UK Board 10 Class Hindi Chapter 5 – देवतात्मा हिमालयः (संस्कृत विनोदिनी)
UK Board 10 Class Hindi Chapter 5 – देवतात्मा हिमालयः (संस्कृत विनोदिनी)
UK Board Solutions for Class 10th Hindi Chapter 5 – देवतात्मा हिमालयः (संस्कृत विनोदिनी)
देवतात्मा हिमालयः ( देवताओं की आत्मा हिमालय)
पाठ का सार
गङ्गा और गोदावरी की भेंट – गोदावरी नदी गङ्गा की स्तुति गा रही है, जिसे सुनकर स्वयं गङ्गा गोदावरी के समीप पहुँचती है, जहाँ गोदावरी गङ्गा से उसका परिचय पूछती है। गङ्गा बताती हैं कि वह हिमालय से निकली है, उसकी सखी यमुना भी हिमालय से निकली है।
गङ्गा द्वारा हिमालय-वर्णन – गङ्गा हिमालय के गौरीशङ्कर शिखर का उल्लेख करने के साथ ही गोदावरी को यह भी बताती है कि हिमालय पर्वतों का राजा है, उसी के कैलास शिखर पर शिव का निवास है। माता पार्वती उसकी पुत्री हैं। पवित्र मानसरोवर भी वहीं है। हरिद्वार, ऋषिकेश, बदरीनाथ, केदारनाथ, अमरनाथ इत्यादि स्थान प्रसिद्ध हैं, जोकि हिमालय-क्षेत्र में ही स्थित हैं। शान्ति के लिए ऋषि-मुनि यहाँ तप करने आते हैं। इसकी पवित्रता और महत्ता के कारण ही इसे ईश्वर की काव्य-रचना, प्रकृति का क्रीडाङ्गण और औषधियों का स्रोत कहा गया है।
गोदावरी का परिचय — इसके पश्चात् गङ्गा गोदावरी से उसका परिचय पूछती है, जिस पर गोदावरी बताती है कि मैं सह्याद्रि से निकली हूँ। सह्याद्रि भी भारत के सात पर्वतों में से प्रमुख पर्वत है। गोदावरी पूछने पर गङ्गा को बताती है कि मेरी सखियाँ कृष्णा और कावेरी भी इसी पर्वत से निकली हैं। इसी बीच गङ्गा बताती है कि मेरी सखी सिन्धु भी हिमालय से ही निकली है। इस पर गोदावरी कहती है, किन्तु वह बंगाल की खाड़ी में तो दिखाई नहीं देती। तब गङ्गा बताती है कि वह बंगाल की खाड़ी में नहीं, वरन् सिन्धु समुद्र ( अरब सागर) में गिरती है। गोदावरी आगे नर्मदा के विषय में बताती है कि वह विन्ध्याचल से निकलती है। अन्ततः गङ्गा गोदावरी को बताती है कि प्रत्येक व्यक्ति जीवन में एक बार हिमालय-दर्शन अवश्य करना चाहता है। इस पर गोदावरी कालिदास के ‘अस्त्युत्तरस्यां……’ श्लोक के साथ अपनी बात का समापन करती है।
पाठाधारित अवबोधन-कार्य एवं भावानुवाद
निर्देशः – अधोलिखितं वार्त्तालापं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत-
(1) “देवि सुरेश्वरि ………….. हिमालये एव अस्ति ।
