीत प्रभाव बनाए रखता है।

→ जिन रोगों के तात्कालिक कारण सूक्ष्मजीव होते हैं उन्हें संक्रामक रोग कहते हैं।

→ कैंसर रोग आनुवांशिक असामान्यता के कारण होते हैं; अधिक वज़न और व्यायाम न करने से उच्च रक्तचाप होता है-पर ये संक्रामक रोग नहीं हैं।

→ हेलीको बैक्टर पायलौरी नामक बैक्टीरिया पेप्टिक व्रण का कारण होता है।

→ खांसी-जुकाम, इंफ्लुएंजा, डेंगु बुखार, AIDS आदि रोग वायरस से होते हैं। टायफॉयड, हैज़ा, क्षय रोग, एंथ्रेक्स आदि बैक्टीरिया से होते हैं। अनेक त्वचा रोग विभिन्न प्रकार की फंजाई से होते हैं। प्रोटोज़ोआ से मलेरिया तथा कालाजार होते हैं तथा फीलपांव नामक रोग कृमि की विभिन्न स्पीशीज़ से होता है।

→ वाइरस, बैक्टीरिया तथा फंजाई का गुणन अत्यंत तेज़ी से होता है।

→ कोई औषधि किसी एक जैव क्रिया को रोकती है तो इस वर्ग के अन्य सदस्यों को भी प्रभावित करती है पर वही औषधि अन्य वर्ग से संबंधित रोगाणुओं पर प्रभाव नहीं डालती।

→ वायु से फैलने वाले रोग हैं-खांसी-जुकाम, निमोनिया तथा क्षय रोग।

→ संक्रमित जल से रोग फैलते हैं।

→ सिफलिस, AIDS आदि रोग लैंगिक संपर्क से स्थानांतरित होते हैं।

→ कुछ रोग मच्छर जैसे अन्य जंतुओं द्वारा संचारित होते हैं।

→ सूक्ष्म जीव की विभिन्न स्पीशीज शरीर के विभिन्न भागों में विकसित होती हैं। हवा से नाक में प्रवेश करने पर वे फेफड़ों में जाते हैं या मुँह के द्वारा प्रवेश करने से आहार नाल में जाते हैं।

→ HIV लैंगिक अंगों से शरीर में प्रवेश करता है पर लसीका ग्रंथियों में फैलता है। जापानी मस्तिष्क ज्वर का वायरस मच्छर के काटने से शरीर में पहुंचता है पर मस्तिष्क को संक्रमित करता है।

→ HIV-AIDS के कारण शरीर छोटे संक्रमणों का मुकाबला नहीं कर पाता, जो रोगी की मृत्यु का कारण बनते हैं।

→ रोगों के निवारण की दो विधियां हैं-सामान्य और विशिष्ट।

→ संक्रामक रोगों से बचने के लिए स्वच्छता आवश्यक है।

→ हमारे शरीर में स्थित प्रतिरक्षा तंत्र रोगाणुओं से लड़ता है। विशिष्ट कोशिकाएं रोगाणुओं को मार देती हैं।

→ संक्रामक रोगों से बचने के लिए उचित मात्रा में पौष्टिक भोजन आवश्यक है।

→ विश्व भर से चेचक का उन्मूलन किया जा चुका है। चेचक के एक बार हो जाने के बाद पुनः इससे ग्रसित होने की संभावना नहीं रहती। यह प्रतिरक्षाकरण के नियम का आधार है।

→ टेटनस, डिप्थीरिया, कूकर खांसी, चेचक, पोलियो आदि से बचने के टीके अब उपलब्ध हैं।

→ हिपेटाइटिस ‘A’ का टीका अब देश में उपलब्ध है। पांच वर्ष की आयु तक के अधिकांश बच्चों में पानी से ही इसके वायरस के प्रभाव में आ चुका होता है।

→ स्वास्थ्य (Health)-स्वास्थ्य वह अवस्था है जिसके अंतर्गत शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक कार्य समुचित क्षमता से उचित प्रकार किया जा सके।

→ तीव्र रोग (Acute Disease)-जिस रोग की अवधि कम होती है उसे तीव्र रोग कहते हैं।

→ दीर्घकालिक रोग (Chronic Disease) -जो रोग लंबी अवधि तक अथवा जीवनपर्यंत रहते हैं उन्हें दीर्घकालिक रोग कहते हैं।

→ संक्रामक/संचरणीय रोग (Communicable diseases)-ये रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति, सूक्ष्म जीवों, जीवाणुओं, विषाणुओं तथा प्रोटोज़ोआ द्वारा फैलते हैं।

→ असंक्रामक/असंचरणीय रोग (Non-Communicable diseases)-ये उपार्जित रोग हैं तथा ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक नहीं फैलते।

→ प्रतिरक्षी (Antibodies)-जो पदार्थ शरीर में रोगों से लड़ते हैं और हमारी रोगों से रक्षा करते हैं, उन्हें प्रतिरक्षी कहते हैं।

→ हीनता-जन्य रोग (Deficiency diseases)-पर्याप्त तथा संतुलित आहार न मिलने के कारण होने वाले रोग को हीनता-जन्य रोग कहते हैं।

→ कुपोषण (Malnutrition) हीनता-जन्य रोगों से उत्पन्न स्थिति को कुपोषण कहते हैं जो कम आहार तथा असंतुलित आहार के कारण होता है।

→ एलर्जी (Allergy)-इस रोग में किसी एक व्यक्ति में किसी विशेष पदार्थ के प्रति संवेदनशीलता उत्पन्न हो जाती है।

→ आनुवंशिक रोग (Hereditary diseases)-ये रोग माता-पिता से संतान में स्थानांतरित होते हैं।

→ टीकाकरण (Vaccination)-रोगों की रोकथाम के लिए टीका लगवाना टीकाकरण है। यह रोकथाम का एक अच्छा उपाय है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
संचरणीय तथा असंचरणीय रोग किन्हें कहते हैं ? संचरणीय रोग किस प्रकार फैलते हैं ? वर्णन करो।
उत्तर-
संचरणीय रोग – ये ऐसे रोग हैं जो सूक्ष्मजीवों, विषाणुओं, जीवाणुओं, कवकों तथा प्रोटोजोआ द्वारा उत्पन्न होते हैं । इन रोगों के रोगाणु वायु, जल, भोजन, संपर्क तथा कीटों द्वारा संचारित होते हैं । ये रोग बीमार व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में संचारित होते हैं। इसलिए इन्हें संचरणीय रोग कहते हैं।

असंचरणीय रोग – ये रोग बीमार व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में नहीं फैलते। इसलिए इन्हें असंचरणीय रोग कहते हैं। डायबिटीज़, कैंसर, एनीमिया, क्वाशियोरकार आदि असंचरणीय रोग हैं।

संचरणीय रोग के फैलाव की विधि – संचरणीय रोग रोगी मनुष्य से स्वस्थ मनुष्य में दो प्रकार से फैलते हैं-
(i) प्रत्यक्ष स्थानांतरण
(i) अप्रत्यक्ष स्थानांतरण।

(i) प्रत्यक्ष स्थानांतरण – यह निम्नलिखित ढंगों द्वारा होता है-

  1. यह रोगी व्यक्ति के खांसने, छींकने तथा बात करने आदि से होता है। इसे ड्रोपलेट संक्रमण भी कहते हैं।
  2. यह संक्रमित व्यक्ति के स्वस्थ व्यक्ति से संपर्क द्वारा होता है।
  3. यह व्यक्ति के भूमि के साथ संपर्क द्वारा होता है।
  4. यह जंतुओं के काटने से होता है।
  5. यह रक्त द्वारा संचारित होता है।

(ii) अप्रत्यक्ष स्थानांतरण – यह निम्नलिखित ढंगों द्वारा होता है-

  1. यह कीटों तथा अन्य जंतुओं द्वारा होता है।
  2. यह संक्रमित जल, भोजन तथा वायु द्वारा होता है।
  3. यह धुआं तथा धूल आदि द्वारा होता है।

प्रश्न 2.
यदि आपका घर स्वच्छ है किंतु पास-पड़ोस स्वस्थ नहीं है तो आप स्वस्थ रह सकते हैं ? यदि नहीं तो क्यों?
उत्तर-
हमारे स्वास्थ्य पर वातावरण का प्रभाव अवश्य पड़ता है। यदि हमारा वातावरण दूषित है तो यह निश्चित है कि उसका विपरीत प्रभाव हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा। यदि हमारा घर स्वच्छ हो, परंतु यदि पड़ोस का वातावरण अस्वच्छ है तो निश्चित रूप से हम स्वच्छ नहीं रह सकते। पड़ोस के लोगों की अस्वच्छ व्यक्तिगत आदतों के कारण वातावरण को स्वच्छ रखना कठिन होता है। यदि पड़ोस में रहने वाले लोग अपने अपशिष्ट पदार्थों का विसर्जन खुले में करें, गंद, गोबर गली में फेंके या नालियों द्वारा मल-मूत्र बाहर निकालें तो वातावरण किस प्रकार स्वच्छ रहेगा?

