UK 10th Social Science

UK Board 10th Class Social Science – (राजनीति विज्ञान) – Chapter 6 राजनीतिक दल

UK Board 10th Class Social Science – (राजनीति विज्ञान) – Chapter 6 राजनीतिक दल

UK Board Solutions for Class 10th Social Science – सामाजिक विज्ञान – (राजनीति विज्ञान) – Chapter 6 राजनीतिक दल

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1 – लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों की विभिन्न भूमिकाओं की चर्चा करें।
उत्तर- लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों की भूमिका लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों की विभिन्न भूमिकाओं को निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है—
  1. जनमत का निर्माण करना – जनमत की शक्ति लोकतन्त्र का प्राण है। राजनीतिक दलों द्वारा ही स्वस्थ, प्रबुद्ध तथा जागरूक जनमत का निर्माण किया जाता है। राजनीतिक दल शासन से सम्बन्धित सभी प्रकार की जानकारियाँ जनता को प्रदान करते हैं जो जनमत के निर्माण में सहायक होती हैं।
  2. जनता को राजनीतिक शिक्षा प्रदान करना – राजनीतिक दल अपने विचारों, सिद्धान्तों अथवा गतिविधियों द्वारा जनता को राजनीतिक शिक्षा प्रदान करते हैं। राजनीतिक शिक्षा प्राप्त जनता राजनीति में भाग लेती है।
  3. सरकार का निर्माण करना — राजनीतिक दल स्वयं अथवा अन्य दलों के सहयोग से सरकार का निर्माण करते हैं तथा जनता को सुशासन प्रदान करने का प्रयास करते हैं।
  4. सरकार की आलोचना करना- सरकार का निर्माण सत्तारूढ़ दल द्वारा किया जाता है परन्तु जो सत्ता से वंचित हो जाता है वह विरोधी दल होता है। विरोधी दल सरकार की अनुचित अथवा जन-विरोधी नीतियों एवं कार्यक्रमों की आलोचना करता है तथा लोकतन्त्र की सुरक्षा करता है।
  5. उम्मीदवारों का चयन करना – चुनावों में राजनीतिक दल भाग लेते हैं। वे चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन करते हैं तथा उन्हें दल का चुनाव चिह्न प्रदान किया जाता है।
  6. सदस्यों में एकता स्थापित करना – राजनीतिक दलों का प्रमुख कार्य अपने सदस्यों में एकता एवं सिद्धान्तों के प्रति आस्था बनाए रखना है।
  7. दलों नीतियों तथा कार्यक्रमों का निर्धारण – राजनीतिक दल समय-समय पर अपनी नीतियों तथा कार्यक्रमों की घोषणा जनता के बी करते रहते हैं जिससे उन्हें जन समर्थन प्राप्त होता रहे।
  8. सरकार का विरोध करना — राजनीतिक दल संवैधानिक साधनों जैसे— धरना, प्रदर्शनों, रैलियों, सभाओं तथा हड़तालों द्वारा सरकार की अनुचित नीतियों का विरोध भी करते हैं।
  9. मतदाताओं का मार्गदर्शन करना – राजनीतिक दल चुनाव के समय मतदाताओं का उचित मार्गदर्शन कर उन्हें बताते हैं कि इन्हें किस दल के पक्ष में मतदान करना है।
  10. राष्ट्र का विकास करना — राजनीतिक दल अपनी नीतियों तथा कार्यक्रमों द्वारा राष्ट्र के विकास को नवीन गति तथा दिशा प्रदान करते हैं। राजनीतिक दल राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में विश्वास रखते हैं।
प्रश्न 2 – राजनीतिक दलों के सामने क्या चुनौतियाँ हैं ?
