UK Board 9th Class Science – Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ
UK Board 9th Class Science – Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ
UK Board Solutions for Class 9th Science – विज्ञान – Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ
अध्याय के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-से पदार्थ हैं-
कुर्सी, वायु, स्नेह, गन्ध, घृणा, बादाम, विचार, शीत, शीतल पेय, इत्र की सुगन्ध ।
उत्तर : कुर्सी, वायु, बादाम तथा शीतल पेय पदार्थ हैं; क्योंकि ये सभी स्थान घेरते हैं तथा इन सभी का द्रव्यमान होता है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रेक्षण के कारण बताएँ-
गरमा-गरम खाने की गन्ध कई मीटर दूर से ही आपके पास पहुँच जाती है, लेकिन ठण्डे खाने की महक लेने के लिए आपको उसके पास जाना पड़ता है।
उत्तर : गरमा-गरम खाने के कणों का तापमान अधिक होने के कारण इनकी गतिज ऊर्जा बहुत अधिक बढ़ जाती है तथा ये कण खाने की सतह छोड़कर वायु में विसरित हो जाते हैं। अधिक तापमान पर विसरण भी तीव्र हो जाता है जिससे कई मीटर की दूरी पर होने पर भी खाने की गन्ध हम तक पहुँच जाती है। दूसरी ओर खाना ठण्डा होने पर इसके कणों का वायु में विसरण लगभग नगण्य होता है, इसलिए अधिक दूरी पर ठण्डे खाने की महक नहीं आ पाती तथा हमें ही खाने के समीप जाना पड़ता है।
प्रश्न 3. स्वीमिंग पूल में गोताखोर पानी काट पाता है। इससे पदार्थ का कौन-सा गुण प्रेक्षित होता है?
उत्तर : पदार्थ के कणों के मध्य एक आकर्षण बल उपस्थित होता है। जिसे अन्तरा – अणुक बल कहते हैं। इसी बल के कारण किसी पदार्थ के कंण परस्पर बँधे रहते हैं। यह बल ठोसों में सबसे अधिक, द्रवों में उससे कम तथा गैसों में सबसे कम होता है। स्वीमिंग पूल में गोताखोर जब पानी को हाथों से धकेलता है तो पानी के अणुओं के मध्य आकर्षण बल कम होने के कारण वह इसमें से होकर आगे बढ़ जाता है अर्थात् वह पानी काट पाता
प्रश्न 4. पदार्थ के कणों की क्या विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर : प्रत्येक पदार्थ अत्यन्त छोटे-छोटे कणों से मिलकर बनता है। इन कणों की विशेषताएँ इस प्रकार हैं- (i) पदार्थ के इन कणों के मध्य रिक्त स्थान होता है; (ii) इन रिक्त स्थानों में ये कण निरन्तर गति की अवस्था में रहते हैं; (iii) ये कण परस्पर एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं तथा इस आकर्षण बल के कारण एक-दूसरे से बँधे रहते हैं।
प्रश्न 5. किसी तत्व के द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन को घनत्व कहते हैं। ( घनत्व = द्रव्यमान / आयतन )
बढ़ते हुए घनत्व के क्रम में निम्नलिखित को व्यवस्थित कीजिए-
वायु, चिमनी का धुआँ, शहद, जल, चॉक, रुई और लोहा ।
उत्तर : चिमनी का धुआँ, वायु, रुई, जल, शहद, चॉक, लोहा ।
प्रश्न 6. (a) पदार्थ की विभिन्न अवस्थाओं के गुणों में होने वाले अन्तर को सारणीबद्ध कीजिए।
(b) निम्नलिखित पर टिप्पणी कीजिए—
दृढ़ता, संपीड्यता, तरलता, बर्तन में गैस का भरना, आकार, गतिज ऊर्जा एवं घनत्व ।
उत्तर : (a) पदार्थ की विभिन्न अवस्थाएँ ठोस, द्रव तथा गैस हैं। इनके मध्य अन्तर अग्रलिखित हैं-
ठोस, द्रव और गैस में अन्तर
| क्र०सं० | गुण | ठोस | द्रव | गैस |
| 1. | आकार | इनका आकार निश्चित होता है। | इनका आकार निश्चित नहीं होता है। | इनका आकार निश्चित नहीं होता है। |
| 2. | आयतन | इनका आयतन निश्चित होता है। | इनका आयतन निश्चित होता है। | इनका आयतन निश्चित नहीं होती है। |
| 3. | तरलता | ये बहते नहीं हैं। | ये ऊपर से नीचे की ओर बहते है। | ये प्रत्येक दिशा में बहती है। |
| 4. | दाब का प्रभाव | इनको बहुत कम दबाया जा सकता है। | इनको ठोस की अपेक्षा अधिक दबाया जा सकता है। | इनको सबसे अधिक दबाया जा सकता है। |
| 5. | कणों की गतिशीलता | इनके कणों में सबसे कम गति होती है। | इनके कण ठोस की अपेक्षा अधिक गतिशील होते हैं। | इनके कण बहुत अधिक गतिशील होते हैं। |
| 6. | ऊर्जा | इनके कणों में बहुत कम ऊर्जा होती है। | इनके कणों में ऊर्जा अधिक होती है। | इनके कणों में ऊर्जा बहुत अधिक होती है। |
| 7. | अन्तरा-अणुक स्थान | इनके कणों के बीच अन्तरा-अणुक स्थान बहुत कम होता है। | इनके कणों के बीच अन्तरा-अणुक स्थान ठोस की अपेक्षा अधिक होता है। | इनके कणों के बीच अन्तरा-अणुक स्थान सबसे अधिक होता है। |
| 8. | अन्तरा-अणुक आकर्षण बल | इनके कणों के बीच अन्तरा-अणुक आकर्षण बल होता है। | इनके कणों के बीच अन्तरा-अणुक आकर्षण बल ठोस की अपेक्षा कम होता है । | इनके कणों के बीच अन्तरा-अणुक आकर्षण बल नहीं के बराबर होता है। |
(b) (1) दृढ़ता — दृढ़ता पदार्थ का एक गुण है। यह गुण पदार्थ के कणों के मध्य स्थित रिक्त स्थान ( अन्तरा – अणुक स्थान) को व्यक्त करता है । कणों के मध्य रिक्त स्थान जितना कम होता है, पदार्थ उतना ही दृढ़ कहा जाता है। इस प्रकार ठोस पदार्थों की दृढ़ता सबसे अधिक, द्रवों की इनसे कम तथा गैसों की सबसे कम ( लगभग नगण्य) होती है। ठोस पदार्थे दृढ़ता के कारण ही बाह्य बल लगाने पर भी अपना आकार परिवर्तित नहीं करते।
