भाषा और चिन्तन

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भाषा और चिन्तन

भाषा और चिन्तन

                              Language and Thought
CTET परीक्षा के विगत वर्षों के प्रश्न-पत्रों का विश्लेषण करने
से यह ज्ञात होता है कि इस अध्याय से वर्ष 2012 में
2 प्रश्न, 2013 में 2 प्रश्न, 2014 में 3 प्रश्न, 2015 में
3 प्रश्न तथा वर्ष 2016 में 2 प्रश्न पूछे गए हैं।
8.1 भाषा
भाषा (Language) भावों को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम है। मनुष्य
पशुओं से इसलिए श्रेष्ठ है, क्योकि उसके पास अभिव्यक्ति के लिए एक
ऐसी भाषा होती है, जिसे लोग समझ सकते है।
    भाषा बौद्धिक क्षमता को भी अभिव्यक्त करती है। बहुत से लोग वाणी और
भाषा दोनों का प्रयोग एक-दूसरे के पर्यायवाची के रूप में करते हैं, परन्तु
दोनों में बहुत अन्तर है।
हरलॉक ने दोनों शब्दों को निम्नलिखित रूप में स्पष्ट किया है
भाषा में बातचीत के वे सभी साधन आते हैं, जिसमें विचारों और भावों को
प्रतीकात्मक बना दिया जाता है, जिससे कि अपने विचारों और भावों को
दूसरे से अर्थपूर्ण ढंग से कहा जा सके। वाणी भाषा का एक स्वरूप है,
जिसमें अर्थ को दूसरों को अभिव्यक्त करने के लिए कुछ ध्वनियाँ या शब्द
उच्चारित किए जाते हैं। वाणी भाषा का एक विशिष्ट अंग है। भाषा व्यापक
सम्प्रत्यय है। वाणी, भाषा का एक माध्यम है।
8.1.1 बालकों में भाषा का विकास
बालक के विकास के विभिन्न आयाम होते हैं। भाषा का विकास
(Language Development) भी उन्हीं आयामों में से एक है। भाषा को
अन्य कौशलों की तरह अर्जित किया जाता है। यह अर्जन बालक के जन्म के
बाद ही प्रारम्भ हो जाता है। अनुकरण, वातावरण के साथ अनुक्रिया तथा
शारीरिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति की माँग इसमें
विशेष भूमिका निभाती है।
भाषा के भाग
अध्ययन के दृष्टिकोण से भाषा को निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है,
जो निम्न प्रकार हैं
1. स्वनिम (Phoneme) यह ध्वनि की सबसे छोटी इकाई होती है,
जिनका अपने आप में कोई विशेष अर्थ नहीं होता है, लेकिन यदि
हम स्वनिम को किसी शब्द के साथ लगा देते है तो ये उसका अर्थ
परिवर्तन कर देते हैं; जैसे―अ, आ, ई, त इत्यादि।
2. रूपिम (Morphem) रूपिम शब्द का छोटा रूप होता है। जब बच्चे
को स्वनिम का ज्ञान हो जाता है तो वह शब्दों को सीखना आरम्भ कर
देता है। बौद्धिक विकास पूर्ण न होने के कारण वह छोटे-छोटे शब्दों
को बोलना सीखता है। इनका स्वयं में भी अर्थ है।
उदाहरणस्वरूप―अच्छा, आना, तबला, आँख इत्यादि।
3. वाक्य-विन्यास (Syntactically) भाषा का नियम वाक्य-विन्यास
के अन्तर्गत आता है। वाक्य-विन्यास का अर्थ होता है― वाक्य की
संरचना से अर्थात् कर्ता, कर्म तथा क्रिया का उचित स्थान पर
निर्धारण। वाक्य-विन्यास के अन्तर्गत हर शब्द को क्रमिक रूप से
रखा जाता है। उदाहरण-“रमेश खाना खा रहा है।” इस वाक्य के
सभी शब्द क्रम में हैं। यदि हम लिखते हैं कि ‘खाना रमेश खा रहा
है’ तो यह वाक्य क्रम में न होने के कारण गलत है।
4. अर्थविन्यास (Semetic) जब वाक्य में दिए गए सभी शब्द अर्थपूर्ण
हों तो उसे अर्थ विन्यास कहा जाता है। उदाहरण के लिए–रमेश
कॉफी पीता है, इस वाक्य के सभी शब्द अर्थपूर्ण हैं, लेकिन इस
वाक्य को हम ऐसे नहीं बोल सकते कि रमेश कॉफी खाता है, क्योंकि
कॉफी को खाया नहीं पिया जाता है।
8.1.2 भाषा विकास की प्रारम्भिक अवस्था
