वैयक्तिक विभिन्नता

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वैयक्तिक विभिन्नता

वैयक्तिक विभिन्नता

                               Individual Difference
CTET परीक्षा के विगत वर्षों के प्रश्न-पत्रों को देखने से यह ज्ञात
होता है कि इस अध्याय से वर्ष 2012 में 2 प्रश्न, 2013 में 2
प्रश्न 2014 में 1 प्रश्न, 2015 में 2 प्रश्न तथा वर्ष 2016 में
2 प्रश्न पूछे गए हैं। इस अध्याय में शिक्षा के क्षेत्र में वैयक्तिक
विभिन्नता से सर्वाधिक प्रश्न पूछे गये हैं
10.1 वैयक्तिक विभिन्नता : अर्थ एवं स्वरूप
प्रकृति का नियम है कि संसार में कोई भी दो व्यक्ति पूर्णतया एक-जैसे नहीं हो
सकते, यहाँ तक कि जुड़वाँ बच्चों में भी कई समानताओं के बावजूद कई अन्य
प्रकार की असमानताएँ दिखाई पड़ती हैं। जुड़वाँ बच्चे शारीरिक बनावट से तो
एक समान दिख सकते हैं, किन्तु उनके स्वभाव, बुद्धि, शारीरिक-मानसिक
क्षमता आदि में अन्तर होता है। भिन्न-भिन्न व्यक्तियों में इस प्रकार की
विभिन्नता को ही वैयक्तिक विभिन्नता कहा जाता है।
    स्किनर के अनुसार, “वैयक्तिक विभिन्नताओं से हमारा तात्पर्य व्यक्तित्व के
उन सभी पहलुओं से है, जिनका मापन व मूल्यांकन किया जा सकता
है।”
    जेम्स ड्रेवर के अनुसार, “कोई व्यक्ति अपने समूह के शारीरिक तथा
मानसिक गुणों के औसत से जितनी भिन्नता रखता है, उसे वैयक्तिक
भिन्नता कहते हैं।”
     टॉयलर के अनुसार, “शरीर के रूप-रंग, आकार, कार्य, गति, बुद्धि, ज्ञान,
उपलब्धि, रुचि, अभिरुचि आदि लक्षणों में पाई जाने वाली भिन्नता को
वैयक्तिक भिन्नता कहते हैं।”
प्रत्येक शिक्षार्थी स्वयं में विशिष्ट है। इसका अर्थ है कि कोई भी दो शिक्षार्थी
अपनी योग्यताओं, रुचियों और प्रतिभाओं में एकसमान नहीं होते।
10.2 वैयक्तिक विभिन्नताओं के प्रकार
मनोवैज्ञानिकों ने वैयक्तिक विभिन्नताओं को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत
किया है, जो निम्न प्रकार हैं।
1. भाषा के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नताएँ
• अन्य कौशलों की तरह ही भाषा भी एक प्रकार का कौशल है। प्रत्येक
व्यक्ति में भाषा के विकास की भिन्न-भिन्न अवस्थाएँ पाई जाती हैं। यह
विकास बालक के जन्म के बाद ही प्रारम्भ हो जाता है। अनुकरण,
वातावरण के साथ अनुक्रिया तथा शारीरिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक
आवश्यकताओं की पूर्ति की माँग इसके विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका
निभाती है। इसका विकास धीरे-धीरे परन्तु एक निश्चित क्रम में होता है।
• कोई बालक भाषा के माध्यम से अपने विचारों को अभिव्यक्त करने में
अधिक कुशल होता है, जबकि कुछ बालक इस मामले में उतने कुशल
नहीं होते।
2. लिंग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता
• सामान्यत: स्त्रियाँ कोमल प्रकृति की होती है, किन्तु अधिगम के क्षेत्रों में
बालकों एवं बालिकाओं में भिन्नता नहीं होती।
• स्त्रियों की शारीरिक संरचना पुरुषों से अलग होती है। सामान्यतः पुरुष,
स्त्रियों से अधिक लम्बे होते है।
3. बुद्धि के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता
• परीक्षणों के आधार पर ज्ञात हुआ है कि सभी व्यक्तियों की बुद्धि
एकसमान नहीं होती। बालकों में भी बुद्धि के आधार पर वैयक्तिक
विभिन्नता दिखाई पड़ती है।
• कुछ बालक अपनी आयु की अपेक्षा अधिक बुद्धिमत्ता को प्रदर्शित करते
हैं, इसके विपरीत कुछ बच्चों में सामान्य बौद्धिक क्षमता पाई जाती है।
• बुद्धि-परीक्षण के आधार पर यह ज्ञात किया जा सकता है कि कोई
बालक किसी अन्य बालक से कितना अधिक बुद्धिमान है?
