PSEB Solutions for Class 9 Science Chapter 14 प्राकृतिक संपदा
PSEB Solutions for Class 9 Science Chapter 14 प्राकृतिक संपदा
PSEB 9th Class Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक संपदा
→ पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन विद्यमान है।
→ जीवन के लिए परिवेश, ताप, पानी और भोजन की आवश्यकता होती है।
→ जीवों के लिए सूर्य से ऊर्जा और पृथ्वी पर उपलब्ध संपदा आवश्यक है।
→ पृथ्वी की संपदाएं स्थल, जल और वायु हैं।
→ पृथ्वी का सबसे बाहरी भाग स्थल मंडल है और 75% भाग पानी है।
→ सजीव जीव मंडल के जैविक घटक हैं तथा हवा, जल और मिट्टी अजैविक घटक हैं।
→ हमारा जीवन वायु के घटकों का परिणाम है।
→ चंद्रमा की सतह पर वायु मंडल नहीं है और उसका तापमान – 190°C से 110°C के बीच होता है।
→ गर्म होने पर वायु में संवहन धाराएं उत्पन्न होती हैं।
→ जल की अपेक्षा स्थल जल्दी गर्म होता है इसलिए स्थल के ऊपर वायु भी तेजी से गर्म होती है।
→ दिन के समय हवा की दिशा समुद्र से स्थल की ओर तथा रात के समय स्थल से समुद्र की ओर होती है।
→ हवा को पृथ्वी की घूर्णन गति तथा पर्वत श्रृंखलाएं भी प्रभावित करती हैं।
→ वर्षा का प्रकार पैटर्न पवन के पैटर्न पर निर्भर करता है।
→ भारत में वर्षा दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण आती है।
→ हवा के गुण सभी जीवों को प्रभावित करते हैं।
→ ईंधनों के जलने से दूषित गैसें उत्पन्न होती हैं जो वर्षा के पानी में मिलकर अम्लीय वर्षा करती हैं।
→ निलंबित कण अनजले कार्बन कण या पदार्थ हो सकते हैं जिसे हाइड्रो कार्बन कहते हैं।
→ दूषित वायु में सांस लेने से कैंसर, हृदय रोग या एलर्जी जैसी बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।
→ पृथ्वी की सतह पर पाया जाने वाला अधिकतर पानी समुद्रों और महासागरों में है।
→ शुद्ध पानी बर्फ के रूप में दोनों ध्रुवों और बर्फ से ढके पहाड़ों पर पाया जाता है। भूमिगत जल, नदियोंझीलों-तालाबों का पानी भी अलवणीय होता है।
→ सभी जीवित प्राणियों के जीवन के लिए मीठे पानी की आवश्यकता होती है।
→ जीवन की विविधता को मिट्टी प्रभावित करती है। मिट्टी में पाए जाने वाले खनिज जीवों को विभिन्न प्रकार से सहायता प्रदान करते हैं।
→ सूर्य, जल, हवा तथा जीव-जंतु मिट्टी की रचना में सहायक हैं।
→ मिट्टी के प्रकार का निर्णय उसमें पाए जाने वाले कणों के औसत आकार द्वारा निर्धारित किया जाता है।
→ मिट्टी के गुण ह्यूमस की मात्रा तथा उसमें सूक्ष्म जीवों के आधार पर जाँचे जाते हैं।
→ विशेष पत्थरों से बनी मिट्टी उसमें विद्यमान खनिज पोषक तत्वों को प्रकट करते हैं।
→ आधुनिक पीड़कनाशकों और उर्वरकों ने मिट्टी की संरचना बिगाड़ी है।
→ नाइट्रोजन वायुमंडल का लगभग 78% भाग है। यह प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल, DNA, RNA और विटामिन के लिए आवश्यक है।
→ कार्बन का विभिन्न भौतिक और जैविक क्रियाओं के द्वारा चक्रण होता है।
→ ग्रीन हाऊस प्रभाव के कारण वायुमंडल और सारे विश्व का औसत तापमान बढ़ जाएगा।
→ ऑक्सीजन वायुमंडल में लगभग 21% है। इसका प्रयोग श्वसन, दहन और नाइट्रोजन के ऑक्साइड के रूप में होता है।
→ वायुमंडल के ऊपरी भाग में ऑक्सीजन के तीन अणु (O3) पाए जाते हैं जिसे ओज़ोन कहते हैं।
→ यह सूर्य के हानिकारक विकिरणों को सोखता है और पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करता है।
→ अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत में छिद्र पाया गया है जिससे पृथ्वी को बहुत क्षति होने की आशंका है।
→ क्षय प्राकृतिक संसाधन (Exhaustible Resources)-ऐसे संसाधन जो मनुष्यों की क्रियाओं द्वारा समाप्त हो रहे हैं। जैसे-वन, मिट्टी, खनिज तथा वन्य जीवन ।
→ अक्षय प्राकृतिक संसाधन (Inexhaustible Resources)-ऐसे संसाधन जो मनुष्यों की क्रियाओं द्वारा समाप्त नहीं हो सकते। जैसे—सूर्य का प्रकाश, समुद्र आदि।
→ नवीकरणीय स्रोत (Renewable Resources)-ऐसे स्रोत जिनका प्रकृति में चक्रीकरण हो सकता है, उन्हें नवीकरणीय स्रोत कहते हैं। उदाहरण-लकड़ी तथा जल।
→ अनवीकरणीय स्रोत (Non-renewable Resources)-ऐसे स्रोत जिनका चक्रीकरण नहीं हो सकता जो एक बार प्रयोग करने के बाद समाप्त हो जाते हैं, उन्हें अनवीकरणीय स्रोत कहते हैं। उदाहरण-लकड़ी, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस आदि।
→ भूमिगत जल (Underground Water)-यह जल भूमि के नीचे होता है।
→ भूपृष्ठ (Crust)-पृथ्वी की सबसे बाहरी परत को पृष्ठ कहते हैं।
→ खनिज संसाधन (Mineral Resources)-ये भूमि में स्थित खनिज तथा धातुओं के भंडार हैं।
→ वायुमंडल (Atmosphere)-धरती को चारों ओर से घेरे हुए वायु का आवरण वायुमंडल कहलाता है।
→ प्रदूषण (Pollution)-धूलकण, धुआं तथा हानिकारक गैसों का अनैच्छिक रूप से वायु मिलना प्रदूषण कहलाता है।
→ अम्लीय वृष्टि (Acid Rain)-प्रदूषित वायु जिसमें अम्लीय ऑक्साइडों से उत्पादित अम्ल उपस्थित हों, अम्लीय वृष्टि कहते हैं।
→ धुआं (Smoke) यह ईंधन के अपूर्ण दहन से प्राप्त हुए कार्बन, राख तथा तेल के कणों का बना होता है।
→ कोहरा (Fog) यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें बहुत छोटे जल कण वायु में निलंबित अवस्था में उपस्थित होते हैं।
→ ऐरोसॉल (Aerosols)-वायु में उपस्थित द्रव्यों के बारीक कणों को ऐरोसॉल कहते हैं।
→ कणकीय पदार्थ (Particulates)-वायु में उपस्थित निलंबित ठोस अथवा द्रव पदार्थ की असतत संहति को कणकीय पदार्थ कहते हैं।
→ फ्लाई ऐश (Fly Ash)-जीवाश्मी ईंधन के दहन के कारण उत्पन्न गैसों के साथ राख के निकलने वाले छोटे-छोटे कणों को फ्लाई ऐश कहते हैं।
→ ग्रीन हाऊस प्रभाव (Green House Effect)-पृथ्वी से परावर्तित अवरक्त विकिरणें कार्बन डाइऑक्साइड द्वारा सोख ली जाती हैं, जिसके फलस्वरूप वायुमंडल गर्म हो जाता है और उसका ताप बढ़ जाता है। इस प्रक्रिया को ग्रीन हाऊस प्रभाव कहते हैं।
→ मृदा (Soil)-पृथ्वी की ऊपरी सतह को मृदा कहते हैं जो चट्टानों के सूक्ष्म कणों, ह्यूमस, हवा और जल से मिल कर बनती है।
→ मृदा अपरदन (Soil Erosion)-मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत के अपने स्थान से हट जाने को मृदा अपरदन कहते हैं।
→ मृदा प्रदूषण (Soil Pollution)-रासायनिक उर्वरकों तथा बेकार पदार्थों के मिट्टी में मिल जाने को मृदा प्रदूषण कहते हैं।
→ हाइड्रो कार्बन (Hydro Carbon)-कार्बन तथा हाइड्रोजन से बने कार्बनिक यौगिकों को हाइड्रो कार्बनिक कहते हैं।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 14 प्राकृतिक संपदा
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)
प्रश्न 1.
