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UP Board Class 10 Hindi Chapter 1 – काव्य सौन्दर्य के तत्त्व ( रस, अलंकार, छन्द) (व्याकरण)

UP Board Class 10 Hindi Chapter 1 – काव्य सौन्दर्य के तत्त्व ( रस, अलंकार, छन्द) (व्याकरण)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 1 काव्य सौन्दर्य के तत्त्व ( रस, अलंकार, छन्द) (व्याकरण)

महत्त्वपूर्ण बिन्दु व परिभाषाएँ
(क) रस
काव्य को पढ़ने, सुनने या उस पर आधारित अभिनय देखने से मन में (अर्थात् सहृदय को) जो आनन्द प्राप्त होता है, उसे रस कहते हैं। भरतमुनि के अनुसार, “विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है। “
रसों के स्थायी भाव
क्र.सं. स्थायी भाव रस  अर्थ
1. रति/प्रेम श्रृंगार रस स्त्री-पुरुष का प्रेम
2. शोक करुण रस प्रिय के वियोग या हानि के कारण शोक भाव
3. निर्वेद शान्त रस संसार के प्रति उदासीन भाव
4. क्रोध रौद्र रस किसी कार्य की असफलता के कारण उत्पन्न भाव
5. उत्साह वीर रस दया, दान, वीरता आदि के सम्बन्ध में प्रसन्नता का भाव
6. हास हास्य रस अंगों या वाणी के विकास से उत्पन्न उल्लास, हँसी
7. भय भयानक रस भयानक जीव या वस्तु को देखकर मन में उत्पन्न डर
8. जुगुप्सा/घृणा/ग्लानि वीभत्स रस घिनौने पदार्थ से मन में ग्लानि उत्पन्न होना; दूसरों द्वारा की जाने वाली निन्दा
9. विस्मय/आश्चर्य अद्भुत रस आकर्षक वस्तु देखकर मन में उत्पन्न आश्चर्य का भाव
10. वत्सलता/स्नेह वात्सल्य रस माता-पिता का सन्तान के प्रति प्रेम भाव
11. देव विषयक् रति/अनुराग भक्ति रस ईश्वर के प्रति मन में उत्पन्न प्रेम भाव
रस के भेद
रस के मुख्यतः ग्यारह भेद होते हैं-श्रृंगार, करुण, शान्त, रौद्र, वीर, हास्य, भयानक, वीभत्स, अद्भुत, वात्सल्य, भक्ति आदि ।
नोट माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम में केवल ‘हास्य’ और ‘करुण रस को सम्मिलित किया गया है। अतः यहाँ इन्हीं को विस्तारपूर्वक दिया जा रहा है। इसके लिए 2 अंक निर्धारित हैं।
हास्य रस
किसी पदार्थ या व्यक्ति की आकृति, वेशभूषा, चेष्टा आदि को देखकर सहृदय में जो विनोद का भाव जाग्रत होता है, उसे हास कहा जाता है। यही हास जब विभाव, अनुभाव तथा संचारी भावों से पुष्ट हो जाता है, तो उसे ‘हास्य रस’ कहते हैं।
उदाहरण
“गोपियाँ कृष्ण को बाला बना,
बृष भावन के भवन चली मुसकाती
वहाँ उनको निज सजनि बता,
रहीं उसके गुणों को बतलातीं ।
स्वागत में उठ राधा ने ज्यों,
निज कंठ लगाया तो वे थीं ठठातीं
‘होली है, होली है’ कहके भी
सब भेद बताकर खूब हँसातीं।”
उपरोक्त उदाहरण में, कृष्ण का गोपी रूप धारण करना आलम्बन है तथा गोपियाँ आश्रय हैं। होली के त्योहार का वातावरण उद्दीपन विभाव है। गोपियों का हँसना, मुस्काना, कृष्ण की चेष्टाएँ अनुभाव हैं तथा लज्जा, हर्ष, चपलता आदि संचारी भाव हैं। इस प्रकार यहाँ ‘हास’ स्थायी भाव के कारण हास्य रस की उत्पत्ति हुई है।
करुण रस
जब प्रिय व्यक्ति या मनचाही वस्तु के नष्ट होने या उसका कोई अनिष्ट होने पर . हृदय शोक से भर जाए, तब ‘करुण रस’ जाग्रत होता है। इसमें विभाव, अनुभाव व संचारी भावों के मेल से शोक स्थायी भाव का जन्म होता है।
उदाहरण
” मेरे हृदय के हर्ष हा!
