बिहार राज्य और प्रारंभिक शिक्षा

बिहार राज्य और प्रारंभिक शिक्षा

बिहार राज्य और प्रारंभिक शिक्षा 

भारत में बिहार राज्य का शैक्षिक दृष्टिकोण से निम्नतम स्थान है। जहां भारत की राष्ट्रीय साक्षरता 65 प्रतिशत है वहीं बिहार राज्य में कुल 47.53 प्रतिशत साक्षरता है। कभी भारतीय संस्कृति के महान गौरव में बिहार का अक्षुण्ण योगदान रहा करता था। नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालय यहीं अवस्थित थे और शिक्षा का दीप देश-विदेश में प्रचलित करते थे। आर्यभट्ट, विद्यापति, नागार्जुन, दिनकर रूपी महान विभूतियों की जन्मभूमि बिहार ही है। फोर्ट विलियम कालेज में देशी भाषा में पुस्तक तैयार करने हेतु बिहारी अध्यापक सदल मिश्र का ही चयन किया गया था। इसके बावजूद आज बिहार साक्षरता में पिछड़ा हुआ है।
फिर भी बिहार अपने पुराने गौरव प्राप्त करने हेतु कृतसंकल्प है। परिणामतः साक्षरता दर में सबसे कम होते हुए भी सत्येन मित्रा पुरस्कार लगातार दूसरी बार प्राप्त किया है। वर्ष 2002-2003 का सत्येन मित्रा पुरस्कार मुजफ्फरपुर को साक्षरता की उत्कृत्ट उपलब्धि हेतु प्रदान किया गया, जहां साक्षरता 86.14 प्रतिशत हासिल कर ली गई है। अभी हाल में ‘ललिता’ नाम बालिका ने यूनिसेफ के मुख्य पृष्ठों पर ध्यान प्राप्त कर बिहार को गौरवान्वित तो किया परंतु साथ में महिला शिक्षा की दयनीय स्थिति की कहानी भी कहती है।
बिहार सरकार ने प्रारंभिक शिक्षा के सर्वव्यापीकरण, सर्वाभौमीकरण के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को स्वीकार किया है उक्त लक्ष्य की प्राप्ति हेतु कई रणनीतियां तय की गई हैं:
(i) वर्ष 2007 तक सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा (एक से पांच) उपलब्ध कराना।
(ii) वर्ष 2010 तक राज्य के सभी बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा (एक से आठ तक) उपलव्य कराना।
प्राथमिक शिक्षा से संबंधित विभिन्न योजनाएं
बिहार राज्य में लक्ष्य की पूर्ति हेतु प्राथमिक शिक्षा से संबंधित विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं-
● मध्याह्न भोजन योजना: बच्चों को विद्यालय की ओर आकर्षित करने एवं विद्यालय में उपस्थिति बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्रीय योजना कार्यान्वित है। इसमें । से 5वीं वर्ग के सभी छात्र-छात्राओं को कुल 10 माह तक प्रतिदिन उपस्थिति के आधार पर किया. चावल/गेहूं प्रतिदिन प्रतिमाह उपलब्ध कराया जाता है।
● प्रोत्साहन भत्ता योजना 1909 2000 में राज्य योजना के रूप में प्रारंभ की गई है जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे निर्वाह करने वाले। से 5वीं के सभी छात्र छात्राओं को। रू. प्रतिदिन विद्यालय में उपस्थित पर अधिकतम 20 रू. माहवार प्रोत्साहन भता देने की व्यवस्था के 2 जरिए शिक्षा की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
● अनुदानित पाठ्य-पुस्तक योजना के अंतर्गत 1 से 5वीं कक्षा तक के सभी छात्रों को 50 प्रतिशत अनुदानित मूल्य पर पाठ्य-पुस्तक उपलब्ध कराते हैं, जबकि जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम III से आच्छादित 20 जिलों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों को मुफ्त में पाठ्य-पुस्तक उपलब्ध कराकर शिक्षा की ओर उन्मुख किया जा रहा है।
● विद्यालय शिक्षा समिति का गठन किया गया है। इससे छात्रों का नामांकन ठहराव सुनिश्चित करने, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति विद्यालय में सुनिश्चित करने एवं अध्ययन-अध्यापन सुनिश्चित करने, विद्यालयों की नियमित देख-रेख करने, मध्यान्ह भोजन एवं प्रोत्साहन भत्ता का उचित वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वर्ष 2000 में विद्यालय शिक्षा समिति विधेयक 2000 पारित कर कार्यान्वित किया जा रहा है।