शब्दार्थाः – सुरेश्वरि = हे देवलोक की देवि !; त्रिभुवनतारिणि = तीनों लोकों का उद्धार करने ( तारने) वाली; तरलतरङ्गे = हे चञ्चल तरंगोंवाली; स्तुतिगीतम् = स्तुति का गीत; ज्ञातुम् = जानने के लिए; भवत्याः = आपकी; कुतः = कहाँ से; नगाधिराजात् = पर्वतों के राजा से; श्रोतुम् = सुनना; वदतु = बोलो; पुण्यपर्वतेषु = पवित्र पर्वतों में से; बह्व्यः = बहुत-सी; ततः = वहाँ से; प्रवहति = बहती है; उत्तुङ्गम् = ऊँचा; वदन्ति = कहते हैं; किल = निश्चित ही; तथा = वैसा; पुण्यतडागः = पवित्र तालाब ।
सन्दर्भः — प्रस्तुत वार्त्तालाप हमारी पाठ्यपुस्तक ‘संस्कृत विनोदिनी (भाग- द्वितीयः ) ‘ में संकलित ‘देवतात्मा हिमालयः’ नामक पाठ से उद्धृत है।
प्रसंगः–प्रस्तुत वार्त्तालाप में गङ्गा और गोदावरी नदियाँ जब एक-दूसरे से मिलती हैं तो वे परस्पर एक-दूसरे का परिचय पूछती हैं । यहाँ गङ्गा गोदावरी को अपना और हिमालय का परिचय देती है।
हिन्दी – भावानुवादः – ” हे स्वर्ग की देवि चंचल तरंगोंवाली भगवति गङ्गा! तुम तीनों लोकों को तारनेवाली अर्थात् उनका उद्धार करनेवाली हो ।”
गङ्गानदी – अरे ! मेरा स्तुति-गीत कौन गा रही है? आप कौन हैं, ऐसा मैं जानना चाहती हूँ?
गोदावरी – मैं गोदावरी नदी हूँ। सब भारतीय आपकी स्तुति करने की इच्छा करते हैं। आप कहाँ से आ रही हैं?
गङ्गा – निश्चय ही आप जानती ही हैं, मैं पर्वतों के राजा हिमालय से आ रही हूँ। आप हिमालय के विषय में क्या सुनना चाहती हैं?
गोदावरी – हाँ, बोलो गङ्गा! मैं सुनना चाहती हूँ ।
गङ्गा – भारत के पवित्र पर्वतों में श्रेष्ठ हिमालय पर्वत है। वहाँ से बहुत-सी नदियाँ बहती हैं। कृष्ण की मित्र यमुना भी वहाँ से ही बहती है। पर्वतों का राजा हिमालय है। विश्व का अत्यधिक ऊँचा शिखर ‘गौरीशङ्कर’ भी वहीं है।
गोदावरी – आज लोग इस शिखर को ही ‘एवरेस्ट’ ऐसा कहते हैं।
गङ्गा – हाँ, परन्तु हम भारतीय वैसा नहीं कहना चाहते हैं । शिव का लोक (निवास) कैलास भी हिमालय पर ही है। पार्वती हिमालय की ही पुत्री हैं। मानसरोवर’ ऐसा पवित्र तालाब भी हिमालय में ही है।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) अत्र का गायति ?
(ख) सर्वे भारतीयाः कस्याः स्तुतिं कर्तुम् इच्छन्ति ?
(ग) गङ्गा कुतः आगच्छति?
(घ) कृष्णसखी का अस्ति ?
(ङ) ‘गौरीशङ्करम्’ इति शिखरस्य अन्यं प्रसिद्धं नाम किम् ?
(च) शिवलोकः कः ?
उत्तरम् –
(क) गोदावरी,
(ख) गङ्गायाः,
(ग) हिमालयात्,
(घ) यमुना,
(ङ) एवरेस्ट,
(च) कैलासः ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) गङ्गा कीदृशी अस्ति?
(ख) गोदावरी किं गायति ?
(ग) गोदावरी कस्य विषये श्रोतुम् इच्छति ?
(घ) हिमालयपर्वतः कीदृशः अस्ति ?
(ङ) ‘गौरीशङ्करम्’ किम् अस्ति ?
(च) पार्वती का अस्ति?
(छ) हिमालये किं किं स्तः ?
