RBSE Class 10 Hindi Solutions Kritika Chapter 1 माता का आँचल
RBSE Class 10 Hindi Solutions Kritika Chapter 1 माता का आँचल
RBSE Class 10 Hindi माता का आँचल Textbook Questions and Answers
प्रश्न 1.
प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ में इसकी क्या वजह हो सकती है?
उत्तर:
माता से बच्चे का रिश्ता ममता पर आधारित होता है जबकि पिता से स्नेहाधारित होता है। बच्चे को विपदा. के समय अत्यधिक ममता और स्नेह की आवश्यकता थी। भोलानाथ का अपने पिता से अपार स्नेह था पर जब उस पर विपदा आई तो उसे जो शान्ति व प्रेम की छाया अपनी माँ की गोद में जाकर मिली वह शायद उसे पिता से प्राप्त नहीं हो पाती। माँ के आँचल में बच्चा स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है।
प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ में इसकी क्या वजह हो सकती है?
उत्तर:
माता से बच्चे का रिश्ता ममता पर आधारित होता है जबकि पिता से स्नेहाधारित होता है। बच्चे को विपदा. के समय अत्यधिक ममता और स्नेह की आवश्यकता थी। भोलानाथ का अपने पिता से अपार स्नेह था पर जब उस पर विपदा आई तो उसे जो शान्ति व प्रेम की छाया अपनी माँ की गोद में जाकर मिली वह शायद उसे पिता से प्राप्त नहीं हो पाती। माँ के आँचल में बच्चा स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है।
प्रश्न 2.
आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?
उत्तर:
यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि बच्चों को खेलने में अपार आनंद की अनुभूति होती है। वह खेल में भूख-प्यास भी भूल जाता है। लेखक जब मइयाँ के द्वारा बालों में तेल डालने, उन्हें गूंथने और काला टीका लगाने पर बाल इच्छा के विपरीत सिसकने लगता है और सिसकते हुए जब बाहर आता है तब बाहर खड़े अपने साथियों को देखकर उसे खेलने की याद और उसके आनन्द की अनुभूति होने लगती है। इसलिए वह सिसकना भूल जाता है।
आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?
उत्तर:
यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि बच्चों को खेलने में अपार आनंद की अनुभूति होती है। वह खेल में भूख-प्यास भी भूल जाता है। लेखक जब मइयाँ के द्वारा बालों में तेल डालने, उन्हें गूंथने और काला टीका लगाने पर बाल इच्छा के विपरीत सिसकने लगता है और सिसकते हुए जब बाहर आता है तब बाहर खड़े अपने साथियों को देखकर उसे खेलने की याद और उसके आनन्द की अनुभूति होने लगती है। इसलिए वह सिसकना भूल जाता है।
प्रश्न 3.
आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबन्दी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।
उत्तर:
हमें खेलों से जुड़ी कुछ तुकबन्दियाँ याद हैं, जो इस प्रकार हैं –
आओ हम सब मिलकर खेलें खेल।
खूब मचायें रेलम पेल।
हम सब मिलकर खेलें चोरा-चोरी।
मइयाँ से मत कहना भाग-भगोरी।
हम खेलेंगे खेल कबड्डी।
तुम भी रहना नहीं फिसड्डी
पेड़ चढ़ो, लपको डंडा।
खेलो नहीं तो खाओ डंडा।
मेरी सितौलिया महारानी है, करनी इसकी रखवाली है।
आओ मिलकर खेलें खेल, गेन्द नहीं घरवाली है।
आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबन्दी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।
उत्तर:
हमें खेलों से जुड़ी कुछ तुकबन्दियाँ याद हैं, जो इस प्रकार हैं –
आओ हम सब मिलकर खेलें खेल।
खूब मचायें रेलम पेल।
हम सब मिलकर खेलें चोरा-चोरी।
मइयाँ से मत कहना भाग-भगोरी।
हम खेलेंगे खेल कबड्डी।
तुम भी रहना नहीं फिसड्डी
पेड़ चढ़ो, लपको डंडा।
खेलो नहीं तो खाओ डंडा।
मेरी सितौलिया महारानी है, करनी इसकी रखवाली है।
आओ मिलकर खेलें खेल, गेन्द नहीं घरवाली है।
प्रश्न 4.
भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
भोलानाथ और उसके साथियों के खेल तत्कालीन परम्परागत दैनिक जीवन से जुड़े हुए थे और उनकी खेल सामग्री भी घर में उपलब्ध दीए, माचिस की तिल्ली, टूटी-फूटी वस्तुएँ, रस्सी आदि से तैयार की जाती थी। वे घरौंदा बनाने, दुकान चलाने, बारात का खेल आदि खेलते थे और उन्हीं में आनन्द की अनुभूति करते थे। परन्तु आज के बालक जो खेल खेलते हैं वे इनसे पूर्णतः भिन्न हैं। हमारे खेलने के लिए क्रिकेट का सामान, किचेन सेट, डॉक्टर सेट, तरह-तरह के वीडियो गेम व कम्प्यूटर गेम आदि बहुत-सी चीजें हैं जो इनकी तुलना में एकदम अलग हैं। भोलानाथ जैसे बच्चों की खेलने की सामग्री आसानी से सुलभता से बिना खर्च किये ही प्राप्त हो जाती है जबकि आज के बच्चों का खल सामग्री बाजार से खरीदना पड़ता है।
भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
भोलानाथ और उसके साथियों के खेल तत्कालीन परम्परागत दैनिक जीवन से जुड़े हुए थे और उनकी खेल सामग्री भी घर में उपलब्ध दीए, माचिस की तिल्ली, टूटी-फूटी वस्तुएँ, रस्सी आदि से तैयार की जाती थी। वे घरौंदा बनाने, दुकान चलाने, बारात का खेल आदि खेलते थे और उन्हीं में आनन्द की अनुभूति करते थे। परन्तु आज के बालक जो खेल खेलते हैं वे इनसे पूर्णतः भिन्न हैं। हमारे खेलने के लिए क्रिकेट का सामान, किचेन सेट, डॉक्टर सेट, तरह-तरह के वीडियो गेम व कम्प्यूटर गेम आदि बहुत-सी चीजें हैं जो इनकी तुलना में एकदम अलग हैं। भोलानाथ जैसे बच्चों की खेलने की सामग्री आसानी से सुलभता से बिना खर्च किये ही प्राप्त हो जाती है जबकि आज के बच्चों का खल सामग्री बाजार से खरीदना पड़ता है।
प्रश्न 5.
पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गये हों।
उत्तर:
पाठ में ऐसे अनेक रोचक प्रसंग आए हैं जो हमारे दिल को छू गये हैं। उन प्रसंगों में से हमें सबसे अच्छा दिल को छूने वाला प्रसंग वह लगा, जब चूहे की जगह साँप बिल में से निकल आया और बच्चे उसे देखकर रोते चिल्लाते बेतहाशा भागने लगे; कोई औंधा गिरा. कोई अटांचिट। किसी का सिर फटा, किसी के दाँत टे। सभी गिरते पड़ते भागे। किसी की सारी देह लहूलुहान हो गयी। पैरों के तलवे काँटों से छलनी हो गये। बालक भोलानाथ एक सुर से दौड़ा आया, घर में घुस गया और माँ की गोद में शरण ली। इसी प्रकार अन्य प्रसंगों में पिता द्वारा मित्रतापूर्वक बच्चों के खेल में भाग लेना। बच्चे भोज, शादी या खेती का खेल खेलते हैं। बच्चे का पिता भी बच्चा बनकर उनके साथ शामिल हो जाता है। यह प्रसंग मन को छूने वाले लगते हैं।
पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गये हों।
उत्तर:
पाठ में ऐसे अनेक रोचक प्रसंग आए हैं जो हमारे दिल को छू गये हैं। उन प्रसंगों में से हमें सबसे अच्छा दिल को छूने वाला प्रसंग वह लगा, जब चूहे की जगह साँप बिल में से निकल आया और बच्चे उसे देखकर रोते चिल्लाते बेतहाशा भागने लगे; कोई औंधा गिरा. कोई अटांचिट। किसी का सिर फटा, किसी के दाँत टे। सभी गिरते पड़ते भागे। किसी की सारी देह लहूलुहान हो गयी। पैरों के तलवे काँटों से छलनी हो गये। बालक भोलानाथ एक सुर से दौड़ा आया, घर में घुस गया और माँ की गोद में शरण ली। इसी प्रकार अन्य प्रसंगों में पिता द्वारा मित्रतापूर्वक बच्चों के खेल में भाग लेना। बच्चे भोज, शादी या खेती का खेल खेलते हैं। बच्चे का पिता भी बच्चा बनकर उनके साथ शामिल हो जाता है। यह प्रसंग मन को छूने वाले लगते हैं।
प्रश्न 6.
इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं?
उत्तर:
आज की ग्रामीण संस्कृति भी वह संस्कृति नहीं रही जिसका वर्णन लेखक ने पाठ में किया है। उसमें अनेक परिवर्तन हो चुके हैं, क्योंकि अब वैज्ञानिक प्रगति और शहरी सभ्यता के बढ़ते प्रभाव के कारण ग्रामीण संस्कृति अछूती नहीं रही है। आजकल कृषि करने के ढंग में परिवर्तन आ गया है – बैलों की जगह ट्रेक्टर, बैलगाड़ियों की जगह ट्रेक्टर ट्राली, बैलों से सिंचाई की जगह ट्यूबवैल आ गये हैं। अब गाँव में दूषित राजनीति के पाँव पसारने के कारण लोगों के अन्दर जाति, धर्म, सम्प्रदाय और अमीर-गरीब जैसे भेद पनप गए हैं। ग्रामीण अंचल पर भी आज शहरी सभ्यता का भूत चढ़ चुका है। अब ग्राम्य-जीवन की सरलता और स्वाभाविकता खत्म-सी हो गयी। पिता अपनी प्रगति के लिए चिन्तित है तो बेटा अपने भविष्य को संभालने के लिए पढ़ायी-लिखायी में लगा हुआ है।
इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं?
उत्तर:
आज की ग्रामीण संस्कृति भी वह संस्कृति नहीं रही जिसका वर्णन लेखक ने पाठ में किया है। उसमें अनेक परिवर्तन हो चुके हैं, क्योंकि अब वैज्ञानिक प्रगति और शहरी सभ्यता के बढ़ते प्रभाव के कारण ग्रामीण संस्कृति अछूती नहीं रही है। आजकल कृषि करने के ढंग में परिवर्तन आ गया है – बैलों की जगह ट्रेक्टर, बैलगाड़ियों की जगह ट्रेक्टर ट्राली, बैलों से सिंचाई की जगह ट्यूबवैल आ गये हैं। अब गाँव में दूषित राजनीति के पाँव पसारने के कारण लोगों के अन्दर जाति, धर्म, सम्प्रदाय और अमीर-गरीब जैसे भेद पनप गए हैं। ग्रामीण अंचल पर भी आज शहरी सभ्यता का भूत चढ़ चुका है। अब ग्राम्य-जीवन की सरलता और स्वाभाविकता खत्म-सी हो गयी। पिता अपनी प्रगति के लिए चिन्तित है तो बेटा अपने भविष्य को संभालने के लिए पढ़ायी-लिखायी में लगा हुआ है।
प्रश्न 7.
पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।
उत्तर:
सादृश्यता के आधार पर बीते बचपन में माता-पिता का लाड़-प्यार याद आना स्वाभाविक है। उस लाड़ प्यार को आप अपनी डायरी में अंकित करें, क्योंकि प्रत्येक विद्यार्थी की लाड़-प्यार से जुड़ी यादों में अन्तर होता है।
पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।
उत्तर:
सादृश्यता के आधार पर बीते बचपन में माता-पिता का लाड़-प्यार याद आना स्वाभाविक है। उस लाड़ प्यार को आप अपनी डायरी में अंकित करें, क्योंकि प्रत्येक विद्यार्थी की लाड़-प्यार से जुड़ी यादों में अन्तर होता है।
प्रश्न 8.
यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
इस पाठ में माता-पिता के वात्सल्य का बहुत ही स्वाभाविक एवं मनमोहक वर्णन हुआ है। बच्चे के पिता उसे अतिशय प्यार करते हैं। वह उसे अपने पास सुलाते हैं। सुबह उठकर उसे नहलाते-धुलाते हैं। पूजा में अपने साथ बैठाते हैं। गंगा में मछलियों को आटा खिलाने, उसे कन्धे पर बैठाकर अपने साथ ले जाते हैं। उसे झूला झुलाते हैं। उसके साथ खेलते-खेलते. हार जाते हैं। जीत में उसका हौसला बढ़ाते हैं। प्यार से उसकी खट्टी-मीठी चुम्बी लेते हैं। उसके अन्य खेलों में बच्चे जैसा बनकर शामिल होते हैं। उसे आनन्दित करते हैं और स्वयं भी आनन्दित होते हैं। उसे बैठकर स्वयं अपने हाथों से भोजन कराते हैं।
यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
इस पाठ में माता-पिता के वात्सल्य का बहुत ही स्वाभाविक एवं मनमोहक वर्णन हुआ है। बच्चे के पिता उसे अतिशय प्यार करते हैं। वह उसे अपने पास सुलाते हैं। सुबह उठकर उसे नहलाते-धुलाते हैं। पूजा में अपने साथ बैठाते हैं। गंगा में मछलियों को आटा खिलाने, उसे कन्धे पर बैठाकर अपने साथ ले जाते हैं। उसे झूला झुलाते हैं। उसके साथ खेलते-खेलते. हार जाते हैं। जीत में उसका हौसला बढ़ाते हैं। प्यार से उसकी खट्टी-मीठी चुम्बी लेते हैं। उसके अन्य खेलों में बच्चे जैसा बनकर शामिल होते हैं। उसे आनन्दित करते हैं और स्वयं भी आनन्दित होते हैं। उसे बैठकर स्वयं अपने हाथों से भोजन कराते हैं।
इसके साथ ही बच्चे की माता भी मानो ममता की मूर्ति है। वह पिता के द्वारा बच्चे को भोजन करवाने पर भी ममत्व भाव से पूरित होकर उसे खाना खिलाती है। उसके सिर में तेल डालती है बालों को बाँधती है। नजर से बचाने के लिए उसके काला टीका लगाती है। बच्चा जब भयभीत हालत में उसकी गोद में शरण लेता है तब वह भावुक हो उठती है और काँपने लगती है। बच्चे की दशा देखकर वह स्वयं रोने लगती है। उसकी चोटों पर हल्दी लगाती है। इन सब क्रियाओं में माता के ही नहीं, पिता के भी वात्सल्य भाव की झलक मिलती है।
प्रश्न 9.
‘माता का अँचल’ शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।
उत्तर:
लेखक ने इस कहानी का शीर्षक ‘माँ का अँचल’ उपयुक्त रखा है। इस कहानी में माँ के आँचल की सार्थकता को समझाने का प्रयास किया गया है। बच्चा चाहे लाख अपने पिता के पास समय व्यतीत करता हो लेकिन भरपेट खाना तो उसे माँ ही खिला पाती है। बच्चा चाहे अपने पिता के बहुत निकट हो लेकिन घोर विपत्ति आने पर उसे माँ की गोद में ही सुरक्षा महसूस होती है। इसलिए इस कहानी के लिए ‘माता का अँचल’ शीर्षक उपयुक्त है। मेरी राय में इसका एक और उचित शीर्षक हो सकता है, ‘सुनहरा बचपन’ या ‘शैशव की मधुर स्मृतियाँ’।
‘माता का अँचल’ शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।
उत्तर:
लेखक ने इस कहानी का शीर्षक ‘माँ का अँचल’ उपयुक्त रखा है। इस कहानी में माँ के आँचल की सार्थकता को समझाने का प्रयास किया गया है। बच्चा चाहे लाख अपने पिता के पास समय व्यतीत करता हो लेकिन भरपेट खाना तो उसे माँ ही खिला पाती है। बच्चा चाहे अपने पिता के बहुत निकट हो लेकिन घोर विपत्ति आने पर उसे माँ की गोद में ही सुरक्षा महसूस होती है। इसलिए इस कहानी के लिए ‘माता का अँचल’ शीर्षक उपयुक्त है। मेरी राय में इसका एक और उचित शीर्षक हो सकता है, ‘सुनहरा बचपन’ या ‘शैशव की मधुर स्मृतियाँ’।
प्रश्न 10.
बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?
उत्तर:
बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम की अभिव्यक्ति कई तरह से करते हैं
बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?
उत्तर:
बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम की अभिव्यक्ति कई तरह से करते हैं
- माता-पिता की गोद में बैठकर या पीठ पर सवार होकर।
- माता-पिता के साथ विभिन्न प्रकार की बातें करके या उन्हें चूमकर अपना प्यार व्यक्त करते हैं।
- वे अपने माता-पिता से रो-धोकर या जिद करके कुछ माँगते हैं फिर बाद में अपना प्रेम अलग-अलग तरीके से प्रदर्शित करते हैं।
- माता-पिता को कहानी सुनाने या कहीं घुमाने ले जाने की या अपने साथ खेलने को कहकर।
- माता-पिता को अपने दोस्तों के बारे में बताकर या किसी रिश्तेदार के बारे में पूछकर।
प्रश्न 11.
इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है, वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?
उत्तर:
इस पाठ में बच्चों की जिस दुनिया का वर्णन किया गया है, वह लगभग एक सौ बीस वर्ष पुरानी है। उस समय की दुनिया में बच्चों में सरलता थी। उन्हें देखादेखी जो भी खेलने की सामग्री मिल जाती थी, वे उसी से खेलकर अपना मनोरंजन कर लेते थे। उनके खेल-मनोरंजन में उनका साथ उनके पिता भी निभाते थे। अब हमारे बचपन की दुनिया उस दुनिया से पूरी तरह भिन्न है। हमें अपने पिता का प्यार लेखक के पिता की तरह नहीं मिला, क्योंकि मेरे नौकरीपेशा पिता सुबह जल्दी ही तैयार होकर नौकरी पर चले जाते और रात को थककर कार्यालय से आते।
इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है, वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?
उत्तर:
इस पाठ में बच्चों की जिस दुनिया का वर्णन किया गया है, वह लगभग एक सौ बीस वर्ष पुरानी है। उस समय की दुनिया में बच्चों में सरलता थी। उन्हें देखादेखी जो भी खेलने की सामग्री मिल जाती थी, वे उसी से खेलकर अपना मनोरंजन कर लेते थे। उनके खेल-मनोरंजन में उनका साथ उनके पिता भी निभाते थे। अब हमारे बचपन की दुनिया उस दुनिया से पूरी तरह भिन्न है। हमें अपने पिता का प्यार लेखक के पिता की तरह नहीं मिला, क्योंकि मेरे नौकरीपेशा पिता सुबह जल्दी ही तैयार होकर नौकरी पर चले जाते और रात को थककर कार्यालय से आते।
खाना खाकर कुछ समय इधर उधर टहलने के नाम पर घूमते फिर सो जाते। इतना जरूर होता है कि खाने की मेज पर कुछ प्यार-भरी या काम की बातें अवश्य कर लेते या फिर दिनभर के हालचाल या पढ़ाई के बारे में पूछ लेते। समय मिलने पर वे स्कूटर पर बैठाकर बाजार ले जाते हैं और टॉफी, चॉकलेट या जो खाने की इच्छा हुई उसे खिला लाते हैं। या फिर घर पर ही बैठकर कुछ समय के लिए पढ़ाई करने में सहयोग दे देते। पढ़ना और पढ़कर आगे बढ़ना यही उनकी सोच होती और वे उनकी सोच के अनुसार ही आचरण करते हैं। खेल-खेलने की इच्छा तो मन की मन में ही रह गयी।
RBSE Class 10 Hindi माता का आँचल Important Questions and Answers
बहुविकल्पात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
लेखक को बचपन में किससे अधिक लगाव था?
(क) माता
(ख) पिता
(ग) भाई
(घ) बहन
उत्तर:
(ख) पिता
लेखक को बचपन में किससे अधिक लगाव था?
(क) माता
(ख) पिता
(ग) भाई
(घ) बहन
उत्तर:
(ख) पिता
प्रश्न 2.
मृदंग कब बजती है?
(क) जब लड़कियों का संग हो
(ख) जब लड़कों का संग हो
(ग) जब माता का संग हो।
(घ) जब पिता का संग हो
उत्तर:
(ख) जब लड़कों का संग हो
मृदंग कब बजती है?
(क) जब लड़कियों का संग हो
(ख) जब लड़कों का संग हो
(ग) जब माता का संग हो।
(घ) जब पिता का संग हो
उत्तर:
(ख) जब लड़कों का संग हो
प्रश्न 3.
लेखक का असली नाम क्या था?
(क) तारकेश्वरनाथ
(ख) धनपतराय
(ग) नीरज सहाय
(घ) कमलनाथ
उत्तर:
(क) तारकेश्वरनाथ
लेखक का असली नाम क्या था?
(क) तारकेश्वरनाथ
(ख) धनपतराय
(ग) नीरज सहाय
(घ) कमलनाथ
उत्तर:
(क) तारकेश्वरनाथ
प्रश्न 4.
शिवपूजन सहाय को उनके पिताजी क्या कहकर पुकारते थे?
(क) शंकरनाथ
(ख) रामदास
(ग) भोलानाथ
(घ) मंगलदास
उत्तर:
(ग) भोलानाथ
शिवपूजन सहाय को उनके पिताजी क्या कहकर पुकारते थे?
(क) शंकरनाथ
(ख) रामदास
(ग) भोलानाथ
(घ) मंगलदास
उत्तर:
(ग) भोलानाथ
प्रश्न 5.
भोलानाथ के पिताजी पूजा के समय उनके मस्तक पर किसका तिलक लगाते थे?
(क) चन्दन
(ख) कुमकुम
(ग) भभूत
(घ) हल्दी
उत्तर:
(ग) भभूत
भोलानाथ के पिताजी पूजा के समय उनके मस्तक पर किसका तिलक लगाते थे?
(क) चन्दन
(ख) कुमकुम
(ग) भभूत
(घ) हल्दी
उत्तर:
(ग) भभूत
प्रश्न 6.
लेखक के पिताजी किसका पाठ करते थे?
(क) गीता
(ख) महाभारत
(ग) रामायण
(घ) कुरान
उत्तर:
(ग) रामायण
लेखक के पिताजी किसका पाठ करते थे?