इस अवस्था में एक तरह से बालक ध्वनि संकेतों से युक्त भाषा को समझने और
प्रयोग करने के लिए स्वयं को तैयार करता हुआ प्रतीत होता है, जिसकी
अभिव्यक्ति उसकी निम्न प्रकार की कोशिश तथा क्रियाओं के रूप में होती है
• सबसे पहले चरण के रूप में बालक जन्म लेते ही रोने, चिल्लाने की कोशिश
करता है।
• रोने-चिल्लाने की कोशिशों के साथ ही वह अन्य ध्वनि या आवाजें भी
निकालने लगता है। ये ध्वनियाँ पूर्णतः स्वाभाविक, स्वयं द्वारा उत्पन्न एवं
प्राकृतिक होती हैं, इन्हें सीखा नहीं जाता।
• उपरोक्त क्रियाओं के बाद बालकों में बड़बड़ाने की क्रियाएँ तथा कोशिश
शुरू हो जाती है। इस बड़बड़ाने के माध्यम से बालक स्वर तथा व्यंजन
ध्वनियों के अभ्यास का अवसर पाते हैं।
• बालक कुछ भी दूसरों से सुनते हैं तथा जैसा उनकी समझ में आता है उसी
रूप में वे उन्हीं ध्वनियों को किसी-न-किसी रूप में दोहराते हैं। इनके द्वारा
स्वरों जैसे अ, ई, उ, ऐ इत्यादि को व्यंजनों त, म, न, क इत्यादि से पहले
उच्चरित किया जाता है।
• हाव-भाव (Expression) तथा इशारों की भाषा भी बालकों को धीरे-धीरे
समझ में आने लगती है। इस अवस्था में वे प्रायः एक-दो स्वर-व्यंजन
ध्वनियाँ निकाल कर उसकी पूर्ति अपने हाव-भाव तथा कोशिशों से करते
दिखाई देते हैं।
8.1.3 भाषा सीखने के विभिन्न साधन
मनोवैज्ञानिकों ने भाषा सीखने के अनेक साधन बताए हैं, जो इस प्रकार हैं
1. कहानी सुनना (Story Listening) बालक अपने माता-पिता तथा
परिवार के अन्य सदस्यों से कहानियाँ सुनता है, जिनकी सहायता से
वह बोलना सीखता है।
2. प्रश्नोत्तर के द्वारा (Questionnaire) बालक स्वभाव से ही जिज्ञासु
प्रवृत्ति का होता है। उसके मन में कई प्रकार के प्रश्न उठते है, जिन्हें
वह अपने घर में रहने वाले सदस्यों से पूछता है तथा उनसे उत्तर
पाता है। इस प्रक्रिया के अन्तर्गत बालकों के ज्ञान के अतिरिक्त भाषा
का भी विकास होता है।
3. अनुकरण (Imitation) इसका अर्थ नकल करना होता है। बालक
अपने घर के सदस्यों द्वारा बोले गए वाक्य का अनुकरण करता है तथा
इस माध्यम से वह अपनी भाषा का विकास करता है।
4. बात-चीत (Conversation) बातचीत के माध्यम से भी भाषा का
विकास होता है। बालकों में बात करने की प्रवृत्ति अधिक पाई जाती है।
8.1.4 भाषा का महत्त्व
1. इच्छाओं और आवश्यकताओं की सन्तुष्टि (Satisfaction of
Needs and Desire) भाषा व्यक्ति को अपनी आवश्यकता, इच्छा,
पीड़ा अथवा मनोभाव दूसरे के समक्ष व्यक्त करने की क्षमता प्रदान
करती है, जिससे दूसरा व्यक्ति सरलता से उसकी आवश्यकताओं को
समझकर उससे सम्बन्धित समाधान प्रदान करता है।
2. ध्यान को आकर्षित करने के लिए (For Seeking Attention) सभी
बालक चाहते हैं कि उनकी ओर लोग ध्यान दें इसलिए वे अभिभावकों
से प्रश्न पूछकर, कोई समस्या प्रस्तुत करके तथा विभिन्न तरीकों का
प्रयोग कर उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
3. सामाजिक सम्बन्ध के लिए (For Social Relation) भाषा के माध्यम
से ही कोई व्यक्ति समाज के साथ आपसी ताल-मेल विकसित कर पाता है।
भाषा के जरिए अपने विचारों को अभिव्यक्त कर समाज में अपनी भूमिका
निर्धारित करता । अन्तर्मुखी बालक समाज से कम अन्त:क्रिया करते हैं,
इसलिए उनका पर्याप्त सामाजिक विकास नहीं होता।
4. सामाजिक मूल्यांकन के लिए महत्त्व (Importance for Social
Evaluation) बालक समाज के लोगों के साथ किस तरह का व्यवहार
