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UK Board 10 Class Hindi Chapter 6 – पावनं हरिद्वारम् (संस्कृत विनोदिनी)

UK Board 10 Class Hindi Chapter 6 – पावनं हरिद्वारम् (संस्कृत विनोदिनी)

UK Board Solutions for Class 10th Hindi Chapter 6 – पावनं हरिद्वारम् (संस्कृत विनोदिनी)

पावनं हरिद्वारम् (पावन हरिद्वार)
पाठ का सार
हरिद्वार की अवस्थिति—हरिद्वार हिमालय पर्वत की शिवालिक श्रेणियों के अंचल में स्थित नगर है। यहाँ का प्राकृतिक सौन्दर्य अत्यन्त रमणीय है। पतितपावनी गङ्गा इसकी भूमि को पवित्र करती हुई बहती है। हरद्वार, स्वर्गद्वार, तपोवन, मायानगरी, कपिलाश्रम आदि इसके अनेक पौराणिक नाम हैं।
हरिद्वार के प्रमुख स्थल—हरिद्वार भारतीयों का प्रमुख तीर्थस्थल है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ के ब्रह्मकुण्ड में स्नान करने से व्यक्ति पापमुक्त हो जाता है। यहाँ प्रत्येक बारह वर्ष में विशाल कुम्भस्नान का पर्व होता है। सायंकाल यहाँ गङ्गादेवी की आरती का दृश्य बहुत मनोहर होता है। हरिद्वार में अनेक मन्दिर और महान् आश्रम हैं। मनसादेवी, चण्डीदेवी, बिल्वकेश्वर, दक्षेश्वर और मायादेवी आदि के भव्य मन्दिर यहाँ स्थित हैं। ब्रह्मकुण्ड, कुशाव्रत और कनखल यहाँ के प्रसिद्ध पौराणिक स्थान हैं।
हरिद्वार का महत्त्व – धार्मिक महत्त्व के अतिरिक्त हरिद्वार का शैक्षणिक और औद्योगिक महत्त्व भी है। यह सभी प्रकार की शिक्षाओं- उच्चशिक्षा, संस्कृत शिक्षा, योग शिक्षा, आयुर्वेद शिक्षा और प्रौद्योगिकी शिक्षा का प्रमुख केन्द्र है। यहाँ का गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, उत्तराखण्डसंस्कृत-विश्वविद्यालय और पतञ्जलि योगपीठ शिक्षा के प्रमुख केन्द्र हैं। भारत- हैवी इलैक्ट्रिकल-लिमिटेड यहाँ का विश्वप्रसिद्ध औद्योगिक केन्द्र और रूड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान तकनीकी शिक्षा का विश्वस्तरीय केन्द्र है । इनके अतिरिक्त भी यहाँ अनेक कारखाने हैं।
पाठाधारित अवबोधन-कार्य एवं भावानुवाद
निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत-
(1) देवतात्म- हिमालयस्य ……… मोक्षदायिकाः ॥”
शब्दार्थाः – सुरम्ये अञ्चले = बहुत सुन्दर अंचल में; नयनाभिरामम् = नयनों को आनन्द प्रदान करनेवाला, अत्यन्त सुन्दर; सुषमा = सौन्दर्य; शोभते सुशोभित है; ऐतिहासिकम् = इतिहास से सम्बन्धित; व्याप्ताः = व्याप्त, रमे हुए; पतितपावनी = पतितों को पावन बनानेवाली; पापविमोचनी = पापों से मुक्ति देनेवाली; मध्ये = बीच में; विचरन्ती = विचरण करती हुई; कलकलनिनादम् = कल-कल के स्वर को; त्यक्त्वा = त्यागकर; समभूमिम् = समतल भूमि में; उभयतः = दोनों ओर; घट्टाः = घाट; निकषा = समीप में; अपराणि = दूसरे; पुराणेषु = पुराणों में; वर्णितानि = वर्णित, वर्णन किए गए; मोक्षप्रदम् = मोक्ष देनेवाला; यथोक्तम् = (यथा + उक्तम्) जैसा कहा गया है; माया = हरिद्वार ; द्वारावती = द्वारिका; सप्तैताः = (सप्त + एता: ) ये सांत ।
सन्दर्भः – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘संस्कृत विनोदिनी ( भाग-द्वितीयः )’ में संकलित ‘पावनं हरिद्वारम्’ नामक पाठ से उद्धृत है।
प्रसंग : – प्रस्तुत गद्यांश में हरिद्वार का भौगोलिक और पौराणिक परिचय कराया गया है।