मृदा निर्माण में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न चरणों का वर्णन करें।
उत्तर-
प्रकृति को मृदा निर्माण में लाखों वर्ष लगे हैं। यह चट्टानों से बनी है। अब भी मृदा के ठीक नीचे कठोर चट्टानों को सतह विद्यमान है। भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं से चट्टानें टूटती-फूटती हैं। ज्वालामुखी के फटने से ये चट्टानें छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं। मिट्टी का निर्माण चट्टानों के टूटने से शुरू होता है। टूटने की यह प्रक्रिया वर्षा, बर्फ, हवा, ग्लेशियर तथा बहते पानी के कारण निरंतर चलती रहती है। मृदा निर्माण मुख्य तीन कारणों से हुआ है-
- रासायनिक कारण – नमी और वायु रासायनिक कारण के आधार हैं। यह मरुस्थलों में प्रभावपूर्ण नहीं होते क्योंकि वहाँ पानी की कमी होती है। विभिन्न रासायनिक यौगिक पानी में घुल कर रासायनिक क्रियाएं करते हैं जिससे चट्टानें मिट्टी में परिवर्तित हो जाती हैं।
- भौतिक कारण – तापमान, पानी, बर्फ, गुरुत्व और वायु के भिन्न भौतिक कारण हैं जो अपने गुणों से चट्टानों के संकुचन और फैलाव से उन्हें तोड़ डालते हैं। वही बाद में टूट-फूट से मिट्टी में बदल जाते हैं।
- जीव वैज्ञानिक कारण – सूक्ष्म जीव, फफूंदियां, लाइकेन, मॉस आदि के जैविक आधार हैं जो खनिजीय संरचना को बदल देते हैं। इनसे चट्टानों की भौतिक संरचना पर प्रभाव पड़ता है और वे मृदा निर्माण में सहायक बन जाते हैं।
मृदा निर्माण में सहायक साधन-
- तापमान – तापमान में परिवर्तन चट्टानों को फैलने और सिकुड़ने में सहायता देता है। चट्टानों का ऊपरी तल नीचे के तल की अपेक्षा अधिक प्रभावित होता है। इससे चट्टानों में दरारें उत्पन्न हो जाती हैं जो टूट कर मिट्टी में बदल जाती हैं।
- जल – वर्षा का जल चट्टानों की दरारों में प्रवेश कर नीचे चला जाता है जो चट्टानों को तोड़ कर मिट्टी में बदल देता है। कम तापमान से जल जमकर बर्फ बन जाता है। उससे उत्पन्न दबाव से चट्टानें टूट जाती हैं।
- वायु – तेज़ गति से चलने वाली वायु और आंधियां चट्टानों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक लुढ़काती और तोड़ती हैं।
- पेड़-पौधे – पेड़-पौधों की जड़ें चट्टानों में फैल कर उन्हें तोड़ देती हैं। लाइकेन तथा कुछ अन्य पौधे चट्टानों में रहकर अम्ल का उत्पादन करते हैं जो मिट्टी के निर्माण में सहायक बनते हैं। कई जीवाणु भी इस प्रक्रिया में सहायक बनते हैं।
- जीव-जंतु – अनेक जीव-जंतु चट्टानों में छेद कर अपने रहने का स्थान बनाते हैं। चींटियां, दीमक, मकौड़े तथा अनेक कीट मिट्टी बनाने में सहायक होते हैं।
प्रश्न 2.
मृदा अपरदन के मुख्य कारण क्या-क्या हैं ?
उत्तर-
मृदा अपरदन के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-
- जंगलों की कटाई – मृदा अपरदन के प्रमुख कारणों में से जंगलों की अंधाधुंध कटाई सर्वप्रमुख है। पेड़ों को जड़ें मिट्टी को बांधने का काम करती हैं। इससे मृदा अपने स्थान से आगे नहीं बहती। इनसे मिट्टी नम रहती है। जंगलों की कटाई से बाढ़ों का आना बढ़ गया है जिस कारण मृदा अपरदन होता है।
- अनियंत्रित पशुओं को चराना – पशुओं को पहाड़ों की ढलानों पर अनियंत्रित रूप से चराया जाता है। इससे मृदा नंगी हो जाती है और वर्षा या आंधियों से वह वहां से हट जाती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में इस प्रकार का मृदा अपरदन प्रायः दिखाई देता है।
- कृषि के अवैज्ञानिक तरीके – कई बार किसान खेतों में एक ही फसल बार-बार उगाते हैं जो उस फसल की उपज के लिए हानिकारक तो है ही पर साथ ही इस मृदा में ह्यूमस कम हो जाते है । गलत ढंग से जुताई, सिंचाई, कम उर्वरक प्रयोग आदि मृदा अपरदन को बढ़ाते हैं।
- बाढ़ और आंधियां – नदियों पर बांधों के न बने होने के कारण उन में बाढ़ आती है जिससे उपजाऊ मृदा बह जाती है। भूमि पर घास और झाड़ियों की कमी से भी मृदा आंधियों के द्वारा अपने स्थान से हट जाती है जिससे मृदा अपरदन हो जाता है।
- वनों में आग लगने से – अनेक कारणों से वनों में आग लग जाती है। पेड़-पौधे तथा घास नष्ट हो जाने के कारण मृदा नंगी हो जाती है जो तेज़ हवाओं से उड़ जाती है।
प्रश्न 3.
मृदा की संरचना किन मूल अवयवों से हुई है ? संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
उत्तर-
भिन्न प्रकार की मृदा की संरचना भिन्न प्रकार की होती है पर उन में मूल अवयव समान ही होते हैं। वे निम्नलिखित होते हैं-
(i) खनिज कण – मृदा में बजरी, रेत और चिकनी मृदा के कण विद्यमान होते हैं । ये मृदा को गठन और बनावट प्रदान करते हैं। मिट्टी में कणों का आकार उसे भिन्न प्रकार के गुण प्रदान करता है।
(ii) अकार्बनिक पदार्थ – मृदा में अनेक प्रकार के अकार्बनिक पदार्थ होते हैं जैसे-पोटाशियम, सोडियम, मैग्नीशियम, लोहा, नाइट्रेट, सल्फेट, फास्फेट, कार्बोनेट आदि। जिन चट्टानों से मृदा मूल रूप से बनती है ये अकार्बनिक पदार्थ इसमें मिल जाते हैं।
(iii) कार्बनिक पदार्थ – पौधों तथा जीव-जंतुओं की क्रियाओं से अनेक कार्बनिक पदार्थ मृदा में मिल जाते हैं। उनके मरने, नष्ट होने और गलने से कार्बनिक पदार्थ बढ़ते रहते हैं। जीव-जंतुओं की उत्सर्जन क्रिया से भी ऐसे पदार्थ मृदा में मिलते हैं। इनमें से ह्यूमस बनते हैं जो मृदा की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाते हैं। इन से मृदा में सूक्ष्म जीवों को पनपने और बढ़ने में भी सहायता मिलती है।
(iv) सूक्ष्मजीवी एवं अन्य प्राणियों की उत्सर्जन क्रियाएं – अनेक प्रकार के अति छोटे जीव मृदा में रहते हैं : बैक्टीरिया, फफूंदियां, काई आदि मृदा से जीवन प्राप्त करते हैं। चींटियां, दीमक, टिड्डे, केंचुए आदि मृदा में रहते हैं। चूहे, खरगोश आदि भी मृदा में अपना घर बनाते हैं। इनकी उत्सर्जित गंदगी से मृदा की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। इससे मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है।
(v) जल – लगभग सभी प्रकार की मृदा में जल होता है। यह जल अणुओं के बीच विद्यमान होता है। यह पेड़पौधों के पोषण के लिए आवश्यक है। मृदा का यह गुण है कि वह पानी का अवशोषण करे।
(vi) वायु – मृदा के कणों के बीच वायु उपस्थित होती है। यह पेड़-पौधों तथा अन्य जीव-जंतुओं के श्वसन के लिए उपयोगी होती है। प्रत्येक मृदा की किस्म में वायु को रोकने की क्षमता अलग-अलग होती है।
प्रश्न 4.
मृदा का संरक्षण किस प्रकार किया जा सकता है ?
उत्तर-
मृदा अपरदन के कारण भूमि की ऊपरी सतह से उपजाऊ मृदा हट जाती है जिस कारण वह अनउपजाऊ बन जाती है। वायु और जल के वेग पर नियंत्रण पा कर मृदा का संरक्षण किया जा सकता है। इससे मृदा को निरंतर होने वाली क्षति नहीं सहनी पड़ती। मिट्टी का संरक्षण निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है-
(i) पेड़-पौधे और घास लगा कर – पहाड़ी ढलानों पर बहुत अधिक मात्रा में पेड़-पौधे, झाड़ियां और घास लगाकर मृदा के बहाव को रोका जा सकता है। मृदा को जड़ें बांध लेती हैं। पानी और वायु के कारण वह मृदा अपने स्थान से दूर हट नहीं पाती। हमारे देश में वन महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत नये पेड़-पौधे इसीलिए लगाए जाते हैं : पेड़ों को काटने से रोकने के लिए ‘चिपको आंदोलन’ भी चलाया गया है।
(ii) सीढ़ीदार खेती – पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों से मृदा को नीचे बहने से रोकने के लिए सीढ़ीदार खेती की जाती है। वर्षा का पानी ढलानों पर बहुत तेजी से नीचे बहता है और अपने साथ उपजाऊ मृदा को बहा ले जाता है। मृदा को रोकने के लिए ढलान के साथ-साथ सीढ़ियां बनाई जाती हैं जिससे पानी का बहाव कमज़ोर पड़ जाता है और ढलान से बहुत कम मृदा बह कर नीचे जाती है।
(iii) बांध और किनारे बनाने से – हर वर्ष मानसून आने पर नदियों के किनारों की मृदा बह जाती है। यदि नदियों के वे किनारे अच्छी तरह से बना दिए जाएं जहां पानी वेग से टकराता है तो मृदा बहने से बच जाए। इसी प्रकार बांध बनाने से बाढ़ पर नियंत्रण किया जा सकता है। नदियों के किनारों पर चट्टानें और बड़े-बड़े पत्थर लगा कर मृदा को बहने से रोका जाना चाहिए।
(iv) अतिचारण के प्रतिबंधित करने से – पशुओं के लिए चरागाह बनाए जाने चाहिए ताकि वे पहाड़ों की ढलानों पर न चरें। उनके अतिचारण से मृदा घास से रहित हो जाती है जो तेज़ वर्षा और आंधी से उड़ जाती है।
(v) खाद और उर्वरकों के प्रयोग से – मृदा में खाद और उर्वरकों का उचित प्रयोग किया जाना चाहिए ताकि फसरों पर्याप्त मात्रा में हों, भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़े। वनस्पतियों की अधिकता से मृदा का संरक्षण किया जा सकता है।
प्रश्न 5.
वायु प्रदूषण के विभिन्न कारणों को लिखिए। वायु प्रदूषण को रोकने में हमारा क्या योगदान हो सकता है ?
