UK Board 10th Class Social Science – (अर्थशास्त्र) – Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
UK Board 10th Class Social Science – (अर्थशास्त्र) – Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
UK Board Solutions for Class 10th Social Science – सामाजिक विज्ञान – (अर्थशास्त्र) – Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1 – वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – विभिन्न देशों के मध्य परस्पर सम्बन्ध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है। इस प्रक्रिया के अन्तर्गत विभिन्न अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे से सम्बद्ध हो जाती हैं। इसके अन्तर्गत विदेश व्यापार अवरोधक हटा लिए जाते हैं तथा पूँजी एवं श्रम का स्वतन्त्र आवागमन होता है।
प्रश्न 2 – भारत सरकार द्वारा विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाने के क्या कारण थे? इन अवरोधकों को सरकार क्यों हटाना चाहती थी?
उत्तर- भारत सरकार ने स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् विदेश व्यापार एवं विदेश निवेश पर अवरोधक लगा दिए थे। ये अवरोधक 1991 ई० तक लगे रहे। इन अवरोधकों को लगाने के मुख्य कारण निम्नलिखित थे-
- भारत एक विकासोन्मुखी देश है। सरकार जानती थी कि यहाँ उद्योग; लघु व वृहत उद्योग; विदेशी प्रतिस्पर्द्धा का सामना नहीं कर सकते अतः इन्हें संरक्षण देना आवश्यक था।
- भारत सरकार भारतीय बाजारों पर विदेशी कम्पनियों का प्रभुत्व होने देना नहीं चाहती थी ।
- विदेशी पूँजी मुख्यतः शर्त सहित (Tied) थी जो केवल उन क्षेत्रों में आना चाहती थी जो अधिक लाभप्रद थे।
- सरकार घरेलू बचत एवं निवेश को प्रोत्साहित करना चाहती थी।
सरकार इन अवरोधकों को धीरे-धीरे हटा रही है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-
- भारत ने 1991 ई० नई आर्थिक नीति अपनाई। यह नीति वैश्वीकरण एवं उदारीकरण पर आधारित है। इस नीति के आधारभूत तत्त्व हैं—विदेशी आयातों को प्रोत्साहन देना, भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को विदेशों में भेजना, आयात करों में ढील देना, विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रम, पूँजी तथा प्रौद्योगिकी का आवागमन ।
- विश्व व्यापार संगठन विभिन्न देशों के मध्य व्यापार अवरोधकों को हटाने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रश्न 3– श्रम कानूनों में लचीलापन कम्पनियों को कैसे मदद करेगा?
उत्तर – श्रम कानूनों में लचीलापन कम्पनियों को निम्न प्रकार मदद करेगा-
- कम्पनियाँ श्रमिकों को अपनी शर्तों पर रोजगार देंगी।
- कम्पनियाँ मजदूरी को उत्पादकता से सम्बद्ध कर सकती हैं।
- बड़ी विदेशी ताकतों, अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों व देश की केन्द्र एवं राज्य सरकारों के सहयोग एवं समर्थन के कारण श्रम संगठन कमजोर बन जाएँगे और वे कम्पनियों पर अनुचित दबाव नहीं डाल सकेंगे।
- कम्पनियाँ आवश्यकतानुसार श्रमिकों को नियुक्त कर सकेंगी और आवश्यकता न होने पर उन्हें नौकरी से बाहर कर सकेंगी। इससे श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
- असंगठित क्षेत्रक में कार्यरत कम्पनियों पर श्रम कानून लागू ही नहीं होते। ऐसी कम्पनियाँ मजदूरों को वे सब सुविधाएँ नहीं देती जो संगठित क्षेत्रक में कार्यरत कम्पनियाँ देती हैं।
प्रश्न 4 – दूसरे देशों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ किस प्रकार उत्पादन या उत्पादन पर नियन्त्रण स्थापित करती हैं?
उत्तर – एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी एक से अधिक क्षेत्रों में उत्पादन पर नियन्त्रण अथवा स्वामित्व रखती है। ये कम्पनियाँ उन प्रदेशों में कार्यालय तथा उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करती हैं जहाँ उन्हें सस्ता श्रम एवं अन्य संसाधन मिल सकते हैं। ऐसी कम्पनी वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन विश्व स्तर पर करती है।
सामान्यत: बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ उसी स्थान पर उत्पादन इकाई स्थापित करती हैं, जो बाजार के नजदीक हो, जहाँ कम लागत पर कुशल व अकुशल श्रम उपलब्ध हो और जहाँ उत्पादन के अन्य कारकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो, साथ ही सरकारी नीतियाँ भी उनके अनुकूल हों। इन परिस्थितियों को सुनिश्चित करने के बाद ही ये कम्पनियाँ उत्पादन के लिए कार्यालयों और कारखानों की स्थापना करती हैं। कभी-कभी ये कम्पनियाँ इन देशों की स्थानीय कम्पनियों के साथ संयुक्त रूप से उत्पादन करती हैं। वे स्थानीय कम्पनियों को खरीद भी लेती हैं और उ उत्पादन का प्रसार करती हैं। अपार सम्पदा होने के कारण उनके लिए ऐसा करना सम्भव हो जाता है।
उत्पादन को नियन्त्रित करने की एक अन्य विधि के अन्तर्गत विकसित देशों की बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ छोटे उत्पादकों को उत्पादन का ऑर्डर देती हैं जो बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को उत्पादों की आपूर्ति करती हैं। ये कम्पनियाँ इन्हें अपने ब्राण्ड नाम से उत्पादकों को बेचती हैं। इन बड़ी कम्पनियों में दूरस्थ उत्पादकों के मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम शर्तों का निर्धारण करने की प्रबल क्षमता होती है।
प्रश्न 5- विकसित देश, विकासशील देशों से उनके व्यापार और निवेश का उदारीकरण क्यों चाहते हैं? क्या आप मानते हैं कि विकासशील देशों को भी बदले में ऐसी माँग करनी चाहिए?