श्लोकान्वयः – अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, काञ्ची, अवन्तिका द्वारावती च एव एताः सप्त मोक्षदायिका: पुरी: ।
हिन्दी – भावानुवादः – देवताओं की आत्मास्वरूप हिमालय के बहुत सुन्दर अंचल में और शिवालिक पर्वत-शिखरों के बीच में नयनों को आनन्द प्रदान करनेवाला प्रकृति-सौन्दर्य से सम्पन्न बहुत सुन्दर हरिद्वार नगर शोभा पाता है।
हरिद्वार उत्तराखण्ड का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, पौराणिक विश्वविख्यात नगर है। भारतीय संस्कृति, राष्ट्र की एकता की भावना और गरिमा का बोध हरिद्वार के कण-कण में रमे ( व्याप्त) हैं।
नीचों को पवित्र बनानेवाली, पापों से मुक्ति दिलानेवाली (और) मोक्ष प्रदान करनेवाली भगवती भागीरथी गङ्गा पर्वत के शिखरों के मध्य में विचरण करती, कल-कल के स्वर को त्यागकर शान्तस्वर से हरिद्वार से ही समतल भूमि में प्रवेश करती है। गङ्गा के दोनों ओर मन्दिर, घाट तथा आश्रम हैं। समीप में उनकी लोग पूजा करते हैं। हरिद्वार, हरद्वार, स्वर्गद्वार, तपोवन, मायाक्षेत्र, मायापुरी, कपिलाश्रम और कपिला इस ही पुण्यक्षेत्र हरिद्वार के दूसरे (अन्य) नाम पुराणों में वर्णित हैं। मायापुरी नाम से प्रसिद्ध हरिद्वार मोक्ष प्रदान करनेवाला नगर है। जैसा कि शास्त्रों में कहा गया है
“अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, काञ्ची, अवन्तिका और द्वारावती (द्वारिका) ये सात पुरी ही मोक्ष प्रदान करनेवाली हैं।”
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) कस्य अञ्चले हरिद्वारनगरं शोभते ?
(ख) किं त्यक्त्वा गङ्गा समभूमिं प्रविशति ?
(ग) किं नाम्ना ख्यातं हरिद्वारं मोक्षप्रदं नगरम् अस्ति ?
(घ) कतिपयाः मोक्षदायिका: पुर्यः ?
उत्तरम्-
(क) हिमालयस्य,
(ख) कलकलनिनादम्,
(ग) मायापुरी,
(घ) संप्त।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) कुत्र हरिद्वारनगरं शोभते ?
(ख) कीदृशं हरिद्वारनगरं शोभते ?
(ग) हरिद्वारम् उत्तराखण्डस्य कीदृशं नगरम् अस्ति ?
(घ) हरिद्वारस्य कणे कणे के व्याप्ताः सन्ति?
(ङ) कीदृशी गङ्गा समभूमिं प्रविशति ?
(च) हरिद्वारस्य कानि अपराणि नामानि पुराणेषु वर्णितानि सन्ति?
(छ) का: मोक्षदायिका: पुर्यः ?
उत्तरम्—
(क) हिमालयस्य सुरम्ये अञ्चले शिवालिक पर्वतशिखराणां च मध्ये हरिद्वारनगरं शोभते ।
(ख) नयनाभिरामं प्रकृतिसुषमासम्पन्नं रमणीयं हरिद्वारनगरं शोभते ।
(ग) हरिद्वारम् उत्तराखण्डस्य ऐतिहासिकं, सांस्कृतिकं, पौराणिकं, विश्वविख्यातं नगरम् अस्ति।
(घ) भारतीया संस्कृति:, राष्ट्रियैक्यभावः, देशस्य गरिमाबोधः च हरिद्वारस्य कणे कणे व्याप्ताः सन्ति ।
(ङ) पतितपावनी पापविमोचनी मोक्षदायिनी गङ्गा पर्वतशिखराणां मध्ये विचरन्ती कलकलनिनादं त्यक्त्वा शान्तस्वरेण समभूमिं प्रविशति ।
(च) हरिद्वारम्, हरद्वारम्, स्वर्गद्वारम्, तपोवनम्, मायाक्षेत्रम्, मायापुरी, कपिलाश्रमः कपिला च हरिद्वारस्य एतानि अपराणि नामानि पुराणेषु वर्णितानि सन्ति ।
(छ) अयोध्या – मथुरा- माया- काशी – काञ्ची- अवन्तिका द्वारावती च एताः मोक्षदायिका: पुर्यः ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘सुरम्ये’ अस्य विशेष्यपदं चिनुत ।
(ख) ‘विषमभूमिः’ अस्य विलोमपदं लिखत ।
(ग) ‘विचरन्ती’ अत्र प्रकृति – प्रत्ययनिर्देशं कुरुत ।
(घ) ‘नाम्ना’ अत्रं प्रयुक्ता विभक्तिः का?