उत्तर-
वायु के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में अनचाहे परिवर्तनों के कारण वायु प्रदूषण होता है। वायु प्रदूषण कच्चे पदार्थों, औद्योगिक प्रक्रियाओं, आवास स्थानों आदि को प्रभावित करता है। वायु प्रदूषण प्राकृतिक प्रक्रियाओं या मानव क्रियाओं के कारण होता है।
वायु प्रदूषण ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान बाहर निकले लावा के साथ विभिन्न गैसों तथा कणिकीय पदार्थों की आंधी तथा उड़ती हुई धूल, धुआं तथा कोहरा आदि के कारण होता है।
इसके अलावा दलदल से उत्पन्न मिथेन गैस, पेड़-पौधे तथा जीव-जंतुओं के अवशेषों के अपघटन से भी वायु प्रदूषण होता है। वह प्रदूषण का प्रमुख कारण विभिन्न स्रोतों-कोयला तथा अन्य ईंधन के दहन से, रेल इंजन, वाहन तथा वायुयान आदि से उत्पन्न धुआं कालिख, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनो-ऑक्साइड है। उद्योगों के कारण कुछ प्रमुख स्थानों पर क्लोरीन, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, अमोनिया, बैंजीन, सल्फर के ऑक्साइड आदि गैसें भी वायु प्रदूषण करती हैं।
उद्योग-धंधों तथा कारखानों की चिमनियों से निरंतर धुआं निकलता है। तापीय ऊर्जा संयंत्रों से फ्लाइ ऐश निकलती है। तंबाकू का प्रयोग करने वाले किसी की भी परवाह न करते हुए धुआं उड़ाते रहते हैं। लंबित कणीय द्रव्य (SPM), क्लोरो फ्लोरो कार्बन (CFCs), नाइट्रोजन के ऑक्साइड, ओज़ोन तथा लेड वायु को प्रदूषित करते हैं। इन से स्वास्थ्य संबंधी अनेक कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।
वायु प्रदूषण पर अनेक विधियों से नियंत्रण पाया जा सकता है-
- पेड़-पौधों को अधिक मात्रा में उगाया जाना चाहिए।
- उद्योग-धंधों को नगरीय क्षेत्रों से दूर स्थापित करना चाहिए।
- कारखानों की चिमनियां बहुत ऊंची होनी चाहिए।
- वाहनों में सीसा-रहित पेट्रोल प्रयुक्त करना चाहिए।
- धुआं रहित ऊर्जा के स्रोतों का प्रयोग करना चाहिए।
- धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर रोक लगा देनी चाहिए।
प्रश्न 6.
जैव रसायन चक्र क्या होता है ?
उत्तर-
जैव रसायन चक्र-पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया CO2 को वायमंडल से प्राप्त करते हैं तथा पौधे द्वारा मिट्टी में से पानी के साथ खनिज ग्रहण किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में C, N, O, S, P तथा जल आदि भाग लेते हैं। ये पदार्थ या तत्व पारिस्थितिक तंत्र के उत्पादक स्तर में प्रवेश करने के पश्चात् दूसरे स्तर पर स्थानांतरित कर दिए जाते हैं। इनका स्थानांतरण एवं परिवहन, मिट्टी, वायु, जल तथा जैव जीवों के द्वारा होता है। इन रसायनों की पारिस्थितिक तंत्र या जीवमंडल में पुनः प्रवेश करना जैव रसायन चक्र कहलाता है। ऊर्जा की तरह ये रसायन भी नष्ट नहीं होते। पौधों एवं जंतुओं के मृत शरीरों को अपघटकों द्वारा अपघटित किए जाने पर ये पदार्थ फिर से पोषण भंडार में मुक्त कर दिए जाते हैं जिन्हें फिर पौधों द्वारा अवशोषित किया जाता है। इन पदार्थों के पुनः चक्रण में अपघटकों की मुख्य भूमिका है।
प्रश्न 7.
प्रकृति में जल-चक्र को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
प्रकृति में जल-चक्र-

- सूर्य की गर्मी से नदियों, झीलों, समुद्रों के पानी का वाष्पन होता रहता है और वह जल-वाष्प में बदलता रहता है।
- जल-वाष्प हल्की होने के कारण वायु में में ऊपर जाती है। वायु द्वारा जल-वाष्प को पर्वतों की ओर ले जाया जाता है। पहाड़ों से टकराने के पश्चात् वह और ऊपर जाती है। इससे जल-वाष्प बादलों का रूप ले लेती है।
- जब बादलों की जल-वाष्प ठंडी होती है तब वह फिर जल के रूप में वापस आ जाती है और वर्षा होने लगती है।
- पृथ्वी की सतह पर गिरने वाला वर्षा का कुछ जल मृदा में से रिसकर नीचे जाता है। अंतत: यह जल किसी कठोर चट्टान द्वारा रोक लिया जाता है और वहाँ एकत्रित हो जाता है। यही भूमिगत जल हमें कुएं खोदने पर प्राप्त होता है।
- नदियों तथा समुद्रों के पानी का वाष्पन होता है और बाद में फिर नदियों, समुद्रों में पहुँच जाता है। यही जलचक्र कहलाता है।
प्रश्न 8.
प्रकृति में नाइट्रोजन चक्र किस प्रकार चलता है, विस्तार से लिखिए।
उत्तर-

नाइट्रोजन चक्र – वायुमंडल में वायुमंडल में नाइट्रोजन लगभग 78% होती है जो अपने आण्विक रूप N, में पाई जाती है। जल भंडारों में भी नाइट्रोजन होती है। इसके अतिरिक्त जैव स्थिरीकरण जीवों के ऊतकों, प्रोटीनों, एमीनो अम्लों तथा न्यूक्लिक अम्लों का एक घटक नाइट्रोजन होती है। नाइट्रोजन का उपयोग न तो पौधे न ही जंतु इसके तत्त्व के रूप में कर सकते हैं। इसके उपयोग के लिए इसे नाइट्रेट के रूप में बदलना पड़ता है। कुछ विशेष जीवाणु वायुमंडल की नाइट्रोजन को स्थिरीकरण या स्वांगीकरण द्वारा नाइट्रेट या नाइट्राइट्स में परिवर्तित कर देते हैं।
नाइट्रोजन का स्थिरीकरण-कुछ विशेष जीवाणु ही नाइट्रोजन को नाइट्रेट में बदल सकते हैं परंतु नील-हरित शैवाल भी नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने में सक्षम होते हैं। नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु फलीदार फसल के पौधों की जड़ों की गांठों में पाए जाते हैं। जीवाणुओं तथा शैवाल द्वारा किए गए नाइट्रोजन का स्थिरीकरण नाइट्रेट्स या नाइट्राइट्स के रूप में होता है जिसका फिर सूक्ष्मजीवों द्वारा अमोनीकरण किया जाता है।
मिट्टी में स्थित नाइट्रेट पौधों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं। अमोनिया के यौगिकों को नाइट्राइट में बदला जाता है जिनमें NO
2 होती है। ये यौगिक घुलनशील होते हैं। इसी प्रकार नाइट्रोबेक्टर जीवाणु इन नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलते हैं जिन्हें पौधों की जड़ें अवशोषित कर लेती हैं।
एक अन्य प्रकार के सूक्ष्मजीव इन नाइट्रेट्स और नाइट्राइट्स को अपघटित करके नाइट्रोजन को मुक्त करते हैं। सूक्ष्मजीव डीनाइट्रीकरण प्रक्रिया द्वारा पौधों तथा जंतुओं के मृत शरीरों को अपघटित करके नाइट्रोजन के रूप में मुक्त करते हैं जो वायुमंडल में फिर से मिल जाती है। इस प्रकार नाइट्रोजन चक्र चलता रहता है।
प्रश्न 9.
प्रकृति में ऑक्सीजन चक्र का विवरण लिखिए।
उत्तर-
प्रकृति में ऑक्सीजन चक्र-वायुमंडल के गैसीय घटकों में ऑक्सीजन की लगभग 21% मात्रा है। जल भंडारों में ऑक्सीजन पानी में घुली हुई स्थिति में होती है जिस पर जलीय जीव जीवित रहता है। जीवमंडल के सारे जीव, पौधे, जंतु तथा अपघटक श्वसन हेतु वायुमंडल में ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं तथा इस क्रिया में CO2 मुक्त होती है। कोयला, लकड़ी तथा अन्य ईंधनों के दहन में ऑक्सीजन प्रयुक्त होती है। इन सभी प्रक्रियाओं में वायुमंडल की ऑक्सीजन निरंतर CO2 में परिवर्तित होती रहती है।
ऑक्सीजन का लगातार सांस लेने में उपयोग CO2 की मात्रा बढ़ाता है। परंतु हरे पौधे दिन में प्रकाश-संश्लेषण द्वारा वायुमंडल की CO, को भोजन तैयार करने हेतु उपयोग करते हैं तथा ऑक्सीजन को मुक्त करते हैं। इस प्रकार ऑक्सीजन की मात्रा कम नहीं होती तथा CO2 की मात्रा में वृद्धि नहीं होती। ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्सइड अभूतपूर्व संतुलन बनाए रखने में तथा इन दोनों चक्रों में जीव प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 10.