(2) संपीड्यता – पदार्थों का संपीड्यता गुण, उन पर दाब के प्रभाव को व्यक्त करता है। यदि पदार्थ को बाह्य दाब के द्वारा दबाया नहीं जा सकता है तो उसकी संपीड्यता नगण्य होगी। इसके अतिरिक्त यदि पदार्थ को बाह्य दाब से दबाया जा सकता हो तो उसकी संपीड्यता अधिक होगी। दूसरे शब्दों में संपीड्यता पदार्थ के आयतन से सम्बन्धित होती है। स्थिर आयतन वाले पदार्थों की संपीड्यता नगण्य तथा परिवर्तनशील आयतन वाले पदार्थों की संपीड्यता अधिक होती है। ठोस पदार्थों को बाह्य बल द्वारा दबाया नहीं जा सकता तथा इनका आयतन भी निश्चित होता है; अत: इनकी संपीड्यता नगण्य होगी। द्रवों की संपीड्यता ठोसों से अधिक होती है तथा गैसों की संपीड्यता सर्वाधिक होती है। इसी कारण गैसों को कम आयतन वाले सिलिण्डरों में संपीडित किया जा सकता है।
(3) तरलता – तरलता द्रव पदार्थों (तरल पदार्थों) के बहने (flow) गुण है। ठोस पदार्थों में यह गुण नहीं होता । द्रव पदार्थ सदैव ऊपर से नीचे की ओर बहते हैं। इन पदार्थों का इस प्रकार बहना इनकी तरलता कहलाती है । गैसों में भी यह गुण पाया जाता है। गैसें प्रत्येक दिशा में बहती हैं।
(4) बर्तन में गैस का भरना— गैसों के कणों के मध्य पर्याप्त रिक्त स्थान उपलब्ध रहता है तथा ये कण इन रिक्त स्थानों में अत्यधिक गतिज ऊर्जा के साथ गतिशील रहते हैं। जब किसी गैस को बर्तन में भरा जाता है तो इसके कण बर्तन का सम्पूर्ण स्थान घेर लेते हैं तथा बर्तन की दीवारों से भी टकराते रहते हैं जिससे बर्तन की दीवारों पर दबाव पड़ता है। इसे ही गैस का दाब कहते हैं।
(5) आकार – पदार्थ के कणों के बीच उपस्थित आकर्षण बल (अन्तरा – अणुक बल) पदार्थ का आकार निर्धारित करता है। यदि पदार्थ के कणों के बीच आकर्षण बल अत्यधिक होगा तो पदार्थ का आकार या सीमाएँ निश्चित होंगी। इसके विपरीत यदि आकर्षण बल कम या नगण्य होगा तो आकार निश्चित नहीं होगा। इसलिए ठोसों का आकार निश्चित तथा द्रवों और गैसों का आकार अनिश्चित होता है। इसलिए द्रव तथा गैस जिन बर्तनों में भरे जाते हैं, उनका आकार ग्रहण कर लेते हैं।
(6) गतिज ऊर्जा — पदार्थों के कण सदैव गतिशील रहते हैं जिसका कारण उनमें गतिज ऊर्जा की उपस्थिति होती है। दूसरे शब्दों में गतिज ऊर्जा ही पदार्थ के कणों को गतिशील बनाती है। गतिज ऊर्जा ( तथा कणों की (गति) पदार्थ का ताप बढ़ने पर बढ़ जाती है।
(7) घनत्व – घनत्व को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है-

अर्थात् किसी पदार्थ का घनत्व उसके प्रति इकाई आयतन के द्रव्यमान के तुल्य होता है। ठोसों का घनत्व उच्च, द्रवों का कम तथा गैसों का घनत्व सबसे कम (लगभग नगण्य ) होता है।
प्रश्न 7. कारण बताएँ-
(a) गैस पूरी तरह उस बर्तन को भर देती है, जिसमें इसे रखते हैं।
(b) गैस बर्तन की दीवारों पर दबाव डालती है।
(c) लकड़ी की मेज ठोस कहलाती है।
(d) हवा में हम आसानी से अपना हाथ चला सकते हैं, लेकिन एक ठोस लकड़ी के टुकड़े में हाथ चलाने के लिए हमें कराटे में दक्ष होना पड़ेगा।
उत्तर : (a) गैस के कणों के मध्य रिक्त स्थान अधिक होता है तथा इनके मध्य आकर्षण बल भी नगण्य होता है। इस कारण गैस के कण सभी दिशाओं में तीव्र गतिशील रहते हैं अर्थात् इनमें उच्च गतिज ऊर्जा रहती है। जब गैस को किसी बर्तन में भरा जाता है तो इसके कण बर्तन के सम्पूर्ण आयतन में फैल जाते हैं। इसलिए गैसों का आकार भी निश्चित नहीं होता । गैस पूरी तरह उस बर्तन को भर देती है, जिसमें इसे रखते हैं।
(b) गैस के कणों की गति अत्यन्त तीव्र एवं अनियमित होती है। इसलिए गैस के कण परस्पर तथा बर्तन की दीवारों से टकराते रहते हैं। बर्तन की दीवार पर टकराने से कणों का दबाव बर्तन की दीवारों पर पड़ता है। इसे ही गैस का दाब कहते हैं।
(c) लकड़ी की मेज का आकार तथा आयतन निश्चित होता है; क्योंकि इसके कणों के मध्य रिक्त स्थान अत्यन्त कम एवं आकर्षण बल (अन्तरा – अणुक बल) बहुत अधिक होता है। इन बलों के कारण ये कण परस्पर बँधे रहते हैं तथा लकड़ी की मेज के आकार एवं सीमाओं को निश्चित रखते हैं। इसके अतिरिक्त लकड़ी की मेज की संपीड्यता नगण्य होती है जिससे बाह्य बल लगाने पर भी यह अपना आकार नहीं बदलती है। इसलिए लकड़ी की मेज ठोस कहलाती है।
(d) पदार्थ के कणों के मध्य आकर्षण बल होता है जिसकी सामर्थ्य भिन्न-भिन्न पदार्थों के लिए भिन्न-भिन्न होती है। हवा के कणों में यह बल-सामर्थ्य नगण्य होती है जिससे इसके कणों के मध्य स्थान बनाया जा सकता है अर्थात् हवा के बीच में हम अपना हाथ आसानी से चला सकते हैं। परन्तु ठोस लकड़ी के टुकड़े में आकर्षण बल-सामर्थ्य बहुत अधिक होती है जिससे इसके कण परस्पर दृढ़ता से जुड़े रहते हैं तथा इनके मध्य हम अपना हाथ नहीं चला सकते। लकड़ी के टुकड़े में हाथ चलाने के लिए हमें कराटे कला में निपुण होना चाहिए जिससे हम लकड़ी के टुकड़े को अपने हाथ से तोड़ सकते हैं।
प्रश्न 8. सामान्यतया ठोस पदार्थों की अपेक्षा द्रवों का घनत्व कम होता है। लेकिन आपने बर्फ के टुकड़े को जल में तैरते हुए देखा होगा। पता लगाइए, ऐसा क्यों होता है?