उत्तर – सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबन्धों को हटाने की प्रक्रिया को उदारीकरण कहते हैं। व्यापार के उदारीकरण से व्यापारियों को स्वतन्त्र रूप से निर्णय लेने की अनुमति मिल जाती है कि वे क्या आयात और क्या निर्यात करना चाहते हैं। सरकार व्यापार पर पहले की तुलना में कम नियन्त्रण
रखती है और इसीलिए उसे अधिक उदार कहा जाता है। कुछ अत्यधिक प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठन व विकसित देश यह चाहते हैं कि विकासशील देश (भारत सहित) उनके व्यापार एवं निवेश के लिए उदारीकरण की नीति अपनाएँ। वे मानते हैं कि विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर सभी अवरोधक हानिकारक हैं, अवरोधक हटाकर स्वतन्त्र व्यापार होना चाहिए। विकसित देशों की पहल पर स्थापित विश्व व्यापार संगठन का उद्देश्य अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है । व्यवहार में विश्व व्यापार संगठन के नियमों ने विकासशील देशों को व्यापार अवरोधों को हटाने के लिए विवश किया है; उदाहरण के लिए, भारत में अधिकांश रोजगार और सकल घरेलू उत्पाद का महत्त्वपूर्ण भाग कृषि क्षेत्र प्रदान करता है। इसकी तुलना में अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का हिस्सा मात्र 1 प्रतिशत और कुल रोजगार में मात्र 0.5 प्रतिशत है। फिर भी अमेरिका के कृषि क्षेत्र में कार्यरत इतने कम प्रतिशत लोग भी अमेरिकी सरकार से उत्पादन और दूसरे लोगों से निर्यात करने के लिए बहुत अधिक धनराशि प्राप्त करते हैं। इस भारी धनराशि के कारण अमेरिकी किसान अपने कृषि उत्पादों को असाधारण रूप से कम कीमत पर बेच सकते हैं। अधिशेष कृषि उत्पादों को दूसरे देशों के बाजारों में कम कीमत पर बेचकर विकासशील देश के कृषकों को बुरी तरह प्रभावित किया है। अपने अधिशेष को विकासशील देशों में बेचने के लिए वे व्यापार अवरोधकों को हटवाना चाहते हैं।
यद्यपि विश्व व्यापार संगठन सभी देशों को स्वतन्त्र व्यापार की सुविधा देता है तथापि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को अभी भी बरकरार रखा है । अत: यह न्यायपूर्ण है कि विकासशील देश भी विकसित देशों से व्यापार एवं निवेश के उदारीकरण की माँग करें। जब विकासशील देशों ने विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार व्यापार अवरोधकों को कम कर दिया है तो विकसित देश ऐसा क्यों न करें।
प्रश्न 6 — वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है।’ इस कथन की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए ।
उत्तर- वैश्वीकरण का प्रभाव
वैश्वीकरण का प्रभाव सर्वत्र अथवा सभी वर्गों पर एक समान नहीं पड़ा है। दूसरे शब्दों में यह सभी के लिए लाभप्रद नहीं है। कुछ वर्गों एवं क्षेत्रकों पर इसका अनुकूल प्रभाव पड़ा है जबकि कुछ वर्गों एवं क्षेत्रकों पर इसका प्रतिकूल एवं हानिकारक प्रभाव भी पड़ा है। अनेक लोग वैश्वीकरण के लाभों से वंचित रह गए हैं।
उपर्युक्त कथन की व्याख्या हम निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत कर सकते हैं—
(अ) अनुकूल प्रभाव
विभिन्न वर्गों पर वैश्वीकरण के निम्नलिखित अनुकूल प्रभाव पड़े हैं-
- उत्पादकों पर प्रभाव — स्थानीय एवं विदेशी उत्पादकों के मध्य प्रतिस्पर्द्धां बढ़ी है। इससे शहरी क्षेत्र के धनी वर्ग के उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है। उन्हें कम कीमत पर अच्छी किस्म की वस्तुएँ उपलब्ध होने लगी हैं। फलस्वरूप उनका जीवन-स्तर भी उच्च हुआ है।
- निवेशकों पर प्रभाव – बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के लिए भारत में निवेश करना लाभप्रद रहा है। स्थानीय एवं बाह्य निवेशकों ने विभिन्न उद्योगों एवं सेवाओं में निवेश बढ़ाया है। इन उद्योगों एवं सेवाओं में नए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। इसके अतिरिक्त इन उद्योगों को आदाओं की आपूर्ति करने वाली स्थानीय कम्पनियाँ भी समृद्ध हुई हैं।
- भारतीय कम्पनियों पर प्रभाव – अनेक शीर्ष भारतीय कम्पनियाँ बढ़ी हुई प्रतिस्पर्द्धा से लाभान्वित हुई हैं। इन कम्पनियों ने नवीनतम् प्रौद्योगिकी और उत्पादन प्रणाली में निवेश किया व अपने उत्पादन मानकों को ऊँचा किया। कुछ कम्पनियों ने विदेशी कम्पनियों के साथ सफलतापूर्वक सहयोग कर लाभ अर्जित किया। दूसरे वैश्वीकरण ने कुछ बड़ी भारतीय कम्पनियों को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के रूप में उभरने के योग्य बनाया; जैसे—–टाटा मोटर्स, इन्फोसिस, रैनबैक्सी आदि। तीसरे, वैश्वीकरण ने सेवाप्रदाता कम्पनियों; विशेषकर सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी वाली कम्पनियों; के लिए नए अवसरों का सृजन किया है।
(ब) प्रतिकूल प्रभाव
विभिन्न वर्गों पर वैश्वीकरण के निम्नलिखित प्रतिकूल प्रभाव पड़े हैं-
- प्रतिस्पर्द्धा के कारण छोटे विनिर्माताओं पर कड़ी मार पड़ी है। अनेक इकाइयाँ बन्द हो गईं और बड़ी संख्या में श्रमिक बेरोजगार हो गए।
- अधिकांश नियोक्ता श्रमिकों को रोजगार देने में लचीलेपन की नीति अपनाने लगे हैं। इससे श्रमिकों का रोजगार सुनिश्चित एवं सुरक्षित नहीं रह गया है।
- नियोक्ता श्रम लागतों में निरन्तर कटौती करने का प्रयास कर रहे हैं। वे कम वेतन पर श्रमिकों से अधिक समय काम ले रहे हैं। दूसरे, लाभ का न्यायसंगत हिस्सा श्रमिकों को नहीं दिया जाता है।
- संगठित क्षेत्र में कार्य दशाएँ अधिकांशतः असंगठित क्षेत्रक की भाँति होती जा रही हैं।
निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि वैश्वीकरण का प्रभाव सभी क्षेत्रकों / वर्गों पर एक समान नहीं रहा है। कुछ क्षेत्रक/वर्ग इससे लाभान्वित हुए हैं जबकि कुछ क्षेत्रकों / वर्गों पर इसका हानिकारक प्रभाव पड़ा है।
प्रश्न 7 – व्यापार एवं निवेश नीतियों का उदारीकरण वैश्वी| करण प्रक्रिया में कैसे सहायता पहुँचाता है?
