RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् वाक्य निर्माणम्

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् वाक्य निर्माणम् RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् वाक्य निर्माणम् कक्षा – दशम् के नवीन पाठ्यक्रम के अनुसार संस्कृत में वाक्य-प्रयोग करना निर्धारित है। इनके अन्तर्गत शब्द रूप, धातु रूप, अव्यय, सर्वनाम, कारक, प्रत्यय आदि से सम्बन्धित पद आते हैं। इनका वाक्य-प्रयोग करने के लिए व्याकरण का ज्ञान आवश्यक है, … Read more

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् घटनाक्रम संयोजनम्

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् घटनाक्रम संयोजनम् RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् घटनाक्रम संयोजनम् संस्कृत कथा-साहित्य अत्यधिक समृद्ध है। इनमें अनेक नीतिकथाओं का संग्रह है। उनमें से कुछ प्रसिद्ध कथाएँ यहाँ क्रमरहित वाक्यों में अति संक्षेप में दी गई हैं। उन कथा-वाक्यों को क्रमपूर्वक जोड़कर घटनाक्रम संयोजन का पाठ्यक्रम के अनुसार रचनात्मक कौशल के … Read more

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् अनुवाद-कार्यम् (हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद)

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् अनुवाद-कार्यम् (हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद) RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् अनुवाद-कार्यम् (हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद) हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद करने के लिए संस्कृत व्याकरण के नियमों, शब्द व धातु रूपों का ज्ञान अत्यावश्यक है। हमने यहाँ हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद बनाने के लिए … Read more

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् संकेताधारितम् वार्तालाप लेखनम्

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् संकेताधारितम् वार्तालाप लेखनम् RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् संकेताधारितम् वार्तालाप लेखनम् संकेताधारित वार्तालाप-लेखन में किसी भी एक छोटे से विषय या बिन्दु को लेकर आपस में वार्तालाप किया जाता है। इसका उद्देश्य सम्भाषण कला के माध्यम से छात्रों में संस्कृत-भाषा की दक्षता एवं दैनिक व्यवहार में संस्कृत का प्रयोग … Read more

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् चित्राधारितम् वर्णनम्

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् चित्राधारितम् वर्णनम् RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् चित्राधारितम् वर्णनम् अभ्यासार्थ प्रश्नोत्तर : प्रश्न 1. निम्नाङ्कितं चित्रं दृष्ट्वा प्रदत्तसंकेतपदानां साहाय्येन स्वविद्यालयस्य विषये षड्वाक्यानि लिखतु। उत्तरम् : वाक्यानि अयं विद्यालयः अतीवसुन्दरः अस्ति। अयं विद्यालयः ग्रामस्य मध्ये स्थितः अस्ति। अस्मिन् विद्यालये विंशतिः कक्षाः सन्ति। मम विद्यालये षोडश अध्यापकाः सन्ति। विद्यालयस्य समीपे एकम् … Read more

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् अनौपचारिकम् पत्र-लेखनम्

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् अनौपचारिकम् पत्र-लेखनम् RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् अनौपचारिकम् पत्र-लेखनम् प्रश्न 1. त्वं स्वकीयं मित्रं प्रतिस्वपरीक्षासिद्धता विषये अधोलिखितपत्रमञ्जूषा सहायतया रिक्त स्थानानि पूरयित्वा लिखत। [परिजनाः, विशेषकक्षा, सन्निकटे, कालः, प्राप्तुं, निर्माय, अधीयानः सर्वदा] सुनगरम् 18 मार्च 20XX प्रियमित्र कवीन्द्र! कुशली सन् कुशलं कामये। मा. शि. बोर्डपरीक्षा (i) …….. वर्तते। अहं समयसारिणी (ii) … Read more

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् औपचारिकम् पत्र-लेखनम्

RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् औपचारिकम् पत्र-लेखनम् RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् औपचारिकम् पत्र-लेखनम् यह समय संचार-क्षेत्र में समृद्धि का समय है। विचारों के आदान-प्रदान के लिए बहुत से संचार-साधन हैं, परन्तु आज भी पत्र विचार-सम्प्रेषण का प्रमुख साधन है.। पत्र का महत्त्व इसी से ज्ञात कर सकते हैं कि इस संचार समृद्धि-काल में … Read more

RBSE Class 10 Sanskrit व्याकरणम् संख्याज्ञानम्

RBSE Class 10 Sanskrit व्याकरणम् संख्याज्ञानम् RBSE Class 10 Sanskrit व्याकरणम् संख्याज्ञानम् इस संसार में सभी लोगों के लिए संख्या का ज्ञान परम आवश्यक है। क्योंकि संख्या के ज्ञान के बिना तो हमारे जीवन में आदान-प्रदान का कोई भी कार्य सम्भव नहीं है। इसीलिए हम यहाँ सौ संख्या से आगे की संख्याओं का ज्ञान करेंगे। अंकों … Read more

RBSE Class 10 Sanskrit व्याकरणम् धातुरूपाणि

RBSE Class 10 Sanskrit व्याकरणम् धातुरूपाणि RBSE Class 10 Sanskrit व्याकरणम् धातुरूपाणि परिभाषा – क्रिया का निर्माण जिससे होता है, उसके मूल रूप को संस्कृत में ‘धातु’ कहा जाता है। जैसे पठ् या लिख् धातु है और इनसे पठति, लिखतु आदि क्रियापद बनते हैं। सैकण्डरी के नवीन पाठ्यक्रम में जो धातुएँ निर्धारित हैं, उनके पाँच लकारों … Read more

RBSE Class 10 Sanskrit व्याकरणम् शब्दरूपाणि

RBSE Class 10 Sanskrit व्याकरणम् शब्दरूपाणि RBSE Class 10 Sanskrit व्याकरणम् शब्दरूपाणि संस्कृत में सामान्यतः दो प्रकार के पद होते हैं-सुबन्त और तिङन्त। जैसा कि महर्षि पाणिनी ने कहा है ‘सुप्तिङन्तं पदम्।’ जिन प्रातिपदिकों के अन्त में सुप् विभक्तियाँ होती हैं, वे ‘सुबन्त’ हैं। सुबन्त पद क्रियापदों से भिन्न होते हैं। संज्ञा, विशेषण आदि पद सुबन्त … Read more