(ङ) ‘यथा + उक्तम्’ अत्र सन्धि कुरुत ।
(च) ‘प्रविशति ‘ अत्र प्रयुक्तः उपसर्गः कः ?
उत्तरम् –
(क) अञ्चले,
(ख) समभूमि:,
(ग) वि + √चर् + शतृ,
(घ) तृतीया,
(ङ) यथोक्तम्,
(च) प्रा
(2) हरिद्वारं भारतीयानां ………. पौराणिकस्थलानि सन्ति ।
शब्दार्थाः – गङ्गायाम् = गङ्गा में; द्वादशे वर्षे = बारह वर्ष में; पर्वणि = पर्व पर; लक्षश: = लाखों; पुण्यार्जनम् = पुण्य कमाना; उक्तम् = कहा गया है; सहस्त्राणि = हजारों; शतानि = सैकड़ों; लक्षप्रदक्षिणा = लाख प्रदक्षिणाएँ; भूमेः = भूमि की; सान्ध्यवेलायाम् = शाम की वेला में; आरार्तिकस्य = आरती का; अतीव = अत्यधिक; दीपार्पणम् = दीपों का अर्पण; पुष्पार्चनम् = फूलों से अर्चना; अद्वितीया = अनोखी; ज्योतिष्मती = प्रकाशमती; विराजते = शोभित होती है; महताम् = महान् ।
प्रसंग: — प्रस्तुत गद्यांश में हरिद्वार के दर्शनीय और पवित्र स्थलों का परिचय कराया गया है।
श्लोकान्वयः – कुम्भस्नानस्य तत्फलम् (भवति) यत् अश्वमेध सहस्राणि, वाजपेयशतानि लक्षप्रदक्षिणा च भूमेः (भवति) ।
हिन्दी – भावानुवादः — हरिद्वार भारतीयों का प्रमुख तीर्थस्थल है। यहाँ ब्रह्मकुण्ड नामक स्थान पर गङ्गा में स्नान करने से लोग पापों से मुक्त (निर्मल / पवित्र) होते हैं, ऐसी उनकी मान्यता है।
प्रत्येक बारह वर्ष में यहाँ विशाल कुम्भ स्नान का पर्व होता है। इस पर्व पर लाखों लोग स्नान करके पुण्य कमाते हैं। कहा गया हैजो हजारों अश्वमेध यज्ञों, सैकड़ों
“कुम्भस्नान का वह फल होता है, वाजपेय यज्ञों और भूमि की एक लाख प्रदक्षिणा करने से होता है । “
प्रतिदिन यहाँ सन्ध्या समय गङ्गादेवी की आरती का दृश्य अत्यधिक मनोहर होता है। जब लोग पवित्र गङ्गाजल में दीपदान करते हैं, सन्ध्या की वन्दना करते हैं और पुष्पों से अर्चना करते हैं, तब वहाँ अनोखी प्रकाशवती शोभा विराजती है।
हरिद्वार मन्दिरों, महान् आश्रमों की संगमस्थली भी है। यहाँ मनसादेवी मन्दिर, चण्डीदेवी मन्दिर, बिल्वकेश्वर मन्दिर, दक्षेश्वर मन्दिर, मायादेवी मन्दिर, ब्रह्मकुण्ड, कुशाव्रत इत्यादि अनेक पौराणिक स्थल हैं।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) हरिद्वारं केषां प्रमुखं तीर्थस्थलम् अस्ति ?
(ख) कतिवर्षाणाम् अत्र कुम्भस्नानपर्व भवति ?
(ग) कदा गङ्गादेव्या: आरार्तिकः भवति ?
(घ) जना: गङ्गाज़ले किं कुर्वन्ति ?
उत्तरम् –
(क) भारतीयानाम्,
(ख) द्वादशवर्षाणाम्,
(ग) सान्ध्यवेलायाम्,
(घ) दीपार्पणम्।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) केन जनाः पापविमुक्ताः भवन्ति ?