करता है? कैसे बोलता है? इन प्रश्नों के उत्तर के माध्यम से उसका
सामाजिक मूल्यांकन होता है।
5. शैक्षिक उपलब्धि का महत्त्व (Importance of Educational
Achievement) भाषा का सम्बन्ध बौद्धिक क्षमता से है। यदि बालक
अपने विचारों को भाषा के जरिए अभिव्यक्त करने में सक्षम नहीं होता,
तो इसका अर्थ है कि उसकी शैक्षिक उपलब्धि पर्याप्त नहीं है।
6. दूसरों के विचारों को प्रभावित करने के लिए (For Effecting
Other’s Ideas) जिन बच्चों की भाषा प्रिय, मधुर एवं ओजस्वी होती है
वे अपने समूह, परिवार अथवा समाज के व्यक्तियों को प्रभावित करते
हैं। लोग उन्हीं को अधिक महत्त्व देते हैं, जिनका भाषा व्यवहार
प्रभावपूर्ण होता है।
8.1.5 भाषा विकास के सिद्धान्त
1. बैण्ड्यूरा का सिद्धान्त
बैण्ड्यूरा ने अपने सामाजिक सीखने के सिद्धान्त में अनुकरण पर बलपूर्वक
कहा कि बालक अपने परिवार तथा आस-पड़ोस में प्रयोग की जाने वाली
भाषा को अनुकरण या नकल के माध्यम से सीखता है। बालकों को जिस
प्रकार का वाक्य एवं शब्द सुनने को मिलता है, उसे वह आसानी से सीख
लेता है। एल्बर्ट बैन्ड्रा ने इस बात पर भी बल दिया कि प्रतिरूपण
(मॉडलिंग) भी बच्चों के सीखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
2. परिपक्वता का सिद्धान्त
परिपक्वता (Maturity) का तात्पर्य है कि भाषा अवयवों एवं स्वरों पर
नियन्त्रण होना। बोलने में जिह्वा, गला, तालु, होठ, दाँत तथा स्वर यन्त्र आदि
जिम्मेदार होते है इनमें किसी भी प्रकार की कमजोरी या कमी वाणी को
प्रभावित करती है। इन सभी अंगों में जब परिपक्वता होती है, तो भाषा पर
नियन्त्रण होता है और अभिव्यक्ति अच्छी होती है।
3. अनुबन्धन का सिद्धान्त
भाषा विकास में अनुबन्धन (Conditional) या साहचर्य का बहुत योगदान
है। शैशवावस्था में जब बच्चे शब्द सीखते हैं, तो सीखना अमूर्त नहीं होता
है, बल्कि किसी मूर्त वस्तु से जोड़कर उन्हें शब्दों की जानकारी दी जाती
है। इसी तरह बच्चे विशिष्ट वस्तु या व्यक्ति से साहचर्य स्थापित करते हैं
और अभ्यास हो जाने पर सम्बद्ध वस्तु या व्यक्ति की उपस्थिति पर
सम्बन्धित शब्द से सम्बोधित करते हैं।
4. अनुकरण का सिद्धान्त
चैपिनीज, शी, कर्टी तथा वैलेण्टाइन आदि मनोवैज्ञानिकों ने अनुकरण
(Imitation) के द्वारा भाषा सीखने पर अध्ययन किया है। इनका मत है कि
बालक अपने परिवारजनों तथा साथियो की भाषा का अनुकरण करके सीखते
है। जैसी भाषा जिस समाज या परिवार में बोली जाती है बच्चे उसी भाषा
को सीखते हैं। यदि बालक के समाज या परिवार में प्रयुक्त भाषा में कोई
दोष हो, तो उस बालक की भाषा में भी दोष परिलक्षित होता है।
5. चोमस्की का भाषा अर्जित करने का सिद्धान्त
चोमस्की का कहना है कि बच्चे शब्दों की निश्चित संख्या से कुछ निश्चित
नियमों का अनुकरण करते हुए वाक्यों का निर्माण करना सीख जाते हैं। इन
शब्दों से नए-नए वाक्यों एवं शब्दों का निर्माण होता है। इन वाक्यों का
निर्माण बच्चे जिन नियमों के अन्तर्गत करते हैं, उन्हें चोमस्की ने जेनेरेटिव
ग्रामर की संज्ञा प्रदान की है।
8.1.6 भाषा विकास को प्रभावित करने वाले
विभिन्न कारण
1. स्वास्थ्य (Health) जिन बच्चों का स्वास्थ्य जितना अच्छा होता है
उनमें भाषा के विकास की गति उतनी तीव्र होती है।
2. बुद्धि (Intelligence) हरलॉक के अनुसार, जिन बच्चों का बौद्धिक
स्तर उच्च होता है उनमें भाषा विकास अपेक्षाकृत कम बुद्धि वालों से
अच्छा होता है। टर्मन, फिशर एवं यम्बा का मानना है कि तीव्र बुद्धि
