UK 10th Social Science

UK Board 10th Class Social Science – (इतिहास) – Chapter 4 औद्योगीकरण का युग

UK Board 10th Class Social Science – (इतिहास) – Chapter 4 औद्योगीकरण का युग

UK Board Solutions for Class 10th Social Science – सामाजिक विज्ञान – (इतिहास) – Chapter 4 औद्योगीकरण का युग

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
• संक्षेप में लिखें
प्रश्न 1 – निम्नलिखित की व्याख्या करें-
(क) ब्रिटेन की महिला कामगारों ने स्पिनिंग जेनी मशीनों पर हमले किए।
(ख) सत्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय शहरों के सौदागर गाँवों में किसानों और कारीगरों से काम करवाने लगे।
(ग) सूरत बन्दरगाह अठारहवीं सदी के अन्त तक हाशिये पर पहुँच गया था।
(घ) ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत में बुनकरों पर निगरानी रखने के लिए गुमाश्तों को नियुक्त किया था।
उत्तर- (क) ब्रिटेन की महिला कामगारों ने स्पिनिंग जेनी मशीनों पर हमले इसलिए किए कि इस मशीन के कारण उनके काम छीने जा रहे थे। इन महिलाओं के साथ उनके पति तथा परिवारजनों में से पुरुष भी आगे आए क्योंकि उनकी काम करने वाली महिलाओं से रोजगार छीना जा रहा था। शारीरिक श्रम की माँग घटती जा रही थी। औरतों ने हंगामा मचाया। वे बेरोजगारी फैलने के डर ऐसा कर रही थीं।
(ख) व्यापारिक गिल्ड्स बाजार, कच्चे माल, कारीगरों और उत्पादों पर नियन्त्रण रखते थे। प्रतिस्पर्द्धा और मूल्य निश्चित करते थे। व्यवसाय में नए लोगों को आने से रोकते थे। शासकों ने भी विभिन्न गिल्ड्स को विशिष्ट उत्पादों के उत्पादन और व्यापार का एकाधिकार दिया हुआ था । फलस्वरूप नए व्यापारी शहरों में कारोबार नहीं कर सकते थे। इसलिए वे गाँवों की ओर पलायन करने लगे।
(ग) 18वीं सदी के अन्त में यूरोपीय उपनिवेशकों ने बम्बई बन्दरगाह का विकास किया। बम्बई बन्दरगाह ने समुद्र मार्ग से निर्यात पर नियन्त्रण कर लिया। उपनिवेशक सूरत बन्दरगाह का इसके लिए उपयोग नहीं करना चाहते थे, अतः 18वीं सदी के अन्त तक सूरत बन्दरगाह से समुद्री व्यापार धराशायी हो गया ।
(घ) भारत के बुनकर न केवल ईस्ट इण्डिया कम्पनी के लिए मोटा कपड़ा बुनते थे, बल्कि अन्य यूरोपीय कम्पनियों के साथ-साथ भारतीय व्यापारियों के लिए भी इस प्रकार का कपड़ा बनाते थे। ईस्ट इण्डिया कम्पनी कपड़ा उत्पादन और व्यापार एकाधिकार पर नियन्त्रण करना चाहती थी। अत: उसने गुमाश्तों की नियुक्ति की जो बुनकरों की निगरानी रखते थे और कच्चा माल खरीदने के लिए उन्हें पेशगी के रूप में ऋण देते थे।
प्रश्न 2 – प्रत्येक वक्तव्य के आगे ‘सही’ या ‘गलत’ लिखें-
(क) उन्नीसवीं सदी के आखिर में यूरोप की कुल श्रम शक्ति का 80 प्रतिशत तकनीकी रूप से विकसित औद्योगिक क्षेत्र में काम कर रहा था।
(ख) अठारहवीं सदी तक महीन कपड़े के अन्तर्राष्ट्रीय बाजार पर भारत का दबदबा था।
(ग) अमेरिकी गृहयुद्ध के फलस्वरूप भारत के कपास निर्यात में कमी आई।
(घ) फ्लाई शटल के आने से हथरकरघा कामगारों की उत्पादकता में सुधार हुआ।
उत्तर- (क) गलत, (ख) सही, (ग) गलत, (घ) सही।
प्रश्न 3 – पूर्व औद्योगीकरण का मतलब बताएँ ।
उत्तर – ‘पूर्व’ से आशय है पहला या किसी चीज का शुरुआती रूप। पूर्व-औद्योगीकरण का मतलब है वह समय जिसमें यूरोप और इंग्लैण्ड बड़े पैमाने पर अन्तर्राष्ट्रीय बाजार के लिए माल का उत्पादन करते थे । यहाँ तक कि इससे पहले भी वहाँ फैक्ट्रियाँ थीं। पूर्व औद्योगिक काल में, औद्योगिक बाजार हेतु हाथों से निर्मित उत्पाद बनाए जाते थे ।
• चर्चा करें
प्रश्न 1 – उन्नीसवीं सदी के यूरोप में कुछ उद्योगपति मशीनों की बजाय हाथ से काम करने वाले श्रमिकों को प्राथमिकता क्यों देते थे?
