UK 10th Science

UK Board 10th Class Science – Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

UK Board 10th Class Science – Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

UK Board Solutions for Class 10th Science – विज्ञान – Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

अध्याय के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।
उत्तर : अवतल दर्पण का मुख्य फोकस – अवतल दर्पण पर, मुख्य अक्ष के समान्तर आपतित होने वाली सभी किरणें परावर्तन के पश्चात् मुख्य अक्ष के किसी एक ही बिन्दु से होकर गुजरती हैं। इस बिन्दु को अवतल दर्पण का मुख्य फोकस कहते हैं।
प्रश्न 2. एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 25 cm है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी? 
प्रश्न 3. उस दर्पण का नाम बताइए जो बिम्ब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सके।
उत्तर : अवतल दर्पण।
प्रश्न 4. हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च- दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं?
उत्तर : हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च- दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता देते हैं, इसके कई कारण हैं; यथा—
(1) उत्तल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा प्रतिबिम्ब बनाता है।
(2) यह वस्तु का अपेक्षाकृत छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है जिससे इसका दृष्टि-क्षेत्र बढ़ जाता और चालक छोटे से दर्पण में सड़क का सम्पूर्ण क्षेत्र देख पाता है जो कि समतल दर्पण का प्रयोग करने पर सम्भव नहीं हो पाता।
प्रश्न 5. उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता त्रिज्या 32 cm है।
प्रश्न 6. कोई अवतल दर्पण आपके सामने 10 cm दूरी पर रखे किसी बिम्ब का तीन गुना आवर्धित ( बड़ा ) वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है। प्रतिबिम्ब दर्पण से कितनी दूरी पर है?
हल : दिया है : वस्तु की अवतल दर्पण से दूरी u = – 10 cm
प्रतिबिम्ब की लम्बाई h‘ = 3 × वस्तु की लम्बाई
परन्तु प्रतिबिम्ब वास्तविक है; अतः आवर्धन ऋणात्मक होगा
अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण से 30 cm की दूरी पर उसके सामने बनेगा।
प्रश्न 7. वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलम्ब की ओर झुकेगी अथवा अभिलम्ब से दूर हटेगी? बताइए क्यों?
उत्तर : क्योंकि जल, वायु की तुलना में सघन है; अतः प्रकाश किरण वायु से जल में प्रवेश करते समय अभिलम्ब की ओर झुक जाएगी।
प्रश्न 8. प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनांक की काँच की प्लेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 × 108 m/s है।
हल : दिया है : काँच का अपवर्तनांक n = 1.50
निर्वात या वायु में प्रकाश की चाल c = 3 × 108 ms−1 माना कि काँच में प्रकाश की चाल v है तो सूत्र अपवर्तनांक
प्रश्न 9. सारणी 103 से अधिकतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को ज्ञात कीजिए। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर : सारणी 103 में हम देखते हैं कि हीरे का अपवर्तनांक सबसे अधिक तथा वायु का अपवर्तनांक सबसे कम है। अतः हीरे का प्रकाशिक घनत्व सर्वाधिक तथा वायु का प्रकाशिक घनत्व सबसे कम है।
प्रश्न 10. आपको किरोसिन, तारपीन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है? सारणी 10 · 3 में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए ।
उत्तर : सारणी 10 ·3 से, किरोसीन का अपवर्तनांक = 1.44
     जल का अपवर्तनांक = 1.33
तारपीन के तेल का अपवर्तनांक = 1.47
⋅.⋅ जल का अपवर्तनांक उपर्युक्त तीनों में सबसे कम है; अतः जल में प्रकाश की चाल सबसे अधिक होगी।
प्रश्न 11. हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर : इस कथन से अभिप्राय यह है कि हीरे में प्रकाश की चाल निर्वात में प्रकाश की चाल की 1/2.42 गुनी होगी।
प्रश्न 12. किसी लेन्स की 1 डायोप्टर क्षमता को परिभाषित कीजिए । (2008)
उत्तर : डायोप्टर – 1 डायोप्टर उस उत्तल लेन्स की क्षमता के बराबर है जिसकी फोकस दूरी 1m हो ।
प्रश्न 13. कोई उत्तल लेन्स किसी सुई का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिम्ब उस लेन्स से 50 cm दूर बनाता है। यह सुई, उत्तल लेन्स के सामने रखी है, यदि इसका प्रतिबिम्ब उसी साइज का बन रहा है जिस साइज का बिम्ब है? लेन्स की क्षमता भी ज्ञात कीजिए ।
प्रश्न 14. 2 m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेन्स की क्षमता ज्ञात कीजिए।
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेन्स बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता?
(a) जल
(b) काँच
(c) प्लास्टिक
(d) मिट्टी ।
उत्तर : (d) मिट्टी ।
प्रश्न 2. किसी बिम्ब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा बिम्ब से बड़ा पाया गया । वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?
(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच
(b) वक्रता केन्द्र पर
(c) वक्रता केन्द्र से परे
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच ।
उत्तर : (d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच ।
प्रश्न 3. किसी बिम्ब का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए बिम्ब को उत्तल लेन्स के सामने कहाँ रखें ?
(a) लेन्स के मुख्य फोकस पर
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
(c) अनन्त पर
(d) लेन्स के प्रकाशिक केन्द्र तथा मुख्य फोकस के बीच ।
उत्तर : (b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर।
प्रश्न 4. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेन्स दोनों की फोकस दूरियाँ – 15cm हैं। दर्पण तथा लेन्स सम्भवत: हैं—
(a) दोनों अवतल
(b) दोनों उत्तल
(c) दर्पण अवतल तथा लेन्स उत्तल
(d) दर्पण उत्तल तथा लेन्स अवतल ।
उत्तर : (a) दोनों अवतल ।
प्रश्न 5. किसी दर्पण से आप चाहें कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिम्ब सदैव सीधा प्रतीत होता है। सम्भवतः दर्पण है-
(a) केवल समतल
(b) केवल अवतल
(c) केवल उत्तल
(d) या तो समतल अथवा उत्तल ।
उत्तर : (d) या तो समतल अथवा उत्तल ।
प्रश्न 6. किसी शब्दकोष (dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेन्स पसन्द करेंगे?