4. परिवार एवं समुदाय के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता
• मानव के व्यक्तित्व के विकास पर उसके परिवार एवं समुदाय का स्पष्ट
प्रभाव पड़ता है। इसलिए समुदाय के प्रभाव को वैयक्तिक विभिन्नता में
भी देखा जा सकता है। अच्छे परिवार एवं समुदाय से सम्बन्ध रखने
वाले बच्चों का व्यवहार सामान्यतः अच्छा होता है।
• यदि किसी समुदाय में किसी प्रकार के अपराध करने की प्रवृत्ति हो, तो
इसका कुप्रभाव उस समुदाय के बच्चों पर भी पड़ता है।
• यद्यपि आर्थिक-सामाजिक स्तर तथा बुद्धि-लब्धि का सम्बन्ध तो है,
किन्तु यह बहुत उच्च स्तर का नहीं है। इन दोनों में सह-सम्बन्ध अवश्य
पाया गया है, किन्तु यह नहीं कहा जा सकता कि निम्न
सामाजिक-आर्थिक समूह से आने वाले बच्चे कम बुद्धिमान एवं उच्च
सामाजिक-आर्थिक समूह के बच्चे अधिक बुद्धिमान होते हैं।
• इसके विपरीत निम्न स्तर के आर्थिक एवं सामाजिक समूह में अनेक
उच्च बुद्धि-लब्धि वाले बालक पाए जाते हैं और उच्च स्तर के
आर्थिक-सामाजिक समूह में निम्न बुद्धि-लब्धि वाले बालक पाए जाते हैं।
• बालकों के पोषण पर परिवार एवं समुदाय का प्रभाव अवश्य पड़ता है
एवं इस प्रकार की विभिन्नता में परिवार एवं समुदाय की भूमिका
महत्त्वपूर्ण होती है।
5. जाति से सम्बन्धित वैयक्तिक विभिन्नता
समाज में जाति एवं नस्ल सम्बन्धित विभिन्नताएँ पाई जाती है, इन्हें दूर
करने के लिए व्यक्ति को पूर्वाग्रहों, रूढ़ियों, पूर्वधारणाओं तथा
नकारात्मक मनोवृत्तियों (Attitude) से हटकर सोचना चाहिए।
6. संवेग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता
• संवेगात्मक विकास विभिन्न बालकों में विभिन्नता लिए हुए होता है,
जबकि यह भी सत्य है कि मोटे तौर पर संवेगात्मक विशेषताएँ
बालकों में समान रूप से पाई जाती है।
• कुछ बालक शान्त स्वभाव के होते हैं, जबकि कुछ बालक चिड़चिड़े
स्वभाव के होते हैं। कुछ बालक सामान्यतः प्रसन्न रहते हैं, जबकि
कुछ बालकों में उदास रहने की प्रवृत्ति होती है।
7. धार्मिक आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता
धर्म एवं समाज दोनों एक दूसरे के पूरक है न कि अलग-अलग। धर्म
व्यक्ति के नैतिक मूल्यों (Ethical Values) एवं आचरण को नियन्त्रित
करता है। संसार का प्रत्येक धर्म सहिष्णुता, प्रेम, बन्धुत्व, भाईचारा,
मानवता का पाठ सिखाता है, लेकिन विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोगों
में धार्मिक आधार पर वैयक्तिक विभिन्नताएँ उनके आचरण एवं व्यवहार
में अलग-अलग होती है।
8. शारीरिक विकास के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता
• शारीरिक दृष्टि से व्यक्तियों में अनेक प्रकार की विभिन्नताएँ देखने
को मिलती हैं।
• शारीरिक भिन्नता रंग, रूप, आकार, भार, कद, शारीरिक गठन,
यौन-भेद, शारीरिक परिपक्वता आदि के कारण होती है।
9. अभिवृत्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता
सभी बालकों की अभिवृत्ति एक समान नहीं होती।
• सभी बालकों की रुचियाँ भी समान नहीं होती।
• कुछ बालकों में पढ़ाई के प्रति अभिरुचि अधिक होती है, जबकि कुछ