उत्तर – राजनीतिक दलों के समक्ष विभिन्न चुनौतियाँ
राजनीतिक दलों के समक्ष विभिन्न प्रकार की चुनौतियाँ निम्न प्रकार हैं-
  1. गलतियों के लिए राजनीतिक दलों पर दोषारोपण- लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था में जनता का पूर्ण विश्वास राजनीतिक दलों में होता है। लोकतान्त्रिक राजनीति का संचालन राजनीतिक दलों द्वारा किया जाता है। अत: शासन की गलतियों के कारण जनता को जो परेशानी होती है, उसका दोषारोपण राजनीतिक दलों के ऊपर किया जाता है। सामान्य जनता की अप्रसन्नता तथा आलोचना राजनीतिक दलों के काम-काज के विभिन्न पहलुओं पर केन्द्रित होती है।
  2. आन्तरिक लोकतन्त्र का अभाव — यद्यपि राजनीतिक दल लोकतन्त्र की दुहाई देते हैं, परन्तु उनमें आन्तरिक लोकतन्त्र का अभाव देखने को मिलता है । राजनीतिक दलों के संगठनात्मक चुनाव नियमित रूप से नहीं होते हैं। दल की सम्पूर्ण शक्ति कुछ व्यक्तियों के हाथों में सिमट जाती है। दलों के पास अपने सदस्यों की सूची भी नहीं होती है।
  3. साधारण सदस्यों की उपेक्षा — यह भी देखा गया है कि दलों में साधारण सदस्यों की उपेक्षा की जाती है, उसे दल की नीतियों के निर्माण में सहभागिता प्रदान नहीं की जाती है, वह दल के कार्यक्रमों के बारे में अनभिज्ञ बना रहता है। जो सदस्य दल की नीतियों का विरोध करते हैं उन्हें दल की प्राथमिक सदस्यता से वंचित कर दिया जाता है।
  4. वंशवादी उत्तराधिकार – भारत सहित विश्व के अनेक राष्ट्रों में यह देखा गया है कि दलों में भी वंशवादी उत्तराधिकार की परम्परा पड़ गई है। कांग्रेस की बागडोर पहले पं० नेहरू के हाथ में थी, उनके बाद श्रीमती इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी तथा अब यह बागडोर सोनिया गांधी के हाथों में है। इसी प्रकार राष्ट्रीय लोकदल की बागडोर पहले चौ० चरण सिंह के हाथों में थी और अब उनके पुत्र चौ० अजित सिंह के हाथों में है। यह परम्परा दल के अन्य सदस्यों के साथ अन्याय करना है।
  5. धन की महत्ता – वर्तमान में राजनीतिक दलों में भी धन की महत्ता बढ़ती जा रही है। चुनाव के समय राजनीतिक दलों द्वारा अपने प्रत्याशियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। सभी राजनीतिक दल चुनावों में विजय प्राप्त करना चाहते हैं, अतः राजनीतिक दल चन्दों के माध्यम से धन का संग्रह करते हैं। सम्पूर्ण विश्व में लोकतन्त्र के समर्थक देशों ने लोकतान्त्रिक राजनीति में अमीर लोग तथा बड़ी कम्पनियों की बढ़ती भूमिका के प्रति चिन्ता व्यक्त की है।
  6. सार्थक विकल्प का अभाव – राजनीतिक दलों के समक्ष महत्त्वपूर्ण चुनौती राजनीतिक दलों के बीच विकल्पहीनता की स्थिति की है। सार्थक विकल्प का तात्पर्य यह है कि राजनीतिक दलों की नीतियों तथा कार्यक्रमों में महत्त्वपूर्ण अन्तर हो । वर्तमान विश्व के विभिन्न दलों के बीच वैचारिक अन्तर कम होता गया है तथा यह प्रवृत्ति सम्पूर्ण विश्व में दिखाई देती है।
  7. राजनीति का अपराधीकरण – वर्तमान में राजनीति का अपराधीकरण हो रहा है। राजनीतिक दलों के समक्ष उनमें अपराधी तत्त्वों की बाहरी घुसपैठ तथा प्रभाव है। राजनीतिक दल चुनावों में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की सहायता लेते हैं। राजनीतिक दल उन्हें अपनी पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार भी बनाने में संकोच नहीं करते हैं।
प्रश्न 3 – राजनीतिक दल अपना कामकाज बेहतर ढंग से करें, इसके लिए उन्हें मजबूत बनाने के कुछ सुझाव दें।