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेन्स
(b) 50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेन्स
(c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेन्स
(d) 5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेन्स
उत्तर : (a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेन्स ।
प्रश्न 7. 15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिम्ब का सीधा प्रतिबिम्ब बनाना चाहते हैं। बिम्ब का दर्पण से दूरी का परिसर (range) क्या होना चाहिए? प्रतिबिम्ब की प्रकृति कैसी है? प्रतिबिम्ब बिम्ब से बड़ा है अथवा छोटा ? इस स्थिति में प्रतिबिम्ब बनने का एक किरण आरेख बनाइए।
उत्तर : अवतल दर्पण से वस्तु का सीधा प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए वस्तु को दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच रखना होगा। अतः
वस्तु की दर्पण के ध्रुव से दूरी 0 cm से अधिक तथा 15 cm से कम कुछ भी हो सकती है। वस्तु का प्रतिविम्व सीधा तथा आभासी है तथा आकार में वस्तु से बड़ा है।
अभीष्ट किरण आरेख संलग्न चित्र – 10.1 में प्रदर्शित है।
प्रश्न 8. निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए-
(a) किसी कार का अग्र- दीप (हैडलाइट )
(b) किसी वाहन का पार्श्व/पश्च दृश्य दर्पण अथवा वाहनों में पीछे का दृश्य देखने के लिए कौन-सा दर्पण प्रयोग में लाया जाता है? और क्यों?
(c) सौर भट्टी
अपने उत्तर की कारण सहित पुष्टि कीजिए।
उत्तर : (a) कार की हैडलाइटों में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। बल्ब दर्पण के मुख्य फोकस पर होता है, इससे बल्ब से निकली किरणें दर्पण से परावर्तन के पश्चात् समान्तर हो जाती हैं। इससे एक शक्तिशाली, समान्तरित प्रकाश पुंज प्राप्त होता है।
(b) गाड़ियों में सड़क का पृष्ठ भाग देखने के लिए, उत्तल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। इसका कारण यह है कि उत्तल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा तथा छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है। इसका दृष्टि क्षेत्र बड़ा होता है, इससे चालक को सड़क के पृष्ठ भाग का सम्पूर्ण प्रतिबिम्ब दिखाई पड़ता है।
(c) सौर- भट्टी में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। जिस बर्तन को गर्म करना होता है वह दर्पण के फोकस पर होता है। अवतल दर्पण सूर्य की समान्तर किरणों के रूप में आती ऊर्जा को परावर्तन के बाद फोकस पर रखे बर्तन पर केन्द्रित कर देता है।
प्रश्न 9. किसी उत्तल लेन्स का आधा भाग काले कागज से ढक दिया गया है। क्या यह लेन्स किसी बिम्ब का पूरा प्रतिबिम्ब बना पाएगा? अपने उत्तर की प्रयोग द्वारा जाँच कीजिए। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : हाँ, यह लेन्स वस्तु का पूर्ण प्रतिबिम्ब बना सकेगा ।
प्रायोगिक सत्यापन – सर्वप्रथम प्रकाशिक बैंच पर एक स्टैंड में उत्तल लेन्स लगाते हैं। लेन्स की फोकस दूरी से कुछ अधिक दूरी पर, स्टैंड पर एक जलती हुई मोमबत्ती रखते हैं। अब लेन्स के दूसरी ओर से मोमबत्ती को देखते हैं। अब लेन्स के आधे भाग को काला कागज चिपकाकर ढक देते हैं। पुनः लेन्स के दूसरी ओर से मोमबत्ती को देखते हैं।
प्रेक्षण—प्रथम दशा में मोमबत्ती का पूरा तथा उल्टा प्रतिबिम्ब दूसरी ओर से दिखाई देता है। कागज चिपकाने के बाद भी मोमबत्ती का पूरा प्रतिबिम्ब दिखाई देता है, परन्तु इसकी तीव्रता पहले की तुलना में कम हो जाती है।
व्याख्या – मोमबत्ती के किसी बिन्दु से चलने वाली विभिन्न किरणें लेन्स के विभिन्न भागों से अपवर्तित होकर किसी एक ही बिन्दु पर मिलेंगी। | आधा लेन्स काला कर देने पर भी उस बिन्दु पर किरणें आएँगी अर्थात् | मोमबत्ती का पर्दे पर पूरा प्रतिबिम्ब प्राप्त होगा, परन्तु प्रतिबिम्ब की तीव्रता घट जाएगी, क्योंकि किरणों की संख्या कम हो जाएगी।
प्रश्न 10. 5 cm लम्बा कोई बिम्ब 10 cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेन्स से 25 cm दूरी पर रखा जाता है। प्रकाश किरण- आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिम्ब की स्थिति, साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए। 
हल : अभीष्ट किरण-आरेख निम्नांकित चित्र – 10.3 में प्रदर्शित है—
अर्थात् प्रतिबिम्ब लेन्स के दूसरी ओर लेन्स से 50/3 cm दूरी पर बनेगा।
अर्थात् प्रतिबिम्ब की लम्बाई 10/3 cm होगी। ऋण चिह्न दर्शाता है कि प्रतिबिम्ब वास्तविकं तथा उल्टा होगा।
प्रश्न 11. 15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेन्स, किसी बिम्ब का प्रतिबिम्ब लेन्स से 10 cm दूरी पर बनाता है । बिम्ब लेन्स से कितनी दूरी पर स्थित है? किरण-आरेख खींचिए ।
अर्थात् वस्तु लेन्स से 30 cm की दूरी पर है।
अभीष्ट किरण- आरेख संलग्न चित्र – 10.4 में प्रदर्शित है।
प्रश्न 12. 15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से कोई बिम्ब 10 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे की ओर दर्पण से 6 cm की दूरी पर बनेगा।
धनात्मक चिह्न दर्शाता है कि यह प्रतिबिम्ब सीधा तथा आभासी होगा।
प्रश्न 13. एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन + 1 है। इसका क्या अर्थ है ?