बालकों में नहीं।
10. व्यक्तित्व के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता
• प्रत्येक व्यक्ति में व्यक्तित्व के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता देखने
को मिलती है। कुछ बालक अन्तर्मुखी स्वभाव (Nature) के होते हैं
तो कुछ बहिर्मुखी स्वभाव के।
• एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से मिलने पर उसकी योग्यता से प्रभावित हो
या न हो, परन्तु उसके व्यक्तित्व से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता है।
• टॉयलर के अनुसार, “सम्भवत: व्यक्ति, योग्यता की विभिन्नताओं के
बजाय व्यक्तित्व की विभिन्नताओं से अधिक प्रभावित होता है।”
11. गत्यात्मक कौशलों के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता
• कुछ व्यक्ति किसी कार्य को अधिक कुशलता से कर पाते हैं, जबकि
कुछ अन्य लोगों में कुशलता का अभाव पाया जाता है।
• को एवं क्रो ने लिखा है, “शारीरिक क्रियाओं में सफल होने की
योग्यता में एक समूह के व्यक्तियों में भी बहुत अधिक विभिन्नता
होती है।”
10.3 वैयक्तिक विभिन्नता के कारण
मनोवैज्ञानिकों ने वैयक्तिक विभिन्नताओं के निम्नलिखित कारण बताए हैं
1. वंशानुक्रम (Heredity) व्यक्तिगत विभिन्नताओं का एक महत्त्वपूर्ण कारण
वंशानुक्रम को माना जाता है। इसके कारण व्यक्ति का मानसिक विकास
(बुद्धि, चिन्तन, दृष्टिकोण, व्यवहार, संकीर्ण सोच) एवं शारीरिक विकास
(लम्बाई, शरीर का रंग) में अन्तर पाया जाता है।
2. वातावरण या परिवेश (Environment) वातावरण के कारकों के द्वारा
भी बालकों में अन्तर पाया जाता है। कहा जाता है, जिस प्रकार का
पारिवारिक या सामाजिक वातावरण होगा, बालकों के व्यक्तित्व का विकास
भी वैसा ही होगा। वातावरण के माध्यम से ही बालकों का सामाजिक,
मानसिक, सांस्कृतिक, प्रगतिशील सोच इत्यादि विकसित होती है। वंशानुक्रम
एवं वातावरण दोनों वैयक्तिक विभिन्नताओं को प्रभावित करते है।
3. लैंगिक विभिन्नताएँ (Gender Differences) लैंगिक विभिन्नता के
कारण भी व्यक्तिगत विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। लड़कियों का शारीरिक व
मानसिक विकास लड़कों की अपेक्षा पहले होता है।
4. जाति प्रथा एवं राष्ट्र का प्रभाव (Influence of Caste and Nation)
जाति के आधार पर वैयक्तिक अन्तर पाया जाता है। जाति का प्रभाव
व्यक्तित्व, विकास पर भी पड़ता है। राष्ट्र का भाव भी व्यक्तियों में
अलग-अलग होता है; जैसे-अंग्रेज एवं भारतीयों में अन्तर।
5. आयु तथा बुद्धि (Age and Intelligence) आयु के बढ़ने के साथ-साथ
व्यक्ति का शारीरिक, बौद्धिक एवं भावनात्मक विकास अलग-अलग होता
है। प्रत्येक व्यक्ति की आयु तथा बुद्धि का विकास अलग-अलग होता है।
उदाहरणस्वरूप किसी की बुद्धि-लब्धि (I-Q) 0-30 तथा किसी की
70-170 के बीच होना।
6. परिपक्वता (Maturity) परिपक्वता को लेकर भी दो व्यक्तियों के बीच
अन्तर पाया जाता है। परिपक्वता किसी व्यक्ति में पहले तो किसी में बाद
में आती है। यह व्यक्ति के मानसिक विकास पर निर्भर करता है।
