UP Board Class 10 Hindi Chapter 8 – पत्र लेखन (व्याकरण)
UP Board Class 10 Hindi Chapter 8 – पत्र लेखन (व्याकरण)
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 8 पत्र लेखन (व्याकरण)
पत्र लेखन वह कला है, जिसमें व्यक्ति विभिन्न कार्यों और सूचनाओं के लिए एक-दूसरे को पत्र लिखते हैं। इस प्रकार पत्र के माध्यम से लोग एक-दूसरे को अपने विचारों व अभिव्यक्तियों का आदान-प्रदान करते हैं। अतः अपने सगे-सम्बन्धियों, पदाधिकारियों, मित्रों, सम्पादकों आदि से जोड़ने की कला पत्र लेखन कहलाती है। पत्र लेखन हमारे जीवन का महत्त्वपूर्ण अंग है, जो लोगों को समाज से जोड़कर रखता है।
पत्र के प्रकार
पत्र सामान्यतः दो प्रकार के होते हैं
1. औपचारिक पत्र (Formal Letters)
2. अनौपचारिक पत्र ( Informal Letters)
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पत्र लिखने के लिए ध्यान देने योग्य बातें
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औपचारिक पत्र
प्रधानाचार्य, पदाधिकारियों, व्यापारियों, ग्राहकों, पुस्तक विक्रेता, सम्पादक आदि को लिखे गए पत्र ‘औपचारिक पत्र’ कहलाते हैं। औपचारिक पत्र उन लोगों को लिखे जाते हैं, जिनसे हमारा निजी या पारिवारिक सम्बन्ध नहीं होता है।
औपचारिक पत्रों को निम्नलिखित वर्ग में विभाजित किया जा सकता है।
1. आवेदन पत्र / प्रार्थना-पत्र
2. कार्यालयी पत्र
3. सम्पादकीय पत्र
4. शिकायती पत्र
5. व्यावसायिक पत्र
औपचारिक पत्र के सम्बोधन, अभिवादन तथा अभिनिवेदन
| पत्र के प्रकार | पत्र पाने वाले | सम्बोधन | अभिवादन अभिनिवेदन |
| आवेदन-पत्र/प्रार्थना-पत्र | प्रधानाचार्य, सम्बन्धित अधिकारी | महोदय, महोदया, मान्यवर | आपका, कृपाकांक्षी, भवदीय |
| कार्यालयी पत्र | सम्बन्धित अधिकारी | मान्यवर, महोदय | भवदीय, विनीत |
| सम्पादकीय पत्र | सम्पादक | महोदय, महोदया | भवदीय/भवदीया, प्रार्थी |
| शिकायती पत्र | सम्बन्धित अधिकारी | महोदय, महोदया | भवदीय, भवदीया, प्रार्थी |
| व्यावसायिक पत्र | पुस्तक विक्रेता, बैंक प्रबन्धक, व्यावसायिक संस्था | श्रीमान, महोदय | भवदीय, आपका |
औपचारिक पत्रों के उदाहरण
I. प्रार्थना-पत्र/आवेदन-पत्र
प्रार्थना-पत्र/आवेदन-पत्र विद्यालय के प्रधानाचार्य, संस्थाओं के प्रधान (प्रमुख) इत्यादि को लिखा जाता है। इसमें शालीन भाषा तथा शिष्ट शैली का प्रयोग किया जाता है। इन पत्रों में अभिवादन का अभाव होता है।
1. आपके विद्यालय के पुस्तकालय में हिन्दी की पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं का अभाव है। इन्हें मँगवाने का अनुरोध करते हुए अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को पत्र लिखिए ।
परीक्षा भवन,
लखनऊ।
दिनांक 12 मार्च 20XX
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
केन्द्रीय विद्यालय,
जनकपुरी, आगरा।
विषय पुस्तकालय में हिन्दी के प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकें मँगवाने के लिए पत्र ।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय की दसवीं ‘अ’ कक्षा का छात्र हूँ। इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान हमारे विद्यालय के पुस्तकालय में हिन्दी के प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकों तथा कुछ पत्र-पत्रिकाओं के अभाव की ओर दिलाना चाहता हूँ। विद्यालय के पुस्तकालय में विभिन्न प्रकार की पुस्तकें हैं, लेकिन हिन्दी के प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकें न के बराबर हैं। जो पुस्तकें उपलब्ध हैं, वे भी पिछले पाँच साल पुरानी हैं। हिन्दी साहित्य के इतिहास को जानने-समझने के लिए प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकों की आवश्यकता होती है। ये पुस्तकें हिन्दी के विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी हैं। साथ ही देश – विदेश की जानकारी के लिए तथा साहित्यिक व मनोरंजक, पत्र पत्रिका में सामग्री बहुत महत्त्वपूर्ण होती हैं। इसलिए आपसे अनुरोध है कि हिन्दी के प्रसिद्ध लेखकों की नवीन पुस्तकें मँगवाने की कृपा करें ताकि हिन्दी साहित्य के विद्यार्थियों को असुविधा न हो और इन पुस्तकों के माध्यम से वे अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकें।
धन्यवाद ।
आपका आज्ञाकारी शिष्य
क. ख.ग.
2. अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को छात्रवृत्ति के लिए एक आवेदन पत्र लिखिए |
परीक्षा भवन
लखनऊ।
दिनांक 17 अगस्त, 20XX
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
दयानन्द एंग्लो माध्यमिक विद्यालय
नोएडा।
विषय छात्रवृत्ति हेतु आवेदन पत्र ।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा दसवीं ‘ब’ का आज्ञाकारी व मेधावी छात्र हूँ। मेरे घर की वर्तमान आर्थिक स्थिि सन्तोषजनक नहीं है। मेरे पिताजी ज्यादातर बीमार रहते हैं, जिस कारण वे मेरी आगे की पढ़ाई का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। मेरी माताजी एक गृहिणी हैं, जो अपना अधिकतर समय पिताजी की देखभाल में ही व्यतीत करती हैं। इस तरह मेरी आगे की पढ़ाई करने में व्यवधान आ रहा है। मैं अपनी पढ़ाई जारी रख सकूँ, इसके लिए मेरी आपसे प्रार्थना है कि मेरी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए मुझे छात्रवृत्ति प्रदान करने की कृपा करें। मैं आपका हमेशा कृतज्ञ रहूँगा ।
सधन्यवाद
आपका आज्ञाकारी छात्र
क. ख.ग.
3. विद्यालय में खेल – कूद की सामग्री की ओर ध्यान केन्द्रित करते हुए प्रधानाचार्य को एक प्रार्थना पत्र लिखिए ।
परीक्षा भवन,
गाजियाबाद |
दिनांक 12 अप्रैल, 20XX
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
विद्या शिशु निकेतन,
गाजियाबाद |
विषय विद्यालय में खेल – कूद की सामग्री की ओर ध्यान दिलाने हेतु ।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 10 ‘स’ का छात्र हूँ। मैं आपका ध्यान हमारे विद्यालय में खेल-कूद की सामग्री की अनुपलब्धता की ओर दिलाना चाहता हूँ। दुर्भाग्य से, हमारे कई छात्रों के पास खेलों में भाग लेने हेतु आवश्यक सामग्री नहीं है। यही कारण है कि हमारा विद्यालय प्रत्येक खेल प्रतियोगिता में पिछड़ जाता है। बैडमिण्टन खेलने के लिए पर्याप्त रैकेट नहीं हैं। क्रिकेट की बात की जाए तो ग्लव्स, गेंद और बल्ले विद्यालय में न के बराबर हैं। यदि हमारे विद्यालय में पर्याप्त खेल की सामग्री उपलब्ध हो जाए, तो छात्र सही ढंग से तथा निरन्तर अपने-अपने खेल का अभ्यास कर सकेंगे और प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन कर पाएँगे। इससे विद्यालय की छवि को भी लाभ होगा। बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के साथ-साथ उनके बीच खेल भावना व भाईचारे की भावना भी पैदा होगी।
अतः प्रार्थना है कि हमारे विद्यालय में खेल – कूद की सामग्री उपलब्ध कराने की कृपा करें।
सधन्यवाद
आपका आज्ञाकारी शिष्य
क. ख.ग.