बालकों का उच्चारण और शब्द भण्डार अधिक होता है।
3. सामाजिक-आर्थिक स्थिति (Socio Economic Condition)
बालकों की भाषा का विकास प्रत्यक्ष रूप से उनकी सामाजिक
अंतर्किया, माता-पिता, सहयोगियों, मित्र एवं उनके देखभाल करने
वालों पर निर्भर करता है। बच्चे वही बोलते हैं जो सोचते एवं सुनते
है। इस प्रकार से वे नए शब्दों का संग्रह करते हैं। बालकों का
सामाजिक-आर्थिक स्तर भी भाषा विकास को प्रभावित करता है।
यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्र में पढ़ने वाले बालकों की शाब्दिक
क्षमता शहरी या अन्य पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले बालकों से कम
होती है।
4. परिवार का आकार (Size of Family) छोटे परिवार में बालक
की भाषा का विकास बड़े आकार के परिवार से अच्छा होता है,
क्योकि छोटे आकार के परिवार में माता-पिता अपने बच्चे के
प्रशिक्षण में उनसे बातचीत के जरिए अधिक ध्यान देते हैं।
5. बहुजन्म (Multi-birth) कुछ ऐसे अध्ययन हुए है, जिनसे
प्रमाणित होता है कि यदि एक साथ अधिक सन्ताने उत्पन्न होती
हैं, तो उनमें भाषा विकास विलम्ब से होता है। इसका कारण है
कि बच्चे एक-दूसरे का अनुकरण करते हैं और दोनों ही
अपरिपक्व होते हैं। उदाहरण के लिए यदि एक बच्चा गलत
उच्चारण करता है तो उसी की नकल करके दूसरा भी वैसा ही
उच्चारण करेगा।
6. द्वि-भाषावाद (Billingualism) यदि द्वि-भाषी परिवार है,
उदाहरण के लिए यदि पिता हिन्दी बोलने वाला और माँ शुद्ध
अंग्रेजी बोलने वाली हो, तो ऐसे में बच्चों का भाषा विकास
प्रभावित होता है। वह दो भाषा बोलना सीख लेता है।
7. संवेगात्मक तनाव (Emotional Stress) जिन बच्चों के
संवेगो या भावों का कठोरता से दमन कर दिया जाता है ऐसे
बच्चों का भाषा विकास देर से होता है।
8. व्यक्तित्व (Personality) फुर्तीले, चुस्त (Active) और
बहिर्मुखी (Extrovert) स्वभाव वाले बच्चों का भाषा विकास
अन्तर्मुखी स्वभाव के बच्चों की अपेक्षा अधिक जल्दी और
बेहतर होता है।
9. प्रशिक्षण विधि (Training Method) प्रशिक्षण विधि भी भाषा
विकास को प्रभावित करती है। भाषा के बारे में यदि सैद्धान्तिक
रूप से शिक्षा दी जाए एवं उनका प्रयोग व्यावहारिक रूप से न
किया जाए तो उस भाषा में अभिव्यक्ति कौशल का पर्याप्त
विकास नहीं हो पाता।
                                     भाषा विकार
• यदि बालक अपने स्वर यन्त्रों पर नियन्त्रण नहीं रख पाता, तो उसमें
भाषा दोष उत्पन्न हो जाता है।
• भाषा दोष से ग्रसित बालक समाज से कतराने लगते हैं। उनमें हीनता
की भावना का विकास हो जाता है और ये सामान्यतः अन्तर्मुखी
(ontrovrt) स्वभाव के हो जाते हैं।
• भाषा दोष शैक्षिक विकास को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।
मुख्यतः भाषा दोष निम्नलिखित प्रकार के होते हैं
-ध्वनि परिवर्तन                     – अस्पष्ट उच्चारण
-हकलाना                             – तुतलाना
-तीव्र अस्पष्ट वाणी
• समस्या समाधान के लिए चिन्तन इस उदाहरण से स्पष्ट होता है मान
लीजिए कि आप अपने नए विद्यालय समय पर पहुँचने के लिए अपने
घर से विद्यालय तक का सबसे छोटा रास्ता ढूँढ रहे हैं। आपके चयन
को कई कारक निर्देशित कर सकते हैं; जैसे– सड़क की दशा, स्कूल
का समय, यातायात का घनत्व, सड़क पर चलते हुए सुरक्षा इत्यादि।
• अन्ततः इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए आप सबसे उत्तम