(क) गीता
(ख) महाभारत
(ग) रामायण
(घ) कुरान
उत्तर:
(ग) रामायण
प्रश्न 7.
लेखक के पिताजी पूजा-पाठ करने के बाद क्या करने लगते थे?
(क) राम-राम लिखने लगते थे
(ख) खाना खाते थे
(ग) बाजार जाते थे
(घ) आराम करते थे
उत्तर:
(क) राम-राम लिखने लगते थे
लेखक के पिताजी पूजा-पाठ करने के बाद क्या करने लगते थे?
(क) राम-राम लिखने लगते थे
(ख) खाना खाते थे
(ग) बाजार जाते थे
(घ) आराम करते थे
उत्तर:
(क) राम-राम लिखने लगते थे
प्रश्न 8.
रामनामा बही में लेखक के पिताजी कितनी बार राम-राम लिखते थे?
(क) हजार बार
(ख) सौ बार
(ग) दस बार
(घ) एक बार
उत्तर:
(क) हजार बार
रामनामा बही में लेखक के पिताजी कितनी बार राम-राम लिखते थे?
(क) हजार बार
(ख) सौ बार
(ग) दस बार
(घ) एक बार
उत्तर:
(क) हजार बार
प्रश्न 9.
लेखक के पिताजी आटे की गोलियाँ लेकर कहाँ जाते थे?
(क) गंगाजी
(ख) यमुनाजी
(ग) पहाड़ पर
(घ) मन्दिर में
उत्तर:
(क) गंगाजी
लेखक के पिताजी आटे की गोलियाँ लेकर कहाँ जाते थे?
(क) गंगाजी
(ख) यमुनाजी
(ग) पहाड़ पर
(घ) मन्दिर में
उत्तर:
(क) गंगाजी
प्रश्न 10.
पिताजी आटे की गोलियाँ किसे खिलाते थे?
(क) गायों को
(ख) बकरियों को
(ग) कबूतरों को
(घ) मछलियों को
उत्तर:
(घ) मछलियों को
पिताजी आटे की गोलियाँ किसे खिलाते थे?
(क) गायों को
(ख) बकरियों को
(ग) कबूतरों को
(घ) मछलियों को
उत्तर:
(घ) मछलियों को
प्रश्न 11.
लेखक के पिताजी उन्हें क्या खिलाते थे?
(क) शहद और नमक
(ख) गोरस और भात
(ग) दही और चीनी
(घ) नमक और दही
उत्तर:
(ख) गोरस और भात
लेखक के पिताजी उन्हें क्या खिलाते थे?
(क) शहद और नमक
(ख) गोरस और भात
(ग) दही और चीनी
(घ) नमक और दही
उत्तर:
(ख) गोरस और भात
प्रश्न 12.
जब बच्चे खाकर अफर जाते तो माता क्या हठ करती?
(क) सुलाने की
(ख) पाठशाला भेजने की
(ग) थोड़ा और खिलाने की
(घ) नहलाने की
उत्तर:
(ग) थोड़ा और खिलाने की
जब बच्चे खाकर अफर जाते तो माता क्या हठ करती?
(क) सुलाने की
(ख) पाठशाला भेजने की
(ग) थोड़ा और खिलाने की
(घ) नहलाने की
उत्तर:
(ग) थोड़ा और खिलाने की
प्रश्न 13.
बचपन में लेखक अपने पिताजी के साथ कौनसा खेल खेलता था?
(क) हॉकी
(ख) फुटबॉल
(ग) क्रिकेट
(घ) कुश्ती
उत्तर:
(घ) कुश्ती
बचपन में लेखक अपने पिताजी के साथ कौनसा खेल खेलता था?
(क) हॉकी
(ख) फुटबॉल
(ग) क्रिकेट
(घ) कुश्ती
उत्तर:
(घ) कुश्ती
प्रश्न 14.
‘उतान’ शब्द का अर्थ क्या है?
(क) पीठ के बल लेटना
(ख) स्थान, अवसर
(ग) सराबोर कर देना
(घ) भोज, दावत
उत्तर:
(क) पीठ के बल लेटना
‘उतान’ शब्द का अर्थ क्या है?
(क) पीठ के बल लेटना
(ख) स्थान, अवसर
(ग) सराबोर कर देना
(घ) भोज, दावत
उत्तर:
(क) पीठ के बल लेटना
प्रश्न 15.
‘माता का अँचल’ पाठ के लेखक का नाम क्या है?
(क) प्रेमचन्द
(ख) शिवपूजन सहाय
(ग) अज्ञेय
(घ) कमलेश्वर
उत्तर:
(ख) शिवपूजन सहाय
‘माता का अँचल’ पाठ के लेखक का नाम क्या है?
(क) प्रेमचन्द
(ख) शिवपूजन सहाय
(ग) अज्ञेय
(घ) कमलेश्वर
उत्तर:
(ख) शिवपूजन सहाय
प्रश्न 16.
बच्चे झुंझलाकर क्या करने लग जाते थे?
(क) पिताजी के पैर दबाने
(ख) पिताजी के हाथ पकड़ने
(ग) पिताजी की मूंछे नोचने
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) पिताजी की मूंछे नोचने
बच्चे झुंझलाकर क्या करने लग जाते थे?
(क) पिताजी के पैर दबाने
(ख) पिताजी के हाथ पकड़ने
(ग) पिताजी की मूंछे नोचने
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) पिताजी की मूंछे नोचने
प्रश्न 17.
ठौर का क्या अर्थ है?
(क) पीठ के बल लेटना
(ख) स्थान, अवसर
(ग) सराबोर कर देना
(घ) भोज, दावत
उत्तर:
(ख) स्थान, अवसर
ठौर का क्या अर्थ है?
(क) पीठ के बल लेटना
(ख) स्थान, अवसर
(ग) सराबोर कर देना
(घ) भोज, दावत
उत्तर:
(ख) स्थान, अवसर
प्रश्न 18.
बोथकर का क्या अर्थ है?
(क) पीठ के बल लेटना
(ख) स्थान, अवसर
(ग) सराबोर कर देना
(घ) भोज, दावत
उत्तर:
(ग) सराबोर कर देना
बोथकर का क्या अर्थ है?
(क) पीठ के बल लेटना
(ख) स्थान, अवसर
(ग) सराबोर कर देना
(घ) भोज, दावत
उत्तर:
(ग) सराबोर कर देना
प्रश्न 19.
ज्योनार का क्या अर्थ है?
(क) पीठ के बल लेटना
(ख) स्थान, अवसर
(ग) सराबोर कर देना
(घ) भोज, दावत
उत्तर:
(घ) भोज, दावत
ज्योनार का क्या अर्थ है?
(क) पीठ के बल लेटना
(ख) स्थान, अवसर
(ग) सराबोर कर देना
(घ) भोज, दावत
उत्तर:
(घ) भोज, दावत
प्रश्न 20.
बच्चे रस्सी में बंधा हुआ काठ का घोड़ा लेकर कहाँ जाते थे?
(क) पाठशाला
(ख) खेत
(ग) बाहर गली में
(घ) मन्दिर
उत्तर:
(ग) बाहर गली में
बच्चे रस्सी में बंधा हुआ काठ का घोड़ा लेकर कहाँ जाते थे?
(क) पाठशाला
(ख) खेत
(ग) बाहर गली में
(घ) मन्दिर
उत्तर:
(ग) बाहर गली में
प्रश्न 21.
लेखक किसको देखकर सिसकना भूल जाते हैं?।
(क) खेल के साथियों
(ख) पाठशाला
(ग) खेत
(घ) दुकान
उत्तर:
(क) खेल के साथियों
लेखक किसको देखकर सिसकना भूल जाते हैं?।
(क) खेल के साथियों
(ख) पाठशाला
(ग) खेत
(घ) दुकान
उत्तर:
(क) खेल के साथियों
प्रश्न 22.
अमोला किसे कहते हैं?
(क) आम का उगता हुआ पौधा
(ख) आँवला
(ग) अनान का पेड़
(घ) एक प्रकार की सब्जी
उत्तर:
(क) आम का उगता हुआ पौधा
अमोला किसे कहते हैं?
(क) आम का उगता हुआ पौधा
(ख) आँवला
(ग) अनान का पेड़
(घ) एक प्रकार की सब्जी
उत्तर:
(क) आम का उगता हुआ पौधा
प्रश्न 23.
लेखक की माँ उसे पकड़कर कौनसा तेल उसके सिर पर डाल देती थी?
(क) नारियल का
(ख) बादाम का
(ग) मूंगफली का
(घ) सरसों का
उत्तर:
(घ) सरसों का
लेखक की माँ उसे पकड़कर कौनसा तेल उसके सिर पर डाल देती थी?
(क) नारियल का
(ख) बादाम का
(ग) मूंगफली का
(घ) सरसों का
उत्तर:
(घ) सरसों का
प्रश्न 24.
भोलानाथ और उसके साथी निम्न में से कौनसा खेल नहीं खेलते थे?
(क) मिठाई की दुकान सजाना
(ख) खेती करना
(ग) बारात का जुलूस निकालना
(घ) क्रिकेट खेलना
उत्तर:
(घ) क्रिकेट खेलना
भोलानाथ और उसके साथी निम्न में से कौनसा खेल नहीं खेलते थे?
(क) मिठाई की दुकान सजाना
(ख) खेती करना
(ग) बारात का जुलूस निकालना
(घ) क्रिकेट खेलना
उत्तर:
(घ) क्रिकेट खेलना
प्रश्न 25.
दो लड़के बैल बनकर क्या खींचते थे?
(क) मोट खींचते थे
(ख) हल खींचते थे
(ग) बैलगाड़ी खींचते थे
(घ) आपस में लड़ते थे
उत्तर:
(क) मोट खींचते थे
दो लड़के बैल बनकर क्या खींचते थे?
(क) मोट खींचते थे
(ख) हल खींचते थे
(ग) बैलगाड़ी खींचते थे
(घ) आपस में लड़ते थे
उत्तर:
(क) मोट खींचते थे
प्रश्न 26.
मकई के खेत में किसका झुण्ड चर रहा था?।
(क) बकरियों का
(ख) भैंसों का
(ग) चिड़ियों का
(घ) भेड़ों का
उत्तर:
(ग) चिड़ियों का
मकई के खेत में किसका झुण्ड चर रहा था?।
(क) बकरियों का
(ख) भैंसों का
(ग) चिड़ियों का
(घ) भेड़ों का
उत्तर:
(ग) चिड़ियों का
प्रश्न 27.
लड़के और _________ पराई पीर नहीं समझते।
(क) लंगूर
(ख) गधे।
(ग) बन्दर
(घ) घोड़े
उत्तर:
(ग) बन्दर
लड़के और _________ पराई पीर नहीं समझते।
(क) लंगूर
(ख) गधे।
(ग) बन्दर
(घ) घोड़े
उत्तर:
(ग) बन्दर
प्रश्न 28.
माँ ने भोलानाथ के घावों पर क्या लगाया?
(क) मरहम
(ख) नीम के पत्ते
(ग) घास के पेल
(घ) पिसी हुई हल्दी
उत्तर:
(घ) पिसी हुई हल्दी
माँ ने भोलानाथ के घावों पर क्या लगाया?
(क) मरहम
(ख) नीम के पत्ते
(ग) घास के पेल
(घ) पिसी हुई हल्दी
उत्तर:
(घ) पिसी हुई हल्दी
प्रश्न 29.
