UK 10th Science

UK Board 10th Class Science – Chapter 12 विद्युत

UK Board 10th Class Science – Chapter 12 विद्युत

UK Board Solutions for Class 10th Science – विज्ञान – Chapter 12 विद्युत

अध्याय के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है ?
उत्तर : विद्युत परिपथ – विद्युत परिपथ वह सतत तथा बन्द पथ है . जिससे होकर विद्युत धारा गुजर सकती है।
प्रश्न 2. विद्युत धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।
उत्तर : ऐम्पियर : विद्युत धारा का S. I. मात्रक – विद्युत धारा का S. I मात्रक ऐम्पियर है जिसे A से प्रदर्शित करते हैं।
अर्थात् 1 A उस चालक में प्रवाहित धारा के बराबर है, जिसमें आवेश 1 C/s की दर से प्रवाहित होता है।
प्रश्न 3. एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।
प्रश्न 4. उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवान्तर बनाए रखने में सहायता करती है।
उत्तर : आवश्यक युक्ति विद्युत सेल है ।
प्रश्न 5. यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 1V है? 
उत्तर : इस कथन का यह अर्थ है कि 1 C के आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में 1 J कार्य करना होगा ।
प्रश्न 6. 6 V की बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?
उत्तर : ⋅.⋅ बैटरी का विभवान्तर 6V अर्थात् 6 J/C है; अतः प्रति 1 C आवेश को 6 J ऊर्जा दी जाएगी।
प्रश्न 7. किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है? 
उत्तर : किसी चालक का प्रतिरोध ‘R‘ उसकी लम्बाई l, उसके अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A तथा उसके पदार्थ पर निम्न प्रकार से निर्भर करता है-
प्रश्न 8. समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो तो इनमें से किसमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत स्रोत से संयोजित किया जाता है? क्यों?
उत्तर : ⋅.⋅ तार का प्रतिरोध R ∝ 1/A ( A = अनुप्रस्थ क्षेत्रफल)
⋅.⋅ मोटे तार का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल अधिक है; अतः इसका प्रतिरोध कम होगा, इसलिए मोटे तार से धारा आसानी से प्रवाहित होगी।
प्रश्न 9. मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवान्तर को उसके पूर्व के विभवान्तर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा में क्या परिवर्तन होगा? 
अर्थात् विभवान्तर आधा हो जाने पर धारा भी आधी हो जाएगी।
प्रश्न 10. वोटरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रातु के क्यों बनाए जाते हैं?
अथवा विद्युत उपकरणों में गर्म करने के लिए शुद्ध धातुओं की अपेक्षा मिश्र धातुओं का प्रयोग क्यों किया जाता है? 
उत्तर : टोस्टर, इस्तरी आदि विद्युत उपकरणों के चालक मिश्रधातुओं (मिश्रातुओं) के इसलिए बनाए जाते हैं; क्योंकि मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता, शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है तथा ताप वृद्धि के साथ इनकी प्रतिरोधकता में नगण्य परिवर्तन होता है। इसके अतिरिक्त मिश्रधातुओं का ऑक्सीकरण भी कम होता है। फलतः मिश्रधातुओं में बने चालकों की उम्र शुद्ध धात्विक चालकों की तुलना में अधिक होती है।
प्रश्न 11. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तालिका 12.2 में दिए गए आँकड़ों के आधार पर दीजिए-
(a) आयरन (Fe) तथा मर्करी (Hg) में कौन अच्छा विद्युत चालक है?
(b) कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है?
उत्तर : (a) आयरन की प्रतिरोधकता 10.0 × 10−8 Ωm है जबकि मर्करी की प्रतिरोधकता अधिक 94.0 × 10−8 Ωm है। अत: आयरन (Fe), मर्करी (Hg) की अपेक्षा विद्युत का अच्छा चालक है।
(b) सारणी के आधार पर सिल्वर (Ag) की प्रतिरोधकता (1.6 × 10−8) सबसे कम है; अतः यह सर्वश्रेष्ठ चालक है।
प्रश्न 12. किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 2V के तीन सेलों की बैटरी, एक 5 Ω प्रतिरोधक, एक 8Ω प्रतिरोधक, एक 12Ω प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों।
उत्तर : परिपथ का व्यवस्था आरेख चित्र-12-1 में प्रदर्शित है।
प्रश्न 13. प्रश्न 12 का परिपथ दुबारा खींचिए तथा इसमें | प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत धारा को मापने के लिए ऐमीटर तथा 1292 के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर मापने के लिए | वोल्टमीटर लगाइए। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठयांक होंगे?
हल : चित्र-12-2 देखिए ।
प्रश्न 14. जब (a) 1 Ω तथा 106 Ω (b) 1 Ω, 103 Ω तथा 106 Ω के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के सम्बन्ध में आप क्या निर्णय करेंगे?
उपर्युक्त परिणामों से प्रकट होता है कि समान्तर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध, संयोजन में जुड़े अल्पतम प्रतिरोध से भी कम होता है।
प्रश्न 15. 100 Ω का एक विद्युत लैम्प, 50 Ω का एक विद्युत टोस्टर तथा 500 Ω का एक जल फिल्टर 200 V के विद्युत स्रोत से पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। उस विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध क्या है जिसे यदि समान स्त्रोत के साथ संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं। यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत इस्तरी से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होती है ?