7. आर्थिक स्थिति (Economic Condition) पारिवारिक आर्थिक स्थिति एवं
शिक्षा का स्वरूप भी व्यक्तित्व विकास में अन्तर लाता है। दो असमान
आर्थिक पृष्ठभूमियों के बच्चों का मानसिक, सामाजिक, सांस्कृतिक,
तकनीकी इत्यादि का विकास अलग-अलग होता है।
10.4 वैयक्तिक विभिन्नता जानने की विधियाँ
मनोवैज्ञानिकों ने वैयक्तिक विभिन्नता जानने के कई स्रोत बताए हैं, जो निम्न
प्रकार है
1. परीक्षण विधि (Test Method) इसके अन्तर्गत बुद्धि परीक्षण, उपलब्धि
परीक्षण, व्यक्तित्व परीक्षण, निदानात्मक परीक्षण, संवेग सम्बन्धी परीक्षण,
अभिरुचि परीक्षण तथा अभिवृत्ति परीक्षण (Attitude test) इत्यादि आता है।
2. व्यक्तित्व परीक्षण (Personality Test) इसके अन्तर्गत बालकों के गुणों
का परीक्षण किया जाता है; जैसे―व्यक्तित्व का विकास, सृजनशीलता,
प्रेक्षण विधियाँ।
3. उपलब्धि परीक्षण (Achievement Test) शैक्षणिक ज्ञान के आधार पर
यह परीक्षण होता है।
4. बुद्धि परीक्षण (Intelligence Test) मनोवैज्ञानिकों ने अनेक
प्रकार के बुद्धि परीक्षण का निर्माण किया, जिसके प्राप्तांक के
आधार पर बुद्धि-लब्धि ज्ञात किया जाता है।
5. सामूहिक अभिलेख विधि (Cumulative-Method) इनमें छात्रों
से सम्बन्धित क्रमबद्ध रूप से सूचनाएँ अंकित की जाती हैं;
जैसे―उपस्थिति, रुचियाँ, स्वास्थ्य, सामान्य योग्यताएँ, विशिष्ट
कौशल, व्यक्तिगत गुण विद्यालय का कार्य तथा प्रधानाचार्य का
दृष्टिकोण/मत इत्यादि।
6. व्यक्तिगत इतिहास विधि (Case History Method) इस व्यक्ति
के परिवार, शिक्षक, पड़ोसी, मित्र तथा सम्बन्धी से जानकारी लेकर
व्यक्तिगत विभिन्नता का पता लगाया जाता है।
शिक्षा के क्षेत्र में वैयक्तिक विभिन्नता
शिक्षा के क्षेत्र में भी वैयक्तिक विभिन्नताएँ महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं, जो
निम्न प्रकार हैं
1. शिक्षा का स्वरूप
• मनोविज्ञान इस बात पर जोर देता है कि बालकों की रुचियों, क्षमताओं,
योग्यताओं आदि में अन्तर होता है। अतः सभी बालकों के लिए समान
शिक्षा का आयोजन सर्वथा अनुचित होता है।
• इसी बात को ध्यान में रखते हुए मन्दबुद्धि, पिछड़े हुए बालक तथा
शारीरिक दोष वाले बालकों के लिए अलग-अलग विद्यालयों में
अलग-अलग प्रकार की शिक्षण तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था की
जाती है।
• वैयक्तिक विभिन्नता का ज्ञान शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबन्धकों को कक्षा के
वर्गीकरण में सहायता प्रदान करता है। शिक्षार्थी वैयक्तिक भिन्नता प्रदर्शित करते हैं।
अतः एक शिक्षक को सीखने के विविध अनुभवों को उपलब्ध कराना चाहिए।
• कक्षा का आकार तय करने में भी वैयक्तिक विभिन्नता का ज्ञान विशेष
सहायक होता है। यदि कक्षा के अधिकतर बालक अधिगम में कमजोर हों, तो
कक्षा का आकार कम होना चाहिए।
• वैयक्तिक विभिन्नता का सिद्धान्त व्यक्तिगत शिक्षण पर जोर डालता है। इसके
अनुसार बालकों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर उसकी शिक्षा की
व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि उसका सर्वांगीण विकास हो सके।