II. शिकायती पत्र
किसी विशेष कार्य, समस्या अथवा घटना की शिकायत करते हुए, सम्बन्धित • अधिकारी को लिखा गया पत्र ‘शिकायती पत्र’ कहलाता है। इसका स्वरूप प्रार्थना-पत्र की तरह ही होता है। इसकी भाषा शालीन होनी चाहिए।
1. अपनी गली / मोहल्ले की नालियों की समुचित सफाई के लिए नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखिए।
परीक्षा भवन,
प्रयागराज ।
दिनांक 13 मई, 20XX
सेवा में,
स्वास्थ्य अधिकारी,
नगर निगम,
गाज़ियाबाद |
विषय मोहल्ले की नाली और सड़कों आदि की सफ़ाई के सम्बन्ध में।
महोदय,
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान अपने क्षेत्र की सफाई व्यवस्था की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। हमारा क्षेत्र एक घनी आबादी वाला क्षेत्र है। यहाँ की नालियों की गहराई का स्तर सारे क्षेत्र में एक-सा नहीं है, जिसके कारण नालियाँ अकसर भरी रहती हैं। इतने बड़े क्षेत्र के लिए मात्र एक सफ़ाई कर्मचारी है और वह भी प्रतिदिन नहीं आता। कई बार तो वह तीन-तीन दिन तक नहीं आता। मुख्य कूड़ेदान की संख्या भी एक है। घरों की सफ़ाई करने वाले घर के कूड़े को मुख्य कूड़ेदान में डाल देते हैं, जिससे वह ऊपर तक गंदगी से भर जाता है।
इससे बीमारी फैलने का भी खतरा हो रहा है। कुछ ही दिनों में वर्षा का समय भी आने वाला है। यदि यही हाल रहा तो हमारे क्षेत्र में गंभीर बीमारी फैल जाएगी, जिसके शिकार बच्चे और बूढ़े अधिक संख्या में होंगे।
आपसे विनम्र निवेदन है कि समस्या की गंभीरता को देखते हुए एक बार स्वयं हमारे क्षेत्र का निरीक्षण करने का कष्ट करें, ताकि पत्र में लिखी सारी बातों की सत्यता को जाँचा जा सके। निरीक्षण तथा उचित कदम की प्रतीक्षा में।
सधन्यवाद ।
प्रार्थी
क. ख. ग.
2. राज्य परिवहन निगम के मुख्य प्रबन्धक को बस चालक के अप्रशंसनीय व्यवहार का उल्लेख करते हुए शिकायती पत्र लिखिए।
परीक्षा भवन,
कानपुर।
दिनांक 16 जुलाई, 20XX
सेवा में,
मुख्य प्रबन्धक,
राज्य परिवहन निगम
कानपुर।
विषय बस चालक के अप्रशंसनीय व्यवहार के सम्बन्ध में ।
महोदय,
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान अपने क्षेत्र से होकर जाने वाली बस संख्या UPXX13XX के बस चालक के खराब व्यवहार की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ, जिसमें उसका साथ उस बस का परिचालक भी देता है । सर्वप्रथम तो उसका गलत आचरण यही है कि वह हमारे क्षेत्र के बस स्टॉप पर ज्यादातर बस ही नहीं रोकता है। यदि बस रोक भी देता है, तो दो मिनट से पहले ही यहाँ तक कि यात्री पूरी तरह से बस के अन्दर भी नहीं पहुँच पाते, वह बस को चला देता है । एक बार तो चालक के इस कुकृत्य के कारण हमारे क्षेत्र की एक बूढ़ी औरत व एक विकलांग व्यक्ति बस से नीचे गिरने से बाल-बाल बचे, लेकिन मामूली चोटें उनको फिर भी आ गई थीं। इस बात लिए जब उसे कहा गया, तो उल्टा उसने यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल भी किया।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि या तो इस बस के चालक / परिचालक को हटा दिया जाए या उसे यात्रियों के साथ शिष्ट व्यवहार करने के लिए कहा जाए।
सधन्यवाद
प्रार्थी
क. ख.ग.
