MP Board Class 9th Hindi Navneet लेखक परिचय

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MP Board Class 9th Hindi Navneet लेखक परिचय

MP Board Class 9th Hindi Navneet लेखक परिचय

1. रामधारीसिंह ‘दिनकर’

जीवन-परिचय-रामधारीसिंह ‘दिनकर’ का जन्म सन् 1908 ई. में बिहार राज्य के मुंगेर जिले के सिमरिया गाँव के एक कृषक परिवार में हुआ था। स्नातक ऑनर्स तक शिक्षा प्राप्त करके 55 रुपये मात्र मासिक के वेतन पर एक विद्यालय में अध्यापन कार्य करने लगे। बाद में बिहार राज्य सेवा के अपर निबन्धक विभाग में उप-निबन्धक विभाग में उपनिदेशक नियुक्त हुए। इसके बाद मुजफ्फरपुर कॉलेज में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष बने। सन् 1952 ई. में इन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया। सन् 1964 ई. में भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति बनाये गए। आकाशवाणी के निदेशक, हिन्दी सलाहकार समितियों के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य किए। सन् 1974 ई. में इनका निधन हो गया।

अपनी ओजस्वी रचनाओं के लिए, भारतीयों में नई स्फूर्ति भरने के लिए सृजित रचनाओं के लिए इन्हें साहित्य अकादमी, ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

रचनाएँ
(1) निबन्ध-मिट्टी की ओर, अर्द्धनारीश्वर, रेती के फूल, उजली आग, राष्ट्रभाषा, वेणुवन, राष्ट्रीय एकता।
(2) आलोचना-शुद्ध कविता की खोज, काव्य की भूमिका।
(3) संस्कृति और दर्शन-संस्कृति के चार अध्याय, भारतीय संस्कृति और एकता, चेतना की शिक्षा।
(4) संस्मरण-रेखाचित्र-लोकदेव नेहरू, वट-पीपल। (5) यात्रावृत्त-मेरी यात्राएँ, देश-विदेश।
(6) काव्य-रेणुका, हुंकार, रसवन्ती, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी, सामधेनी आदि।

भाषा- इनकी भाषा शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली है। भाषा में संस्कृत शब्दावली, कहावतों, मुहावरों का प्रयोग हुआ है। आलंकारिकता और व्यंग्य भाषा के गुण हैं।

शैली-‘दिनकर’ जी ने विवेचना प्रधान, आलोचनात्मक तथा भावात्मक शैलियों को अपनाया है।

साहित्य में स्थान- भारतीयता लिए हुए साहित्यिक समाज का मार्गदर्शन करने वाले ‘दिनकर’ जी पर हिन्दी को गर्व है।

2. विद्यानिवास मिश्र

जीवन-परिचय-ललित निबन्धकार एवं उच्च विचारक विद्यानिवासजी मिश्र का जन्म गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) में सन् 1926 ई. को हुआ था। उच्च शिक्षा प्राप्त करके गोरखपुर विश्वविद्यालय में अध्यापन शुरू कर दिया। बाद में के. एम. मुंशी हिन्दी और भाषा विज्ञान विद्यापीठ, आगरा के निदेशक नियुक्त हुए। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ, वाराणसी के कुलपति बने। बाद में नवभारत टाइम्स के प्रधान सम्पादक का दायित्व निभाया। भारत सरकार ने इन्हें पद्मभूषण की उपाधि से विभूषित किया। आपका दुःखद निधन सन् 2006 ई. में हो गया।

रचनाएँ-
(1) निबन्ध-‘चितवन की छाँह’, ‘तुम चन्दन हम पानी’, ‘आँगन का पंछी और बनजारा’, ‘मैंने सिल पहुँचाई’, ‘मेरे राम का मुकुट भीग रहा है।
(2) संस्मरण-अमर कंटक की सालती स्मृति।
(3) आलोचना-साहित्य की चेतना, मॉडर्न हिन्दी पोइट्री।

इनके अतिरिक्त हिन्दी की शब्द सम्पदा, रीति-विज्ञान, महाभारत का यथार्थ, भारतीय भाषा दर्शन आपकी अप्रतिम रचनाएँ हैं।