उत्तर— व्यापार का उदारीकरण एवं वैश्वीकरण – वैश्वीकरण की प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय निगम (उदारीकरण के कारण) छोटी कम्पनियों के उत्पादकों को कपड़ों, जूतों, खेल के सामान आदि के उत्पादन के लिए ऑर्डर देते हैं। कभी-कभी ये निगम उनके उत्पादों को खरीदकर अन्य देशों में स्थित अपनी औद्योगिक इकाइयों को भेज देते हैं। ये कम्पनियाँ स्थानीय कम्पनियों से मिलकर संयुक्त रूप से उत्पादन करती हैं।
निवेश एवं वैश्वीकरण – बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के निवेश का सामान्य तरीका है— स्थानीय कम्पनियों को खरीदना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना। इन कम्पनियों के पास अथाह सम्पदा होती है; अतः ये आसानी से स्थानीय कम्पनियों को खरीद सकती हैं; उदाहरण के लिए अमेरिका की कारगिल फूड्स ने भारत की परख फूड्स को खरीद लिया।
आयात पर कर आयातों पर कुछ प्रतिबन्ध आरोपित करता है जिससे आयात कम हो जाते हैं। इसके द्वारा घरेलू उत्पादकों को संरक्षण भी प्रदान किया जाता है। व्यापार प्रतिबन्धों में कटौती ने व्यापार एवं निवेश को बढ़ाया है।
प्रश्न 8 – विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों के एकीकरण में किस प्रकार मदद करता है? यहाँ दिए गए उदाहरण से भिन्न उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए ।
उत्तर – विदेश व्यापार घरेलू बाजारों से बाहर के बाजारों में पहुँचने के लिए उत्पादकों को एक अवसर प्रदान करता है। इस प्रक्रिया में उत्पादक केवल अपने देश के बाजारों में ही अपने उत्पाद नहीं बेच सकते हैं बल्कि अन्य देशों के बाजारों से भी प्रतिस्पर्द्धा कर सकते हैं। इसी प्रकार दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं का आयात कर सकते हैं।
सामान्यत: व्यापार के खुलने से वस्तुओं का एक बाजार से दूसरे बाजार में आवागमन होता है। बाजार में वस्तुओं के विकल्प बढ़ जाते हैं। दो बाजारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है। अब दो देशों के उत्पादक एक-दूसरे से हजारों मील दूर होकर भी एक-दूसरे से प्रतिस्पर्द्धा कर सकते हैं। इस प्रकार विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों को जोड़ने या उनके एकीकरण में सहायक होता है; उदाहरण के लिए – भारत में सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, सॉफ्टवेयर, इन्जीनियरिंग उपकरणों का बहुतायत उत्पादन होता है। विश्व के विभिन्न देशों में इन वस्तुओं का निर्यात किया जाएगा, यदि वे इनकी माँग करते हैं। दूसरी तरफ भारत में खाद्य तेल, खनिज तेल व जीवनरक्षक दवाइयों की कमी भी है। ये वस्तुएँ भारत में विभिन्न देशों से आयात की जाएँगी। इस प्रकार विदेश व्यापार से विभिन्न देशों के बाजारों के एकीकरण में सहायता मिलेगी।
प्रश्न 9 – वैश्वीकरण भविष्य में जारी रहेगा। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज से बीस वर्ष बाद विश्व कैसा होगा? अपने उत्तर का कारण दीजिए ।
उत्तर — निःसन्देह भविष्य में भी वैश्वीकरण जारी रहेगा। आज से बीस वर्ष बाद सम्पूर्ण विश्व एक बड़े बाजार के रूप में दिखाई देगा। इस उत्तर के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं-
- आज नई अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था विकसित हो रही है। उदारीकरण के साथ-साथ वैश्वीकरण को अपना लिया गया है। सम्पूर्ण विश्व सिमटता जा रहा है।
- बहुराष्ट्रीय निगमों का विश्व भर में विस्तार विभिन्न बाजारों को एक-दूसरे के निकट ले आएगा।
- सुदृढ़ आधारिक संरचना, तीव्र औद्योगीकरण एवं कृषि क्रान्ति के लिए विदेशी पूँजी एवं श्रम की गतिशीलता बढ़ जाएगी।
- कुशल व अकुशल श्रमिक विश्व भर में फैल जाएँगे ।
- परिवहन, संचार व सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार से सांस्कृतिक मूल्यों का आदान-प्रदान होगा।
प्रश्न 10 – मान लीजिए कि आप दो लोगों को तर्क करते हुए पाते हैं – एक कह रहा है कि वैश्वीकरण ने हमारे देश के विकास को क्षति पहुँचाई है, दूसरा कह रहा है कि वैश्वीकरण ने भारत के विकास में सहायता की है। इन लोगों को आप कैसे जवाब दोगे?