उत्तर – उन्नीसवीं सदी में यूरोप में कुछ उद्योगपति निम्नलिखित कारणों से मशीनों की बजाय हाथ से काम करने वाले श्रमिकों को प्राथमिकता देते थे-
(i) मशीनें महँगी, अप्रभावी, मरम्मत में कठिन और बड़ा पूँजी निवेश माँगती थीं।
(ii) मजदूर आसानी से और सस्ती दरों पर उपलब्ध थे।
(iii) कपड़ा बाजार में विभिन्न प्रकार के डिजाइन, रंग और विशेष लम्बाई के कपड़े की माँग रहती थी, जिसे मशीनों से पूरा नहीं किया जा सकता था। इसे केवल हाथ के काम द्वारा ही पूरा किया जा सकता था। इसके लिए श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती थी
प्रश्न 2 – ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारतीय बुनकरों से सूती और रेशमी कपड़े की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क्या किया?
उत्तर – ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने बुनकरों को कच्चा माल खरीदने के लिए अग्रिम के रूप में कर्जा दिया। इस प्रकार उन्होंने बुनकरों को स्थायी रूप से कर्ज के जाल में फँसा लिया। साथ ही कम्पनी ने वेतनभोगी गुमाश्तों की नियुक्ति की, जो कपास के उत्पादन और बुनकरों द्वारा बनाए जाने वाले रेशम की निगरानी करते थे । वे यह भी देखते थे कि बुनकर अन्य यूरोपीय कम्पनियों या स्थानीय भारतीय व्यापारियों के लिए तो काम नहीं कर रहे हैं। इस प्रकार, इस तरीके से ईस्ट इण्डिया कम्पनी को भारतीय बुनकरों से रेशम और कपड़े की नियमित आपूर्ति मिलती रहती थी।
प्रश्न 3 – कल्पना कीजिए कि आपको ब्रिटेन तथा कपास के इतिहास के बारे में विश्वकोश (Encyclopaedia) के लिए लेख लिखने को कहा गया है। इस अध्याय में दी गई जानकारियों के आधार पर अपना लेख लिखिए।
उत्तर- ब्रिटेन तथा कपास का इतिहास
1. ब्रिटेन में औद्योगिक क्रान्ति का सूत्रपात — ब्रिटेन में ही सर्वप्रथम औद्योगिक क्रान्ति का सूत्रपात हुआ। वहाँ सर्वप्रथम 1730 के शताब्दी के अन्त में कपास के उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि हुई। सन् 1760 दशक में कारखाने खुले । कपास नए युग का प्रथम प्रतीक थी । उन्नीसवीं में ब्रिटेन अपने कपास उद्योग की आवश्यकता को पूरा करने के लिए 25 लाख पौण्ड कच्चे कपास का आयात करता था। सन् 1787 में यह आयात बढ़कर 220 लाख पौण्ड तक पहुँच गया।
2. कपास के उत्पादन में वृद्धि – अठारहवीं शताब्दी में कई ऐसे आविष्कार हुए जिन्होंने उत्पादन प्रक्रिया, जैसे कार्डिंग, ऐंठना, कताईलपेटने आदि के प्रत्येक चरण की कुशलता बढ़ा दी। प्रति मजदूर उत्पादन बढ़ गया और पहले से सुदृढ़ धागों व रेशों का उत्पादन होने लगा। रिचर्ड आर्कराइट ने सूती वस्त्र मिल की रूपरेखा प्रस्तुत की। अब लोग महँगी नयी मशीन खरीद कर उन्हें कारखाने में लगा सकते थे।