अभिमन्यु अब तू है कहाँ?”
उपरोक्त उदाहरण में, द्रौपदी अभिमन्यु की मृत्यु के दुःख में डूबी हुई हैं। यहाँ द्रौपदी आश्रय हैं, अभिमन्यु का मृत शरीर आलम्बन है तथा शोकाकुल वातावरण उद्दीपन है। रोना, विलाप करना अनुभाव है। द्रौपदी का अभिमन्यु को याद करना तथा बीच-बीच में जड़ (स्थिर) हो जाना इत्यादि संचारी भाव हैं। इस प्रकार यहाँ ‘शोक’ स्थायी भाव के कारण करुण रस की उत्पत्ति हुई है।
बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. रस सिद्धान्त के आदि प्रवर्तक कौन हैं?
(a) भरतमुनि
(b) भानुदत्त
(c) विश्वनाथ
(d) भामह
उत्तर (a) भरतमुनि
प्रश्न 2. आचार्य भरत ने कितने रसों का उल्लेख किया है?
(a) सात
(b) आठ
(c) नौ
(d) दस
उत्तर (b) आठ
प्रश्न 3. काव्यशास्त्र में हास्य के कितने भेद माने गए हैं?
(a) छ:
(b) सात
(c) चार
(d) दो
उत्तर (a) छ:
प्रश्न 4. काव्यशास्त्र के अनुसार, रसों की सही संख्या है
(a) आठ
(b) नौ
(c) दस
(d) ग्यारह
उत्तर (b) नौ
प्रश्न 5. संचारी भावों की संख्या है।
(a) 27
(b) 29
(c) 31
(d) 33
उत्तर (d) 33
प्रश्न 6. भक्ति रस की स्थापना किसने की?
(a) भरत ने
(b) विश्वनाथ ने
(c) रूपगोस्वामी ने
(d) मम्मट ने
उत्तर (c) रूपगोस्वामी ने
प्रश्न 7. कौन-सा संचारी भाव करुण रस का नहीं है?
(a) मोह
(b) औत्सुक्य
(c) जड़ता
(d) ग्लानि
उत्तर (b) औत्सुक्य
प्रश्न 8. रस का नाम बताइए।
“जथा पंख बिनु खग अति दीना । मनि बिनु फन करिबर कर हीना । ।
अस मम जीवन बन्धु बिन तोही । जौ जड़ दैव जियावह माही ।। “
(a) शान्त रस
(b) भक्ति रस
(c) वीर रस
(d) करुण रस
उत्तर (d) करुण रस
प्रश्न 9. रस का नाम बताइए।
“बिन्ध्य के बासी उदासी तपोव्रतधारी महा बिनु नारि दुखारे ।
गोतमतीय तरी, तुलसी, सो कथा सुनि भे मुनिबृन्द सुखारे । ।
सिला सब चन्द्रमुखी परसे पद मंजुल कंज तिहारे ।
कहीं भली रघुनायकज़ू करुना करि कानन को पगु धारे।। “
(a) हास्य रस
(b) शृंगार रस
(c) वीर रस
(d) करुण रस
उत्तर (a) हास्य रस
प्रश्न 10. करुण रस का स्थायी भाव क्या है?
(a) उत्साह
(b) शोक
(c) रति
(d) हास्य
उत्तर (b) शोक
प्रश्न 11. हास्य रस का स्थायी भाव क्या है?