उत्तरम् –
(क) गङ्गा सुरेश्वरी, तरलतरङ्गा त्रिभुवनतारिणी च अस्ति ।
(ख) गोदावरी गङ्गायाः स्तुतिगीतं गायति ।
(ग) गोदावरी हिमालयस्य विषये श्रोतुम् इच्छति ।
(घ) हिमालयपर्वतः भारतस्य पुण्यपर्वतेषु श्रेष्ठः अस्ति।
(ङ) ‘गौरीशङ्करम्’ विश्वस्य अत्यन्तम् उत्तुङ्गं शिखरम् अस्ति।
(च) पार्वती हिमालयस्य पुत्री अस्ति ।
(छ) हिमालये शिवलोक: कैलासः पुण्यतडागः मानसरोवर: च स्तः ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत—
(क) ‘सुरेश्वरी’ अस्य सन्धिच्छेदं कुरुत ।
(ख) ‘नद्यः’ अस्य विशेषणपदं किम् अत्र प्रयुक्तम् ?
(ग) ‘हिमस्य आलय:’ अत्र समासं कुरुत ।
(घ) ‘वदतु’ अस्य कर्तृपदं किम् ?
उत्तरम् –
(क) सुर + ईश्वरी,
(ख) बह्व्य:,
(ग) हिमालय:,
(घ) गङ्गे ।
(2) गोदावरी – देवाः अपि …………. कावेरी च प्रवहतः ।
शब्दार्थाः – स्नातुम् = स्नान करने के लिए; श्रुतवती = सुना है; बहूनि = बहुत; इदानीम् = इस समय; प्राप्तुम् = प्राप्त करने के लिए; प्रकृतेः = प्रकृति के; क्रीडाङ्गणम् = खेल का मैदान; निधिः = कोश, खजाना; स्त्रोत = उत्पत्ति का स्थान, माध्यम; अस्तु = अच्छा; सह्याद्रेः = सह्य पर्वत के; सप्त = सात; एतान् = इनको; सख्यौ = दो सखियाँ ।
प्रसंग : – प्रस्तुत वार्त्तालाप में मानसरोवर और हिमालय की महत्ता का वर्णन करते हुए भारत के सात पर्वतों का उल्लेख किया गया है। सह्य पर्वत से निकलनेवाली प्रमुख नदियों के विषय में इसमें प्रकाश डाला गया है।
हिन्दी- भावानुवाद:-
गोदावरी – देवता भी वहाँ स्नान करने लिए आते हैं, ऐसा मैंने सुना है। बहुत-से (अनेक) पवित्र क्षेत्र भी हिमालय में हैं?
गङ्गा – हाँ! हरिद्वार, ऋषिकेश, बदरीनाथ, केदारनाथ, अमरनाथ इत्यादि स्थान प्रसिद्ध हैं। इस समय भी बहुत-से मुनिवर शान्ति प्राप्त करने के लिए वहाँ जाते हैं। हिमालय ईश्वर की काव्य-रचना, प्रकृति का खेल का मैदान, पुष्पों का खजाना और औषधियों का स्रोत है। अच्छा, गोदावरि ! आप कहाँ से आ रही हो?
गोदावरी – मैं सह्य पर्वत के त्र्यम्बकेश्वर से बहती हूँ। सह्य पर्वत भी सुन्दर पर्वत है। भारत के सात पर्वत हैं-
महेन्द्र, मलय, सह्य, देवताओं की आत्मा हिमालय, वैसे ही ध्यान करने योग्य रैवतक, विन्ध्य और अरावली पर्वत ।
भारतीय इन पर्वतों पर जाना चाहते हैं।
गङ्गा – सह्य पर्वत से दूसरी भी कोई नदी बहती है क्या?
गोदावरी – बताती हूँ। सह्य पर्वत से ही मेरी दो सखियाँ कृष्णा और कावेरी बहती हैं।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) देवाः कुत्र स्नातुम् आगच्छन्ति ?
(ख) मुनिवरा: कां प्राप्तुं हिमालये गच्छन्ति ?
(ग) ईश्वरस्य काव्यरचना क: ?
(घ) हिमालयः कस्य क्रीडाङ्गणम् अस्ति ?
(ङ) भारतस्य कतिपर्वताः सन्ति?
(च) कृष्णा कावेरी च कस्याः सख्यौ स्तः ?