जीवमंडल में कार्बन चक्र किस प्रकार संपन्न होता है ? विवरण दीजिए।
उत्तर-
जीवमंडल में कार्बन चक्र-जीवमंडल में सभी प्राणियों का मूल घटक कार्बन है जो कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन तथा न्यूक्लिक अम्लों के रूप मे होता है। गैसीय रूप में कार्बन का भंडार वायुमंडल है। कार्बन वायु में कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में प्राप्त होता है जो लगभग (0.03.- 0.04 % है। कार्बन का स्थानांतरण आहार श्रृंखला के माध्यम से होता है। वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड को हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा कार्बोहाइड्रेट के रूप में इकट्ठा करते हैं। पोषण रीति से यह शाकाहारी जंतुओं से मांसाहारी जंतुओं में खाद्य पदार्थ के रूप में बदलता रहता है। जंतुओं के अपघटकों द्वारा यह फिर वायुमंडल एवं जल भंडारों में वापिस चला जाता है। वायुमंडल एवं जल भंडारों के मध्य CO2 का विनिमय लगातार चलता रहता है। ज्वालामुखी पर्वतों से भी वायुमंडल को कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होती है।

विभिन्न प्रकार के पदार्थों के गलने, सड़ने तथा जलने से कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में मिलती रहती है। कार्बनिक यौगिकों से अनेक प्रकार के पदार्थ प्राप्त होते हैं जिनके जलाने से CO उत्पन्न होती है जैसे- पेट्रोलियम आदि। वानस्पतिक कार्बनिक यौगकों से कोयला भी प्राप्त होता है जो जल कर कार्बन को CO2 के रूप में मिला देता है। इस प्रकार लगातार CO2 की मात्रा बढ़ती जाती है जिसका उपयोग हरे पौधे तथा सागर करते हैं।
लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1.
वायुमंडल की रचना कैसे होती है ?
उत्तर-
वायुमंडल की रचना अनेक गैसों के मिश्रण से होती है। वायु एक विलयन है जिसमें कुछ गैसें अधिक मात्रा में तो कुछ कम मात्रा में विद्यमान हैं।
- मुख्य गैसें-नाइट्रोजन और ऑक्सीजन।
- सूक्ष्म मात्रा में गैसें-आर्गान, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प।
- अति सूक्ष्म मात्रा में गैसें-हीलियम, निऑन, क्रिप्टॉन, जीनॉन। हमारा वायुमंडल पृथ्वी से लगभग 120 km ऊँचाई तक फैला हुआ है। वायु की संघटना ताप तथा ऊँचाई के साथ बदलती रहती है।
प्रश्न 2.
हमारे दैनिक जीवन में मौसम की भविष्यवाणी का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
हमारे दैनिक जीवन में मौसम की भविष्यवाणी बहुत महत्त्वपूर्ण है। बादलों के बनने, वर्षा होने, हिमपात, आंधी व तूफान आदि में वायुमंडल का महत्त्वपूर्ण योगदान है। वायुमंडल के अध्ययन से मौसम संबंधी अनेक बातों की भविष्यवाणी की जा सकती है जिस से विनाश के प्रबंधन में सहायता मिल जाती है। मूसलाधार वर्षा, बादलों के फटने, चक्रवात, समुद्री हलचलों, सूखा आदि की पूर्व जानकारी मिल जाने से जन-जीवन की सुरक्षा का प्रबंध किया जा सकता है। इससे जनजीवन, पशु और फसलों को बचाने के प्रयत्नों में सफलता मिलती है। सूखे और बाढ़ से निपटने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 3.
ओजोन परत पर संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
वायुमंडल के मध्य मंडल में ओजोन परत पाई जाती है जिसमें मुख्यतः ओजोन (O3) होती है। पृथ्वी से 16 km की ऊंचाई पर सूर्य की किरणें वहां उपस्थित ऑक्सीजन (O2) को ओजोन (O2) में परिवर्तित कर देती है। 23 km की ऊंचाई तक ओजोन का घनत्व अधिकतम होता है।
प्रश्न 4.
ओज़ोन परत का महत्त्व क्या है ?
उत्तर-
पृथ्वी से लगभग 16 किलोमीटर की ऊंचाई पर ओज़ोन की एक परत आरंभ होती है जो समस्त जीवों के लिए अति महत्त्वपूर्ण है। यह परत सूर्य से आ रही हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों (U-V Rays) को सोख लेती है जिसमें पराबैंगनी विकिरणें पृथ्वी तक नहीं पहुंच पातीं। पराबैंगनी विकिरणों की तरंगदैर्ध्य कम होती है तथा यह हमारे शरीर में बहुत गहराई तक प्रवेश कर सकती हैं जो जैव शरीर के विभिन्न ऊतकों को नष्ट कर सकती है तथा त्वचा के कैंसर का कारण भी बन सकती है। ओजोन परत पराबैंगनी विकिरणों के कुप्रभाव से मनुष्य को बचाती है। इस परत की सबसे अधिक सघनता 23 कि०मी० ऊपर है।
प्रश्न 5.
वायु प्रदूषण क्या है ? कुछ वायु प्रदूषकों के नाम बताओ।
उत्तर-
वायु प्रदूषण – धूलकण, धुआं. तथा कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी विषैली गैसों की उपस्थिति द्वारा वायु का गंदा होना वायु प्रदूषण कहलाता है।
वायु प्रदूषक – कुछ प्रमुख वायु प्रदूषक हैं कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड की अधिक मात्रा, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, ओज़ोन, धूलकण. तथा धुआं आदि।
प्रश्न 6.
कार्बन डाइऑक्साइड का जीवों पर क्या कुप्रभाव पड़ता है ? .
उत्तर-
वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड का जीवों पर निम्नलिखित कुंप्रभाव पड़ता है-
- वायुमंडल में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड की अधिक मात्रा द्वारा सूर्य की किरणों का अवशोषण करके अत्यधिक ताप पैदा करता है। यह ताप ग्लेशियर को पिघला देता है जिससे समुद्रीय तटों के निचले भागों में बाढ़ आ जाती है।
- अधिक ताप फसलों को नष्ट करके कृषि पैदावार को कम कर देता है।
- वायुमंडल के अधिक ताप के कारण जीवन असुविधाजनक हो जाता है जिससे काम करने की क्षमता कम हो जाती है।
प्रश्न 7.
वायुमंडल में पौधों की भूमिका स्पष्ट करो।
उत्तर-
पौधे प्रकाश-संश्लेषण तथा श्वसन प्रक्रियाओं के द्वारा वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) तथा ऑक्सीजन (O2) के स्तर को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जीव-जंतु श्वसन क्रिया द्वारा वायुमंडल में से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। इसके विपरीत पौधे, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश-संश्लेषण द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करके ऑक्सीजन गैस छोड़ते हैं।
प्रश्न 8.
पौधे वायुमंडल के ताप को किस प्रकार कम करते हैं ?
उत्तर-
पौधे अपनी सतह से लगातार वाष्पोत्सर्जन से जल वाष्पित करते हैं। इस प्रक्रिया में निकली जल वाष्प वायुमंडल में आ जाती है। ये जलवाष्प अपनी वाष्पीकरण के लिए ऊष्मा वायुमंडल से लेते हैं। अतः इस प्रक्रिया से वायुमंडल का ताप कम होने लगता है।
प्रश्न 9.
लंबित कणीय द्रव्य क्या हैं ? इनसे क्या क्षति पहुँचती है ?
उत्तर-
लंबित कणीय द्रव्य – ये वायु में उपस्थित ठोस कण हैं जो धूल, धुएं और वाष्पों के रूप में विद्यमान रहते हैं। शीत ऋतु में धुंध के कारण यहीं बनते हैं। महानगरों में वाहनों तथा उद्योगों की अधिकता के कारण इसकी उपस्थिति वहाँ अधिक होती है। इनके कारण श्वसन में कठिनाई होती है। अधिक सूक्ष्म सांस के रास्ते फेफड़ों में प्रवेश कर उन्हें खराब कर सकते हैं या श्वसन संबंधी बीमारियां प्रदान कर सकते हैं।
प्रश्न 10.
क्लोरो फ्लुओरो कार्बन (CFC) किस प्रकार ओज़ोन-परत को क्षति पहुँचाते हैं ?
उत्तर-
क्लोरो फ्लुओरो कार्बन (CFC) वातानुकूलन तथा शीतलन संयंत्रों में प्रयुक्त किए जाते हैं। जब ये समताप मंडल में चले जाते हैं तो विसरित हो कर पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से विखंडित हो जाते हैं और फिर ओज़ोन परत को क्षति पहुंचाते हैं। ओजोन परत ही सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती
है।
प्रश्न 11.
धूम कुहरा (Smog) किस प्रकार बनता है ? इससे क्या हानि होती है ?
उत्तर-
धूम कुहरा (धूम + कोहरा) वायु में नाइट्रोजन के ऑक्साइडों के कारण छा जाता है। यह अम्लीय वर्षा का कारण भी बनता है। यह जीवाश्मी ईंधन के दहन से उत्पन्न होता है। इससे साँस की बीमारियाँ हो जाती हैं। बच्चे इससे अधिक प्रभावित होते हैं।
प्रश्न 12.
भूमंडलीय ऊष्णता को नियंत्रित करने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं ?
उत्तर-
सारे विश्व में भू-मंडलीय ऊष्णता को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रीन हाऊस गैसों के सांद्रण को नियंत्रित करके ऐसा किया जा सकता है। इस प्रयत्न में पूरी सफलता तब पूरी मिलेगी जब प्राकृतिक गैस और जीवाश्म ईंधनों के ज्वलन को कम कर दिया जाएगा।
प्रश्न 13.
नाइट्रोजन के जैविक स्थिरीकरण में पौधों की मूल या जड़ ग्रंथियों की क्या भूमिका है ?
उत्तर-

चना, मटर, सेम जैसे फलीदार पौधों की जड़ों में ग्रंथियां होती हैं। इन ग्रंथियों में नाइट्रोजन स्थिरीकारक जीवाणु उपस्थित रहते हैं। वे वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर सकते हैं।
प्रश्न 14.
पृथ्वी की ऊपरी सतह का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
पृथ्वी की ऊपरी सतह मृदा से ढकी हुई है जो जीवन के लिए अति उपयोगी है। यद्यपि इस पर मृदा की मोटाई कुछ मि० मी० से लेकर 3-4 मीटर तक ही होती है पर यह जीवन के लिए परमावश्यक पौधों की वृद्धि एवं विकास की आधार है। इसी से खनिज एवं लवण प्राप्त होते हैं। भूमिगत जल इसी के नीचे चट्टानों पर इकट्ठा होता है।
प्रश्न 15.