(a) रति
(b) हास
(c) निर्वेद
(d) विस्मय
उत्तर (b) हास
प्रश्न 12. “नाना वाहन नाना वेशा, बिहसे सिव समाज निज देखा ।
कोऊ मुहीन बिपुल मुख काहू, बिनु पद-कर कोऊ बहु बाहू ||”
उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा रस है?
(a) करुण रस
(b) वीर रस
(c) शान्त रस
(d) हास्य रस
उत्तर (d) हास्य रस
प्रश्न 13. “हा! रघुनन्दन प्रेम परीते ।
तुम बिन जियत बहुत दिन बीते ।।”
उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है
(a) वीर रस
(b) हास्य रस
(c) करुण रस
(d) रौद्र रस
उत्तर (c) करुण रस
प्रश्न 14. “हाथी जैसी देह है, गैंडे जैसी खाल।
तरबूजे – सी खोपड़ी, खरबूजे से गाल । “
उपर्युक्त पंक्तियों में कौन-सा रस है?
(a) वीर रस
(b) करुण रस
(c) श्रृंगार रस
(d) हास्य रस
उत्तर (d) हास्य रस
प्रश्न 15. रस के कितने अंग होते हैं?
(a) पाँच
(b) चार
(c) तीन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (b) चार
प्रश्न 16. ‘विन्ध्य के वासी उदासी तपोव्रतधारी महाबिनु नारि दुःखारे’ पंक्ति में कौन-सा रस है?
(a) करुण रस
(b) हास्य रस
(c) श्रृंगार रस
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (b) हास्य रस
प्रश्न 17. ‘निर्वेद’ स्थायी भाव है
(a) हास्य रस का
(b) करुण रस का
(c) शान्त रस का
(d) अद्भुत रस का
उत्तर (c) शान्त रस का
प्रश्न 18. “पुनि पुनि मुनि उकसहि अकुलाहीं ।
देखि दसा हर-गन मुसकाहीं।।”
उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है
(a) वीर रस
(b) हास्य रस
(c) करुण रस
(d) वात्सल्य रस
उत्तर (b) हास्य रस
(ख) अलंकार
अर्थ एवं परिभाषा
‘अलंकार’ दो शब्दों ‘अलम्’ तथा ‘कार’ से मिलकर बना है। अलम् का अर्थ ‘भूषण या सजावट तथा कार का अर्थ ‘करने वाला’ होता है अर्थात् जो अलंकृत या भूषित करे, वह अलंकार है। जिस प्रकार आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं, वैसे ही अलंकार के प्रयोग से काव्य में चमत्कार, सौन्दर्य और आकर्षण उत्पन्न हो जाता है।
अलंकार के प्रकार/भेद
  • अलंकार मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं- शब्दालंकार, अर्थालंकार व उभयालंकार। अनुप्रास, यमक और श्लेष प्रमुख शब्दालंकार हैं।
उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, दृष्टान्त, मानवीकरण इत्यादि प्रमुख अर्थालंकार हैं।
नोट नवीनतम पाठ्यक्रम के अन्तर्गत ‘उपमा’, ‘रूपक’ और ‘उत्प्रेक्षा’ अलंकार को ही सम्मिलित किया गया है। अतः नीचे इन्हीं को विस्तारपूर्वक दिया जा रहा है।
उपमा अलंकार
परिभाषा जब किसी वस्तु का वर्णन करने के लिए उससे अधिक प्रसिद्ध वस्तु से गुण, धर्म आदि के आधार पर उसकी समानता की जाती है, तब ‘उपमा अलंकार’ होता है। अन्य शब्दों में, जहाँ पर उपमेय की उपमान से किसी समान धर्म के आधार पर तुलना की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है।
उपमा अलंकार के चार अंग होते हैं।
(i) उपमेय जिसकी उपमा दी जाए।
(ii) उपमान जिससे उपमा दी जाए।
(iii) समान धर्म उपमेय-उपमान की एकसमान विशेषता ।