3. रेलवे के महाप्रबन्धक को एक शिकायती पत्र लिखिए, जिसमें टिकट निरीक्षक द्वारा किए गए अभद्र व्यवहार का उल्लेख हो ।
परीक्षा भवन,
वाराणसी।
दिनांक 18 अगस्त, 20XX
सेवा में,
रेलवे महाप्रबन्धक
वाराणसी।
विषय टिकट निरीक्षक द्वारा किए गए अभद्र व्यवहार के सम्बन्ध में। महोदय,
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान वाराणसी से लखनऊ होकर जाने वाली सुपर एक्सप्रेस, ट्रेन संख्या 43XXX के टिकट निरीक्षक द्वारा किए गए अभद्र व्यवहार की ओर आकृष्ट कराना चाहता हूँ। यह टिकट निरीक्षक यात्रियों के साथ अशिष्ट भाषा का प्रयोग करता है तथा किसी भी समय यहाँ तक की रात्रि में भी टिकट चेक करने आ जाता है। यदि कोई यात्री सो रहा हो, तो उसे अभद्र भाषा का प्रयोग करके जगा देता है और टिकट माँगने लग जाता है। कुछ यात्रियों के साथ तो यह मारपीट तक कर चुका है। पिछले सोमवार को जब मैं वाराणसी से लखनऊ जा रहा था, तो एक यात्री के साथ टिकट दिखाने के बावजूद उसने अभद्र व्यवहार किया और उसे धक्का दे दिया। अगर कुछ यात्री उसे न पकड़ते, तो वह यात्री ट्रेन से नीचे गिर जाता । अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस टिकट निरीक्षक को निलम्बित किया जाए और इसके स्थान पर किसी ओर सभ्य टिकट निरीक्षक को प्रभार दिया जाए।
सधन्यवाद
प्रार्थी
क. ख.ग.
III. सम्पादकीय पत्र
सम्पादक के नाम लिखे जाने वाले पत्र को ‘सम्पादकीय पत्र’ कहा जाता है। ऐसे पत्र एक विशिष्ट शैली में लिखे जाते हैं। इस पत्र में कुछ भाग सम्पादक को सम्बोधित होता है, जबकि मुख्य विषय-वस्तु ‘जन सामान्य’ को लक्षित कर लिखी जाती है।
1. स्वरचित कविता प्रकाशित करवाने के लिए अनुरोध करते हुए किसी समाचार-पत्र के सम्पादक को पत्र लिखिए ।
परीक्षा भवन,
आगरा।
दिनांक 11 मार्च, 20XX
सेवा में,
सम्पादक महोदय,
नवभारत टाइम्स,
आगरा।
विषय स्वरचित कविता को प्रकाशित करवाने हेतु ।
महोदय,
मैं प्रत्येक दिन आपके दैनिक पत्र में लोगों की रचनाएँ पढ़ता हूँ जो बहुत प्रेरणादायक होती हैं। आपके पत्र में छपने वाली कविताओं को पढ़ते-पढ़ते अब मुझे भी कविता लिखने का अनुभव हो गया है। मैंने भी एक कविता लिखी है जो मैं आपके पत्र नवभारत टाइम्स में प्रकाशित करवाना चाहता हूँ। मैं भी चाहता हूँ कि मेरी कविता अधिक-से-अधिक लोग पढ़ें तथा उससे प्रेरणा ग्रहण करें। इससे मुझे भी और कविताएँ लिखने की प्रेरणा मिलेगी।
आशा करता हूँ कि आप एक नए लेखक की बात को समझेंगे और मेरी कविता को अपने दैनिक पत्र नवभारत टाइम्स में स्थान अवश्य ही देंगे।
धन्यवाद ।
भवदीय
क. ख.ग.
