UK Board 10 Class Hindi Chapter 2 – जॉर्ज पंचमकी नाक (कृतिका)
UK Board 10 Class Hindi Chapter 2 – जॉर्ज पंचमकी नाक (कृतिका)
UK Board Solutions for Class 10th Hindi Chapter 2 – जॉर्ज पंचमकी नाक (कृतिका)
जॉर्ज पंचम की नाक (कमलेश्वर )
1. पाठ्यपुस्तक में दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1—सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है, वह उनकी किस मानसिकता को दर्शाती है? (2008)
उत्तर – सरकारी तन्त्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिन्ता या बदहवासी दिखाई देती है, वह उनकी गुलाम बने रहने और काम को एक-दूसरे के ऊपर टकराने की मानसिकता को दर्शाती है।
प्रश्न 2 – रानी एलिजाबेथ के दरजी की परेशानी का क्या कारण था? उसकी परेशानी को आप किस तरह तर्कसंगत ठहराएँगे?
उत्तर – रानी एलिजाबेथ का दरजी इसलिए परेशान था कि हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और नेपाल के दौरे पर रानी कब क्या पहनेंगी? उसकी परेशानी कतई तर्कसंगत नहीं थी। एक महारानी होने के नाते उन पर कई परिधान पूर्व से ही होंगे, जिनका उपयोग वे कर सकती थीं। दरजी की परेशानी व्यर्थ ही थी।
प्रश्न 3 – ‘ और देखते-ही-देखते नई दिल्ली का काया पलट होने लगा’ – नई दिल्ली के काया पलट के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए होंगे?
उत्तर— नई दिल्ली के काया पलट के लिए निम्नलिखित प्रयत्न किए गए होंगे-
(i) सभी सड़कों को सुधारा गया होगा या नया बनाया गया होगा।
(ii) सरकारी भवनों की रँगाई-पुताई की गई होगी।
(iii) हवाई अड्डे को आकर्षक रंग-रूप दिया गया होगा ।
(iv) रानी के ठहरने के स्थान को रंग-रूप की दृष्टि से नया बनाया गया होगा।
प्रश्न 4 – आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान सम्बन्धी आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा है-
(क) इस प्रकार की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार हैं?
(ख) इस तरह की पत्रकारिता आम जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव डालती है?
उत्तर- (क) इस प्रकार की पत्रकारिता हमें अभिजात्य वर्ग के रहन-सहन के बारे में बताती है। साथ ही उनकी विशिष्ट शैलियों से भी हमारा परिचय होता है। इन सबसे भी जो एक बड़ी बात है कि इसके द्वारा जनता को यह भी पता चलता है, तथाकथित बड़े लोग जनता अथवा देश की पूँजी को किस प्रकार अपनी सुख-सुविधाओं और अपनी झूठी शान पर लुटाते हैं। इस रूप में यह पत्रकारिता ज्ञान बढ़ानेवाली और जनता को जागरूक करनेवाली है। इसलिए ठीक है।
(ख) युवा पीढ़ी इस प्रकार की पत्रकारिता से कभी-कभी दिग्भ्रमित हो सकती है। वह समर्थ न होते हुए भी अभिजात्य वर्ग के आचरणों पर चलने का प्रयास कर सकती है। इससे युवा पीढ़ी का विघटन सम्भव है।
प्रश्न 5– जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुनः लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या-क्या यत्न किए? (2009)
उत्तर – जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुनः लगाने के लिए मूर्तिकार ने अग्रलिखित कार्य किए-
(i) पत्थर की किस्म का पता लगाने के लिए मूर्तिकार हिन्दुस्तान के हर पहाड़ पर गया किन्तु उसे सफलता न मिली।
(ii) मूर्तिकार देश में लगी किसी नेता की मूर्ति की नाक लाने देश के दौरे पर निकला। दिल्ली से वह बम्बई पहुँचा। दादाभाई नौरोजी, गोखले, तिलक, शिवाजी, कॉवसजी जहाँगीर — सबकी नाकें उसने टटोलीं, नापीं और गुजरात की ओर गया — गांधीजी, सरदार पटेल, विट्ठलभाई पटेल, महादेव देसाई की मूर्तियों को परखा और बंगाल की ओर चला — गुरुदेव रवीन्द्रनाथ, सुभाषचन्द्र बोस, राजा राममोहन राय आदि को भी देखा, नाप-जोख की और बिहार की तरफ चला। बिहार होता हुआ उत्तर प्रदेश की ओर आया – चन्द्रशेखर आजाद, बिस्मिल, मोतीलाल नेहरू, मदनमोहन मालवीय की लाटों के पास गया। घबराहट में मद्रास भी पहुँचा। उसने पूरे हिन्दुस्तान की यात्रा की, सबकी नाकों का नाप लिया, परन्तु जॉर्ज पंचम की इस नाक से सबकी नाकें बड़ी निकलीं।
(iii) मूर्तिकार ने एक जिन्दा नाक लगाने का प्रस्ताव रखा और स्वीकृति के पश्चात् उसने जिन्दा नाक लगा भी दी।
प्रश्न 6 – प्रस्तुत कहानी में जगह-जगह कुछ ऐसे कथन आए लगाने, जो मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट करते हैं। उदाहरण के लिए ‘फाइलें सबकुछ हजम कर चुकी हैं।’ ‘सब हुक्कामों ने एक-दूसरे की तरफ ताका।’ पाठ में आए ऐसे अन्य कथन छाँटकर लिखिए।
उत्तर- ऐसे अन्य कथन हैं-
(i) दिल्ली में सब था — सिर्फ नाक नहीं थी ।
(ii) खामोश रहनेवालों की ताकत दोनों तरफ थी ।
(iii) गश्त लगती रही और लाट की नाक चली गई।
(iv) रानी आए और नाक न हो।
(v) सबकी नाकों का नाप लिया, पर जॉर्ज पंचम की इस नाक से सब बड़ी निकलीं।
प्रश्न 7 – नाक मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का द्योतक है। यह बात पूरी व्यंग्य रचना में किस तरह उभरकर आई है? लिखिए ।
उत्तर— नाक मान-सम्मान का द्योतक होती है। यह बात पूरी व्यंग्य रचना में उभरकर आई है। जॉर्ज पंचम के बुत से नाक का गायब होना और फिर अपनी नाक बचाने के लिए जॉर्ज पंचम की नाक की खोज और उसे लगवाने की जद्दोजहद आदि सभी इस व्यंग्य का मूलविषय हैं। अन्ततः मूर्तिकार किसी जीवित की नाक की कुर्बानी देकर सबकी नाक बचाता है। इस प्रकार नाक बचाने की बात इस व्यंग्य की जान है।
प्रश्न 8 – जॉर्ज पंचम की लाट पर किसी भी भारतीय नेता, यहाँ तक कि भारतीय बच्चे की नाक फिट न होने की बात से लेखक किस ओर संकेत करना चाहता है?