उत्तर : m = 1 यह दर्शाता है कि समतल दर्पण द्वारा बनाए गए प्रतिबिम्ब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है तथा m का धनात्मक चिह्न ‘यह प्रदर्शित करता है कि समतल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिम्ब आभासी होता है अर्थात् वस्तु के विपरीत ओर (दर्पण के पीछे) बनता है।
प्रश्न 14. 5.0 cm लम्बाई का कोई बिम्ब 30 cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर रखा गया है। प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज ज्ञात कीजिए।
हल: दिया है : वस्तु की दर्पण से दूरी u = 20 cm, दर्पण की वक्रता त्रिज्या R = + 30 cm
अतः वस्तु का प्रतिबिम्ब 15/7 cm ऊँचा, सीधा तथा आभासी होगा और दर्पण के पीछे 60/7 cm की दूरी पर बनेगा।
प्रश्न 15.7.0 cm साइज का कोई बिम्ब 18 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27cm दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी परदे को रखें कि उस पर वस्तु का स्पष्ट फोकसित प्रतिबिम्ब प्राप्त किया जा सके ? प्रतिबिम्ब का साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए ।
हल: दिया है : वस्तु का आकार h = 7.0 cm, दर्पण की फोकस दूरी f = – 18 cm
अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने, दर्पण से 54 cm दूरी पर बनेगा; परदे को दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर रखना चाहिए।
यदि प्रतिबिम्ब का आकार h’ है तो दर्पण के लिए आवर्धन के सूत्र से,
अर्थात् प्रतिबिम्ब की ऊँचाई 14 cm होगी तथा यह उल्टा एवं वास्तविक होगा।
प्रश्न 16. उस लेन्स की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता – 2.0 D है | यह किस प्रकार का लेन्स है?
प्रश्न 17. कोई डॉक्टर + 1.5 D क्षमता का संशोधक लेन्स निर्धारित करता है। लेन्स की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेन्स अभिसारी है अथवा अपसारी ?
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर
  • विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. प्रकाश के परावर्तन से क्या तात्पर्य है? प्रकाश के परावर्तन के नियम चित्र की सहायता से समझाइए ।
उत्तर : प्रकाश का परावर्तन – ” प्रकाश का किसी तल से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट आना, प्रकाश का परावर्तन कहलाता है।” प्रकाश जिस तल से परावर्तित होता है उस तल को परावर्तन तल कहते हैं। परावर्तित प्रकाश की मात्रा, परावर्तक तल की प्रकृति पर निर्भर करती है। कोई भी तल जितना अधिक चिकना तथा पॉलिशदार होता है, परावर्तित प्रकाश की मात्रा भी उतनी ही अधिक होती है।
किसी दर्पण (MM‘) पर आकर टकराने वाली किरण (AN) को आपतित किरण कहते हैं (चित्र 10.5 ) । दर्पण पर टकराने के बाद लौटने वाली किरण (NC) को परावर्तित किरण कहते हैं। जिस बिन्दु (N) पर आपतित किरण तल से टकराती है, उस बिन्दु से दर्पण पर खींचा गया लम्ब (NN’) अभिलम्ब कहलाता है।
परावर्तन के नियम – किसी परावर्तक तल से प्रकाश का परावर्तन निम्नांकित दो नियमों के अनुसार होता है—
प्रथम नियम — आपतित किरण तथा अभिलम्ब के बीच बना कोण (आपतन कोण); परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब के बीच बने कोण ( परावर्तन कोण) के बराबर होता है, अर्थात्
आपतन कोण ∠ i = परावर्तन कोण ∠ r
द्वितीय नियम—आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब सभी एक ही तल (जैसे यहाँ कागज के तल) में होते हैं।
उपर्युक्त नियम समतल दर्पण तथा गोलीय दर्पणों से होने वाले परावर्तन के लिए समान रूप से लागू होते हैं।
प्रश्न 2. एक बॉक्स में समतल, अवतल तथा उत्तल दर्पण मिले हुए रखे हैं। इन दर्पणों को आप (i) केवल स्पर्श करके तथा (ii) केवल प्रतिबिम्ब देखकर कैसे अलग-अलग करेंगे? स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर : दर्पणों की पहचान करना — दर्पणों की पहचान निम्नलिखित प्रकार से करते हैं-
(i) स्पर्श करके — इस विधि द्वारा छोटी वक्रता त्रिज्या वाले दर्पणों की पहचान की जाती है। इसके लिए एक छड़ दर्पण के ऊपर रखते हैं। यदि छड़ दर्पण को सभी जगह स्पर्श करे तो दर्पण समतल है। यदि छड़ दर्पण के बीच वाले भाग को स्पर्श करे और किनारों पर उठी रहे तो दर्पण उत्तल है और यदि छड़ बीच से उठी रहे और किनारों पर स्पर्श करे तो दर्पण अवतल है (चित्र 10.6)।