उत्तरम्-
(क) मानसरोवरे,
(ख) शान्तिम्,
(ग) हिमालय:,
(घ) प्रकृते:,
(ङ) सप्त,
(च) गोदावर्याः।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) गोदावरी किं श्रुतवती?
(ख) हिमालये कानि पुण्यक्षेत्राणि सन्ति?
(ग) हिमालयः कीदृशः अस्ति ?
(घ) गोदावरी कुतः प्रवहति ?
(ङ) भारतस्य सप्त पर्वताः के?
(च) भारतीयाः किम् इच्छन्ति ?
उत्तरम् –
(क) देवाः अपि मानसरोवरे स्नातुम् आगच्छन्ति इति गोदावरी श्रुतवती ।
(ख) हिमालये एतानि पुण्यक्षेत्राणि सन्ति — हरिद्वारम्, ऋषीकेशः, बदरीनाथ, केदारनाथ:, अमरनाथः इत्यादीनि।
(ग) हिमालयः ईश्वरस्य काव्यरचना, प्रकृतेः क्रीडाङ्गणं, पुष्पाणां निधिः औषधानां स्रोतः च ।
(घ) गोदावरी सह्याद्रेः त्र्यम्बकेश्वरतः प्रवहति ।
(ङ) भारतस्य सप्त पर्वताः सन्ति — महेन्द्र:, मलय:, सह्यः, हिमालयः, रैवतकः, विन्ध्यः अरावलिः च ।
(च) भारतीयाः सप्तपर्वतान् गन्तुम् इच्छन्ति।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘स्नानं कर्तुम्’ इत्यर्थे किं पदम् अत्र प्रयुक्तम् ?
(ख) ‘क्तवतु’ प्रत्ययान्तम् एकं पदं वार्त्तालापात् चिनुत ।
(ग) ‘अद्रिः’ अस्य पर्यायवाचिपदं किम् अत्र ?
(घ) ‘स्थानानि प्रसिद्धानि’ अनयोः पदयोः विशेषणपदं किम् ?
(ङ) ‘हिमालये सन्ति किल ?’ अत्र क्रियापदं किम् ?
(च) ‘सख्यौ’ अत्र प्रयुक्ता विभक्तिः का?
उत्तरम् –
(क) स्नातुम्,
(ख) श्रुतवती,
(ग) पर्वतः,
(घ) प्रसिद्धानि,
(ङ) सन्ति,
(च) प्रथमा ।
(3) गङ्गा – मम सखीं ………….. मानदण्डः ॥ इति ।
शब्दार्थाः – भवती = आपः वङ्गसमुद्रे = बंगाल की खाड़ी में; उद्भवति = निकलती है; सिन्धुसमुद्रम् = सिन्धु समुद्र ( अरब सागर ) ; विन्ध्याचलतः = (विन्ध्य + अचलतः) विन्ध्य पर्वत से; तत्रैव = वहीं: द्रष्टुम् = देखने के लिए; शक्नुवन्ति = सकते हैं; कर्त्तव्यम् = करना चाहिए: अस्त्युत्तरस्याम् = ( अस्ति + उत्तरस्याम्) उत्तर में है; दिशि = दिशा में; पूर्वापरौ = (पूर्व + अपरौ) पूर्व और पश्चिम में; तोयनिधिम् = समुद्रों को; वगाह्य = प्रविष्ट होकर; अवगाहन करके; मानदण्डः = मापने के दण्ड जैसा।
प्रसंगः—प्रस्तुत वार्त्तालाप में सिन्धु और नर्मदा नदियों के उद्गम-स्थान के साथ-साथ हिमालय की पवित्रता की प्रतिष्ठापना करते हुए जीवन में एक बार हिमालय दर्शन करने के लिए प्रेरित किया गया है।
श्लोकान्वयः – उत्तरस्यां दिशि पूर्वापरौ तोयनिधि वगाह्य पृथिव्याः मानदण्डः इव स्थितः देवतात्मा हिमालयः नाम नगाधिराजः अस्ति ।
हिन्दी- भावानुवाद:-
गङ्गा – मेरी सखी सिन्धु को आप जानती तो हैं?