हल: ⋅.⋅ विद्युत इस्तरी, तीनों उपकरणों के बराबर धारा लेती है; अत: इस्तरी का प्रतिरोध, उपकरणों के समान्तर संयोजन के तुल्य प्रतिरोध के बराबर होगा।
(Note)
प्रश्न 16. श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत युक्तियों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं?
हल : उपकरणों को पार्श्वक्रम में जोड़ने के निम्नलिखित लाभ हैं—
(1) पार्श्वक्रम में जोड़ने पर उपकरणों को आवश्यकतानुसार अलग-अलग प्रयोग किया जा सकता है जबकि श्रेणीक्रम में जोड़ने पर सभी उपकरण एक ही स्विच से एक-साथ ऑन होंगे तथा एक साथ ही ऑफ होंगे।
(2) उपकरणों को पार्श्वक्रम में जोड़ने पर, सभी उपकरणों के सिरों के बीच समान विभवान्तर उपलब्ध रहता है।
(3) इस व्यवस्था में जैसे-जैसे नए उपकरण ऑन किए जाते हैं वैसे-वैसे परिपथ का कुल प्रतिरोध घटता जाता है तथा बैटरी से ली जाने वाली धारा बढ़ती जाती है।
प्रश्न 17. 2 Ω, 3 Ω तथा 6 Ω के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध (a) 4 Ω, (b) 1 Ω हो ?
हल : (a) यहाँ R1 = 2 Ω, R2 = 3 Ω तथा R3 = 6 Ω
4 Ω का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए पहले 3 Ω व 6 Ω के प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़ना होगा तत्पश्चात् 252 के प्रतिरोधक को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।
प्रश्न 18. 4 Ω, 8 Ω, 12 Ω तथा 24 Ω प्रतिरोध की चार कुण्डलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से (a) अधिकतम, (b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके ?
हल : दिया है : R1 = 4 Ω, R2 = 8 Ω, R3 = 12 Ω तथा R4 = 24 Ω
(a) अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त करने हेतु सभी को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा, तब उच्च अधिकतम प्रतिरोध
R = R1 + R2 + R3 + R4
    = 4 + 8 + 12 + 24 = 48 Ω
(b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त करने हेतु सभी को पार्श्वक्रम में जोड़ना होगा।
प्रश्न 19. किसी विद्युत हीटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है? 
उत्तर : विद्युत हीटर की डोरी शुद्ध धातु (ताँबा ) की बनी होती है जबकि विद्युत हीटर की कुण्डली (तापन अवयव) मिश्रधातु नाइक्रोम की बनी होती है। नाइक्रोम की प्रतिरोधकता ताँबे से बहुत अधिक होने के कारण कुण्डली का प्रतिरोध डोरी के प्रतिरोध से बहुत अधिक होता है।
विद्युत हीटर की डोरी तथा कुण्डली में समान धारा I प्रवाहित होती है।
सूत्र P = I2 R से, समान धारा के लिए किसी प्रतिरोधक में शक्ति खर्च उसके प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती (PR) होता है।
अतः विद्युत हीटर कुण्डली में डोरी की तुलना में शक्ति खर्च बहुत अधिक होगा; अतः विद्युत हीटर की कुण्डली चमकने लगती है जबकि डोरी नहीं चमकती (उत्तप्त) हैं।
प्रश्न 20. एक घण्टे में 50 V विभवान्तर से 96000 कूलॉम आवेश को स्थानान्तरित करने में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए ।
प्रश्न 21. 20 Ω प्रतिरोध की कोई विद्युत इस्तरी 5 A विद्युत धारा लेती है। 30 s में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए ।
प्रश्न 22. विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है?
उत्तर : किसी प्रदत्त धारा द्वारा ऊर्जा की दर, शक्ति के द्वारा निर्धारित होती है।
प्रश्न 23. कोई विद्युत मोटर 220 V के विद्युत स्रोत से 5.0 A विद्युत धारा लेता है। मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा 2 घण्टे में मोटर द्वारा उपभुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए ।
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा गया है। इन टुकड़ों को फिर पार्श्वक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R’ है तो R/R’ अनुपात का मान क्या है?
(a) 1/25
(b) 1/5
(c) 5
(d) 25
उत्तर : (d) 25.
प्रत्येक कटे भाग का प्रतिरोध R/5 होगा ।
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-सा पद, विद्युत परिपथ में विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता है-
(a) I2R
(b) IR2
(c) VI
(d) V2/R
उत्तर : (b) IR2.
प्रश्न 3. किसी विद्युत बल्ब का अनुमतांक 220 V; 110 W है। जब इसे 110 V पर प्रचालित करते हैं तब इसके द्वारा उपयुक्त शक्ति कितनी होती है?
(a) 100 W
(b) 75 W
(c) 50W
(d) 25 W
उत्तर : (d) 25 W.
प्रश्न 4. दो चालक तार जिनके पदार्थ, लम्बाई तथा व्यास समान हैं किसी विद्युत परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा?
(a) 1 : 2
(b) 2 : 1
(c) 1 : 4
(d) 4 : 1
उत्तर : (c ) 1 : 4.
यदि एक तार का प्रतिरोध R है तो श्रेणी संयोजन का प्रतिरोध R1 = 2 R व पार्श्व संयोजन का प्रतिरोध R2 = R/2 होगा।
प्रश्न 5. किसी विद्युत परिपथ में दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है?