(ii) प्रतिबिम्ब देखकर – यदि किसी वस्तु को दर्पण के सामने अलग-अलग दूरियों पर रखने से प्रतिबिम्ब सदैव वस्तु के बराबर तथा सीधा ही बने तो दर्पण समतल होगा। यदि वस्तु को दर्पण के पास रखने पर प्रतिबिम्ब सीधा और वस्तु से बड़ा बने तथा दूर रखने पर उल्टा व वस्तु से बड़ा या छोटा बने तो दर्पण अवतल होगा। यदि वस्तु की प्रत्येक स्थिति के लिए प्रतिबिम्ब सीधा तथा वस्तु से छोटा ही बने तो दर्पण उत्तल होगा।
प्रश्न 3. उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना किरण आरेख खींचकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना – चित्र – 10.7 में उत्तल दर्पण द्वारा वस्तु AB के प्रतिबिम्ब का बनना दिखाया गया है। वस्तु के B सिरे से मुख्य अक्ष के समान्तर चलने वाली आपतित किरण BD, दर्पण के बिन्दु D पर गिरती है। परावर्तन के पश्चात् यह किरण दर्पण के फोकस F से आती हुई प्रतीत होती है। दूसरी किरण BI वक्रता केन्द्र की सीध में दर्पण पर आपतित होती है तथा परावर्तन के पश्चात् उसी मार्ग से लौट आती है। ये दोनों परावर्तित किरणें B‘ से आती हुई प्रतीत होती हैं जो कि B का प्रतिबिम्ब है। B‘ से मुख्य अक्ष पर खींचा गया अभिलम्ब A’ B’ वस्तु AB का सम्पूर्ण प्रतिबिम्ब है। यह प्रतिबिम्ब फोकस व ध्रुव के बीच में है तथा आभासी, सीधा व वस्तु से छोटा है।
वस्तु की प्रत्येक स्थिति के लिए उत्तल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा, वस्तु से छोटा तथा दर्पण के पीछे; दर्पण के ध्रुव व फोकस के बीच बनता है।
प्रश्न 4. किसी गोलीय दर्पण के लिए परावर्तन का सूत्र लिखिए तथा प्रयुक्त प्रतीकों का अर्थ समझाइए ।
उत्तर : किसी गोलीय दर्पण से परावर्तन का सूत्र अग्रलिखित हैं-
प्रश्न 5. पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से क्या तात्पर्य है? क्रान्तिक कोण को भी समझाइए ।
उत्तर: पूर्ण आन्तरिक परावर्तन तथा क्रान्तिक कोण – जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रविष्ट होती है तो अपवर्तित किरण अभिलम्ब से दूर हटती है, अर्थात् अपवर्तन कोण, आपतन कोण की तुलना में बड़ा होता है। अब यदि आपतन कोण को लगातार बढ़ाया जाए तो एक विशेष स्थिति में अपवर्तन कोण का मान 90° हो जाता है (चित्र – 10.8) । ऐसी स्थिति में दोनों माध्यमों के सीमा पृष्ठ पर आपतित किरण विरल माध्यम में प्रविष्ट होने के स्थान पर दोनों माध्यमों के सीमा पृष्ठ के अनुदिश गमन करती है।
सघन माध्यम में बना वह आपतन कोण जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण का मान 90° हो जाए, ‘क्रान्तिक कोण’ कहलाता है। क्रान्तिक कोण को ‘c’ से प्रदर्शित करते हैं।
माना कि सघन माध्यम का विरल माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक n है, तब
यदि सघन माध्यम में आपतन कोण क्रान्तिक कोण से बड़ा हो जाए तो अपवर्तन कोण 90° से भी अधिक हो जाता है। इस स्थिति में किरण विरल माध्यम में प्रविष्ट होने के स्थान पर सघन माध्यम में वापस लौट जाती है। यह घटना पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहलाती है। इस स्थिति में आपतन कोण तथा परावर्तन कोण परस्पर बराबर होते हैं।
प्रश्न 6. मरीचिका (Mirage) किसे कहते हैं? व्याख्या कीजिए।
उत्तर : मरीचिका (Mirage) – मरीचिका एक प्रकार का दृष्टि भ्रम है जो ग्रीष्म ऋतु की दोपहर में कोलतार की सड़कों पर तथा रेगिस्तान में देखने को मिलता है।
गर्मियों की दोपहर में रेगिस्तान की रेतीली धरती तथा कोलतार की सड़कें अत्यधिक गर्म हो जाती हैं। इस कारण सड़क तथा रेत के समीप की. वायु की परत का ताप भी बढ़ जाता है। सतह से ऊपर स्थित वायु की परतों का ताप लगातार कम होता जाता है। इस प्रकार तापान्तर के कारण सतह के समीप स्थित वायु की परतें ऊपरी परतों की तुलना में विरल हो जाती हैं। जब किसी पेड़ की चोटी से पृथ्वी तल की ओर चलने वाली किरणें वायु की ऊपरी परतों (सघन ) से नीचे की परतों में अपवर्तित होती हैं तो वे लगातार अभिलम्ब से दूर हटती जाती हैं और प्रत्येक अगली परत पर आपतन कोण का मान बढ़ता जाता है। जब किसी परत के लिए आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से बड़ा हो जाता है तो पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होता है और किरण वापस ऊपर की ओर लौट जाती है। अब अपेक्षाकृत सघन परतों से गुजरते समय यह किरण लगातार अभिलम्ब की ओर झुकती जाती है। जब यह किरण दूर स्थित किसी यात्री की आँख में प्रवेश करती है तो उसे ऐसा प्रतीत होता है कि यह किरण पृथ्वी के नीचे से आ रही है और उसे पेड़ का उल्टा प्रतिबिम्ब दिखाई पड़ता है। इससे यात्री को पानी का भ्रम हो जाता है। यही मरीचिका है।