उत्तर- वैश्वीकरण के विपक्ष में तर्क
- वैश्वीकरण ने भारतीय कृषि एवं किसानों को भारी क्षति पहुँचाई है। विदेशों से आए कृषि उत्पाद भारतीय कृषि आय पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं।
- अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ भारत को आर्थिक सहायता एवं ऋण प्रदान करती हैं। ये अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाएँ पश्चिमी विकसित देशों, विशेषकर अमेरिका के प्रभाव में हैं और भारतीय कृषि एवं छोटे उत्पादकों को दी जाने वाली उपदान एवं आर्थिक सहायता के विरुद्ध हैं।
- भारत विदेशी ऋण जाल में फँसता जा रहा है।
- उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए विकसित प्रौद्योगिकी के बढ़ते आयात ने देश में बेरोजगारों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि की है।
- भारत में आवश्यक वस्तुओं के स्थान पर विलासिता सम्बन्धी वस्तुओं का उत्पादनं बढ़ रहा है।
वैश्वीकरण के पक्ष में तर्क
- वैश्वीकरण से देश में औद्योगिक विकास की गति बढ़ी है जिससे आर्थिक विकास की दर में भी तेजी से वृद्धि हुई है।
- भारत विदेशी प्रतिस्पर्द्धा के समक्ष ठहरने में समर्थ हो गया है।
- निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत गिर रहा है और आर्थिक विषमताएँ घट रही हैं।
- वित्तीय घाटा कम हुआ है।
- सेवा क्षेत्र की क्षमता में वृद्धि हुई है।
प्रश्न 11 – रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
दो दशक पहले की तुलना में भारतीय खरीददारों के पास वस्तुओं के अधिक विकल्प हैं। यह (1) ………. की प्रक्रिया से नजदीक से जुड़ा हुआ है। अनेक दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं को भारत के बाजारों में बेचा जा रहा है। इसका अर्थ है कि अन्य देशों के साथ (2) ……… बढ़ रहा है। इससे भी आगे भारत में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा उत्पादित ब्राण्डों की बढ़ती संख्या हम बाजारों में देखते हैं । बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भारत में निवेश कर रही हैं क्योंकि (3) ……. । जबकि बाजार में उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प इसलिए बढ़ते (4) ……….. और (5) ……….. के प्रभाव का अर्थ है उत्पादकों के बीच अधिकतम (6) …………. ।
उत्तर- (1) वैश्वीकरण, (2) व्यापार, (3) सस्ता श्रम एवं अन्य संसाधन प्राप्त कर सकती हैं, (4) जाते हैं क्योंकि व्यापार के खुलने से वस्तुओं का एक बाजार से दूसरे बाजार में आवागमन होता है, (5) वैश्वीकरण, (6) प्रतिस्पर्द्धा ।
प्रश्न 12 – निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए-
| (क) बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ छोटे उत्पादकों से सस्ती दरों पर खरीदती हैं। | (अ) मोटर गाड़ियों |
| (ख) आयात पर कर और कोटा का उपयोग, व्यापार नियमन के लिए किया जाता है। | (ब) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल के सामान |
| (ग) विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कम्पनियाँ | (स) कॉल सेण्टर |
| (घ) आई० टी० ने सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में सहायता की है। | (द) टाटा मोटर्स, इन्फोसिस, रैनबैक्सी |
| (ङ) अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने उत्पादन करने के लिए निवेश किया है। | (य) व्यापार अवरोधक |
उत्तर-
| (क) बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ छोटे उत्पादकों से सस्ती दरों पर खरीदती हैं। | (ब) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल के सामान |
| (ख) आयात पर कर और कोटा का उपयोग, व्यापार नियमन के लिए किया जाता है। | (य) व्यापार अवरोधक |
| (ग) विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कम्पनियाँ | (द) टाटा मोटर्स, इन्फोसिस, रैनबैक्सी |
| (घ) आई० टी० ने सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में सहायता की है। | (स) कॉल सेण्टर |
| (ङ) अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने उत्पादन करने के लिए निवेश किया है। | (अ) मोटर गाड़ियों |
प्रश्न 13 – सही विकल्प का चयन कीजिए-
(अ) वैश्वीकरण के विगत दो दशकों में द्रुत आवागमन देखा गया है—
(क) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और लोगों का
(ख) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का
(ग) देशों के बीच वस्तुओं, निवेशों और लोगों का
(आ) विश्व के देशों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा निवेश का सबसे अधिक सामान्य मार्ग है—
(क) नए कारखानों की स्थापना
(ख) स्थानीय कम्पनियों को खरीद लेना
(ग) स्थानीय कम्पनियों से साझेदारी करना
(इ) वैश्वीकरण ने जीवन स्तर के सुधार में सहायता पहुँचाई है-
(क) सभी लोगों के
(ख) विकसित देशों के लोगों के
(ग) विकासशील देशों के श्रमिकों के.
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर- (अ) (ख) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का।
(आ) (ग) स्थानीय कम्पनियों से साझेदारी करना ।
(इ) (ख) विकसित देशों के लोगों के ।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
• विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – विकसित देश, विकासशील देशों से उनके व्यापार और निवेश का उदारीकरण क्यों चाहते हैं?
उत्तर – सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबन्धों को हटाने की प्रक्रिया को उदारीकरण कहते हैं। व्यापार के उदारीकरण से व्यापारियों को स्वतन्त्र रूप से निर्णय लेने की अनुमति मिल जाती है कि वे क्या आयात और क्या निर्यात करना चाहते हैं। सरकार व्यापार पर पहले की तुलना में कम नियन्त्रण रखती है और इसीलिए उसे अधिक उदार कहा जाता है।
कुछ अत्यधिक प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठन व विकसित देश यह चाहते हैं कि विकासशील देश (भारत सहित ) उनके व्यापार एवं निवेश के लिए उदारीकरण की नीति अपनाएँ । वे मानते हैं कि विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर सभी अवरोधक हानिकारक हैं, अवरोधक हटाकर स्वतन्त्र व्यापार होना चाहिए। विकसित देशों की पहल पर स्थापित विश्व व्यापार संगठन का उद्देश्य अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है । व्यवहार में विश्व व्यापार संगठन के नियमों ने विकासशील देशों को व्यापार अवरोधों को हटाने के लिए विवश किया है; उदाहरण के लिए भारत में अधिकांश रोजगार और सकल घरेलू उत्पाद का महत्त्वपूर्ण भाग कृषि क्षेत्र प्रदान करता है। इसकी तुलना में अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का हिस्सा मात्र 1 प्रतिशत और कुल रोजगार में मात्र 0.5 प्रतिशत है। फिर भी अमेरिका के कृषि क्षेत्र में कार्यरत इतने कम प्रतिशत लोग भी अमेरिकी सरकार से उत्पादन और दूसरे लोगों से निर्यात करने के लिए बहुत अधिक धनराशि प्राप्त करते हैं। इस भारी धनराशि के कारण अमेरिकी किसान अपने कृषि उत्पादों को असाधारण रूप से कम कीमत पर बेच सकते हैं। अधिशेष कृषि उत्पादों को दूसरे देशों के बाजारों में कम कीमत पर बेचकर विकासशील देश के कृषकों को बुरी तरह प्रभावित किया है। अपने अधिशेष को विकासशील देशों में बेचने के लिए वे व्यापार अवरोधकों को हटवाना चाहते हैं।
यद्यपि विश्व व्यापार संगठन सभी देशों को स्वतन्त्र व्यापार की सुविधा देता है तथापि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को अभी भी बरकरार रखा है। अतः यह न्यायपूर्ण है कि विकासशील देश भी विकसित देशों से व्यापार एवं निवेश के उदारीकरण की माँग करें। जब विकासशील देशों ने विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार व्यापार अवरोधकों को कम कर दिया है तो विकसित् देश ऐसा क्यों न करें।
प्रश्न 2 – वस्त्र उद्योग के श्रमिकों, भारतीय निर्यातकों और विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को प्रतिस्पर्धा ने किस प्रकार प्रभावित किया है?
