UK 10th Social Science

UK Board 10th Class Social Science – (भूगोल) – Chapter 7 राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

UK Board 10th Class Social Science – (भूगोल) – Chapter 7 राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

UK Board Solutions for Class 10th Social Science – सामाजिक विज्ञान – (भूगोल) – Chapter 7 राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
1. बहुवैकल्पिक प्रश्न-
(i) निम्नलिखित में कौन-से दो दूरस्थ स्थित स्थान पूर्वी-पश्चिमी गलियारे से जुड़े हैं-
(क) मुम्बई तथा नागपुर
(ख) मुम्बई और कोलकाता
(ग) सिलचर तथा पोरबन्दर
(घ) नागपुर तथा सिलिगुड़ी।
उत्तर – (ग) सिलचर तथा पोरबन्दर ।
(ii) निम्नलिखित में से परिवहन का कौन-सा साधन वहनान्तरण हानियों तथा देरी को घटाता है-
(क) रेल परिवहन
(ख) पाइप लाइन
(ग) सड़क परिवहन
(घ) जल परिवहन।
उत्तर- (ख) पाइप लाइन ।
(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य हजीरा-विजयपुरजगदीशपुर पाइप लाइन से नहीं जुड़ा है-
(क) मध्य प्रदेश
(ख) गुजरात
(ग) महाराष्ट्र
(घ) उत्तर प्रदेश ।
उत्तर- (ग) महाराष्ट्र ।
(iv) इनमें से कौन-सा पत्तन पूर्वी तट पर स्थित है जो अन्तः स्थलीय तथा अधिकतम गहराई का पत्तन है तथा पूर्ण सुरक्षित है-
(क) चेन्नई
(ख) तूतीकोरिन
(ग) पारादीप
(घ) विशाखापत्तनम |
उत्तर- (घ) विशाखापत्तनम ।
(v) निम्नलिखित में से कौन-सा परिवहन साधन भारत में प्रमुख साधन है-
(क) पाइप लाइन
(ख) रेल परिवहन
(ग) सड़क परिवहन
(घ) वायु परिवहन ।
उत्तर- (ग) सड़क परिवहन ।
(vi) निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द दो या अधिक देशों के व्यापार को दर्शाता है—
(क) आन्तरिक व्यापार
(ख) बाहरी व्यापार
(ग) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार
(घ) स्थानीय व्यापार ।
उत्तर – (ग) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार ।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) सड़क परिवहन के तीन गुण बताएँ ।
उत्तर – सड़क परिवहन के तीन महत्त्वपूर्ण गुण निम्नलिखित हैं-
  1. रेलवे लाइन की अपेक्षा सड़क मार्गों की निर्माण लागत बहुत कम होती है।
  2. सड़कें असमतल एवं विच्छिन भू-भागों पर भी बनाई जा सकती हैं जबकि रेलमार्गों के लिए समतल धरातल आवश्यक है।
  3. सड़क परिवहन अन्य परिवहन साधनों के उपयोग में एक कड़ी के रूप में भी कार्य करता है। जैसे सड़कें, रेलवे स्टेशन, समुद्रपत्तन एवं हवाई अड्डों को जोड़ती हैं।
(ii) रेल परिवहन कहाँ पर अत्यधिक सुविधाजनक परिवहन का साधन है तथा क्यों?
उत्तर— भारत में उत्तरी विशाल मैदान अपने समतल भू-भाग, सघन जनसंख्या सम्पन्न कृषि व प्रचुर संसाधन एवं तीव्र औद्योगिक व नगरीकरण के कारण रेल परिवहन विकास और सुविधाजनक साधन के रूप में महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हैं।
(iii) सीमान्त सड़कों का महत्त्व बताएँ ।
उत्तर — देश के सीमान्त क्षेत्रों में सीमा सड़क संगठन द्वारा निर्मित सड़कें सामरिक महत्त्व की सड़कें हैं। इन सड़कों के विकास से देश के दुर्गम क्षेत्रों में अभिगम्यता बढ़ी है तथा ये इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास में भी सहायक हुई हैं।
(iv) व्यापार से आप क्या समझते हैं? स्थानीय व अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर – राज्य व देशों में व्यक्तियों के बीच वस्तुओं का आदान-प्रदान व्यापार कहलाता है। जब व्यापार शहरों, कस्बों व गाँवों में होता है तो वह स्थानीय व्यापार कहलाता है, किन्तु जब एक देश का दूसरे देश से वस्तुओं या मुद्रा के माध्यम से आदान-प्रदान होता है तो उसे विदेश व्यापार या अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए-
(i) परिवहन तथा संचार के साधन किसी देश की जीवन रेखा तथा अर्थव्यवस्था क्यों कहे जाते हैं?
उत्तर- परिवहन तथा संचार के साधन वास्तव में किसी देश के मानव जीवन के लिए अनिवार्य आवश्यकता हैं। इनके द्वारा देश की सामाजिक एवं आर्थिक दशा को गति मिलती है और क्षेत्रीय असन्तुलन को कम करने में सहायता मिलती है इसीलिए परिवहन और संचार माध्यम किसी देश की जीवन रेखा और अर्थव्यवस्था के विकास का आधार कहलाती है। इसके पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं-
  1. उत्पादक एवं उपभोक्ताओं को मिलाने में सहायक- परिवहन के साधनों द्वारा कच्चा माल कल-कारखानों में भेजा जाता है और तैयार माल उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जाता है। थल परिवहन तथा जल परिवहन की इसमें प्रमुख भूमिका होती है। थल परिवहन में ट्रक एवं रेलों द्वारा माल ढोया जाता है। जल परिवहन में नौगम्य नदियाँ अपनी प्रमुख भूमिका निभाती हैं जिनका देश के भीतरी भागों में महत्त्वपूर्ण स्थान है। तटीय भागों तथा विदेशों से माल आयात एवं निर्यात करने में जल परिवहन (जलपोतों द्वारा) का प्रमुख स्थान है। इस प्रक्रिया से आर्थिक विकास को गति प्राप्त होती है।
  2. आवागमन में सहायक — परिवहन के साधन लोगों को उनके गन्तव्य तक ले जाने के प्रमुख माध्यम हैं। सड़क परिवहन तो लोगों को उनके दरवाजों तक पहुँचाता है जबकि रेल परिवहन लम्बी दूरी की यात्राओं में सहायक है ।
  3. राष्ट्रीय एकता में सहायक — परिवहन के साधन देश के निवासियों को एक-दूसरे से जोड़ने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्हें एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश और एक स्थान से दूसरे को देखने व समझने का अवसर प्रदान करते हैं। इस प्रकार राष्ट्रीय एकता और सामाजिक विकास की भावना बलवती होती है।
  4. मनोरंजन के साधन — संचार के साधन मानव समुदाय को स्वस्थ मनोरंजन प्रदान करते हैं। मनोरंजन के साथ-साथ उनके ज्ञान में भी वृद्धि होती है और देश-विदेश को जानने व समझने की उनमें जागरूकता उत्पन्न होती है।
  5. सम्पर्क में सुविधा – संचार के साधन सम्पर्क स्थापित कराने में सहायक होते हैं। टेलीफोन एवं मोबाइल द्वारा घर बैठे ही विश्व के किसी भी भाग में निवास करने वाले व्यक्ति से सम्पर्क साधा जा सकता है जो ‘आर्थिक सामाजिक विकास में सहायक है।
  6. वैश्वीकरण में वृद्धि – संचार साधनों के माध्यम से देश-विदेश के समाचारों, घटनाओं, परिघटनाओं को घर बैठे ही सुना एवं देखा जा सकता है। इन साधनों ने वैश्वीकरण के द्वार खोल दिए हैं। इनके माध्यम से हम अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आत्मनिर्भर हो सकते हैं।