(iv) वाचक शब्द समानता प्रकट करने वाले शब्द, जैसे-सा, सम, आदि।
उदाहरण
(i) मुख मयंक सम मंजु मनोहर ।
  • इस काव्य पंक्ति में ‘ मुख’ उपमेय है, ‘चन्द्रमा’ उपमान है, ‘मनोहर’ समान धर्म है तथा ‘सम’ वाचक शब्द होने से उपमा अलंकार परिपुष्ट हो रहा है।
(ii) प्रातः नम था, बहुत नीला शंख जैसे।
  • इस काव्य पंक्ति में ‘नभ’ की उपमा ‘शंख’ से दी जा रही है। यहाँ ‘शंख” ‘उपमान’ है, ‘नभ’ उपमेय है तथा ‘नीला’ समान धर्म है। यहाँ ‘जैसे’ समानतावाचक शब्द का प्रयोग हुआ है। इसलिए यहाँ उपमा अलंकार परिपुष्ट हो रहा है।
रूपक अलंकार
परिभाषा जब उपमेय और उपमान में भेद होते हुए भी दोनों में अभिन्नता प्रकट की जाए और उपमेय को उपमान के रूप में दिखाया जाए, तो रूपक अलंकार होता है।
उदाहरण
(i) चरण कमल बन्दौ हरिराई ।
  • इस काव्य पंक्ति में उपमेय ‘चरण’ पर उपमान ‘कमल’ का आरोप कर दिया गया है। दोनों में अभिन्नता है, दोनों एक हैं। इस अभेदता के कारण यहाँ रूपक अलंकार है।
(ii) उदित उदयगिरि मंच पर, रघुवर बाल पतंग।
बिकसे सन्त- सरोज सब, हरषे लोचन भृंग ।।
  • उपर्युक्त काव्य में ‘उदयगिरी’ पर ‘मंच’ का ‘रघुवर’ पर ‘बाल-पतंग (सूर्य)’ का, ‘सन्तों’ पर ‘सरोज (कमल) का तथा ‘लोचन’ (नेत्र) पर ‘भृंग (भौरों) का मेद रहित आरोप होने से रूपक अलंकार है।
उत्प्रेक्षा अलंकार
परिभाषा जब उपमान से भिन्नता जानते हुए भी उपमेय में उपमान की सम्भावना व्यक्त की जाती है, तब ‘उत्प्रेक्षा अलंकार’ होता है। इसमें प्रायः मनु, मानो, मनौ, मनहुँ, जनु, जानो, निश्चय जैसे वाचक शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण
(i) सोहत ओढ़े पीत- पटु स्याम सलोने गात ।
मनहुँ नीलमणि सैल पर आतपु पर्यो प्रभात ।।
  • इस काव्यांश में श्रीकृष्ण के श्यामल शरीर पर नीलमणि पर्वत की तथा पीत-पट पर प्रातः कालीन धूप की सम्भावना व्यक्त की गई है। अतः यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।
(ii) चली मनो आँगन कठि, ताते रातें पायँ ।
  • इस काव्य पंक्ति में चरणों के लाल होने का कारण बताते हुए कहा गया है मानो कठोर आँगन में चली हो, इसलिए पैर लाल हो गए होंगे। अतः यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।
बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. अलंकार का शाब्दिक अर्थ है
(a) आभूषण
(b) आकर्षण
(c) सौन्दर्य
(d) प्रकृति
उत्तर (a) आभूषण
प्रश्न 2. अलंकार कितने प्रकार के होते हैं?
(a) चार
(b) दो
(c) तीन
(d) पाँच
उत्तर (c) तीन
प्रश्न 3. ‘वह दीपशिखा सी शान्त भाव में लीन’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(a) उपमा अलंकार
(b) उभयालंकार
(c) रूपक अलंकार
(d) अनुप्रास अलंकार
उत्तर (a) उपमा अलंकार
प्रश्न 4. ‘जान पड़ता है नेत्र देख बड़े-बड़े हीरकों में गोल नीलम हैं जड़े’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(a) रूपक अलंकार
(b) उपमा अलंकार
(c) उत्प्रेक्षा अलंकार
(d) अनुप्रास अलंकार
उत्तर (c) उत्प्रेक्षा अलंकार
प्रश्न 5. उपमा अलंकार के कितने अवयव या अंग होते हैं?