उत्तर : बर्फ का घनत्व, जल से कम होता है। जल 0°C से 4°C ताप के बीच सिकुड़ जाता है तथा अधिक ताप पर यह अन्य पदार्थों की भाँति फैलता है। 4°C पर जल का अधिकतम घनत्व 1 ग्राम/सेमी3 होता है, परन्तु 0°C पर 0.91 ग्राम जल 1 सेमी3 आयतन घेरता है अर्थात् बर्फ का घनत्व 0.91 ग्राम/सेमी3 होता है। अतः बर्फ का घनत्व कम होने के कारण यह जल पर तैरता है ।
प्रश्न 9. निम्नलिखित तापमान को सेल्सियस में बदलें-
(a) 300K (b) 573K
हल : चूँकि सेल्सियस मापक्रम पर तापमान = केल्विन मापक्रम पर तापमान
अत: (a) 300K के लिए सेल्सियस तापमान = 300 – 273
= 27°C
(b) 573K के लिए सेल्सियस तापमान = 573 – 273
= 300°C
प्रश्न 10. निम्नलिखित तापमान पर जल की भौतिक अवस्था क्या होगी?
(a) 250°C (b) 100°C
उत्तर : (a) 250°C पर जल की भौतिक अवस्था जल वाष्प अथवा भाप की होगी।
(b) 100°C पर जल की भौतिक अवस्था उबलते जल की होगी अर्थात् 100°C जल का क्वथनांक होगा।
प्रश्न 11. किसी भी पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान स्थिर क्यों रहता है?
उत्तर : पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान स्थिर रहता है; क्योंकि अवस्था परिवर्तन के दौरान पदार्थ को दिया गया ताप, पदार्थ के कणों के पारस्परिक आकर्षण बल को समाप्त करके पदार्थ की अवस्था परिवर्तित कर देता है। इस स्थिति में पदार्थ को दिया गया ताप ( अथवा ऊष्मीय ऊर्जा) इसमें छुपा रहता है, इसे पदार्थ की गुप्त ऊष्मा कहते हैं।
प्रश्न 12. वायुमण्डलीय गैसों को द्रव में परिवर्तित करने के लिए कोई विधि सुझाइए।
उत्तर : वायुमण्डलीय गैसों को दाब बढ़ाकर तथा ताप कम करके द्रव में परिवर्तित किया जा सकता है।
प्रश्न 13. गर्म, शुष्क दिन में कूलर अधिक ठण्डा क्यों करता है?
उत्तर: गर्म, शुष्क दिन में तापमान अत्यधिक होता है जिससे कूलर में उपस्थित जल का ताप भी बढ़ता है। तापमान वृद्धि के कारण जल अधिक शीघ्रता से जल वाष्प में परिवर्तित हो जाता है। वाष्पन की इस प्रक्रिया में जल वातावरण से ऊष्मा प्राप्त करता है। वातावरण से ऊष्मा लेने के कारण जब कूलर के पलड़ों पर बँधी घास की गंदियों पर पड़ा जल वाष्पीकृत होता है तो वह उसे ठण्डा कर देता है, इससे सम्पर्क में आई वायु भी शीतल हो जाती है। यह वायु कूलर के पंखे के द्वारा कमरे में भेज दी जाती है तथा कमरा ठण्डा हो जाता है।
प्रश्न 14. गर्मियों में घड़े को जल ठण्डा क्यों होता है?
उत्तर : मिट्टी से बने घड़े में छोटे-छोटे छिद्र ( रन्ध्र) होते हैं जिनमें से घड़े में भरा पानी रिसकर बाहर आ जाता है तथा वातावरण की गर्म वायु के सम्पर्क में आकर वाष्पीकृत हो जाता है। जल के वाष्प में परिवर्तित होने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा घड़े के भीतर वाले जल से प्राप्त होती है। इससे घड़े के भीतर उपस्थित जल ठण्डा हो जाता है।
प्रश्न 15. ऐसीटोन / पेट्रोल या इत्र डालने पर हमारी हथेली ठण्डी क्यों हो जाती है?
उत्तर : ऐसीटोन/पेट्रोल या इत्र शीघ्रता से वाष्पीकृत हो जाते हैं। जब इन पदार्थों को हथेली पर डाला जाता है तो इनके कण हथेली तथा आस-पास के वातावरण से ऊर्जा प्राप्त कर लेते हैं तथा वाष्पीकृत हो जाते हैं। ऊर्जा (ताप) के ह्रास से हमारी हथेली ठण्डी हो जाती है।
प्रश्न 16. कप की अपेक्षा प्लेट से हम गर्म दूध या चाय जल्दी क्यों पी लेते हैं?
उत्तर : कप की अपेक्षा प्लेट की सतह अधिक होती है। प्लेट की सतह अधिक होने के कारण इसमें भरे दूध या चाय का वाष्पन अधिक होता है। प्लेट की सतह से वाष्पन अधिक होने से दूध या चाय शीघ्रता से ठण्डी हो जाती है और हम कप की अपेक्षा प्लेट से इसे जल्दी पी लेते हैं।
प्रश्न 17. गर्मियों में हमें किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए?
उत्तर : गर्मियों में हमें सूती कपड़े पहनने चाहिए। शारीरिक प्रक्रिया के कारण गर्मियों में पसीना अधिक आता है, जिससे हमें शीतलता प्राप्त होती है। पसीने के वाष्पीकरण के दौरान पसीने के कण हमारे शरीर या आस-पास से ऊर्जा प्राप्त करके वाष्प में बदल जाते हैं। वाष्पीकरण की प्रसुप्त ऊष्मा के बराबर ऊष्मीय ऊर्जा हमारे शरीर से अवशोषित हो जाती है जिससे शरीर शीतल हो जाता है। चूँकि सूती कपड़ों में जल का अवशोषण अधिक होता है, इसलिए हमारा पसीना इसमें अवशोषित होकर वायुमण्डल में आसानी से वाष्पीकृत हो जाता है।
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. निम्नलिखित तापमानों को सेल्सियस इकाई में परिवर्तित कीजिए-
(a) 300K
(b) 573K
उत्तर : ‘अध्याय के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर’ में प्रश्न संख्या-9 का उत्तर देखिए ।
प्रश्न 2. निम्नलिखित तापमानों को केल्विन इकाई में परिवर्तित कीजिए-
(a) 25°C
(b) 373°C
हल: केल्विन पैमाने पर तापक्रम = सेल्सियस पैमाने पर तापक्रम + 273
(a) 25°C के लिए केल्विन इकाई = 25 + 273 = 298 K..
(b) 373°C के लिए केल्विन इकाई = 373 + 273 = 646K.