(ii) पिछले पन्द्रह वर्षों में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रवृत्ति पर एक लेख लिखें।
उत्तर – भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में पिछले पन्द्रह वर्षों में भारी बदलाव आया है। परिवर्तन की इस प्रवृत्ति को निम्नलिखित रूप से देखा जा सकता है –
  1. पहले भारत वस्तुओं का ही आदान-प्रदान करता था परन्तु अब सूचनाओं, ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान में वृद्धि हुई है।
  2. आज भारत अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सॉफ्टवेयर महाशक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है।
  3. वर्तमान में भारत सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से अत्यधिक मात्रा में विदेशी मुद्रा का अर्जन कर रहा है।
  4. पूर्व में भारत कच्चे माल का निर्यात अधिक करता था परन्तु अब औद्योगीकरण में प्रगति होने के कारण विदेशों को तैयार माल अधिक भेजा लाने लगा है।
  5. आज भारत कृषि उत्पादों का आवश्यकता से अधिक उत्पादन करने के कारण इसका निर्यात कर रहा है।
  6. पिछले कुछ वर्षों में भारत के निर्यात व्यापार में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। विगत वर्षों में जिन वस्तुओं का निर्यात लगातार बढ़ रहा है उनमें कृषि उत्पाद, खनिज व अयस्क, रत्न व जवाहरात, रसायन व सम्बन्धित उत्पाद, इन्जीनियरिंग सामान व पेट्रोलियम उत्पाद आदि प्रमुख हैं।
  7. भारत में पेट्रोलियम की माँग निरन्तर बढ़ते जाने के कारण आयातित पेट्रोलियम एवं पेट्रोलियम उत्पादों की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है।
    अन्य आयातित वस्तुओं में मोती व बहुमूल्य रत्न, अकार्बनिक रसायन, कोयला, कोक व कोयले का गोला, मशीनरी आदि शामिल हैं।
  8. उर्वरकों, खाद्यान्न, वनस्पति तेल व छपाई मशीनों के आयात में वृद्धि हुई है।
  9. भारत सरकार ने निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए करों में अनेक रियायतों का प्रावधान किया है तथा निजी क्षेत्र को प्राथमिकता दी है।
  10. भारतीय अर्थव्यवस्था में उदारीकरण व आर्थिक सुधारों को अपनाया गया है। इसमें अल्पकालीन व दीर्घकालीन उपाय करके मूल्य स्थिरता, उद्योग, विदेशी व्यापार, राजकोषीय प्रबन्धन, बैंकिंग, बीमा, वित्तीय क्षेत्र, कर प्रणाली आदि क्षेत्रों में आवश्यक परिवर्तन किए गए तथा वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास किया गया।
  11. विश्व व्यापार संगठन से किए गए वायदे के अनुरूप भारत ने आयात शुल्क में कमी कर अनेक वस्तुओं पर मात्रात्मक प्रतिबन्ध हटा दिए हैं।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
• विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – भारत की विभिन्न प्रकार की सड़कों का वर्णन कीजिए ।
उत्तर— भारत में सड़क मार्ग के प्रकार
सड़कें राष्ट्रीय समृद्धि के विशाल भवन की आधारशिला हैं। कृषि, उद्योग, व्यापार, वाणिज्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और प्रतिरक्षा के विकास हेतु सड़क परिवहन का विकसित होना नितान्त आवश्यक है। निर्माण एवं सड़क प्रबन्धन के आधार पर भारत में सामान्यतः चार प्रकार के सड़क मार्ग पाए जाते हैं—
  1. राष्ट्रीय राजमार्ग – राष्ट्रीय राजमार्ग देश के दूरस्थ भागों को जोड़ते हैं। ये प्राथमिक सड़क तन्त्र हैं जिनका निर्माण व रख-रखाव केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के अधिकार क्षेत्र में है। इन मार्गों की पहचान राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या के आधार पर की जाती है; जैसे दिल्ली व अमृतसर के मध्य ऐतिहासिक शेरशाह सूरी मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-1 के नाम से जाना जाता है (चित्र 7.1)।
  2. राज्य के राजमार्ग-इन राजमार्गों का निर्माण व रख-रखाव तथा देखभाल का कार्य राज्य एवं केन्द्रशासित सरकारें करती हैं। भारत के समस्त राज्य के राजमार्गों की लम्बाई 1,55,716 किमी है। ये राजमार्ग राज्य की राजधानियों को जिला मुख्यालयों तथा अन्य महत्त्वपूर्ण नगरों से जोड़ते हैं। इन सड़क मार्गों पर लगभग एक लाख बसें दौड़ती हैं और 8.3 लाख लोगों को आजीविका की सुविधा प्राप्त होती है।
  3. जिलों की सड़कें – जिलों में निर्मित सड़कों की देखभाल एवं रख-रखाव जिला प्रशासन करता है। ये सड़कें जिला मुख्यालयों को जिले की तहसीलों, प्रमुख नगरीय केन्द्रों तथा कस्बों से जोड़ती हैं।
  4. स्थानीय सड़कें — नगरों, कस्बों एवं गाँवों में सड़कों की देखरेख स्थानीय संस्थाओं – जिला परिषद्, नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद्, खण्ड विकास और ग्राम पंचायतों द्वारा की जाती है। ये ग्रामीण सड़कें कहलाती हैं।
प्रश्न 2 – भारतीय सड़क परिवहन समस्याओं से ग्रसित है। किन्हीं छह समस्याओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर- भारतीय सड़क परिवहन की समस्याएँ
भारतीय सड़क परिवहन अनेक समस्याओं से ग्रसित है। देश में सड़क परिवहन की अनेक समस्याएँ हैं जिन्हें निम्न रूपों में प्रस्तुत किया जा सकता है— भारत में अधिकांश सड़कें इकहरी और ऊँची-नीची हैं, जिन पर | दुर्घटना अधिक होती है तथा वाहन शीघ्र खराब हो जाते हैं, फलस्वरूप ईंधन भी अधिक खर्च होता है। यहाँ सड़कों पर मोड़ बहुत ही अधिक हैं। एक अनुमान के अनुसार यदि भारत की सड़कों से मोड़ समाप्त कर उन्हें सीधा कर दिया जाए तो परिवहन व्यय में प्रतिवर्ष 15 अरब रुपये की महा बचत की जा सकती है।
संक्षेप में, देश में सड़क परिवहन की छह प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं-
  1. भारत में यात्रियों की बढ़ती संख्या और माल ढुलाई की मात्रा को देखते हुए सड़क जाल अपेक्षाकृत कम विकसित हुआ है।
  2. देश में लगभग आधे सड़क मार्ग इकहरे एवं कच्चे हैं जो वाहन संचालन के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
  3. वर्षाकाल में कच्ची सड़कें कीचड़युक्त हो वाहनों के लिए अनुपयोगी हो जाती हैं। इन पर प्रतिपल दुर्घटना का भय बना रहता है तथा अधिकांश वाहन खराब होकर बीच सड़क मार्ग में ही अपना पड़ाव डाल लेते हैं और स्वयं ही दुर्घटनाओं को निमन्त्रण देते हैं।