(a) तीन
(b) पाँच
(c) छ:
(d) चार
उत्तर (d) चार
प्रश्न 6. ‘अंबर – पनघट में डुबो रही तारा-घट उषा नागरी’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(a) उपमा अलंकार
(b) रूपक अलंकार
(c) उत्प्रेक्षा अलंकार
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (b) रूपक अलंकार
प्रश्न 7. जब उपमेय और उपमान में भेद होते हुए भी दोनों में अभिन्नता प्रकट की जाए, तब वहाँ कौन-सा अलंकार होता है?
(a) उत्प्रेक्षा अलंकार
(b) रूपक अलंकार
(c) उपमा अलंकार
(d) अनुप्रास अलंकार
उत्तर (b) रूपक अलंकार
प्रश्न 8. जो वाक्य में प्रयुक्त होकर उसके अर्थ को चमत्कृत या अलंकृत करते हैं, वे कहलाते
(a) शब्दालंकार
(b) उभयालंकार
(c) अर्थालंकार
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (c) अर्थालंकार
प्रश्न 9. ‘पीपर पात सरिस मन डोला ।’ पंक्ति में अलंकार है
(a) रूपक
(b) उपमा
(c) उत्प्रेक्षा
(d) अनुप्रास
उत्तर (b) उपमा
प्रश्न 10. मनहुँ, मानो, जनु, जानो आदि वाचक शब्द किस अलंकार में प्रायः प्रयुक्त होते हैं?’
(a) उत्प्रेक्षा
(b) रूपक
(c) उपमा
(d) यमक
उत्तर (a) उत्प्रेक्षा
प्रश्न 11. ‘यहीं कहीं पर बिखर गई वह, भग्न विजयमाला-सी’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(a) उपमा अलंकार
(b) उत्प्रेक्षा अलंकार
(c) रूपक अलंकार
(d) श्लेष अलंकार
उत्तर (a) उपमा अलंकार
प्रश्न 12. “सोहत ओढ़े पीत पटु श्याम सलोने गात ।
मनो नीलमणि शैल पर आतप पर्यो प्रभात ।।”
उपर्युक्त पंक्तियों में अलंकार है
(a) उपमा
(b) रूपक
(c) उत्प्रेक्षा
(d) यमक
उत्तर (c) उत्प्रेक्षा
प्रश्न 13. ‘ज्यौं आँखिनु सब देखिये, आँख न देखी जाँहि । ‘ उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(a) उपमा अलंकार
(b) रूपक अलंकार
(c) श्लेष अलंकार
(d) उत्प्रेक्षा अलंकार
उत्तर (d) उत्प्रेक्षा अलंकार
प्रश्न 14. “उस काल मारे क्रोध के तन काँपने उनका लगा।
मानो हवा के वेग से, सोता हुआ सागर जगा । “
उपर्युक्त रेखांकित पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
(a) उपमा अलंकार
(b) रूपक अलंकार
(c) श्लेष अलंकार
(d) उत्प्रेक्षा अलंकार
उत्तर (d) उत्प्रेक्षा अलंकार
प्रश्न 15. ‘पायो जी मैंने राम रतन धन पायो’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(a) उपमा अलंकार
(b) रूपक अलंकार
(c) उत्प्रेक्षा अलंकार
(d) यमक अलंकार
उत्तर (b) रूपक अलंकार
प्रश्न 16. जहाँ उपमेय में उपमान की समानता प्रकट की जाए वहाँ अलंकार होता है [2024]
(a) उपमा
(b) रूपक
(c) उत्प्रेक्षा
(d) सन्देह
उत्तर (a) उपमा