2. पाठ्यक्रम का निर्धारण
• पाठ्यक्रम के निर्धारण एवं विकास में भी वैयक्तिक विभिन्नता की प्रमुख
भूमिका होती है। बालकों की आयु, कक्षा आदि को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक
कक्षा के लिए अलग प्रकार की पाठ्यचर्या का निर्माण किया जाता है एवं उन्हें
अलग प्रकार से भी किया जाता है। उदाहरणस्वरूप बच्चों की पुस्तकें
अधिक चित्रमय एवं रंगीन होती हैं, जबकि जैसे-जैसे कक्षा एवं आयु में वृद्धि
होती जाती है, उनकी पुस्तकों के स्वरूप में भी अन्तर दिखाई पड़ता है। इसी
प्रकार प्राथमिक कक्षा के बच्चों को खेलकूद के द्वारा शिक्षा देने पर जोर दिया
जाता है।
• बालकों के निर्देशन में भी वैयक्तिक विभिन्नता की विशेष भूमिका होती है।
वैयक्तिक विभिन्नता को समझकर शिक्षक यह समझ पाते हैं कि किस प्रकार
के बच्चों के लिए शिक्षण की कौन-सी विधि अपनाई जाए?
• वैयक्तिक विभिन्नता का ज्ञान शिक्षकों को बालकों के शारीरिक दोषों को
समझने में सहायता प्रदान करता है एवं इसे ध्यान में रखते हुए वे उन बच्चों
के लिए विशेष प्रकार की शिक्षा की व्यवस्था कर पाते हैं।
                                      अभ्यास प्रश्न
1. वैयक्तिक विभिन्नता का अर्थ होता है कि
दो व्यक्ति
(1) केवल शारीरिक रूप से अलग हों
(2) केवल मानसिक रूप से अलग हों
(3) शारीरिक एवं मानसिक दोनों रूप से अलग हों
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं
2. “वैयक्तिक विभिन्नताओं से हमारा तात्पर्य
व्यक्तित्व के उन सभी पहलुओं से है,
जिनका मापन व मूल्यांकन किया जा सकता
है।” वैयक्तिक विभिन्नता के सन्दर्भ में
निम्नलिखित मनोवैज्ञानिकों में से यह कथन
किसका है?
(1) टॉयलर
(2) कोहलर
(3) स्किनर
(4) मॉस्लो
3. आप अपनी कक्षा में अपने शिक्षण के
दौरान कड़ी मेहनत करते हैं, फिर भी
आपकी कक्षा में काफी विभिन्नता दिखाई
पड़ती है। इसका कारण क्या हो सकता है?
(1) आपकी कक्षा के कुछ छात्र कक्षा में सो
जाते हैं।
(2) आपकी कक्षा के कुछ छात्र आपको पसन्द नहीं
करते हैं।
(3) भिन्न-भिन्न छात्रों में वैयक्तिक गुण भिन्न-भिन्न
होते हैं।
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं
4. आप अपनी कक्षा के छात्रों में परिपक्वता
का अवलोकन करने पर पाते हैं कि कुछ
छात्र आयु के पहले परिपक्वता प्राप्त कर
चुके हैं, जबकि कुछ छात्र परिपक्वता प्राप्त
करने की आयु में तो हैं, लेकिन उनमें
परिपक्वता नहीं है। इसका कारण क्या हो
सकता है?
(1) कक्षा में उनके बैठने का क्रम
(2) वैयक्तिक विभिन्नता
(3) विद्यालय आने व जाने के उनके भिन्न साधन
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं
5. आपकी कक्षा का एक छात्र पढ़ने में बहुत
तेज है। वह सातवीं कक्षा में होते हुए भी
दसवीं कक्षा के विषयों को आसानी से समझ
लेता है। उसकी इस वैयक्तिक विभिन्नता का
कारण है
(1) उसका विशिष्ट शारीरिक विकास
(2) उसका विशिष्ट संज्ञानात्मक विकास
(2) उसका विशिष्ट संवेगात्मक विकास
(4) उसका विशिष्ट सामाजिक विकास
6. मानव के व्यक्तित्व पर निम्न में से किसका
प्रभाव पड़ता है?