उत्तर- राजनीतिक दल को मजबूत बनाने के सम्बन्ध में सुझाव
राजनीतिक दल को मजबूत बनाने के सम्बन्ध में निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं—
  1. अवसरवादिता पर प्रतिबन्ध – वर्तमान में राजनीतिक दलों में अवसरवादिता की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। राजनीतिक लाभों को प्राप्त करने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि दल-बदल करते रहते हैं। भारत में दल-बदल जैसी बुराई को रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया है। इस नए कानून से दल-बदल में कमी आई है।
  2. धन शक्ति एवं बाहुबलियों की शक्ति के प्रभाव को कम करना – वर्तमान में चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को अपनी सम्पत्ति का तथा अपने विरुद्ध चल रहे आपराधिक मामलों का विवरण शपथपत्र के माध्यम से देना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे राजनीति में अपराधियों की संख्या में कमी अवश्य आएगी। परन्तु उम्मीदवारों द्वारा दी गई सूचनाएँ सही हैं अथवा नहीं, इसकी जाँच करने की कोई व्यवस्था नहीं है।
  3. संगठनात्मक चुनावों का नियमित होना- यह देखा गया है कि दल पर कुछ व्यक्ति अपना प्रभुत्व स्थापित करने के उद्देश्य से संगठन में चुनाव करवाना नहीं चाहते हैं। अब निर्वाचन आयोग ने प्रत्येक राजनीतिक दल के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि उनके संगठनात्मक चुनाव होने चाहिए अन्यथा उनकी मान्यता को समाप्त कर दिया जाएगा। दलों के लिए आयकर रिटर्न भरना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
  4. आन्तरिक कार्यशैली एवं व्यवस्था में सुधार – यह भी आवश्यक है कि राजनीतिक दलों के आन्तरिक कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए भी कानूनों का निर्माण किया जाए। सभी राजनीतिक दल अपने सदस्यों की सूची प्रकाशित करें, दलीय संविधान का पालन करें, दल में विवाद की स्थिति में एक स्वतन्त्र अधिकारी को पंच बनाए तथा सबसे बड़े पदों के लिए खुला चुनाव कराएँ ।
  5. महिलाओं का उचित प्रतिनिधित्व – दल के अन्तर्गत विभिन्न पदों पर महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाना चाहिए। निर्वाचन में महिलाओं को भी टिकट प्रदान किया जाना चाहिए। महिलाओं के लिए पदों में आरक्षण की व्यवस्था होनी बहुत आवश्यक है।
  6. सरकार द्वारा चुनाव व्यय को वहन करना – चुनाव में उम्मीदवारों द्वारा जो धन खर्च किया जाता है, उसकी सीमा का निर्धारण हो । अच्छी स्थिति तो यह है कि सरकार ही चुनांव के सम्पूर्ण खर्चे की स्वयं व्यवस्था करे। सरकार दलों को चुनाव लड़ने के लिए धन प्रदान करे।
  7. राजनीतिक दलों पर नियन्त्रण की व्यवस्था करना – विद्वानों का यह भी मत है कि राजनीतिक दलों पर स्थानीय प्रभुत्वशाली व्यक्तियों का नियन्त्रण हो । बुद्धिजीवी, दबाव समूह, आन्दोलन तथा मीडिया इस कार्य में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मीडिया राजनीतिक दलों की छवि खराब कर सकता है।
  8. ईमानदार तथा कार्यकुशल व्यक्ति को पार्टी में सम्मिलित करना – राजनीतिक दलों में सुधार के लिए यह आवश्यक है कि अच्छी छवि तथा चरित्र के व्यक्तियों को ही दलों की सदस्यता प्रदान की जाए। लोकतन्त्र की गुणवत्ता लोकतन्त्र में जनता की भागीदारी से निर्धारित होती है।
प्रश्न 4 – राजनीतिक दल का क्या अर्थ होता है?