उत्तर – जॉर्ज पंचम की लाट पर किसी भी भारतीय नेता, यहाँ तक कि भारतीय बच्चे की नाक फिट न होने की बात से लेखक यह संकेत कर रहा है कि भारतीय नेताओं के आदर्श और यहाँ तक कि भारतीय बच्चों की नाक अर्थात् उनका चरित्र भी जॉर्ज पंचम से कहीं ऊँचा है, सम्माननीय है।
प्रश्न 9 – अखबारों ने जिंदा नाक लगने की खबर को किस तरह से प्रस्तुत किया?
उत्तर— सब अखबारों ने खबरें छापीं कि जॉर्ज पंचम के जिन्दा नाक लगाई गई है…यानी ऐसी नाक, जो कहीं से भी पत्थर की नहीं लगती।
लेकिन उस दिन के अखबारों में एक बात और ध्यान देनेवाली थी। उस दिन देश में कहीं भी किसी उद्घाटन की खबर नहीं छपी थी। किसी ने कोई फीता नहीं काटा था। कोई सार्वजनिक सभा तक नहीं हुई थी। कहीं भी किसी का अभिनन्दन नहीं हुआ था, कोई मानपत्र भेंट करने की नौबत नहीं आई थी। किसी हवाई अड्डे या स्टेशन पर स्वागत-समारोह नहीं हुआ था। किसी का नवीनतम चित्र नहीं छपा था ।
सभी अखबार पूरी तरह खाली थे।
पता नहीं ऐसा किस कारण से हुआ था ?
नाक तो केवल एक चाहिए थी और वह भी बुत के लिए।
प्रश्न 10–‘नई दिल्ली में सब था… सिर्फ नाक नहीं थी । इस कथन के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है? “
उत्तर- “नई दिल्ली में सब था…. सिर्फ नाक नहीं थी ।” इस कथन के माध्यम से लेखक दिल्ली में बैठे नौकरशाहों की काम न करने की प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है कि ये लोग इतने निठल्ले थे कि इन्हें अपनी नाक अर्थात् मान-सम्मान की चिन्ता नहीं थी ।
प्रश्न 11—जॉर्ज पंचम की नाक लगनेवाली खबर के दिन अखबार चुप क्यों थे?
उत्तर- जॉर्ज पंचम की नाक लगनेवाली खबर के दिन अखबार इसलिए चुप थे कि एक बुत के नाक लगनी थी और सरकारी तन्त्र ने अपनी नाक बचाने के लिए एक निर्दोष व्यक्ति की जीवित नाक लगा दी। वे चुप रहकर अपना विरोध प्रकट कर रहे थे।
2. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1 – पत्थर की किस्म खोजने के लिए मूर्तिकार ने क्या कहा व क्या किया?
उत्तर – जॉर्ज पंचम की नाक के लिए, मूर्ति की किस्म का पत्थर खोजने के लिए मूर्तिकार को बुलाया गया। उसने प्रकरण हल कर परेशान मत होइए, मैं हिन्दुस्तान के हर पहाड़ पर जाऊँगा और ऐसा ही दिया। वह बोला, “पत्थर की किस्म का ठीक पता नहीं चला तो पत्थर खोजकर लाऊँगा ।” कमेटी के सदस्यों की जान में जान आई। सभापति ने चलते-चलते गर्व से कहा, “ऐसी क्या चीज है जो हिन्दुस्तान में मिलती नहीं। हर चीज इस देश के गर्भ में छिपी है, जरूरत खोज करने की है। खोज करने के लिए मेहनत करनी होगी, इस मेहनत का फल हमें मिलेगा….. आनेवाला जमाना खुशहाल होगा । ” यह छोटा-सा भाषण फौरन अखबारों में छप गया।
मूर्तिकार हिन्दुस्तान के पहाड़ी प्रदेशों और पत्थरों की खानों के दौरे पर निकल पड़ा। कुछ दिन बाद वह हताश लौटा, उसके चेहरे पर लानत बरस रही थी, उसने सिर लटकाकर खबर दी, “हिन्दुस्तान का चप्पा-चप्पा खोज डाला, पर इस किस्म का पत्थर कहीं नहीं मिला। यह पत्थर विदेशी है। “
सभापति ने तैश में आकर कहा, “लानत है आपकी अक्ल पर ! और रहन-सहन, जब हिन्दुस्तान में बाल डांस तक मिल जाता है तो विदेशों की सारी चीजें हम अपना चुके हैं- दिल-दिमाग, तौर-तरीके पत्थर क्यों नहीं मिल सकता?”