इन्हीं अपशिष्ट पदार्थों तथा गंदगी के ढेरों में रोगों को फैलाने वाले अनेक सूक्ष्म जीव तथा रोगाणु पलते हैं, जिनको मच्छर तथा मक्खियां हमारे भोजन पर लाकर छोड़ देती हैं। यही प्रदूषित भोजन हमारे स्वास्थ्य को खराब करता है। अतः अपना और पड़ोस का वातावरण शुद्ध रखना अत्यंत आवश्यक होगा।

प्रश्न 3.
मक्खी किस प्रकार संक्रमण फैलाती है?
उत्तर-
घरेलू मक्खियां संक्रमण फैलाने वाले जीवों के लिए सामान्य वाहक हैं। मक्खियों को प्रवृत्ति सदा कूड़े-कर्कट, मानव मल-मूत्र तथा भोजन की ओर आकृष्ट होने की रहती है। जब वे मल-मूत्र या सड़े-गले पदार्थों पर बैठती हैं तो असंख्य सूक्ष्म जीव उनकी टांगों, बालों तथा शरीर के अन्य भागों में चिपक जाते हैं। जब ये मक्खियां हमारे खाद्य-पदार्थों पर बैठती हैं तो वे सूक्ष्मजीव उन पदार्थों पर छोड़ जाती हैं। जब मनुष्य इन सूक्ष्म जीवों वाले खाद्य-पदार्थों का सेवन करता है तो वे सूक्ष्म जीव शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। शरीर में उचित वातावरण पाकर इनकी संख्या में बहुत तेजी से वृद्धि हो जाती है जिस कारण हम रोगग्रस्त हो जाते हैं। इन मक्खियों द्वारा टायफाइड, हैज़ा आदि रोगाणु हम तक पहुंचते हैं। इसके अतिरिक्त मक्खियां घार, आँखों तथा त्वचा को भी संक्रमित करती हैं।

प्रश्न 4.
अच्छा स्वास्थ्य रखने में शिक्षा किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर-
स्वास्थ्य शिक्षा का ज्ञान ही मनुष्यों तथा समुदायों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य संबंधी सामान्य ज्ञान हो तो वह अपने तथा समुदाय के स्वास्थ्य को ठीक रखने में सहायता कर सकता है। स्वास्थ्य शिक्षा से हमें यह पता चलता है कि संतुलित आहार के लिए किस-किस पदार्थ का सेवन करना चाहिए जिससे सभी पोषक तत्व प्राप्त हो सकें। संतुलित आहार मनुष्य के शरीर में ऊर्जा तथा प्रतिरक्षक प्रदान करता है। इस प्रकार विभिन्न रोगों के फैलने के कारण तथा उनकी रोकथाम के उपाय पता हों तो स्वयं तथा अन्य व्यक्तियों को समय से पहले ही रोग से प्रभावित होने से बचाया जा सकता है। इस प्रकार का ज्ञान प्राप्त करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना होनी चाहिए।

कुछ सामान्य बातों का ज्ञान सभी के लिए आवश्यक होना चाहिए जैसे कि मलेरिया मच्छरों द्वारा फैलता है जो खड़े पानी में, तालाबों आदि में पलते हैं; मक्खियां गंदगो पर बैठकर हमारे भोजन पर करोड़ों को संख्या में कीटाणु छोड़ जाती हैं जिनसे हैजा, पेचिश, उल्टियां आदि लग सकती हैं। अतः स्वस्थ शिक्षा का ज्ञान होने से मक्खी, मच्छरों को मारा जा सकता है या इनसे बचाव किया जा सकता है। यदि इस प्रकार का ज्ञान प्राप्त हो तो सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण को नियंत्रण में रखा जा सकता है। इस प्रकार की शिक्षा का प्रसार हम सबको करना चाहिए ताकि सभी को स्वास्थ्य संबंधी मूलभूत विषयों की जानकारी तथा उचित प्रशिक्षण प्राप्त हो।

गांवों में सफाई का विशेष ध्यान रखने की विधियां, स्वच्छ पानी की व्यवस्था आदि का ज्ञान सभी को हो जाए तो कई रोगों से बचा जा सकता है। शिशु को कौन-से टीके किस आयु में लगवाने हैं-इस प्रकार की जानकारी सभी को उपलब्ध हो तो शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य शिक्षा से अनेक प्रकार की असुविधाओं से सभी को सुरक्षित रखा जा सकता है।

प्रश्न 5.
रोगों को रोकने या उनको फैलने से रोकने के लिए कुछ उपाय लिखिए।
उत्तर-
रोगों को रोकने या उनको फैलने से रोकने के उपाय-

  1. शरीर को स्वच्छ रखना चाहिए तथा साफ़ वस्त्र पहनने चाहिए।
  2. आहार संतुलित होना चाहिए ताकि शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा ठीक बनी रहे।
  3. खाद्य पदार्थों को मक्खियों, मच्छरों, धूल-कण आदि से बचा कर सुरक्षित रखना चाहिए।
  4. घर तथा अड़ोस-पड़ोस में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि मच्छर वहां पर वृद्धि न कर सकें।
  5. सीवर व्यवस्था बहुत अच्छी होनी चाहिए ताकि जल-मल का विसर्जन ठीक हो।
  6. मानव के मल-मूत्र एवं घरेलू अपशिष्ट का निपटान ठीक प्रकार से होना चाहिए।
  7. खुले स्थानों पर मल त्यागने से पर्यावरण दूषित होता है तथा नदी-नालों का जल भी दूषित हो जाता है। इसलिए कम लागत वाले ढके पाखानों का निर्माण करना चाहिए।
  8. धूम्रपान, शराब या संवेदना मंदक पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए।
  9. यौन संबंध द्वारा फैलने वाले सिफ़लिस, गोनोरिया, एड्स जैसे रोगों की रोकथाम संयमित तथा स्वच्छ जीवन पद्धति द्वारा की जा सकती है।
  10. व्यक्तिगत तथा सामुदायिक स्तर पर पर्यावरण को साफ़ रखना चाहिए।

प्रश्न 6.
अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक मूल परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य उसके शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक जीवन क्षमता की सामान्य स्थिति होता है। अच्छा स्वास्थ्य होने पर भी हम व्यक्ति के रूप में, एक समाज के रूप में, एक राष्ट्र के रूप में, अपनी क्षमता का उपयोग कर सकते हैं। अस्वस्थता तथा रोगों से मुक्ति अच्छे स्वास्थ्य के लक्षण हैं। चिंताओं तथा सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक तनावों से स्वतंत्र होना एक अच्छा स्वास्थ्य प्रदर्शित करता है। अत: अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अनलिखित मूल परिस्थितियां होती हैं-

1. उपयुक्त आहार – अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार आवश्यक होता है क्योंकि संतुलित आहार से ही हमें पोषक तत्व मिलते हैं जो शरीर को संक्रमण से बचाते हैं तथा प्रतिरक्षण प्रदान करते हैं।

2. व्यक्तिगत एवं घरेलू स्वास्थ्य विज्ञान – स्वास्थ्य व्यक्तिगत तथा सामुदायिक स्तर पर ठीक होना चाहिए। व्यक्तिगत स्तर पर शरीर स्वच्छ रखना, साफ़-सुथरे कपड़े पहनना, संतुलित आहार लेना तथा मादक एवं संवेदनामंदक पदार्थों से दूर रहना आदि बातों का ध्यान रखना होता है। घरेलू स्वास्थ्य के अंतर्गत, घरेलू अपशिष्ट पदार्थों का निपटान, मल-मूत्र त्यागने और विसर्जन का ठीक से निपटान तथा खाद्य पदार्थों को जीवाणुओं तथा रोगाणुओं से सुरक्षित रखना आदि प्रबंधन आते हैं। सूक्ष्म जीव ही हमारे भोजन को संक्रमित करके खराब करते हैं । इसलिए घरों में खाद्य पदार्थों को जालीदार अलमारी में रखने से मक्खियों तथा कीटों से बचाया जा सकता है। मल-मूत्र त्यागने के पश्चात् तथा भोजन से पहले हाथों को ठीक प्रकार से साबुन तथा पानी से धोने से सूक्ष्मजीवों से कुछ सीमा तक छुटकारा पाया जा सकता है।

3. स्वच्छ भोजन, जल एवं वायु – बाज़ार से फल, सब्जियां आदि लाने पर उन्हें स्वच्छ पानी से धोना चाहिए, जिसे पीड़कनाशक या धूल आदि जो बाहरी आवरण पर चिपके होते हैं, वे उतर जाते हैं और फल तथा सब्जियां सूक्ष्म जीव, कृमि आदि के प्रभाव से बच जाती हैं। इन सब्जियों को साफ़, ठंडे तथा मक्खी रहित स्थान पर भंडारित करना चाहिए।

पानी को उबाल कर छान कर पीने से पानी कीटाणु रहित हो जाता है। बीमारी वाले दिनों में तो अवश्य ही पानी को उबाल कर ही उपयोग में लाना चाहिए, ऐसा करने से पानी जीवाणुओं से मुक्त हो जाता है। बर्तन धोने, खाना पकाने तथा पीने आदि के लिए कभी भी तालाब या नदी का पानी प्रयोग नहीं करना चाहिए।