उत्तर- राजनीतिक दल : अर्थ तथा परिभाषा
राजनीतिक दल व्यक्तियों का ऐसा संगठन होता है जिनकी सामान्य विचारधारा तथा सिद्धान्त होते हैं तथा जिनका उद्देश्य सामूहिक प्रयासों द्वारा सत्ता प्राप्त करना होता है। राजनीतिक दल राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। राजनीतिक दल की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-
लीकॉक के शब्दों में, “राजनीतिक दल संगठित राजनीति के उस समूह को कहते हैं जो संगठित रूप से एक राजनीतिक इकाई के रूप में कार्य करते हैं। उनके विचार सार्वजनिक प्रश्नों पर एक जैसे होते हैं तथा सामान्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए मतदान की शक्ति का प्रयोग करके शासन पर अपना अधिकार स्थापित करना चाहते हैं।
लास्की के शब्दों में, “राजनीतिक दल से हमारा तात्पर्य नागरिकों के उस संगठित समूह से है जो एक संगठन के रूप में कार्य करते हैं।”
गैटिल के शब्दों में, “राजनीतिक दल न्यूनाधिक संगठित उन नागरिकों का एक समूह है जो एक राजनीतिक इकाई के रूप में कार्य कर हैं जिनका उद्देश्य अपने मताधिकार के प्रयोग द्वारा सरकार पर अधिकार जमाना तथा अपनी सामान्य नीति को लागू करना होता है । “
प्रश्न 5 – किसी भी राजनीतिक दल के क्या गुण होते हैं? 
उत्तर- राजनीतिक दलों के गुण
राजनीतिक दलों के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं-
  1. संगठित समूह – राजनीतिक दल व्यक्तियों का संगठित समूह होता है। किसी दल का निर्माण भी तभी होता है जब सामान्य विचारधारा वाले व्यक्ति एक साथ संगठित हो जाते हैं।
  2. विचारधाराओं पर आधारित – राजनीतिक दलों के पीछे कोई-न-कोई विचारधारा अवश्य रहती है। जैसे साम्यवादी दल, मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारधारा पर आधारित होते हैं। विचारधाराओं के आधार पर ही दलों को वामपंथी तथा दक्षिणपंथी श्रेणियों में विभाजित किया जाता है ।
  3. सत्ता पर प्रभाव स्थापित करना – राजनीतिक दलों का उद्देश्य सत्ता पर अधिकार स्थापित करना होता है। राजनीतिक दल चुनाव लड़ने तथा सरकार में राजनीतिक सत्ता को प्राप्त करने के उद्देश्य से कार्य करता है। यह समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखकर ही नीतियों तथा कार्यक्रमों का निर्माण करता है।
  4. नेतृत्व – प्रत्येक राजनीतिक दल के लिए नेतृत्व का होना बहुत आवश्यक है। यदि दल में कुशल नेतृत्व है तो वह दल अस्तित्व में बना रहता है अन्यथा वह अनेक टुकड़ों में विभाजित हो जाता है।
  5. समाज के बुनियादी राजनीतिक विभाजन का प्रदर्शन- राजनीतिक दल समाज के बुनियादी राजनीतिक विभाजन को भी प्रदर्शित करते हैं। दल समाज के किसी एक हिस्से से सम्बन्धित होता है अतः उसका दृष्टिकोण समाज के उस वर्ग समुदाय विशेष की तरफ झुका होता है। दल की पहचान उसकी नीतियों तथा उसके सामाजिक आधार से निर्धारित होती है।
  6. विभिन्न हिस्सों में विभाजित – विद्वानों ने राजनीतिक दलों को तीन हिस्सों में विभाजित किया है— (i) नेता (नेतृत्व), (ii) सक्रिय कार्यकर्त्ता तथा (iii) अनुयायी अथवा समर्थक ।
प्रश्न 6–चुनाव लड़ने और सरकार में सत्ता सँभालने के लिए एकजुट हुए लोगों के समूह को¨¨¨¨कहते हैं।
उत्तर – राजनीतिक दल।