चट्टानों के कण प्रकृति द्वारा किस प्रकार अपघटित होते हैं ?
उत्तर-
ऑक्सीकरण, अपचयन, कार्बोनेटीकरण, जल–अपघटन, जलभंजन आदि से चट्टानों के कण प्रकृति द्वारा अपघटित होते हैं। कुछ खनिज पानी में घुल कर वर्षा के पानी के साथ रिसते हुए नीचे पहुँच जाते हैं। लाइकेन जैसे कुछ पौधे चट्टानों पर रह कर अम्लों को बनाते हैं जो मिट्टी की रचना में सहायता देते हैं। कुछ जीवाणु भी इसमें सहायता प्रदान करते हैं।
प्रश्न 16.
मृदा अपरदन विश्व के लिए चिंता का कारण क्यों है ?
उत्तर-
मृदा अपरदन से पृथ्वी की ऊपरी उपजाऊ सतह पानी में बह जाती है या तेज़ वायु से उड़ जाती है। इससे हमारे संसाधन का आधार नष्ट हो रहा है। मिट्टी के उपजाऊ न रहने से फसलों से पूरी मेहनत का फल नहीं मिलेगा।
प्रश्न 17.
मृदा अपरदन से मृदा के नष्ट होने के अतिरिक्त अन्य नुकसान लिखिए।
उत्तर-
मृदा अपरदन मिट्टी को नष्ट करने के अतिरिक्त और भी अधिक नुकसान पहुंचाता है। अवनलिकाओं के बनने से सड़क तथा इमारतों को नुकसान पहुँचता है। हवा तथा बाढ़ के द्वारा बहाकर लाई गई मृदा तालाबों, झीलों तथा नदियों में जमा हो जाती है। यह जल को पंकिल बना देता है। इससे तालाबों, झीलों तथा नदियों की गहराई कम हो जाती है। गाद के कारण उनके स्तर से जलीय प्राणियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है इसके अतिरिक्त यह क्षेत्र बाढ़ के प्रकोप का क्षेत्र बन जाता है। जिसके फलस्वरूप स्थानीय जलवायु तथा पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है।
प्रश्न 18.
मृदा की संरचना में जैविक अपघटकों का योगदान लिखिए।
उत्तर-
मृदा की संरचना में कीड़े-मकौड़ों और पेड़-पौधों का बहुत बड़ा योगदान होता है। मॉस तथा लाइकेन जैसे पौधे चट्टानों पर उगते हैं। इससे उत्पन्न अम्लों से चट्टानों पर रासायनिक क्रिया होती है जिस कारण वे टूटती हैं और मिट्टी के कण बनते हैं। पेड़ों की जड़ें चट्टानों के छिद्रों में उग कर उन पर दबाव डालती हैं जिससे वे टूटती हैं और मृदा में बदल जाती हैं। चींटियां तथा तरह-तरह के कीड़े-मकौड़े मृदा को बनाने में सहयोग देते हैं।
प्रश्न 19.
मिट्टी में ह्यूमस की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर-
मिट्टी में ह्यूमस की उपयोगिता-
- मिट्टी के कणों को परस्पर जोड़ कर उनकी प्रकृति में सुधार करता है।
- कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ा कर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाता है।
- वर्षा के कारण खनिजों को होने वाले नुकसान को रोकता है।
- मिट्टी में पानी को संरक्षित करता है।
- रेतली मिट्टी की संरचना में परिवर्तन कर उसे उपजाऊ बनाता है।
- कीटों, केंचुओं, सूक्ष्म जीवों आदि को भोजन प्रदान करता है।
प्रश्न 20.
मिट्टी में विभिन्न जीवों की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर-
मिट्टी में विभिन्न जीवों की उपयोगिता-
- जीवाणु ह्यूमस को बढ़ाते हैं।
- केंचुए मिट्टी को मुलायम बनाते हैं।
- राइजोबियम जैसे जीवाणु फलीदार पौधों की जड़ों की सहायता से वायु में उपस्थित नाइट्रोजन को पानी में घुलनशील नाइट्रेट में बदल कर उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं।
- कुछ जीव मिट्टी में छिद्र करते हैं जिससे पौधों को बढ़ने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 21.
दो ऐसी क्रियाएं बताइए जो वायुमंडल में से ऑक्सीजन का उपभोग करती हैं तथा एक ऐसी प्रक्रिया जो वायुमंडल को ऑक्सीजन प्रदान करती है।
उत्तर-
- वायुमंडल में से ऑक्सीजन का प्रयोग करने वाली दो क्रियाओं के नाम हैं-
(a) पौधों, जंतुओं तथा अपघटकों जैसे जीवों के द्वारा सांस लेना।
(b) ईंधनों का दहन। - वायुमंडल को ऑक्सीजन प्रदान करने वाली एक प्रमुख प्रक्रिया का नाम है-हरे पौधों द्वारा किया गया प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)।
प्रश्न 22.
उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से क्या हानियाँ हैं ?
उत्तर-
उर्वरक मिट्टी और पानी प्रदूषण को बढ़ाते हैं। इस प्रदूषण से मिट्टी में पाए जाने वाले लाभदायक जीव और जल में पाई जाने वाली मछलियाँ प्रभावित होती हैं । उर्वरकों के कारण शैवालों (Algae) की वृद्धि दर बढ़ जाती है और ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है जिससे पानी में रहने वाले जीवों को भारी क्षति पहुंचती है। यह जल पीने योग्य नहीं रहता।
प्रश्न 23.
वनों के कटने से क्या हानि होती है ?
उत्तर-
यदि वृक्षों के कटने की दर उनकी वृद्धि दर से अधिक हो तो वृक्षों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जाएगी। वृक्ष वाष्पन की क्रिया से बड़ी मात्रा में जल मुक्त करते हैं। इससे वर्षा वाले बादल आसानी से बनते हैं। जब वन कम हो जाते हैं तब उस क्षेत्र में वर्षा कम होती है। इससे वृक्ष कम संख्या में उग पाते हैं। इस प्रकार एक दुष्चक्र आरंभ हो जाता है और वह क्षेत्र रेगिस्तान भी बन सकता है। वृक्षों के बहुत अधिक मात्रा में कटने से जैव पदार्थों में समृद्ध मिट्टी की सबसे ऊपरी परत वर्षा के पानी के साथ बहकर लुप्त होने लगती है।
प्रश्न 24.
भारी उद्योगों के स्थापित होने से स्थानीय जलवायु पर होने वाले कोई दो प्रभाव लिखिए।
उत्तर-
- भारी उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं से CO2 के द्वारा प्रदूषण होता है तथा वायुमंडल के तापमान में वृद्धि हो जाती है।
- आर्द्रता कम हो जाने से पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होता है।
प्रश्न 25.
किसी व्यस्त चौराहे से प्रतिपल अनेक मोटर वाहन गुजरते हैं। चौराहे के निकट वायुमंडल में किन गैसों का सांद्रण अधिक होगा ?
उत्तर-
किसी व्यस्त चौराहे से प्रतिपल अनेक मोटर वाहन गुज़रने से चौराहे के निकट वायुमंडल में
- कार्बन मोनोऑक्साइड,
- कार्बन डाइऑक्साइड,
- सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड गैसों का सांद्रण होगा।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1.
हमारे ज्ञान के आधार पर किस ग्रह पर जीवन मौजूद है ?
उत्तर-
पृथ्वी पर।
प्रश्न 2.
जीवन के लिए किस-किस की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
परिवेश, ताप, पानी और भोजन।
प्रश्न 3.
सभी जीवों की मूल आवश्यकता किसके द्वारा पूरी की जाती है ?
उत्तर-
सूर्य से ऊर्जा और पृथ्वी पर उपलब्ध संपदा द्वारा।
प्रश्न 4.
पृथ्वी की सबसे बाहरी परत को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
स्थलमंडल।
प्रश्न 5.
पृथ्वी पर कितने प्रतिशत पानी है ?
उत्तर-
75% (लगभग)।
प्रश्न 6.
हवा पृथ्वी को किस प्रकार ढांपे हुए है ?
उत्तर-
एक कंबल के समान।
प्रश्न 7.
जीवमंडल क्या है ?
उत्तर-
जीवन को आश्रय देने वाला पृथ्वी का वह घेरा जहां वायुमंडल, स्थलमंडल और जलमंडल एक-दूसरे से मिलकर जीवन को संभव बनाते हैं उसे जीवमंडल कहते हैं।
प्रश्न 8.
जीवमंडल के जैविक घटक कौन-से हैं ?
उत्तर-
सभी सजीव।
प्रश्न 9.
जीवमंडल के निर्जीव घटक कौन-से हैं ?
उत्तर-
हवा, जल और मिट्टी।
प्रश्न 10.
वायु किन गैसों का मिश्रण है ?
उत्तर-
नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प।
प्रश्न 11.
शुक्र और मंगल ग्रहों पर मुख्य रूप से कौन-सी गैस है ?
उत्तर-
95 से 97% तक CO2 गैस।
प्रश्न 12.
यूकेरियोटिक और प्रोकेरियोटिक कोशिकाओं को ग्लूकोज़ अणुओं को तोड़ने और ऊर्जा पाने के लिए किस गैस की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
ऑक्सीजन गैस की।
प्रश्न 13.
दहन क्रिया क्या है ?
उत्तर-
वह क्रिया जिसमें O2 की खपत और CO2 का उत्पादन होता है उसे दहन क्रिया कहते हैं।
प्रश्न 14.
CO2 किन दो विधियों से स्थिर होती है ?
उत्तर-
- हरे पेड़- पौधे के द्वारा CO2 को कार्बोहाइड्रेट्स में बदलने में।
- समुद्री जल में घुले कार्बोनेट से कवच बनाने में।
प्रश्न 15.
पृथ्वी के औसत तापमान को वर्ष-भर कौन नियत रखता है ?
उत्तर-
वायुमंडल।
प्रश्न 16.