भोलेनाथ को कौनसी शरारत महँगी पड़ी?।
(क) चूहों के बिल में पानी डालना
(ख) गुल्ली-डंडा खेलना
(ग) दोस्तों के साथ स्कूल बंक करना
(घ) बरातियों को चिढ़ाना
उत्तर:
(क) चूहों के बिल में पानी डालना
भोलेनाथ को कौनसी शरारत महँगी पड़ी?।
(क) चूहों के बिल में पानी डालना
(ख) गुल्ली-डंडा खेलना
(ग) दोस्तों के साथ स्कूल बंक करना
(घ) बरातियों को चिढ़ाना
उत्तर:
(क) चूहों के बिल में पानी डालना
प्रश्न 30.
चूहों के बिल में पानी डालने से बिल से क्या निकला?
(क) चूहा
(ख) छछून्दर
(ग) नेवला
(घ) साँप
उत्तर:
(घ) साँप
चूहों के बिल में पानी डालने से बिल से क्या निकला?
(क) चूहा
(ख) छछून्दर
(ग) नेवला
(घ) साँप
उत्तर:
(घ) साँप
प्रश्न 31.
साँप से डरकर भोलानाथ ने कहाँ शरण ली?
(क) पिताजी के पास
(ख) माता के अँचले में
(ग) मित्र के घर
(घ) विद्यालय में
उत्तर:
(ख) माता के अँचले में
साँप से डरकर भोलानाथ ने कहाँ शरण ली?
(क) पिताजी के पास
(ख) माता के अँचले में
(ग) मित्र के घर
(घ) विद्यालय में
उत्तर:
(ख) माता के अँचले में
प्रश्न 32.
बच्चे हमजोलियों के साथ मिलकर क्या करने लग जाते थे?
(क) नाच
(ख) तमाशा
(ग) खेल
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) तमाशा
बच्चे हमजोलियों के साथ मिलकर क्या करने लग जाते थे?
(क) नाच
(ख) तमाशा
(ग) खेल
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) तमाशा
प्रश्न 33.
मिठाई की दुकान किसका चंदोआ तानकर बनाई जाती थी?
(क) सरकंडा
(ख) कपड़ा
(ग) कागज
(घ) पत्तों
उत्तर:
(ग) कागज
मिठाई की दुकान किसका चंदोआ तानकर बनाई जाती थी?
(क) सरकंडा
(ख) कपड़ा
(ग) कागज
(घ) पत्तों
उत्तर:
(ग) कागज
प्रश्न 34.
घरौंदा बनाने के लिए दीवार किससे बनाई जाती थी?
(क) ठीकरों के बटखरे
(ख) जस्ते के छोटे-छोटे टुकड़ों
(ग) दियासलाई की डिब्बियों
(घ) धूल की मेड़
उत्तर:
(घ) धूल की मेड़
घरौंदा बनाने के लिए दीवार किससे बनाई जाती थी?
(क) ठीकरों के बटखरे
(ख) जस्ते के छोटे-छोटे टुकड़ों
(ग) दियासलाई की डिब्बियों
(घ) धूल की मेड़
उत्तर:
(घ) धूल की मेड़
प्रश्न 35.
बटोही कुछ देर ठिठककर क्या करने लगते?
(क) बच्चों का तमाशा देखते
(ख) बच्चों को पाठशाला जाते देखते
(ग) बच्चों को पूजा-पाठ करते देखते
(घ) खेतों की तरफ जाते देखते
उत्तर:
(क) बच्चों का तमाशा देखते
बटोही कुछ देर ठिठककर क्या करने लगते?
(क) बच्चों का तमाशा देखते
(ख) बच्चों को पाठशाला जाते देखते
(ग) बच्चों को पूजा-पाठ करते देखते
(घ) खेतों की तरफ जाते देखते
उत्तर:
(क) बच्चों का तमाशा देखते
प्रश्न 36.
बच्चे कौनसे मेले में जाते थे?
(क) शिवजी के
(ख) ददरी के
(ग) श्यामजी के
(घ) पहाड़ी के
उत्तर:
(ख) ददरी के
बच्चे कौनसे मेले में जाते थे?
(क) शिवजी के
(ख) ददरी के
(ग) श्यामजी के
(घ) पहाड़ी के
उत्तर:
(ख) ददरी के
प्रश्न 37.
लेखक ने बूढ़े वर को क्या कहकर पुकारा?
(क) श्याम चाचा
(ख) बटोही
(ग) खसूट-खब्बीस
(घ) बाबूजी
उत्तर:
(ग) खसूट-खब्बीस
लेखक ने बूढ़े वर को क्या कहकर पुकारा?
(क) श्याम चाचा
(ख) बटोही
(ग) खसूट-खब्बीस
(घ) बाबूजी
उत्तर:
(ग) खसूट-खब्बीस
प्रश्न 38.
लेखक के साथियों में सबसे ढीठ कौन था?
(क) बैजू
(ख). भोलानाथ
(ग) मूसन
(घ) गणेश
उत्तर:
(क) बैजू
लेखक के साथियों में सबसे ढीठ कौन था?
(क) बैजू
(ख). भोलानाथ
(ग) मूसन
(घ) गणेश
उत्तर:
(क) बैजू
प्रश्न 39.
‘बुढ़वा बेईमान माँगे करेला का चोखा’ कहकर बच्चों ने किसको चिढ़ाया था?
(क) बैजू
(ख) भोलानाथ
(ग) गणेश
(घ) मूसन
उत्तर:
(घ) मूसन
‘बुढ़वा बेईमान माँगे करेला का चोखा’ कहकर बच्चों ने किसको चिढ़ाया था?
(क) बैजू
(ख) भोलानाथ
(ग) गणेश
(घ) मूसन
उत्तर:
(घ) मूसन
प्रश्न 40.
जब वर्षा बन्द हुई तो बाग में क्या दिखाई दिए?
(क) पक्षी
(ख) पशु
(ग) बिच्छू
(घ) जंगली सूअर
उत्तर:
(ग) बिच्छू
जब वर्षा बन्द हुई तो बाग में क्या दिखाई दिए?
(क) पक्षी
(ख) पशु
(ग) बिच्छू
(घ) जंगली सूअर
उत्तर:
(ग) बिच्छू
प्रश्न 41.
आँधी के कुछ दूर निकल जाने पर बच्चे क्या करते थे?
(क) खेत की ओर दौड़ पड़ते।
(ख) जंगल की ओर दौड़ पड़ते
(ग) पहाड़ की ओर दौड़ पड़ते
(घ) बाग की ओर दौड़ पड़ते
उत्तर:
(घ) बाग की ओर दौड़ पड़ते
आँधी के कुछ दूर निकल जाने पर बच्चे क्या करते थे?
(क) खेत की ओर दौड़ पड़ते।
(ख) जंगल की ओर दौड़ पड़ते
(ग) पहाड़ की ओर दौड़ पड़ते
(घ) बाग की ओर दौड़ पड़ते
उत्तर:
(घ) बाग की ओर दौड़ पड़ते
प्रश्न 42.
इकट्ठा होते ही बच्चों की क्या राय जमती?
(क) बरात का जुलूस निकालने की
(ख) खेती करने की
(ग) दौड़ पड़ने की
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) खेती करने की
इकट्ठा होते ही बच्चों की क्या राय जमती?
(क) बरात का जुलूस निकालने की
(ख) खेती करने की
(ग) दौड़ पड़ने की
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) खेती करने की
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
लेखक के पिता पूजा-पाठ करने के बाद क्या करने लगते थे?
उत्तर:
लेखक के पिता पूजा-पाठ करके राम-नाम हजार बार लिखकर पोथी में बाँधकर रख देते थे। और कुछ आटे की गोलियाँ बनाते थे।
लेखक के पिता पूजा-पाठ करने के बाद क्या करने लगते थे?
उत्तर:
लेखक के पिता पूजा-पाठ करके राम-नाम हजार बार लिखकर पोथी में बाँधकर रख देते थे। और कुछ आटे की गोलियाँ बनाते थे।
प्रश्न 2.
लेखक के पिता आटे से बनी गोलियों का क्या करते थे?
उत्तर:
लेखक के पिता आटे से बनी गोलियों को गंगा तट पर ले जाते थे और उन गोलियों को एक-एक कर मछलियों को खिलाने लगते थे।
लेखक के पिता आटे से बनी गोलियों का क्या करते थे?
उत्तर:
लेखक के पिता आटे से बनी गोलियों को गंगा तट पर ले जाते थे और उन गोलियों को एक-एक कर मछलियों को खिलाने लगते थे।
प्रश्न 3.
लेखक के पिता कुश्ती लड़ते हुए उससे हार क्यों जाते थे?
उत्तर:
लेखक के पिता लेखक से कुश्ती लड़ते हुए शिथिल होकर उसके बल और उत्साह को बढ़ावा देने के लिए हार जाते थे और पीठ के बल पड़ जाते थे।
लेखक के पिता कुश्ती लड़ते हुए उससे हार क्यों जाते थे?
उत्तर:
लेखक के पिता लेखक से कुश्ती लड़ते हुए शिथिल होकर उसके बल और उत्साह को बढ़ावा देने के लिए हार जाते थे और पीठ के बल पड़ जाते थे।
प्रश्न 4.
लेखक के पिता अपनी दाढ़ी या मूंछ उसके कोमल गालों पर कब गड़ा देते थे?
उत्तर:
जब लेखक अपने पिता को चुम्मा देने लगता था तब वे अपनी दाढ़ी या मूंछ उसके कोमल गालों पर गड़ा देते थे।
लेखक के पिता अपनी दाढ़ी या मूंछ उसके कोमल गालों पर कब गड़ा देते थे?
उत्तर:
जब लेखक अपने पिता को चुम्मा देने लगता था तब वे अपनी दाढ़ी या मूंछ उसके कोमल गालों पर गड़ा देते थे।
प्रश्न 5.
लेखक को भोजन कौन और कैसे कराता था?
उत्तर:
लेखक के पिता फूल के एक कटोरे में गोरस और भात सानकर अर्थात् मिलाकर अपने हाथ से रोजाना लेखक को खिलाते थे।
लेखक को भोजन कौन और कैसे कराता था?
उत्तर:
लेखक के पिता फूल के एक कटोरे में गोरस और भात सानकर अर्थात् मिलाकर अपने हाथ से रोजाना लेखक को खिलाते थे।
प्रश्न 6.
लेखक की मइयाँ लेखक को किस युक्ति से खाना खिलाती थी?
उत्तर:
लेखक की मइयाँ मनोविज्ञान का पूरा ध्यान रखकर उसे खाना खिलाती थी। वह चिड़िया, कबूतर, मैना, तोता, हंस आदि के नाम लेकर कौर देती हुई खाना खिलाती थी।
लेखक की मइयाँ लेखक को किस युक्ति से खाना खिलाती थी?
उत्तर:
लेखक की मइयाँ मनोविज्ञान का पूरा ध्यान रखकर उसे खाना खिलाती थी। वह चिड़िया, कबूतर, मैना, तोता, हंस आदि के नाम लेकर कौर देती हुई खाना खिलाती थी।
प्रश्न 7.
गाँव के बच्चे प्रायः किस प्रकार के खेल खेला करते थे?