(ख) कुम्भपर्वणि लक्षशः जनाः किं कुर्वन्ति ?
(ग) कुम्भस्नानस्य किं फलं भवति ? भवति ?
(घ) कस्य दृश्य अतीव मनोहरं
(ङ) कदा तत्र अद्वितीया ज्योतिष्मती शोभा विराजते ?
(च) हरिद्वारं केषां संगमस्थली अस्ति?
(छ) हरिद्वारे कानि प्रमुखानि पौराणिकस्थलानि सन्ति?
उत्तरम् –
(क) ब्रह्मकुण्ड – नामके स्थाने गङ्गायां स्नानेन जना: पापविमुक्ताः भवन्ति ।
(ख) कुम्भपर्वणि लक्षशः जनाः स्नानं कृत्वा पुण्यार्जनं कुर्वन्ति ।
(ग) कुम्भस्नानस्य तत् फलं भवति, यत् अश्वमेध सहस्राणि वाजपेयशतानि लक्षप्रदक्षिणा च भूमेः भवति ।
(घ) सान्ध्यवेलायां गङ्गादेव्याः आरार्तिकस्य दृश्यम् अतीव मनोहरं भवति ।
(ङ) यदा जनाः पावने गङ्गाजले दीपार्पणं कुर्वन्ति, सन्ध्यावन्दनं पुष्पार्चनं च कुर्वन्ति, तदा तत्र अद्वितीया ज्योतिष्मती शोभा विराजते ।
(च) हरिद्वारं मन्दिराणां महताम् आश्रमाणां च संगमस्थली अस्ति ।
(छ) हरिद्वारे मनसादेवीमन्दिरं, चण्डीदेवीमन्दिरं, बिल्वकेश्वरमन्दिरम् दक्षेश्वरमन्दिरं, मायादेवीमन्दिरं, ब्रह्मकुण्डं, कुशाव्रतम् इत्यादीनि प्रमुखानि पौराणिकस्थलानि सन्ति ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘पर्वणि’ अत्र प्रयुक्ता विभक्ति: का?
(ख) ‘दीपाणाम् अर्चनम् अस्य समस्तपदं गद्यांशात् चिनुत ।
(ग) ‘न द्वितीया’ इत्यर्थे प्रयुक्तं पदम् अत्र किम् ?
(घ) ‘विराजते’ अस्य कर्तृपदं किम् ?
(ङ) ‘दृश्यम्’ अस्य क्रियापदम् अत्र किम् ?
(च) ‘क्त’ प्रत्ययान्तम् एकपदं गद्यांशात् चित्वा लिखत ।
(छ) ‘ज्योतिष्मती’ कस्य पदस्य विशेषणम् अस्ति ?
उत्तरम्—
(क) सप्तमी,
(ख) दीपार्पणम्,
(ग) अद्वितीया,
(घ) शोभा,
(ङ) भवति,
(च) उक्तम्,
(छ) शोभायाः ।
(3) दक्षप्रजापतेः पौराणिकी ………. दर्शनं कर्तुं शक्यते ।
शब्दार्था: – दक्षप्रजापतेः = दक्षप्रजापति की; अत्रैव = यहाँ ही; अनुकनखलम् = कनखल के समीप; शैलराजा = पर्वतों का राजा; अवतीर्णाम् = पार की गई, उतरी हुई; जह्नो: = जह्नु की; पुराकाले = प्राचीनकाल में; सम्पादितवान् = सम्पादित किया; नवनिर्मिताः = नए बनाए गए; नूतनाः = नए; यन्त्रागाराः = कारखाने; प्रगतौ = प्रगति में; ददति = देते हैं; कर्तुं शक्यते = किए जा सकते हैं।
प्रसंग : – प्रस्तुत गद्यांश में देश की प्रगति में हरिद्वार के महत्त्व को समझाया गया है।
हिन्दी – भावानुवादः – दक्षप्रजापति की पौराणिक राजधानी कनखल नगरी यहीं सुशोभित है। महाकवि कालिदास ने मेघदूत नामक काव्य में कहा है- “उससे कनखल के समीप पर्वतराज से उतरी हुई जह की पुत्री पर जाना…..।”
प्राचीनकाल में दक्षप्रजापति ने यहाँ विशाल यज्ञ सम्पादित किया था।
हरिद्वार उच्चशिक्षा का, संस्कृत शिक्षा का, योग शिक्षा का, आयुर्वेद शिक्षा का और प्रौद्योगिकी शिक्षा का केन्द्र है। यहाँ गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, उत्तराखण्ड-संस्कृत विश्वविद्यालय और पतञ्जलि योगपीठ शिक्षा के प्रमुख केन्द्र हैं। यहाँ भारत हैवी इलैक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL), रूड़की नगर में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), अनेक नवनिर्मित, अनेक आधुनिक उद्योग और कारखाने देश की प्रगति में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। इस प्रकार पौराणिक संस्कृति के साथ आधुनिक भारतीय विकास ने और प्रौद्योगिकी के यहाँ दर्शन किए जा सकते हैं।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) कनखलनगरी कस्य राजधानी आसीत्?