IV. व्यावसायिक पत्र
व्यावसायिक सम्बन्धों को सुनिश्चित करने के लिए जो पत्र लिखे जाते हैं, ‘उन्हें व्यावसायिक पत्र’ कहा जाता है। ऐसे पत्रों की भाषा स्पष्ट तथा आकर्षक होनी चाहिए, जिससे बातें पूर्णतः स्पष्टता के साथ सम्प्रेषित हो सकें। व्यावसायिक पत्रों में सामान मँगवाने, उसकी जानकारी, शिकायतें तथा शिकायतों के निवारण जैसे विषय होते हैं।
1. आपको कुछ पुस्तकों की आवश्यकता है, जो बाज़ार में उपलब्ध नहीं हैं। इस सन्दर्भ में प्रकाशक को पत्र लिखकर वीपीपी द्वारा पुस्तकें भेजने के लिए निवेदन कीजिए ।
परीक्षा भवन,
प्रयागराज ।
दिनांक 25 अप्रैल, 20XX
सेवा में,
प्रबन्धक महोदय,
अ. ब. स प्रकाशन, मेरठ।
विषय वीपीपी द्वारा पुस्तकें भेजने हेतु ।
महोदय,
मैं राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय, दिल्ली का दसवीं कक्षा का – विद्यार्थी हूँ। मुझे निम्न पुस्तकों की शीघ्र आवश्यकता है। अतः आपसे अनुरोध है कि ये पुस्तकें यथाशीघ्र वीपीपी द्वारा भेजने का कष्ट करें। कृपया उचित शुल्क लगाकर बिल भी संलग्न कर दें।
| पुस्तकें | प्रतियाँ | |
| 1. | हिन्दी व्याकरण | 2 प्रति |
| 2. | हिन्दी गद्य | 2 प्रति |
| 3. | काव्य चन्द्रिका | 2 प्रति |
आपसे अनुरोध है कि बिना विलम्ब किए वीपीपी द्वारा पुस्तकें पहुँचाने की कृपा करें।
धन्यवाद सहित ।
भवदीय
क. ख. ग.
2. आपने एक ऑनलाइन शॉपिंग कम्पनी के माध्यम से कुछ सामान खरीदा, लेकिन तय राशि के भुगतान के बाद भी आपको अपना सामान नहीं मिला। कम्पनी प्रबन्धक से इसकी शिकायत करते हुए पत्र लिखिए ।
परीक्षा भवन
प्रयागराज ।
दिनांक 14 मार्च, 20XX
सेवा में,
प्रबन्धक महोदय,
ऑनलाइन सेवा कम्पनी,
आगरा।
विषय खरीदे गए सामान की डिलीवरी न होने हेतु ।
महोदय,
मुझे बहुत खेद के साथ आपकों यह सूचित करना पड़ रहा है कि मैंने एक सप्ताह पूर्व आपकी वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन खरीदारी की थी और तय राशि का भुगतान भी कर दिया था, लेकिन अब तक मुझे मेरा सामान नहीं मिला है। मैंने कई बार टेलीफ़ोन आदि के द्वारा आपकी कम्पनी के अधिकारियों से सम्पर्क करने का प्रयास किया, परन्तु सफलता न मिली। इसलिए मुझे विवश होकर आपको यह पत्र लिखना पड़ा।
मेरे द्वारा ऑर्डर किए गए सामान का विवरण निम्नलिखित है
| सामान | संख्या |
| सैमसंग गैलेक्सी ग्रैंड | 2 |
| सोफा सैट | 1 |
| डबल बैड | 1 |
आपसे अनुरोध है कि बिना विलम्ब किए मेरे ऑर्डर के अनुसार सामान पहुँचाने का प्रबन्ध करें।
धन्यवाद सहित ।
भवदीय
क. ख. ग.
V. कार्यालयी पत्र
विभिन्न सरकारी कार्यालयों में पत्र के माध्यम से कार्य सम्पादित होते हैं। ऐसे पत्रों को ‘कार्यालयी पत्र’ कहा जाता है। इन पत्रों में शालीनता तथा शिष्ट भाषा का प्रयोग किया जाता है।
1. किसी महत्त्वपूर्ण पत्र के प्राप्त न होने की शिकायत करते हुए अपने क्षेत्र के पोस्ट मास्टर को पत्र लिखिए ।
परीक्षा भवन
प्रयागराज ।
दिनांक 17 अप्रैल, 20XX
सेवा में,
डाकपाल महोदय,
केन्द्रीय डाकघर, गोल मार्केट,
आगरा।
विषय डाक की अनुचित एवं अनियमित व्यवस्था के सन्दर्भ में।
महोदय,
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि हमारे क्षेत्र ‘गोल मार्केट’ के निवासियों को पिछले कुछ दिनों से डाक नियमित रूप से नहीं मिल रही है। डाकिया या तो डाक देता ही नहीं है या फिर वह कहीं भी फेंककर चला जाता है। जहाँ-तहाँ डाक फेंक देने से कोई भी बच्चा या व्यक्ति उसका दुरुपयोग करता है या फाड़कर फेंक देता है, जिससे डाक प्राप्त करने वाले व्यक्ति को भारी नुकसान होता है।
डाकिया के आने का कोई निश्चित समय भी नहीं है और वह ठीक से बात भी नहीं करता। उसकी लापरवाही के कारण क्षेत्र के लोगों को अत्यधिक नुकसान हो रहा है, जिसकी क्षतिपूर्ति होनी असम्भव है। अतः आपसे निवेदन है कि इस क्षेत्र के डाकिए को आप उचित निर्देश दें, ताकि वह नियमित एवं व्यवस्थित तरीके से डाक का वितरण करे ।
धन्यवाद।
भवदीय
क. ख. ग.