उत्तर— वैश्वीकरण और प्रतिस्पर्धा के दबाव ने श्रमिकों के जीवन को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण अधिकांश नियोक्ता इन दिनों श्रमिकों को रोजगार देने में लचीलापन पसन्द करते हैं। इसका अर्थ है कि श्रमिकों का रोजगार अब सुनिश्चित नहीं है। अमेरिका और यूरोप में वस्त्र उद्योग की बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भारतीय निर्यातकों को वस्तुओं की आपूर्ति के लिए ऑर्डर देती हैं। विश्वव्यापी नेटवर्क से युक्त बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ लाभ को अधिकतम करने के लिए सबसे सस्ती वस्तुएँ खोजती हैं। इन बड़े ऑर्डरों को प्राप्त करने के लिए भारतीय वस्त्र निर्यातक अपनी लागत कम करने की कड़ी कोशिश करते हैं। चूँकि कच्चे माल पर लागत में कटौती नहीं की जा सकती, इसलिए नियोक्ता श्रम लागत . में कटौती करने की कोशिश करते हैं। जहाँ पहले कारखाने श्रमिकों को स्थायी आधार पर रोजगार देते थे, वहीं वे अब अस्थायी रोजगार देते हैं, ताकि श्रमिकों को वर्ष भर वेतन नहीं देना पड़े। श्रमिकों को बहुत लम्बे कार्य – घण्टों तक काम करना पड़ता है और अत्यधिक माँग की अवधि में नियमित रूप से रात में भी काम करना पड़ता है। मजदूरी काफी कम होती है और श्रमिक अपनी रोजी-रोटी के लिए अतिरिक्त समय में भी काम करने के लिए विवश हो जाते हैं।
हालाँकि वस्त्र निर्यातको के बीच प्रतिस्पर्धा से बहुराष्ट्रीय कम्पनिया को अधिक लाभ कमाने में मदद मिली है, परन्तु वैश्वीकरण के कारण मिले | लाभ में श्रमिकों को न्याससंगत हिस्सा नहीं दिया गया है।
प्रश्न 3 – वैश्वीकरण’ क्या है? वैश्वीकरण को सम्भव बनाने वाले कारकों का विवरण दीजिए।
अथवा वैश्वीकरण क्या है? विदेशी व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों को जोड़ने में कैसे सहायक हो रहा है? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
अथवा वैश्वीकरण से क्या तात्पर्य है? वैश्वीकरण प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की क्या भूमिका है?
अथवा बहुराष्ट्रीय कम्पनी से क्या अभिप्राय है? आधुनिक अर्थव्यवस्था में उनकी कार्यप्रणाली समझाइए |
अथवा बहुराष्ट्रीय कम्पनी (MNC) से क्या तात्पर्य है? ये कम्पनियाँ किस प्रकार विभिन्न देशों में अपने उत्पादों का प्रसार करती हैं और स्थानीय उत्पादकों के साथ पारस्परिक सम्पर्क स्थापित करती हैं।
उत्तर- वैश्वीकरण का अर्थ
विभिन्न देशों के बीच परस्पर सम्बन्ध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है। इस प्रक्रिया में एक देश की अर्थव्यवस्था विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ एकीकृत हो जाती है। भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका अर्थ इससे भी अधिक है। भारत के सन्दर्भ में वैश्वीकरण के अन्तर्गत निम्नलिखित बातें सम्मिलित की जाती हैं-
अर्थव्यवस्था को विदेशी निवेश के लिए खोलना, नियन्त्रणों को धीरे-धीरे कम करना, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को निवेश सुविधाएँ प्रदान करना, मात्रात्मक प्रतिबन्धों को धीरे-धीरे समाप्त करना, आयात उदारीकरण कार्यक्रमों को व्यापक आधार पर लागू करना तथा निर्यात संवर्द्धन को प्रोत्साहित करना। 1991 ई० की औद्योगिक नीति के फलस्वरूप विश्वव्यापीकरण को प्रोत्साहन मिला है।
विदेश व्यापार घरेलू बाजारों से बाहर के बाजारों में पहुँचने के लिए उत्पादकों को एक अवसर प्रदान करता है। इस प्रक्रिया में उत्पादक केवल अपने देश के बाजारों में ही अपने उत्पाद नहीं बेच सकते हैं बल्कि अन्य देशों के बाजारों से भी प्रतिस्पर्द्धा कर सकते हैं। इसी प्रकार दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं का आयात कर सकते हैं।
सामान्यतः व्यापार के खुलने से वस्तुओं का एक बाजार से दूसरे बाजार में आवागमन होता है। बाजार में वस्तुओं के विकल्प बढ़ जाते हैं। दो बाजारों में एक ही वस्तु का मूल्य एकसमान होने लगता है। अब दो देशों के उत्पादक हजारों मील दूर होकर भी एक-दूसरे से प्रतिस्पर्द्धा कर सकते हैं। इस प्रकार विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों को जोड़ने या उनके एकीकरण में सहायक होता है; उदाहरण के लिए भारत में सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, सॉफ्टवेयर, इन्जीनियरिंग उपकरणों का बहुतायत में उत्पादन होता है। विश्व के विभिन्न देशों में इन वस्तुओं का निर्यात किया जाएगा, य इनकी माँग करते हैं। दूसरी तरफ भारत में खाद्य तेल, खनिज तेल व जीवनरक्षक दवाइयों की कमी भी है। ये वस्तुएँ भारत में विभिन्न देशों से आयात की जाएँगी। इस प्रकार विदेश व्यापार से विभिन्न देशों के बाजारों के एकीकरण में सहायता मिलेगी।
बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से अभिप्राय – बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ ऐसी कम्पनियाँ हैं जो अनेक देशों में अपनी शाखाएँ स्थापित करती हैं ताकि वे उत्पादन पर अधिक-से-अधिक अपना नियन्त्रण या स्वामित्व स्थापित कर सकें।
बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की भूमिका
बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ उसी स्थान पर उत्पादन इकाई स्थापित करती जो बाजार के नजदीक हों, जहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम उपलब्ध हो।
बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ इन देशों की स्थानीय कम्पनियों के साथ संयुक्त रूप से उत्पादन करती हैं। संयुक्त उत्पादन से स्थानीय कम्पनी को दोहरा लाभ होता है।
बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ स्थानीय कम्पनियों को खरीदकर उसके बाद उत्पादन का प्रसार करती हैं। अपार सम्पदा वाली बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ आसानी से स्थानीय कम्पनियों को खरीद लेती हैं।
विकसित देशों की बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ छोटे उत्पादकों को उत्पादन का ऑर्डर देती हैं। वस्त्र, जूते-च – चप्पल एवं खेल के सामान ऐसे उद्योग हैं, जिनका विश्वभर में बड़ी संख्या में छोटे उत्पादकों द्वारा उत्पादन किया जाता है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ फिर इन्हें अपने ब्राण्ड नाम से ग्राहकों को बेचती हैं।
• लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – बहुराष्ट्रीय कम्पनी से क्या आशय है? यह अपने कारखाने कहाँ स्थापित करती है?