जिस प्रकार स्वच्छ भोजन और जल जीवन के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार शुद्ध, स्वच्छ तथा ताजी वायु भी स्वास्थ्य के लिए महत्त्वपूर्ण है। यही शुद्ध वायु शरीर में भोजन का दहन करके शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। प्रदूषित वायु में सांस लेने से श्वसन रोग हो जाते हैं। तंबाकू का प्रयोग करने वालों में कैंसर तथा हृदय रोगों की संभावना अधिक रहती है। धुएं रहित चूल्हों का उपयोग करने से उसके हानिकारक प्रभावों से महिलाओं को बचाया जा सकता है।

4. व्यायाम, विश्राम तथा व्यसन – नियमित व्यायाम शरीर तथा मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है। समय पर व्यायाम, विश्राम एवं सोना शारीरिक प्रक्रियाओं को दक्षतापूर्ण कार्य करने में सहायक है। अच्छा स्वास्थ्य होने पर भी यदि हमें किसी व्यसन की आदत पड़ जाए तो शरीर में मानसिक तथा शारीरिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। तंबाकू के प्रयोग से मुख और फेफड़ों का कैंसर हो जाता है। शराब मस्तिष्क की जागरूकता को कम करती है तथा इसका अधिक सेवन यकृत में विकार उत्पन्न करता है। अतः इन मादक और नशीले पदार्थों के व्यसन से बचना चाहिए।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
स्वास्थ्य किसे कहते हैं ?
उत्तर-
स्वास्थ्य – स्वास्थ्य मानव शरीर के सभी अंगों तथा तंत्रों के ठीक से कार्य करने की स्थिति है। किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य उसके शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक जीवन क्षमता की सामान्य स्थिति है। उद्देश्यपूर्ण जीवन व्यतीत करने के लिए अच्छा स्वास्थ्य आवश्यक है। अस्वस्थता तथा रोगों से मुक्ति अच्छे स्वास्थ्य के लक्षण हैं किंतु स्वास्थ्य में चिंताओं तथा सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक तनावों से स्वतंत्रता भी इसमें सम्मिलित है। स्वास्थ्य अच्छा होने पर हम व्यक्ति, समाज तथा एक राष्ट्र के रूप में अपनी क्षमता का सर्वोत्तम उपयोग कर सकते हैं।

प्रश्न 2.
पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना किस प्रकार कठिन हो गया है ?
उत्तर-
बढ़ती जनसंख्या तथा घनी आबादी के क्षेत्रों में रहन-सहन के कारण अपशिष्ट पदार्थों की अधिकता वायु तथा जल को प्रदूषित करती है। कारखानों और विकिरणों के कारण उत्पन्न प्रदूषण आदि ऐसी समस्याएं हैं जो पर्यावरण को अधिक मात्रा में प्रदूषित करती हैं। व्यक्तिगत आदतें सारे समुदाय के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती हैं। वाहनों से निकला धुआं, चिमनियों से निकला धुआं तथा सह-उत्पाद सभी मिलकर वायु तथा जल को अर्थात् पर्यावरण को लगातार प्रदूषित करते रहते हैं। इसके अतिरिक्त घरेलू तथा सामुदायिक अस्वस्थ परंपराएं भी पर्यावरण पर कुप्रभाव डालती हैं।

प्रश्न 3.
व्यक्तिगत स्तर पर ठीक स्वास्थ्य के लिए हमारे क्या कर्तव्य हो सकते हैं?
उत्तर-
व्यक्तिगत स्तर पर शरीर को प्रतिदिन साफ़ पानी से धोना चाहिए ताकि उस पर चिपकी धूल आदि हट जाए। त्वचा साफ़ हो तो दुर्गंध नहीं आती तथा चर्म रोग आदि के लगने की संभावना कम होती है। हमारे कपड़े स्वच्छ होने चाहिएं। बर्तनों तथा खाद्य पदार्थों को मक्खियों तथा कीटों से बचा कर जालीदार अलमारी में रखना चाहिए। मल-मूत्र त्यागने के पश्चात् तथा भोजन से पहले हाथों को साबुन से तथा पानी से अच्छी तरह धो लेने से वे रोगाणु मुक्त हो जाते हैं। पानी को उबाल कर पीना लाभप्रद होगा।

प्रश्न 4.
संचरणीय तथा असंचरणीय रोगों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
संचरणीय तथा असंचरणीय रोगों में अंतर-

संचरणीय रोग असंचरणीय रोग
(1) यह रोग शरीर में रोगाणुओं के प्रवेश कर जाने के कारण होता है। (1) ये रोग अन्य कारणों से उत्पन्न होते हैं-जैसे उपापचय, संतुलित भोजन न मिलने से, शरीर के किसी भाग में अनियंत्रित कोशिका विभाजन इत्यादि से।
(2) रोग का फैलाव वायु, पानी, दूध, भोजन तथा माता के प्लेसैंटा से भ्रूण में हो सकता है। (2) इनके फैलाव के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
(3) ये रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संपर्क द्वारा फैलते हैं। (3) ये रोग शरीर में उत्पन्न होते हैं। संपर्क द्वारा नहीं फैलते।

प्रश्न 5.
सूक्ष्मजीव हमारे शरीर में किन-किन साधनों से प्रवेश करते हैं ? प्रत्येक का उदाहरण लिखिए।
उत्तर-
सूक्ष्मजीव हमारे शरीर में वायु, जल तथा भोजन द्वारा, त्वचीय स्पर्श द्वारा प्रवेश करते हैं। सामान्य सर्दी या जुकाम में वायरस वायु द्वारा फैलते हैं। हैजा, जठरांत्र शोथ तथा मियादी बुखार के जीवाणु भोजन तथा जल के माध्यम से फैलते या शरीर में प्रवेश करते हैं। रिंगवर्म एक प्रकार की फंगस का संक्रमण है। यह त्वचा के स्पर्श द्वारा फैलती है। सिफलिस, गोनोरिया जैसे यौन रोग जीवाणुओं से फैलते हैं और एड्स वायरस से फैलता है।

प्रश्न 6.
उन दो स्थितियों को बताइए जिसके कारण हमारे देश में स्वास्थ्य समस्याओं का उन्मूलन अभी तक संभव नहीं हो सका।
उत्तर-

  1. चिकित्सा सुविधाओं के अत्यधिक प्रसार के बाद भी इन सुविधाओं की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध नहीं है।
  2. इन रोगों को जड़ से समाप्त कर देने के लिए सामाजिक स्तर पर आवश्यक परिस्थितियों का अभाव है। मलमूत्र के सुरक्षित विसर्जन के लिए उपयुक्त व्यवस्था का न होना तथा जनता में शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान के कारण अभाव के प्रत्येक नागरिक इस दिशा में सक्रिय योगदान प्रदान नहीं कर पाता।

प्रश्न 7.
डायरिया क्या है ? इससे बच्चे को बचाने की विधि लिखिए।
उत्तर-
डायरिया के कारण बच्चे को उल्टी तथा दस्त लगते हैं जिसके परिणाम में उनमें निर्जलीकरण की संभावना बढ जाती है। निर्जलीकरण से बचाने के लिए बच्चे को निम्नलिखित विधि से तैयार किया घोल एक दिन में 5-6 बार दिया जाना चाहिए। एक गिलास स्वच्छ पानी में तीन चम्मच चीनी, एक चौथाई चम्मच नमक, एक चुटकी खाने का सोडा तथा कुछ बूंदें नींबू के रस की मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इसके अतिरिक्त सूप, दाल, चावल का पानी तथा छाछ भी पानी की कमी को पूरा करते हैं।

प्रश्न 8.
एक वर्ष तक के बच्चे को लगने वाले टीके लिखिए।
उत्तर-

  1. B.C.G. – यह टीका शुरू में ही क्षय रोग से बचाने के लिए लगाया जाता है।
  2. खसरा का टीका – यह छोटी माता या खसरा से बचने के लिए लगाया जाता है।
  3. पोलियो – इसकी दवाई मुंह द्वारा दी जाती है। प्रत्येक मास के अंतर पर इसे तीन बार दिया जाना चाहिए।
  4. D.P.T. के तीन टीके एक-एक मास के अंतर पर दिये जाते हैं। इनसे बच्चा डिप्थीरिया, कुकुर खांसी तथा टिटनेस से सुरक्षित रहता है।

प्रश्न्र 9.
क्षय रोग कौन-से अंग को प्रभावित करता है? यह कैसे फैलता है ? इससे कैसे बचा जा सकता है ?
उत्तर-
क्षय रोग मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, परंतु बाद में लिंफनोड, मस्तिष्क, अस्थियां तथा आंत भी प्रधावित हो जाते हैं।
गोग थक दवारा फैलता है।
इससे बचने के लिए बी० सी० जी० (B.C.G.) के टीके लगवाने चाहिए।

प्रश्न 10.
यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट जाए तो क्या उपाय करना चाहिए?
उत्तर-
कुत्ते के काटने से बने घाव को साबुन तथा साफ़ पानी से धोकर रोगाणुनाशक दवाई लगानी चाहिए। जब काटने वाला कुत्ता पागल हो तो काटे गए व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह पर एंटीरेबीज़ टीके अवश्य लगवाने चाहिएं।

प्रश्न 11.
कारणात्मक जीव किसे कहते हैं ?
उत्तर-
प्राय: संक्रामक बीमारियां एक प्राणी से दूसरे प्राणियों तक वायरस, बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, कवक और कृमियों के द्वारा पहुंचती हैं। हैजा, क्षय रोग तथा टायफाइड को बैक्टीरिया फैलाते हैं। चेचक, छोटी माता, पोलियो, रेबीज़, जुकाम आदि वायरस से फैलते हैं। दस्त और पेचिश आंतरिक गड़बड़ियों से फैलते हैं। बीमारी फैलाने में सहायक इन जीवों को कारणात्मक जीव कहते हैं।