3. कपास उद्योग का विकास – सूती वस्त्र उद्योग तथा कपास उद्योग ब्रिटेन के सबसे अधिक विकसित उद्योग थे। तीव्र गति से उन्नति करता हुआ कपास उद्योग 1840 के दशक तक औद्योगीकरण के पहले चरण में सबसे बड़ा उद्योग बन चुका था। लंकाशायर में एक कॉटन मिल की स्थापना हुई। सन् 1773 में जॉन के ने फ्लाइंग शटल का आविष्कार किया तथा सन् 1764 में जेम्स हरग्रीव्ज ने कताई की प्रक्रिया को तेज करने वाली एक मशीन ‘स्पिनिंग जेनी’ बनाई ।
प्रश्न 4- पहले विश्वयुद्ध के समय भारत का औद्योगिक उत्पादन क्यों बढ़ा?
उत्तर – प्रथम विश्वयुद्ध के समय निम्नलिखित कारणों से भारत का औद्योगिक उत्पादन बढ़ा
(i) ब्रिटेन के कल-कारखाने सेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए युद्ध सम्बन्धी उत्पाद में व्यस्त थे, इसलिए भारत में उपभोक्ता वस्तुओं और कपड़े का आयात कम हो गया । इसलिए देश का औद्योगिक उत्पादन बढ़ गया।
(ii) भारतीय उद्योगों के लिए यह एक अच्छा अवसर था। उन्हें इतनी जल्दी एक विशाल देशी बाजार मिल गया था। इस प्रकार औद्योगिक उत्पादन बढ़ गया।
(iii) युद्ध दीर्घकाल तक चला तो भारतीय कारखानों में भी फौज के लिए जूट की बोरियाँ, फौजियों के लिए वर्दी के कपड़े, टैण्ट और चमड़े के जूते, घोड़े व खच्चर की जीन तथा बहुत सारे अन्य सामान बनने लगे।
(iv) बढ़ती माँग के कारण नए कारखाने लगाए गए। पुराने कारखाने कई पालियों में चलने लगे।
(v) तमाम नए मजदूरों को काम पर रखा गया और प्रत्येक को पहले से भी अधिक समय तक काम करना पड़ता था ।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
• विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – भारत की ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने जब भारत में वस्त्र उत्पादों का आयात आरम्भ किया तो भारतीय बुनकरों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ा ?
उत्तर— वस्त्र उत्पादों के आयात से भारतीय बुनकरों को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ा-
(i) विदेशी वस्त्र उत्पादों के आयात से बुनकरों का निर्यात बाजार धराशायी हो गया।
(ii) भारतीय बाजारों में मैनचेस्टर निर्मित वस्त्र उत्पादों के बड़े पैमाने पर आयात से इनका स्थानीय बाजार तेजी से सिकुड़ने लगा ।
(iii) कम लागत पर मशीनों से बनने वाले कपास उत्पाद इतने सस्ते होते थे कि भारतीय बुनकर उनका मुकाबला नहीं कर सकते थे।
(iv) अमेरिका में गृहयुद्ध प्रारम्भ होने के कारण जब वहाँ से कपास आना बन्द हो गया तो ब्रिटेन भारत से कच्चा माल मँगाने लगा। भारत से कच्चे कपास के निर्यात । इस वृद्धि से उसकी कीमतें आसमान छूने लगीं। भारतीय बुनकरों को कच्चे माल के लाले पड़ गए। उन्हें अधिक मूल्य पर कच्चा कपास खरीदना पड़ता था । ऐसी दशा में बुनकर कला से परिवार का भरण-पोषण करना कठिन था ।
प्रश्न 2 – औद्योगिक क्रान्ति से क्या अभिप्राय है? 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध में यह क्रान्ति इंग्लैण्ड में क्यों हुई ?