(ख) पुराकाले दक्षप्रजापतिः अत्र किं सम्पादितवान्?
(ग) हरिद्वारे किं योगपीठम् अस्ति ?
उत्तरम् –
(क) दक्षप्रजापतेः,
(ख) यज्ञम्,
(ग) पतञ्जलि |
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) कनखलनगर्याः कस्मिन् काव्ये उल्लेखम् अस्ति ?
(ख) हरिद्वारं कस्याः केन्द्रम् अस्ति ?
(ग) हरिद्वारे कानि प्रमुखानि शिक्षणकेन्द्राणि सन्ति ?
(घ) के देशस्य प्रगतौ महत्त्वपूर्ण योगदानं ददति ?
(ङ) हरिद्वारे कस्य दर्शनं कर्तुं शक्यते ?
उत्तरम् –
(क) महाकवेः कालिदासस्य मेघदूतनामके काव्ये कनखलनगर्या: उल्लेखम् अस्ति ।
(ख) हरिद्वारम् उच्चशिक्षायाः, संस्कृतशिक्षायाः, योगशिक्षायाः, आयुर्वेदशिक्षायाः प्रौद्योगिकीशिक्षायाः च केन्द्रम् अस्ति।
(ग) हरिद्वारे गुरुकुल कांगडी- विश्वविद्यालयः, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय: उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालयः पतंजलि योगपीठ च एतानि प्रमुखानि शिक्षणकेन्द्राणि सन्ति ।
(घ) भारत हैवी इलैक्ट्रिकल लिमिटेड, रूडकीनगरे स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानम् अनेके उद्योगयन्त्रागाराः च देशस्य प्रगतौ महत्त्वपूर्ण योगदानं ददति ।
(ङ) हरिद्वारे पौराणिक्या संस्कृत्या सह आधुनिक भारतीय विकासस्य प्रौद्योगिक्या: च दर्शनं कर्तुं शक्यते ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘अत्रैव’ अस्य सन्धिच्छेदं कुरुत ।
(ख) ‘उक्तवान्’ अत्र प्रकृति-प्रत्ययनिर्देशं कुरुत |
(ग) ‘कनखलनगरी’ अस्य क्रियापदं किम् अत्र प्रयुक्तम् ?
(घ) ‘ददति’ अत्र प्रयुक्तं वचनं किम् ?
(ङ) ‘प्रगती’ अत्र प्रयुक्ता विभक्तिः का?
(च) ‘आधुनिकी’ अस्य विलोमपदं किम् अत्र प्रयुक्तम् ?
उत्तरम् –
(क) अत्र + एव,
(ख) वद् + क्तवतु,
(ग) विराजते,
(घ) बहुवचनम्,
(ङ) सप्तमी,
(च) पौराणिकी।
सम्पूर्णपाठाधारिताः अभ्यासप्रश्नाः
(1) उचितपदैः रिक्तस्थानानि पूरयत-
(क) हरिद्वारं ………. नगरम् अस्ति ।
(ख) प्रत्येकस्मिन् ………… विशालं ………. भवति ।
(ग) गङ्गादेव्या: ………… अतीव मनोहरं भवति ।
(घ) पावनं हि ………… नगरम्।
उत्तरम् –
(क) हरिद्वारं मोक्षप्रदं नगरम् अस्ति ।
(ख) प्रत्येकस्मिन् द्वादशे वर्षे विशालं कुम्भस्नानपर्व भवति ।
(ग) गङ्गादेव्याः आरार्तिकस्य दृश्यम् अतीव मनोहरं भवति ।
(घ) पावनं हि हरिद्वारं नगरम् ।
(2) रेखांकितशब्दानाम् *** आधारेण प्रश्न-निर्माणं कुरुत-
(कानि, कति, कीदृशं केषां, कदा, किं, कस्य)
यथा – हरिद्वारं नगरं शोभते । – किं नगरं शोभते ?