प्रश्न 12.
टीके पर तापमान और समय सीमा का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
टोके पर तापमान का प्रभाव पड़ता है। उसे कम तापमान में रखना चाहिए क्योंकि उच्च तापमान पर वे नष्ट हो जाते हैं। उनका संरक्षण समय सीमित होता है। अधिक समय तक उनका प्रयोग न होने पर उनकी शक्ति का प्रभाव नष्ट हो जाता है जिसे पुनः हासिल नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 13.
वाहक (Vector) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
वाहक (Vector) – बीमारी फैलाने वाले सूक्ष्म जीवों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने वाले जीवों को वाहक कहते हैं। घरेलू मक्खी हैजे, पेचिश आदि के कीटाणुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है तो मादा एनाफ्लीज़ मच्छर मलेरिया को फैलाते हैं। ऐडीज मच्छर डेंगू को फैलाता है।

प्रश्न 14.
एंटीबायोटिक (प्रतिजैविक) किसे कहते हैं ? ये किस प्रकार अपना कार्य करते हैं ?
उतर-
ये वे पदार्थ हैं जो सूक्ष्म जीवों से उत्पन्न किए जाते हैं और ये सूक्ष्म जीवों की वृद्धि को रोकते हैं। पैनिसीलिन ऐसा पहला प्रति जैविक पदार्थ है जो मनुष्य द्वारा उपयोग के लिए तैयार किया गया है। एंटीबायोटिक सामान्य रूप से बैक्टीरिया के महत्त्वपूर्ण जैव रासायनिक मार्ग को बंद कर देते हैं। अनेक बैक्टीरिया अपनी रक्षा के लिए एक कोशिका भित्ति बना लेते हैं पर एंटीबायोटिक उनकी कोशिका भित्ति बनाने वाली प्रक्रिया को बाधित कर देते हैं जिस कारण वे सरलता से मर जाते हैं।

प्रश्न 15.
कुछ सामान्य बीमारियों को वर्गीकृत करें जो कारणात्मक जीवों के द्वारा होती हैं ?
उत्तर-
(क) जीवाणुओं द्वारा फैलाये जाने वाले रोग – जो बीमारियां जीवाणुओं के द्वारा फैलाई जाती हैं उन्हें बैक्टीरियल कहते हैं, जैसे-क्षय रोग, हैजा, टायफाइड, दस्त, टैटनस, डिप्थीरिया आदि।

(ख) विषाणुओं द्वारा फैलाये जाने वाले रोग – जो बीमारियां वायरस के द्वारा फैलती हैं उन्हें वायरल बीमारियां कहते हैं, जैसे-पोलियो, चिकन पाक्स, रेबीज़, जुकाम, खसरा, एडस आदि।

(ग) प्रोटोजोआ द्वारा फैलाये जाने वाले रोग – जो बीमारियां प्रोटोजोआ के द्वारा फैलाई जाती हैं उन्हें प्रोटोजाअन कहते हैं, जैसे-डायरिया, गैस्ट्रोइटाइटिस, मलेरिया आदि।

(घ) कवक द्वारा फैलाये जाने वाले रोग – जो रोग कवकों के द्वारा फैलाये जाते हैं उन्हें कवकीय रोग कहते हैं। जैसे—दाद, त्वचा रोग आदि।

प्रश्न 16.
जुकाम से बचना कठिन है, इस पर विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर-
जुकाम ऐसी बीमारी है जो शायद विश्व के सभी लोगों को कभी न कभी संक्रमित कर चुकी है। इसके लिए अनेक वायरस ज़िम्मेदार होते हैं जिनसे पूरी तरह बचाव बहुत कठिन है। इनके प्रभाव से श्वसन नलिका की ऊपरी श्लेष्मा झिल्ली, नाक और गला संक्रमित होते हैं जिस कारण नाक और आंखों से तरल पदार्थ निकलता है। शरीर के संक्रमित भाग पर जलन होती है। कुछ विशेष औषधियों से इनको कुछ सीमा तक कम करने में सहायता मिलती है। विटामिन-सी इसके लिए उपयोगी है।

प्रश्न 17.
टीकाकरण क्या है?
उत्तर-
टीकाकरण – वर्तमान युग में रोगों से बचने या उनके उपचार के लिए टीकाकरण की बहुत अधिक सहायता ली जाती है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पदार्थ का संरोपण एक स्वस्थ व्यक्ति में किया जाता है ताकि उसमें विशेष बीमारी के प्रति प्रतिरक्षित पैदा हो जाए। प्रतिरक्षण पॉस्क के बाध्य बीमारी को पहचानने, समाप्त करने और उसे पूरी तरह उखाड़ फेंकने में सहायता मिलती है। टीकाकरण प्रक्रिया में किसी सूक्ष्मजीव की जीवित या मृत कुछ मात्रा को व्यक्ति के शरीर में पहुंचाया जाता है जो बीमारी के विपरीत प्रतिरक्षा करते हुए हानिकारक बाह्य सूक्ष्म जीवों को नष्ट कर देते हैं। टीके में रोग वाहक सूक्ष्म जीव कम सांद्रित अवस्था में होते हैं।

प्रश्न 18.
सामुदायिक स्वास्थ्य की देखभाल के विभिन्न तत्व बताओ।
उत्तर-
सामुदायिक स्वास्थ्य की देखभाल के विभिन्न तत्व निम्नलिखित हैं-

  1. जनता के लिए सुरक्षित स्वच्छ पीने का जल।
  2. बच्चों को अल्पपोषण तथा कुपोषण से बचाने के लिए पौष्टिक भोजन तथा दूध ।
  3. स्वास्थ्य शिक्षा।
  4. चिकित्सा सहायता तथा इलाज।
  5. बच्चों को पोलियो, टी० बी०, टेटनस, डिप्थीरिया, हिपेटिटिस आदि का टीका लगाना।
  6. परिवार नियोजन तथा सलाह।

प्रश्न 19.
अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रसन्न रहना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
स्वस्थ रहने के लिए हमें प्रसन्न रहना आवश्यक है। यदि किसी से हमारा व्यवहार ठीक नहीं है और हम एक-दूसरे से डरते हैं तो हम प्रसन्न तथा स्वस्थ नहीं रह सकते। व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए सामाजिक समानता बहुत ज़रूरी है। अनेक सामुदायिक और व्यक्तिगत समस्याएँ हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम हर अवस्था में प्रसन्न रहने का प्रयत्न करें।

प्रश्न 20.
तीव्र तथा दीर्घकालिक रोग में अंतर लिखिए।
उत्तर-
तीव्र तथा दीर्घकालिक रोग में अंतर-

तीव्र (प्रचंड) रोग दीर्घकालिक रोग
1. तीव्र रोगों की अवधि बहुत लंबो नहीं होती। 1. दीर्घकालिक रोगों की अवधि बहुत लंबी होती है।
2. ये रोग जीवन भर नहीं रहते। 2. ये रोग जीवन भर रह सकते हैं।
3. इन से शरीर को क्षति बहुत गंभीर नहीं होती। उदाहरण – खांसी, जुकाम। 3. इनकी शरीर को क्षति बहुत गंभीर हो सकती है। ये मृत्यु का कारण भी बन सकते हैं।
उदाहरण – क्षय रोग।

प्रश्न 21.
पेप्टिक व्रण का संबंध किससे माना जाता था ? इसका वास्तविक कारण और उपचार क्या है ?
उत्तर-
अनेक वर्षों से माना जाता था कि पेप्टिक व्रण का संबंध ग्रहणी में ऐसिटिडी (Acidity) से है। परेशानी और चिंता से आमाशय में एसिड का स्राव होता है जिस कारण पेप्टिक व्रण हो जाता है पर ऑस्ट्रेलिया के डॉ० रॉबिन वॉरेन तथा बैरी मॉर्शल ने पता लगाया है कि यह रोग हेलीको बैक्टर पायलोरी नामक एक बैक्टीरिया से होता है जो आमाशय के निचले भाग में इकट्ठे हो जाते हैं। अब इस रोग का उपचार बड़ी सरलता से प्रतिजैविक के प्रयोग से किया जाता है।

प्रश्न 22.
बैक्टीरिया को एंटिबायोटिक प्रभावित करते हैं पर मानव को नहीं। क्यों ?
उत्तर-
एंटिबायोटिक सामान्यतः बैक्टीरिया के महत्त्वपूर्ण जैव रासायनिक मार्ग को बंद कर देते हैं। अनेक बैक्टीरिया अपनी रक्षा के लिए कोशिका भित्ति बना लेते हैं। पैनिसिलीन एंटिबॉयोटिक बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति बनाने वाली प्रक्रिया को बाधित कर देती है। जिस कारण बैक्टीरिया कोशिका भित्ति नहीं बना सकते हैं और वे सरलता से मर जाते हैं। मानव की कोशिकाएं कोशिका भित्ति नहीं बना सकती इसलिए पेनिसिलीन का प्रभाव हम पर नहीं होता। पेनिसिलीन ऐसे सभी बैक्टीरिया को प्रभावित करते हैं जिनमें कोशिका भित्ति बनाने की प्रक्रिया होती है। इसलिए अनेक एंटिबायोटिक बैक्टीरिया की अनेक स्पीशीज़ को प्रभावित करते हैं न कि केवल एक स्पीशीज़ को।