अनौपचारिक पत्र
सगे-सम्बन्धियों, मित्रों, रिश्तेदारों, परिचितों आदि को लिखे गए पत्र ‘अनौपचारिक पत्र’ कहलाते हैं। इन्हें व्यक्तिगत पत्र भी कहा जाता है। इस प्रकार के पत्रों में व्यक्ति से सम्बन्धित सुख-दुःख, हर्ष, उत्साह आदि का वर्णन किया जाता है। अनौपचारिक पत्रों की भाषा आत्मीय व हृदय को स्पर्श करने वाली होती है।
अनौपचारिक पत्रों में आने वाले सम्बोधन, अभिवादन तथा अभिनिवेदन
| पत्र पाने वाले के साथ सम्बन्ध | सम्बोधन | अभिवादन | अभिनिवेदन |
| अपने से बड़े सम्बन्धी (माता, पिता, बड़ा भाई, बड़ी बहन, शिक्षक इत्यादि) | पूजनीया (माता), पूज्य (पिता), आदरणीय, पूजनीय, आदरणीया (माता, बहन) | चरण-स्पर्श, सादर प्रणाम | आज्ञाकारी, स्नेहाकांक्षी, प्यारा इत्यादि |
| अपने से छोटे सम्बन्धी ( छोटा भाई, छोटी बहन, पुत्र, पुत्री, भतीजा, भतीजी इत्यादि) | चिरंजीवी, प्रिय, केवल नाम | शुभाशीर्वाद, प्रसन्न रहो | शुभेच्छु, शुभाकांक्षी, हितैषी इत्यादि |
| मित्र, सहपाठी | प्रिय, मित्रवर, केवल नाम | सप्रेम नमस्कार, नमस्ते | तुम्हारा सहृदय, मित्र इत्यादि |
| विदेशी पत्र-मित्र | प्रिय मित्र | नमस्ते | आपका, आपका मित्र |
| अपरिचित पुरुष | महाशय, श्रीमान (नाम), महोदय | नमस्ते, नमस्कार | भवदीय, भवदीया, हितैषी |
| अपरिचित महिला | महाशया, श्रीमती (नाम), महोदया | नमस्ते, नमस्कार | भवदीय, हितैषी |
अनौपचारिक पत्रों के उदाहरण
1. आपके मित्र के पिता सीमा पर शहीद हो गए। अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए मित्र को लगभग 80-100 शब्दों में पत्र लिखिए ।
परीक्षा भवन
प्रयागराज ।
दिनांक 20 मार्च, 20XX
प्रिय मित्र,
नमस्कार !
मुझे कल ही यह समाचार प्राप्त हुआ कि तुम्हारे पिताजी हमारे देश की रक्षा करते हुए सीमा पर शहीद हो गए हैं। यह समाचार सुनकर मैं बहुत दुःखी हूँ, किन्तु मैं तुम्हें केवल यही कहूँगा कि वह एक वीर सैनिक थे जिन्होंने अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। उनके इस त्याग से सभी का मस्तक गर्व से ऊँचा हो गया है। तुम्हें इस समय स्वयं के साथ अपने घर के अन्य सदस्यों का भी हौसला बनाए रखना चाहिए तथा अपने पिताजी के त्याग व शहादत को नमन करना चाहिए। अब पिताजी के शहीद होने के पश्चात् घर की जिम्मेदारियों को तुम्हें ही उठाना है इसलिए मैं तुम्हें यह कहना चाहता हूँ कि तुम्हें धैर्य से काम लेना होगा। यह दुःख के बादल समय के साथ अवश्य छट जाएँगे । मैं जल्द ही तुम्हारे घर आऊँगा।
तुम्हारा मित्र
क. ख.ग.