अथवा
भोलानाथ और उसके साथियों के खेल व खेल सामग्री किस प्रकार भिन्न थे?
उत्तर:
भोलानाथ और उसके साथी मिठाई की दुकान, रसोई बनाना, घरौंदा बनाना, खेती करना, पेड़ की डालियों पर झूला झूलना, कुश्ती लड़ना आदि खेल खेला करते थे।
गाँव के बच्चे प्रायः किस प्रकार के खेल खेला करते थे?
अथवा
भोलानाथ और उसके साथियों के खेल व खेल सामग्री किस प्रकार भिन्न थे?
उत्तर:
भोलानाथ और उसके साथी मिठाई की दुकान, रसोई बनाना, घरौंदा बनाना, खेती करना, पेड़ की डालियों पर झूला झूलना, कुश्ती लड़ना आदि खेल खेला करते थे।
प्रश्न 8.
बच्चों द्वारा बूढ़े वर को चिढ़ाने में लेखक ने समाज में व्याप्त किस कुरीति पर व्यंग्य किया है?
उत्तर:
बच्चों द्वारा बूढ़े वर को चिढ़ाने में लेखक ने समाज में व्याप्त अनमेल विवाह की कुरीति पर व्यंग्य किया है।
बच्चों द्वारा बूढ़े वर को चिढ़ाने में लेखक ने समाज में व्याप्त किस कुरीति पर व्यंग्य किया है?
उत्तर:
बच्चों द्वारा बूढ़े वर को चिढ़ाने में लेखक ने समाज में व्याप्त अनमेल विवाह की कुरीति पर व्यंग्य किया है।
प्रश्न 9.
‘माता का अँचल’ पाठ से बाल स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है?
उत्तर:
बालक किसी भी सुख-दुःख को अपने मन में नहीं रखते। वे अपनी प्रसन्नता को हँसी के माध्यम से और दुःख को रो-चिल्लाकर प्रकट कर देते हैं।
‘माता का अँचल’ पाठ से बाल स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है?
उत्तर:
बालक किसी भी सुख-दुःख को अपने मन में नहीं रखते। वे अपनी प्रसन्नता को हँसी के माध्यम से और दुःख को रो-चिल्लाकर प्रकट कर देते हैं।
प्रश्न 10.
साँप के निकलने पर लेखक ने क्या कल्पना की?
उत्तर:
साँप के निकलने पर लेखक ने कल्पना की मानो गणेशजी के वाहन चूहे की रक्षा करने के लिए शिवजी का . साँप बिल में से निकल आया हो।
साँप के निकलने पर लेखक ने क्या कल्पना की?
उत्तर:
साँप के निकलने पर लेखक ने कल्पना की मानो गणेशजी के वाहन चूहे की रक्षा करने के लिए शिवजी का . साँप बिल में से निकल आया हो।
प्रश्न 11.
साँप से डरकर भागने पर बच्चों को क्या परिणाम भुगतने पड़े?
उत्तर:
साँप से डरकर बेतहाशा भागने पर बच्चों को ये परिणाम भुगतने पड़े कि सब गिरते-पड़ते भय के मारे भागने लगे, सबकी देह लहूलुहान हो गई और काँटों से पैर छलनी हो गये।
साँप से डरकर भागने पर बच्चों को क्या परिणाम भुगतने पड़े?
उत्तर:
साँप से डरकर बेतहाशा भागने पर बच्चों को ये परिणाम भुगतने पड़े कि सब गिरते-पड़ते भय के मारे भागने लगे, सबकी देह लहूलुहान हो गई और काँटों से पैर छलनी हो गये।
प्रश्न 12.
‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर बताइए कि मइयाँ भोलानाथ को किस प्रकार कन्हैया बनाती थी?
उत्तर:
भोलानाथ के सिर पर कड़वा तेल और काजल की टीकी लगाकर उसके बाल गूंथती और उसमें फूलदार लट्ट बाँधकर उसे रंगीन कुरता-टोपी पहनाकर कन्हैया बना देती थी।
‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर बताइए कि मइयाँ भोलानाथ को किस प्रकार कन्हैया बनाती थी?
उत्तर:
भोलानाथ के सिर पर कड़वा तेल और काजल की टीकी लगाकर उसके बाल गूंथती और उसमें फूलदार लट्ट बाँधकर उसे रंगीन कुरता-टोपी पहनाकर कन्हैया बना देती थी।
प्रश्न 13.
भोलानाथ और उसके साथी मूसलाधार बारिश में पेड़ की जड़ से किस प्रकार चिपक गए थे?
उत्तर:
भोलानाथ और उसके साथी मूसलाधार बारिश में पेड़ की जड़ से इस प्रकार चिपक गए थे जैसे कुत्ते के कान में अठई चिपक जाती है।
भोलानाथ और उसके साथी मूसलाधार बारिश में पेड़ की जड़ से किस प्रकार चिपक गए थे?
उत्तर:
भोलानाथ और उसके साथी मूसलाधार बारिश में पेड़ की जड़ से इस प्रकार चिपक गए थे जैसे कुत्ते के कान में अठई चिपक जाती है।
प्रश्न 14.
बुढ़वा बेईमान माँगे करेला का चोखा कहकर बच्चों ने किसको चिढ़ाया था?
उत्तर:
बुढ़वा बेईमान माँगे करेला का चोखा कहकर बच्चों ने मूसन तिवारी को चिढ़ाया था।
बुढ़वा बेईमान माँगे करेला का चोखा कहकर बच्चों ने किसको चिढ़ाया था?
उत्तर:
बुढ़वा बेईमान माँगे करेला का चोखा कहकर बच्चों ने मूसन तिवारी को चिढ़ाया था।
प्रश्न 15.
जब भोलानाथ चहे के बिल में पानी डालकर आया उस समय उसकी माँ क्या कर रही थी?
उत्तर:
जब भोलानाथ चूहे के बिल में पानी डालकर आया उस समय उसकी माँ चावल साफ कर रही थी।
जब भोलानाथ चहे के बिल में पानी डालकर आया उस समय उसकी माँ क्या कर रही थी?
उत्तर:
जब भोलानाथ चूहे के बिल में पानी डालकर आया उस समय उसकी माँ चावल साफ कर रही थी।
प्रश्न 16.
लेखक का बचपन में किससे अधिक जुड़ाव था?
उत्तर:
लेखक को बचपन में अपने पिताजी से बहुत लगाव था।
लेखक का बचपन में किससे अधिक जुड़ाव था?
उत्तर:
लेखक को बचपन में अपने पिताजी से बहुत लगाव था।
प्रश्न 17.
विपदा के समय बालक माता के पास ही क्यों शरण लेता है?
उत्तर:
विपदा के समय बालक माता के पास शरण इसलिए लेता है क्योंकि माता का अँचल प्यार और शान्ति देने वाला होता है।
विपदा के समय बालक माता के पास ही क्यों शरण लेता है?
उत्तर:
विपदा के समय बालक माता के पास शरण इसलिए लेता है क्योंकि माता का अँचल प्यार और शान्ति देने वाला होता है।
प्रश्न 18.
‘माता के अँचल’ उपन्यास में कब का घटनाक्रम अंकित है?
उत्तर:
‘माता के अँचल’ उपन्यास का घटनाक्रम उन्नीस सौ तीस के दशक का है।
‘माता के अँचल’ उपन्यास में कब का घटनाक्रम अंकित है?
उत्तर:
‘माता के अँचल’ उपन्यास का घटनाक्रम उन्नीस सौ तीस के दशक का है।
प्रश्न 19.
माँ को बाबूजी के खिलाने का ढंग पसन्द क्यों नहीं था?।
उत्तर:
माँ को बाबूजी के खिलाने का ढंग इसलिए पसन्द नहीं था क्योंकि बाबूजी चार-चार दाने बच्चे के मुँह में डालते थे। ऐसा करने से बच्चा भूखा रह जाता था।
माँ को बाबूजी के खिलाने का ढंग पसन्द क्यों नहीं था?।
उत्तर:
माँ को बाबूजी के खिलाने का ढंग इसलिए पसन्द नहीं था क्योंकि बाबूजी चार-चार दाने बच्चे के मुँह में डालते थे। ऐसा करने से बच्चा भूखा रह जाता था।
प्रश्न 20.
बच्चों को कौनसी शरारत सबसे महँगी पड़ी?
उत्तर:
बच्चों को चूहों के बिल में पानी डालना बहुत महँगी शरारत पड़ी क्योंकि उससे साँप निकल आया था।
बच्चों को कौनसी शरारत सबसे महँगी पड़ी?
उत्तर:
बच्चों को चूहों के बिल में पानी डालना बहुत महँगी शरारत पड़ी क्योंकि उससे साँप निकल आया था।
प्रश्न 21.
बचपन में भोलानाथ का अपने पिता से कैसा जुड़ाव था?
उत्तर:
बचपन में भोलानाथ का अपने पिता से बहुत गहरा जुड़ाव था। वह पिता के पास रहकर ही उनके साथ शरारत करता था।
बचपन में भोलानाथ का अपने पिता से कैसा जुड़ाव था?
उत्तर:
बचपन में भोलानाथ का अपने पिता से बहुत गहरा जुड़ाव था। वह पिता के पास रहकर ही उनके साथ शरारत करता था।
प्रश्न 22.
भोलानाथ अपनी मण्डली के साथ कौन-कौनसा खेल खेलते थे?
उत्तर:
भोलानाथ अपनी मण्डली के साथ चबूतरे पर नौटंकी करना, बारात का जुलूस निकालना, दुकान सजाना, खेती करना और घरौंदा बनाना आदि खेल खेलते थे।
भोलानाथ अपनी मण्डली के साथ कौन-कौनसा खेल खेलते थे?
उत्तर:
भोलानाथ अपनी मण्डली के साथ चबूतरे पर नौटंकी करना, बारात का जुलूस निकालना, दुकान सजाना, खेती करना और घरौंदा बनाना आदि खेल खेलते थे।
प्रश्न 23.
चूहे के बिल में पानी डालने से क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
चूहे के बिल में पानी डालने से उसमें से साँप निकल आया। बच्चे उसे देखकर डरकर भागते हुए गिरकर घायल हो गए।
चूहे के बिल में पानी डालने से क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
चूहे के बिल में पानी डालने से उसमें से साँप निकल आया। बच्चे उसे देखकर डरकर भागते हुए गिरकर घायल हो गए।
प्रश्न 24.
बच्चों के साथ कुश्ती लड़ते हुए बाबूजी क्या करते थे?
उत्तर:
बच्चों के साथ कुश्ती लड़ने से वे शिथिल होकर लेट जाते थे और बच्चे उनको पछाड़ देते थे।
बच्चों के साथ कुश्ती लड़ते हुए बाबूजी क्या करते थे?
उत्तर:
बच्चों के साथ कुश्ती लड़ने से वे शिथिल होकर लेट जाते थे और बच्चे उनको पछाड़ देते थे।
प्रश्न 25.
बच्चे माता-पिता के प्रति अपना प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त करते हैं?
उत्तर:
बच्चे माता-पिता के प्रति अपना प्रेम उनकी गोदी में छिपकर बैठकर और उनके गालों को चमकर अभिव्यक्त करते हैं।
बच्चे माता-पिता के प्रति अपना प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त करते हैं?
उत्तर:
बच्चे माता-पिता के प्रति अपना प्रेम उनकी गोदी में छिपकर बैठकर और उनके गालों को चमकर अभिव्यक्त करते हैं।
प्रश्न 26.