(1) केवल परिवार का
(2) केवल समुदाय का
(3) परिवार एवं समुदाय दोनों का
(4) उपरोक्त में से किसी का नहीं
7. वैयक्तिक विभिन्नता का प्रमुख कारण है
A.वातावरण
B. वंशानुक्रम
C. आयु
(1) A और B
(2) केवल B
(3) A और
(4) ये सभी
8. वैयक्तिक विभिन्नता को प्रभावित करता है
(1) केवल वंशानुक्रम कारक
(2) केवल वातावरणीय कारक
(3) वंशानुक्रम एवं वातावरणीय दोनों कारक
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं
9. “शारीरिक क्रियाओं में सफल होने की
योग्यता में एक समूह के व्यक्तियों में भी
बहुत अधिक विभिन्नता होती है।” निम्न
मनोवैज्ञानिकों में से यह कथन किसका है?
(1) वाइगोत्स्की
(2) थार्नडाइक
(3) क्रो एवं क्रो
(4) स्किनर
10. वैयक्तिक विभिन्नता के विकास हेतु पूर्व
माध्यमिक कक्षाओं में बालकों का शिक्षण
किस प्रकार किया जाना चाहिए?
A.खेल विधि के माध्यम से बालकों को
गणित तथा भाषा का ज्ञान देना चाहिए।
B. उन्हें अक्षर ज्ञान तथा गणना की जानकारी
प्रारम्भ से ही मौखिक रूप से दी जानी
चाहिए।
C. लिखने तथा सिखाने से पूर्व बच्चों से चित्र
बनवाए जाने चाहिए।
(1) केवल A
(2) A और C
(3) केवल
(4) ये सभी
11. सीमा हर पाठ को बहुत जल्दी सीख लेती
है, जबकि लीना उसे सीखने में ज्यादा
समय लेती है। यह विकास के ………….
सिद्धान्त को दर्शाता है।
(1) वैयक्तिक भिन्नता
(2) अन्तःसम्बन्ध
(3) निरन्तरता
(4) सामान्य से विशिष्ट की ओर
12. वैयक्तिक विभिन्नता होती है
(1) किन्हीं दो व्यक्तियों में शारीरिक भिन्नता का
होना
(2) दो व्यक्तियों के मध्य शारीरिक, मानसिक व
संवेगात्मक स्वरूपों में विभिन्नता
(3) सभी व्यक्तियों का व्यक्तित्व समान होता है
(4) सभी की बुद्धि क्षमता का असमान होना
13. दो व्यक्तियों में जिन कारणों से विविधता
पाई जाती है, उन्हीं के आधार पर व्यक्तिगत
अन्तर के प्रकार निर्धारित किए जाते हैं।
निम्न में से कौन-सा व्यक्तिगत विभिन्नता
का प्रकार नहीं है?
(1) शारीरिक भिन्नता
(2) मानसिक क्षमता में भिन्नता
(3) मूल प्रवृत्ति सम्बन्धी अन्तर
(4) व्यक्तित्व सम्बन्धी अन्तर
14. मानसिक योग्यताओं में विभिन्नता के
अन्तर्गत किस कथन को सम्मिलित नहीं
किया जा सकता?