इसी प्रकार का दृष्टिभ्रम ठण्डे देशों में भी देखने को मिलता है, जहाँ समुद्र में दूर स्थित जहाज आकाश में उल्टा टँगा हुआ प्रतीत होता है।
प्रश्न 7. प्रकाश के अपवर्तन से क्या तात्पर्य है? इसके नियम भी लिखिए।
उत्तर : प्रकाश का अपवर्तन- जब प्रकाश किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाती है तो अपने मार्ग से विचलित हो जाती है। इसे प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
जब प्रकाश किरण विरल माध्यम (जैसे – वायु) से सघन माध्यम (जैसे – काँच) में जाती है तो यह अभिलम्ब की ओर झुक जाती है। इसके विपरीत, जब प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल में जाती है तो अभिलम्ब से दूर हट जाती है। प्रथम माध्यम में चलने वाली किरण आपतित किरण कहलाती है तथा दूसरे माध्यम में जाने पर यही किरण अपवर्तित किरण कहलाती है। आपतित किरण और अभिलम्ब के बीच बना कोण, आपतन कोण कहलाता है तथा अपवर्तित किरण और अभिलम्ब के बीच का कोण, अपवर्तन कोण कहलाता है। चित्र – 10.10 में आपतन कोण व अपवर्तन कोण क्रमश ir से प्रदर्शित हैं।
प्रकाश के अपवर्तन के नियम- प्रकाश के अपवर्तन के दो नियम हैं—
(1) आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।
(2) किन्हीं दो माध्यमों के लिए तथा एक ही रंग के प्रकाश के लिए आपतन कोण की ज्या (sine) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sine) का अनुपात एक नियतांक होता है।
यदि आपतन कोण i तथा अपवर्तन कोण r हो तो
इस नियम को स्नैल का नियम कहते हैं तथा नियतांक को पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं । इसे n से प्रदर्शित करते हैं।
प्रश्न 8. किसी माध्यम के अपवर्तनांक तथा उस माध्यम में प्रकाश की चाल में क्या सम्बन्ध है? इस आधार पर प्रकाशत: सघन तथा प्रकाशतः विरल माध्यमों को समझाइए ।
उत्तर : अपवर्तनांक तथा प्रकाश की चाल में सम्बन्ध – माना किसी माध्यम 1 में प्रकाश की चाल v1 तथा किसी अन्य माध्यम 2 में प्रकाश की चाल v2 है तो माध्यम 1 के सापेक्ष माध्यम 2 का अपवर्तनांक n21 निम्नलिखित सूत्र द्वारा प्राप्त होता है-
प्राय: किसी माध्यम का अपवर्तनांक निर्वात् या वायु के सापेक्ष ज्ञात किया जाता है तथा इसे उस माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं तथा से प्रदर्शित करते हैं।
निर्वात् में प्रकाश की चाल को c (= 3 × 108 ms−1 ) से प्रदर्शित करते हैं। यदि किसी माध्यम में प्रकाश की चाल है तो इस माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक
निर्वात में प्रकाश की चाल ‘c‘ किसी भी अन्य माध्यम में प्रकाश की चाल ‘v‘ से सदैव अधिक होती है। इसका यह अर्थ हुआ कि किसी भी माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक सदैव 1 से अधिक होता है।
प्रकाशतः सघन तथा विरल माध्यम-
जब दो माध्यमों (1 तथा 2) में से माध्यम 1 में प्रकाश की चाल माध्यम 2 की तुलना में अधिक है तो माध्यम 1 को माध्यम 2 की तुलना प्रकाशत: विरल कहा जाएगा, जबकि माध्यम 2 को प्रकाशतः सघन कहा जाएगा।
प्रकाशतः सघन माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक प्रकाशतः विरल माध्यम की तुलना में अधिक होता है।
इस प्रकार दो माध्यमों के निरपेक्ष अपवर्तनांक ज्ञात होने पर उनके परस्पर सघन या विरल होने का ज्ञान प्राप्त हो जाता है।
प्रश्न 9. यदि दो माध्यमों के निरपेक्ष अपवर्तनांक क्रमशः n1 तथा n2 हैं तो प्रथम माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम के अपवर्तनांक का सूत्र प्राप्त कीजिए।
यदि जल का निरपेक्ष अपवर्तनांक 4/3 तथा काँच का निरपेक्ष अपवर्तनांक 3/2 है तो जल के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर : माना कि इन माध्यमों में प्रकाश की चाल क्रमश: v1 तथा v2है, जबकि निर्वात में प्रकाश की चाल c है तो
प्रश्न 10. बिना स्पर्श किए हुए आप उत्तल लेन्स, अवतल तथा काँच की वृत्ताकार पट्टिका को कैसे पहचानोगे?