2. आप पवन/पावनी हैं। आप छुट्टियों में गुजरात घूमने का कार्यक्रम बना रहे/रही हैं। सरदार पटेल की प्रतिमा भी देखना चाहते/ चाहती हैं। आपने जो कार्यक्रम बनाया है उसमें क्या सुधार हो सकता है, अपने चचेरे भाई को पत्र लिखकर पूछिए ।
बी-14, टैगोर अपार्टमेण्ट
रेलवे स्टेशन रोड, आगरा
दिनांक 27 जून, 20XX
प्रिय भाई अभिनव,
नमस्ते,
मैं यहाँ सकुशल हूँ और आशा करता हूँ कि आप भी वहाँ सपरिवार स्वस्थ एवं प्रसन्न होंगे। मैं तुम्हारी कुशलता हेतु ईश्वर से कामना करता हूँ। भाई, मैं छुट्टियों में 15 दिन गुजरात घूमने का कार्यक्रम बना रहा हूँ। गुजरात अपनी जीवन्त संस्कृति, प्राकृतिक परिदृश्यों और स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए मशहूर है। यहाँ पर घूमने के लिए बहुत-सी जगह हैं। अतः मैं यहाँ काकरिया झील जो पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है। ‘रन ऑफ कच्छ’ ये दुनिया का सबसे बड़ा नमक का रेगिस्तान है । सापुतारा हिल स्टेशन, सोमनाथ मन्दिर, गिर नेशनल पार्क, पोरबन्दर बीच और साथ ही सरदार पटेल की प्रतिमा भी देखना चाहता हूँ और मैं चाहता हूँ कि आप भी मेरे साथ चलें। प्रिय भाई मैं जानना चाहता हूँ कि जो मैंने यह कार्यक्रम बनाया है, क्या यह छुट्टियों में घूमने के लिए उचित है? यदि नहीं है, तो इसमें आप सुधार करके मुझे भेज दीजिए। मैं आपका आभारी रहूँगा । अगर आप भी साथ में चलो, तो इससे अच्छी और क्या बात होगी। चाचाजी और चाचीजी को मेरा प्रणाम कहना ।
आपका भाई
पवन/पावनी
3. ‘वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अपने चचेरे भाई को बधाई देते हुए पत्र लिखिए |
अथवा
अखिल भारतीय ‘वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार विजेता मित्र को एक बधाई पत्र लिखिए ।
(‘प्रियभाई’ के स्थान पर ‘प्रिय मित्र’ और ‘तुम्हारी चचेरी बहन’ के स्थान पर तुम्हारा / तुम्हारी मित्र / सहेली ) ।
परीक्षा भवन
दिल्ली।
दिनांक 17 मार्च, 20XX
प्रिय मित्र आरव,
नमस्कार,
मैं, यहाँ कुशलता से हूँ और आशा करती हूँ कि तुम भी सकुशल होंगे। तुम्हारा पत्र मिला, जिसके द्वारा पता चला कि तुमने वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। सुनते ही मुझे अपार हर्ष की अनुभूति हुई । वास्तव में, यह हम सबके लिए बड़े गर्व की बात है। वैसे यह तुम्हारे कठिन परिश्रम का ही फल है, जिसने तुम्हें ही नहीं बल्कि हमें भी गौरवान्वित होने का अवसर दिया। ईश्वर से प्रार्थना है कि तुम जीवन में इसी तरह नई-नई सफलताएँ अर्जित करते रहो।
पूज्य अंकल – आण्टी जी को मेरा प्रणाम कहना। स्नेहा को मेरा स्नेह । मैं शीघ्र ही परिवार के साथ तुमसे मिलने आऊँगी।
तुम्हारी मित्र
क. ख. ग
4. अपने जन्मदिन पर मित्र द्वारा भेजे गए उपहार के लिए मित्र को धन्यवाद पत्र लिखिए।
परीक्षा भवन
आगरा।
दिनांक 16 फरवरी, 20XX
प्रिय मित्र,
नमस्कार,