उत्तर : जिस विद्युत अवयव के सिरों के बीच के विभवान्तर का मापन करना होता है, वोल्टमीटर को उस अवयव के पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है।
प्रश्न 6. किसी ताँबे के तार का व्यास 0.5 mm तथा प्रतिरोधकता 1.6 × 10−8 Ω m है। 10 Ω प्रतिरोध का प्रतिरोध बनाने के लिए कितने लम्बे तार की आवश्यकता होगी? यदि इससे दोगुने व्यास का तार लें तो प्रतिरोध में क्या अन्तर आएगा?
प्रश्न 7. किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर 6 V के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत धाराओं I के संगत मान आगे दिए गए हैं-
प्रश्न 8. किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से 12 V की बैटरी को संयोजित करने पर परिपथ में 2.5mA विद्युत धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए ।
प्रश्न 9. 9 V की किसी बैटरी को 0.2 Ω, 0.3Ω, 0.4Ω, 0.5Ω तथा 12Ω के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है। 12Ω के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होगी ?
हल: दिया है : R1 = 0.2Ω, R2 = 0.3Ω, R3 = 0.4Ω, R4 = 0.5Ω, तथा R5 = 12Ω
श्रेणी संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोध से होकर इतनी ही धारा प्रवाहित होगी।
∴ 12Ω के प्रतिरोधक में धारा = 0.67A
प्रश्न 10. 176Ω प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करें कि 220 V के विद्युत स्रोत से संयोजन से 5 A विद्युत धारा प्रवाहित हो ?
प्रश्न 11. यह दर्शाइए कि आप 6 Ω प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध (i) 9Ω, (ii) 4Ω हो ।
उत्तर : (i) 9Ω का प्रतिरोध पाने के लिए, पहले दो प्रतिरोधकों को समान्तर क्रम में तत्पश्चात् तीसरे प्रतिरोध को श्रेणी क्रम में जोड़ना होगा।
पार्श्व संयोजन का प्रतिरोध
यह 3 Ω का प्रतिरोध, 6 Ω के तीसरे प्रतिरोध के साथ श्रेणी क्रम में जुड़कर 3 + 6 = 9 Ω का प्रतिरोध होगा ।
(ii) 4Ω का प्रतिरोध पाने के लिए पहले 6.6Ω के दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा तत्पश्चात् तीसरा प्रतिरोधक इनके पार्श्वक्रम में जोड़ना होगा।
6Ω-6Ω के दो प्रतिरोधों के श्रेणी संयोजन का प्रतिरोध 6 + 6 = 12 Ω होगा।
यह 12Ω का प्रतिरोध 6Ω के साथ पार्श्वक्रम में 4Ω का प्रतिरोध देगा।
प्रश्न 12. 220 V की विद्युत लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत से बल्बों का अनुमतांक 10 W है। यदि 220 V लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत धारा 5A है तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं?
हल : माना n बल्बों को पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है।
तब परिपथ में कुल शक्ति व्यय
P = n × एक बल्ब की शक्ति
= n × 10 W = 10 n W होगी।
अर्थात् 110 बल्बों को पार्श्वक्रम में जोड़ा जा सकता है।
प्रश्न 13. किसी विद्युत भट्टी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुण्डलियों A तथा B की बनी हैं जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 24 Ω है तथा इन्हें पृथक्-पृथक् श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है। यदि यह भट्टी 220 V विद्युत स्रोत से संयोजित की जाती है तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत धाराएँ क्या हैं?
प्रश्न 14. निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में 2Ω प्रतिरोधक द्वारा उपयुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए— (i) 6V की बैटरी से संयोजित 1Ω तथा 2Ω श्रेणीक्रम संयोजन, (ii) 4V बैटरी से संयोजित 12Ω तथा 2Ω का पार्श्वक्रम संयोजन।
प्रश्न 15. दो विद्युत लैम्प, जिनमें से एक का अनुमतांक 100 W; 220 V तथा दूसरे का 60 W; 220 V है, विद्युत मेन्स के साथ पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। यदि विद्युत आपूर्ति की वोल्टता 220 V है तो मेन्स से कितनी धारा ली जाती है?
प्रश्न 16. किसमें अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त होती है – 250 W का टी०वी० सेट जो एक घण्टे तक चलाया जाता है अथवा 120 W का विद्युत हीटर जो 10 मिनट के लिए चलाया जाता है?
    = 72000 J
    = 7 · 2 × 104 J
स्पष्ट है कि T.V. सेट द्वारा खर्च की गई ऊर्जा अधिक है।
प्रश्न 17. 8Ω प्रतिरोध का कोई विद्युत हीटर विद्युत मेन्स से 2 घण्टे तक 15 A विद्युत धारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर परिकलित कीजिए।
हल : दिया है : R = 8Ω, I = 15 A
विद्युत हीटर में ऊष्मा ऊत्पन्न होने की दर या विद्युत हीटर की शक्ति
P = I2 R
   = (15A)2 × 8Ω = 1800 W
प्रश्न 18. निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए—
(a) विद्युत लैम्पों के तन्तुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है?
अथवा विद्युत लैम्प के तन्तु निर्माण में किस धातु का उपयोग किया जाता है और क्यों?
(b) विद्युत तापन युक्तियों जैसे ब्रेड टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रातुओं के क्यों बनाए जाते हैं?
(c) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है?
(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है?