प्रश्न 7–पहली सूची (संगठन / दल) तथा दूसरी सूची ( गठबन्धन / मोर्चा ) के नामों का मिलान करें तथा नीचे दिए गए कूट नामों के आधार पर सही उत्तर खोजें।
सूची-I सूची-II
1. इण्डियन नेशनल कांग्रेस (क) राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन
2. भारतीय जनता पार्टी (ख) क्षेत्रीय दल
3. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया (मार्क्ससिस्ट) (ग) संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन
4. तेलुगूदेशम पार्टी (घ) वाम मोर्चा
1 2 3 4
(क)
(ख)
(ग)
(घ)
उत्तर-
(ग)
प्रश्न 8 – इनमें से कौन बहुजन समाज पार्टी का संस्थापक है-
(क) कांशीराम
(ख) साहू महाराज
(ग) बी०आर० अम्बेडकर
(घ) ज्योतिबा फुले ।
उत्तर- (क) कांशीराम ।
प्रश्न 9 – भारतीय जनता पार्टी का मुख्य प्रेरक सिद्धान्त क्या है—
(क) बहुजन समाज
(ख) क्रान्तिकारी लोकतन्त्र
(ग) समग्र मानवतावाद
(घ) आधुनिकता ।
उत्तर- (ग) समग्र मानवतावाद ।
प्रश्न 10 – पार्टियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर गौर करें-
(अ) राजनीतिक दलों पर लोगों का ज्यादा भरोसा नहीं है।
(ब) दलों में अक्सर बड़े नेताओं के घोटालों की गूंज सुनाई देती है।
(स) सरकार चलाने के लिए पार्टियों का होना जरूरी नहीं ।
इन कथनों में से कौन सही है-
(क) अ, ब और स
(ख) अ और ब
(ग) ब और स
(घ) अ और स
उत्तर- (ख) अ और ब।
प्रश्न 11 – निम्नलिखित उद्धरण को पढ़ें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दें।
मोहम्मद युनूस बंगलादेश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं। गरीबों के आर्थिक और सामाजिक विकास के प्रयासों के लिए उन्हें अनेक अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। उन्हें और उनके द्वारा स्थापित ग्रामीण बैंक को संयुक्त उन्होंने एक राजनीतिक दल बनाने तथा संसदीय चुनाव लड़ने का फैसला रूप से वर्ष 2006 का नोबेल शान्ति पुरस्कार दिया गया। फरवरी 2007 में किया। उनका उद्देश्य सही नेतृत्व को उभारना, अच्छा शासन देना और नए बंगलादेश का निर्माण करना है। उन्हें लगता है कि पारम्परिक दलों से अलग एक नए राजनीतिक दल से ही नई राजनीतिक संस्कृति पैदा हो सकती है। उनका दल निचले स्तर से लेकर ऊपर तक लोकतान्त्रिक होगा।
नागरिक शक्ति के नाम से गठित इस दल के गठन से बंगलादेश में हलचल मच गई। उनके फैसले को काफी लोगों ने पसन्द किया तो अनेक को यह अच्छा नहीं लगा। एक सरकारी अधिकारी शाहेदुल इस्लाम ने कहा, “मुझे लगता है कि अब बांग्लादेश में अच्छे और बुरे के बीच चुनाव करना सम्भव हो गया है। अब एक अच्छी सरकार की उम्मीद की जा सकती है। | यह सरकार न केवल भ्रष्टाचार से दूर रहेगी, बल्कि भ्रष्टाचार और काले धन की समाप्ति को भी अपनी प्राथमिकता बनाएगी।”
पर दशकों से मुल्क की राजनीति में रुतबा रखने वाले पुराने दलों के नेताओं में संशय है। बंगलादेश नेशनलिस्ट पार्टी के एक बड़े नेता का कहना | है – “नोबेल पुरस्कार जीतने पर क्या बहस हो सकती है पर राजनीति एकदम अलग चीज है। एकदम चुनौती भरी और अक्सर विवादास्पद ।” कुछ अन्य लोगों का स्वर और कड़ा था। वे उनके राजनीति में आने पर सवाल उठाने लगे। एक राजनीतिक प्रेक्षक ने कहा, “देश से बाहर की ताकतें उन्हें राजनीति पर थोप रही हैं। “
क्या आपको लगता है कि युनूस ने नई राजनीतिक पार्टी बनाकर ठीक किया?
