UK Board 9th Class Social Science – (आपदा प्रबन्धन) – Chapter 6 चक्रवात
UK Board Solutions for Class 9th Social Science – सामाजिक विज्ञान – (आपदा प्रबन्धन) – Chapter 6 चक्रवात
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1 – चक्रवात क्या है?
उत्तर— चक्रवात तीव्र गति से चलने वाली चक्राकार हवाएँ हैं। इन हवाओं से एक निम्न दाब केन्द्र वाला भँवर सदृश स्वरूप निर्मित होता है, जिसमें हवाएँ तीव्र गति में बाहर से अन्दर ( केन्द्र की ओर ) की ओर चलती हैं। पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में ये पवनें घड़ी की सुइयों के विपरीत तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सुई के अनुकूल दिशा में होती हैं। चक्रवात वास्तव में वायुमण्डलीय दशाओं के कारण उत्पन्न एक पर्यावरणीय आपदा भी है जिसके बनने में समय लगता है किन्तु आगमन आकस्मिक होता है।

प्रश्न 2 – चक्रवात के विशिष्ट प्रभावों का वर्णन कीजिए।
अथवा चक्रवात से कौन से तत्त्व मुख्य रूप से प्रभावित होते हैं? उल्लेख कीजिए |
उत्तर – चक्रवात ‘वायुमण्डलीय जलवायु दशाओं के कारण उत्पन्न पर्यावरणीय विपत्ति है। इसके प्रभाव से भौतिक सम्पदा ही नहीं वरन् जान-माल की भी भारी क्षति होती है । सामान्यतः इस विपत्ति के निम्नलिखित विशिष्ट प्रभाव देखे जा सकते हैं-
- यातायात व संचार – चक्रवात में तीव्रगति की हवाओं व मूसलाधार वर्षा के कारण बिजली व टेलीफोन के खम्भे गिर जाते हैं और यातायात अवरुद्ध हो जाता है तथा संचार प्रणाली ठप हो जाती है।
- जान और माल का नुकसान – चक्रवात के रास्ते में पड़ने वाली भौतिक एवं जैविक सम्पदा नष्ट हो जाती है, चाहे वह मनुष्य हों, पशु हो, पक्षी हो अथवा भवनों का ढाँचा।
- जलपोतों को सर्वाधिक हानि – जलपोत जो विस्तृत समुद्र में तैर रहे होते हैं उन्हें अत्यधिक नुकसान होता है तथा लंगर डाले खड़े जलपोत भी काफी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। कभी-कभी बन्दरगाह भी चक्रवात के कारण नष्ट हो जाते हैं।
- फसलें – चक्रवात से खड़ी कृषि फसलों को अपार हानि होती है। केले तथा नारियल के बागों का सर्वाधिक नुकसान होता है।
- जन स्वास्थ्य पर असर – चक्रवात मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा उत्पन्न करते हैं। वायरल व महामारी का प्रकोप हो जाता है, मलेरिया और पेचिश जैसे रोग तेजी से फैलने लगते हैं।
प्रश्न 3 – चक्रवात के न्यूनीकरण की मुख्य युक्तियाँ समझाइए ।
उत्तर- चक्रवात न्यूनीकरण की युक्तियाँ
- चक्रवात सम्भावित क्षेत्रों में समुद्र से निकली भूमि पर नुकीली पत्तियों वाले पेड़ों की हरित पट्टी का विस्तार।
- समुद्रतटीय भाग में विस्तृत भू-भाग पर ऊँचे चबूतरे, तटबन्ध आदि का निर्माण।
- तटीय क्षेत्रों में घास-फूस की छतों वाले कच्चे घर बनाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए बल्कि इनके स्थान पर निश्चित विशेषताओं वाले मकान ही बनाए जाएँ ।
- चक्रवात सम्भावित क्षेत्रों में सरकार को मकान बनाने के लिए समुचित मार्गदर्शन तथा ऋण सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए।
- सम्भावित क्षेत्रों में विशेष प्रकार के शरण-स्थल बनवाए जाने चाहिए जिनसे राहत एवं बचाव दल को सुविधा प्राप्त होगी ।
प्रश्न 4- भारत के मानचित्र में चक्रवात से प्रभावित क्षेत्रों को चिह्नित कीजिए ।
उत्तर – निम्नांकित चित्र 6.2 का अवलोकन कीजिए।