  4. भारत में अधिकांश सड़क मार्ग संकरे हैं जिन पर दो वाहन एक-साथ पार करने कठिन हो जाते हैं। इससे दुर्घटना में वृद्धि होती है।
  5. देश के अधिकांश नगरों में ट्रक टर्मिनल और ट्रांसपोर्ट नगरों के विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। नगरों के भीतरी भागों में बस टर्मिनल स्थापित किए गए हैं जिस कारण वाहनों की भीड़ के कारण समय अधिक नष्ट करना पड़ता है।
  6. राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों के भार क्षमता से अधिक (ओवरलोड) होने के कारण सदैव दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और घण्टों जाम की स्थिति बनी रहती है। यात्रियों को मजबूरीवश धन एवं समय का अपव्यय करना पड़ता है।
प्रश्न 3 – भारत में रेलों के जाल के असमान वितरण के लिए उत्तरदायी भू-आकृतिक तथा आर्थिक कारकों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- भारत में रेलजाल के असमान वितरण के लिए उत्तरदायी भू-आकृतिक तथा आर्थिक कारक
भारत में रेलजाल के असमान वितरण के लिए भू-आकृतिक तथा आर्थिक कारक उत्तरदायी रहे हैं। अधिकांश रेलमार्गों का निर्माण एवं विकास सघन जनसंख्या के मैदानी क्षेत्रों, कृषि की सघनता, खनिजों एवं उद्योग बाहुल्य क्षेत्रों में हुआ है। अतः उत्तरी मैदान की समतल व उर्वर भूमि, सघन जनसंख्या, उन्नत कृषि एवं उद्योगों और सामाजिक-आर्थिक व सांस्कृतिक विकास ने रेलजाल को सघन रूप में विकसित किया है। परन्तु असम एवं बिहार की बाढ़ से प्रभावित नदियों की घाटियों में रेलजाल बहुत ही विरल है। प्रायद्वीपीय पठारी भारत में गुजरात एवं तमिलनाडु में अन्य भागों की तुलना में मध्यम सघन रेल जाल विकसित हुआ है। पहाड़ी एवं पठारी भागों में जनसंख्या का घनत्व भी कम पाया जाता है और रेल की पटरियाँ बिछाना भी मैदानी भागों की अपेक्षा अधिक खर्चीला है। इसी कारण इन क्षेत्रों में रेल – जाल की सघनता नहीं पायी जाती है बल्कि उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तो रेलमार्गों का निर्माण करना व्ययसाध्य साथ-साथ बड़ा ही दुष्कर है। यहाँ रेलमार्गों के निर्माण में बीच-बीच में टनल का निर्माण करना पड़ता है जो बहुत ही कठिन कार्य है। भारत के पठारी भागों में खनिज बहुलता वाले क्षेत्रों और बन्दरगाहों को जोड़ने के लिए सघन रेलमार्गों का विकास हुआ है; उदाहरण के लिए – मुम्बई-चेन्नई, चेन्नई-कोच्चि, चेन्नई-दिल्ली और चेन्नई हैदराबाद के बीच सक्षम रेल सेवा उपलब्ध है। इसी प्रकार पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र, हिमालय पर्वत के विषम उच्चावच, पूर्वोत्तर राज्यों में पर्वतीय धरातल एवं सघन वनों तथा विरल जनसंख्या के कारण रेलजाल बहुत विरल है। पूर्वीतटीय डेल्टाई प्रदेशों की समृद्ध कृषि के कारण कोलकाता एवं चेन्नई के बीच प्रमुख रेलमार्ग निर्मित किया गया है, जबकि पश्चिमी तट पर संकरे मैदान में मुम्बई से वास्को-डि-गामा होते हुए कन्याकुमारी तक कोंकण रेलवे लाइन का निर्माण पूरा कर लिया गया है और रेलगाड़ियों का संचालन आरम्भ कर दिया गया है।
प्रश्न 4 – भारत में वायु परिवहन की महत्ता को स्पष्ट करने वाले छह बिन्दुओं की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर- भारत में वायु परिवहन
भारत के विशाल आकार, अनुकूल जलवायु तथा विषम धरातल के कारण देश में वायुमार्गों का विकास तीव्र गति से हुआ है। आधुनिक हवाई उड़ान 1911 ई० में आरम्भ हुई थी। वायुमार्गों की लम्बाई की दृष्टि से परिवहन साधनों में वायु परिवहन सबसे तीव्रगामी साधन है। देश में पहली भारत का विश्व में चौथा स्थान है। वायु मार्गों ने देश के विभिन्न छोरों को मिलाकर देश में पारस्परिक दूरी को कम कर दिया है तथा सम्पूर्ण देश में राष्ट्रीय एकता की भावना को उत्पन्न किया है।
वायु परिवहन की महत्ता
  1. भारत के विशाल आकार को देखते हुए वायु परिवहन ने दूरियों को घटा दिया है। दूसरे शब्दों में, इस परिवहन सेवा द्वारा कम समय में गन्तव्य तक पहुँचा जा सकता है। अतः देश को एकता के सूत्र में बाँधे रखने में वायु परिवहन का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
  2. वायु परिवहन ने देश के सभी छोरों को परस्पर मिलाकर देश की पारस्परिक दूरी को कम कर दिया है अर्थात् लम्बी दूरी की यात्रा के लिए यह परिवहन का सबसे उपयुक्त साधन है।
  3. दुर्गम वन क्षेत्रों तथा मरुस्थलीय क्षेत्रों को पार करने के लिए वायु परिवहन सबसे उपयुक्त रहता है। शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं को मँगाने या विदेशों में भेजने के लिए वायु परिवहन ही उपयोगी है।
  4. वायु परिवहन सबसे आरामदायक साधन है। यद्यपि अन्य संसाधनों की अपेक्षा यह साधन महँगा पड़ता है, परन्तु त्वरित सेवाएँ प्रदान करने में इसकी महत्ता को किसी भी प्रकार कम नहीं आँका जा सकता है।
  5. अधिकांशत: अन्तर्राष्ट्रीय परिवहन विमानों की सहायता से ही सम्पन्न किया जाता है। प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक, वैज्ञानिक, चिकित्सक, राजनयिक, चिन्तक, सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यकर्त्ता, विद्यार्थी आदि भारत से विदेशों में तथा विदेशों से भारत की उड़ान भरते हैं। इस प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अन्य देशों से भारत के सम्बन्ध प्रगाढ़ हुए हैं।
  6. वायु परिवहन सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत उपयोगी है। अन्य परिवहन साधनों की तुलना में वायु परिवहन में दुर्घटना का भय भी कम रहता है। इसके साथ ही यात्रियों की सुरक्षा का बीमा भी रहता है।
इस प्रकार वायु परिवहन अन्य साधनों की अपेक्षा अधिक उपयोगी है।
प्रश्न 5– भारत में विभिन्न प्रकार की जनसंचार प्रणालियों का वर्णन कीजिए।
अथवा प्रभावशाली जनसंचार माध्यम के रूप में रेडियो और दूरदर्शन की भूमिका स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर— भारत में जनसंचार के माध्यम
जनसंचार के माध्यम राष्ट्रीय कार्यक्रमों और नीतियों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके लिए मुद्रण माध्यम (समाचार-पत्र, पत्र-पत्रिकाएँ, पुस्तकें तथा फिल्में ) और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (आकाशवाणी / रेडियो एवं दूरदर्शन) का उपयोग किया जाता है। सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय देश में सूचना एवं प्रसारण के विकास तथा नियमन के लिए उत्तरदायी है। इन साधनों के माध्यम से एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को जानकारी या मनोरंजन प्राप्त होता है। इसी कारण इन्हें जनसंचार का माध्यम कहा जाता है। इनका विवरण निम्नलिखित है—