उत्तर- औद्योगिक क्रान्ति का अर्थ
औद्योगिक क्रान्ति से आशय उद्योगों की प्राचीन, परम्परागत और धीमी गति को छोड़कर, नये, वैज्ञानिक तथा तीव्र गति से उत्पादन करने वाले यन्त्रों व मशीनों का प्रयोग किया जाना है। यह क्रान्ति उन महान परिवर्तनों की द्योतक है जो औद्योगिक प्रणाली के अन्तर्गत हुए। इस प्रकार “उत्पादन के साधनों में आमूल-चूल परिवर्तन हो जाना ही औद्योगिक क्रान्ति है । ” वास्तव में औद्योगिक क्रान्ति से आशय उस क्रान्ति से लगाया जाता है जिसने अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में उत्पादन की तकनीक और संगठन में आश्चर्यजनक परिवर्तन कर दिए। ये परिवर्तन इतने प्रभावी और द्रुत गति से हुए कि इसे ‘क्रान्ति’ कहा गया । औद्योगिक क्रान्ति ने बड़े पैमाने के उद्योगों का सूत्रपात किया। इस क्रान्ति का श्रीगणेश इंग्लैण्ड से ही हुआ ।
इंग्लैण्ड में सर्वप्रथम औद्योगिक क्रान्ति
इंग्लैण्ड में सर्वप्रथम औद्योगिक क्रान्ति आरम्भ होने के निम्नलिखित कारण थे-
(1) इंग्लैण्ड में लोहे व कोयले अपार भण्डार विद्यमान थे।
(2) इंग्लैण्ड को औपनिवेशिक विस्तार के फलस्वरूप स्थापित किए गए अपने उपनिवेशों से सरलतापूर्वक कच्चा माल मिल सकता था।
(3) इंग्लैण्ड को उपनिवेशों से कम मजदूरी पर अधिक संख्या में मजदूर मिल गए थे।
(4) इंग्लैण्ड में अनेक नये आविष्कार हुए जिन्होंने औद्योगिक क्रान्ति को सफल बनाया।
(5) इंग्लैण्ड के पूँजीपतियों के पास पर्याप्त मात्रा में पूँजी थी अतः उन्होंने अनेक उद्योग-धन्धे स्थापित किए।
(6) इंग्लैण्ड में बने माल के लिए उपनिवेशों में बाजार सुलभ हो जाते थे।
प्रश्न 3 – औद्योगिक क्रान्ति क्या लाभ हुए?
उत्तर- औद्योगिक क्रान्ति से निम्नलिखित लाभ हुए-
1. उत्पादन क्षमता में वृद्धि – नवीन खोजों के परिणामस्वरूप | उत्पादन की नवीन तकनीकों का विकास भी होता रहता था, जिससे उत्पादन क्षमता में निरन्तर वृद्धि होती रहती थी। अतः औद्योगिक क्रान्ति के फलस्वरूप वस्तुओं की उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ गई।
2. यातायात में विशेष सुविधा – औद्योगिक क्रान्ति से यातायात के साधनों का तेजी से विकास हुआ। यातायात के ऐसे नवीन साधनों का निर्माण और खोज होने लगी थी जो तीव्र गति से कार्य करते हों। इस प्रकार इस क्रान्ति के फलस्वरूप यातायात अधिक सुगम और विकसित हो गया।
3. विज्ञान की प्रगति — औद्योगिक साधनों के विकास के लिए विज्ञान के क्षेत्र में निरन्तर खोज चलती रही । वैज्ञानिक नई-नई प्रौद्योगिकी की खोज में प्रयत्नशील रहते थे। इन खोजों और प्रयासों के परिणामस्वरूप विज्ञान की विभिन्न शाखाएँ निरन्तर प्रगति की ओर बढ़ने लगीं।