क्या आप विभिन्न लोगों द्वारा जारी बयानों तथा अंदेशों से सहमत हैं? इस पार्टी को दूसरों से अलग काम करने के लिए खुद को किस तरह संगठित करना चाहिए?
अगर आप इस राजनीतिक दल के संस्थापकों में एक होते तो इसके पक्ष में क्या दलील देते ?
उत्तर —
  1. बंगलादेश के अधिकांश राजनीतिक दल भ्रष्टाचार तथा अलोकतान्त्रिक गतिविधियों में संलग्न हैं, उनमें निरंकुशतावाद के विरुद्ध | आवाज उठाने की क्षमता नहीं है। अतः ऐसे समय में मोहम्मद युनूस द्वारा बंगलादेश में एक नई पार्टी का गठन उचित प्रतीत होता है।
  2. हाँ, हम उन सभी व्यक्तियों द्वारा दिए गए वक्तव्यों से सहमत हैं जो प्रगतिशील, लोकतान्त्रिक तथा लोक कल्याणकारी विचारधारा से प्रेरि होकर किसी-न-किसी रूप में युनूस के कार्यक्रमों का समर्थन कर रहे हैं।
  3. युनूस ने जिस संकल्प तथा दृढ़ इच्छाशक्ति द्वारा नई पार्टी गठित की है, उनके लिए उनको जनाधार बनाने की आवश्यकता है। उनको जमीनी | सतह से अपना संगठन बनाकर धीरे-धीरे उसे राष्ट्रीय स्तर तक ले जाना है। उनको किसानों, मजदूरों, शिक्षित ग्रामीण तथा शहरी मध्यमवर्गीय व्यक्तियों के साथ-साथ प्रभुत्वकुलीन, वर्गीय लोगों का भी समर्थन प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए । उनको अपनी पार्टी को परिवारवाद, भाई-भतीजावाद, धनशक्ति तथा बाहुबलियों के प्रभाव से मुक्त रखना चाहिए। उनको पार्टी को | ऐसा सफल एवं कुशल नेतृत्व देना चाहिए जिससे समाज के प्रबुद्ध लोग, बुद्धिजीवी, पत्रकार, वकील तथा शिक्षक आदि भी पार्टी से जुड़ने लगे। यह बंगलादेश का सौभाग्य होगा कि इनके नेतृत्व में प्रबुद्ध, ईमानदार, अनुशासित, निष्ठावान, मानवतावादी, राष्ट्रभक्त जनता को सुशासन प्रदान करने में सफल हो सके। युनूस की नई पार्टी नई राजनीतिक संस्कृति की नींव रखेगी।
  4. यदि हम मोहम्मद युनूस द्वारा स्थापित ‘नागरिक शक्ति’ नाम के दल के संस्थापकों में से एक होते तो हमारी घोषणा इस प्रकार होती – ” यह नया दल नागरिकों का, नागरिकों के द्वारा बंगलादेश के नागरिकों के साथ-साथ सम्पूर्ण मानवजाति के कल्याण के लिए कार्य करेगा। हमें मतदाताओं का पूर्ण सहयोग तथा समर्थन चाहिए ।”
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
• विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – राजनीतिक दल से क्या तात्पर्य है ? लोकतन्त्र में इन दलों का क्या महत्त्व है ?
अथवा राजनीतिक दल से क्या तात्पर्य है? लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों के क्या कार्य हैं ?