प्रश्न 23.
वाइरस पर एंटिबायोटिक का प्रभाव क्यों नहीं दिखाई देता ?
उत्तर-
वाइरस की जैव प्रक्रियाएं बैक्टीरिया से भिन्न होती हैं। वे मेजबानों की कोशिकाओं में रहते हैं। इनमें ऐसा मार्ग नहीं होता जैसा कि बैक्टीरिया में होता और यही कारण है कि कोई भी एंटिबायोटिक बैक्टीरिया संक्रमण पर प्रभावकारी नहीं है। यदि हम खांसी-जुकाम से ग्रस्त हैं तो एंटिबायोटिक लेने से रोग की तीव्रता अथवा उसकी समय विधि कम नहीं होती।

प्रश्न 24.
शोथ के कारण शरीर पर कुछ स्थानीय सामान्य प्रभाव क्या पड़ते हैं और क्यों ? ।
उत्तर-
संक्रामक रोगों के ऊतक-विशिष्ट प्रभाव के अतिरिक्त उनके अन्य सामान्य प्रभाव भी होते हैं। अधिकांश सामान्य प्रभाव इस पर निर्भर करते हैं कि संक्रमण से शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र क्रियाशील हो जाएँ। एक सक्रिय प्रतिरक्षा तंत्र प्रभावित ऊतक के चारों ओर रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को मारने के लिए अनेकों कोशिकाएं बना देता है। नई कोशिकाओं के बनने के प्रक्रम को शोथ कहते हैं। इस प्रक्रम के अंतर्गत स्थानीय प्रभाव जैसे फूलना तथा दर्द होना और सामान्य प्रभाव जैसे बुखार होते हैं।

प्रश्न 25.
एड्स (AIDS) क्या है ? इसके संक्रमण के क्या कारण हैं ? इससे सुरक्षा के उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
एड्स (AIDS) एक अति भयानक संक्रामक रोग है जिसका उपचार आज तक वैज्ञानिकों के द्वारा नहीं खोजा जा सका है। इसका पूरा नाम उपार्जित प्रतिरक्षा न्यूनता सिंड्रोम (Acquired Immuno Deficiency Syndrome) है जो HIV (Human Immuno Virus) नामक विषाणु से फैलता है। यह विषाणु मानव शरीर में पहुँच कर प्रतिरक्षा तंत्र को नष्ट कर देता है जिसके परिणामस्वरूप शरीर की प्रतिरोध क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है और व्यक्ति किसी संक्रमण से पीडित हो कर मर जाता है।

संक्रमण के कारण – एड्स का संक्रमण निम्नलिखित कारणों से होता है-

  1. एड्स रोग से संक्रमित व्यक्ति के साथ लैंगिक संबंध ।
  2. एड्स से ग्रसित व्यक्ति से रक्त स्थानांतरण के द्वारा।
  3. समलैंगिक संभोग।
  4. एड्स-पीड़ित माता से शिशु जन्म।
  5. संक्रमित सूई के प्रयोग से।
  6. एड्स से ग्रसित माता के द्वारा शिशु के स्तनपान द्वारा। रोग की जाँच-एड्स की जांच ELISA विधि से की जाती है।

बचाव-

  1. रक्त स्थानांतरण से पहले सुनिश्चित कर लिया जाना चाहिए कि रक्त HIV मुक्त होगा।
  2. लैंगिक संबंध अति सावधानीपूर्वक बनाए जाने चाहिए।
  3. टीके की सूई का इस्तेमाल केवल एक ही बार किया जाना चाहिए।

एड्स संक्रमण किससे नहीं होता – हाथ मिलाने से, गले मिलने से, खेलकूद जैसे कुश्ती और कोई अन्य विधि जिससे हम सामाजिक-संपर्क में आते हैं।

प्रश्न 26.
HIV-AIDS रोगी की मृत्यु का कारण किस लिए बन जाता है ?
उत्तर-
संक्रमण के विशिष्ट ऊतक कई बार अति सामान्य प्रभाव को लक्षित करते हैं। HIV संक्रमण में वाइरस प्रतिरक्षा तंत्र में जाते हैं और इसके कार्य को नष्ट कर देते हैं। HIV-AIDS से अनेक प्रभाव इसलिए होते हैं क्योंकि हमारा शरीर प्रतिदिन होने वाले छोटे संक्रमणों का मुकाबला नहीं कर पाता। हल्के-खांसी-जुकाम से भी निमोनिया हो सकता है तथा आहार नाल के संक्रमण से रुधिरयुक्त प्रवाहिका हो सकता है। ऐसे छोटे-छोटे अन्य संक्रमण ही HIV-AIDS के रोगी की मृत्यु का कारण बनते हैं।

प्रश्न 27.
किसी रोग की तीव्रता किस बात पर निर्भर करती है ?
उत्तर-
रोग की तीव्रता की अभिव्यक्ति शरीर में स्थित सूक्ष्मजीवों की संख्या पर निर्भर करती है। यदि सूक्ष्मजीव की संख्या बहुत कम है तो रोग की अभिव्यक्ति भी कम होगी। यदि उसी सूक्ष्मजीव की संख्या अधिक होगी तो रोग की अभिव्यक्ति इतनी तीव्र होगी कि जीवन को भी खतरा हो सकता है।

प्रश्न 28.
एंटी वाइरल औषधि बनाना एंटी बैक्टीरियल औषधि बनाने से कठिन क्यों है ?
उत्तर-
एंटी वाइरल औषधि का बनाना एंटीबैक्टीरियल औषधि के बनाने की अपेक्षा कठिन होता है। इसका कारण है कि बैक्टीरिया में अपनी जैव रासायनिक प्रणाली होती है जबकि वाइरस में अपनी जैव रासायनिक प्रणाली बहुत कम होती है। वाइरस हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं और अपनी जीवन प्रक्रिया के लिए हमारी मशीनरी का उपयोग करते हैं। इसका अर्थ यह है कि आक्रमण करने के लिए अपेक्षाकृत कम वाइरस विशिष्ट लक्ष्य होते हैं।

प्रश्न 29.
यदि एक बार किसी को चेचक हो जाए तो दुबारा उसे कभी चेचक नहीं हो सकती। क्यों ?
उत्तर-
यदि कोई व्यक्ति एक बार चेचक से ग्रसित हो जाए तो उसे दुबारा यह रोग कभी नहीं हो सकता क्योंकि जब रोगाणु प्रतिरक्षा तंत्र पर पहली बार आक्रमण करते हैं तो प्रतिरक्षा तंत्र रोगाणुओं से इसके प्रति क्रिया करता है और फिर इसका विशिष्ट रूप से स्मरण कर लेता है। इस प्रकार जब वहीं रोगाणु या उससे मिलता-जुलता रोगाणु संपर्क में आता है तो पूरी शक्ति से उसे नष्ट कर देता है। इससे पहले संक्रमण की अपेक्षा दूसरा संक्रमण शीघ्र ही समाप्त हो जाता है। यह प्रतिरक्षाकरण के नियम का आधार है।

प्रश्न 30.
टीकाकरण से प्रतिरक्षा तंत्र को ‘मूर्ख’ बनाना क्यों माना जाता है ?
उत्तर-
टीकाकरण का सामान्य नियम है कि शरीर में विशिष्ट संक्रमण प्रविष्ट कराकर प्रतिरक्षा तंत्र को ‘मूर्ख’ बनाना। वह उन रोगाणुओं की नकल करता है जो टीके के द्वारा शरीर में पहुंचे हैं। यह वास्तव में रोग पैदा नहीं करते लेकिन यह वास्तव में रोग पैदा करने वाले रोगाणुओं को उसके बाद रोग पैदा करने से रोकता है।

प्रश्न 31.
हमारे देश में छोटे बच्चे हिपेटाइटिस ‘A’ के प्रति किस प्रकार प्रतिरक्षी हो चुके हैं ?
उत्तर-
हिपेटाइटिस के कुछ वाइरस जिससे पीलिया होता है, पानी द्वारा संचारित होता है। हिपेटाइटिस ‘A’ के लिए टीका उपलब्ध है। पर हमारे देश के अधिकांश भागों में जब बच्चे की आयु पांच वर्ष होती है तब तक वह हिपेटाइटस ‘A’ के प्रति प्रतिरक्षी हो चुका होता है। इसका कारण यह है कि वह पानी के द्वारा वाइरस के प्रभाव में आ चुका हो।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
स्वास्थ्य एवं रोग किस समुदाय में एक जटिल समस्या है ?
उत्तर-
मानव समुदाय में।

प्रश्न 2.
मानवीय अंगों में चलने वाली चार विशिष्ट क्रियाएं लिखिए।
उत्तर-
हृदय का धड़कना, फेफड़ों का साँस लेना, वृक्क में निस्पंदन द्वारा मूत्र बनना, मस्तिष्क का सोचना।

प्रश्न 3.
वृक्क में निस्पंदन न होने से शरीर में क्या होगा ?
उत्तर-
शरीर में विषैले पदार्थ एकत्रित हो जाएंगे।