● पारा शिक्षक योजना के तहत शिक्षक स्थानांतरण पदस्थापन नियमावली शिक्षक प्रोन्नति नियमावली तथा वर्ग 3 से अंग्रेजी
विषय की पढ़ाई की व्यवस्था सरकार ने वर्ष 2002 से की है।
● विश्व बैंक संपोषित केंद्र प्रायोजित जिला शिक्षा कार्यक्रम 3 राज्य के 20 प्रशासित जिलों में लागू है। यथा- भोजपुर, बसर, रोहतास, भभुआ, वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, प. चंपारण भागलपुर, किशनगंज। जिसमें केंद्र एवं राज्य का 85:15 का अनुपात है। इस योजनान्र्तगत निम्न कार्यों पर विशेष बल दिया गया है-
(i) आच्छादित जिले के सभी बच्चे एवं बच्चियों का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित कराना, विद्यालय में उपस्थिति बनाये रखना एवं न्यूनतम अधिगम आधारित उपलब्ध कराना।
(ii) जो बच्चे किसी भी कारण से शिक्षा से वंचित हैं या विद्यालय बीच में छोड़ चुके हैं, को विशेष शिक्षा केंद्रों- अपना विद्यालय एवं अंगना विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित करते हुए पुनः विद्यालय की मुख्य धारा से जोड़ना।
(iii) महिलाओं को शिक्षित करने एवं उसमें क्षमता निर्माण हेतु महिला समाख्या के माध्यम से जगजगी केंद्रों से जोड़ना।
(iv) प्रखंड संसाधन केंद्रों एवं संकुल संसाधन केंद्रों की स्थापना।
(v) शिक्षकों का प्रशिक्षण
(vi) विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं यथा- भवन, पेयजल एवं शौचालय का निर्माण।
(vii) राज्य संसाधन केंद्र की स्थापना।
● सर्वशिक्षा अभियान: बिहार में एक से आठवीं कक्षा के सर्वव्यापीकरण के उद्देश्य की पूर्ति हेतु उक्त योजना राज्य के 17 जिलों में वर्ष 2000-2001 से प्रारंभ है। पटना, नालंदा, जहानाबाद, औरंगाबाद, नवादा, कटिहार, सहरसा, सुपौल, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, बेगुसराय, मधुबनी, सारण, सिवान, गोपालगंज, खगड़िया एवं मधेपुरा।
● स्पीड योजना के अंतर्गत बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षा विकास कार्यक्रम (स्पीड) 4 जिलों- नालंदा, सहरसा, पटना, सुपौल में संचालित है, जिसमें मुख्यत: 6 से 14 आयु वर्ग के सभी बच्चों विशेषकर अनुसूचित जाति, जनजाति एवं लड़कियां को शिक्षा उपलब्ध कराना है।
● शिक्षा गारंटी योजना वर्ष 2001-2002 के कार्यान्वित किया जा रहा है। जिसके तहत सभी गांव/टोलों-जहां एक किमी, के अंदर विद्यालय की सुविधा नहीं है एवं पढ़ने वाले बच्चों की संख्या नहीं है एवं पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 20-25 है, में शिक्षा गारंटी केंद्र की स्थापना करने के प्रक्रिया प्रारंभ है। इसके अतिरिक्त शिक्षा के सर्वव्यापीकरण, सर्वसुलभता हेतु बिहार सरकार कृतसंकल्प हैं। उसने विद्यालयों के शिक्षकों के प्रशिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु ‘जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान’ स्थापित करने की योजना है तथा यूनिसेफ के सहयोग से मजबूत सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली विकसित करने की भी योजना है।
● प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता के स्तरोन्नयन हेतु वित्तीय वर्ष 2000-2001 में आठवीं कक्षा के छात्रों का राज्यस्तरीय परीक्षा का आयोजन किया गया।
● प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना वर्ष 2000-2001 से संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत प्राथमिक भवनहीन विद्यालयों के भवन निर्माण, पेयजल एवं शौचालय निमित किये जा रहे हैं।
● एकादश वित्त आयोग के अंतर्गत राज्य के भवनहीन विद्यालयों को तीन कमरे, पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है जिसमें वर्ष 2001-02 से 2004-05 की अवधि में कुल 1608 विद्यालय भवनों का निर्माण किया जाना है।