प्रश्न 3. निम्नलिखित अवलोकनों हेतु कारण लिखिए-
(a) नैफ्थेलीन को रखा रहने देने पर यह समय के साथ कुछ भी ठोस पदार्थ छोड़े बिना अदृश्य हो जाती है।
(b) हमें इत्र की गन्ध बहुत दूर बैठे हुए भी पहुँच जाती है।
उत्तर : (a) कुछ ठोस पदार्थ द्रव में परिवर्तित हुए बिना ही सीधे गैसीय अवस्था में आ जाते हैं और गैसीय अवस्था से सीधे ठोस अवस्था में आ जाते हैं, यह प्रक्रिया ऊर्ध्वपातन कहलाती है। नैफ्थलीन भी ऊर्ध्वपातन प्रदर्शित करती है। यह बिना कोई ठोस पदार्थ छोड़े गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाती है।
(b) इत्र का वाष्पन अत्यन्त सुगमता से होता है। इत्र के कण अत्यधिक तीव्र गति से वायुमण्डल में विसरित हो जाते हैं जिससे हमें दूरी पर रहते हुए भी इसकी गंध मिल जाती है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित पदार्थों को उनके कणों के बीच बढ़ते हुए आकर्षण के अनुसार व्यवस्थित कीजिए-
(a) जल
(b) चीनी
(c) ऑक्सीजन।
उत्तर : ऑक्सीजन, जल, चीनी ।
प्रश्न 5. निम्नलिखित तापमानों पर जल की भौतिक अवस्था क्या है-
(a) 25°C
(b) 0°C
(c) 100°C.
उत्तर : (a) 25°C पर जल द्रव अवस्था में होगा ।
(b) 0°C पर जल ठोस अवस्था (बर्फ) में होगा ।
(c) 100°C पर जल उबलता हुआ होगा। 100°C जल का क्वथनांक होता है।
प्रश्न 6. पुष्टि हेतु कारण दीजिए-
(a) जल कमरे के ताप पर द्रव है।
(b) लोहे की अलमारी कमरे के ताप पर ठोस है।
उत्तर : (a) कमरे के ताप अर्थात् सामान्य ताप पर जल अपनी द्रव अवस्था में ही होता है, चूँकि जल को ठोस (बर्फ) में परिवर्तित करने के लिए तापमान 0°C होना चाहिए तथा वाष्प में परिवर्तित करने के लिए 100°C होना चाहिए। अतः साधारण ताप पर यह अपनी अवस्था परिवर्तित नहीं कर सकता और द्रव अवस्था में ही रहता है ।
(b) लोहे को द्रव अवस्था अथवा गैस अवस्था में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ताप ( गलनांक) उच्च होता है। कमरे के ताप पर लोहे की अलमारी का अवस्था परिवर्तन सम्भव नहीं होता है; अतः कमरे के ताप पर यह ठोस होती है।
प्रश्न 7. 273K पर बर्फ को ठण्डा करने पर तथा जल को इसी तापमान पर ठण्डा करने पर शीतलता का प्रभाव अधिक क्यों होता है ?
उत्तर : 273K पर बर्फ इसी तापमान पर जल की अपेक्षा संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा के कारण सम्पर्क में आने वाले पदार्थ को अधिक प्रभावशाली ढंग से ठण्डा करता है।
प्रश्न 8. उबलते हुए जल अथवा भाप में से जलने की तीव्रता किसमें अधिक महसूस होती है?
उत्तर : भाप में, उबलते जल की अपेक्षा अधिक ऊष्मा होती है, जो भाप की गुप्त ऊष्मा कहलाती है। इसी कारण उबलते हुए जल की अपेक्षा भाप से जलना अधिक कष्टप्रद होता है।
प्रश्न 9. निम्न चित्र के लिए A, B, C, D, E तथा F की अवस्था परिवर्तन को नामांकित कीजिए-

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर
• विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. पदार्थ को परिभाषित कीजिए । पदार्थ की अवस्थाओं से क्या तापर्य है? प्रेक्षणों से स्पष्ट होती है—
अथवा पदार्थ क्या है? इसकी कितनी अवस्थाएँ होती हैं? उदाहरण सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : पदार्थ
“पदार्थ वह वस्तु है जो स्थान घेरता है, जिसमें द्रव्यमान तथा भार होता है और जो परिवर्तन का विरोध करता है। पदार्थ का अनुभव ज्ञानेन्द्रियों द्वारा किया जा सकता है।” जैसे—मेज, किताब, वायु, जल आदि । पदार्थ प्रत्येक वस्तु (ठोस, द्रव या गैस) में विद्यमान होता है।
पदार्थ की अवस्थाएँ
पदार्थ की तीन अवस्थाएँ होती हैं — ठोस, द्रव तथा गैस ।
ठोस अवस्था – ” पदार्थ की वह भौतिक अवस्था जिसमें आकार तथा आयतन दोनों निश्चित होते हैं, ठोस अवस्था कहलाती है।” जैसे— लोहा, पत्थर, लकड़ी आदि ।
द्रव अवस्था – ” पदार्थ की वह भौतिक अवस्था जिसमें आयतन निश्चित, परन्तु आकार अनिश्चित होता है, द्रव अवस्था कहलाती है।” जैसे – जल, दूध, मिट्टी का तेल आदि ।
गैस अवस्था – “पदार्थ की वह भौतिक अवस्था जिसमें आकार तथा आयतन दोनों ही अनिश्चित होते हैं, गैस अवस्था कहलाती है।” जैसे – वायु, जलवाष्प, धुआँ आदि ।
ठोस, द्रव और गैस अवस्थाओं में अन्तर
“‘अध्याय के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर ” शीर्षक के अन्तर्गत प्रश्न संख्या 6 (a) का उत्तर देखिए ।
प्रश्न 2. पदार्थ के भौतिक स्वरूप की व्याख्या कीजिए तथा इसके कणों के अभिलाक्षणिक गुणों का भी वर्णन कीजिए। अथवा पदार्थ के कणों की विशेषताएँ क्या हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर : पदार्थ का भौतिक स्वरूप
पदार्थ अत्यन्त सूक्ष्म कणों से मिलकर बना है तथा इन कणों को अणु कहते हैं। एक ही शुद्ध पदार्थ के सभी कण, सब प्रकार से गुणों में समान होते हैं। विभिन्न पदार्थों के कण गुणों में भिन्न होते हैं।
पदार्थों के गुण-धर्म इस बात पर निर्भर करते हैं कि उनके कण परस्पर किस प्रकार से बँधे हुए हैं। उदाहरण के लिए – हीरा तथा ग्रेफाइट कार्बन कणों से ही बने होते हैं, परन्तु इनकी संरचना की विभिन्नता के कारण इन दोनों के भौतिक गुणों में अन्तर होता है।
इस प्रकार पदार्थ का भौतिक स्वरूप रेत के कणों के समान माना जा सकता है। पदार्थ का निर्माण करने वाले कण आकार में अत्यन्त छोटे होते हैं।
पदार्थ के कणों के अभिलाक्षणिक गुण
पदार्थ के कणों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) “पदार्थ में एक कण से दूसरे कण के बीच खाली स्थान रहता है, जिसे अन्तरा – अणुक अवकाश (intermolecular space) कहते हैं। ” इन खाली स्थानों को आँख द्वारा देख पाना असम्भव है, जिससे प्रत्येक पदार्थ सतत् (continuous) दिखाई देता है। पदार्थ की भौतिक अवस्था बदलने के साथ-साथ अन्तरा – अणुक स्थान भी घटता-बढ़ता रहता है। गैस अवस्था में यह स्थान सबसे अधिक होता है।