चंद्रमा की सतह पर अधिकतम और न्यूनतम तापमान कितना होता है ?
उत्तर-
न्यूनतम तापमान = -190°C
अधिकतम तापमान = 110°C.
प्रश्न 17.
गर्म होने से वायु में कौन-सी धाराएं उत्पन्न होती हैं ?
उत्तर-
संवहन धाराएं।
प्रश्न 18.
जल और स्थल के विकिरण से गर्म होकर वायु किस तरफ उठती है ?
उत्तर-
ऊपर की ओर।
प्रश्न 19.
कौन-सी वायु अधिक गर्म होती है-जल के ऊपर या स्थल के ऊपर ?
उत्तर-
स्थल के ऊपर।
प्रश्न 20.
दिन के समय वायु किस दिशा से किस दिशा की ओर प्रस्थान करती है ?
उत्तर-
समुद्र से स्थल की ओर।
प्रश्न 21.
रात के समय वायु किस दिशा से किस दिशा की ओर बढ़ती है ?
उत्तर-
स्थल से समुद्र की ओर।
प्रश्न 22.
वायु की गतियां किसका परिणाम हैं ?
उत्तर-
वायुमंडलीय प्रक्रियाओं का परिणाम।
प्रश्न 23.
हवाओं को कौन-से दो कारक प्रभावित करते हैं ?
उत्तर-
पृथ्वी की घूर्णन गति तथा पर्वत श्रृंखलाएं।
प्रश्न 24.
बादल कैसे बनते हैं ?
उत्तर-
गर्म वायु के साथ जलवाष्प ऊपर उठकर संघनित हो जाते हैं और हवा में उपस्थित कणों के चारों ओर जमा होकर बूंदों में बदल कर बादलों का रूप ले लेते हैं।
प्रश्न 25.
ओले कब गिरते हैं ?
उत्तर-
जब हवा का तापमान कम हो जाता है तब वर्षा की बूंदें ओलों के रूप में गिरती हैं।
प्रश्न 26.
वर्षा का पैटर्न किस पैटर्न पर निर्भर करता है ?
उत्तर-
पवन के पैटर्न पर।
प्रश्न 27.
भारत के बड़े भू-भाग पर किस कारण वर्षा होती है ?
उत्तर-
दक्षिण पश्चिम या उत्तर पूर्वी मानसून के कारण।
प्रश्न 28.
वायु की गुणवत्ता में कमी क्यों आई है ?
उत्तर-
नाइट्रोजन और सल्फर के जलने के कारण।
प्रश्न 29.
धूम कोहरा किससे बनता है ?
उत्तर-
सर्दी के मौसम में पानी के साथ हवा में संघनन से।
प्रश्न 30.
धूम कोहरा किसकी ओर संकेत करता है ?
उत्तर-
वायु प्रदूषण की ओर।
प्रश्न 31.
शुद्ध रूप में जल कहाँ विद्यमान है ?
उत्तर-
ध्रुवों पर बर्फ के रूप में, भूमिगत जल, नदियों, झीलों, तालाबों के रूप में।
प्रश्न 32.
स्थलीय प्राणी खारे पानी का प्रयोग क्यों नहीं कर पाते ?
उत्तर-
उनका शरीर खारे पानी में नमक की अधिक मात्रा को सहज नहीं कर पाता।
प्रश्न 33.
पानी की उपलब्धता स्पीशीज़ के वर्ग को किस-किस प्रकार प्रभावित करती है ?
उत्तर-
- संख्या
- जीवन में विविधता।
प्रश्न 34.
जलाशयों में प्राय: क्या मिल जाता है ?
उत्तर-
पीड़कनाशी, उर्वरक, विषैले पदार्थ, जीवाणु तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थ ।
प्रश्न 35.
जलीय जीव प्रदूषण से कब प्रभावित होते हैं ?
उत्तर-
जब जलीय ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
प्रश्न 36.
जलाशय का तापमान बढ़ने से क्या दुष्परिणाम होते हैं ?
उत्तर-
जीवों का प्रजनन प्रभावित होता है क्योंकि विभिन्न प्रकार के जंतुओं के अंडे और लारवा तापमान परिवर्तन के प्रति संवेदनशील होते हैं।
प्रश्न 37.
मिट्टी की सबसे बाहरी परत को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
भूपृष्ठ।
प्रश्न 38.
भूपृष्ठ में उपस्थित खनिज किस कार्य में सहायक होते हैं ?
उत्तर-
जीवों के पालन-पोषण में।
प्रश्न 39.
पत्थर टूट कर मिट्टी में किन प्रक्रमों से बदलते हैं ?
उत्तर-
भौतिक, रासायनिक और कुछ जैव प्रक्रमों से।
प्रश्न 40.
मिट्टी क्या है ?
उत्तर-
चट्टानों के टूटने के बाद अंत में बचे महीन कण मिट्टी कहलाते हैं।
प्रश्न 41.
कौन-से पौधे मिट्टी बनाने में सहायक होते हैं ?
उत्तर-
लिचन, मॉस तथा अन्य छोटे-बड़े पेड़-पौधे।
प्रश्न 42.
ह्यूमस किसे कहते हैं ?
उत्तर-
मिट्टी में गले-सड़े जीवों के अवशेष ह्यूमस कहलाते हैं।
प्रश्न 43.
मिट्टी के गुण किस-किस के कारण होते हैं ?
उत्तर-
यूमस की मात्रा तथा सूक्ष्म जीवों के कारण।
प्रश्न 44.
मिट्टी के पोषक तत्व किस पर निर्भर करते हैं ?
उत्तर-
उन चट्टानों पर जिनसे टूट कर वह मिट्टी बनी थी।
प्रश्न 45.
मिट्टी की संरचना को किसने बर्बाद किया है ?
उत्तर-
पीड़कनाशकों तथा उर्वरकों के अधिक प्रयोग ने।
प्रश्न 46.
पीड़कनाशकों और उर्वरकों ने मिट्टी में किसे नष्ट कर दिया है ?
उत्तर-
सूक्ष्मजीवों तथा केंचुओं को।
प्रश्न 47.
किस प्रकार की खेती न करने से मिट्टी जल्दी बंजर बन जाती है ?
उत्तर-
संपूषशीय खेती।
प्रश्न 48.
मिट्टी में स्थित जैविक विविधता किस प्रकार नष्ट होती है ?
उत्तर-
उपयोगी घटकों का मिट्टी से हटना तथा दूसरे हानिकारक पदार्थों के मिट्टी में मिलने से।
प्रश्न 49.
मिट्टी का अपरदन किन स्थानों पर त्वरित होता है ?
उत्तर-
पहाड़ी और पर्वतों वाले भागों में।
प्रश्न 50.
जलीय चक्र के दौरान पानी को क्या होता है ?
उत्तर-
अनेक घुलनशील पदार्थ पानी में घुल कर नदियों के माध्यम से समुद्र में चले जाते हैं। इससे मिट्टी के पोषक तत्व भी समुद्र में चले जाते हैं जिनका उपयोग समुद्री जीव-जंतु करते हैं।
प्रश्न 51.
वायुमंडल में नाइट्रोजन कितने प्रतिशत है ?
उत्तर-
78% (लगभग)।
प्रश्न 52.
नाइट्रोजन का उपयोग जीवन के लिए किस रूप से है ?
उत्तर-
प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल, DNA, RNA और विटामिन रूप से।
प्रश्न 53.
अन्य जैविक यौगिकों में नाइट्रोजन किस रूप में विद्यमान है ?
उत्तर-
ऐल्केलॉइड तथा यूरिया।
प्रश्न 54.
नाइट्रोजन को स्थिरीकरण करने वाले कौन-से पौधे होते हैं ?
उत्तर-
द्विबीज पत्री पौधे।
प्रश्न 55.
नाइट्रोजन को स्थिर करने वाले बैक्टीरिया कहाँ होते हैं ?
उत्तर-
फलीदार पौधों की जड़ों की मूल ग्रंथिका में।
प्रश्न 56.
बादलों में चमकने वाली बिजली नाइट्रोजन को क्या करती है ?
उत्तर-
नाइट्रोजन को ऑक्साइड में बदल देती है।
प्रश्न 57.
सामान्यतः पौधे नाइट्रेटस और नाइट्राइट्स को किस में बदल देते हैं ?
उत्तर-
अमीनो अम्ल में।
प्रश्न 58.
विभिन्न खनिजों में कार्बन किस रूप में मिलता है ?
उत्तर-
कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट के रूप में।
प्रश्न 59.
जीवन में कार्बन आधारित अणुओं के नाम लिखिए।
उत्तर-
प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, न्यूक्लिक अम्ल, विटामिन।
प्रश्न 60.
वायुमंडल में कितने प्रतिशत ऑक्सीजन गैस है ?
उत्तर-
21% (लगभग)।
प्रश्न 61.
ऑक्सीजन का उपयोग किन तीन प्रक्रियाओं में होता है ?
उत्तर-
श्वसन, दहन और नाइट्रोजन ऑक्साइड के निर्माण में।
Science Guide for Class 9 PSEB प्राकृतिक संपदा InText Questions and Answers
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1.
शुक्र और मंगल ग्रहों के वायुमंडल से हमारा वायुमंडल कैसे भिन्न है ?
उत्तर-
शुक्र और मंगल ग्रहों के वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगभग 95 से 97% है जबकि पृथ्वी के वायुमंडल में यह 0.04% है। इसमें नाइट्रोजन और ऑक्सीजन गैसों की अधिक मात्रा उपस्थित है।
प्रश्न 2.
वायुमंडल एक कंबल की तरह कैसे कार्य करता है ?
उत्तर-
जिस प्रकार कोई व्यक्ति कंबल को अपने ऊपर पूरी तरह से लपेट कर अंदर और बाहर के दो भिन्न वातावरण बना लेता है उसी प्रकार पृथ्वी के चारों ओर फैला वायुमंडल भी इसे दो स्तरों में बांट देता है। सूर्य की ओर से आने वाले हानिकारक विकिरणों को स्थल पर आने से रोकता है और नीचे की गैसों को ऊपर अंतरिक्ष में जाने से।
प्रश्न 3.