(क) सान्ध्यवेलायाम् आरार्तिक्यं भवति ।
उत्तरम् – कदा आरार्तिक्यं भवति ?
(ख) एतानि नामानि पुराणेषु वर्णितानि सन्ति ।
उत्तरम् – एतानि कानि पुराणेषु वर्णितानि सन्ति?
(ग) हरिद्वारं मन्दिराणां नगरम् अस्ति ।
उत्तरम् – हरिद्वारं केषां नगरम् अस्ति ?
(घ) पावनं हि हरिद्वारं नगरम् ।
उत्तरम् – कीदृशं हि हरिद्वारं नगरम् ?
(ङ) लक्षशः जनाः स्नानं कुर्वन्ति ।
उत्तरम् – कति जनाः स्नानं कुर्वन्ति ?
(3) एकपदेन उत्तरं देयम्-
(क) शिवालिक पर्वत-शिखराणां मध्ये किं नगरं शोभते ?
उत्तरम् — हरिद्वारम् ।
(ख) गङ्गा समभूमौ कुतः प्रवहति ?
उत्तरम् — हरिद्वारतः ।
(ग) गङ्गायां स्नानेन जनाः किं भवन्ति ?
उत्तरम् — पापमुक्ता: / निर्मलाः ।
(घ) कुम्भस्नानपर्व कुत्र भवति ?
उत्तरम् — हरिद्वारनगरे ।
(ङ) दक्षप्रजापतेः पौराणिकी राजधानी कुत्र अस्ति?
उत्तरम् — कनखलनगरी ।
(4) पूर्णवाक्यैः उत्तरं लिखत-
(क) हरिद्वारं नगरं कुत्र शोभते ?
उत्तरम् – हरिद्वारं नगरं हिमालयस्य सुरम्ये अञ्चले शिवालिक पर्वत-शिखराणां मध्ये शोभते ।
(ख) हरिद्वारस्य कणे कणे के व्याप्ताः सन्ति?
उत्तरम् — हरिद्वारस्य /कणे कणे भारतीयासंस्कृतिः, राष्ट्रियैक्यभावः, देशस्य गरिमाबोधः च व्याप्ताः सन्ति।
(ग) हरिद्वारस्य कानि नामानि पुराणेषु वर्णितानि सन्ति?
उत्तरम् — हरिद्वारम्, हरद्वारम्, स्वर्गद्वारम्, तपोवनम्, मायाक्षेत्रम्, मायापुरी, कपिलाश्रमः कपिला च एतानि नामानि पुराणेषु वर्णितानि सन्ति ।
(घ) सप्तैताः का: पुर्यः मोक्षदायिकाः सन्ति?
उत्तरम् – अयोध्या – मथुर । माया काशी- काञ्ची – अवन्तिका द्वारावती च सप्तैताः पुर्यः मोक्षदायिकाः सन्ति ।
(ङ) हरिद्वारे कानि पौराणिकस्थलानि सन्ति?
उत्तरम् – हरिद्वारे मनसादेवीमन्दिरम् चण्डीदेवीमन्दिरम् बिल्वकेश्वरमन्दिरम्-दक्षेश्वर-मन्दिरम्ं, मायादेवी-मन्दिरम ब्रह्मकुण्ड, कुशाव्रतम् इत्यादीनि पौराणिकस्थलानि सन्ति ।
(च) हरिद्वारे कानि कानि शिक्षाकेन्द्राणि सन्ति?
उत्तरम् – हरिद्वारे गुरुकुल कांगडी – विश्वविद्यालयः, देवसंस्कृति-विश्वविद्यालयः, उत्तराखण्ड-संस्कृत-विश्वविद्यालयः पतञ्जलि योगपीठं च प्रमुखानि शिक्षाकेन्द्राणि सन्ति ।
परीक्षोपयोगिनः अन्यमहत्त्वपूर्णाः प्रश्नाः
(1) कनखलनगरी कस्य राजधानी आसीत्?
उत्तरम्— कनखलनगरी दक्षप्रजापतेः राजधानी आसीत् ।
(2) कालिदासः कस्मिन् काव्ये कनखलनगर्याः उल्लेखम् अकरोत् ?
उत्तरम् — कालिदासः मेघदूतनामके काव्ये कनखलनगर्याः उल्लेखम् अकरोत्।

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