(e) विद्युत संचारण के लिए प्राय: कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है? (2008)
उत्तर : (a) विद्युत लैम्पों के तन्तुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन ही उपयोग किया जाता है, क्योंकि टंगस्टन के बहुत पतले तार बनाए जा सकते हैं तथा टंगस्टन का गलनांक ( 3400°C) भी अन्य धातुओं की तुलना में बहुत ऊँचा होता है।
(b) ब्रेड-टोस्टर, विद्युत इस्तरी आदि के चालक मिश्रधातुओं के इसलिए बनाए जाते हैं; क्योंकि मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता, शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है तथा ताप वृद्धि के साथ इनकी प्रतिरोधकता में नगण्य परिवर्तन होता है। इसके अतिरिक्त मिश्रधातुओं का ऑक्सीकरण भी कम होता है। फलतः मिश्रधातुओं में बने चालकों की उम्र शुद्ध धात्विक चालकों की तुलना में अधिक होती है।
(c) श्रेणी सम्बद्ध व्यवस्था में जैसे-जैसे नए प्रतिरोधक जुड़ते जाते हैं, परिपथ का कुल प्रतिरोध बढ़ता जाता है और अलग-अलग प्रतिरोधकों के सिरों के बीच उपलब्ध विभवान्तर घटता जाता है। अतः परिपथ में धारा भी घटती जाती है। यदि घरों में प्रकाश करने के लिए श्रेणी सम्बद्ध व्यवस्था प्रयोग की जाए तो परिपथ में जितने अधिक लैम्प जुड़े होंगे, उनका प्रकाश उतना ही कम हो जाएगा।
इसके अतिरिक्त श्रेणी सम्बद्ध व्यवस्था प्रयोग करने पर स्विच ऑन करने पर सभी लैम्प एक साथ जल उठेंगे तथा स्विच ऑफ करने पर सभी लैम्प एक साथ बुझ जाएँगे जबकि पार्श्वक्रम व्यवस्था प्रयोग करने पर इच्छानुसार किसी भी लैम्प को प्रकाशित या अप्रकाशित किया जा सकता है।
(d) तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, अर्थात्
(e) विद्युत के सर्वश्रेष्ठ चालकों में प्रथम स्थान पर चाँदी, दूसरे पर ताँबा तथा तीसरे स्थान पर ऐलुमिनियम है। चूँकि चाँदी एक कीमती धातु है तथा अपेक्षाकृत कम मात्रा में उपलब्ध है; अतः विद्युत वितरण व्यवस्था में चाँदी के स्थान पर सस्ती तथा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध धातुओं ताँबा तथा ऐलुमिनियम का प्रयोग किया जाता है।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर
  • विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. किसी परिपथ में व्यय हुई विद्युत ऊर्जा का सूत्र –
(i) विभवान्तर तथा धारा, (ii) विभवान्तर तथा प्रतिरोध, (iii) धारा तथा प्रतिरोध के पदों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर : विद्युत ऊर्जा (Electric Energy ) — किसी चालक में विद्युत आवेश प्रवाहित होने के कारण जो ऊर्जा व्यय होती है, उसे विद्युत ऊर्जा कहते हैं।
माना, किसी चालक के सिरों के बीच विभवान्तर V वोल्ट है तथा चालक में t समय में q कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तब चालक में व्यय ऊर्जा
W = q × V J
(i) विद्युत ऊर्जा, विभवान्तर तथा धारा के पदों में- उपर्युक्त से चालक में प्रवाहित धारा I = q/t होगी अर्थात् आवेश q = It होगा।
अतः व्यय ऊर्जा W = V × I × t J                   ….(1)
(ii) विद्युत ऊर्जा, विभवान्तर तथा प्रतिरोध के पदों में- यदि चालक का प्रतिरोध R है, तब
I का मान समीकरण (1) में रखने पर, परिपथ में t सेकण्ड में व्यय विद्युत-ऊर्जा
(iii) विद्युत-ऊर्जा, धारा तथा प्रतिरोध के पदों में – पुन: V = IR समीकरण (1) में रखने पर, परिपथ में t सेकण्ड में व्यय विद्युत-ऊर्जा
W = I × R × I × t = I2Rt J
प्रश्न 2. किसी विद्युत परिपथ में व्यय विद्युत सामर्थ्य से क्या तात्पर्य है? सामर्थ्य के लिए व्यंजक भी प्राप्त कीजिए ।
उत्तर : विद्युत सामर्थ्य (Electric Power ) — “किसी विद्युत परिपथ में विद्युत ऊर्जा के व्यय होने की दर को परिपथ की विद्युतसामर्थ्य कहते हैं ।”
यदि किसी परिपथ में सेकण्ड में W J ऊर्जा व्यय हो तो परिपथ की विद्युत-सामर्थ्य
सामर्थ्य के मात्रक जूल/सेकण्ड को वाट (W) भी कहते हैं।
यदि परिपथ में V वोल्ट के विभवान्तर पर I ऐम्पियर की धारा t सेकण्ड तक प्रवाहित हो, तब
व्यय ऊर्जा W = VIt J
प्रश्न 3. विद्युत ऊर्जा की व्यापारिक इकाई (यूनिट) क्या है ? इसका जल के साथ सम्बन्ध स्थापित कीजिए ।