भाषा-मिश्रजी की भाषा शुद्ध, परिमार्जित, साहित्यिक एवं प्रवाहयुक्त है। आपने आंचलिक भाषाओं का भी अपनी कृतियों में यथास्थान प्रयोग किया है। उर्दू, फारसी, अंग्रेजी आदि भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया गया है। मुहावरे एवं सूक्तियों के प्रयोग से भाषा में गति आ गई है। – शैली-मिश्रजी ने विवरणात्मक, आत्माभिव्यंजक, भावात्मक, व्याख्यात्मक शैलियों को अपनाया है और विषयवस्तु को सुबोध बना दिया है।

साहित्य में स्थान-स्वतन्त्रता के पश्चात् के हिन्दी रचनाकारों में विद्यानिवासजी का अति महत्त्वपूर्ण स्थान है।

3. शरद जोशी

जीवन-परिचय-व्यंग्यकार शरद जोशी का जन्म उज्जैन (मध्य प्रदेश) में 21 मई, 1937 ई. को हुआ था। स्नातक स्तर तक की शिक्षा होल्कर कॉलेज, इन्दौर में प्राप्त की। बाद में स्वतन्त्र लेखन शुरू कर दिया। आपके लेख समाचार-पत्रों, पत्र-पत्रिकाओं और इसी तरह की पुस्तकों में लगातार छपते रहे हैं। आप नई दुनिया और नवभारत टाइम्स से सम्बद्ध रहे हैं।

रचनाएँ-
(1) व्यंग्य-परिक्रमा, जीप पर सवार इल्लियाँ, किसी बहाने, तिलिस्म, रहा किनारे बैठ, दूसरी सतह, इन दिनों।
(2) नाटक-अन्धों का हाथी, एक था गधा। साहित्य सृजन अभी भी जारी है।

भाषा-व्यावहारिक, सरल सुबोध खड़ी बोली हिन्दी पर , आपका अधिकार है। उर्दू, फारसी और अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग सहज ही भाव को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है।

शैली-शरद जोशी ने अपनी कृतियों में व्यंग्य, वर्णनात्मक, संस्मरणात्मक शैलियों का प्रयोग किया है और उन्हें आकर्षक बना दिया है।

साहित्य में स्थान-हिन्दी के व्यंग्यकारों में शरद जोशी का विशेष स्थान है।

4. पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी

जीवन-परिचय-पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी का जन्म 19 अगस्त, सन् 1907 ई. में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के ‘दुबे का छपरा’ नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम अनमोल दुबे और माता का नाम ज्योतिकली देवी था। काशी विश्वविद्यालय से साहित्य एवं ज्योतिष में आचार्य परीक्षा उत्तीर्ण की। सन् 1940 ई. में शान्ति निकेतन में हिन्दी और संस्कृत के अध्यापक हो गए। हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रहे। ‘विश्वभारती’ पत्रिका का सम्पादन किया। सन् 1949 ई. में लखनऊ विश्वविद्यालय ने डी. लिट. की मानद उपाधि से सम्मानित किया। बाद में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा पंजाब विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रहे। आपको मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला। भारत सरकार ने पद्मभूषण से अलंकृत किया। 19 मई, 1979 ई. को आपका निधन हो गया।

रचनाएँ-
(1) निबन्ध-विचार और वितर्क, अशोक के फूल, कल्पलता, कुटज।
(2) आलोचना-कबीर, सूर, साहित्य, हिन्दी साहित्य।
(3) उपन्यास-चारुचन्द्र लेख, अनामदास का पोथा, बाणभट्ट की आत्मकथा पुनर्नवा।
(4) हिन्दी साहित्य की भूमिका,
(5) हिन्दी साहित्य का उद्भव और विकास।

भाषा-द्विवेदी जी की भाषा तत्सम तद्भव प्रधान, साहित्यिक एवं व्यावहारिक खड़ी बोली हिन्दी है। उर्दू, अंग्रेजी और संस्कृत के शब्दों का प्रयोग आवश्यकतानुसार हुआ है। मुहावरों ने भाव बोध में सहजता दी है।

शैली-हजारीप्रसाद द्विवेदी जी की शैली भाव प्रधान, आलोचनात्मक, गवेषणात्मक है। इन शैलियों से भाव माधुर्य, व्यंग्य, आलंकारिक एवं चिन्तन को स्पष्टता मिलती है।