मार्ग का ही निर्णय लेते हैं। इसलिए इस जैसी साधारण सी समस्या
के लिए भी चिन्तन आवश्यक है। इस समस्या का समाधान हमारे
पर्यावरण एवं पूर्व अनुभव से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर होता है।
8.2 चिन्तन
चिन्तन (Thought) एक ऐसी गतिविधि है, जो मानव के मस्तिष्क में हमेशा
गतिशील रहती है, चिन्तन की क्रिया तब आरम्भ होती है, जब व्यक्ति समस्याओं
से घिरा होता है तथा उसके समाधान के लिए विभिन्न साधनों के बारे में सोचता
है। चिन्तन एक विश्लेषणात्मक पद्धति है तथा मानव स्वभाव की एक सामान्य
प्रक्रिया है। चिन्तन कई प्रकार की मानसिक संरचनाओं पर निर्भर करता है,
जैसे―संकल्पना एवं तर्क।
8.2.1 संकल्पना
• संकल्पना (Concepts) चिन्तन का एक मुख्य तत्त्व है। संकल्पनाएँ वस्तुओं,
क्रियाओं, विचारों व जीवित प्राणियों का प्रतिनिधित्व करती है।
• संकल्पना के अन्तर्गत किसी के लक्षण, जैसे-मीठा, खट्टा, किसी के भाव,
जैसे―क्रोध, भय तथा दो या अधिक वस्तुओं के बीच सम्बन्ध जैसे–उससे
अच्छा, इससे खराब आदि की बात की जाती है।
• संकल्पनाएँ ऐसी मानसिक संरचनाएँ हैं, जो हमारे ज्ञान को क्रमबद्ध रूप प्रदान
करती हैं। हम उनका सीधे निरीक्षण नहीं कर सकते है, लेकिन हम उनका
व्यवहार द्वारा अनुमान लगा सकते हैं।
• मनुष्य होने के कारण हमारे पास वस्तुओं, घटनाओं या प्रत्यक्ष की गई बातों के
आवश्यक लक्षणों को अमूर्त रूप में धारण करने की शक्ति होती है।
8.2.2 तर्क
• तर्क (Arguments) भी चिन्तन का एक मुख्य पक्ष है। इस प्रक्रिया में अनुमान
संलग्न है। तर्क, तर्कपूर्ण विचार व समस्या के समाधान में उपयोगी होता है।
• यह उद्देश्यपूर्ण होता है और तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाले जाते हैं व
निर्णय लिए जाते हैं।
• तर्क में हम पर्यावरण से प्राप्त जानकारी और मस्तिष्क में एकत्र सूचनाओं का
कतिपय नियमों के अन्तर्गत उपयोग करते हैं।
• तर्क दो प्रकार का होता है-निगमन और आगमन। निगमन तर्क में हम पहले
दिए गए कथन के आधार पर निष्कर्ष निकालने का प्रयास करते है, जबकि
आगमन तर्क में हम उपलब्ध प्रमाण से निष्कर्ष निकालने से आरम्भ करते हैं।
• अधिकतर वैज्ञानिक तर्क आगमन प्रकृति के होते हैं। वैज्ञानिक हों या साधारण
व्यक्ति कुछ घटनाओं के आधार पर सभी के लिए कुछ सामान्य नियम होते
तर्क पर बल देते हैं।
8.2.3 सृजनात्मक चिन्तन
• सृजनात्मक चिन्तन (Creative Thought), चिन्तन की एक नवीनतम तकनीक
है। यह बालकों में किसी विषय, तथ्य, घटना, वस्तु इत्यादि के बारे में सोचने
का नवीन दृष्टिकोण विकसित करता है।
• सृजनात्मक चिन्तन खोज, आविष्कार, मौलिकता को जन्म देती है, इसे अपसारी
चिन्तन (Divergent thinking) भी कहा जाता है। यह विचार किसी व्यक्ति के
मन-मस्तिष्क में अचानक ही सृजित होता है।
• शिक्षण की प्रक्रिया में अध्यापक विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे
विषय-वस्तु के बारे में उन्हें सृजनशील बनने की ओर प्रोत्साहित करते है।
• यह चिन्तन किसी भी व्यक्ति में हो सकता है, चाहे वह खिलाड़ी हो, डॉक्टर
हो, कलाकार हो। यह चिन्तन कार्य करने की वैज्ञानिक तकनीक को जन्म देती है।
                                          अभ्यास प्रश्न
1. यदि किसी बालक द्वारा अभिव्यक्ति के लिए
प्रयुक्त भाषा वाक्य संरचना की दृष्टि से तो
सही है, किन्तु अर्थ की दृष्टि से गलत है,
तो इसे सुधारने के लिए आप क्या करेंगे?