(2) “द्रव्य के अणुओं के बीच परस्पर आकर्षण एवं प्रतिकर्षण बल होता है। आकर्षण बल को अन्तरा-अणुक आकर्षण (intermolecular attraction) या संसंजक बल (cohesive force) कहते हैं।” यह बल द्रव्य की भौतिक अवस्था में परिवर्तन के साथ परिवर्तित होता है।
ठोस तथा द्रव अवस्था में अणुओं के बीच पर्याप्त अन्तरा – अणुक बल कार्य करता है, जबकि गैस अबस्था में अणुओं के बीच दूरी बहुत अधिक होती है; अतः अन्तरा-अणुक बल बहुत कम होता है।
(3) “पदार्थ के कण सदैव इधर-उधर गतिशील रहते हैं। इस गति को आण्विक गति कहा जाता है, जो इन कणों के भार तथा ताप पर निर्भर होती है ।” इन कणों की गतिशीलता निम्नलिखित प्रेक्षणों से स्पष्ट होती है –
(i) कमरे के एक कोने में इत्र की शीशी खोलने पर इसकी सुगन्ध पूरे कमरे में फैल जाती है।
(ii) जल से भरी परखनली में पोटैशियम परमैंगनेट का एक क्रिस्टल डाल देने पर धीरे-धीरे सम्पूर्ण जल का रंग गुलाबी हो जाता है।
(4) अणुओं के द्रव्यमान तथा वेग के कारण उनमें गतिज ऊर्जा (kinetic energy) होती है। द्रव्य की ऊष्मीय ऊर्जा इसी गतिज ऊर्जा के कारण होती है। अणुओं का वेग शून्य होने पर द्रव्य का ताप भी शून्य हो जाता है।
प्रश्न 3. ठोस पदार्थों पर ताप के प्रभाव को समझाइए । ठोस पदार्थों के गलनांक से क्या तात्पर्य है? किसी पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान स्थिर रहने का क्या कारण होता है? उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर : पदार्थ अत्यन्त सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है। पदार्थ की ठोस अवस्था में कणों के मध्य रिक्त स्थान कम तथा पारस्परिक, आकर्षण बल अत्यधिक होता है। पदार्थ के कण रिक्त स्थानों में गतिशील रहते हैं अर्थात् इनमें कुछ गतिज ऊर्जा उपस्थित होती है। जब ठोस पदार्थों का तापमान बढ़ाया जाता है तो इसके कणों की गतिज ऊर्जा में वृद्धि हो जाती है। गतिज ऊर्जा में वृद्धि होने के कारण कण अधिक तीव्रता से कम्पन करते हैं। ऊष्मा द्वारा प्रदान की जाने वाली ऊर्जा कणों के बीच के आकर्षण बल से अधिक हो जाने पर ठोस पदार्थ के कण अपने नियत स्थान को छोड़कर अधिक स्वतन्त्र होकर गति करने लगते हैं अर्थात् कणों के मध्य रिक्त स्थान बढ़ने लगता है। एक अवस्था ऐसी आती है, जब ठोस पिघलकर द्रव में परिवर्तित हो जाता है। जिस तापमान पर ठोस पिघलकर द्रव बन जाता है, वह इसका गलनांक कहलाता है। इस प्रकार ठोस पदार्थ का गलनांक उसके कणों के बीच के आकर्षण बल की सामर्थ्य को दर्शाता है।
ठोस पदार्थ का गलकर द्रव अवस्था में परिवर्तित हो जाना संगलन भी कहलाता है। गलने की प्रक्रिया के दौरान यह तथ्य ध्यान देने योग्य होता है कि गलनांक पर पहुँचने के पश्चात्, जब तक सम्पूर्ण पदार्थ (जैसे— बर्फ) पिघल नहीं जाता, तापमान नहीं बदलता है। वास्तव में, कणों के पारस्परिक आकर्षण बल को वशीभूत करके पदार्थ की अवस्था को बदलने में इस ऊष्मा का उपयोग होता है। चूँकि तापमान में बिना किसी प्रकार की वृद्धि दर्शाए इस ऊष्मीय ऊर्जा को ठोस पदार्थ अवशोषित कर लेता है, यह माना जाता है कि यह ऊष्मा पदार्थ में छुपी रहती है, जिसे गुप्त ऊष्मा कहते हैं। वायुमण्डलीय दाब पर 1 किग्रा ठोस को उसके गलनांक पर द्रव में परिवर्तित करने के लिए जितनी ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उसे संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा कहते हैं। इस प्रकार 0°C पर जल के कणों की ऊर्जा उसी तापमान पर बर्फ के कणों की ऊर्जा से अधिक होती है।
उदाहरण के लिए – 500 मिली आयतन के एक बीकर में लगभग 100 ग्राम बर्फ लेते हैं तथा विभिन्न उपकरणों को निम्नांकित चित्रानुसार व्यवस्थ करते हैं। जैसा कि चित्र-1 में प्रदर्शित है थर्मामीटर बर्फ के टुकड़ों के बीच लगा हुआ है, इसका पाठ्यांक 0°C होगा। बर्नर की सहायता से बीकर को धीमी लौ पर गर्म करना प्रारम्भ करते हैं।

उपर्युक्त प्रयोग द्वारा हम देख सकते हैं कि बर्फ को लगातार गर्म करने पर भी इसके ताप में कोई बढ़ोतरी नहीं होती जब तक कि पूरी बर्फ पिघलकर जल में परिवर्तित नहीं होती।
वास्तव में बर्फ पिघलने के दौरान दी गई ऊष्मा इसे’ ठोस से द्रव में परिवर्तित करने में प्रयुक्त होती है। इस ऊष्मा को थर्मामीटर द्वारा मापना सम्भव नहीं होता। इस छुपी हुई ऊष्मा को ही गुप्त ऊष्मा कहा जाता है।
संगलन की गुप्त ऊष्मा वह ऊष्मा है जो ठोस के इकाई द्रव्यमान को गलन-बिन्दु (गलनांक) पर द्रव अवस्था में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक होती है। जैसे— बर्फ को गलाने में दी गई 336 जूल/ग्राम या 80 कैलोरी / ग्राम ऊष्मा, गुप्त ऊष्मा होती है।
प्रश्न 4. (a) वाष्पीकरण से आप क्या समझते हैं? वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में बताइए । वाष्पन तथा क्वथन में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
(b) ” वाष्पीकरण से ठण्डक उत्पन्न होती है।” इस कथन के पक्ष में पाँच उदाहरण दीजिए।
उत्तर : (a) वाष्पीकरण