  1. आकाशवाणी – आकाशवाणी ‘बहुजन हिताय, बहुजन ‘सुखाय’ के लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कार्य करती है। देश में रेडियो सेटों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। एफ०एम० सहित रेडियो सेटों की संख्या में वृद्धि एफ०एम० सेवा की लोकप्रियता का संकेत है। उपग्रह एवं केबिल टेलीविजन के प्रसार के साथ-साथ बड़े नगरों में रेडियो श्रोताओं की संख्या में कमी आई है। परन्तु सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में रेडियो आज भी मनोरंजन एवं सूचना का एकमात्र स्रोत बना हुआ है।
  2. दूरदर्शन – भारत की राष्ट्रीय प्रसार सेवा विश्व के सबसे बड़े स्थानीय संगठनों में से एक है। भारत सदृश विकासशील देश में दूरदर्शन का विशेष महत्त्व है। सरकार ने इस तथ्य को भली-भाँति समझा है कि सूचनाओं के सम्प्रेषण और जन-समुदाय को शिक्षित करने में श्रव्य-दृश्य माध्यम सर्वाधिक कारगर तथा सक्षम उपायों में से एक है।
    दूरदर्शन द्वारा देश में विविध प्रकार के कार्यक्रमों के प्रसारण के लिए विभिन्न चैनलों का उपयोग किया जाता है।
  3. मुद्रण – भारत में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में समाचार-पत्रों तथा पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन होता है। इनकी कुल संख्या लगभग 50,000 है। अवधि के आधार पर ये पत्रिकाएँ विभिन्न प्रकार की (दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक एवं मासिक) हैं। लगभग 100 भाषाओं और बोलियों में समाचार पत्र-पत्रिकाएँ हैं। सर्वाधिक समाचार-पत्र हिन्दी भाषा में प्रकाशित किए जाते हैं। इसके बाद अंग्रेजी का स्थान आता है।
  4. चलचित्र — संसार में भारत चलचित्रों का सबसे बड़ा उत्पादक देश है । चलचित्रों के अतिरिक्त भारत में लघु फिल्में, वीडियो फीचर फिल्में तथा वीडियो लघु फिल्में भी तैयार की जाती हैं। भारतीय तथा विदेशी फिल्म केन्द्रीय फिल्म प्रामाणिक बोर्ड द्वारा प्रमाणित की जाती हैं, तत्पश्चात् ही उनका प्रसारण किया जाता है।
• लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – स्वर्णिम चतुर्भुज महाराजमार्ग से आप क्या समझते हैं? वर्णन कीजिए।
अथवा स्वर्णिम चतुर्भुज महाराजमार्ग से जुड़ने वाले चार प्रमुख नगरों के नाम लिखिए।
अथवा स्वर्णिम चतुर्भुज महाराजमार्ग परियोजना का लक्ष्य क्या है? यह परियोजना किसके अधिकार क्षेत्र में है? इस परियोजना से सम्बन्धित दो गलियारे कौन-कौन से हैं?
उत्तर— देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने व्यापक राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम (NHDP) आरम्भ किया है। यह परियोजना है। देश के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National एन०एच०डी०पी० परियोजना देश में चलाई गई अब तक की सबसे बड़ी परियोजना के द्वारा लगभग 14,279 किमी लम्बी सड़कों को 4 से 6 लेन Highways Authority of India–NHAI) द्वारा चलाई जा रही इस वाले राष्ट्रीय राजमार्ग में विकसित करने का प्रावधान किया गया है। इसके | द्वारा चार महानगरों – दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों से सम्बद्ध स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना (Golden Quadriangle Project) द्वारा जोड़ा जा रहा है।
दूसरे कार्यक्रम में उत्तर-दक्षिण मार्ग (कॉरिडोर), जिसमें कोच्चिसेलमपुर मार्ग सहित श्रीनगर को कन्याकुमारी से जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग और सिलचर को पोरबन्दर से जोड़ने वाला पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर सम्मिलित है। इन विस्तृत राजमार्गों के बन जाने से भारत के महानगरों के बीच की दूरी काफी घट जाएगी और यात्रा करने में भी कम समय लगेगा।
प्रश्न 2- -पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के परिवहन में पाइप लाइनों के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर- पूर्व में पाइप लाइनों का उपयोग नगरों और उद्योगों के लिए जल की आपूर्ति हेतु किया जाता था। परन्तु आज इनका उपयोग कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के परिवहन में किया जा रहा है। उत्पादन क्षेत्रों से इन्हें पाइप लाइनों द्वारा परिष्करणशालाओं, उर्वरक कारखानों और बड़े ताप विद्युत केन्द्रों में ले जाया जाता है। इस प्रकार के ताप केन्द्रों को अल्प समय में ही उपभोक्ता क्षेत्रों में स्थापित किया जा सकता है। इस प्रकार पाइप लाइन परिवहन से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के परिवहन में बड़ी सुविधा हो गई है। बरौनी एवं मथुरा तथा पानीपत की परिष्करणशालाएं पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस उत्पादक क्षेत्रों और समुद्रतटीय क्षेत्रों से पर्याप्त दूरी पर स्थापित की गई हैं। देश में रासायनिक संयन्त्रों के स्थापन की भी लगभग ऐसी ही स्थिति है। अतः तेल परिष्करणशालाएँ और रासायनिक संयन्त्र इतनी दूरी पर इसी कारण स्थापित किए जा सके हैं कि इन केन्द्रों पर कच्चे माल की आपूर्ति के लिए पाइप लाइनें बिछाई गई हैं। पाइप लाइनों के बिछाने में तो भारी व्यय करना पड़ता है, परन्तु इनके संचालन में बहुत कम व्यय करना पड़ता है। इस परिवहन में न तो समय ही नष्ट होता है तथा न ही माल के हानि होने की कोई सम्भावना रहती है।
प्रश्न 3 – भारतीय रेलवे की कुछ विशिष्ट समस्याओं का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर— भारतीय रेलवे की कुछ विशिष्ट समस्याएँ निम्नलिखित हैं-
  1. भारतीय रेलवे की बड़ी समस्या इसके ब्रॉडगेज और मीटर गेज होने से माल के स्थानान्तरण की कठिनाई का होना है।
  2. विद्युतीकृत (केवल 36% ) मार्गों की कमी के कारण गति एवं भार वहन क्षमता की कमी का होना है।
  3. कण्टेनर सेवा बहुत कम मार्गों पर उपलब्ध है।
  4. रेल पथों एवं रेल इंजनों तथा रेल डिब्बों का जर्जर हालत में होना और रेलों में सफाई, जल, प्रकाश आदि की व्यवस्था का अभाव होना।
  5. रेलमार्गों का विस्तार धीमी गति से होना ।
प्रश्न 4 – सड़क परिवहन रेल परिवहन की अपेक्षा किस प्रकार अधिक लाभप्रद है?