उत्तर : विद्युत ऊर्जा की व्यापारिक इकाई किलोवाट घण्टा है जिसे साधारण बोलचाल की भाषा में यूनिट कहते हैं तथा kWh से प्रदर्शित करते हैं।
1kWh विद्युत ऊर्जा की वह मात्रा है जो 1 किलोवाट शक्ति वाले उपकरण द्वारा 1 घण्टे में खर्च की जाती है।
प्रश्न 4. यदि किसी मकान में कुछ दिए गए विद्युत उपकरण, दिए गए घण्टों तक प्रतिदिन की दर से कुछ दिनों तक चलाए जाते हैं तो मकान में व्यय होने वाली यूनिटों की संख्या के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर : माना कि प्रयुक्त किए गए उपकरणों की कुल शक्ति P किलोवाट है तथा उपकरण n घण्टे प्रतिदिन प्रयोग किए जाते हैं तथा कुल दिनों की संख्या x है।
तब कुल घण्टों की संख्या = (n घण्टे / दिन) × (x दिन)
        = nx घण्टे की
∴ खर्च की गई यूनिटों की संख्या = ( कुल शक्ति किलोवाट में) × (कुल घण्टों की संख्या)
= (P kW) × (n x h)
= (P × n × x) kWh
अतः यूनिटों की संख्या
= ( कुल शक्ति किलोवाट में) × (घण्टे / दिन) × दिनों की संख्या यदि शक्ति वाट में दी गई है तो उपर्युक्त सूत्र निम्न रूप में होगा –
यूनिटों की संख्या
  • लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. किसी चालक में प्रवाहित विद्युत धारा के मान और इसके आर-पार क्रियाकारी वोल्टता के सम्बन्ध के लिए सूत्र लिखिए। इस सम्बन्ध को आरेख द्वारा भी प्रस्तुत कीजिए |
अथवा ओम के नियम को गणितीय सूत्र तथा ग्राफ दोनों द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर : क्रियाकारी वोल्टता तथा प्रवाहित विद्युत धारा के बीच सम्बन्ध सूत्र ( ओम का नियम ) –
प्रश्न 2. ओम के नियम को स्थापित करने हेतु एक परिपथ चित्र बनाइए । 
उत्तर : परिपथ चित्र – 12.8 में प्रदर्शित है-
प्रश्न 3. जब दो प्रतिरोधकों R1 तथा R2 को (i) श्रृंखलाबद्ध और (ii) समान्तर व्यवस्थाओं में पृथक्-पृथक् जोड़ा जाए तो समतुल्य प्रतिरोध R के मान क्या होंगे?
प्रश्न 4. क्या कारण है कि विद्युत वाहक तारों में बहुत कम ताप उत्पन्न होता है, जबकि विद्युत बल्ब के तन्तु में उच्च ताप उत्पन्न होता है ?
उत्तर : विद्युत बल्ब के तन्तु का प्रतिरोध, विद्युत वाहक तारों के प्रतिरोध की तुलना में बहुत अधिक होता है; अत: समान विद्युत धारा प्रवाहित करने पर बल्ब के तन्तु में उच्च ताप उत्पन्न होता है, परन्तु विद्युत | वाहक तारों में नहीं ।
प्रश्न 5. निम्नलिखित के कारण स्पष्ट कीजिए—
(i) यदि आप अमीटर को समान्तर- क्रम में जोड़ देते हैं तो अमीटर क्यों जल जाता है?
(ii) एक निश्चित ताप से नीचे कुछ पदार्थों की प्रतिरोधकता घटकर एकदम शून्य क्यों हो जाती है?
उत्तर : (i) अमीटर के जलने का कारण – परिपथ की अन्य युक्तियों की तुलना में अमीटर का प्रतिरोध नगण्य होता है। जब अमीटर को परिपथ के समान्तर- क्रम में जोड़ा जाता है तो परिपथ का कुल विभवान्तर | अमीटर के सिरों के बीच भी कार्य करता है, जिससे अमीटर में उच्च धारा प्रवाहित होती है और उसमें बहुत अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है और अमीटर जल जाता है।
(ii) जब किसी चालक पदार्थ का ताप क्रान्तिक ताप से कम हो जाता है तो पदार्थ अतिचालक में बदल जाता है, जिससे उसका प्रतिरोध घटकर एकदम शून्य हो जाता है।
प्रश्न 6. किसी तार का प्रतिरोध R है। उसे काटकर समान लम्बाई के चार भाग बनाए गए हैं। (i) प्रत्येक भाग के प्रतिरोध की आरम्भिक तार के प्रतिरोध से तुलना कीजिए। (ii) यदि चारों भागों को पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाए तो इस संयोजन के प्रतिरोध की आरम्भिक तार के प्रतिरोध से तुलना कीजिए।
हल : (i) स्पष्ट है कि काटकर बनाए गए प्रत्येक प्रतिरोध की लम्बाई मूल तार की लम्बाई की एक-चौथाई (1/4) रह जाएगी।
अर्थात् पार्श्व संयोजन का कुल प्रतिरोध आरम्भिक तार के प्रतिरोध का 16 वाँ भाग होगा।
प्रश्न 7. किसी परिपथ में 2 V वाले चार सेलों की एक बैटरी, 5 Ω का एक प्रतिरोधक, 8 Ω का एक प्रतिरोधक तथा 12 Ω का एक प्रतिरोधक और एक प्लग कुंजी श्रेणीक्रम में संयोजित हैं। इसका व्यवस्था – आरेख खींचिए ।
उत्तर : चित्र – 12.9 देखिए।
प्रश्न 8. एक प्रतिरोधक पर 2 Ω-8W लिखा है, इसका क्या अर्थ है ? यह अधिकतम कितनी धारा ले सकता है?