मैं यहाँ पर कुशलता से हूँ। आशा है कि तुम भी अपने परिवार सहित सकुशल होंगे। कल तुम्हारा भेजा हुआ कोरियर मिला। उसमें मेरे जन्मदिन का उपहार तथा एक बधाई पत्र था। यह देखकर मुझे बड़ी खुशी हुई कि मेरे बताने से पूर्व ही तुम्हें मेरा जन्मदिन ज्ञात था और तुम्हारे द्वारा भेजा गया उपहार तो मेरे लिए बहुत ही उपयोगी व कीमती है। तुम्हारा यह उपहार मुझे हमेशा तुम्हारी याद दिलाता रहेगा। शीघ्र ही बताना कि तुम मुझसे मिलने कब आ रहे हो? तुम्हारा इन्तजार रहेगा।
अंकल-आण्टी को मेरा प्रणाम कहना। मधु को स्नेह ।
तुम्हारा मित्र
क. ख. ग
5. छात्रावास की जीवन-शैली विषय पर अपने मित्र को पत्र लिखिए।
परीक्षा भवन
आजमगढ़।
दिनांक 6 अप्रैल, 20XX
प्रिय मित्र,
नमस्कार ।
आशा है कि तुम कुशलतापूर्वक होंगे। यहाँ मैं भी कुशलता से हूँ। मित्र; पिछले पत्र में तुमने मेरे छात्रावास की जीवन-शैली को जानने की जिज्ञासा प्रकट की थी। अतः आज इस पत्र में मैं तुम्हें छात्रावास की जीवन शैली के बारे में बताता हूँ। मित्र, छात्रावास का जीवन अनुशासनबद्ध होता है। यहाँ प्रत्येक कार्य समयानुसार होता है। वैसे अनुशासनबद्ध जीवन भी आनन्दपूर्ण होता है। यहाँ प्रात: 5 बजे उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद मैदान में व्यायाम तथा खेल के लिए जाना पड़ता है। उसके बाद 6 बजे स्नान आदि कार्यों के बाद नाश्ता होता है। फिर 7:30 बजे सुबह तैयार होकर अपनी-अपनी कक्षाओं में उपस्थित होना होता है।
1:30 बजे अवकाश हो जाता है। दोपहर के भोजन के बाद सायं 3 : 30 बजे से 5:30 बजे तक खेलने का समय होता है। उसके बाद रात्रि का भोजन होता है और छात्रावास के संरक्षक द्वारा प्रत्येक छात्र की जानकारी लेने के बाद सभी छात्र अपने-अपने कमरों में चले जाते हैं। जहाँ हम लगभग एक घण्टा पढ़ते हैं और फिर सोने की तैयारी करने लगते हैं।
यह हमारे छात्रावास की जीवन-शैली है। इसके अलावा वर्ष में एक या दो बार टूर के लिए भी ले जाया जाता है। अच्छा, शेष बातें बाद में।
तुम्हारा मित्र
क. ख.ग.
6. अपनी विशेष रुचियों का उल्लेख करते हुए अपने मित्र को एक पत्र लिखिए।
परीक्षा भवन
दिल्ली।
दिनांक 10 अप्रैल, 20XX
प्रिय मित्र,
नमस्कार ।
आशा है कि आप सकुशल होंगे। मैं भी यहाँ सकुशल हूँ। पिछले पत्र में तुमने मेरी रुचियों के बारे में पूछा था। भले ही मैं पढ़ाई पर भी अधिक ध्यान देता हूँ, परन्तु मेरी रुचि खेलकूद में अधिक है। मैं बड़ा होकर एक क्रिकेटर बनना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि मैं अपने देश के लिए खेलूँ और देश का नाम रोशन करूँ। इसके साथ ही मुझे तैरना भी अच्छा लगता है, लेकिन तैरने का शौक मैं क्रिकेट के साथ-साथ जारी रखूँगा । बस मेरी विशेष रुचियाँ ये ही हैं, जिनमें मैं अपना करियर भी बनाना चाहूँगा। तुम्हारे बारे में मुझे पता है कि तुम डॉक्टर बनना चाहते हो । ईश्वर करे कि तुम एक बड़े डॉक्टर बनो। शेष बातें बाद में। मैं जल्दी ही तुमसे मिलने आऊँगा।
तुम्हारा मित्र
क. ख.ग.