गोदावरी – नहीं, वह यहाँ बंगाल की खाड़ी में नहीं दिखाई देती।
गङ्गा – वह तो हिमालय में मानसरोवर के पास से निकलती है । वहाँ से सिन्धु समुद्र ( अरब सागर ) को चली जाती है।
गोदावरी – विन्ध्याचल नर्मदा नदी भी वहीं जाती है।
गङ्गा – हे गोदावरि ! लोग सब पर्वतों और नदियों को देख नहीं सकते हैं, तो भी जीवन में एक बार तो हिमालय के दर्शन निश्चयपूर्वक करने चाहिए, ऐसा सोचते हैं।
गोदावरी – हाँ, सत्य है । निश्चय ही हिमालय पर्वत सबके द्वारा द्रष्टव्य है। कालिदास हिमालय के विषय में कहते हैं( भारतवर्ष की ) उत्तर दिशा में देवताओं की आत्मास्वरूप पर्वतों का राजा हिमालय नामक पर्वत है। (यह) पूर्व और पश्चिम के समुद्रों का अवगाहन करता हुआ भूमि के नापनेवाले मानदण्ड के समान स्थित है।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) का वङ्गसमुद्रे न दृश्यते ?
(ख) सिन्धु कस्य समीपे उद्भवति ?
(ग) एकवारं कस्य दर्शनं कर्त्तव्यम् ?
(घ) क: हिमालयस्य विषये वदति ?
(ङ) हिमालयः कः कथ्यते ?
(च) कस्यां दिशि अस्ति हिमालयः ?
उत्तरम् —
(क) सिन्धुः,
(ख) मानसरोवरस्य,
(ग) हिमालयस्य,
(घ) कालिदास:,
(ङ) नगाधिराजः,
(च) उत्तरस्याम् ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) सिन्धुः कुतः उद्भवति गच्छति च ?
(ख) नर्मदानदी कुतः कं गच्छति ?
(ग) जनाः किं न शक्नुवन्ति ?
(घ) जीवने किं निश्चयेन कर्त्तव्यम् ?
(ङ) उत्तरस्यां दिशि कः अस्ति ?
(च) हिमालयः केव स्थित: ?
उत्तरम्-
(क) सिन्धुः हिमालये मानसरोवरस्य समीपे उद्भवति ततः च सिन्धुसमुद्रं प्रतिगच्छति ।
(ख) नर्मदानदी विन्ध्याचलत: सिन्धुसमुद्रं प्रतिगच्छति ।
(ग) जनाः सर्वपर्वतान् नदीः च द्रष्टुं न शक्नुवन्ति ।
(घ) जीवने एकवार वा हिमालयस्य दर्शनं निश्चयेन कर्त्तव्यम् ।
(ङ) उत्तरस्यां दिशि हिमालयः अस्ति ।
(च) हिमालयः पृथिव्या मानदण्डः इव स्थितः ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘दृश्यते’ अस्य कर्तृपदं किम् अत्र ?
(ख) ‘विन्ध्याचलतः’ अत्र प्रयुक्ता विभक्तिः का?
(ग) ‘नदी’ अस्य वचननिर्देश कुरुत ।
(घ) ‘कर्त्तव्यम्’ अत्र प्रयुक्तः प्रत्ययः कः ?
(ङ) ‘दिशि’ अस्य विशेषणपदं श्लोकात् चित्वा लिखत ।
(च) ‘समुद्रम्’ अस्य पर्यायवाचिपदं किम् अत्र ?
उत्तरम् –
(क) सा (सिन्धुः),
(ख) पञ्चमी,
(ग) बहुवचनम्,
(घ) तव्यत्,
(ङ) उत्तरस्याम्,
(च) तोयनिधिम् ।
सम्पूर्णपाठाधारिताः अभ्यासप्रश्नाः
(1) प्रश्नान् एकपदेन उत्तरत-
(क) गङ्गायाः स्तुतिगीतं का गायति ?
उत्तरम् - गोदावरी ।
(ख) कः नगाधिराजः ?