(1) उसे उन वाक्यों से सम्बन्धित व्याकरण के बारे
में बताएँगे।
(2) उसे स्वयं उन वाक्यों को सही से बोलकर
बताएँगे।
(3) उसे सही वाक्य संरचना के बारे में उसके
साथी से ज्ञात करने के लिए कहेंगे।
(4) उसकी शिकायत उसके अभिभावक से करेंगे
और उसके अभिभावक को यह सलाह देंगे कि
अपने बच्चे को सही से बोलना सिखाएँ।
2. ‘वह नित्य गाने की कसरत करता है’ वाक्य
(1) वाक्य-विन्यास की दृष्टि से सही है, लेकिन
अर्थ-विज्ञान की दृष्टि से गलत है।
(2) अर्थ-विज्ञान की दृष्टि से सही है, लेकिन
वाक्य-विन्यास की दृष्टि से गलत है।
(3) अर्थ-विज्ञान एवं वाक्य-विन्यास दोनों की दृष्टि
से सही है।
(4) अर्थ-विज्ञान एवं वाक्य-विन्यास दोनों की दृष्टि
से गलत है।
3. निम्नलिखित में से कौन-से युग्म के सही
होने की सम्भावना सबसे कम है?
(1) बच्चे भाषा के बारे में     चोमस्की
निश्चित ज्ञान के साथ
प्रवेश करते हैं
(2) भाषा और विचार प्रारम्भ में     वाइगोत्स्की
दो भिन्न गतिविधियाँ हैं
(3) भाषा विचार पर।              पियाजे
आधारित है
(4) भाषा वातावरण में एक      बी. एफ. स्किनर
उद्दीपक है
4. ‘दौड़ते हुए स्कूल जा रहा था राम का भाई’
वाक्य
(1) वाक्य-विन्यास की दृष्टि से सही है, लेकिन
अर्थ-विज्ञान की दृष्टि से गलत है।
(2) अर्थ-विज्ञान की दृष्टि से सही है, लेकिन
वाक्य-विन्यास की दृष्टि से गलत है।
(3) अर्थ-विज्ञान एवं वाक्य-विन्यास दोनों की दृष्टि
से सही है।
(4) अर्थ-विज्ञान एवं वाक्य-विन्यास दोनों की दृष्टि
से गलत है।
5. वाक्य की सार्थक लघुतम इकाई, जिसमें
एक या अधिक ध्वनियों का प्रयोग हुआ हो,
……….कहलाता है।
(1) रूपिम
(2) वाक्यांश
(3) मुहावरा
(4) स्वनिम
6. परिपक्वता का सिद्धान्त सम्बन्धित है
(1) भाषा विकास से
(2) सृजनात्मकता से
(3) मूल्यांकन से
(4) समावेशी शिक्षा
7. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक भाषा
विकास को प्रभावित करता है?
A. स्वास्थ्य
B. परिवार का आकार
C.लिंगीय भिन्नता
D. परिपक्वता
(1) A और B
(2) C और D
(3) B और C
(4) ये सभी
8. निम्नलिखित में से कौन-सी एक भाषा
दोष/विकार से सम्बन्धित नहीं है?
(1) ध्वनि परिवर्तन
(2) तुतलाना
(3) हकलाना
(4) स्पष्ट उच्चारण
9. निम्नलिखित में से कौन-सा तरीका भाषा
सीखने का साधन है?
(1) कहानी सुनना
(2) प्रश्नोत्तर के माध्यम से
(3) अनुकरण द्वारा
(4) उपरोक्त सभी
10. यदि आपकी कक्षा में एक छात्र दोषयुक्त है,
तो आप किसी सामान्य छात्र की तुलना में
उसमें क्या पाएँगे?
(1) उस छात्र का अपने स्वर यन्त्रों पर नियन्त्रण
नहीं है।
(2) वह कक्षा में अन्य छात्रों की तुलना में अधिक
बोलता है।
(3) भाषा दोष के कारण वह अधिक शैक्षिक
उपलब्धियाँ हासिल करता है।
(4) वह कक्षा में किसी अन्य छात्र से पिछड़ा
नहीं है।
11. चिन्तन के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर
विचार कीजिए
A. चिन्तन का सम्बन्ध वास्तविकता से
होता है।
B. चिन्तन तर्क प्रधान होता है।
C. चिन्तन के लिए किसी समस्या का होना
आवश्यक नहीं है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/है?