उत्तर : इसका अर्थ यह है कि प्रतिरोधक का प्रतिरोधक R = 2 Ω है तथा इसमें अधिकतम 8 W शक्ति खर्च हो सकती है।
  • अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. धातुएँ विद्युत की चालक होती हैं, कारण स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर : धातुओं में कुछ मुक्त इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं जो चालक के सिरों के बीच विभवान्तर लगाने पर उसकी लम्बाई अनुदिश गतिमान हो जाते हैं। इन्हीं इलेक्ट्रॉनों के कारण धातुएँ विद्युत की चालक होती हैं।
प्रश्न 2. ताँबे के तार में विद्युत धारा प्रवाहित होती है परन्तु प्लास्टिक के तार में नहीं क्यों? समझाइए ।
उत्तर : ताँबे में मुक्त इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं जबकि प्लास्टिक में नहीं। यही कारण है कि ताँबे के तार में विद्युत धारा प्रवाहित हो सकती है प्लास्टिक के तार में नहीं।
प्रश्न 3. किसी चालक तार का प्रतिरोध उसकी लम्बाई पर किस प्रकार निर्भर करता है?
उत्तर : प्रतिरोध R लम्बाई l के अनुक्रमानुपाती होता है।
अर्थात्       R ∝ l
प्रश्न 4. प्रतिरोध तथा प्रतिरोधकता के S. I. मात्रकों को लिखिए।
उत्तर : प्रतिरोध का SI मात्रक ओम तथा प्रतिरोधकता का S. I. मात्रक ओम – मीटर है।
प्रश्न 5. प्रतिरोध का SI मात्रक को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर : प्रतिरोध का SI मात्रक ओम की परिभाषा – 1 Ω उस चालक का वैद्युत प्रतिरोध है जिसके सिरों के बीच 1V का विभवान्तर स्थापित करने पर उसमें 1 A की धारा प्रवाहित होती हो ।
प्रश्न 6. चाँदी की प्रतिरोधकता 1.6 × 10−8 Ω-m है। इस कथन का क्या अर्थ है ?
उत्तर : इस कथन का यह अर्थ है कि चाँदी 1m लम्बे तथा 1m2 अनुप्रस्थ क्षेत्रफल वाले तार का प्रतिरोध 1.6 × 10−8 Ω होगा।
प्रश्न 7. अमीटर को किसी परिपथ में कैसे जोड़ा जाता है?
उत्तर : जिस विद्युत अवयव से प्रवाहित होने वाली धारा का मापन होता है, अमीटर को उस अवयव के श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है।
प्रश्न 8. 40 वाट तथा 60 वाट के विद्युत बल्बों में से किसका प्रतिरोध कम है? समझाइए ।
उत्तर : माना कि बल्बों के प्रतिरोध R1 व R2 हैं तथा लगाया गया विभवान्तर V है तो
अतः स्पष्ट है कि 60 वाट के विद्युत बल्ब का प्रतिरोध कम है।
  • एक शब्द या एक वाक्य वाले प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. धातुओं में विद्युत धारा का प्रवाह किस कण के कारण होता है?
उत्तर : इलेक्ट्रॉन ।
प्रश्न 2. एक इलेक्ट्रॉन पर कितने कूलॉम का आवेश होता है?
उत्तर : 1.6 × 10−19 C
प्रश्न 3. विद्युत के सर्वश्रेष्ठ चालक का नाम बताइए ।
उत्तर : चाँदी ।
प्रश्न 4. विद्युत बल्ब के तन्तु किस धातु के बनाए जाते हैं?
उत्तर : टंगस्टन धातु के ।
प्रश्न 5. विद्युत इस्तरी तथा टोस्टर के तन्तु किस पदार्थ के बने होते हैं?
उत्तर : नाइक्रोम नाम मिश्रधातु के ।
प्रश्न 6. विद्युत धारा का SI मात्रक बताइए ।
उत्तर : ऐम्पियर ।
प्रश्न 7. विभवान्तर का SI मात्रक बताइए ।
उत्तर : वोल्ट ।
प्रश्न 8. विद्युत प्रतिरोध S. I मात्रक क्या है?
उत्तर : ओम।
प्रश्न 9. विद्युत आवेश के S. I. मात्रक का नाम लिखिए।
उत्तर : कूलॉम।
प्रश्न 10. 1 kWh कितने जूल के बराबर होता है?
उत्तर : 1 kWh = 3 · 6 ×106 J.
प्रश्न 11. घरों में विद्युत उपकरण किस व्यवस्था में जुड़े होते हैं?
उत्तर : समान्तर संयोजन व्यवस्था में।
प्रश्न 12. लकड़ी विद्युत की चालक है या कुचालक ?
उत्तर : कुचालक ।
प्रश्न 13. किसी परिपथ में विद्युत धारा के प्रवाह के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करने वाली युक्ति का नाम बताइए ।
उत्तर : विद्युत सेल।
प्रश्न 14. सिल्वर, कॉपर एवं ऐलुमिनियम को विद्युत चालकता के घटते क्रम में लिखिए।
उत्तर : सिल्वर < कॉपर < ऐलुमिनियम ।
  • आंकिक प्रश्न
प्रश्न 1. एक विद्युत बल्ब के तन्तु में 0.5 A की धारा 10 m तक प्रवाहित होती है। परिपथ में प्रवाहित होने वाले कुल आवेश का मान ज्ञात कीजिए।
हल : दिया है : धारा I = 0 . 5 A, समय t = 10 min= 600 s
∴ प्रवाहित आवेश Q = I × t
= 0 . 5 A × 600 s
= 300 C
प्रश्न 2. यदि 220 V विभवान्तर पर एक बल्ब में प्रवाहित धारा का मान 0-2 A हो तो इसमें एक घण्टे में प्रवाहित विद्युत आवेश का मान क्या होगा?