साहित्य में स्थान-हिन्दी साहित्य की अभिवृद्धि में हजारीप्रसाद द्विवेदी का योगदान महत्त्वपूर्ण है।

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

रिक्त स्थान पूर्ति
1. रामधारीसिंह ‘दिनकर’ का जन्म सन् ………………………… ई. में हुआ था। (1918/1908)
2. दिनकर जी ने कुल ₹………………………… पर प्रतिमाह अध्यापन कार्य किया। (पचपन/पैसठ)
3. विद्यानिवास मिश्र ………………………… के रूप में जाने जाते हैं। (ललित निबन्धकार/कटु आलोचक)
4. शरद जोशी एक ………………………… के व्यंग्यकार हैं। (निम्नकोटि/उच्चकोटि)
5. पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी ने ………………………… पत्रिका का सम्पादन किया। (भारत भारती/विश्व भारती)
उत्तर-
1. 1908,
2. पचपन,
3. ललित निबन्धकार,
4. उच्चकोटि,
5. विश्वभारती।

सही विकल्प चुनिए-

1. रामधारीसिंह ‘दिनकर’ ने शिक्षा प्राप्त की
(क) स्नातक ऑनर्स की
(ख) परास्नातक की
(ग) इण्टरमीडिएट की
(घ) हाईस्कूल की।

2. ‘दिनकर’ हिन्दी विभाग के अध्यक्ष बने
(क) मुजफ्फरपुर कॉलेज में
(ख) आगरा कॉलेज में
(ग) सप्रू कॉलेज में
(घ) शासकीय कॉलेज में।

3. विद्यानिवास मिश्र ने प्रधान सम्पादक का दायित्व निभाया
(क) नवभारत टाइम्स में
(ख) स्वराज्य टाइम्स में
(ग) हिन्दुस्तान टाइम्स में
(घ) हिन्दुस्तान में।

4. शरद जोशी उच्चकोटि के
(क) व्यंग्यकार थे
(ख) निबन्धकार थे
(ग) आलोचक थे
(घ) कवि थे।

5. पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी का जन्म हुआ
(क) दुबे का छपरा गाँव में
(ख) हल्दिया गाँव में
(ग) सिमरिया घाट गाँव में
(घ) नैनाना बालसर में।
उत्तर-
1. (क), 2. (क), 3. (क), 4. (क), 5. (क)।

सही जोड़ी मिलाइए-

उत्तर-
(i) → (ख),
(ii) → (क),
(iii) → (घ),
(iv) → (ङ),
(v) → (ग)।

सत्य/असत्य-

1. हिन्दी साहित्य की अभिवृत्ति में पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
2. शरद जोशी अपने स्वतन्त्र लेखन के लिए प्रसिद्ध हैं।
3. विद्यानिवास मिश्र ने हिन्दी भाषा के विकास के लिए कोई सहयोग नहीं दिया।
4. ‘दिनकर’ ने आलोचनात्मक और भावात्मक शैलियों में उच्चकोटि की रचनाएँ प्रस्तुत की।
5. ‘दिनकर’ द्वारा हिन्दी साहित्यकार समिति में रहकर हिन्दी के उत्थान और विकास के लिए किया गया कार्य विस्मरणीय है।
उत्तर-
1. सत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर-

1. रामधारीसिंह दिनकर को कौन-कौन से पुरस्कार प्राप्तहुए?
उत्तर-
साहित्य अकादमी पुरस्कार और ज्ञानपीठ पुरस्कार।

2. विद्यानिवास मिश्र किस विश्वविद्यालय के कुलपति रहे?
उत्तर
काशी विद्यापीठ, वाराणसी।

3. शरद जोशी द्वारा प्रयुक्त शैलियों के नाम बताइए।
उत्तर-
व्यंग्य, वर्णनात्मक व संस्मरणात्मक शैलियाँ।

4. पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी ने किस पत्रिका का सम्पादन किया?
उत्तर-
विश्व भारती।

5. विद्यानिवास मिश्र को भारत सरकार ने किस उपाधि से विभूषित किया?
उत्तर-
पद्मभूषण।

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