RBSE Class 7 Hindi रचना संस्मरण
Rajasthan Board RBSE Class 7 Hindi रचना संस्मरण
प्रश्न 1.
आप अपने विद्यालय से खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु जोधपुर गए। वहाँ हुए अनुभवों के आधार पर एक संस्मरण लिखिए।
उत्तर-
भरतपुर, 28 सितंबर। विगत माह हमारे स्कूल की टीम का चयन जिलास्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता के लिए हुआ तो प्रत्येक सदस्य खुशी से झूम उठा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हमारे खेल शिक्षक श्री मोहनसिंह शेखावत क्रिकेट टीम के सभी खिलाड़ियों को लेकर जयपुर पहुँचे। हमारी लोहागढ़ क्लब की टीम का मुकाबला जयपुर क्लब की टीम से होना था।
नियत समय पर आयोजकों ने टॉस करवाया। टॉस हुआ और जयपुर क्लब की टीम ने टॉस जीता। उसने पहले बैटिंग करने का निश्चय किया। चालीस ओवर का मैच था परंतु हमारे बॉलरों की घातक गेंदबाजी और मुस्तैदी से क्षेत्ररक्षण के बल पर हमारी टीम ने जयपुर क्लब की टीम को 28 ओवरों में 166 रन के स्कोर पर ढेर कर दिया। अब हमारी टीम ने बैटिंग प्रारंभ की। हमारी टीम को उद्घाटक जोड़ी ऐसी जमी कि 115 रन बनाकर ही हटी। अब तो अपनी जीत सुनिश्चित ही लग रही थी।
परंतु जयपुर टीम ने अपना क्षेत्ररक्षण चुस्त किया और एक नए बॉलर को बॉल दे दी। उसकी घातक गेंदबाजी ने हमारे खिलाड़ियों को पवेलियन भेजना शुरू किया, तो हमारी टीम की हार दिखाई देने लगी। अंतिम दो बॉल शेष थीं और हमारी टीम का स्कोर 160 रन पर पहुँच चुका था। हमारी टीम के कप्तान क्रीज पर डटे हुए थे। गेंद को भौंपते हुए उन्होंने उस पर एक विजयी छक्का जड़ दिया और हमारी टीम जीत गई। खेल समाप्त होने पर दोनों टीमों के कप्तानों ने परस्पर हाथ मिलाया। जिलाधिकारी महोदय ने विजयी ट्राफी प्रदान की। रोचक और रोमांचक हुए इस मैच की बातें करते हुए हम जयपुर से भरतपुर आए। प्रधानाध्यापक महोदय ने विजयी टीम की प्रशंसा की।
प्रश्न 2.
आपके विद्यालय से शैक्षणिक भ्रमण के लिए शिक्षक व विद्यार्थियों का एक दल आगरा गया। वहाँ हुए अनुभवों को याद करते हुए एक संस्मरण लिखिए।
उत्तर-
अजमेर। हमारे विद्यालय से आगरा भ्रमण के लिए छात्रों का एक दल सितंबर के महीने में गया था। कक्षाध्यापक महोदय इस टूर के प्रबंधक थे। जाने वाले सभी विद्यार्थी नियत समय पर तैयार होकर विद्यालय प्रांगण में पहुँच गए। आगरा भ्रमण की उत्सुकता और कल्पनाओं के साथ अजमेर से हमारा दल बस दुवारा ताजनगरी आगरा पहुँचा। वहाँ पहुँचकर पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार जलपान करके अकबर का मकबरा व लाल किला देखा। सबने निश्चय किया कि ताजमहल चाँदनी रात में देखेंगे। शाम को कुछ छात्रों ने खरीददारी की। मैंने भी आगरा का प्रसिद्ध पेठा व ताजमहल का एक मॉडल खरीदा। रात को हम सभी ताजमहल देखने पहुँचे। वहाँ कक्षाध्यापक महोदय ने एक गाइड की भी व्यवस्था कर दी थी, वे वहाँ के बारे में अनेक नई जानकारियाँ दे रहे थे। हम सबने ताजमहल के अंदर प्रवेश किया। चाँदनी रात की दूधिया रोशनी में नहाया ताज ! उसकी सुंदरता को देखकर सभी के मुंह से एक ही शब्द निकला-वाह ! ताज की सुंदरता को निहारते हुए हम करीब डेढ़ घंटे वहाँ घूमते रहे। इसके बाद कक्षाध्यापक महोदय के आदेश पर सब लोग पंक्तिबद्ध होकर बाहर निकले। बस में बैठकर वापस अजमेर की ओर चल दिये। प्रेम को अमर प्रतीक ताज देखना मेरे लिए एक अनोखा संस्मरण था।
प्रश्न 3.