हल : दिया है : V = 220 V, I = 0.2 A
समय t = 1 h = 60 × 60 s
∴ बल्ब में प्रवाहित आवेश q = I × t
= 0.2 A × (60 × 60s)
= 720 C
प्रश्न 3. यदि 200 V की वोल्टता पर एक विद्युत इस्तरी में प्रवाहित विद्युत धारा का मान 0.5 A हो तो इसमें एक घण्टे में प्रवाहित विद्युत आवेश का मान क्या होगा?
हल : दिया है : V = 220 V, I = 0.5 A,
समय t = 1 h = 60 × 60 s
∴ प्रवाहित विद्युत आवेश q = I × t
= 0.5 A × (60 × 60s)
= 1800 C.
प्रश्न 4. 2 C आवेश को दो बिन्दुओं के बीच विस्थापित करने में – कितना कार्य किया जाएगा जबकि इन बिन्दुओं के बीच 12 V का विभवान्तर है?
उत्तर : दिया है : विस्थापित आवेश q= 2 C तथा
बिन्दुओं के बीच विभवान्तर V = 12 V
प्रश्न 5. किसी परिपथ के दो बिन्दुओं के बीच 5C आवेश को विस्थापित करने के लिए 17 J कार्य करना पड़ता है। बिन्दुओं के बीच कितना विभवान्तर है?
प्रश्न 6. (a) एक विद्युत बल्ब का प्रतिरोध 1200 Ω हैं। यह 220 V के स्त्रोत से कितनी धारा लेगा? (b) एक विद्युत ऊष्मक की कुण्डली का प्रतिरोध 100 Ω है। यह 220 V के स्रोत से कितनी धारा लेगा?
प्रश्न 7. जब विभवान्तर 0.8 V था तो चालक में प्रवाहित धारा का मान 0.2 A था। चालक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए ।
प्रश्न 8. एक 4Ω प्रतिरोध वाले तार की मोटाई दुगुनी कर दी जाती है। तार का नया प्रतिरोध परिकलित कीजिए ।
प्रश्न 9. जब एक विद्युत हीटर किसी स्रोत से 4 A की धारा लेता है तो इसके सिरों के बीच 60 V का विभवान्तर होता है। यदि विभवान्तर को बढ़ाकर 120 V कर दिया जाए तो विद्युत हीटर कितनी धारा लेगा?
प्रश्न 10. 20°C ताप पर 1 m लम्बे धात्विक तार का प्रतिरोध 26 Ω है। यदि तार का व्यास 0.3 mm हो तो इस ताप पर धातु की प्रतिरोधकता कितनी होगी? पाठ्य-पुस्तक में दी गई सारणी 12.2 की सहायता से तार के पदार्थ की भविष्यवाणी कीजिए ।
अत: 20°C ताप पर तार के पदार्थ की प्रतिरोधकता 1.84 × 10-8 Ω-m
सारणी 12.2 से ज्ञात होता है कि 20°C पर मैंगनीज की प्रतिरोधकता 1.84 × 10-8 Ω-m
अतः दिया गया तार मैंगनीज से बना है।
प्रश्न 11. 0°C पर ताँबे के किसी तार का व्यास 0.5mm तथा प्रतिरोधकता 1.6 × 10-6 Ω-cm है। 10Ω प्रतिरोध की कुण्डली बनाने के लिए ऐसे कितने लम्बे तार की आवश्यकता होगी?
प्रश्न 12. एक विद्युत बल्ब, जिसका प्रतिरोध 20 Ω है तथा एक 4 Ω प्रतिरोध का चालक एक 6-V की बैटरी से चित्र के अनुसार जुड़े हैं। परिकलित कीजिए – (a) परिपथ का कुल प्रतिरोध, (b) परिपथ में प्रवाहित धारा तथा (c) विद्युत बल्ब तथा चालक के सिरों के बीच विभवान्तर।
प्रश्न 13. यदि 2 Ω, 3 Ω और 5 Ω के तीन प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाए तो संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या होगा, 2 Ω से कम, 5 Ω से अधिक अथवा 2 Ω और 5 Ω के बीच ? स्पष्ट कीजिए।
हल : प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने पर संयोजन का कुल प्रतिरोध संयोजन में जुड़े सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है ( ध्यान दें ); अतः संयोजन का कुल प्रतिरोध 2 Ω से कम होगा।
गणना द्वारा सत्यापन – दिया है : R1 = 2 Ω, R2 = 3 Ω तथा R3 = 5 Ω
माना संयोजन का कुल प्रतिरोध R है, तब
स्पष्ट है कि कुल प्रतिरोध R, 2 Ω से कम है।
प्रश्न 14. 10 Ω प्रतिरोध के तार को एक बन्द वृत्त के रूप में मोड़ा गया है। इस वृत्त के किसी व्यास के सिरों के दो बिन्दुओं के बीच प्रभावी प्रतिरोध कितना होगा?