(1) केवल A
(2) केवल B
(3) केवल C
(4) ये सभी
12. किसी बच्चे के चिन्तन में आयु के बढ़ने के
साथ-साथ किसकी प्रधानता बढ़ती है?
(1) तर्क की
(2) सामान्यीकरण
(3) आत्मकेन्द्रीकरण
(4) जीववाद की
13. किसी बच्चे में चिन्तन का प्रमुख कारण क्या
A. समस्या समाधान करना
B. निर्णय लेने की क्षमता
C. वातावरण के प्रति चैतन्य समायोजन
करने हेतु
(1) केवल
(2) A और B
(3) केवल
(4) ये सभी
14. ‘यदि पृथ्वी पर वर्षा होना सदा के लिए
रुक जाए तो इसका परिणाम क्या होगा?’
इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर के लिए
……. की आवश्यकता पड़ती है।
(1) अभिसारी चिन्तन
(2) समस्या समाधान
(3) सृजनात्मक चिन्तन
(4) सामान्य चिन्तन
15. ‘यदि किसी व्यक्ति के पास पाँच आम हैं,
इसमें से वह दो आम अपने एक मित्र को
तथा एक आम अपनी पत्नी को देता है, तो
उसके पास कितने आम शेष बचेंगे?’ इस
प्रकार के प्रश्नों के उत्तर के लिए जिस
चिन्तन की आवश्यकता होती है, उसे
…………कहा जाता है।
(1) अभिसारी चिन्तन
(2) सृजनात्मक चिन्तन
(3) मूल्यांकन
(4) आलोचना
16. सृजनात्मक चिन्तन होता है
(1) उच्च अपसारी चिन्तन
(2) अभिसारी चिन्तन
(3) मूल्यांकन
(4) भाषा विकास
17. निम्नलिखित में से कौन-सी
समस्या समाधान की वैज्ञानिक पद्धति का
पहला चरण है?
(1) माक्कल्पना का निर्माण करना
(2) प्राक्कल्पना का परीक्षण करना
(3) समस्या के प्रति जागरूकता
(4) प्रासंगिक जानकारी को एकत्र करना
                            विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न
18. चिन्तन के सूचना प्रक्रमण सिद्धान्त में
निम्नलिखित चरण आते हैं         [CTET Nov 2012]
A.प्रतिक्रिया क्रियान्वयन
B.प्रतिक्रिया चयन
C. पूर्व-प्रक्रमण
D. श्रेणीकरण
उपरोक्त चरणों का सही क्रम है
(1) B,D,C,A
(2) C,A,D,B
(3) C,B,DA
(4) C,D,B,A
19. भाषा में अर्थ की सबसे छोटी इकाई
………….है।                [CTET Nov 2012]
(1) स्वनिम
(2) संकेत प्रयोग विज्ञान (पैगमैटिक्स)
(3) वाक्य
(4) रूपिम
20. थ, फ, च ध्वनियाँ हैं (CTET July 2013]
(1) स्वनिम
(2) रूपिम
(3) लेखीम
(4) शब्दिम
21. भाषा विकास में सहयोग करने का कौन-सा
तरीका गलत है?                  [CTET July 2013]
(1) बच्चे को बिना टोके प्रकरण पर बात करना
(2) उसकी अपनी भाषा के प्रयोग को अमान्य
करना
(3) उसके प्रयोगों का समर्थन करना
(4) भाषा के प्रयोग के अवसर उपलब्ध करना
22. एक बच्चा अपनी मातृभाषा सीख रहा है व
दूसरा बच्चा वही भाषा द्वितीय भाषा के रूप
में सीख रहा है। दोनों निम्नलिखित में से
कौन-सी समान प्रकार की त्रुटि कर सकते
है?                     [CTET Feb 2014]
(1) अधिकाधिक सामान्यीकरण
(2) सरलीकरण
(3) विकासात्मक
(4) अत्यधिक संशुद्धता
23. ध्वनि सम्बन्धी जागरूकता निम्नलिखित में
से किस क्षमता से सम्बन्धित है?         [CTET Sept 2014]
(1) ध्वनि संरचना पर चिन्तन करना व उसमें
हेर-फेर करना
(2) सही-सही वह धाराप्रवाह बोलना
(3) जानना, समझना व लिखना
(4) व्याकरण के नियमों में दक्ष होना
24. एल्बर्ट बैन्ड्यूरा के सामाजिक अधिगम
सिद्धान्त के अनुसार निम्न में से कौन-सा
सही है?                [CTET Sept 2014]
(1) खेल अनिवार्य है और उसे विद्यालय में
प्राथमिकता दी जानी चाहिए