● जो बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं, उन्हें वर्ष 2004 में निश्चित ही स्कूलों में दाखिल कराना है। यह लक्ष्य पूर्ण में 2003 निर्धारित  था, परंतु अब 2004 निर्धारित किया गया है।
उपलब्धियां
वर्ष 2001 की जनगणनानुसार बिहार राज्य में विद्यालयों की संख्या इस प्रकार थी:
(i) प्राथमिक विद्यालय-37360
(ii) मध्य विद्यालय- 9764
(iii) बुनियादी विद्यालय-397
(iv) सरकारी सहायता प्राप्त विर लय- 68
(v) गैर सरकारी विद्यालय- 17
इनके अतिरिक्त मदरसा, संस्कृत विद्यालयों की भी अच्छी-खासी संख्या है जिसमें बच्चों को प्राथमिक एवं प्रारंभिक स्तर की । शिक्षा प्रदान कर प्रगति पथ पर अग्रसर है।
● विश्व बैंक की सहायता से महत्वाकांक्षी जिला प्राथमिक शिक्षा परियोजना 6 वर्ष पूर्व 1997 में प्रारंभ की गई। परियोजना का प्रथम और द्वितीय चरण बीते वर्ष की 30 जून 2003 को पूरा हो गया। परियोजना के सपूर्ण अवलोकन के बाद पायी गई प्रगति दर 39 प्रतिशत है जबकि परियोजना प्रारंभ के समय 29 प्रतिशत थी।
● कक्षा एक से पांचवीं तक में छात्रों की प्रगति दर 40 प्रतिशत से बढ़ कर 51 प्रतिशत हो गई है।
● लक्ष्य के मुकाबले 24 प्रतिशत छात्र विद्यालय के बाहर तो हैं परंतु तृतीय चरण में नामांकन दर में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
सुझाव: शिक्षित व सामर्थ्यवान बिहार राज्य सहित देश को बनाने के लिए सर्वप्रथम हमें अपनी व्यवस्था को सुदृढ़ करना होगा।
● प्रत्येक नागरिक में एहसास जागृत करने की आवश्यकता है कि वह आस-पास के निरक्षरों को अवश्य साक्षर करें तभी उसके शिक्षित होने का कुछ अर्थ होगा।
● सरकारी विद्यालयों को सुसज्जित अर्थात सुविधायुक्त बनाना होगा इसके लिए रणनीति को शीघ्र कार्यरूप देने की आवश्यकता है।
● साक्षरता में सफलता तभी प्राप्त होगी जब यह लोगों की वास्तविक जरुरत बन जाए, लोग स्वयं साक्षरता की मांग करें और जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता के रूप में सामने आये। अर्थात व्यक्ति शिक्षा को रोटी जितना महत्वपूर्ण समझे।
● समाज में ऐसी जागृति फैलानी होगी कि शिक्षा के अभाव में व्यक्ति स्वयं के जीवन को अधूरा
समझे, निर्जीव माने स्वयं को बेकार वस्तु के समान जाने।
कोई भी लक्ष्य प्राप्त करना असंभव नहीं है वह भी भारत के लिए जो महाशक्ति के रूप में उभर कर विश्वपटल पर छाया हुआ है। बस आवश्यकता है दृढ़ राजनीतिक संकल्प, प्रशासनिक सुव्यवस्था एवं ईमानदारी से कार्य कार्यन्वित कर कर्मठता से
कदम बढ़ाने की। फिर हम बिहार राज्य को शिक्षित, सामर्थ्यवान बनायेंगे जो भारत को विकसित एवं पूर्ण शिक्षित बनाने में सराहनीय योगदान देगा।
 वर्ष 2001 की जनगणना के आंकड़ों पर एक नजर
● 100 बच्चों में लगभग 66 बच्चे पांचवीं कक्षा तक विद्यालय छोड़ देते हैं। 6 से 17 वर्ष के 68 प्रतिशत बालक तथा 51 प्रतिशत बालिका ही विद्यालय जाते हैं।
● विद्यालय में नामांकित बच्चों की संख्या 1,08,02,761 है।
(i) नामांकित बालकों की संख्या- 70,57,098
(ii) नामांकित बालिकाओं की संख्या 37,45,663
● विद्यालय शिक्षा से वंचित बच्चों की संख्या 57,72,966 है।
(i) वंचित बालकों की संख्या-15,73,665
(ii) वंचित बालिकाओं की संख्या- 41,99,301
● विद्यार्थी शिक्षा देने से पलायन करने वाले अधिसंख्य बच्चे कक्षा 1 से 5 के होते हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या समाज के कमजोर वर्ग के बालकों एवं बालिकाओं की है।
● छीजन की स्थिति 2001 के अनुसार । से 5 तक के कुल बच्चे कुल- 58.95 प्रतिशत
(i) बालकों की स्थिति- 59.00 प्रतिशत
(ii) बालिका की स्थिति-58.81 प्रतिशत
●छीजन की स्थिति छठी से 8वीं तक कुल बच्चों की स्थिति-27.26 प्रतिशत
(i) बालकों की स्थिति- 25.70 प्रतिशत
(ii) बालिकाओं की स्थिति 31.03 प्रतिशत

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