हम जानते हैं कि पदार्थ के कण सदैव गतिशील होते हैं तथा कभी-भी स्थिर अवस्था में नहीं रहते। एक निश्चित ताप पर गैस, द्रव या ठोस के कणों में विभिन्न मात्रा में गतिज ऊर्जा होती है। द्रवों में सतह पर स्थित कणों के कुछ अंशों में इतनी गतिज ऊर्जा होती है कि वे दूसरे कणों के आकर्षण बल मुक्त हो जाते हैं। क्वथनांक से कम तापमान पर द्रव के वाष्प में परिवर्तित होने की इस प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं। दूसरे शब्दों में, द्रव की खुली सतह से प्रत्येक ताप पर धीरे-धीरे द्रव का अपने वाष्प में बदलना वाष्पीकरण कहलाता है। वाष्पीकरण के लिए द्रव को ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है।
जैसे – 1 ग्राम जल को वाष्प में परिवर्तित करने के लिए 2260 जूल ऊष्मा की आवश्यकता होती है। यह ऊष्मा द्रव अपने भीतर से ही प्राप्त करता है जिस कारण से यह ठण्डा हो जाता है।
वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले कारक
वाष्पीकरण की दर निम्नलिखित कारकों से प्रभावित होती है तथा इनके साथ बढ़ती है-
(1) सतही क्षेत्र बढ़ने पर – जैसा कि विदित है, वाष्पीकरण एक सतही प्रक्रिया है। सतही क्षेत्र बढ़ाने पर वाष्पीकरण की दर भी बढ़ जाती है। उदाहरणार्थ—यदि कपड़ों को फैला दिया जाता है, तो वे शीघ्र सूख जाते हैं।
(2) तापमान में वृद्धि पर – तापमान बढ़ने पर द्रव के अधिक-से-अधिक कणों को सतह छोड़ने हेतु पर्याप्त गतिज ऊर्जा प्राप्त हो जाती है जिससे वाष्पीकरण बढ़ जाता है।
(3) आर्द्रता में कमी होने पर – वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं। किसी निश्चित तापमान पर वातावरण की वायु में एक निश्चित मात्रा में ही जलवाष्प होता है। जब वायु में जल के कणों की मात्रा पहले से ही अधिक होगी तो वाष्पीकरण की दर घट जाएगी।
(4) वायु की गति बढ़ने पर – तेज वायु में गीले कपड़े शीघ्रता से सूख जाते हैं जिससे आस-पास के जल वाष्प की मात्रा घट जाती है तथा वाष्पीकरण बढ़ जाता है।
वाष्पन तथा क्वथन में अन्तर
| क्र०सं० | वाष्पन | क्वथन |
| 1. | यह द्रव के प्रत्येक ताप पर होता है। | यह द्रव के एक निश्चित ताप पर ही सम्भव होता है। |
| 2. | यह एक धीमी प्रक्रिया है। | यह एक तीव्र प्रक्रिया है। |
| 3. | यह द्रव की ऊपरी सतह से होता हैं। | यह सम्पूर्ण द्रव में एकसाथ होता है। |
| 4. | इस प्रक्रिया में द्रव का ताप परिवर्तित होता रहता है। | इस प्रक्रिया में द्रव का ताप निश्चित रहता है। |
| 5. | यह सतही क्षेत्र, वायु की गति तथा तापमान वृद्धि पर बढ़ जाता है। | यह अशुद्धि मिलाने पर ही परिवर्तित होता है, शेष दशाओं में यह स्थिर रहता है। |
(b) वाष्पन द्वारा ठण्डक उत्पन्न होने के उदाहरण
वाष्पन से ठण्डक उत्पन्न होती है। इस कथन के पक्ष में उदाहरण निम्नवत् हैं-
(1) गर्मियों में शारीरिक क्रिया के कारण हमें अत्यधिक पसीना आता है। जब हम पंखे की हवा में पसीना सुखाते हैं तो तीव्र वायु में वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है तथा हमें शीतलता प्राप्त होती है।
(2) मिट्टी से बने घड़ों में पानी ठण्डा हो जाता है, चूँकि घड़े में असंख्य सूक्ष्म छिद्र होते हैं जिनमें भीतर का पानी रिसकर बाहर आ जाता है तथा वातावरण के तापमान पर वाष्पीकृत हो जाता है। अत: वाष्पन की इस प्रक्रिया में जल आवश्यक ऊष्मा भीतर के जल से ही प्राप्त करता है जिससे घड़े का जल ठण्डा हो जाता है।
(3) गर्मियों में जमीन पर छिड़काव से जमीन ठण्डी हो जाती है। इसका कारण भी वाष्पीकरण ही है। जमीन पर छिड़का जल जमीन से ऊष्मा प्राप्त करके वाष्पीकृत हो जाता है तथा जमीन ठण्डी हो जाती है।
(4) गर्म चाय से भरे कप में फूँक मारने से चाय सरलता से पी जा सकती है। क्योंकि फूँक मारने से वाष्पन बढ़ जाता है तथा चाय का तापमान कम हो जाता है।
(5) गर्मियों में कुत्ते अपनी जीभ बाहर निकाले रखते हैं क्योंकि कुत्तों की त्वचा पर पसीना नहीं आता; अतः वे जीभ पर होने वाले वाष्पीकरण से ही ठण्डक प्राप्त करते हैं।
• लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. पदार्थ किसे कहा जा सकता है? उदाहरण सहित समझाइए |
उत्तर : पदार्थ वह वस्तु है जो स्थान घेरती है, जिसमें द्रव्यमान होता है तथा जो परिवर्तन का विरोध करती है। पदार्थ का अनुभव हम अपनी ज्ञानेन्द्रियों द्वारा कर सकते हैं। मेज, कुर्सी, किताब, पैन, वायु, चॉक, जल आदि पदार्थ के उदाहरण हैं। इन सभी वस्तुओं में द्रव्यमान होता है तथा ये कुछ स्थान अवश्य घेरती हैं।
प्रश्न 2. ” द्रव्य (पदार्थ) के कण गतिशील होते हैं। ” प्रयोग की सहायता से स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर : यदि एक वॉच – ग्लास पर ड्रापर से जल की कुछ बूँदें डालकर इन बूँदों में कुछ लाइकोपोडियम पाउडर मिलाया जाए तथा सूक्ष्मदर्शी यन्त्र से देखा जाए तो लाइकोपोडियम का प्रत्येक कण तीव्र गति से इधर-उधर भागता दिखाई देता है। इससे यह सिद्ध होता है कि द्रव के अणु गतिशील होते हैं।
प्रश्न 3. ठोस, द्रव तथा गैस में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर : ठोस, द्रव तथा गैस में अन्तर
| क्र०सं० | अन्तर का आधार | ठोस | द्रव | गैस |
| 1. | आकार | निश्चित | अनिश्चित | अनिश्चित |
| 2. | आयतन | निश्चित | निश्चित | अनिश्चित |
| 3. | दृढ़ता | सबसे अधिक | कम | सबसे कम |
| 4. | संपीड्यता | नगण्य | कम | सबसे अधिक |
| 5. | विसरण | नहीं होता। | नहीं होता। | होता है। |
प्रश्न 4. गैसों के गुणों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर : गैसों का न तो निश्चित आकार का होता है और न ही निश्चित आयतन। इन पर दबाव डाला जा सकता है। ये उस बर्तन में पूरी तरह से फैल जाती हैं जिसमें इन्हें भरा जाता है। हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइ ऑक्साइड आदि गैसों के उदाहरण हैं।
प्रश्न 5. जब हम अपनी हथेली पर बर्फ रख लेते हैं तो हमें अत्यधिक ठण्डक महसूस होती है। क्यों?