विद्यालय के वार्षिकोत्सव का आयोजन आपके विद्यालय में दो माह पूर्व संपन्न हुआ था। स्मृति के आधार पर उस आयोजन का एक संस्मरण लिखिए।
उत्तर-
10 जनवरी की प्रार्थना सभा में प्रधानाध्यापक जी ने घोषणा की कि वार्षिक उत्सव 23 जनवरी को मनाया जाएगा। इसके लिए प्रधानाध्यापक जी ने एक बैठक बुलाई, जिसमें सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं के अतिरिक्त कुछ छात्र-छात्राओं को भी वार्षिकोत्सव संबंधी कार्य सौंपे गए। विभिन्न कार्यक्रमों के लिए छात्रों ने तैयारी की। विद्यालय प्रांगण में ही भव्य पंडाल एवं मंच बनाया गया। सबसे पहले मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम के शुभारंभ की घोषणा की। तत्पश्चात् छात्र-छात्राओं ने अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। समूह नृत्य कबाली एवं नाटक को दर्शकों ने बहुत पसंद किया। प्रधानाध्यापक जी ने विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट पढी। कार्यक्रम का समापन राजस्थान के प्रसिद्ध लोकनृत्य ‘घूमर’ से हुआ। सभी गुरुजन व छात्र-छात्राएँ आयोजन की सफलता पर प्रसन्न थे। इस उत्सव की यादें आज भी मेरे जेहन में ताजा हैं।
प्रश्न 4.
आप जयपुर निवासी रोहित कुमार हैं, अपने परिवार के साथ पिछले वर्ष दिसंबर में रेल द्वारा प्रयाग गए। रेलयात्रा में हुए अनुभवों के आधार पर एक संस्मरण तैयार कीजिए।
उत्तर-
पिछले वर्ष दिसंबर में ऑतिम सप्ताह में मुझे प्रयाग जाने के लिए रेलयात्रा का अवसर प्राप्त हुआ। हम सपरिवार रात के नौ बजे जयपुर रेलवे स्टेशन पहुँचे। हमारी गाड़ी छूटने का समय रात्रि 11 बजकर 10 मिनट का था। मेरा बड़ा भाई टिकट लेने गया। टिकट खिड़की पर लंबी लाइन लगी थी। मुश्किल से टिकट प्राप्त की। उस समय वहाँ प्लेटफार्म पर बहुत भीड़ थी। 11 बजकर 5 मिनट पर हमारी रेलगाड़ी आकर रुकी। रेलगाड़ी यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी। बड़ी धक्का-मुक्की के बाद हम प्रवेश कर पाए। कुछ क्षणों के बाद रेलगाड़ी चल दी। कुछ ही देर में रेलगाड़ी की रफ्तार तेज हो गई और वह हवा से बातें करने लगी। कानपुर पहुंचते ही रात विदा हो गई। सुबह का प्रकाश फैल गया। अब रेलगाड़ी के दोनों तरफ सुहाने दृश्य दिखाई दे रहे थे। ऐसा लगता था कि हमारी रेलगाड़ी ठहरी हुई है और किनारे के पेड़ दौड़ रहे हैं। इस प्रकार के अनेकों सुंदर दृश्य देखते हुए हम दोपहर के एक बजे के लगभग प्रयाग पहुँच गए। इतनी लंबी रेल यात्रा की यह मेरा पहला अनुभव था।
प्रश्न 5.
आप अपने सहपाठियों के साथ किसी पर्वतारोहण के लिए गए थे। वहाँ के रोमांचक अनुभवों को संस्मरण के रूप में लिखिए।
उत्तर-
पिछले ग्रीष्मावकाश में मुझे अपने सहपाठियों के साथ यमुनोत्री जाने का सुअवसर मिला। हमारे कक्षाध्यापक जी ने बताया कि ग्रीष्मावकाश में छात्रों का एक दल यमुनोत्री जा रहा है जो वहाँ पर्वतारोहण भी करेगा। मैंने अगले ही दिन भ्रमण दल में अपना नाम लिखवा लिया। पहले ट्रेन द्वारा दिल्ली पहुँचे। दिल्ली से बस द्वारा देहरादून पहुँचे। इसके बाद हमारी यात्रा पुनः प्रारंभ हुई। ऊँचे-नीचे, टेढ़े-मेढे, सर्पिलाकार, नीचे दोनों ओर पहाड़ियाँ, गहरे खड्डे ऐसे रास्तों पर यात्रा करते हुए हमारी बस लगभग पाँच घंटे में हनुमान चट्टी पहुँची। दूसरे दिन सुबह हमें यमुनोत्री की लगभग 13 किमी लंबी यात्रा करनी थी। पहाड़ियों को काटकर रास्ता बनाया गया था। घुमावदार रास्तों पर जरा-सी चूक जानलेवा हो सकती थी। आठ-नौ किमी, चलने के बाद दल के अधिकांश सदस्य थक गए थे। सभी ने आराम किया। कक्षाध्यापक महोदय ने सबका हौसला बढ़ाया। रस्सी पकड़े हुए हम सभी ने यमुनोत्री की चढाई प्रारंभ की। यह एक खड़ी चढ़ाई थी। रोमांच के साथ वहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य अनुपम था। यमुना नदी साथ-साथ बह रही थी। अंततः हम सब सकुशल यमुनोत्री पहुँच गए। आज भी मैं इस यात्रा की याद करके रोमांच और सुखद अनुभूति से भर जाता हूँ।