प्रश्न 4.
मानवीय शरीर को भोजन की आवश्यकता क्यों होती है ?
उत्तर-
कोशिकाओं तथा ऊतकों को कार्य करने के लिए।

प्रश्न 5.
स्वास्थ्य क्या है ?
उत्तर-
स्वास्थ्य वह अवस्था है जिस के अंतर्गत शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक कार्य समुचित क्षमता से उचित प्रकार किया जा सके।

प्रश्न 6.
अच्छे स्वास्थ्य के लिए किस-किस बात की आवश्यकता है ?
उत्तर-
सामुदायिक स्वच्छता, भोजन, अच्छी आर्थिक स्थिति।

प्रश्न 7.
‘बोधित आराम’ और ‘असुविधा’ क्या है ?
उत्तर-
रोग का दूसरा नाम।

प्रश्न 8.
शरीर की क्रियाओं में बदलाव क्या दर्शाते हैं ?
उत्तर-
रोग के लक्षण।

प्रश्न 9.
किन्हीं चार लक्षणों को लिखिए जिनसे रोग का पता लगता है ?
उत्तर-
सिरदर्द, खांसी, दस्त, किसी घाव में मवाद।

प्रश्न 10.
लक्षण किसी चिकित्सक को किस बात के संकेत देते हैं ?
उत्तर-
किसी रोग के बारे सुनिश्चित संकेत देते हैं।

प्रश्न 11.
जिन रोगों की अवधि कम होती है उन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर-
तीव्र रोग अथवा प्रचंड रोग।

प्रश्न 12.
लंबी अवधि तक या जीवनपर्यंत रहने वाले रोगों को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
दीर्घकालिक रोग।

प्रश्न 13.
तीव्र रोग का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
खांसी-जुकाम।

प्रश्न 14.
दीर्घकालिक रोग का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
एलिफेनटाइसिस अथवा पील पांव रोग।

प्रश्न 15.
स्वास्थ्य को अधिक क्षति किस प्रकार के रोग से होती है ?
उत्तर-
दीर्घकालिक रोग से।

प्रश्न 16.
पतले दस्त लगने का कारण क्या है ?
उत्तर-
दूषित भोजन और गंदे पानी का प्रयोग।

प्रश्न 17.
संक्रमण रोग किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वे रोग जिन के तात्कालिक कारक सूक्ष्मजीव होते हैं उन्हें संक्रामक रोग कहते हैं। ये सूक्ष्मजीव समुदाय में रोग फैला देते हैं।

प्रश्न 18.
कैंसर रोग का क्या कारण है ?
उत्तर-
आनुवांशिक असामान्यता।

प्रश्न 19.
ऐसिडिटी और पेप्टिक व्रण का कारण क्या माना जाता था ?
उत्तर-
परेशानी भरी सोच और चिंता।

प्रश्न 20.
पेप्टिक व्रण किस कारण होता है ?
उत्तर-
हेलीको बैक्टर पायलोरी नामक बैक्टीरिया द्वारा।

प्रश्न 21.
किन दो वैज्ञानिकों ने पैप्टिक व्रण के कारक बैक्टीरिया का पता लगाया ?
उत्तर-
ऑस्ट्रेलिया के रोग विज्ञानी रॉबिन वॉरेन तथा बैरी मार्शल ने।

प्रश्न 22.
पैप्टिक व्रण का उपचार अब किस से हो जाता है ?
उत्तर-
प्रतिजैविक के प्रयोग से।

प्रश्न 23.
वॉरेन और मार्शल को पैप्टिक व्रण के उपचार को खोजने के लिए कब नोबेल पुरस्कार दिया गया ?
उत्तर-
सन् 2005 में।

प्रश्न 24.
वायरस से होने वाले चार रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर-
खांसी-जुकाम, इंफ्लुएंजा, डेंगु बुखार तथा AIDSI

प्रश्न 25.
बैक्टीरिया से फैलने वाले चार रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर-
टायफॉयड, हैज़ा, क्षय रोग, एंथ्रेक्स।

प्रश्न 26.
प्रोटोजोआ से कौन-से दो रोग फैलते हैं ?
उत्तर-
मलेरिया तथा कालाजार।

प्रश्न 27.
सामान्य त्वचा रोग किससे फैलते हैं ?
उत्तर-
विभिन्न प्रकार की फंजाई से। प्रश्न 28. रोग फैलाने वाले किस कारक का गुणन अपेक्षाकृत धीमा होता है ?
उत्तर-
कृमि का गुणन।

प्रश्न 29.
रोग की अवस्था में एंटिबायोटिक क्या करते हैं ?
उत्तर-
एंटिबायोटिक बैक्टीरिया के महत्त्वपूर्ण जैव रासायनिक मार्ग को बंद कर देते हैं।

प्रश्न 30.
पैनिसिलीन एंटिबायोटिक मूल रूप से क्या करता है ?
उत्तर-
बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति बनाने वाली प्रक्रिया को पैनिसिलीन बाधित कर देती है। मानव की कोशिकाएं कोशिका भित्ति नहीं बना सकतीं। इसलिए पैनिसिलीन का प्रभाव हम पर न होकर बैक्टीरिया पर होता है।

प्रश्न 31.
किस कारण एक एंटिबायोटिक बैक्टीरिया की अनेक स्पीशीज़ को प्रभावित करता है ?
उत्तर-
जो एंटिबायोटिक किसी भी बैक्टीरिया के जैव रासायनिक मार्ग को बंद कर कोशिका भित्ति बनाने की प्रक्रिया को बाधित कर सकता है वह उन सब को प्रभावित करता है।

प्रश्न 32.
एंटिबायोटिक का प्रभाव रोग फैलाने वाले किस कारक को प्रभावित नहीं करता ?
उत्तर-
वाइरस को।

प्रश्न 33.
सामान्य खांसी-जुकाम पर एंटिबायोटिक प्रभाव क्यों नहीं दिखा पाते ?
उत्तर-
सामान्य खांसी-जुकाम वाइरस से होता है और एंटिबायोटिक वाइरस को प्रभावित नहीं कर पाते।

प्रश्न 34.
जल से संक्रमण कैसे होता है ?
उत्तर-
जब संक्रमणीय रोग से ग्रसित रोगी के अपशिष्ट पेयजल में मिल कर स्वस्थ व्यक्ति के द्वारा जानेअनजाने पी लिया जाता है तो रोग का संक्रमण हो जाता है।

प्रश्न 35.
लैंगिक संपर्क से फैलने वाले दो रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर-
सिफलिस, AIDS ।

प्रश्न 36.
लैंगिक संचारी रोग किस प्रकार नहीं फैलते ?
उत्तर-
हाथ मिलाने, गले मिलने, खेल-कूद, कुश्ती आदि से।

प्रश्न 37.
किसी सामान्य रोग वाहक का नाम लिखिए।
उत्तर-
मच्छर।

प्रश्न 38.
मच्छर समतापी प्राणियों का रक्त क्यों पीता है ?
उत्तर-
अत्यधिक पोषण के लिए ताकि परिपक्व अंडे दे सके।

प्रश्न 39.
यदि सूक्ष्मजीवी हवा से नाक द्वारा शरीर में प्रवेश करें तो वे कहां जाएंगे ?
उत्तर-
फेफड़ों में।

प्रश्न 40.
आहार नाल से शरीर में प्रवेश करने वाले सूक्ष्मजीवी कहां रहेंगे ?
उत्तर-
आहार नाल या यकृत में।

प्रश्न 41.
पीलिया का कारक कौन है ?
उत्तर-
हिपेटाइटिस बैक्टीरिया।

प्रश्न 42.
क्षय रोग की अवस्था में बैक्टीरिया फेफड़ों में कहां से प्रवेश करते हैं ?
उत्तर-
नाक से।

प्रश्न 43.
टायफायड के बैक्टीरिया किस रास्ते से शरीर में प्रवेश करते हैं ?
उत्तर-
मुँह से।

प्रश्न 44.
HIV कहां फैलते हैं ?
उत्तर-
लसीका ग्रंथियों में।

प्रश्न 45.
जापानी बुखार (ऐंसेफेलाइटिस) किस अंग को प्रभावित करता है ?
उत्तर-
मस्तिष्क को।

प्रश्न 46.
मस्तिष्क पर सूक्ष्मजीवों के आक्रमणों के क्या लक्षण हैं ?
उत्तर-
सिरदर्द, उल्टी आना, चक्कर या बेहोशी आना।

प्रश्न 47.
शोथ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र क्रियाशील होकर प्रभावित ऊतक के चारों ओर एक सक्रिय प्रतिरक्षा तंत्र बना देता है जिससे रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को मारने के लिए अनेक कोशिकाएं बन जाती हैं। नई कोशिकाओं के बनने के प्रक्रम को शोथ कहते हैं।

प्रश्न 48.
शोथ प्रक्रम के सामान्य प्रभाव क्या हैं ?
उत्तर-
फूलना, दर्द होना, बुखार।

प्रश्न 49.
HIV-AIDS से व्यक्ति की मृत्यु प्रायः किस कारण होती है ? .
उत्तर-
HIV-AIDS संक्रमण से प्रतिरक्षा तंत्र के कार्य नष्ट हो जाते हैं। प्रतिदिन होने वाले छोटे-छोटे संक्रमणों का मुकाबला भी व्यक्ति नहीं कर पाता और यही रोगी की मृत्यु के कारण बन जाते हैं।