प्रश्न 17. आहुति-सी गिर पड़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(a) अनुप्रास अलंकार
(b) उपमा अलंकार
(c) श्लेष अलंकार
(d) रूपक अलंकार
उत्तर (b) उपमा अलंकार
प्रश्न 18. ‘चरण कमल बंदौ हरि राई’ पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है।
(a) उपमा
(b) उत्प्रेक्षा
(c) रूपक
(d) यमक
उत्तर (c) रूपक
प्रश्न 19. ‘मुख चन्द्रमा-सा सुन्दर है’ पंक्ति में अलंकार है
(a) उपमा
(b) रूपक
(c) उत्प्रेक्षा
(d) यमक
उत्तर (a) उपमा
प्रश्न 20. ‘गिरि-सा ऊँचा हो जिसका मन पंक्ति में अलंकार है
(a) उत्प्रेक्षा अलंकार
(b) रूपक अलंकार
(c) उपमा अलंकार
(d) अनुप्रास अलंकार
उत्तर (c) उपमा अलंकार
प्रश्न 21. ‘शशि- मुख पर घूँघट डाले, अंचल में दीप छिपाए पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(a) रूपक
(b) समक
(c) उपमा
(d) उत्प्रेक्षा
उत्तर (a) रूपक
प्रश्न 22. ‘अपलक नभ नील नयन विशाल’ में अलंकार है
(a) उपमा
(b) उत्प्रेक्षा
(c) सन्देह
(d) रूपक
उत्तर (d) रूपक
प्रश्न 23. ‘चित्रकूट जनु अचल अहेरी पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(a) रूपक
(b) उपमा
(c) उत्प्रेक्षा
(d) अपहुति
उत्तर (c) उत्प्रेक्षा
(ग) छन्द
अर्थ एवं परिभाषा
‘छन्द’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है-‘बन्धन’। जब वर्णों की संख्या, क्रम, मात्रा – गणना, तुक तथा यति-गति आदि नियमों को ध्यान में रखकर शब्द योजना की जाती है, उसे ‘छन्द’ कहते हैं।
छन्द के भेद
सामान्यतः वर्ण और मात्रा के आधार पर छन्दों के निम्न तीन भेद होते हैं
  1. वर्णिक छन्द जिन छन्दों में केवल वर्णों की संख्या और नियमों का पालन किया जाता है, वे ‘वर्णिक छन्द’ कहलाते हैं। द्रुतविलम्बित, मन्द्राक्रान्ता, घनाक्षरी, रूपघनाक्षरी, देवघनाक्षरी, मुक्तक, दण्डक, सवैया आदि वर्णिक छन्द हैं।
  2. मात्रिक छन्द यह छन्द मात्रा की गणना पर आधारित होता है, इसीलिए इसे .’ मात्रिक छन्द’ कहा जाता है। जिन छन्दों में मात्राओं की समानता के नियम का पालन किया जाता है, किन्तु वर्णों की समानता पर ध्यान नहीं दिया जाता, उन्हें मात्रिक छन्द कहा जाता है। दोहा, रोला, सोरठा, चौपाई, हरिगीतिका, छप्पय आदि प्रमुख मात्रिक छन्द हैं।
  3. मुक्त छन्द इन छन्दों को स्वच्छन्द छन्द भी कहा जाता है। इनमें मात्रा और वर्णों की संख्या निश्चित नहीं होती ।
नोट नवीनतम पाठ्यक्रम में केवल ‘सोरठा’ तथा ‘रोला’ छन्द शामिल किए गए हैं। अत: आगे इन्हें ही विस्तारपूर्वक दिया जा रहा है।
सोरठा छन्द
सोरठा ( परिभाषा / लक्षण / पहचान एवं उदाहरण)