लेखक ने माता के अंचल को क्या कहा है?
उत्तर:
लेखक ने माता के अँचल को प्रेम और शान्ति के चंदोवे की छाया कहा था।
लेखक ने माता के अंचल को क्या कहा है?
उत्तर:
लेखक ने माता के अँचल को प्रेम और शान्ति के चंदोवे की छाया कहा था।
प्रश्न 27.
भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता था?
उत्तर:
भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना इसलिए भूल जाता था क्योंकि बच्चों को हमजोलियों का साथ खूब भाता है। भोलानाथ उनके साथ तरह-तरह के खेल खेला करता था।
भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता था?
उत्तर:
भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना इसलिए भूल जाता था क्योंकि बच्चों को हमजोलियों का साथ खूब भाता है। भोलानाथ उनके साथ तरह-तरह के खेल खेला करता था।
प्रश्न 28.
इस उपन्यास में ग्रामीण संस्कृति को किस प्रकार उभारा?
उत्तर:
इस उपन्यास में तीस के दशक की ग्रामीण संस्कृति को बड़ी सहजता से उभारा है।
इस उपन्यास में ग्रामीण संस्कृति को किस प्रकार उभारा?
उत्तर:
इस उपन्यास में तीस के दशक की ग्रामीण संस्कृति को बड़ी सहजता से उभारा है।
प्रश्न 29.
भोलानाथ और उसके साथी अपने घरौंदे के किवाड किस चीज से बनाते थे?
उत्तर:
भोलानाथ और उसके साथी अपने घरौंदे के किवाड़ दियासलाई की डिब्बियों से बनाते थे।
भोलानाथ और उसके साथी अपने घरौंदे के किवाड किस चीज से बनाते थे?
उत्तर:
भोलानाथ और उसके साथी अपने घरौंदे के किवाड़ दियासलाई की डिब्बियों से बनाते थे।
प्रश्न 30.
वर्षा से बचने के लिए बच्चों ने क्या किया?
उत्तर:
वर्षा से बचने के लिए बच्चों ने पेड़ों से चिपक-चिपककर जड़ में बैठ गए।
वर्षा से बचने के लिए बच्चों ने क्या किया?
उत्तर:
वर्षा से बचने के लिए बच्चों ने पेड़ों से चिपक-चिपककर जड़ में बैठ गए।
प्रश्न 31.
जब भोलानाथ चूहे के बिल में पानी डालकर आया उस समय उसकी माँ क्या कर रही थी?
उत्तर:
जब भोलानाथ चूहे के बिल में पानी डालकर आया उस समय उसकी माँ चावल साफ कर रही थी।
जब भोलानाथ चूहे के बिल में पानी डालकर आया उस समय उसकी माँ क्या कर रही थी?
उत्तर:
जब भोलानाथ चूहे के बिल में पानी डालकर आया उस समय उसकी माँ चावल साफ कर रही थी।
प्रश्न 32.
‘माँ का अँचल’ पाठ किस शैली में रचा गया है?
उत्तर:
‘माँ का अँचल’ पाठ आत्मकथात्मक शैली में रचा गया है।
‘माँ का अँचल’ पाठ किस शैली में रचा गया है?
उत्तर:
‘माँ का अँचल’ पाठ आत्मकथात्मक शैली में रचा गया है।
प्रश्न 33.
‘माँ का अँचल’ पाठ में किस अंचल का अनोखा चित्रण किया गया है?
उत्तर:
संकलित अंश में ग्रामीण अंचल का अनोखा चित्रण किया गया है।
‘माँ का अँचल’ पाठ में किस अंचल का अनोखा चित्रण किया गया है?
उत्तर:
संकलित अंश में ग्रामीण अंचल का अनोखा चित्रण किया गया है।
प्रश्न 34.
लेखक के पिता बच्चों के खेल में क्यों आ जाते थे?
उत्तर:
लेखक के पिता बच्चों से बहुत प्रेम करते थे। वे उनकी प्रशंसा करने और अपना मनोरंजन करने के उद्देश्य से वहाँ पहुँच जाते थे।
लेखक के पिता बच्चों के खेल में क्यों आ जाते थे?
उत्तर:
लेखक के पिता बच्चों से बहुत प्रेम करते थे। वे उनकी प्रशंसा करने और अपना मनोरंजन करने के उद्देश्य से वहाँ पहुँच जाते थे।
प्रश्न 35.
पिता के आ जाने पर खेल खेलते सब बच्चे भाग क्यों जाते थे?
उत्तर:
खेल खेलते हुए बच्चे अपनी धुन में मस्त हो जाते थे। वे नहीं चाहते थे कि उनकी खेल की दुनिया में कोई खलल डाले या निर्देश दे।
पिता के आ जाने पर खेल खेलते सब बच्चे भाग क्यों जाते थे?
उत्तर:
खेल खेलते हुए बच्चे अपनी धुन में मस्त हो जाते थे। वे नहीं चाहते थे कि उनकी खेल की दुनिया में कोई खलल डाले या निर्देश दे।
प्रश्न 36.
पिता के द्वारा खाना खिलाने पर लेखक की मइयाँ उनसे क्या कहा करती थी?
उत्तर:
लेखक की मइयाँ कहा करती थी-आप बच्चों को खिलाने का ढंग नहीं जानते, बच्चों को भर-मुँह कौर खिलाना चाहिए।
पिता के द्वारा खाना खिलाने पर लेखक की मइयाँ उनसे क्या कहा करती थी?
उत्तर:
लेखक की मइयाँ कहा करती थी-आप बच्चों को खिलाने का ढंग नहीं जानते, बच्चों को भर-मुँह कौर खिलाना चाहिए।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
‘माता का अँचल’ नामक पाठ में बच्चे मिलकर क्या-क्या तमाशा करने लग जाते थे?
उत्तर:
बच्चे आपस में मिलकर तरह-तरह के तमाशे करने लग जाते थे। वे कभी नाटक करते तब चबूतरे का कोना नाटक घर, बाबूजी की चौकी रंगमंच बन जाती थी। उसी पर सरकंडे के खंभों पर कागज का चंदोवा तानकर मिठाइयों की दुकान लगाई जाती। इसमें चिलम के खोचे पर कपड़े के थालों में ढेले के लड्डु, पत्तों की पूरी-कचोरियाँ, गीली मिट्टी की जलेबियाँ, फूटे घड़ों के टुकड़ों के बताशे आदि मिठाई सजायी जाती थी। उसमें बच्चे ही दुकानदार और वे ही खरीदार बनने का नाटक करते थे।
‘माता का अँचल’ नामक पाठ में बच्चे मिलकर क्या-क्या तमाशा करने लग जाते थे?
उत्तर:
बच्चे आपस में मिलकर तरह-तरह के तमाशे करने लग जाते थे। वे कभी नाटक करते तब चबूतरे का कोना नाटक घर, बाबूजी की चौकी रंगमंच बन जाती थी। उसी पर सरकंडे के खंभों पर कागज का चंदोवा तानकर मिठाइयों की दुकान लगाई जाती। इसमें चिलम के खोचे पर कपड़े के थालों में ढेले के लड्डु, पत्तों की पूरी-कचोरियाँ, गीली मिट्टी की जलेबियाँ, फूटे घड़ों के टुकड़ों के बताशे आदि मिठाई सजायी जाती थी। उसमें बच्चे ही दुकानदार और वे ही खरीदार बनने का नाटक करते थे।
प्रश्न 2.
“शहर की चकाचौंध से दूर गाँव की सहजता को रचनाकार ने आत्मीयता के साथ प्रस्तुत किया है।” ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर कथन की सत्यता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कहानीकार ने गाँव की सहजता का स्वाभाविक वर्णन किया है। बालक भोलानाथ सुबह जल्दी उठकर अपने पिता के साथ नहा-धो कर पूजा करता, उनके साथ भोजन करता। बच्चों के साथ खेल खेलता, हुल्लडबाजी में भाग लेता, चूहों के बिल में पानी उलीचता, साँप निकलने पर भयभीत होकर भागता, गिरता और माता के आँचल में छिपकर सुबकने लगता आदि बच्चों के सहज क्रिया-कलाप कहानी में आत्मीयता के साथ वर्णित हैं।
“शहर की चकाचौंध से दूर गाँव की सहजता को रचनाकार ने आत्मीयता के साथ प्रस्तुत किया है।” ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर कथन की सत्यता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कहानीकार ने गाँव की सहजता का स्वाभाविक वर्णन किया है। बालक भोलानाथ सुबह जल्दी उठकर अपने पिता के साथ नहा-धो कर पूजा करता, उनके साथ भोजन करता। बच्चों के साथ खेल खेलता, हुल्लडबाजी में भाग लेता, चूहों के बिल में पानी उलीचता, साँप निकलने पर भयभीत होकर भागता, गिरता और माता के आँचल में छिपकर सुबकने लगता आदि बच्चों के सहज क्रिया-कलाप कहानी में आत्मीयता के साथ वर्णित हैं।
प्रश्न 3.
‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर लेखक के पिता की स्वभावगत विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
लेखक के पिता भगवान् के परम भक्त, परम स्नेही और भोले स्वभाव के व्यक्ति थे। वे प्रतिदिन पूजा-पाठ करने के बाद ‘रामनामा बही’ पर हजार बार राम-नाम लिखते। पाँच-सौ बार कागज के टुकड़ों पर राम-नाम लिखकर आटे की गोलियों में लपेटकर उन्हें मछलियों को खिलाते थे। पुत्र-स्नेह के कारण उसके साथ खेल खेलते, उसका ध्यान रखते और उसे संस्कार भी देते थे।
‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर लेखक के पिता की स्वभावगत विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
लेखक के पिता भगवान् के परम भक्त, परम स्नेही और भोले स्वभाव के व्यक्ति थे। वे प्रतिदिन पूजा-पाठ करने के बाद ‘रामनामा बही’ पर हजार बार राम-नाम लिखते। पाँच-सौ बार कागज के टुकड़ों पर राम-नाम लिखकर आटे की गोलियों में लपेटकर उन्हें मछलियों को खिलाते थे। पुत्र-स्नेह के कारण उसके साथ खेल खेलते, उसका ध्यान रखते और उसे संस्कार भी देते थे।
प्रश्न 4.
लेखक के पिता उसके साथ किस प्रकार का स्नेहिल व्यवहार करते थे?
उत्तर:
लेखक के पिता का पुत्र के प्रति स्वाभाविक लगाव था। वे उसे अपने पास सुलाते, नहलाते, धुलाते और पूजा में अपने साथ बिठाते थे। मस्तक पर त्रिपुंड और भभूत लगाते थे। वे बालक को कन्धे पर बैठाकर गंगाजी ले जाते, लौटते समय की डालों पर बिठाकर झूला-झुलाते। उसके गालों पर दाढ़ी-मूंछ चुम्मा लेकर उसे लाड़ करते, उसकी नाराजगी को देखकर झूठ-मूठ रोने लगते। उसे साथ बैठाकर खाना खिलाते और उसके खेलों में भाग लेते।
लेखक के पिता उसके साथ किस प्रकार का स्नेहिल व्यवहार करते थे?