उत्तर : जब हम अपनी हथेली पर बर्फ रख लेते हैं तो बर्फ हमारे हाथ से ऊष्मा प्राप्त करती है तथा पिघल जाती है। बर्फ के लिए गुप्त ऊष्मा का मान 80 कैलोरी / ग्राम होता है। हाथ से इतनी मात्रा में ऊष्मा निकल जाने पर ठण्डक उत्पन्न हो जाती है।
प्रश्न 6. बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा कितनी होती है? इस मान से आप क्या समझते हैं?
उत्तर : बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा 80 कैलोरी /ग्राम या 3.34 × 105 जूल / किग्रा होती है। इसका अर्थ है कि 0°C पर 1 किग्रा बर्फ 3.34 × 105 ‘जूल ऊष्मा अवशोषित करती है तथा इसी ताप पर जल में परिवर्तित हो जाती है।
प्रश्न 7. गर्मियों में जब हमें पसीना आता है तो हम पंखे के नीचे शीतलता अनुभव क्यों करते हैं?
उत्तर : पसीना आने पर जब हम पंखे के नीचे बैठते हैं तो पंखे की तेज हवा में पसीने का वाष्पीकरण बढ़ जाता है। वाष्पन के लिए आवश्यक गुप्त ऊष्मा शरीर से ली जाती है जिसके फलस्वरूप हम शीतलता का अनुभव करते हैं।
प्रश्न 8. नहाने के पश्चात् हमें ठण्ड क्यों लगने लगती है?
उत्तर : नहाने के बाद शरीर पर जल की कुछ बूँदें रह जाती हैं, जो वाष्पीकृत होने लगती हैं। वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊर्जा शरीर से निकलती है जिससे ठण्डक का अनुभव होता है।
प्रश्न 9. वर्षा ऋतु में कपड़े अपेक्षाकृत देर से सूखते हैं। क्यों?
उत्तर : वाष्पन की दर आर्द्रता बढ़ने पर कम हो जाती है। चूँकि वर्षा ऋतु में वातावरण में पहले से ही जलवाष्प (आर्द्रता) उपस्थित होती है, इसलिए द्रव के वाष्पन हेतु आवश्यक ऊर्जा वातावरण से प्राप्त नहीं हो पाती।. यही कारण है कि वर्षा ऋतु में कपड़े गर्मियों की अपेक्षा देर से सूखते हैं।
प्रश्न 10. ठोसों तथा द्रवों की अपेक्षा गैसें सरलता से संपीडित की जा सकती हैं। क्यों?
उत्तर : गैसों के कणों के बीच की दूरी ठोस तथा द्रव की तुलना में बहुत अधिक होती है । कणों के मध्य अत्यधिक रिक्त स्थान होने के कारण गैसों को संपीडित करना सम्भव होता है, जबकि ठोसों में यह स्थान अत्यन्त कम होता है; अतः उन्हें संपीडित करना सम्भव नहीं होता ।
प्रश्न 11. यदि किसी कमरे के एक कोने में कोई अगरबत्ती जलाई तो कुछ समय पश्चात् उसकी सुगन्ध सारे कमरे में क्यों फैल जाती है?
उत्तर : अगरबत्ती सुगन्धित पदार्थ से बनती है। जब अगरबत्ती जलाई जाती है तो इस सुगन्धित पदार्थ के कण वायु के कणों के साथ मिश्रित हो जाते हैं। चूँकि वायु तथा सुगन्धित पदार्थ के कण तीव्र तथा अनियमित गति करते हैं; अतः ये कुछ ही देर में सम्पूर्ण कमरे में फैल जाते हैं।
प्रश्न 12. दाँतों को आइसक्रीम बर्फ के जल से ठण्डी क्यों प्रतीत होती है?
उत्तर : आइसक्रीम को पिघलने के लिए गलन की गुप्त ऊष्मा की आवश्यकता होती है जो दाँतों से अवशोषित की जाती है। इस गुप्त ऊष्मा का मान अधिक होता है, परिणामस्वरूप दाँतों को आइसक्रीम बर्फ के जल से ठण्डी प्रतीत होती है।
प्रश्न 13. गैसों में संपीड्यता के अधिक होने के तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर : गैसों में संपीड्यता के अधिक होने के तीन उपयोग निम्नलिखित हैं-
(1) अस्पतालों मरीजों को दी जाने वाली ऑक्सीजन गैस सिलिण्डरों में संपीडित की जाती है।
(2) घरेलू उपयोग की एल०पी०जी० सिलिण्डरों में संपीडित की जाती है।
(3) वाहनों के ईंधन के रूप में प्रयोग होने वाली सी०एन०जी० सिलिण्डरों में संपीडित की जाती है।
• अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. पदार्थ के भौतिक स्वरूप की आधुनिक विचारधारा क्या है?
उत्तर : पदार्थ रेत की तरह के कणों से मिलकर बनता है। ये कण अत्यन्त सूक्ष्म होते हैं।
प्रश्न 2. पोटैशियम परमैंगनेट के थोड़े-से क्रिस्टलों को जल में मिलाने पर भी जल रंगीन क्यों हो जाता है?
उत्तर : पोटैशियम परमैंगनेट के क्रिस्टलों में असंख्य अत्यन्त छोटे-छोटे कण होते हैं जो जल के अणुओं के साथ मिश्रित हो जाते हैं तथा जल रंगीन हो जाता है।
प्रश्न 3. विसरण क्या है?
उत्तर : दो विभिन्न पदार्थों के कणों का स्वतः मिलना विसरण कहलाता है।
प्रश्न 4. पदार्थ के कणों के मध्य उपस्थित आकर्षण बल का क्या प्रभाव होता है ?
उत्तर : यह आकर्षण बल कणों को परस्पर बाँधे रखता है तथा पदार्थ का आकार एवं सीमाएँ निश्चित करता है।
प्रश्न 5. ठोस पदार्थों के दो गुण बताइए।
उत्तर : ठोस पदार्थों का (i) आकार तथा (ii) आयतन निश्चित होता है।
प्रश्न 6. विभिन्न आकार के बर्तनों में रखने पर चीनी और नमक उन्हीं बर्तनों के आकार ले लेते हैं। क्या ये ठोस हैं?