वायु प्रवाह (पवन) के क्या कारण हैं ? उत्तर-सूर्य की किरणें दिन भर स्थल और समुद्र तल को गर्म करती हैं। स्थल जल्दी गर्म होता है और जल

से। इसलिए जल की अपेक्षा स्थल के ऊपर की हवा भी तेजी से गर्म होकर ऊपर उठती है जिसकी आपूर्ति के लिए समुद्र की ओर से वायु स्थल की ओर चलने लगती है। रात के समय स्थल और समुद्र दोनों ठंडे होने लगते हैं पर स्थल ठंडा जल्दी हो जाता है और पानी धीरे-धीरे ठंडा होता है इसलिए पानी के ऊपर की वायु स्थल की ऊपर की वायु से गर्म होती है। तब स्थल की ओर से समुद्र की ओर वायु चलने लगती है।
प्रश्न 4.
बादलों का निर्माण कैसे होता है ?
उत्तर-
सूर्य की गर्मी से सभी जलीय भागों से वाष्पन क्रिया होती है और पानी वाष्प बनकर हवा में चला जाता है। जल वाष्प की कुछ मात्रा विभिन्न जैविक क्रियाओं से वायुमंडल में चली जाती है और हवा को गर्म करती है। यह अपने साथ जलवाष्प को लेकर ऊपर की ओर उठ जाती है। जल वाष्प ऊपर जाकर ठंडे हो जाते हैं तथा हवा में उपस्थित जल वाष्प छोटी-छोटी पानी की बूंदों में संघनित हो जाते हैं। यदि कुछ कण नाभिक की तरह कार्य करें तो ये बूंदें उनके चारों ओर जम जाती हैं। प्रायः हवा में उपस्थित धूलकण तथा अन्य निलंबित कण इस क्रिया को पूरा करते हैं। इसी से बादल बनते हैं। उनसे पानी की बूंदें संघनित होने के कारण बड़ी और भारी होकर वर्षा के रूप में नीचे गिर जाती हैं।
प्रश्न 5.
मनुष्य के तीन क्रियाकलापों का उल्लेख करें जो वाय के प्रदूषण में सहायक हैं।
उत्तर-
- जीवाश्म ईंधन पदार्थों का ऊर्जा प्राप्ति के लिए हवा में दहन।
- वृक्षों की अंधाधुंध कटाई।
- उद्योग-धंधों की अधिकता से स्थापना।
प्रश्न 6.
जीवों को जल की आवश्यकता क्यों होती है ?
उत्तर-
सभी जीवों में कोशिकाएं होती हैं। कोशिकाएं जीव द्रव्य से बनी होती हैं जिसमें लगभग 90% जल होता है। कोशिकाओं की सारी सक्रियता जल के माध्यम से ही हो पाती है। जल की अनुपस्थिति में वे जीवित नहीं रह सकतीं इसलिए जीवों को जल की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 7.
जिस गांव/शहर/नगर में आप रहते हैं वहां पर उपलब्ध शुद्ध जल का मुख्य स्रोत क्या है ?
उत्तर-
हमारे नगर में मीठे पानी का स्रोत भूमिगत जल है जिसे भूमि से निकाल कर टैंकों में स्टोर कर लिया जाता है तथा नगरवासियों को वितरित कर दिया जाता है।
प्रश्न 8.
क्या आप किसी क्रियाकलाप के बारे में जानते हैं जो इस जल के स्रोत को प्रदूषित कर रहा
उत्तर-
हमारे नगर में अनेक उद्योग-धंधे हैं जिनमें रंगों तथा रासायनिक पदार्थों का प्रयोग किया जाता है। रंग और रासायनिक पदार्थ पानी में घुलते हैं और धीरे-धीरे मिट्टी में अवशोषित होते जाते हैं। अब तक अनेक क्षेत्रों में इनके द्वारा भूमिगत पानी प्रदूषित किया जा चुका है और आने वाले समय में ये उद्योग-धंधे एक बड़ा संकट खड़ा करने ही वाले हैं। पानी में घुले हुए पारा, आर्सेनिक, सीसा जैसे हानिकारक तत्व अनेक भयंकर बीमारियों के कारण बन जाएंगे।
प्रश्न 9.
मृदा (मिट्टी) का निर्माण किस प्रकार होता है ?
उत्तर-
मृदा चट्टानों के टूटने-फूटने से बनती है। हज़ारों और लाखों वर्षों के लंबे समयांतराल में पृथ्वी की सतह या उसके समीप पाए जाने वाले पत्थर विभिन्न प्रकार के भौतिक, रासायनिक तथा कुछ जैव प्रक्रमों द्वारा टूट जाते हैं। टूटने के बाद सबसे अंत में बचा महीन कण मृदा है। सूर्य, जल, वायु तथा जीव ऐसे कारक हैं जो मृदा बनाने में सहायक हैं।
प्रश्न 10.
मृदा-अपरदन क्या है ?
उत्तर-
मृदा-अपरदन (Soil Erosion) – जल और वायु के प्रकोप से कई बार भूमि को ऊपरी सतह जल के साथ बह जाती है या वायु द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर चली जाती है। भूमि का इस प्रकार एक स्थान से दूसरे स्थान पर बह जाना मृदा अपरदन (Soil Erosion) कहलाता है।
प्रश्न 11.
अपरदन को रोकने और कम करने के कौन-कौन से तरीके हैं ?
उत्तर-
रोकने तथा कम करने के तरीके – मृदा अपरदन रोकने तथा कम करने के लिए निम्नलिखित ढंग अपनाये जा सकते हैं-
(1) भूमि को समतल करना – ढालू भूमि से वर्षा का पानी ढाल की दिशा में तेजी से बहता है और तेज़ बहाव के कारण मिट्टी कटकर बहते पानी के साथ बह जाती है जिससे मृदा अपरदन हो जाता है। अत: भूमि को समतल रखना चाहिए।
(2) मज़बूत मेड़बंदी – खेत की मेड़बंदी करनी चाहिए ताकि खेत से पानी बाहर न बह सके और मिट्टी का कटाव न हो सके।
(3) रेतीली भूमि में जीवांश खाद का मिलाना – रेतीली भूमि हल्की होती है और हल्की मिट्टी पानी के साथ जल्दी बह जाती है। अत: रेतीली भूमियों में जीवांश पदार्थ मिलाना चाहिए ताकि मिट्टी के कण आपस में बंधे रहें तथा मिट्टी पानी के साथ न बह सके ।
(4) वनस्पति का उगना – वह भूमि जिस पर फसल या पौधे नहीं उगाए जाते, वर्षा के पानी के साथ बह जाते हैं। पौधे उगने से मिट्टी के कण जड़ों द्वारा मज़बूती से बंधे रहते हैं तथा आसानी से बहते पानी के साथ अलग नहीं होते। अत: वनस्पति उगाकर इसे रोका जा सकता है।
(5) भूमि के ढाल के विपरीत फसल उगाना – पहाड़ी क्षेत्रों में भूमि प्रायः ढालू होती है। ऐसी भूमियों पर खेत की जुताई ढाल के विपरीत दिशा से करनी चाहिए तथा फसल की कतारें भी ढाल के विपरीत ही बीजनी चाहिए। ढालू भूमि पर पट्टियों से इस प्रकार खेती करनी चाहिए कि प्रत्येक पट्टी एक-दूसरे के ऊपर सीढ़ीनुमा हो ताकि पानी तेज़ न बह सके।
(6) वायुरोधक पौधे लगाना – ऐसी जगह जहाँ भूमि रेतीली हो तथा वायु तेज़ चलती हो, वहाँ खेतों के चारों ओर लंबे व घने पौधे उगाने चाहिएं ताकि वायु का तेज़ प्रभाव भूमि पर न पड़े तथा मिट्टी के कण वायु के साथ न उड़ सकें।
प्रश्न 12.
जल चक्र के क्रम में जल की कौन-कौन सी अवस्थाएं पायी जाती हैं ?
उत्तर-
वाष्प अवस्था, द्रव अवस्था और ठोस अवस्था (बर्फ)।
प्रश्न 13.
जैविक रूप से महत्त्वपूर्ण दो यौगिकों के नाम दें जिसमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों पाए जाते हैं।
उत्तर-
- प्रोटीन,
- न्यूक्लिक अम्ल।
प्रश्न 14.
मनुष्य की किन्हीं तीन गतिविधियों को पहचानें जिन से वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है।
उत्तर-
- उद्योग धंधों में कोयले का ईंधन रूप में प्रयोग।
- पेट्रोल और डीज़ल का वाहनों में प्रयोग।
- विद्युत् उत्पादन के लिए जीवाश्मी ईंधन का प्रयोग।
प्रश्न 15.
ग्रीन हाऊस प्रभाव क्या है ?
उत्तर-
ग्रीन हाऊस प्रभाव (Green House Effect) – हमारे वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की प्रतिशत मात्रा 0.04% है जो अति आवश्यक है। कार्बन डाइऑक्साइड की इस मात्रा को विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा बनाए रखा जाता है क्योंकि इसका उपयोग हरे पौधे तथा महासागर करते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड के अणुओं में पृथ्वी की सतह से परावर्तित अवरक्त विकिरणों को अवशोषित करने की क्षमता है जिससे वायुमंडल गर्म हो जाता है। इस प्रकार प्रग्रहित विकिरणों के कारण वायुमंडल के गर्म होने को ग्रीन हाऊस प्रभाव या पौधा घर प्रभाव कहते हैं। अतः वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता वातावरण को प्रभावित करती है। जलवाष्प तथा ओज़ोन में भी अवरक्त विकिरणों को प्रग्रहित करने की क्षमता होती है, इसीलिए उनको भी प्राय: ग्रीन हाऊस गैसों के रूप में माना जाता है। क्योंकि CO2 वायुमंडल में एक समान रूप से वितरित है, अत: यह ग्रीन हाऊस को जल वाष्पों या ओज़ोन से अधिक प्रभावित करती है।
प्रश्न 16.