उत्तर : लेन्सों की पहचान —लेन्सों की पहचान निम्नलिखित प्रकार से की जाती है-
उत्तल लेन्स, अवतल लेन्स व काँच की पट्टिका को मुद्रित अक्षरों के ऊपर रखकर ऊपर उठाने से यदि अक्षरों का आकार बढ़ता दिखाई दे तो वह उत्तल लेन्स होगा और यदि अक्षरों का आकार घटता दिखाई दे तो वह अवतल लेन्स होगा, और यदि अक्षरों का आकार समान रहे तो वह काँच की वृत्ताकार पट्टिका होगी।
प्रश्न 11. किसी लेन्स के लिए अपवर्तन का सूत्र लिखिए तथा प्रयुक्त प्रतीकों का अर्थ बताइए ।
उत्तर : किसी लेन्स के लिए अपवर्तन का सूत्र निम्नलिखित है-
प्रश्न 12. प्रतिबिम्ब के रेखीय आवर्धन से क्या तात्पर्य है? लेन्स (दर्पण) से वस्तु की दूरी, प्रतिबिम्ब की दूरी तथा आवर्धन में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर : प्रतिबिम्ब का रेखीय आवर्धन – लेन्स अथवा दर्पण द्वारा बने किसी वस्तु के प्रतिबिम्ब की लम्बाई तथा वस्तु की लम्बाई के अनुपात को प्रतिबिम्ब का रेखीय आवर्धन कहते हैं। यदि प्रतिबिम्ब की लम्बाई h‘ तथा वस्तु की लम्बाई h हो तो
गणित द्वारा सिद्ध कर सकते हैं कि यदि लेन्स से प्रतिबिम्ब की दूरी v तथा वस्तु की दूरी u हो तो
प्रतिबिम्ब के आवर्धन का धनात्मक चिह्न प्रतिबिम्ब के सीधे व आभासी होने तथा ऋणात्मक चिह्न प्रतिबिम्ब के उल्टे व वास्तविक होने का सूचक होता है।
  • लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. प्रकाश के परावर्तन के नियम चित्र की सहायता से समझाइए ।
उत्तर : किसी दर्पण (MM‘) पर आकर टकराने वाली किरण (AN) को आपतित किरण कहते हैं (चित्र 10.11) । दर्पण पर टकराने के बाद लौटने वाली किरण (NC) को परावर्तित किरण कहते हैं। जिस बिन्दु (N) पर आपतित किरण तल से टकराती है, उस बिन्दु से दर्पण पर खींचा गया लम्ब (NN‘) अभिलम्ब कहलाता है।
परावर्तन के नियम – किसी परावर्तक तल से प्रकाश का परावर्तन निम्नांकित दो नियमों के अनुसार होता है- –
प्रथम नियम — आपतित किरण तथा अभिलम्ब के बीच बना कोण (आपतन कोण); परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब के बीच बने कोण (परावर्तन कोण) के बराबर होता है, अर्थात्
आपतन कोण ∠ i = परावर्तन कोण ∠ r
द्वितीय नियम- आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब सभी एक ही तल (जैसे यहाँ कागज के तल) में होते हैं।
प्रश्न 2. उत्तल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की विशेषताएँ बताइए ।
उत्तर : उत्तल दर्पण के सामने रखी वस्तु की प्रत्येक स्थिति के लिए, उत्तल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब सदैव दर्पण के पीछे, दर्पण के ध्रुव व फोकस के बीच, सीधा, आभासी तथा वस्तु से छोटा होता है।
प्रश्न 3. अवतल दर्पण के उपयोग बताइए ।
उत्तर : अवतल दर्पण के उपयोग —
(1) बड़े द्वारक तथा अधिक वक्रता त्रिज्या वाले अवतल दर्पणों का उपयोग हजामत बनाने में किया जाता है।
(2) टेबिल लैम्पों, मोटरगाड़ियों की हैडलाइटों, सर्चलाइटों में इनका उपयोग परावर्तक के रूप में किया जाता है।
(3) डॉक्टर नाक, कान, दाँत तथा गले की आन्तरिक जाँच करने के लिए इनका उपयोग करते हैं।
प्रश्न 4. उत्तल दर्पण के उपयोग बताइए ।
उत्तर : उत्तल दर्पण के उपयोग –
(1) स्ट्रीट लाइटों के ऊपर परावर्तकों के रूप में इनका उपयोग किया जाता है। ये लैम्प से उत्सर्जित प्रकाश को सड़क पर बड़े दायरे में फैला देते हैं।
(2) उत्तल दर्पण सदैव ही वस्तु से छोटा, सीधा तथा आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है। अपने इस गुण के कारण यह विस्तृत क्षेत्र को छोटा करके दिखा देता है। इसीलिए उत्तल दर्पण का प्रयोग मोटरगाड़ियों में, गाड़ी के पीछे सड़क पर आने वाले वाहनों को देखने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 5. उत्तल लेन्स द्वारा प्रकाशिक केन्द्र तथा प्रथम फोकस के बीच स्थित वस्तु के प्रतिबिम्ब की स्थिति को किरण आरेख द्वारा दर्शाइए ।
उत्तर : उत्तल लेन्स के प्रकाशिक केन्द्र तथा फोकस के बीच स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब चित्र – 10.12 में प्रदर्शित है।
प्रतिबिम्ब की स्थिति – लेन्स के उसी ओर जिस ओर वस्तु है।
प्रतिबिम्ब की प्रकृति – आभासी, सीधा तथा वस्तु से बड़ा बनता है।
प्रश्न 6. अवतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर : वस्तु की प्रत्येक स्थिति में अवतल लेन्स द्वारा बना प्रतिबिम्ब सीधा, आभासी तथा वस्तु से छोटा बनता है।
प्रश्न 7 लेन्स की क्षमता से आप क्या समझते हैं? लेन्स की क्षमता तथा फोकस दूरी में क्या सम्बन्ध है? इसका मात्रक भी लिखिए।
उत्तर : लेन्स की क्षमता — कोई लेन्स प्रकाश की किरणों को जितना अधिक मोड़ता है, उसकी क्षमता उतनी ही अधिक होती है। जिस लेन्स की फोकस दूरी जितनी कम होगी, वह प्रकाश किरणों को उतना ही अधिक मोड़ेगा; अतः उसकी क्षमता अधिक होगी। किसी लेन्स की क्षमता (P), फोकस दूरी (f) के प्रतिलोम के बराबर होती है, जबकि फोकस दूरी m में नापी गई हो।
लेन्स की क्षमता का मात्रक डायोप्टर होता है। 1 डायोप्टर उस लेन्स की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 m है। यदि फोकस दूरी f को cm में नापा गया है तो
उत्तल लेन्स की क्षमता धनात्मक होगी, क्योंकि उत्तल लेन्स की फोकस दूरी (f) धनात्मक होती है। इसके विपरीत अवतल लेन्स की क्षमता ऋणात्मक होगी, क्योंकि अवतल लेन्स की फोकस दूरी (f) ऋणात्मक होती है।
प्रश्न 8. हम 20 cm फोकस दूरी के किसी पतले उत्तल लेन्स द्वारा किसी वस्तु का वास्तविक, उल्टा तथा आकार में उस वस्तु के बराबर प्रतिबिम्ब प्राप्त करना चाहते हैं। वस्तु को कहाँ रखना चाहिए? इस प्रकरण में प्रतिबिम्ब का बनना दर्शाने के लिए प्रकाश किरण-आरेख खींचिए ।
उत्तर : उत्तल लेन्स द्वारा वस्तु के समान आकार का, वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए वस्तु को 2 F1 स्थिति (लेन्स से, उसकी फोकस दूरी से दोगुनी दूरी अर्थात् लेन्स से 40 cm की दूरी पर) में रखना चाहिए।
किरण- आरेख द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना संलग्न चित्र – 10.13 में प्रदर्शित किया गया है।
  • अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. समतल दर्पण की फोकस दूरी कितनी होती है?