परिभाषा दोहे का उल्टा रूप ‘सोरठा’ कहलाता है। यह एक अर्द्धसम मात्रिक छन्द है अर्थात् इसके पहले और तीसरे तथा दूसरे और चौथे चरणों में मात्राओं की संख्या समान रहती है। इसके विषम (पहले और तीसरे) चरणों में 11-11 और सम (दूसरे और चौथे) चरणों में 13-13 मात्राएँ होती हैं। तुक विषम चरणों में ही होता है तथा सम चरणों के अन्त में जगण (।ऽ।) का निषेध होता है।
उदाहरण
ऽ । ऽ ।     ऽ ऽ ।    ऽ।   । ऽ  । । । ।    । । ।
“मूक होइ वाचाल, पंगु   चदै  गिरिवर  गहन ।
ऽ । । ऽ   ।। ऽ ।   । ऽ    । । ।    । । । ।      । । ।
जासु कृपा सु दयाल, द्रवौ सकल कलिमल दहन । । “
स्पष्टीकरण
उपरोक्त उदाहरण के पहले (मूक होइ वाचालं) और तीसरे (जासु कृपा सु दयाल ) चरण में ग्यारह – ग्यारह मात्राएँ हैं तथा दूसरे (पंगु चदै गिरिवर गहन) और चौथे (द्रव सकल कलिमल दहन) चरण में तेरह-तेरह मात्राएँ हैं। विषम चरणों में तुक है तथा सम चरणों में जगण (।ऽ।) नहीं है। अतः यह सोरठा छन्द का उदाहरण है।
रोला छन्द
रोला ( परिभाषा / लक्षण / पहचान एवं उदाहरण )
परिभाषा रोला एक सम मात्रिक छन्द है अर्थात् इसके प्रत्येक चरण में मात्राओं की संख्या समान रहती है। इसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं तथा ग्यारह और तेरह मात्राओं पर यति होती है।
उदाहरण
ऽ ।      ऽ । ।     ऽ । ।     ऽ । । ।     । । । ।    ऽ । ।
“कोउ  पापिह   पंचत्व,   प्राप्त सुनि  जमगन  धावत
। ।      । ।        ऽ । ।   ऽ ।   । । ।    ऽ ऽ ।    । ऽ। ।
बनि    बनि       बावन वीर,  बढ़त    चौचंद   मचावत
ऽ । ।   ऽ ऽ    ऽ ।    । । । ऽ    ऽ      । ।         ऽ । ।
पै तकि ताकी लोथ, त्रिपथगा   के     तट        लावत
ऽ  ऽ  ऽ । ।  ऽ ।      ऽ ।      ऽ । ।        । ।  ऽ । ।
नौ द्वै   ग्यारह होत,  तीन      पाँचहिं    बिसरावत ।। “
स्पष्टीकरण
उपरोक्त उदाहरण में चार चरण हैं और प्रत्येक चरण में चौबीस मात्राएँ हैं। ग्यारह और तेरह मात्राओं पर यति है। अतः यह रोला छन्द का उदाहरण है।
बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. हिन्दी साहित्य में छन्दशास्त्र की दृष्टि से पहली कृति कौन-सी है ?
(a) छन्दमाला
(b) छन्दसार
(c) छन्दोर्णव पिंगल
(d) छन्दविचार
उत्तर (a) छन्दमाला
प्रश्न 2. छन्द को पढ़ते समय आने वाले विराम को क्या कहते हैं?
(a) गति
(b) यति
(c) तुक
(d) गण
उत्तर (b) यति
प्रश्न 3. गणों की सही संख्या है।
(a) छ:
(b) आठ
(c) दस
(d) बारह
उत्तर (b) आठ
प्रश्न 4. चार चरणों में समान मात्राओं वाले छन्द को क्या कहते हैं?
(a) सम मात्रिक छन्द
(b) विषम मात्रिक छन्द
(c) अर्द्धसम मात्रिक छन्द
(d) ये सभी
उत्तर (a) सम मात्रिक छन्द
प्रश्न 5. छन्द कितने प्रकार के होते हैं?