वायुमंडल में पाए जाने वाले ऑक्सीजन के दो रूप कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
- ऑक्सीजन (O2)
- ओज़ोन (O3)।
PSEB 9th Class Science Guide प्राकृतिक संपदा Textbook Questions and Answers
प्रश्न 1.
जीवन के लिए वायुमंडल क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
जीवों के लिए वायुमंडल बहुत आवश्यक है। यही हमारे जीवन का आधार है। वायु में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प नामक घटक हैं। ऑक्सीजन प्रत्येक जंतु के लिए जरूरी है। जो स्थल पर रहते हैं वे श्वसन के लिए इसे वायु से प्राप्त करते हैं। जलीय जीव इसे पानी में घुली हुई अवस्था में प्राप्त करते हैं। यूकेरियोटिक कोशिकाओं तथा प्रोकेरियोटिक कोशिका को ग्लूकोज अणुओं को तोड़ने तथा उससे ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसी के कारण कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है। पेड़-पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को कार्बोहाइड्रेट्स में बदलते हैं तथा अपने लिए भोजन के रूप में प्राप्त करते हैं। वायुमंडल ने पूरी पृथ्वी को एक कंबल की तरह ढांप रखा है। वायु ताप की कुलाचक है इसलिए पृथ्वी का औसत तापमान पूरा वर्ष लगभग नियत रहता है। यह दिन के समय तापमान को बढ़ाने से रोकता है और रात के समय तापमान को पृथ्वी के बाहरी अंतरिक्ष में जाने की दर को कम करता है। वायुमंडल में जलवाष्प बनने और हवा बहने की क्रिया होती है।
प्रश्न 2.
जीवन के लिए जल क्यों अनिवार्य है ?
उत्तर-
जीवन के लिए जल की अनिवार्यता-
- जीवन की उत्पत्ति सर्वप्रथम सागर के जल में हुई थी। सागर के जल में जीवन की उत्पत्ति “नीले हरे शैवाल” तथा “साइनो बैक्टीरिया” नामक जीवों के रूप में हुई।
- हमारे शरीर में पाया जाने वाला जल भोजन से प्राप्त पोषक तत्त्वों को घोलकर इन्हें शरीर के सभी अंगों तक पहुँचा देता है।
- जल स्वेदन तथा वाष्पन की प्रक्रियाओं द्वारा मानव शरीर के ताप को नियंत्रित करता है।
- जल हमारे शरीर के अपशिष्ट पदार्थों (मल-मूत्र इत्यादि) के उत्सर्जन के लिए एक अच्छा माध्यम है।
- नदियों और समुद्र में नावों और जलयानों के द्वारा यात्रियों और सामानों का एक स्थान से दूसरे स्थान तक परिवहन होता है।
- हम पानी का अत्यधिक उपयोग पीने में, नहाने में, कपड़े धोने में और खाना पकाने इत्यादि में करते हैं। खाना पकाने और पीने का पानी कीटाणु-रहित तथा स्वच्छ होना चाहिए।
- जल का उपयोग सामान्यतया औषधि के रूप में भी करते हैं।
- ऊंचाई से तेज़ गति से गिरते हुए जल में ऊर्जा होती है जिसका प्रयोग हम बिजली बनाने में करते हैं।
- बहुत-से जलीय जंतु, जैसे-मेंढक, मछली, मगरमच्छ आदि जल में निवास करते हैं तथा वे जल में घुली हुई ऑक्सीजन का प्रयोग श्वसन क्रिया में करते हैं।
- बहुत-से जलीय पौधे भी जल में पाए जाते हैं तथा जल में घुली हुई कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया के लिए करते हैं।
- कृषि के लिए भी जल अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। पौधे पानी के बिना वृद्धि नहीं कर सकते हैं।
- जल, पेड़-पौधों में खनिजों तथा अन्य पोषक तत्वों का परिवहन करने के लिए एक माध्यम का काम करता है।
- जल, पौधों के अंकुरण तथा पौधों की वृद्धि में सहायता करता है।
प्रश्न 3.
जीवित प्राणी मृदा पर कैसे निर्भर है ? क्या जल में रहने वाले जीव संपदा के रूप में मृदा से पूरी तरह स्वतंत्र हैं ?
उत्तर-
जीवित प्राणी मृदा पर ही निर्भर करता है। मृदा में उत्पन्न पेड़-पौधों से अपना खाद्य प्राप्त करता है। जीवन-यापन के लिए सभी आवश्यक तत्व इसी से प्राप्त होते हैं। पौधे तरह-तरह के खनिज लवण मृदा से ही प्राप्त करते हैं और भोजन के तत्वों के रूप में प्राणियों के जीवन के आधार बनते हैं।
पानी में रहने वाले जीव संपदा के रूप में मृदा से पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं। वे जल में उगे पादपों को खाते हैं या उन पर आधारित अन्य प्राणियों को खाकर जीवित रहते हैं।
प्रश्न 4.
आपने टेलीविजन पर और समाचारपत्र में मौसम संबंधी रिपोर्ट को देखा होगा। आप क्या सोचते हैं कि हम मौसम के पूर्वानुमान में सक्षम हैं ?
उत्तर-
मौसम संबंधी जानकारियां लंबी और गहन वैज्ञानिक जानकारियों पर आधारित होती हैं। दूर आकाश में स्थित सैटेलाइट पृथ्वी पर सदा अपनी दृष्टि जमाए रहते हैं तथा वातावरण की जांच करने में वैज्ञानिकों की सहायता करते हैं। वायु के दबाव, फटने तथा समुद्रों में उत्पन्न चक्रवातों की सूचना प्रदान करते हैं। मानसून आने से पहले ही इनसे अनुमान हो जाता है कि किसी वर्ष वर्षा की स्थिति कैसी होगी। इससे कृषि संबंधी नई योजनाएं बनाई जाती हैं। समुद्री तटों पर रहने वालों को तरह-तरह के खतरों की पूर्व सूचना दी जाती है।
प्रश्न 5.
हम जानते हैं कि बहुत-सी मानवीय गतिविधियां वायु, जल एवं मृदा के प्रदूषण स्तर को बढ़ा रही हैं। क्या आप सोचते हैं कि इन गतिविधियों को कुछ विशेष क्षेत्रों में सीमित कर देने से प्रदूषण के स्तर को घटाने में सहायता मिलेगी ?
उत्तर-
बहुत से मानवीय क्रियाकलाप वायु, जल और मृदा के प्रदूषण स्तर को निरंतर बढ़ा रहे हैं। यदि इन क्रियाकलापों को कुछ विशेष क्षेत्रों में सीमित कर दिया जाए तो प्रदूषण के स्तर पर कुछ मदद मिलेगी। प्रायः अस्पतालों के आसपास भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर वातावरण से हानिकारक गैसों पर नियंत्रण पाया जाता है। पेट्रोल और डीज़ल के स्थान पर वाहनों में CNG का प्रयोग कुछ नगरों में आरंभ किया गया है जिसके अनुकूल प्रभाव दिखाई दिए हैं। खादानों की खुदाई रोककर वायुमंडल तथा पेड़-पौधों की रक्षा की गई है। नदियों के पानी की शुद्धिकरण के प्रयत्न किए गए हैं। यह ठीक है कि हमारे देश में जनसंख्या बहुत अधिक है, अशिक्षा है, गरीबी है पर फिर भी प्रयत्न करने पर सकारात्मक परिणाम अवश्य मिलेंगे। इनसे प्रदूषण समाप्त तो नहीं होगा पर प्रदूषण के स्तर को घटाने में मदद अवश्य मिलेगी।
प्रश्न 6.
जंगल, वायु, मृदा और जलीय स्त्रोत की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करते हैं ?
उत्तर-
जंगलों की भूमि तथा वर्षा में गहरा संबंध है। यदि वृक्षों को काटने की दर उनकी वदधि से अधिक हो जाए तो वृक्षों की संख्या कम होती जाती है और वह क्षेत्र धीरे-धीरे रेगिस्तान भी बन सकता है। जंगल सदा वायु, मृदा और जलीय स्रोत को सीधा प्रभावित करते हैं।
वृक्ष वाष्पण क्रिया से बड़ी मात्रा में जल मुक्त करते हैं। इस मुक्त जल से वाष्प-बादल बनते हैं तथा वर्षा होती है। जंगलों के कम होने से वर्षा भी कम होगी तथा उस क्षेत्र में वृक्ष उगने की दर कम हो जाएगी जिससे पर्यावरण प्रभावित होगा।
वृक्षों के बहुत अधिक काटने से जैव पदार्थों में समृद्ध मृदा की सबसे ऊपर की सतह वर्षा के पानी के साथ बहकर लुप्त हो जाएगी। मृदा के इस प्रकार अपरदन के कारण भूमि की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो जाती है। वन जंगली-जंतुओं को आश्रय देते हैं। हमें उनसे कई प्रकार की जड़ी-बूटियां मिलती हैं तथा इमारती लकड़ी प्राप्त होती है। कई उद्योगों के लिए हमें कच्चा माल प्रदान करते हैं। जंगलों से जलीय स्रोतों की गुणवत्ता बढ़ती है। इनसे भूमि कटाव पर नियंत्रण होता है।
जंगलों की उपयोगिता को देखते हुए वनों का पुनः पूरण अति आवश्यक हो जाता है। इन सबके अतिरिक्त पौधे जितने अधिक उगाए जाएंगे हमारा पर्यावरण उतना ही स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक होगा। पौधे ही हमारे प्रदूषित पर्यावरण को स्वच्छ कर सकते हैं। हवा, मृदा और जलीय स्रोत जंगलों से सीधे तौर पर संबंधित है।