उत्तर : समतल दर्पण की फोकस दूरी अनन्त होती है।
प्रश्न 2. किसी अवतल दर्पण के फोकस और वक्रता केन्द्र के बीच में स्थित बिम्ब का प्रतिबिम्ब कहाँ पर बनेगा? 
उत्तर : प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने, वक्रता केन्द्र तथा अनन्त के बीच, वास्तविक तथा उल्टा बनेगा।
प्रश्न 3. शेविंग दर्पण अवतलाकार जबकि चालक दर्पण उत्तलाकार होते हैं, क्यों?
उत्तर : शेविंग दर्पण चेहरे का बड़ा प्रतिबिम्ब दिखाते हैं जिससे कहीं-कहीं छूट गए बाल स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं, जबकि चालक दर्पण द्वारा सड़क के विस्तृत क्षेत्र को छोटा करके दिखाया जाता है।
प्रश्न 4. प्रकाश वायु से 1.33 अपवर्तनांक वाले जल में प्रवेश करता है। जल में प्रकाश की चाल की गणना कीजिए। वायु में प्रकाश की चाल 3.0 × 108 ms−1 है।
हल: वायु में प्रकाश की चाल c = 3 × 108 ms−1 जल का अपवर्तनांक n21 = 1.33
प्रश्न 5. प्रकाश, वायु से 2.42 अपवर्तनांक मान के हीरे में प्रवेश करता है। हीरे में प्रकाश की चाल की गणना कीजिए। वायु में प्रकाश की चाल 3.0  × 108 ms−1 है। ms
हल: प्रश्न 4 की भाँति,
प्रश्न 6. वायु की तुलना में बर्फ का अपवर्तनांक 1.31 तथा खनिज नमक का अपवर्तनांक 1.54 है। बर्फ के सापेक्ष खनिज नमक के अपवर्तनांक का परिकलन कीजिए।
हल : बर्फ का अपवर्तनांक n21 = 1.31, खनिज नमक का अपवर्तनांक n31 = 1.54
∴ बर्फ के सापेक्ष खनिज नमक का अपवर्तनांक,
प्रश्न 7. हीरे का अपवर्तनांक 2-42 है जबकि काँच का अपवर्तनांक 1.5 है। दोनों में कौन अधिक प्रकाशतः सघन है? किसमें प्रकाश की चाल अधिक होगी?
उत्तर : ⋅.⋅ हीरे का अपवर्तनांक, काँच से अधिक है; अत: काँच की तुलना में हीरा प्रकाशतः सघन है।
⋅.⋅ विरल माध्यम में प्रकाश की चाल सघन माध्यम की तुलना में अधिक होती है; अतः काँच में चाल अधिक होगी।
प्रश्न 8. एक लेन्स को एक पारदर्शी द्रव में डुबोया जाता है तो वह अदृश्य हो जाता है, ऐसा किस परिस्थिति में सम्भव है?
उत्तर : जब लेन्स के पदार्थ का तथा द्रव का अपवर्तनांक दोनों बराबर हो जाते हैं।
प्रश्न 9. एक लेन्स, जिसके तलों की वक्रता त्रिज्याएँ भिन्न-भिन्न हैं, अपने अक्ष पर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाता है। यदि लेन्स को उलट दिया जाए तो क्या प्रतिबिम्ब की स्थिति बदल जाएगी?
उत्तर : नहीं, क्योंकि लेन्स की फोकस दूरी अपरिवर्तित रहेगी।
प्रश्न 10. 50 cm फोकस दूरी वाले अवतल लेन्स की क्षमता कितनी होगी?
प्रश्न 11. 40 cm फोकस दूरी वाले किसी उत्तल लेन्स की क्षमता कितनी होगी?
प्रश्न 12. दो पतले लेन्स जिनकी क्षमताएँ + 2.0 D तथा – 1.5 D हैं, एक-दूसरे के सम्पर्क में रखे गए हैं। बताइए कि संयुक्त लेन्स उत्तल होगा या अवतल ।
  • एक शब्द या एक वाक्य वाले प्रश्न
प्रश्न 1. गाड़ियों के चालकों द्वारा वस्तुओं को विस्तृत रूप में देखने के लिए किस प्रकार का दर्पण उपयोग में लाया जाता है ?
उत्तर : उत्तल दर्पण |
प्रश्न 2. कौन – सा दर्पण, वस्तु का सदैव छोटा तथा आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है?
उत्तर : उत्तल दर्पण |
प्रश्न 3. अवतल दर्पण के उपयोग बताइए।
उत्तर : गाड़ियों के हैडलाइट तथा सर्चलाइट बनाने में।
प्रश्न 4. दो विलयनों के अपवर्तनांक 1.36 तथा 1.54 हैं, कौन अधिक सघन है ?
उत्तर : अधिक अपवर्तनांक 154 वाला घोल ।
प्रश्न 5. किस लेन्स का आवर्धन सदैव 1 से कम होता है ?
उत्तर : अवतल लेन्स का।
प्रश्न 6. लेन्स की क्षमता का मात्रक लिखिए।
उत्तर : डायोप्टर (D)।
प्रश्न 7. सम्पर्क में रखे दो लेन्सों की क्षमताएँ क्रमश: P1 तथा P2 हैं। संयुक्त लेन्स की क्षमता क्या होगी ?
उत्तर : क्षमता P = P1 + P2
प्रश्न 8. घड़ीसाज, घड़ी के सूक्ष्म पुर्जों को देखने के लिए कौन-सा लेन्स प्रयोग करता है?