प्रश्न 50.
एंटी वाइरल औषधि बनाना क्यों कठिन है ?
उत्तर-
वाइरस की अपनी जैव रासायनिक प्रणाली बहुत कम होती है। वे हमारे शरीर में प्रवेश कर अपनी जीवन प्रक्रिया के लिए हमारी मशीनरी का प्रयोग करते हैं इसलिए एंटी वाइरल औषधि बनाना कठिन है।

प्रश्न 51.
कौन-सी एंटीवाइरल औषधि अब उपलब्ध है ?
उत्तर-
HIV संक्रमण को नियंत्रित करने की औषधि।

प्रश्न 52.
कौन-सा रोग विश्व से मिटाया जा चुका है ?
उत्तर-
चेचक।

प्रश्न 53.
कौन-सा रोग ऐसा है जो एक बार हो जाने के बाद दोबारा कभी नहीं होता ?
उत्तर-
चेचक।

प्रश्न 54.
प्रतिरक्षाकरण के नियम का आधार क्या है ?
उत्तर-
जब रोगाणु प्रतिरक्षा तंत्र पर दूसरी बार आक्रमण करता है तो स्मृति के आधार पर प्रतिरक्षा तंत्र अपनी पूरी शक्ति से उसे नष्ट कर देता है।

प्रश्न 55.
हिपेटाइटिस की किस प्रकार के लिए टीका उपलब्ध है ?
उत्तर-
हिपेटाइटिस ‘A’ ।

प्रश्न 56.
कितने वर्ष की अवस्था तक देश के अधिकांश बच्चे हिपेटाइटिस ‘A’ के प्रति प्रतिरक्षी हो चुके होते हैं ?
उत्तर-
पांच वर्ष की आयु तक।

Science Guide for Class 9 PSEB हम बीमार क्यों होते हैं InText Questions and Answers

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1.
अच्छे स्वास्थ्य की दो आवश्यक स्थितियां बताओ।
उत्तर-
अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्थितियों का अच्छा होना आवश्यक

प्रश्न 2.
रोगमुक्ति की कोई दो आवश्यक परिस्थितियां बताइए।
उत्तर-

  1. सामुदायिक स्वच्छता
  2. अच्छा भोजन।

प्रश्न 3.
क्या उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर एक जैसे हैं अथवा भिन्न, क्यों ? .
उत्तर-
वास्तव में अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक स्थितियों और परिस्थितियों में कोई बड़ा अंतर नहीं है। ये दोनों एक-दूसरे से इस प्रकार जुड़ी हुई हैं कि इन्हें अलग नहीं किया जा सकता। यदि सामुदायिक स्वच्छता हो तथा व्यक्ति को खाने के लिए पौष्टिक भोजन प्राप्त हो तो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी बना रहेगा। जब वातावरण दूषित हो; सब तरफ गंदगी फैली हो तो शारीरिक रोग तो परेशान करेंगे ही पर साथ ही मानसिक पीड़ा भी होगी। निर्धनता के कारण यदि भोजन की प्राप्ति न हो; पेट खाली रहे तो मानसिक क्लेश के साथ अल्पपोषण और कुपोषण से संबंधित रोग भी सतायेंगे। उपरोक्त दोनों प्रश्नों के उत्तर एक ही हैं। इनमें कोई मौलिक अंतर नहीं है।

प्रश्न 4.
ऐसे तीन कारण लिखिए जिससे आप सोचते हैं कि आप बीमार हैं और चिकित्सक के पास जाना चाहते हैं। यदि इनमें से एक भी लक्षण हो तो क्या आप फिर भी चिकित्सक के पास जाना चाहोगे ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
तीन कारण हैं-

  1. तात्कालिक कारण
  2. एर्याप्त पोषण का न होना
  3. ग़रीबी तथा लोक सेवाओं की अनुप्लब्धता।

यदि इन तीनों में से एक भी कारण हो तो हम फिर भी चिकित्सक के पास जाना चाहेंगे। मान लो एक बच्चा पतले दस्त से ग्रस्त है इसका कारण वायरस है यह तात्कालिक कारण है। इसका कारण यह भी हो सकता है कि बच्चा या उसका परिवार गरीब हो वह पर्याप्त भोजन न ले सका और बीमार पड़ गया। जहाँ बच्चे का परिवार रहता है वहाँ खराब लोक सेवाओं के कारण साफ पानी उपलब्ध हो सका। इसलिए यह सभी कारण किसी न किसी रूप में संबंधित हैं। वायरस कीटाणु जीव समुदाय में फैल सकते हैं तथा इनके कारण होने वाले रोग फैल भी सकते हैं।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से किसके लंबे समय तक रहने के कारण आप समझते हैं कि आपके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा तथा क्यों ?
• यदि आप पीलिया रोग से ग्रस्त हैं ?
• यदि आपके शरीर पर जूं (luce) है।
• यदि आप मुंहासों से ग्रस्त हैं ?
उत्तर-
यदि आप पीलिया से लंबे समय से ग्रस्त हैं तो यह स्वास्थ्य के लिए बहुत खराब है क्योंकि इसका संबंध यकृत से है। उसके लिए हीपेटाइटिस की प्रकार की जांच और उपचार होना चाहिए। जूं तथा मुंहासे तीव्र प्रभाव दिखाते हैं। यह चमड़ी के रोग लगाते हैं और सरलता से दूर हो सकते हैं तथा उनका शरीर पर प्रभाव देर तक नहीं रहता।

प्रश्न 6.
जब आप बीमार होते हैं तो आपको सुपाच्य तथा पोषण युक्त भोजन करने का परामर्श क्यों दिया जाता है ?
उत्तर-
पौष्टिक और सुपाच्य भोजन किसी भी बीमार व्यक्ति के लिए बहुत आवश्यक होता है। शरीर में प्रकृति के द्वारा प्रदान किया हुआ प्रतिरक्षा तंत्र होता है जो रोगाणुओं से लड़ता है और उन्हें मार देता है। यदि शरीर में बीमारी या भोजन की कमी से प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर पड़ जाता है तो वह शरीर की सुरक्षा के अपने कार्य में सफल नहीं हो पाएगा। कोशिकाएं प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा आदि से बनती हैं जो उन्हें संतुलित भोजन से ही प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 7.
संक्रामक रोग फैलने की विभिन्न विधियां कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर-
संक्रामक रोग मुख्य रूप से वायु, जल और लैंगिक संपर्क के माध्यम से फैलते हैं। सूक्ष्मजीवीय कारक अनेक तरीकों से किसी रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति तक फैलते हैं जिन्हें निम्नलिखित आधारों पर स्पष्ट कर सकते हैं-
(i) हवा से – जब कोई रोगी व्यक्ति खांसता है या छींकता है तो उसके मुंह और नाक से छोटे-छोटे बूंदक बहुत वेग से बाहर निकलते हैं। जो व्यक्ति उसके निकट होता है उसके सांस के रास्ते वे उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और उसे भी संक्रमित कर देते हैं। खांसी, जुकाम, निमोनिया, क्षय रोग आदि रोग इसी प्रकार फैलते हैं। जहां अधिक भीड़ होती है वहां हवा से फैलने वाले रोगों के संक्रमण की संभावना उतनी अधिक हो जाती अधिक भीड़-भाड़ वाले एवं कम रोशनदान वाले घरों में वायु वाहित रोग होने की संभावना अधिक होती है।

(ii) पानी से – अनेक संक्रामक रोग पानी से फैलते हैं। जब बीमार व्यक्ति के अपशिष्ट पेयजल में मिल जाते हैं और कोई स्वस्थ व्यक्ति जाने-अनजाने उसे पी लेता है तो सूक्ष्मजीव उसके शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं और वह भी रोगग्रस्त हो जाता है। हैजा, पेचिश आदि रोग ऐसे ही फैलते हैं।

(iii) लैंगिक संपर्क से – जब दो व्यक्ति शारीरिक रूप से लैंगिक क्रियाओं में एकदूसरे के संपर्क में आते हैं तो सूक्ष्म जीवीय रोग संक्रमित व्यक्ति से दूसरे तक पहुंच जाते हैं। सिफलिस, गनोरिया, AIDS आदि रोग इस प्रकार एक से दूसरे तक स्थानांतरित हो संक्रमित जाते हैं।

(iv) जंतुओं द्वारा – मच्छर, मक्खी, पिस्सू आदि संक्रमण करने वाले कारक हैं जो रोगाणुओं को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा देते हैं। संक्रमित कुत्ता, बंदर, नेवला आदि जंतु भी रेबीज़ फैलाते हैं। उनकी लार से ये रोग फैलता है।

प्रश्न 8.
संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए आपके अपने विद्यालय में कौन-कौन सी सावधानियां आवश्यक हैं ?
उत्तर-
संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने की सावधानियाँ-