4. कृषि में सुधार – औद्योगिक क्रान्ति के परिणामस्वरूप कृषि कार्यों के लिए नवीन यन्त्रों का प्रयोग किया जाने लगा। अभी तक कृषि अत्यधिक श्रमसाध्य थी तथा इससे उत्पादन बहुत कम होता था । यन्त्रीकरण से कृषि कार्य सरल हो गया और खाद्यान्नों की उत्पादन क्षमता में कई गुना वृद्धि हो गई। अब कृषि धीरे-धीरे व्यवसाय का रूप लेने लगी।
5. सांस्कृतिक आदान-प्रदान में वृद्धि – औद्योगिक क्रान्ति से अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि हुई । व्यापारिक वर्ग के लोग विश्व के सभी देशों में आने-जाने लगे। इससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान हुआ और मानव परम्परागत रूढ़ियों से मुक्त हो गया।
6. दैनिक जीवन में सुख-सुविधा के साधनों में वृद्धि – मानव के दैनिक जीवन में भौतिक साधनों के सुलभ हो जाने से विशेष सुख-सुविधा का वातावरण बना। मानव को दैनिक जीवन के कार्यों की पूर्ति हेतु विशेष सुविधाएँ प्राप्त हुईं, जिन्होंने नागरिकों के जीवन स्तर को परिष्कृत रूप प्रदान किया। अब उनका जीवन सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण होता चला गया।
7. समाजवादी विचारधारा का जन्म – औद्योगिक क्रान्ति का एक अन्य लाभकारी परिणाम यह हुआ कि श्रमिकों के माध्यम से समाजवाद का जन्म हुआ। समाजवाद ने मानव को अपने अधिकारों के प्रति अत्यधिक सजग बनाया। इससे मानवीय स्वतन्त्रता के सिद्धान्त को विशेष बल मिला।
8. नगरों का विकास — औद्योगिक प्रतिष्ठानों की स्थापना के कारण नए-नए नगरों की स्थापना हुई । नगरों में जनसंख्या बढ़ने से वहाँ के आकार में वृद्धि हुई। नगर उद्योग तथा वाणिज्य के केन्द्र बन गए। इस प्रकार नगरीकरण की प्रक्रिया तीव्र हो गई।
• लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – औद्योगिक क्रान्ति के प्रमुख कारण क्या थे?
उत्तर— औद्योगिक क्रान्ति के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-
(1) उपनिवेशों की स्थापना ।
(2) वस्तुओं की माँग में वृद्धि ।
(3) सस्ते श्रम की उपलब्धता।
(4) पूँजी की सुलभता।
(5) विज्ञान का विकास।
(6) चालक शक्ति का विकास।
प्रश्न 2 – औद्योगिक ध्वनि प्रदूषण से क्या हानियाँ हैं ?
उत्तर — औद्योगिक ध्वनि प्रदूषण से निम्नलिखित हानियाँ हैं-
(1) शोर, आराम तथा निद्रा में विघ्न उत्पन्न करता है।
(2) ध्वनि प्रदूषण से आँख का तारा फैल जाता है तथा पेशियों में तनाव बढ़ जाता है।
(3) शोर से मानसिक तनाव में वृद्धि होती है।
(4) अधिक लम्बी अवधि का तीव्र शोर स्थायी बहरापन लाता है।
प्रश्न 3 – इंग्लैण्ड में सर्वप्रथम औद्योगिक क्रान्ति क्यों हुई?