उत्तर— सड़क परिवहन रेल परिवहन की अपेक्षा अधिक उपयोगी एवं लाभप्रद सिद्ध हुआ है जिसे निम्नलिखित तथ्यों द्वारा समझा जा सकता है-
  1. सड़क मार्गों का निर्माण रेलमार्गों की अपेक्षा सस्ता पड़ता है।
  2. किसी भी प्रकार की भू-आकृति – पर्वतीय, पठारी, मैदानी, मरुस्थलीय, ऊँची-नीची, ढालू तथा बीहड़ क्षेत्रों में सड़क मार्गों का निर्माण सम्भव है, जबकि रेलमार्गों को उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में नहीं बनाया जा सकता है।
  3. सड़क परिवहन यात्री को उसके दरवाजे (गन्तव्य) तक छोड़ सकता है, जबकि रेलें अपने निर्धारित स्टेशनों पर ही रुकती हैं।
  4. सड़कों के माध्यम से निर्माण केन्द्रों में उत्पादित अनेक वस्तुएँ उपभोक्ताओं तक प्रत्यक्ष रूप में पहुँचा दी जाती हैं। इसमें माल को बार-बार लादना – उतारना नहीं पड़ता है। इसके विपरीत रेलमार्गों द्वारा उपभोक्ताओं को विभिन्न वस्तुएँ उपलब्ध कराने के लिए निर्माण केन्द्रों से माल स्टेशन तक पहुँचाने और स्टेशन से गन्तव्य तक भेजने में बार-बार लादना एवं उतारना पड़ता है जिससे वस्तुओं के टूटने-फूटने का भय बना रहता है और समय एवं धन भी अधिक नष्ट होता है।
  5. शीघ्र खराब होने वाले पदार्थों को गन्तव्य तक पहुँचाने में सड़क मार्ग, रेलमार्ग की तुलना में अधिक उपयोगी है।
  6. रेलों द्वारा ढोए गए माल को उच्च पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँचाने में सड़क मार्गों का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। अतः रेलों द्वारा ढोए गए माल को सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँचाने का कार्य सड़क मार्गों द्वारा ही सम्पन्न किया जाता है।
प्रश्न 5-गाँवों के आर्थिक विकास में सड़कों के योगदान के चार पहलुओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर — गाँवों के आर्थिक विकास में सड़कों के चार योगदान निम्नांकित हैं-
  1. गाँवों में सड़कों के निर्माण से कृषक अपने अतिरिक्त उत्पादों को कृषि मण्डियों (बाजार केन्द्र) तक ले जाने लगे हैं, जिससे उन्हें अपनी उपजों का लाभकारी मूल्य प्राप्त होने लगा है और उनके आर्थिक स्तर में वृद्धि सम्भव हुई है।
  2. ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क मार्गों के विकास से कृषि उत्पादों में पर्याप्त वृद्धि हुई है, क्योंकि कृषक समय पर नवीन व सुधरे हुए परिष्कृत बीज, रासायनिक उर्वरक, कीट, कृमि, अपत्रण-नाशक पदार्थों को बाजारों से क्रय कर सकते हैं। फलस्वरूप फसलों का उत्पादन भी यथेष्ट मात्रा में होने लगा है। हरित क्रान्ति की सफलता में भी सड़क मार्गों की प्रमुख भागीदारी है।
  3. सड़क मार्गों द्वारा ग्रामवासियों को अपने खण्ड विकास मुख्यालयों, सामुदायिक विकास केन्द्रों, तहसील व जिला मुख्यालय, बैंकों, विपणन संस्थाओं, भूमि विकास केन्द्रों आदि से सम्पर्क करने में सुविधा प्राप्त हुई है।
  4. सड़कें कृषकों को अपना गन्ना शुगर मिल तक पहुँचाने सहायक सिद्ध हुई हैं, जिससे उन्हें अपने उत्पाद का अधिक मूल्य प्राप्त होने लगा है। कृषक अब पारम्परिक कृषि को छोड़कर व्यापारिक फसलों का उत्पादन करने लगे हैं। नए कृषि यन्त्रों एवं उपकरणों के प्रयोग से उत्पादन आशातीत वृद्धि हुई है।
प्रश्न 6- देश के आर्थिक विकास में रेलों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – रेल, परिवहन का प्रमुख साधन होने के साथ-साथ देश के आर्थिक विकास में प्रमुख भूमिका का निर्वाह कर रही है। भारतीय रेल व्यवस्था एशिया में पहला तथा विश्व में चौथा स्थान रखती है और देश में 80% सामान का परिवहन रेलों द्वारा किया जाता है। देश के आर्थिक विकास में रेलों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसे निम्नलिखित तथ्यों द्वारा समझा जा सकता है-
  1. रेलों का संचालन औद्योगीकरण, नगरीकरण तथा सामाजिक विकास में बहुत सहायक सिद्ध हुआ है।
  2. रेलों ने कृषि उपजों के विकास में बहुत योगदान दिया है। अतिरिक्त कृषि उत्पादों को रेलों द्वारा दूरवर्ती भागों तक भेजना सम्भव हुआ है, क्योंकि कृषि उत्पादन में वृद्धि उर्वरकों, उत्तम बीज, नए कृषि यन्त्रों व उपकरणों तथा कीटनाशकों के अधिकाधिक उपयोग का प्रतिफल है जो रेलों द्वारा ही ढोए जाते हैं।
  3. रेलों द्वारा कच्चा माल कल-कारखानों तक तथा तैयार माल उपभोक्ताओं एवं बन्दरगाहों तक सुगमतापूर्वक कम व्यय में भेजना सम्भव हुआ है।
  4. रेल विभाग अनेक लोगों को आजीविका के साधन प्रदान कर प्रति व्यक्ति आय तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि करता है।
  5. रेलों द्वारा देश के आन्तरिक भागों में तथा अन्तर्प्रान्तीय व्यापार में प्रोत्साहन मिलता है।
प्रश्न 7 – भारत के किस भाग में सड़क तथा रेल परिवहन की अपेक्षा वायु परिवहन सस्ता पड़ता है?