  1. विद्यार्थियों को साफ-स्वच्छ रहने, प्रतिदिन नहाने, शारीरिक स्वच्छता और व्यक्तिगत सफाई के लिए प्रेरित करना चाहिए।
  2. संतुलित और पौष्टिक आहार लेने की शिक्षा देनी चाहिए ताकि उनके शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा ठीक बनी रह सके।
  3. मल-मूत्र तथा अपशिष्ट का निपटान ठीक प्रकार से होना चाहिए।
  4. खुले स्थानों पर मल त्याग पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए।
  5. सीवर व्यवस्था बहुत अच्छी होनी चाहिए।
  6. विद्यालय में कैंटीन में कटे हुए फल, बिना ढकी खाद्य सामग्री आदि प्रतिबंधित होनी चाहिए।
  7. संक्रामक रोगों से ग्रसित विद्यार्थियों को तब तक विद्यालय में आने से रोक दिया जाना चाहिए जब तक वे पूरी तरह स्वस्थ न हो जाएं।
  8. मच्छर, मक्खी आदि को नष्ट कर देना चाहिए।
  9. समय-समय पर विद्यार्थियों को संक्रमण पर रोक पाने के लिए टीकों का प्रबंध करना चाहिए।

प्रश्न 9.
प्रतिरक्षीकरण क्या है ?
उत्तर-
प्रतिरक्षीकरण – विभिन्न प्रकार के संक्रमणकारी रोगों से बचने के लिए तरह-तरह के प्रयत्न सदा से किए जाते रहे हैं। शरीर में प्रतिरक्षा तंत्र प्रकृति के द्वारा प्रदान किया गया है जो बाहर से शरीर में प्रविष्ट होने वाले रोगाणुओं को मार देता है। प्रतिरक्षा कोशिकाएं संक्रमण से पहले उन्हें नष्ट कर देती हैं। टीके के दवारा शरीर में विशिष्ट संक्रमण प्रविष्ट कराए जाते हैं जो वास्तव में रोग नहीं करते बल्कि रोग करने वाले रोगाणुओं को रोग करने से रोकते हैं। जब रोगाणु प्रतिरक्षा तंत्र पर पहली बार आक्रमण करते हैं तो प्रतिरक्षा तंत्र उनके प्रति विरोध कर उनके विशिष्ट रूप का स्मरण कर लेता है। जब दुबारा वही रोगाणु या उसमें मिलता-जुलता रोगाणु संपर्क में आता है तो पूरी शक्ति से उस पर हमला कर उसे नष्ट कर देता है। इससे पहले संक्रमण की अपेक्षा दूसरा संक्रमण शीघ्र समाप्त हो जाता है। यही प्रतिरक्षीकरण है।

प्रश्न 10.
आपके पास में स्थित स्वास्थ्य केंद्र में टीकाकरण के कौन-से कार्यक्रम उपलब्ध हैं ? आपके क्षेत्र में कौन-कौन सी स्वास्थ्य संबंधी मुख्य समस्या है ?
उत्तर-
हमारे पास में स्थित स्वास्थ्य केंद्र में अनेक ऐसे कार्यक्रम उपलब्ध हैं जहां टीकाकरण किया जाता है। छोटे बच्चों के लिए ट्रिपिल वैक्सीन (DPT) – काली खांसी, डिप्थीरिया, टैटनस, चिकन पॉक्स, तपेदिक के टीकों का प्रबंध है। प्रतिरेबीज़, हिपेटाइटिस, टायफाइड आदि का टीकाकरण किया जाता है।

हमारे क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी मुख्य समस्या मलेरिया, खसरा और रेबीज़ की है। जगह-जगह रुका हुआ पानी मच्छरों को बढ़ाने के कारण हैं तो सड़कों-गलियों में आवारा कुत्तों की भीड़ रेबीज़ का कारण बनती है। स्थानीय प्रशासन इस विषय में कुछ नहीं कर रहा।

PSEB 9th Class Science Guide हम बीमार क्यों होते हैं Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
पिछले एक वर्ष में आप कितनी बार बीमार हुए ? बीमारी क्या थी ?
(a) इन बीमारियों को हटाने के लिए आप अपनी दिनचर्या में क्या परिवर्तन करेंगे ?
(b) इन बीमारियों से बचने के लिए आप अपने आस-पड़ोस में क्या परिवर्तन करना चाहेंगे ?
उत्तर-
पिछले एक वर्ष में मैं दो बार बीमार हुई। पहली बार मुझे वाइरल बुखार हुआ और दूसरी बार मलेरिया हुआ था।

(क) बीमारी से बचने के लिए प्रतिरक्षा-तंत्र का सबल होना आवश्यक है। इसलिए पौष्टिक और संतुलित भोजन खाना पसंद करूंगी। मलेरिया से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करूंगी। मच्छर घर में प्रवेश न कर सकें-ऐसा प्रबंध करूंगी।

(ख) मैं अपने आस-पड़ोस में रुके हुए पानी के स्रोतों को दूर करना चाहूंगी। बंद पड़े कूलरों में भरे पानी, जगहजगह पानी से भरे बर्तनों को खाली करवाना चाहूंगी। घर के बाहर रुकी हुई गंदी नालियों को साफ कराना चाहूंगी ताकि उनमें मच्छर न पनप सकें। घर से कुछ दूर जोहड़ पर मिट्टी के तेल का छिड़काव कराना चाहूंगी ताकि मच्छरों के लारवा नष्ट हो जाएं।

प्रश्न 2.
डॉक्टर/नर्स/स्वास्थ्य कर्मचारी अन्य व्यक्तियों की अपेक्षा रोगियों के संपर्क में अधिक रहते हैं। पता करो कि वे अपने-आपको बीमार होने से कैसे बचाते हैं ?
उत्तर-
निश्चित रूप से डॉक्टर/नर्स/स्वास्थ्य कर्मचारी रोगियों के संपर्क में अधिक आने के कारण जल्दी बीमार पड़ सकते हैं। बीमारी से बचने के लिए रोग प्रतिरक्षी विधियां अपनाते हैं। अच्छा पौष्टिक भोजन खाते हैं। व्यक्तिगत और अपने परिवेश को साफ-सुथरा रखते हैं। रोगी का परीक्षण करने के बाद हाथ धोते हैं। संक्रामक रोगियों के निकट जाने से पहले नाक-मुंह को ढांप लेते हैं।

प्रश्न 3.
अपने आस-पड़ोस में एक सर्वेक्षण कीजिए तथा पता लगाइए कि सामान्यतः कौन-सी तीन बीमारियां होती हैं ? इन बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए अपने स्थानीय प्रशासन को तीन सुझाव दीजिए।
उत्तर-
हमारे आस-पड़ोस में लोगों को सामान्यतः दस्त, मलेरिया और वायरल बुखार होता है। इन बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि-

  1. सड़क के किनारों पर बनी नालियों की नियमित सफाई करायें। उनमें गंदा पानी खड़ा न होने दें।
  2. नागरिकों को दी जाने वाली जल आपूर्ति क्लोरीन युक्त होनी चाहिए।
  3. जगह-जगह खड़े पानी पर मिट्टी के तेल का छिड़काव कराना चाहिए ताकि मच्छरों की वृद्धि रुक सके।

प्रश्न 4.
एक बच्चा अपनी बीमारी के विषय में नहीं बता पा रहा है। हम कैसे पता करेंगे कि
(a) बच्चा बीमार है?
(b) उसे कौन-सी बीमारी है ?
उत्तर-
(a) बच्चे का रंग पीला पड़ जाता है, बच्चे को भूख कम लगती है, बच्चे को आर्थिक थकान होती है तथा उसका वजन भी कम होने लगता है।
(b) बच्चे को पीलिया रोग हो गया है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित किन परिस्थितियों में कोई व्यक्ति पुनः बीमार हो सकता है ? क्यों ?
(a) जब वह मलेरिया से ठीक हो रहा है ?
(b) वह मलेरिया से ठीक हो चुका है और चेचक के रोगी की सेवा कर रहा है।
(c) मलेरिया से ठीक होने के बाद चार दिन उपवास करता है और चेचक के रोगी की सेवा कर रहा है ? क्यों ?
उत्तर-
(c) मलेरिया से ठीक होने के बाद चार दिन उपवास करता है और चेचक के रोगी की सेवा कर रहा है।

कारण – बीमारी के बाद उसके शरीर में स्वाभाविक कमज़ोरी आएगी। उस कमज़ोरी से उसके शरीर की प्रतिरक्षी क्षमता कम हो जाएगी जिसकी पूर्ति पौष्टिक और सुपाच्य भोजन से होनी थी पर चार दिन उपवास करने से प्रतिरक्षी क्षमता और भी कम हो जाएगी। चेचक एक संक्रामक रोग है जिसका संक्रमण शीघ्र हो सकता है। वह उस कमज़ोर व्यक्ति को अपना शिकार बना लेगा।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से किन परिस्थितियों में आप बीमार हो सकते हैं ? क्यों ?
(a) जब आपकी परीक्षा का समय है ?
(b) जब आप बस तथा रेलगाड़ी में दो दिन तक यात्रा कर चुके हैं।
(c) जब आपका मित्र खसरा से पीड़ित है।
उत्तर-
(c) जब आपका मित्र खसरा से पीड़ित है।
खसरा एक संक्रामक रोग है। मित्र के साथ खेलने, बैठने-उठने, बातें करने, एक साथ खाने, उसकी वस्तुओं को छूने आदि से खसरा के वाइरस हमें संक्रमित कर देंगे और हम भी उसी रोग से ग्रसित हो जाएंगे।

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