(2) बच्चों के सीखने के लिए प्रतिरूपण (मॉडलिंग)
एक मुख्य तरीका है
(3) अनसुलझा संकट बच्चे को नुकसान पहुँचा
सकता है।
(4) संज्ञानात्मक विकास सामाजिक विकास से
स्वतन्त्र है
25. आर्जव तर्क देता है कि भाषा विकास
व्यक्ति की नैसर्गिक प्रवृत्ति से प्रभावित होता
है, जबकि सोनाली महसूस करती है कि
यह परिवेश से प्रभावित होता है। आर्जव
और सोनाली के बीच यह चर्चा किस विषय
में है?                     [CTET Feb 2015]
(1) चुनौतीपूर्ण तथा संवेदनशील भावना
(2) स्थिरता तथा अस्थिरता पर बहस
(3) सतत तथा असतत अधिगम
(4) प्रकृति तथा पालन-पोषण पर वाद-विवाद
26. भारत में भाषिक विभिन्नता बहुत है। इस
सन्दर्भ में विशेषकर कक्षा I और II के
प्राथमिक स्तर पर बहुभाषिक कक्षाओं के
बारे में सर्वथा उपयुक्त कथन है।        [CTET Sept 2016]
(1) विद्यालय में उन्हीं बच्चों को प्रवेश दिया जाए
जिनकी मातृभाषा वही हो, जो शिक्षा के लिए
अपनाई जा रही हो।
(2) शिक्षक को सभी भाषाओं का सम्मान करना
चाहिए और सभी भाषाओं में अभिव्यक्ति के
लिए बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
(3) जो बच्चे कक्षा में मातृभाषा का उपयोग करते
हैं अध्यापक को उनकी उपेक्षा करनी चाहिए।
(4) शिक्षार्थियों को अपनी मातृभाषा या स्थानीय
भाषा का प्रयोग करने पर दण्डित किया जाए।
27. भारत में भाषिक विभिन्नता बहुत है। इस
सन्दर्भ में विशेषकर कक्षा I और II के
प्राथमिक स्तर पर बहुभाषिक कक्षाओं के
बारे में सर्वथा उपयुक्त कथन है।     [CTET Sept 2015]
(1) विद्यालय में उन्हीं बच्चों को प्रवेश दिया जाए
जिनकी मातृभाषा वही हो जो शिक्षा के लिए
अपनाई जा रही हो
(2) शिक्षक को सभी भाषाओं को सम्मान करना
चाहिए और सभी भाषाओं में अभिव्यक्ति के
लिए बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए
(3) जो बच्चे कक्षा में मातृभाषा का उपयोग करते
हैं अध्यापक को उनकी उपेक्षा करनी चाहिए
(4) शिक्षार्थियों को अपनी मातृभाषा या स्थानीय
भाषा का प्रयोग करने पर दण्डित किया जाए
28. भारत में अधिकांश कक्षाएँ बहुभाषी होती हैं
इसे शिक्षक द्वारा ………… के रूप में देखा
जाना चाहिए।              [CTET Feb 2016]
(1) परेशानी
(2) समस्या
(3) संसाधन
(4) बाधा
29. अपने चिन्तन में अवधारणात्मक परिवर्तन
लाने हेतु शिक्षार्थियों को सक्षम बनाने के
लिए शिक्षक को               [CTET Feb 2016]
(1) उन बच्चों को पुरस्कार देना चाहिए, जिन्होंने
अपने चिन्तन में परिवर्तन किया है।
(2) बच्चों को स्वयं चिन्तन करने के लिए
हतोत्साहित करना चाहिए और उनसे कहना
चाहिए कि वे शिक्षिका को सुनें और उसका
अनुपालन करें।
(3) व्याख्यान के रूप में व्याख्या प्रस्तुत करनी
चाहिए।
(4) स्पष्ट और आश्वस्त करने वाली व्याख्या देनी
चाहिए तथा शिक्षार्थियों के साथ चर्चा करनी
चाहिए।
                                       उत्तरमाला
1. (2) 2. (1) 3. (3) 4. (2) 5. (1) 6. (1) 7. (4) 8. (4) 9. (4) 10. (1)
11. (4) 12. (1) 13. (4) 14. (3) 15. (1) 16. (1) 17. (3) 18. (4)
19. (1) 20. (1) 21. (2) 22. (3) 23. (3) 24. (4) 25. (2) 26. (2)
27. (2) 28. (3) 29. (4)
                                                ★★★

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