(1) यौन अन्तर तथा शारीरिक परिपक्वता
(2) रुचि सम्बन्धी भिन्नता
(3) स्वभाव सम्बन्धी अन्तर
(4) तात्कालिक स्थिति से परे जाने की योग्यता
15. प्रत्येक व्यक्ति में भाषा के विकास की
अवस्थाएँ पाई जाती है
(1) समान अवस्था
(2) भिन्न-भिन्न अवस्था
(3) समान तथा भिन्न दोनों
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं
16. अच्छे परिवार एवं समुदाय/समाज से सम्बन्ध
रखने वाले बालकों का विकास होता है
(1) सामान्य से कम
(2) औसत
(3) उन बालकों से अच्छा जो अच्छे परिवार एवं
समाज में नहीं रहते
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं
17. सभी बालकों में अभिवृत्ति होती है
(1) एकसमान
(2) एकसमान नहीं
(3) समरूप
(4) इनमें से कोई नहीं
18. बालकों के प्रकार होते हैं
(1) केवल अन्तर्मुखी
(2) केवल बहिर्मुखी
(3) अन्तर्मुखी एवं बहिर्मुखी दोनों
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं
19. “सम्भवत: व्यक्ति योग्यता की विभिन्नताओं
के बजाय व्यक्तित्व की विभिन्नताओं से
अधिक प्रभावित होता है।” यह कथन
वैयक्तिक विभिन्नता के सन्दर्भ में किस
मनोवैज्ञानिक का है?
(1) टॉयलर
(2) क्रो एवं क्रो
(3) फ्रायड
(4) वाइगोत्स्की
20. मनोवैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि
बालकों में अन्तर होता है
(1) उनकी रुचि के आधार पर
(2) उनकी योग्यता के आधार पर
(3) उनकी क्षमता के आधार पर
(4) उपरोक्त सभी के आधार पर
21. यदि कोई बालक सीखने की प्रक्रिया में
कमजोर है, तो उस स्थिति में अध्यापकों
को कक्षा का आकार रखना चाहिए
(1) कक्षा का आकार कम होना चाहिए।
(2) कक्षा का आकार अधिक होना चाहिए।
(3) कक्षा का आकार न कम न अधिक होना चाहिए।
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं
22. धर्म एवं समाज दोनों हैं
(1) एक-दूसरे से पृथक
(2) एक-दूसरे के पूरक
(3) समाज का धर्म से कोई मतलब नहीं होता
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं
23. जाति से सम्बन्धित व्यक्तिगत अन्तर को
दूर करने के लिए व्यक्ति को करना
चाहिए
A. केवल पूर्वाग्रह से स्वयं को दूर रखना
B. पूर्वधारणा तथा सोच में बदलाव लाना
C. नकारात्मक मनोवृत्तियों से हट कर
सोचना
D. रूढ़िवादी दृष्टिकोण में सकारात्मक
बदलाव लाना
(1) A और B
(2) B और C
(3) D और A
(4) उपरोक्त सभी
                              विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न
24. शिक्षार्थी वैयक्तिक भिन्नता प्रदर्शित करते
हैं। अत: शिक्षक को [CTET Jan 2012]
(1) अधिगम की एकसमान गति पर बल देना
चाहिए।
(2) सीखने के विविध अनुभवों को उपलब्ध कराना
चाहिए।
(3) कठोर अनुशासन सुनिश्चित करना चाहिए।
(4) परीक्षाओं की संख्या बढ़ा देनी चाहिए।
25. सह-शैक्षणिक क्षेत्रों में निष्पादन के आधार
पर शैक्षणिक क्षेत्रों में निष्पादन के स्तर
को बढ़ाने का औचित्य स्थापन किस
आधार पर किया जा सकता है?
                                             [CTET Nov 2012]
(1) यह वैयक्तिक भिन्नताओं को सन्तुष्ट
करता है।
(2) यह हाशियाकृत विद्यार्थियों के लिए प्रतिपूरक
भेदभाव की नीति का अनुगमन करता है।
(3) यह सार्वभौमिक घारण (retention) को सुनिश्चित
करता है।
(4) यह हाथ से किए जाने वाले श्रम के प्रति
सम्मान विकसित करता है।
26. विद्यालयों को किसके लिए वैयक्तिक
भिन्नताओं को पूरा करना चाहिए?
                                              [CTET July 2013]
(1) वैयक्तिक शिक्षार्थी को विशिष्ट होने की अनुभूति
कराने के लिए।
(2) वैयक्तिक शिक्षार्थियों के मध्य खाई को कम
करने के लिए।
(3) शिक्षार्थियों के निष्पादन और योग्यताओं को
समान करने के लिए।
(4) यह समझने के लिए कि क्यों शिक्षार्थी सीखने के
योग्य या अयोग्य हैं।
27. शिक्षार्थियों में वैयक्तिक भिन्नताओं को
सम्बोधित करने के लिए एक विद्यालय किस
प्रकार का सहयोग उपलब्ध करवा सकता है?