उत्तर- इंग्लैण्ड में सर्वप्रथम औद्योगिक क्रान्ति आरम्भ होने के निम्नलिखित कारण थे-
(1) इंग्लैण्ड में लोहे व कोयले के अपार भण्डार विद्यमान थे।
(2) इंग्लैण्ड को औपनिवेशिक विस्तार के फलस्वरूप स्थापित किए गए अपने उपनिवेशों से सरलतापूर्वक कच्चा माल मिल सकता था।
(3) इंग्लैण्ड को उपनिवेशों से कम मजदूरी पर अधिक संख्या में मजदूर मिल गए थे।
(4) इंग्लैण्ड में अनेक नए आविष्कार हुए जिन्होंने औद्योगिक क्रान्ति को सफल बनाया।
(5) इंग्लैण्ड के पूँजीपतियों के पास पर्याप्त मात्रा में पूँजी थी; अतः उन्होंने अनेक उद्योग-धन्धे स्थापित किए।
(6) इंग्लैण्ड में बने माल के लिए उपनिवेशों में बाजार सुलभ हो जाते थे।
प्रश्न 4 – 19वीं सदी में भारत के सूती कपड़ा उद्योग की गिरावट के मुख्य कारण क्या थे?
उत्तर – 19वीं सदी में भारत के सूती कपड़ा उद्योग की गिरावट के मुख्य कारण निम्नलिखित थे-
(1) विदेशी वस्त्र उत्पादों के आयात से बुनकरों का निर्यात बाजार धराशायी हो गया।
(2) भारतीय बाजारों में मैनचेस्टर निर्मित वस्त्र उत्पादों के बड़े पैमाने पर आयात से इनका स्थानीय बाजार तेजी से सिकुड़ने लगा ।
(3) कम लागत पर मशीनों से बनने वाले कपास उत्पाद इतने सस्ते होते थे कि भारतीय बुनकर उनका मुकाबला नहीं कर सकते थे।
(4) अमेरिका में गृहयुद्ध प्रारम्भ होने के कारण जब वहाँ से कपास आना बन्द हो गया तो ब्रिटेन भारत से कच्चा माल मँगाने लगा। भारत से कच्चे कपास के निर्यात में इस वृद्धि से उसकी कीमतें आसमान छूने लगीं। भारतीय बुनकरों को कच्चे माल के लाले पड़ गए। उन्हें अधिक मूल्य पर कच्चा कपास खरीदना पड़ता था । ऐसी दशा में बुनकर कला से परिवार का भरण-पोषण करना कठिन था ।
प्रश्न 5 – औद्योगिक विकास से शहरों पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर- औद्योगिक विकास से शहरों के वातावरण पर व्यापक प्रभाव पड़ा। इस प्रभाव का उल्लेख निम्नवत् है –
(1) कल-कारखानों की स्थापना होने से बड़े-बड़े नगरों की संख्या बढ़ने लगी और उनकी जनसंख्या में भी अत्यधिक वृद्धि हो गई।
(2) नगरों का जीवन अस्त-व्यस्त एवं अशान्त हो गया और वहाँ का सामाजिक जीवन दूषित होने लगा ।
(3) नगरों में अनेक श्रमिक बस्तियाँ बनने लगीं और चारों ओर श्रमिकों के आन्दोलन होने लगे।
(4) नगरों में रहने वाले श्रमिकों में मद्यपान, जुआ खेलने और निकृष्ट कोटि का साहित्य पढ़ने के व्यसन उत्पन्न हो गए।
(5) नगरों में जल- प्रदूषण और वायु प्रदूषण की समस्याएँ उत्पन्न हो गईं।
• अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – जेथरो टूल कौन था? उसने कौन-सी पुस्तक लिखी थी?
उत्तर – जेथरो टूल यार्कशायर का एक प्रसिद्ध किसान था । उसने ‘हार्स होइंग इण्डस्ट्री’ नामक पुस्तक लिखी थी।
प्रश्न 2 – लॉर्ड टाउनशैण्ड ने कृषि क्षेत्र में किस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था?
उत्तर— लॉर्ड टाउनशैण्ड ने फसल चक्र के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था।
प्रश्न 3 – इंग्लैण्ड की कृषि क्रान्ति के दो आविष्कारों के नाम लिखिए।
उत्तर- (1) ड्रिल और (2) चकबन्दी |
प्रश्न 4 – कृषि क्रान्ति के दो मुख्य परिणामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- (1) कृषि उपज में वृद्धि और (2) कृषि का वैज्ञानिकीकरण ।
प्रश्न 5 – कृषि क्रान्ति के दो दुष्परिणाम लिखिए ।
उत्तर- (1) निर्धनता और बेकारी में वृद्धि, (2) बेईमानी तथा नैतिक पतन।
प्रश्न 6 – औद्योगिक क्रान्ति सर्वप्रथम कहाँ आरम्भ हुई?