उत्तर – एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी वह है जो एक से अधिक देशों में स्थित अपनी इकाइयों के उत्पादन पर नियन्त्रण अथवा स्वामित्व रखती है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ उन प्रदेशों में कार्यालय तथा उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करती हैं जहाँ उन्हें सस्ता श्रम एवं अन्य संसाधन मिल सकते हैं। उत्पादन लागत में कमी करने तथा अधिक लाभ कमाने के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ ऐसा करती हैं। वे वैश्विक स्तर पर अपने उत्पाद एवं सेवाएँ बेचती हैं। सामान्यतः ये कम्पनियाँ उसी स्थान पर उत्पादन इकाई स्थापित करती हैं जो बाजार के नजदीक हो, जहाँ कम लागत पर कुशल एवं अकुशल श्रम उपलब्ध हो और जहाँ उत्पादन के अन्य कारकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो ।
प्रश्न 2 – संयुक्त उत्पादन से स्थानीय कम्पनियों को क्या लाभ होता है?
उत्तर – संयुक्त उत्पादन से स्थानीय कम्पनी को दोहरा लाभ होता है। प्रथम, बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ अतिरिक्त निवेश के लिए धन प्रदान कर सकती हैं। जैसे मशीनें व कच्चा माल आदि खरीदने के लिए पर्याप्त मात्रा में व्यय कर सकती हैं। द्वितीय, बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी अपने साथ ला सकती हैं।
प्रश्न 3 – बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा किस प्रकार उत्पादन परस्पर सम्बन्धित हो रहा है?
उत्तर – बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ विभिन्न तरीकों से अपने उत्पादन कार्य का प्रसार कर रही हैं और विश्व के अनेक देशों की स्थानीय कम्पनियों के साथ पारस्परिक सम्बन्ध स्थापित कर रही हैं। स्थानीय कम्पनियों के साथ साझेदारी द्वारा आपूर्ति के लिए स्थानीय कम्पनियों का इस्तेमाल करके और स्थानीय कम्पनियों से निकट प्रतिस्पर्द्धा करके अथवा उन्हें खरीदकर बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ दूरस्थ स्थानों के उत्पादन पर अपना प्रभाव जमा रही हैं। परिणामत: दूर-दूर स्थानों पर फैला उत्पादन परस्पर सम्बन्धित हो रहा है।
प्रश्न 4- वैश्वीकरण प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की क्या भूमिका है?
उत्तर- विभिन्न देशों के बीच परस्पर सम्बन्ध और तीव्र एकीकरण की प्रकिया ही वैश्वीकरण है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ वैश्वीकरण की प्रक्रिया मुख्य भूमिका निभा रही हैं। विभिन्न देशों के बीच अधिक-से-अधिक वस्तुओं और सेवाओं तथा निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान हो रहा में हैं। विगत कुछ दशकों की तुलना में विश्व के अधिकांश भाग एक-दूसरे के अपेक्षाकृत अधिक सम्पर्क में आए हैं।
प्रश्न 5- वे कौन से विभिन्न तरीके हैं, जिनके द्वारा देशों को परस्पर सम्बन्धित किया जा सकता है?
उत्तर- वे विभिन्न तरीके जिनके द्वारा देशों को परस्पर सम्बन्धित किया जा सकता है, निम्नलिखित हैं-
(1) व्यापार (2) विभिन्न राष्ट्रों के मध्य पूँजी की गतिशीलता, (3) विभिन्न राष्ट्रों के मध्य सेवाओं का आदान-प्रदान, (1) पूँजी, निवेश और प्रौद्योगिकी का हस्तान्तरण, (5) विभिन्न देशों के बीच लोगों का आवागमन।
प्रश्न 6 – आयात पर कर एक प्रकार का व्यापार अवरोधक है। सरकार आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या भी सीमित कर सकती है। इसे कोटा कहते हैं। क्या आप चीन के खिलौनों के उदाहरण से व्याख्या कर सकते हैं कि व्यापार अवरोधक के रूप में कोटा का प्रयोग कैसे किया जा सकता है? आपके विचार से क्या इसका प्रयोग किया जाना चाहिए? चर्चा करें।
उत्तर – आयात पर कर व्यापार अवरोधक है क्योंकि यह व्यापार पर कुछ प्रतिबन्ध आरोपित करता है। सरकार इसका प्रयोग विदेश व्यापार को नियमित एवं नियन्त्रित करने के लिए करती है। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादकों को संरक्षण देना भी होता है।
उदाहरण के रूप में माना कि सरकार चीनी खिलौनों के आयात पर कर लगाती है। कर लगने से आयातित खिलौनों के मूल्य बढ़ जाएँगे, आयात कम हो जाएगा और भारत के खिलौना उत्पादकों को प्रोत्साहन मिलेगा। इसी उदाहरण में सरकार आयात पर कर लगाने के बजाय कोटा का प्रयोग कर सकती है अर्थात् चीनी खिलौनों के आयात की सीमा निर्धारित कर सकती है।
प्रश्न 7 – प्रतिस्पर्द्धा से भारत के लोगों को कैसे लाभ हुआ है ?