उत्तर : उत्तल लेन्स |
प्रश्न 9. गाड़ी की हैडलाइट में कौन-सा दर्पण प्रयोग किया जाता है?
उत्तर : अवतल दर्पण ।
प्रश्न 10. समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब का आवर्धन कितना होता है?
उत्तर : m = + 1
प्रश्न 11. किसी लेन्स के लिए अपवर्तन का सूत्र लिखिए।
उत्तर :
प्रश्न 12. एक उत्तल लेन्स की फोकस दूरी 10 cm है। इस लेन्स द्वारा वस्तु के सम्मान आकार का वास्तविक प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए वस्तु को लेन्स से कितनी दूरी पर रखना चाहिए।
उत्तर : 2 f = 20 cm दूरी पर।
प्रश्न 13. एक उत्तल लेन्स, वस्तु का सीधा तथा आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है। वस्तु कहाँ स्थित होगी?
उत्तर : मुख्य फोकस व लेन्स के बीच।
प्रश्न 14. एक अवतल दर्पण, वस्तु के समान आकार का उल्टा प्रतिबिम्ब बनाता है। वस्तु कहाँ स्थित होगी?
उत्तर : वक्रता केन्द्र पर ।
  • आंकिक प्रश्न
प्रश्न 1. 4 · 0 cm ऊँचाई की एक वस्तु 15.0cm फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण में 25.0 cm की दूरी पर रखी गई है। दर्पण से कितनी दूरी पर एक परदे को रखा जाए जिससे कि वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिम्ब परदे पर प्राप्त हो सके ? प्रतिबिम्ब की प्रकृति तथा आकार भी ज्ञात कीजिए।
अत: परदे को दर्पण के सामने 37.5 cm की दूरी पर रखना चाहिए।
प्रकृति : चूँकि प्रतिबिम्ब परदे पर प्राप्त हो रहा है; अतः यह वास्तविक तथा उल्टा होगा ।
प्रश्न 2. 3 cm ऊँचे बिम्ब को 18 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण के सामने 9 cm की दूरी पर रखा गया है। बने प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा आकार ज्ञात कीजिए ।
प्रश्न 3. पृष्ठीय दर्पण के रूप में, एक गाड़ी में लगे उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 3.00 m है। यदि एक बस की दर्पण से दूरी 5.00 m है तो प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा आकार ज्ञात कीजिए ।
स्थिति : गाड़ी का प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 1.15 m की दूरी पर बनेगा।
प्रकृति : प्रतिबिम्ब आभासी तथा सीधा होगा ।
अर्थात् प्रतिबिम्ब गाड़ी के आकार का 0.23 गुना है।
प्रश्न 4. एक 2.0 cm ऊँची वस्तु 10 cm फोकस दूरी के उत्तल लेन्स की मुख्य अक्ष के लम्बवत् रखी गई है। वस्तु की लेन्स से दूरी 15 cm है। प्रतिबिम्ब की प्रकृति, स्थिति तथा आकार ज्ञात कीजिए। इसका आवर्धन भी ज्ञात कीजिए ।
प्रकृति : m तथा h‘ के ॠण चिह्न से स्पष्ट है कि प्रतिबिम्ब वास्तविक तथा उल्टा होगा।
आकार : प्रतिबिम्ब की ऊँचाई 4 cm है।
प्रश्न 5. एक 5 cm लम्बी वस्तु, 20 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेन्स के मुख्य अक्ष के लम्बवत् रखी गई है। लेन्स से वस्तु की दूरी 30 cm है। इसके प्रतिबिम्ब की (i) स्थिति, (ii) प्रकृति तथा (iii) आकार ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 6. एक 10 cm लम्बी वस्तु 30 cm फोकस दूरी के उत्तल लेन्स के मुख्य अक्ष के लम्बवत् रखी है। लेन्स की वस्तु से दूरी 20 cm है। इसके प्रतिबिम्ब की — (i) स्थिति, (ii) प्रकृति तथा (iii) आकार ज्ञात कीजिए।
स्थिति – प्रतिबिम्ब वस्तु की ओर लेन्स से 60 cm दूर बनेगा ।
प्रकृति – वस्तु की ओर होने के कारण प्रतिबिम्ब सीधा तथा आभासी होगा।
प्रश्न 7. 3 cm ऊँचे एक बिम्ब को 12 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेन्स के सामने 20 cm दूरी पर रखा गया है। बने प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा आकार ज्ञात कीजिए।
स्थिति — प्रतिबिम्ब लेन्स के दूसरी ओर 30 cm की दूरी पर बनेगा।
प्रकृति – प्रतिबिम्ब उल्टा तथा वास्तविक होगा।
प्रतिबिम्ब की ऊँचाई 4.5 cm होगी।
प्रश्न 8. 2.0 cm ऊँचाई की कोई वस्तु 30.0 cm फोकस दूरी के अवतल लेन्स के मुख्य अक्ष के लम्बवत् रखी गई है। वस्तु का प्रतिबिम्ब लेन्स से 20.0 cm की दूरी पर बनता है। (i) वस्तु की लेन्स से दूरी तथा (ii) प्रतिबिम्ब की प्रकृति तथा आकार ज्ञात कीजिए ।
प्रश्न 9. एक अवतल लेन्स की फोकस दूरी 15 cm है। लेन्स से कितनी दूरी पर एक वस्तु को रखा जाए जिससे कि वस्तु का प्रतिबिम्ब लेन्स से 10 cm की दूरी पर बने ? लेन्स द्वारा उत्पन्न आवर्धन भी ज्ञात कीजिए।
धनात्मक चिह्न से प्रकट होता है कि प्रतिबिम्ब सीधा तथा आभासी होगा तथा इसका आकार वस्तु के आकार का एक-तिहाई होगा ।

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