उत्तर:
लेखक के पिता का पुत्र के प्रति स्वाभाविक लगाव था। वे उसे अपने पास सुलाते, नहलाते, धुलाते और पूजा में अपने साथ बिठाते थे। मस्तक पर त्रिपुंड और भभूत लगाते थे। वे बालक को कन्धे पर बैठाकर गंगाजी ले जाते, लौटते समय की डालों पर बिठाकर झूला-झुलाते। उसके गालों पर दाढ़ी-मूंछ चुम्मा लेकर उसे लाड़ करते, उसकी नाराजगी को देखकर झूठ-मूठ रोने लगते। उसे साथ बैठाकर खाना खिलाते और उसके खेलों में भाग लेते।
प्रश्न 5.
‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर तत्कालीन और आज के बच्चों के मनोविज्ञान में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
तत्कालीन परिवेश में पले बच्चों का और आज के बच्चों के मनोविज्ञान में जमीन-आसमान का अन्तर देखने को मिलता है। उस काल के बच्चों में भोलापन, सहजता, आत्मीयता, संगठन, सहयोग, चंचलता, बड़ों के प्रति आदर भाव और मौज-मस्ती समायी हुई थी। उनमें अपने-पराये का भेद नहीं था। जबकि आज के बच्चे भोलेपन से दूर, बौद्धिकता से युक्त, नई सोच से पूरित, आधुनिक खिलौनों से खेलने में रुचि धारक, टी.वी. के शौकीन और पढ़ने के लिए मजबूर दिखाई पड़ते हैं।
‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर तत्कालीन और आज के बच्चों के मनोविज्ञान में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
तत्कालीन परिवेश में पले बच्चों का और आज के बच्चों के मनोविज्ञान में जमीन-आसमान का अन्तर देखने को मिलता है। उस काल के बच्चों में भोलापन, सहजता, आत्मीयता, संगठन, सहयोग, चंचलता, बड़ों के प्रति आदर भाव और मौज-मस्ती समायी हुई थी। उनमें अपने-पराये का भेद नहीं था। जबकि आज के बच्चे भोलेपन से दूर, बौद्धिकता से युक्त, नई सोच से पूरित, आधुनिक खिलौनों से खेलने में रुचि धारक, टी.वी. के शौकीन और पढ़ने के लिए मजबूर दिखाई पड़ते हैं।
प्रश्न 6.
“बच्चे बचपन में निर्दोष और मस्त होते हैं, उन्हें परिणाम की चिन्ता नहीं होती।” उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। .
अथवा
“बच्चे बचपन में निर्दोष, निर्भय और मस्त होते हैं, उन्हें परिणाम की चिन्ता नहीं होती है।” ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बच्चे सचमुच निर्दोष एवं मासूम होते हैं। उनके मन में अनावश्यक भय नहीं होता है। इस कारण वे बूढ़े को बूढ़ा और खूसट को खूसट कह देते हैं। उन्हें ऐसी बातों के दुष्परिणाम का बोध भी नहीं होता है। इसी कारण एक बूढ़े वर ने उन बच्चों के पीछे पड़ कर उन्हें दूर तक खदेड़ा। मूसन तिवारी को चिढ़ाने पर उन्होंने गुरुजी से शिकायत कर दी। चूहे के बिल में पानी डालने पर सर्प निकला तो उसे देखकर बेतहाशा भागे और चोटें खायीं।
“बच्चे बचपन में निर्दोष और मस्त होते हैं, उन्हें परिणाम की चिन्ता नहीं होती।” उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। .
अथवा
“बच्चे बचपन में निर्दोष, निर्भय और मस्त होते हैं, उन्हें परिणाम की चिन्ता नहीं होती है।” ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बच्चे सचमुच निर्दोष एवं मासूम होते हैं। उनके मन में अनावश्यक भय नहीं होता है। इस कारण वे बूढ़े को बूढ़ा और खूसट को खूसट कह देते हैं। उन्हें ऐसी बातों के दुष्परिणाम का बोध भी नहीं होता है। इसी कारण एक बूढ़े वर ने उन बच्चों के पीछे पड़ कर उन्हें दूर तक खदेड़ा। मूसन तिवारी को चिढ़ाने पर उन्होंने गुरुजी से शिकायत कर दी। चूहे के बिल में पानी डालने पर सर्प निकला तो उसे देखकर बेतहाशा भागे और चोटें खायीं।
प्रश्न 7.
‘माता का अँचल’ पाठ से आपको बाल-स्वभाव की कौनसी जानकारियाँ मिलती हैं? लिखिए।
उत्तर:
‘माता का अँचल’ पाठं से पता चलता है कि बच्चे अपने सुख-दुःख को मन में नहीं रखते। वे यदि दुःखी होते हैं तो उसे रो-चिल्लाकर प्रकट कर देते हैं। प्रसन्न होने पर उसे हँसी-खुशी के माध्यम से व्यक्त कर देते हैं। इसलिए सिसकते-सिसकते एकदम हँस पड़ना और खेलने में तल्लीन रहना उनके लिए स्वाभाविक होता है। उनके सामने कोई रुचिकर प्रसंग आने पर अपने तनाव, दु:ख को भूलकर हँसने-खेलने लगते हैं।
‘माता का अँचल’ पाठ से आपको बाल-स्वभाव की कौनसी जानकारियाँ मिलती हैं? लिखिए।
उत्तर:
‘माता का अँचल’ पाठं से पता चलता है कि बच्चे अपने सुख-दुःख को मन में नहीं रखते। वे यदि दुःखी होते हैं तो उसे रो-चिल्लाकर प्रकट कर देते हैं। प्रसन्न होने पर उसे हँसी-खुशी के माध्यम से व्यक्त कर देते हैं। इसलिए सिसकते-सिसकते एकदम हँस पड़ना और खेलने में तल्लीन रहना उनके लिए स्वाभाविक होता है। उनके सामने कोई रुचिकर प्रसंग आने पर अपने तनाव, दु:ख को भूलकर हँसने-खेलने लगते हैं।
प्रश्न 8.
‘माता का अँचल’ पाठ में ग्रामीण परिवेश का चित्रण किया गया है। आप ग्रामीण जीवन और शहरी जीवन में क्या अन्तर पाते हैं?
उत्तर:
‘माता का अँचल’ पाठ में. लेखक ने ग्रामीण परिवार का चित्रण करते हुए वहाँ की जीवन-शैली का उल्लेख किया है। जहाँ लोगों में आत्मीयता की भावना, संगठन की भावना, आदर-सत्कार का भाव और लोग प्रकृति के करीब हैं। इसके विपरीत शहरी लोग एकल जीवन-यापन करने की प्रवृत्ति की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उनमें आत्मीयता, सहयोग, आदर-सत्कार की कमी है। इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों के प्रति अत्यधिक रुचि दिखाई देती है।
‘माता का अँचल’ पाठ में ग्रामीण परिवेश का चित्रण किया गया है। आप ग्रामीण जीवन और शहरी जीवन में क्या अन्तर पाते हैं?
उत्तर:
‘माता का अँचल’ पाठ में. लेखक ने ग्रामीण परिवार का चित्रण करते हुए वहाँ की जीवन-शैली का उल्लेख किया है। जहाँ लोगों में आत्मीयता की भावना, संगठन की भावना, आदर-सत्कार का भाव और लोग प्रकृति के करीब हैं। इसके विपरीत शहरी लोग एकल जीवन-यापन करने की प्रवृत्ति की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उनमें आत्मीयता, सहयोग, आदर-सत्कार की कमी है। इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों के प्रति अत्यधिक रुचि दिखाई देती है।
प्रश्न 9.
‘माता का अँचल’ पाठ में भोलानाथ द्वारा चूहे के बिल में पानी डालना बच्चों की किस मनोवृत्ति को प्रकट करता है? क्या यह उचित है?
उत्तर:
‘माता का अँचल’ पाठ में भोलानाथ द्वारा चूहे के बिल में पानी डालना बच्चों की पशु-पक्षियों के प्रति शरारती प्रवृत्ति को दर्शाता है जो प्रकृति के लिए उचित नहीं है। यदि पशु-पक्षी नहीं रहेंगे तो पर्यावरण का सन्तुलन बिगड़ जायेगा। पशु-पक्षियों से छेड़खानी करने पर वे हमें नुकसान भी पहुँचा सकते हैं। इसीलिए बच्चों को विद्यालय स्तर पर पशु-पक्षियों के संरक्षण का महत्त्व समझाना चाहिए। बच्चों को पशु-पक्षियों से दूर रहकर खेल खेलने की शिक्षा देनी चाहिए।
‘माता का अँचल’ पाठ में भोलानाथ द्वारा चूहे के बिल में पानी डालना बच्चों की किस मनोवृत्ति को प्रकट करता है? क्या यह उचित है?
उत्तर:
‘माता का अँचल’ पाठ में भोलानाथ द्वारा चूहे के बिल में पानी डालना बच्चों की पशु-पक्षियों के प्रति शरारती प्रवृत्ति को दर्शाता है जो प्रकृति के लिए उचित नहीं है। यदि पशु-पक्षी नहीं रहेंगे तो पर्यावरण का सन्तुलन बिगड़ जायेगा। पशु-पक्षियों से छेड़खानी करने पर वे हमें नुकसान भी पहुँचा सकते हैं। इसीलिए बच्चों को विद्यालय स्तर पर पशु-पक्षियों के संरक्षण का महत्त्व समझाना चाहिए। बच्चों को पशु-पक्षियों से दूर रहकर खेल खेलने की शिक्षा देनी चाहिए।
प्रश्न 10.
मूसन तिवारी कौन था? उसे किसने चिढ़ाया और दण्ड किसे मिला?
उत्तर:
मूसन तिवारी गाँव का ही एक बूढ़ा व्यक्ति था, जिसे कम दिखाई देता था। बैजू ने उन्हें चिढ़ाया-‘बुढ़वा बेईमान माँगे करेला का चोखा।’ बैजू के सुर में सभी बच्चों ने सुर मिलाया और चिल्लाना शुरू कर दिया। मूसन तिवारी बच्चों की शिकायत करने उनके स्कूल जाते हैं। भोलानाथ यानि लेखक को इस अनुपयुक्त व्यवहार के लिए गुरुजी द्वारा दिया गया दण्ड भोगना पड़ा।
मूसन तिवारी कौन था? उसे किसने चिढ़ाया और दण्ड किसे मिला?
उत्तर:
मूसन तिवारी गाँव का ही एक बूढ़ा व्यक्ति था, जिसे कम दिखाई देता था। बैजू ने उन्हें चिढ़ाया-‘बुढ़वा बेईमान माँगे करेला का चोखा।’ बैजू के सुर में सभी बच्चों ने सुर मिलाया और चिल्लाना शुरू कर दिया। मूसन तिवारी बच्चों की शिकायत करने उनके स्कूल जाते हैं। भोलानाथ यानि लेखक को इस अनुपयुक्त व्यवहार के लिए गुरुजी द्वारा दिया गया दण्ड भोगना पड़ा।
प्रश्न 11.
लेखक का बचपन का नाम क्या था? उसके पिता उसे भोलानाथ कहकर क्यों पुकारते थे?