उत्तर – प्रतिस्पर्द्धा से भारत के लोगों को निम्नलिखित लाभ हुए हैं-
- उपभोक्ताओं को उत्तम कोटि की वस्तुएँ कम कीमत पर उपलब्ध होने लगी हैं।
- विभिन्न प्रकार की कम्पनियों के विस्तार के लिए नए-नए ‘अवसरों का सृजन किया जाने लगा है।
- अनेक शीर्ष भारतीय कम्पनियों ने नवीनतम प्रौद्योगिकी और उत्पादन प्रणाली में निवेश किया है और अपने उत्पादन मानकों को ऊँचा उठाया है। अनेक भारतीय कम्पनियाँ विश्व स्तर पर अपने क्रियाकलापों का विस्तार कर रही हैं।
- विगत वर्षों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने भारत में अपने निवेश में वृद्धि की है।
- उन क्षेत्रकों में जहाँ नए उद्योग स्थापित हुए हैं, रोजगार के नए अवसरों का सृजन हुआ है।
- इन उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति करने वाली कम्पनियों का भी विस्तार हुआ है।
प्रश्न 8 – क्या और भारतीय कम्पनियों को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के रूप में उभारना चाहिए? इससे देश की जनता को क्या लाभ होगा?
उत्तर – भारतीय कम्पनियों को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के रूप में उभारा जाना चाहिए। इससे देश की जनता को निम्नलिखित लाभ होंगे-
- भारत की राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय, निवेशं, रोजगार व सेवाओं में वृद्धि होगी ।
- भारतीयों को रोजगार, पदोन्नति व निवेश के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध होंगे।
- विभिन्न कम्पनियों के मध्य प्रतिस्पर्द्धा बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को ही होगा। वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और कीमतें कम होंगी।
- शोध कार्यों पर अधिक व्यय होगा। इसका लाभ भारतीय कम्पनियों को भी मिलेगा।
प्रश्न 9 – सरकारें अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने का कहते प्रयास क्यों करती हैं?
उत्तर — सरकारें निम्नलिखित कारणों से विदेशी निवेशों को आकर्षित करने का प्रयास करती हैं-
- घरेलू बचतों की कमी को पूरा करने के लिए,
- वैश्वीकरण और उदारीकरण के दौर में और अधिक प्रभावशाली ढंग से भागीदारी करने के लिए,
- देश में नए-नए उद्योगों की स्थापना के लिए,
- देश में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए,
- विशेष आर्थिक क्षेत्रों का विकास करने के लिए।
प्रश्न 10– न्यायपूर्ण वैश्वीकरण के लिए सरकार को क्या करना चाहिए?
उत्तर – न्यायपूर्ण वैश्वीकरण के लिए सरकार को निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए—
- सरकार सभी लोगों के हितों का संरक्षण करे।
- सरकार यह सुनिश्चित करे कि श्रमिक कानूनों का उचित क्रियान्वयन हो और श्रमिकों को उनके अधिकार मिलें।
- सरकार छोटे उत्पादकों को कार्य निष्पादन में सुधार के लिए उस समय तक मदद करे, जब तक वे प्रतिस्पर्द्धा के लिए सक्षम न हो जाएँ।
- आवश्यकता पड़ने पर सरकार व्यापार व निवेश अवरोधकों का प्रयोग करे ।
- आवश्यक होने पर सरकार न्यायसंगत नियमों के लिए विश्व व्यापार संगठन से समझौता करे ।
• अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – बीसवीं शताब्दी के मध्य तक उत्पादन की क्या मुख्य विशेषता थी?
उत्तर— बीसवीं शताब्दी के मध्य तक उत्पादन देश की सीमाओं के अन्दर तक ही सीमित था ।
प्रश्न 2 – भारत में आयात-निर्यात का स्वरूप क्या था ?
उत्तर— भारत से कच्चे माल एवं खाद्य पदार्थों का निर्यात होता था और निर्मित माल का आयात होता था ।
प्रश्न 3 – दूरस्थ देशों को आपस में जोड़ने का मुख्य जरिया क्या था?
उत्तर – दूरस्थ देशों को आपस में जोड़ने का मुख्य जरिया ‘व्यापार’ था।
प्रश्न 4 – बहुराष्ट्रीय कम्पनी से क्या आशय है?
उत्तर – एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी वह है जो एक से अधिक देशों में स्थित अपनी इकाइयों के उत्पादन पर नियन्त्रण अथवा स्वामित्व रखती है।
प्रश्न 5 – बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ मुख्यतः अपने कार्यालय कहाँ स्थापित करती हैं?
उत्तर – बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ उन प्रदेशों में कार्यालय तथा उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करती हैं जहाँ उन्हें सस्ता श्रम एवं अन्य संसाधन मिल सकते हैं।
प्रश्न 6 – बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
उत्तर – बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का मुख्य उद्देश्य उत्पादन लागत में कमी करना तथा अधिकतम लाभ कमाना है।
प्रश्न 7 – निवेश किसे कहते हैं?
उत्तर — परिसम्पत्तियों; जैसे – भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरणों की खरीद में व्यय की गई मुद्रा को ही निवेश कहते हैं।
प्रश्न 8 – विदेशी निवेश किसे कहते हैं?
उत्तर – बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं।
प्रश्न 9 – निवेश क्यों किया जाता है?
उत्तर – निवेश इस आशा से किया जाता है कि ये परिसम्पत्तियाँ लाभ अर्जित करेंगी।
प्रश्न 10 – बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता क्या है?