उत्तर – वायु परिवहन, परिवहन का एक ऐसा साधन है जो सबसे महँगा, तीव्र गति वाला और सबसे आरामदेह साधन है । परन्तु उच्च पर्वतीय क्षेत्रों, ऊबड़-खाबड़ स्थलाकृतिक क्षेत्रों, सुनसान एवं विस्तृत मरुस्थलीय क्षेत्रों, सघन वनों तथा गहरे महासागरीय क्षेत्रों में यह रेल एवं सड़क परिवहन की अपेक्षा सुगम एवं सस्ता पड़ता है । उदाहरण के लिए – भारत “के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में सड़क एवं रेल परिवहन की तुलना में वायु परिवहन अधिक महत्त्वपूर्ण और लोकप्रिय है, क्योंकि यह उच्च पर्वतीय क्षेत्र अत्यधिक ऊबड़-खाबड़ तथा सघन वनों से आच्छादित है । इस प्रकार भारत का उत्तर-पूर्वी सीमान्त क्षेत्र ऊबड़-खाबड़ उच्च पर्वत श्रेणियाँ, सघन वनों, बाढ़ग्रस्त तथा अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं से युक्त है जो सड़क एवं रेल परिवहन में सबसे बड़ी बाधाएँ हैं। इसी कारण इस क्षेत्र में सड़क एवं रेल परिवहन की अपेक्षा वायु परिवहन सुगम एवं सस्ता पड़ता है।
प्रश्न 8 – परिवहन एवं संचार के विभिन्न साधनों का अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है? पाँच तर्क दीजिए।
उत्तर – परिवहन एवं संचार के साधन किसी राष्ट्र में एक ऐसा यान्त्रिक संगठन खड़ा कर देते हैं, जो लोगों की गतिशीलता, माल का द्रुतगामी परिवहन तथा समाचारों के आदान-प्रदान में सहायक होता है। यदि कृषि एवं उद्योग-धन्धे किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास में शरीर एवं हड्डियों की भाँति कार्य करते हैं तो परिवहन एवं संचार के साधन धमनियों एवं शिराओं की भाँति कार्य करते हैं। संक्षेप में इनकी महत्ता को निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है—
  1. परिवहन के साधन कच्चे माल को कारखानों तक तथा वहाँ पर निर्मित माल को उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का कार्य करते हैं।
  2. सड़क, रेल, जल एवं वायुमार्ग परिवहन के प्रमुख साधन हैं, जबकि डाक-तार, रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल, पेजर, वायरलैस, दूरभाष, कृत्रिम उपग्रह आदि संचार के विभिन्न साधन हैं जिन्होंने भावनात्मक एकता को बनाए रखकर देश में आर्थिक विकास की गति को बढ़ाया है।
  3. परिवहन एवं संचार के साधन उत्पादन एवं वितरण में सहायक हैं। इनसे जनता की गतिशीलता में वृद्धि होती है।
  4. ये साधन देश के आर्थिक जीवन को एकता के सूत्र में बाँधे हुए हैं। तथा अकाल, महामारियों और युद्ध के समय अपनी सेवाओं के माध्यम से उनसे छुटकारा दिलाने में सहायक हुए हैं।
  5. राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ हुई है तथा आर्थिक विकास की गति में भी तीव्रता आई है।
प्रश्न 9 – आधुनिक समय में वायु परिवहन अधिक उपयोगी क्यों है? तीन बिन्दु बताइए ।
उत्तर – आधुनिक समय में वायु परिवहन की उपयोगिता में निरन्तर वृद्धि होती जा रही है, जिसके निम्नलिखित कारण हैं-
  1. वायु परिवहन एक तीव्रगामी परिवहन का साधन है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिन स्थानों पर जल एवं थल परिवहन द्वारा पहुँच पाना असम्भव है, वहाँ वायु परिवहन द्वारा सुगमता से पहुँचा जा सकता है।
  2. द्रुतगामी परिवहन का साधन होने के कारण इससे समय की पर्याप्त बचत होती है। उदाहरण के लिए — तीव्र गति वाली राजधानी एक्सप्रेस द्वारा दिल्ली से मुम्बई की यात्रा में कम-से-कम 17 घण्टे का समय लगता है जबकि वायुयान द्वारा यह दूरी मात्र 2 घण्टे से भी कम समय में पूरी कर ली जाती है। इस प्रकार वायुयान आज यात्रा का न केवल तीव्रगति वाला साधन है, वरन् सबसे आरामदायक भी है।
  3. आपातकाल में वायुयान की उपादेयता में और भी अधिक वृद्धि हो जाती है। सूखा, बाढ़, महामारी, भूस्खलन, भूकम्प आदि प्राकृतिक आपदाओं और युद्ध के समय आवश्यक खाद्य सामग्री, सहायता सामग्री और सैन्य सामग्री को युद्धस्थलों तक पहुँचाने में वायु परिवहन ही कारगर हो सकता है। देश की सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित एवं सुव्यवस्थित करने में इसका महत्त्व और भी बढ़ जाता है।
प्रश्न 10 – अन्तर स्पष्ट कीजिए-
व्यक्तिगत संचार और जनसंचार के साधन । 
उत्तर- व्यक्तिगत संचार और जनसंचार के साधन में अन्तर
व्यक्तिगत संचार जनसंचार
  1. व्यक्तिगत लिखित संचार व्यवस्था का संचालन भारतीय डाक-तार विभाग करता है, जबकि इसका उत्तरदायित्व संचार मन्त्रालय का है।
  2. इसके अन्तर्गत डाक सेवा एवं टेलीफोन को सम्मिलित किया जाता है।
  3. पोस्टकार्ड एवं लिफाफे प्रथम स्तर की सेवा कहलाती हैं।
  4. पुस्तकों के बण्डल, पंजीकृत समाचार-पत्र तथा साप्ताहिक व पाक्षिक और मासिक पत्र दूसरे स्तर की डाक सेवा है।
  5. नगरों और बड़े कस्बों में डाक को शीघ्र पहुँचाने के लिए डाक निकासी के छह चैनल बनाए गए हैं। निजी कम्पनियों के प्रवेश के कारण संचार में क्रान्ति आ गई है।
  1. जनसंचार में मुद्रण माध्यम एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यम सम्मिलित हैं। सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय देश में सूचना एवं प्रसारण के विकास एवं नियमन के लिए उत्तरदायी है।
  2. इसमें रेडियो, दूरदर्शन, समाचार – पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें एवं फिल्मों को सम्मिलित किया जाता है।