उत्तर:
लेखक का बचपन का नाम ‘तारकेश्वरनाथ’ था। लेखक के पिता शिव भक्त थे। उनके पिता उन्हें सुबह नहला-धुलाकर अपने साथ पूजा में बिठा लेते थे। उनके ललाट पर भभूत एवं त्रिपुण्ड लगा देते थे। बालक लम्बी-लम्बी जटाओं और मस्तक पर लगा त्रिपुंड और भभूत देखकर उसके पिता को वह बम-भोला सा प्रतीत होता था। इसलिए उसके पिता उसे प्यार से भोलानाथ कहकर पुकारते थे। और फिर इस तरह उसका नाम भोलानाथ पड़ गया।
लेखक का बचपन का नाम क्या था? उसके पिता उसे भोलानाथ कहकर क्यों पुकारते थे?
उत्तर:
लेखक का बचपन का नाम ‘तारकेश्वरनाथ’ था। लेखक के पिता शिव भक्त थे। उनके पिता उन्हें सुबह नहला-धुलाकर अपने साथ पूजा में बिठा लेते थे। उनके ललाट पर भभूत एवं त्रिपुण्ड लगा देते थे। बालक लम्बी-लम्बी जटाओं और मस्तक पर लगा त्रिपुंड और भभूत देखकर उसके पिता को वह बम-भोला सा प्रतीत होता था। इसलिए उसके पिता उसे प्यार से भोलानाथ कहकर पुकारते थे। और फिर इस तरह उसका नाम भोलानाथ पड़ गया।
प्रश्न 12.
‘माता का अँचल’ रचना में बाल मनोभावों की अभिव्यक्ति करते-करते लेखक ने तत्कालीन समाज के पारिवारिक परिवेश का चित्रण भी किया है। उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
लेखक का बचपन ग्रामीण परिवेश में व्यतीत हुआ। उस समय पारिवारिक परिवेश में आस्तिक भावना थी, मछलियों को आटे की गोलियाँ खिलाने में रूढ़िवादी धारणा थी। माता-पिता बालकों से अधिक लगाव रखते थे। पिता बालक के साथ कुश्ती लड़ते और खट्टा-मीठा चुम्बन माँगकर प्यार जताते थे। उसके साथ खेल खेलते थे, बच्चे के रोने पर उसे हँसाने का प्रयास करते। माता उन्हें पशु-पक्षियों की कहानियाँ या बातें करके खाना खिलाती थी।
‘माता का अँचल’ रचना में बाल मनोभावों की अभिव्यक्ति करते-करते लेखक ने तत्कालीन समाज के पारिवारिक परिवेश का चित्रण भी किया है। उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
लेखक का बचपन ग्रामीण परिवेश में व्यतीत हुआ। उस समय पारिवारिक परिवेश में आस्तिक भावना थी, मछलियों को आटे की गोलियाँ खिलाने में रूढ़िवादी धारणा थी। माता-पिता बालकों से अधिक लगाव रखते थे। पिता बालक के साथ कुश्ती लड़ते और खट्टा-मीठा चुम्बन माँगकर प्यार जताते थे। उसके साथ खेल खेलते थे, बच्चे के रोने पर उसे हँसाने का प्रयास करते। माता उन्हें पशु-पक्षियों की कहानियाँ या बातें करके खाना खिलाती थी।
माता का आँचल Summary in Hindi
लेखक-परिचय :
शिवपूजन सहाय का जन्म सन् 1893 में गाँव उनवाँस, जिला भोजपुर (बिहार) में हुआ। उनके बचपन का नाम भोलानाथ था। दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने बनारस की अदालत में नकलनवीस की नौकरी की। बाद में हिन्दी के अध्यापक बन गये। असहयोग आन्दोलन के प्रभाव से उन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।
उन्होंने ‘जागरण’, ‘हिमालय’, ‘माधुरी’, ‘बालक’ आदि कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं का संपादन किया। सन् 1963. में उनका देहान्त हो गया। अपने समय के लेखकों में वे बहुत लोकप्रिय एवं सम्मानित थे। ‘देहाती दुनिया’, ‘ग्राम सुधार’, ‘वे दिन वे लोग’, ‘स्मृति शेष’ आदि उनकी दर्जनभर गद्य-कृतियाँ प्रकाशित हुईं। शिवपूजन रचनावली के चार खंडों में उनकी सम्पूर्ण रचनाएँ प्रकाशित हैं।
पाठ-परिचय :
‘माता का अँचल’ शिवपूजन सहाय के ‘देहाती दुनिया’ नामक उपन्यास से संकलित है। संकलित अंश में ग्रामीण अंचल और उसके चरित्रों का एक अनोखा चित्र है। इसमें लेखक ने अपने बचपन के खेल तमाशों, माता की ममता, पिता का दुलार, रुचियों-अरुचियों और शरारतों आदि अनेक प्रसंग शामिल किये हैं। पाठ का सार इस प्रकार है –
1. पिता से मिले संस्कार-बचपन से ही लेखक का लगाव अपने पिता से रहा। वह पिता के साथ ही बाहर की बैठक में सोया करता था। उसके पिता प्रात:काल होते ही नहा-धोकर पूजा करने बैठ जाते। पिता उसे भी नहला-धुलाकर उसके माथे पर भभूत का तिलक लगा देते। पिताजी उसे भोलानाथ कहकर पुकारते थे। लेखक अपने पिता को ‘बाबूजी’ तथा माँ को ‘मइयाँ’ कहा करता था। जब बाबूजी रामायण का पाठ करते थे, तब लेखक उनकी बगल में बैठकर शीशे में अपना मुँह देखा करता था। पिताजी पूजा-पाठ करने के बाद अपनी ‘रामनामा’ बही में हजार-बार राम-नाम लिखकर पाठ की पोथी के साथ बाँध कर रख देते थे। फिर गंगाजी में आटे की गोलियाँ फेंककर मछलियों को खिलाते थे।
2. पिता के साथ खेल-पिता बचपन में लेखक के साथ कुश्ती भी लड़ा करते थे और लड़ते-लड़ते हार जाते थे। तब पिता लेखक से खट्टा-मीठा चुम्बन माँगते थे और अपनी मूंछ-दाढ़ी उसके कोमल गालों पर गड़ा देते थे। लेखक उनकी मूंछे नोचने लगता था। पिता झूठ-मूठ रोने लगता था।
3. पिता के साथ भोजन करना-लेखक बचपन में अपने पिता के साथ भोजन किया करता था। पिता उसे अपने हाथों से भोजन कराते थे। पेट भर जाने पर भी लेखक की मइयाँ उसे भोजन कराने की जिद करती थी और दही-भात सान कर उसे खिलाती थी।
4. अनेक प्रकार के खेल खेलना-लेखक भोजन करने के बाद. बालों को गंथाकर और काजल की बिन्दी लगवाकर बाहर खड़े बच्चों के झुण्ड में मिल जाता था और अनेक प्रकार के खेल-खेलने लगता था। कभी वह चबूतरे के एक कोने पर नाटक-घर बनाता, कभी मिठाई की दुकान लगाता, कभी घरौंदा बनाता, कभी सबको पंगत में बिठाकर जिमाता, कभी बारात निकलती, कभी खेती करने का खेल खेला जाता। इन खेलों में बच्चे पूरा आनन्द लेते। इसके साथ ही वे हुल्लडबाजी और मस्ती भी करते।
5. चिढ़ाने की सजा-एक दिन आँधी के बाद जोरदार बारिश हुई। सभी बच्चे पेड़ों से सट गये। वर्षा बन्द होने पर वहाँ बहुत से बिच्छू नजर आये। उन्हें देखकर सभी भाग खड़े हुए। उन बच्चों में बैजू बड़ा ढीठ था। संयोग से उसे रास्ते में मूसन तिवारी मिल गये। वे बहुत बूढ़े थे। सभी बच्चे मिलकर उन्हें चिढ़ाने लगे। मूसन तिवारी उनके पीछे पड़ गये और पाठशाला पहुँच गये। उन्होंने लेखक और बैजू को पकड़ लिया। लेकिन बैजू छूटकर भाग गया। लेखक की गुरुजी ने खबर ली। लेखक के पिता को जब यह बात पता चली तब वे उसे पुचकारते हुए घर लाए।
6. साँप का भय-घर आने पर लेखक रोना-धोना भूलकर फिर बच्चों के साथ खेलने निकल गया। सारे लड़के मकई के खेत में घुस गये और चिड़ियों को पकड़ने लगे। लेकिन जब एक भी चिड़िया उनके हाथ नहीं आयी, तब उन्होंने एक टीले पर जाकर चूहों के बिल में पानी उलीचना शुरू कर दिया। तभी वहीं एक साँप निकल आया। सभी बच्चे रोते-चिल्लाते वहाँ से भागे। बेतहाशा भागने पर कोई गिरा, किसी का सिर फूटा तो किसी के तलवे कॉटों से छलनी हो गये।
7. माँ की गोद में शरण-लेखक बदहवास-सा होकर दौड़ा हुआ आया और अपनी मइयाँ की गोद में जा छिपा। माँ बच्चे को देखकर काँपने लगी और रोने लगी। वह सब काम छोड़कर उससे रोने का कारण पूछने लगी। घर में कोहराम मच गया, क्योंकि लेखक धीमे स्वर में साँ-स-साँ ही कह पाता था। वह भयभीत था और मइयाँ उसे गले से लगाये हुई थी। लेखक के पिता बार-बार उसे अपनी गोद में लेना चाहते थे लेकिन मारे भय के वह माँ की गोद नहीं छोड़ पा रहा था।
कठिन-शब्दार्थ :
- अँचल = गोद।
- भभूत = राख।
- आइना = काँच, शीशा।
- निहारा = देखा।
- तड़के = प्रभात/सवेरा।
- त्रिपुण्ड = एक प्रकार का तिलक जिसमें अर्धचन्द्राकार रेखाएँ बनाई जाती हैं।
- उतान = पीठ के बल लेटना।
- लिलार = ललाट।
- मृदंग = एक वाद्ययन्त्र।
- विराजमान = उपस्थित।
- नोचना = जोर से खींचना।
- गोरस = गाय का दूध।
- कौर = ग्रास, टुकड़ा।
- ठौर = जगह।
- मरदुए = नर, आदमी।
- कड़वा तेल = सरसों का तेल।
- हमजोली = साथी।
- ठीकरा = मिट्टी का टुकड़ा।
- ज्योनार = भोज, दावत।
- अमोला = आम का उगता हुआ पौधा।
- कुल्हिए = मिट्टी का लोटा।
- कलसा = कलश, घड़ा।
- ओहार = परदे के लिए डाला हुआ कपड़ा।
- घिरनी = चक्करी।
- पटाना = सींचना।
- कसोरा = मिट्टी का बना छिछला कटोरा।
- ओसाना = अनाज को हवा में उड़ाकर दाने को भूसे से अलग करना।
- बटोही = राहगीर।
- रहरी = अरहर।
- खसूट-खब्बीस = लूटने वाला नापाक प्राणी।
- छितराई = फैल गई।
- बरखा = बारिश।
- अँठई = कुत्ते के शरीर से चिपके रहने वाले छोटे कीड़े।
- चोखा = भरथा।
- चिरौरी = दीनतापूर्वक गई प्रार्थना।
- चिरई = चिड़िया।
- उलीचना = पानी को हाथों से फेंकना।
- अटोचिट = पूरी तरह चित्त।
- ओसारा = बरामदा।
- अमनिया = साफ़।
- कोहराम मचना = हायतौबा मचना।
- लुकना = छिपना।