उत्तर- औद्योगिक क्रान्ति सर्वप्रथम इंग्लैण्ड में प्रारम्भ हुई।
प्रश्न 7 – फ्लाई शटल का आविष्कार कब हुआ और किसने किया?
उत्तर- फ्लाई शटल का आविष्कार 1738 ई० में जॉन के (John Key) नामक व्यक्ति ने किया था।
प्रश्न 8- जेम्स वॉट क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर – जेम्स वॉट 1789 ई० में भाप से चलने वाले इंजन के सुधरे हुए रूप का आविष्कार करने के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 9 – जॉर्ज स्टीफेन्सन का आविष्कार क्या था और यह. आविष्कार कब हुआ?
उत्तर – जॉर्ज स्टीफेन्सन ने भाप चालित पहले लोकोमोटिव इंजन का आविष्कार किया था और यह आविष्कार 1814 ई० में हुआ था ।
प्रश्न 10- सेफ्टी लैम्प किसने बनाया और कब?
उत्तर- खानों में प्रकाश की व्यवस्था करने के लिए हम्फ्री डेवी नामक वैज्ञानिक ने 1815 ई० में सेफ्टी लैम्प बनाया ।
प्रश्न 11 – कार्ल मार्क्स ने किस प्रसिद्ध ग्रन्थ की रचना की ?
उत्तर – कार्ल मार्क्स ने ‘दांस कैपिटल’ नामक ग्रन्थ की रचना की।
प्रश्न 12 – पहला रेलमार्ग कब तथा कहाँ प्रारम्भ किया गया?
उत्तर – पहला रेलमार्ग 1825 ई० में स्टाकटन से डालिंगटन तक इंग्लैण्ड में प्रारम्भ किया गया।
प्रश्न 13 – औद्योगिक क्रान्ति किस शताब्दी में हुई?
उत्तर- औद्योगिक क्रान्ति 18वीं शताब्दी में हुई ।
• बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1 – इंग्लैण्ड में सर्वप्रथम औद्योगिक क्रान्ति हुई-
(अ) वस्त्र उद्योग में
(ब) लोहा उद्योग में
(स) कृषि उद्योग में
(द) जूट उद्योग में।
उत्तर- (अ) वस्त्र उद्योग में।
प्रश्न 2 – वह शब्द कौन-सा है जो आमतौर पर एशिया के लिए इस्तेमाल किया जाता है-
(अ) सौदागर
(ब) आदि
(स) प्राच्य
(द) जादुई चिराग
उत्तर- (स) प्राच्य।
प्रश्न 3 – स्पिनिंग जेनी का आविष्कार किसने किया—
(अ) स्टीफेन्सन
(ब) जेम्स हरप्रीव्ज
(स) जॉन के
(द) आर्कराइट।
उत्तर- (ब) जेम्स हरप्रीव्ज ।
प्रश्न 4- कम्पनी ने बुनकरों पर निगरानी रखने के लिए जो वेतनभोगी कर्मचारी नियुक्त किए, वे कहलाते थे-
(अ) एजेण्ट
(ब) राजस्व अधिकारी
(स) आमिल
(द) गुमाश्ता ।
उत्तर- (द) गुमाश्ता।
प्रश्न 5 – बम्बई में पहली कपड़ा मिल कब स्थापित की गई-
(अ) सन् 1804 में
(ब) सन् 1810 में
(स) सन् 1854 में
(द) सन् 1860 में।
उत्तर- (अ) सन् 1804 में।
प्रश्न 6- देश की पहली जूट मिल कब और कहाँ स्थापित की गई-
(अ) 1853 में कानपुर में
(ब) 1854 में मुम्बई में
(स) 1855 में कलकत्ता में
(द) 1856 में अहमदाबाद में।
उत्तर – ( स ) 1855 में कलकत्ता में।

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