हल : व्यास के सिरे A तथा B वृत्त को बराबर प्रतिरोधों वाले दो भागों में बाँटते हैं।
प्रश्न 15. संलग्न चित्र 12.12 में प्रदर्शित प्रतिरोधों के मान क्रमश: R1 = 5 Ω, R2 = 10 Ω तथा R3 = 30 Ω हैं। ये प्रतिरोध 12 V की बैटरी से जोड़े गए हैं। परिकलित कीजिए – (a) प्रत्येक प्रतिरोध से प्रवाहित धारा, (b) परिपथ से प्रवाहित कुल धारा तथा (c) परिपथ का कुल प्रतिरोध।
हल : दिया है : बैटरी का विभवान्तर V = 12 V
⋅.⋅ तीनों प्रतिरोधक समान्तर क्रम में बैटरी से जुड़े हैं; अतः प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों का विभवान्तर भी 12 V होगा।
(a) ∴ प्रतिरोधक R1 में प्रवाहित धारा
(b) समान्तर क्रम में जुड़े होने के कारण, परिपथ में प्रवाहित कुल धारा, अलग-अलग धाराओं के योग के बराबर होगी।
(c) यदि परिपथ का कुल प्रतिरोध R है तो समान्तर संयोजन के सूत्र से
प्रश्न 16. संलग्न चित्र – 12.13 में प्रदर्शित प्रतिरोध व्यवस्था में 12 V की बैटरी लगाई गई है तो परिकलित कीजिए-
(i) व्यवस्था का कुल प्रतिरोध,
(ii) परिपथ में प्रवाहित कुल धारा ।
हल : (i) शाखा AB में 10 Ω तथा 20 Ω के प्रतिरोध के श्रेणीक्रम में हैं
∴ इस शाखा का प्रतिरोध R1 = 10 + 20 = 30 Ω
इसी प्रकार, शाखा CD का प्रतिरोध
R2 = 5 + 25 = 30 Ω
ये दोनों प्रतिरोध समान्तर-क्रम में जुड़े हैं, यदि व्यवस्था का कुल प्रतिरोध R है तो
प्रश्न 17. एक विद्युत इस्तरी जब उच्चतम ताप पर है तो 840 W की दर से ऊर्जा खर्च करती है तथा निम्नतम ताप पर 360 W की दर से ऊर्जा खर्च करती है। आरोपित विभवान्तर 220 V है। दो दशाओं में | प्रवाहित धाराएँ क्या हैं? तथा प्रत्येक दशा में प्रतिरोधों के मान क्या हैं?
हल : दिया है :         विभवान्तर V = 220 V
प्रथम दशा में,        शक्ति व्यय P1 = 840 W
तथा दूसरी दशा में शक्ति व्यय P2 = 360 W
माना दो दशाओं में ली गई धाराएँ I1 तथा I2 हैं जबकि प्रतिरोध R R2 हैं।
प्रश्न 18. एक विद्युत बल्ब 220 V के डायनमो ( जनित्र ) से जुड़ा है। प्रवाहित धारा 0.50 A है बल्ब की शक्ति क्या है?
हल: दिया है : विभवान्तर V = 220 V व धारा I = 0.50 A
बल्ब की शक्ति P = V × I
      = 220 V × 0.50 A
      = 110 W
प्रश्न 19. टॉर्च के एक बल्ब पर 2.5 V तथा 750 mA अंकित है। बल्ब की (i) शक्ति, (ii) इसका प्रतिरोध तथा (iii) इसे 4 घण्टे जलाने पर व्यय ऊर्जा का परिकलन कीजिए।
प्रश्न 20: दो बिजली के लैम्प जिन पर क्रमश: 100 W तथा 25 W अंकित हैं, पार्श्वक्रम में 200 V वोल्टता की आपूर्ति से जुड़े हैं। परिपथ में प्रवाहित कुल धारा का परिकलन कीजिए।
हल : दिया है : लैम्पों की शक्तियों P1 = 100 W, P2 = 25 W, विभवान्तर V = 200 V
पार्श्वक्रम में दोनों लैम्पों की वोल्टता V = 200 V होगी।
प्रश्न 21. दो सर्वसम प्रतिरोधक, जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 2 Ω है, बारी-बारी से किसी 12 वोल्ट की बैटरी से (i) श्रेणीक्रम में तथा (ii) पार्श्वक्रम में जोड़े जाते हैं। दोनों प्रकरणों में उपभुक्त शक्तियों का अनुपात परिकलित कीजिए।
प्रश्न 22. किसी लैम्प पर 220V; 100W और दूसरे पर 220V; 60W अंकित है। दोनों को 220V की मेन्स के साथ पार्श्वक्रम में सम्बद्ध किया गया है। मेन्स से कितनी धारा ली जाएगी?
हल : 220 V; 100 W का अर्थ है कि लैम्प को 220 V पर प्रकाशित करने पर यह 100 W शक्ति खर्च करता है।
प्रश्न 23. संलग्न चित्र – 12.14 में दिए गए परिपथ में (i) AB, AC तथा CDE भुजाओं में प्रवाहित हो रही धारा को परिकलित कीजिए तथा (ii) AB, CD तथा DE के सिरों के बीच विभवान्तर परिकलित कीजिए।
हल : (i) दिए गए परिपथ में भुजाएँ AB व CDE दोनों परस्पर पार्श्वक्रम में सम्बद्ध हैं; अत: भुजाओं AB व CDE प्रत्येक का विभवान्तर, सेल के विभवान्तर V = 1.5 वोल्ट के बराबर होगा।
प्रश्न 24. 40 W सामर्थ्य वाले किसी विद्युत बल्ब को यदि 8 h प्रतिदिन के हिसाब से 15 दिन तक जलाया जाए तो इसमें कुल कितनी यूनिट विद्युत ऊर्जा व्यय होगी?
प्रश्न 25. किसी विद्युत मोटर की सामर्थ्य 7.5 kW है। इसनें 8 h प्रतिदिन की दर से 15 दिन कार्य किया । बताइए कितने यूनिट विद्युत ऊर्जा व्यय हुई?
हल: दिया है : P = 7.5 kW = 7.5 × 1000 W = 7500w, t = 8 h, दिन = 15

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