उत्तरम् — हिमालयः ।
(ग) का कृष्णसखी?
उत्तरम् – यमुना ।
(घ) कः पर्वतानां राजा ?
उत्तरम् — हिमालयः ।
(ङ) विश्वस्य अत्युन्नतं शिखरं किम् ?
उत्तरम् – गौरीशङ्करम् (एवरेस्ट)।
(च) शिवलोकस्य नाम किम् ?
उत्तरम् – कैलासः ।
(छ) हिमालयस्य पुत्री का?
उत्तरम् – पार्वती ।
(ज) का सिन्धुसमुद्रं प्रतिगच्छति ?
उत्तरम् – सिन्धुः ।
(झ) गङ्गा कुत: प्रवहति ?
उत्तरम् – हिमालयात् ।
(2) एकेन वाक्येन उत्तरत-
(क) सरस्वती नदी कीदृशी अस्ति?”
उत्तरम् – सरस्वती एका पुण्या नदी अस्ति ।
(ख) देवा: स्नातुं कुत्र गच्छन्ति ?
उत्तरम् – देवा: स्नातुं मानसरोवरे गच्छन्ति ।
(ग) हिमालये कानि पुण्यस्थलानि प्रसिद्धानि ?
उत्तरम् – हिमालये एतानि पुण्यस्थलानि प्रसिद्धानि सन्ति — हरिद्वारम्, ऋषीकेशः, केदारनाथ:, अमरनाथः इत्यादीनि च ।
(घ) के सप्त पुण्यपर्वताः सन्ति? बदरीनाथः,
उत्तरम् – एते सप्त पुण्यपर्वताः सन्ति- महेन्द्रः, मलयः, सह्यः, हिमालयः, रैवतकः, विन्ध्यः अरावलिः च।
(ङ) जीवने एकवारं वा किं करणीयम् ?
उत्तरम् – जीवने एकवारं वा हिमालयस्य दर्शनं करणीयम् ।
(3) प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
(क) भारतस्य पुण्यपर्वतेषु श्रेष्ठः हिमालयः ।
उत्तरम् — कस्य पुण्यपर्वतेषु श्रेष्ठः हिमालयः ?
(ख) हिमपर्वतस्य पुत्री पार्वती ।
उत्तरम् – हिमपर्वतस्य पुत्री का?
(ग) मुनयः शान्तिं प्राप्तुं हिमालयं गच्छन्ति ।
उत्तरम् – मुनयः किं प्राप्तुं हिमालयं गच्छन्ति ?
(घ) गोदावरी विन्ध्याचलतः प्रवहति ।
उत्तरम् – गोदावरी कुतः प्रवहति ?
(ङ) पृथिव्याः मानदण्डः इव हिमालयः ।
उत्तरम् – कस्याः मानदण्डः इव हिमालय: ?
(च) हिमालयः प्रकृतेः क्रीडाङ्गणम् ।
उत्तरम् – हिमालयः कस्य क्रीडाङ्गणम् ?
(4) आम् न इति लिखत-
(क) गङ्गानदी एवं कृष्णसखी अस्ति ।
(ख) यमुना हिमालयतः प्रवहति ।
(ग) अशरीरिणी नदी सरस्वती ।
(घ) मानसरोवर: विन्ध्याचले अस्ति ।
(ङ) विश्वस्य अत्यन्तम् उन्नतं शिखरं हिमालये अस्ति ।
(च) हिमालय: पुष्पाणां निधिः ।
उत्तरम् —
(क) न,
(ख) आम्,
(ग) आम्,
(घ) न,
(ङ) आम्,
(च) आम्।
परीक्षोपयोगिनः अन्यमहत्त्वपूर्णाः प्रश्नाः
(1) मुनयः किं प्राप्तुं हिमालयं गच्छन्ति ?
उत्तरम् – मुनयः शान्ति प्राप्तुं हिमालयं गच्छन्ति ।
(2) हिमपर्वतस्य पुत्री का ?
उत्तरम् – हिमपर्वतस्य पुत्री पार्वती ।