(a) चार
(b) तीन
(c) पाँच
(d) दो
उत्तर (b) तीन
प्रश्न 6. कोई भी छन्द विभक्त रहता है
(a) यति में
(b) चरणों में
(c) ‘a’ और ‘b’ दोनों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (c) ‘a’ और ‘b’ दोनों में
प्रश्न 7. छन्द में प्रयुक्त अक्षर को क्या कहा जाता है?
(a) व्यंजन
(b) चरण
(c) मात्रा
(d) वर्ण
उत्तर (d) वर्ण
प्रश्न 8. छन्दशास्त्र में वर्ण हैं
(a) तीन प्रकार के
(b) दो प्रकार के
(c) चार प्रकार के
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (b) दो प्रकार के
प्रश्न 9. छन्द शब्द का सर्वप्रथम उल्लेख किसमें मिलता है?
(a) अथर्ववेद
(b) ऋग्वेद
(c) यजुर्वेद
(d) सामवेद
उत्तर (b) ऋग्वेद
प्रश्न 10. छन्द का शाब्दिक अर्थ है
(a) बन्धन
(b) आभूषण
(c) चमत्कार
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (a) बन्धन
प्रश्न 11. ‘सोरठा’ छन्द में कितने चरण होते हैं?
(a) चार
(b) दो
(c) तीन
(d) एक
उत्तर (a) चार
प्रश्न 12. ‘यह सम मात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती है। ‘ 11 और 13 मात्राओं पर यति होती है। यह लक्षण किस छंद का है ?
(a) रोला
(b) दोहा
(c) सोरठा
(d) बरवै
उत्तर (a) रोला
प्रश्न 13. “लिखकर लोहित लेख, डूब गया दिनमणि अहा ।
व्योम सिन्धु सखि देख, तारक बुदबुद दे रहा ।।”
उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त छन्द है
(a) रोला
(b) दोहा
(c) बरवै
(d) सोरठा
उत्तर (d) सोरठा
प्रश्न 14. रोला किस प्रकार का छन्द है?
(a) विषम मात्रिक
(b) अर्द्धसम मात्रिक
(c) सममात्रिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (c) सममात्रिक
प्रश्न 15. रोला छन्द में कुल कितने चरण होते हैं?
(a) तीन
(b) दो
(c) चार
(d) पाँच
उत्तर (c) चार
प्रश्न 16. ‘रोला’ छन्द के प्रत्येक चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं ?
(a) 24
(b) 16
(c) 13
(d) 11
उत्तर (a) 24
प्रश्न 17. सुनि केवट के बैन, प्रेम लपेटे अटपटे ।
हसे करुना ऐन, चितइ जानकी लखन तनु ।
उपर्युक्त पंक्तियों में छन्द है
(a) रोला
(b) सोरठा
(c) सवैया
(d) कुण्डलियाँ
उत्तर (b) सोरठा
प्रश्न 18. ‘सोरठा’ छन्द के पहले एवं तीसरे चरण में मात्राएँ होती हैं
(a) 13-11 मात्राएँ
(b) 11-13 मात्राएँ
(c) 11-11 मात्राएँ
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (c) 11-11 मात्राएँ
प्रश्न 19. “जो सुमिरत सिधि होइ, गननायक करिबर बदन ।
करउ अनुग्रह सोइ, बुद्धि रासि शुभ गुन सदन । ।
उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त छन्द है
(a) सोरठा
(b) दोहा
(c) रोला
(d) कुण्डलिया
उत्तर (a) सोरठा
प्रश्न 20. सोरठा के पहले चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं?
(a) 13
(b) 12
(c) 11
(d) 16
उत्तर (c) 11
प्रश्न 21. ‘सोरठा छन्द’ के दूसरे और चौथे चरण में मात्राएँ होती हैं?
(a) 11
(b) 16
(c) 12
(d) 13
उत्तर (d) 13
प्रश्न 22. ‘दोहा’ छन्द का ठीक उल्टा छन्द कौन-सा है?
(a) चौपाई
(b) रोला
(c) सोरठा
(d) बरवै
उत्तर (c) सोरठा

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