                                                    [CTET July 2013]
(1) सभी शिक्षार्थियों के लिए समान स्तर की
पाठ्यचर्या का अनुगमन करना।
(2) बाल केन्द्रित पाठ्यचर्या का पालन करना और
शिक्षार्थियों को सीखने के अनेक अवसर उपलब्ध
कराना।
(3) शिक्षार्थियों में वैयक्तिक भिन्नताओं को समाप्त
करने के लिए हर सम्भव उपाय करना।
(4) धीमी गति से सीखने वाले शिक्षार्थियों को विशेष
विद्यालयों में भेजना।
28. कक्षा में विद्यार्थियों के वैयक्तिक विभेद
                                                     [CTET Feb 2014]
(1) लाभकारी नहीं हैं, क्योंकि अध्यापकों को
वैविध्यपूर्ण कक्षा को नियन्त्रित करने की
आवश्यकता है।
(2) हानिकारक हैं, क्योंकि इनसे विद्यार्थियों में
परस्पर द्वन्द्व उत्पन्न होते हैं।
(3) अनुपयुक्त हैं, क्योंकि ये सर्वाधिक मन्द
विद्यार्थियों के स्तर तक पाठ्यचर्या के
स्थानान्तरण की गति को कम करते हैं।
(4) लाभकारी हैं, क्योंकि ये विद्यार्थियों की
संज्ञानात्मक संरचनाओं को खोजने में अध्यापकों
को प्रवृत्त करते हैं।
29. हम सभी अपनी बुद्धि, प्रेरणा, अभिरुचि
आदि के सन्दर्भ में भिन्न होते हैं। यह
सिद्धान्त सम्बन्धित है               [CTET Feb 2015]
(1) वैयक्तिक भिन्नता से
(2) बुद्धि के सिद्धान्तों से
(3) वंशानुक्रम से
(4) पर्यावरण से
30. शिक्षार्थियों (अधिगमकर्ता) की वैयक्तिक
विभिन्नताओं के सन्दर्भ में शिक्षिका को
चाहिए                            [CTET Sept 2015]
(1) निगमनात्मक पद्धति के आधार पर समस्याओं
का समाधान करना।
(2) कलनविधि (एल्गोरिथ्म) का अधिकतर प्रयोग
करना।
(3) याद करने के लिए शिक्षार्थियों को तथ्य
उपलब्ध कराना।
(4) विविध प्रकार की अधिगम परिस्थितियों को
उपलब्ध कराना।
31. व्यक्तियों में एक-दूसरे से भिन्नता क्यों
होती है?                              [CTET Feb 2016]
(1) वातावरण के प्रभाव के कारण।
(2) जन्मजात विशेषताओं के कारण।
(3) वंशानुक्रम और वातावरण के बीच अन्योन्यक्रिया
के कारण।
(4) प्रत्येक व्यक्ति को उसके माता-पिता से जीनों
का भिन्न समुच्चय प्राप्त होने के कारण।
32. अपनी कक्षा की वैयक्तिक भिन्नताओं से
निपटने के लिए शिक्षक को चाहिए कि
                                         [CTET Sept 2016]
(1) बच्चों को उनके अंकों के आधार पर अलग
कर उनको नामित करे।
(2) बच्चों से बातचीत करे और उनके दृष्टिकोण
को महत्त्व दे।
(3) विद्यार्थियों के लिए कठोर नियमों को
लागू करे।
(4) शिक्षण और आकलन के समान और मानक
तरीके हों।
                                              उत्तरमाला
1. (3) 2. (3) 3. (3) 4. (2) 5. (2) 6. (3) 7. (4) 8. (3) 9. (3) 10. (4)
11. (1) 12. (2) 13. (3) 14. (1) 15. (2) 16. (3) 17. (1) 18. (3)
19. (1) 20. (4) 21. (1) 22. (2) 23. (4) 24. (2) 25. (1) 26. (4)
27. (2) 28. (4) 29. (1) 30. (4) 31. (3) 32. (1)
                                               ★★★

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