  3. रेडियो एवं टेलीविजन से समाचारों का प्रसारण प्रथम स्तर की सेवा है।
  4. आकाशवाणी एवं दूरदर्शन ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ के लक्ष्य पर ध्यान करती है और मनोरंजन के साथ-साथ अन्य अनेक कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है।
  5. प्रसार भारती, भारत का स्वायत्त प्रसारण निगम है। यह निगम अब देश में संचार के इलेक्ट्रॉनिक माध्यम रेडियो व दूरदर्शन का नियन्त्रण करता है।
प्रश्न 11 – भारत के परिवहन और संचार के साधनों पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर – भारत के परिवहन और संचार के साधनों का विवरण निम्नलिखित है-
(क) भारत में परिवहन के साधन — परिवहन के साधनों को सामान्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है— स्थल, जल और वायु। स्थल परिवहन के अन्तर्गत सड़क एवं रेलमार्ग सम्मिलित हैं। जल परिवहन के भी वर्ग हैं— (i) नदियाँ या अन्तःस्थलीय जल परिवहन एवं (ii) सागरीय या महासागरीय परिवहन । वायु परिवहन, परिवहन का आधुनिकतम | तीव्रतम साधन है। दो
(ख) भारत में संचार के साधन-संचार के साधनों को उनके उपभोक्ताओं के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है— (i) व्यक्तिगत तथा (ii) जनसंचार |
व्यक्तिगत संचार के साधनों के अन्तर्गत डाक-तार अर्थात् पोस्टकार्ड, पत्र, टेलीग्राम, टेलीफोन और अब इण्टरनेट आ गया है। इनका उत्तरदायित्व संचार मन्त्रालय का है। जन-संचार के अन्तर्गत मुद्रण एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यम सम्मिलित हैं। दूसरे शब्दों में, मुद्रण के अन्तर्गत — पुस्तकें, समाचार-पत्र, पत्र-पत्रिकाएँ सम्मिलित हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के अन्तर्गत रेडियो, टेलीविजन (दूरदर्शन) एवं चलचित्र आदि सम्मिलित हैं। अब कम्प्यूटर को भी इसी के अन्तर्गत सम्मिलित किया जाता है। इनके विकास एवं नियमन का उत्तरदायित्व केन्द्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय का है।
प्रश्न 12 – व्यापार सन्तुलन क्या है? स्पष्ट उल्लेख कीजिए ।
उत्तर – आयात एवं निर्यात मिलकर किसी देश के विदेश व्यापार की रचना करते हैं। इन दोनों (आयात एवं निर्यात) के अन्तर को व्यापार सन्तुलन कहा जाता है। व्यापार सन्तुलन पक्ष एवं विपक्ष दोनों में हो सकता है। यदि आयात की अपेक्षा निर्यात की मात्रा अधिक है तो व्यापार सन्तुलन पक्ष में अर्थात् अनुकूल रहता है। इसके विपरीत यदि निर्यात की अपेक्षा आयात की मात्रा अधिक है तो व्यापार सन्तुलन विपक्ष में अर्थात् प्रतिकूल रहता है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भारत के विदेश व्यापार का सन्तुलन सदैव प्रतिकूल अवस्था में रहा है। अतः यदि भारत को अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी साख बढ़ानी है और देश को विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में खड़ा करना है तो निश्चित रूप से उसे इस व्यापार घाटे को कम करना होगा तथा विदेश व्यापार को बढ़ाकर उसे अनुकूल स्तर पर स्थापित करना होगा, तभी वह अपनी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर सकता है।
प्रश्न 13 – भारत के विदेश व्यापार की कोई दो विशेषताएँ बताइए |
उत्तर – भारत के विदेश व्यापार की दो विशेषताएँ निम्नलिखित है-
  1. स्वतन्त्रता प्राप्ति से पूर्व भारत कच्चे माल का निर्यात अधिक मात्रा में करता था, परन्तु स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् औद्योगीकरण में प्रगति होने के कारण अब तैयार माल एवं परिशोधित माल विदेशों को निर्यात किया जाने लगा है। खाद्यान्न का आयात बिल्कुल बन्द कर दिया गया है। इसके साथ ही गुणवत्ता वाली वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि की जा रही है। हस्तशिल्प, कला-कौशल, विनिर्मित इलेक्ट्रॉनिक सामान, इंजीनियरिंग आदि के सामान के निर्यात को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
  2. भारत ने विदेश व्यापार में अमेरिका को सबसे बड़ा साझीदार बनाया है। वह अमेरिका को कुल निर्यात का 18% निर्यात करता है तथा कुल आयात में 6% आयात अमेरिका से कर लाभ की स्थिति में रहता है।
• अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – परिवहन क्यों आवश्यक है?
उत्तर – यात्रियों, वस्तुओं, विभिन्न उत्पादों तथा समाचारों आदि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने-ले जाने के लिए परिवहन आवश्यक है ।
प्रश्न 2 – परिवहन के पाँच साधनों के नाम बताइए ।
उत्तर- परिवहन के पाँच साधनों के नाम निम्नलिखित हैं-
(1) सड़क मार्ग, (2) रेलमार्ग, (3) पाइप लाइनें, (4) जलमार्ग, तथा (5) वायुमार्ग ।
प्रश्न 3 – जीवन के लिए संचार के साधन क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर— संचार के साधन मानव जीवन के लिए अत्यावश्यक हैं। पारस्परिक सम्पर्क बनाए रखने के लिए और मानव के संचलन में वृद्धि के लिए संचार के साधनों का उपयोग आज सबसे बड़ी अनिवार्यता है । टेलीफोन, टेलीविजन, फिल्म और इण्टरनेट का उपयोग संचार के लिए किया जा रहा है।
प्रश्न 4 – संचार के चार साधनों के नाम लिखिए।
उत्तर – संचार के चार साधन निम्नलिखित हैं-
(1) टेलीफोन, (2) टेलीविजन, (3) फिल्म, एवं (4) इण्टरनेट |
प्रश्न 5 – जनसंचार क्या है?