उत्तर – बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कम्पनियों को खरीदना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना है।
प्रश्न 11 – विदेश व्यापार का मूलभूत कार्य क्या है?
उत्तर – विदेश व्यापार घरेलू बाजारों अर्थात् अपने देश के बाजारों से बाहर के बाजारों में पहुँचने के लिए उत्पादकों को एक अवसर प्रदान करता है।
प्रश्न 12–विदेश व्यापार का मुख्य लाभ क्या है ?
उत्तर— विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।
प्रश्न 13 – वैश्वीकरण क्या है?
उत्तर— विभिन्न देशों के बीच परस्पर सम्बन्ध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।
प्रश्न 14 – वैश्वीकरण की प्रक्रिया में कौन मुख्य भूमिका निभा रहा है?
उत्तर – बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
प्रश्न 15 – प्रौद्योगिकी ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को किस प्रकार उत्प्रेरित किया है?
उत्तर – प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया है; उदाहरण के लिए – विगत पचास वर्षों में परिवहन प्रौद्योगिकी के विकास ने लम्बी दूरियों तक वस्तुओं की तीव्रतर आपूर्ति को कम लागत पर सम्भव किया है।
प्रश्न 16 – सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विकास में योगदान देने वाले मुख्य घटक बताइए ।
उत्तर – टेलीग्राफ, टेलीफोन, मोबाइल फोन, फैक्स, कम्प्यूटर, ई-मेल, वॉयस मेल एवं इण्टरनेट ।
प्रश्न 17 – आयात पर कर को व्यापार अवरोधक क्यों माना जाता है?
उत्तर— आयात पर कर इसलिए व्यापार अवरोधक माना जाता हैं क्योंकि यह व्यापार पर कुछ प्रतिबन्ध लगाता है।
प्रश्न 18 – सरकारें व्यापार अवरोधक का प्रयोग किसलिए करती हैं?
उत्तर— सरकारें व्यापार अवरोधक का प्रयोग विदेश व्यापार को नियमित करने ( वृद्धि/कटौती करने) और देश में किस प्रकार की वस्तुएँ कितनी मात्रा में आयातित होनी चाहिए, यह निर्णय करने के लिए कर सकती हैं।
प्रश्न 19 – विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर प्रतिबन्ध का मुख्यतः क्या उद्देश्य होता है?
उत्तर – देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्द्धा से संरक्षण प्रदान करना ।
प्रश्न 20 – भारत सरकार ने नवीन आर्थिक नीति की घोषणा कब की ?
उत्तर- भारत सरकार ने नवीन आर्थिक नीति की घोषणा सन् 1991 में की थी।
प्रश्न 21 – विदेश व्यापार के उदारीकरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर — सरकार द्वारा विदेश व्यापार से अवरोधों अथवा प्रतिबन्धों को हटाने की प्रक्रिया को विदेश व्यापार का उदारीकरण कहते हैं।
प्रश्न 22 – विश्व व्यापार संगठन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर – विश्व व्यापार संगठन का उद्देश्य अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है।
प्रश्न 23 – क्या वैश्वीकरण सभी के लिए लाभप्रद रहा है?
उत्तर – वैश्वीकरण से धनी उपभोक्ता और कुशल, शिक्षित एवं धनी उत्पादक ही लाभान्वित हुए हैं, परन्तु बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा से अनेक उत्पादकों और श्रमिकों पर हानिकारक प्रभाव पड़ा है।
प्रश्न 24 – न्यायसंगत वैश्वीकरण क्यों आवश्यक है?
उत्तर— न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह भी सुनिश्चित करेगा कि वैश्वीकरण का लाभ सभी वर्गों तक पहुँचे।
प्रश्न 25 – सरकारी नीति की मुख्य विशेषता क्या होनी चाहिए?
उत्तर – सरकारी नीति ऐसी होनी चाहिए जो देश के सभी लोगों के हितों का संरक्षण करे ।
• बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1 – वैश्वीकरण के विगत दो दशकों में द्रुत आवागमन देखा गया है-
(अ) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और लोगों का
(ब) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का
(स) देशों के बीच वस्तुओं, निवेशों और लोगों का ।
उत्तर- (ब) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का।
प्रश्न 2 – विश्व के देशों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा निवेश का सबसे अधिक सामान्य मार्ग है-
(अ) नए कारखानों की स्थापना
(ब) स्थानीय कम्पनियों को खरीद लेना
(स) स्थानीय कम्पनियों से साझेदारी करना ।
उत्तर- (ब) स्थानीय कम्पनियों को खरीद लेना।
प्रश्न 3 – वैश्वीकरण ने जीवन-स्तर के सुधार में सहायता पहुँचाई है-
(अ) सभी लोगों के
(ब) विकसित देशों के लोगों के
(स) विकासशील देशों के श्रमिकों के
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर- (ब) विकसित देशों के लोगों के।
प्रश्न 4 – देशों के तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया क्या कहलाती है-
(अ) उदारीकरण
(ब) वैश्वीकरण
(स) शहरीकरण
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर- (ब) वैश्वीकरण ।
प्रश्न 5 – तत्काल इलेक्ट्रॉनिक डाक किसके द्वारा भेजी जा सकती है-
(अ) डाकघर
(ब) वायु परिवहन
(स) बहुराष्ट्रीय निगम
(द) इण्टरनेट ।
उत्तर— (द) इण्टरनेट ।
प्रश्न 6 – एक ऐसा संगठन जिसका ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है—
(अ) विश्व स्वास्थ्य संगठन
(ब) विश्व व्यापार संगठन
(स) संयुक्त राष्ट्र संघ
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर – (ब) विश्व व्यापार संगठन।
प्रश्न 7 – वैश्वीकरण से सर्वाधिक लाभान्वित हुए हैं-
(अ) ग्रामीण मजदूर
(ब) शहरी शिक्षित व्यक्ति
(स) धनी वर्ग के उपभोक्ता
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर – ( स ) धनी वर्ग के उपभोक्ता ।
प्रश्न 8 – वैश्वीकरण और प्रतिस्पर्धा के दबाव में सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं—
(अ) वस्त्र निर्यातक
(ब) श्रमिक
(स) धनिक वर्ग
(द) बहुराष्ट्रीय कम्पनी।
उत्तर — (ब) श्रमिक ।