उत्तर : चाहे हम चीनी या नमक को हाथ में लें या किसी बर्तन में, इनके क्रिस्टलों का आकार नहीं बदलता; अतः ये ठोस हैं।
प्रश्न 7. स्पंज ठोस है, परन्तु फिर भी इसका संपीडन सम्भव है। क्यों?
उत्तर : स्पंज में बहुत-से सूक्ष्म छिद्र होते हैं जिनमें वायु का समावेश होता है। जब हम स्पंज को दबाते हैं तो यह दब जाता है चूँकि इसके छिद्रों से वायु बाहर निकल जाती है; अतः इसका संपीडन सम्भव होता है।
प्रश्न 8. गैसों की आकृति और आयतन निश्चित क्यों नहीं होता?
उत्तर : गैसों के कण परस्पर अत्यधिक दूरी पर होते हैं। इन्हें अपने स्थान के चारों ओर गति करने की पर्याप्त स्वतन्त्रता होती है जिसके कारण इनका आकार तथा आयतन निश्चित नहीं होता।
प्रश्न 9. ठोस पदार्थ का गलनांक क्या दर्शाता है?
उत्तर : ठोस पदार्थ का गलनांक कणों के मध्य उपस्थित आकर्षण बल की सामर्थ्य को दर्शाता है।
प्रश्न 10. सामान्य दाब क्या होता है?
उत्तर : समुद्र की सतह पर वायुमण्डलीय दाब एक वायुमण्डल या ऐटमॉस्फीयर होता है। इसे ही सामान्य दाब कहा जाता है।
प्रश्न 11. कपड़ों को सुखाने के लिए उन्हें फैलाया क्यों जाता है?
उत्तर : कपड़ों का सतही क्षेत्र बढ़ाने के लिए उन्हें फैलाया जाता है जिससे वाष्पीकरण की दर बढ़ाई जा सके।
प्रश्न 12. वाष्पीकरण से क्या उत्पन्न होती है?
उत्तर : वाष्पीकरण से शीतलता उत्पन्न होती है।
प्रश्न 13. प्लाज्मा अवस्था में कण किस रूप में होते हैं?
उत्तर : इस अवस्था में कण अत्यधिक ऊर्जा वाले तथा अत्यधिक उत्तेजित होते हैं। ये कण आयनीकृत गैस के रूप में होते हैं।
प्रश्न 14. BEC किस प्रकार तैयार किया जाता है?
उत्तर : सामान्य वायु के घनत्व के एक लाखवें भाग जितने कम घनत्व वाली गैस को बहुत ही कम तापमान पर ठण्डा करने से BEC (बोस आइंस्टाइन कंडनसेट) तैयार होता है।
प्रश्न 15. गर्मियों में कुत्ते अपनी जीभ बाहर निकालकर क्यों नाम बैठते हैं?
उत्तर : कुत्तों की त्वचा में रोम छिद्र नहीं होते जिससे उन्हें पसीना नहीं आता। इसलिए वे अपनी जीभ बाहर निकालकर रखते हैं जिससे जीभ पर उपस्थित द्रव के वाष्पन से उन्हें शीतलता का अनुभव हो सके।
• एक शब्द या एक वाक्य वाले प्रश्न
प्रश्न 1. दो ऐसे पदार्थों के नाम लिखिए जो ठोस, द्रव तथा गैस तीनों अवस्थाओं में रहते हैं।
उत्तर : (i) जल तथा (ii) गन्धक।
प्रश्न 2. स्वतन्त्र अवस्था में रह सकने वाले पदार्थ का सबसे छोटा कण क्या है?
उत्तर : स्वतन्त्र अवस्था में रह सकने वाले पदार्थ का सबसे छोटा कण अणु है।
प्रश्न 3. जिस निश्चित ताप पर ठोस, द्रव में परिवर्तित होता है, उसका नाम लिखिए।
उत्तर : जिस निश्चित ताप पर ठोस, द्रव में परिवर्तित होता है, उसे ठोस का गलनांक कहते हैं।
प्रश्न 4. पदार्थ के चार उदाहरण लिखिए।
उत्तर : वायु, जल, चीनी, नमक।
प्रश्न 5. पंचतत्त्व कौन-से हैं?
उत्तर : वायु, पृथ्वी, जल, अग्नि तथा आकाश।
प्रश्न 6. पदार्थ के कण निरन्तर गतिशील क्यों रहते हैं?
उत्तर : उनमें उपस्थित गतिज ऊर्जा के कारण।
प्रश्न 7. भौतिक अवस्था के आधार पर पदार्थ की अवस्थाएँ कौन-सी होती हैं?
उत्तर : ठोस, द्रव तथा गैस ।
प्रश्न 8. विसरित होने का गुण किसमें नहीं होता?
उत्तर : ठोस पदार्थों में।
प्रश्न 9. ठोस, द्रव तथा गैस में किसकी संपीड्यता सर्वाधिक होती है?
उत्तर : गैसों की।
प्रश्न 10. घरों तथा वाहनों में ईंधन के रूप में प्रयुक्त गैसों के नाम बताइए ।
उत्तर : एल०पी०जी० तथा सी०एन०जी० ।
प्रश्न 11. जल पदार्थ की किन-किन अवस्थाओं में पाया जाता है?
उत्तर : ठोस (बर्फ), द्रव (जल) तथा गैस ( वाष्प या भाप ) ।
प्रश्न 12. पदार्थ की तीन अवस्थाओं में से किस अवस्था में कणों की गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है?
उत्तर : गैसीय अवस्था में।
प्रश्न 13. तापमान की S. I. इकाई क्या है?
उत्तर : केल्विन (K) ।
प्रश्न 14. केल्विन में जल का क्वथनांक बताइए ।
उत्तर : 373K.
प्रश्न 15. ऊर्ध्वपातन क्या है?
उत्तर : द्रव अवस्था में आए बिना किसी ठोस पदार्थ का सीधे गैस में परिवर्तित होना ऊर्ध्वपातन कहलाता है।
प्रश्न 16. शुष्क बर्फ क्या है?
उत्तर : ठोस कार्बन डाइ ऑक्साइड ।
प्रश्न 17. वाष्पन का एक उदाहरण बताइए ।
उत्तर : गीले कपड़ों का धूप में सुखना।
प्रश्न 18. आर्द्रता किसे कहते हैं?
उत्तर : वायु में उपस्थित जल वाष्पों को ।
प्रश्न 19. फ्लोरसेंट ट्यूब में क्या होता है ?
उत्तर : प्लाज्मा ।
प्रश्न 20. ठोस NH4Cl को गर्म करने पर क्या प्राप्त होता है?
उत्तर : NH4Cl की वाष्प ।