उत्तर – लोगों तक महत्त्वपूर्ण घटना या किसी समाचार को नियोजित ढंग से पहुँचाना ही जनसंचार है। जनसंचार में माध्यम का होना आवश्यक है। यह कोई सन्देशवाहक, समाचार-पत्र, रेडियो या टेलीविजन कुछ भी हो सकता है।
प्रश्न 6 – स्वर्णिम चतुर्भुज एक्सप्रेस राजमार्ग से जोड़े जाने वाले नगरों के नाम लिखिए।
उत्तर – स्वर्णिम चतुर्भुज एक्सप्रेस राजमार्ग द्वारा चार महानगरों— दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई एवं कोलकाता को जोड़ा गया है।
प्रश्न 7 – भारत के किन्हीं चार अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों के नाम लिखिए।
उत्तर – (1) इन्दिरा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, नई दिल्ली,
(2) सान्ताक्रुज (मुम्बई),
(3) दमदम (कोलकाता), एवं
(4) मीनाम्बक्कम (चेन्नई)।
प्रश्न 8 – भारत के दो अन्तःस्थलीय जलमार्गों के नाम लिखिए।
उत्तर- 1. गंगा नदी जलमार्ग – इलाहाबाद एवं हल्दिया के बीच 1,600 किमी लम्बा जलमार्ग ।
2. ब्रह्मपुत्र नदी जलमार्ग – सदिया एवं धुबरी के बीच 891 किमी लम्बा जलमार्ग ।
प्रश्न 9 – भारत के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख पत्तनों के नाम लिखिए।
उत्तर — (1) हल्दिया (कोलकाता), (2) पारादीप, (3) विशाखापत्तनम, (4) चेन्नई, (5) एन्नौर तथा ( 6 ) तूतीकोरिन |
प्रश्न 10 – उन राज्यों के नाम लिखिए, जिनमें मार्मागाओ, न्यू मंगलौर, पारादीप और तूतीकोरिन पत्तन स्थित हैं।
उत्तर-
पत्तन का नाम सम्बन्धित राज्य
1. मार्मागाओ
2. न्यू मंगल
3. पारादीप
4. तूतीकोरिन
गोवा
कर्नाटक
ओडिशा
तमिलनाडु
प्रश्न 11 – भारत में सड़क परिवहन की दो प्रमुख समस्याएँ लिखिए ।
उत्तर- (1) यात्रियों की अधिक संख्या और माल की ढुलाई की अधिक मात्रा को देखते हुए भारत में सड़क जाल अपेक्षाकृत कम है।
(2) भारत की लगभग 50% सड़कें कच्ची हैं और गड्ढायुक्त हैं, जिस कारण वे परिवहन के योग्य नहीं हैं।
प्रश्न 12 – पाइप लाइन परिवहन के चार लाभ लिखिए।
उत्तर – (1) पाइप लाइनों द्वारा कच्चा तेल दूर स्थित तेल परिष्करणशालाओं और प्राकृतिक गैस उर्वरक संयन्त्रों तक आसानी से पहुँचाया जा सकता है।
(2) पाइप लाइन परिवहन द्वारा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस की बरबादी की सम्भावना कम रहती है।
(3) पाइप लाइन परिवहन द्वारा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस की दुलाई सस्ती पड़ती है।
(4) पाइप लाइन को बिछाने में एक बार ही भारी व्यय करना पड़ता है, परन्तु तेल व सड़क मार्गों की भाँति उनके रख-रखाव पर बहुत कम व्यय करना पड़ता है।
प्रश्न 13 – राष्ट्र के आर्थिक विकास पर परिवहन साधनों का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर – राष्ट्र का आर्थिक विकास परिवहन साधनों पर निर्भर करता है। इन साधनों की सहायता से आर्थिक विकास की गति में तीव्रता आती है, क्योंकि यह उत्पादन प्रक्रिया का एक अति आवश्यक अवयव है।
प्रश्न 14 – भारत एवं विश्व की सबसे ऊँची सड़क कौन-सी है ?
उत्तर – भारत एवं विश्व की सबसे ऊँची सड़क मनाली (हिमाचल प्रदेश) और लेह (जम्मू-कश्मीर) के बीच है जिसका विस्तार लद्दाख क्षेत्र में है और समुद्र तल से इसकी ऊँचाई 4,770 मीटर है।
प्रश्न 15 – काण्डला क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर— काण्डला एक ज्वारीय पत्तन है, जिसके विकास को ‘प्रोत्साहन देने के लिए यहाँ एक मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Entrepot) स्थापित किया गया है।
प्रश्न 16 – वायु परिवहन के दो लाभ बताइए ।
उत्तर – वायु परिवहन के दो लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) वायुमार्ग से यात्रा करने पर बहुत कम समय लगता है।
(2) वायुपरिवहन की सहायता से मूल्यवान वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षापूर्वक भेजा जा सकता है।
प्रश्न 17 – विदेश व्यापार से क्या तात्पर्य है ? स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर – एक देश का दूसरे देश से वस्तुओं या मुद्रा के माध्यम से लेन-देन विदेश व्यापार कहलाता है। विदेश व्यापार में आयात एवं निर्यात का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। जो माल देश से बाहर भेजा जाता है, उसे निर्यात व्यापार और जो माल बाहर से मँगाया जाता है, उसे आयात व्यापार कहते हैं।
प्रश्न 18 – न्हावाशेवा पत्तन कहाँ पर स्थित है ?
उत्तर- भारत के पश्चिमी तट पर मुम्बई के निकट न्हावाशेवा नामक नवीन पत्तन (जवाहरलाल नेहरू पत्तन) स्थित है जिसे मुम्बई पत्तन के भार को कम करने के लिए निर्मित किया गया है।
प्रश्न 19 – भारत से निर्यात की जाने वाली दो प्रमुख वस्तुओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर – (1) सूती वस्त्र एवं सिले- सिलाए परिधान (Readymade Garments ), तथा (2) चाय |
• बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1 – ग्राण्ड ट्रंक (जी०टी०) रोड कहाँ से कहाँ तक संचालित होती है-
(अ) दिल्ली-कोलकाता के बीच
(ब) मुम्बई – चेन्नई के बीच
(स) अमृतसर- कोलकाता के बीच
(द) दिल्ली – मुम्बई के बीच ।
उत्तर – (स) अमृतसर- कोलकाता के बीच ।
प्रश्न 2 – ग्रेट दकन रोड कहाँ से कहाँ तक जाती है-
(अ) कोलकाता से अमृतसर
(ब) मिर्जापुर से बंगलुरु
(स) चेन्नई से मुम्बई
(द) पठानकोट से जम्मू।
उत्तर – (ब) मिर्जापुर से बंगलुरु।
प्रश्न 3 – निम्नलिखित में से किस राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों का सबसे बड़ा तन्त्र विद्यमान है—
(अ) आन्ध्र प्रदेश एवं तेलंगाना
(ब) मध्य प्रदेश
(स) उत्तर प्रदेश
(द) बिहार ।
उत्तर- (ब) मध्य प्रदेश ।
प्रश्न 4 – भारत में रेलमार्गों का सबसे बड़ा जाल निम्नलिखित में से किस राज्य में है –
(अ) कर्नाटक
(ब) बिहार
(स) पश्चिम बंगाल
(द) उत्तर प्रदेश।
उत्तर- (द) उत्तर प्रदेश |

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