अथवा लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों की महत्त्वपूर्ण भूमिका का वर्णन कीजिए ।
उत्तर- राजनीतिक दल : अर्थ तथा परिभाषा
राजनीतिक दल व्यक्तियों का ऐसा संगठन होता है जिनकी सामान्य विचारधारा तथा सिद्धान्त होते हैं तथा जिनका उद्देश्य सामूहिक प्रयासों द्वारा सत्ता प्राप्त करना होता है। राजनीतिक दल राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। राजनीतिक दल की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-
लीकॉक के शब्दों में, “राजनीतिक दल संगठित राजनीति के उस समूह को कहते हैं जो संगठित रूप से एक राजनीतिक इकाई के रूप में कार्य करते हैं। उनके विचार सार्वजनिक प्रश्नों पर एक जैसे होते हैं तथा सामान्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए मतदान की शक्ति का प्रयोग करके शासन पर अपना अधिकार स्थापित करना चाहते हैं।
लास्की के शब्दों में, “राजनीतिक दल से हमारा तात्पर्य नागरिकों के उस संगठित समूह से है जो एक संगठन के रूप में कार्य करते हैं । “
गैटिल के शब्दों में, “राजनीतिक दल न्यूनाधिक संगठित उन नागरिकों का एक समूह है जो एक राजनीतिक इकाई के रूप में कार्य करते हैं जिनका उद्देश्य अपने मताधिकार के प्रयोग द्वारा सरकार पर अधिकार जमाना तथा अपनी सामान्य नीति को लागू करना होता है । “
प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों का महत्त्व
प्रजातन्त्रात्मक शासन के लिए राजनीतिक दलों का होना अनिवार्य है। गिलक्राइस्ट के अनुसार, “प्रजातन्त्र शासन जनता का शासन न होकर जनता के प्रतिनिधियों का ही शासन होता है।” लॉर्ड ब्राइस के अनुसार, ” प्रजातन्त्र में राजनीतिक दल अनिवार्य हैं। कोई भी विशाल स्वतन्त्र देश उनके बिना नहीं रह सका है। कोई भी यह स्पष्ट नहीं कर सका है कि उनके अभाव प्रतिनिध्यात्मक शासन किस प्रकार चलाया जा सकता है।” लीकॉक के अनुसार, “केवल दलीय प्रणाली ही ऐसा माध्यम है जो लोकतन्त्रीय शासन को सम्भव बनाती है।” प्रजातन्त्ररूपी इंजन को चलाने के लिए राजनीतिक दल पटरी के रूप में कार्य करते हैं।
संक्षेप में प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों का महत्त्व अग्रलिखित दृष्टियों से है-
  1. स्वस्थ लोकमत का निर्माण करना।
  2. निर्वाचनों का संचालन करना ।
  3. सभी वर्गों के हितों का प्रतिनिधित्व करना ।
  4. मतों एवं सिद्धान्तों का प्रचार एवं प्रसार करना ।
  5. सरकार का निर्माण और संचालन करना ।
  6. शासन सत्ता को मर्यादित रखना ।
  7. शासन के विभिन्न अंगों में समन्वय स्थापित करना ।
वर्तमान में कोई भी लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था दलों के अभाव में कार्य नहीं कर सकती है। नेपाल में कुछ समय पूर्व दलविहीन लोकतन्त्र के सिद्धान्त को अपनाने का प्रयास किया गया परन्तु यह प्रयास पूर्णतया असफल हो गया।
प्रश्न 2 – ‘ भारतीय जनता पार्टी’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- भारतीय जनता पार्टी
श्री अटलबिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में अप्रैल 1980 ई० में ‘भारतीय जनता पार्टी’ के नाम से एक नए दल की स्थापना की गई थी। एकीकरण पर बल दिया और प्रान्तीय, क्षेत्रीय अथवा जातीय हितों को, भारतीय जनता पार्टी ने अपने दलीय कार्यक्रम में राष्ट्रीयता और राष्ट्रीय मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए सदैव कटिबद्ध रहा है। यह दल राष्ट्रीय हितों के सम्मुख गौण माना। यह दल प्रजातन्त्र और नागरिकों के सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता की नीति अपनाने पर जोर देता रहा है। इस दल की नीति के अन्तर्गत अल्पसंख्यकों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा तथा उनके जीवन और सम्पत्ति को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इस दल गांधीवादी समाज के लक्ष्य को अपनाना निश्चित किया। इसके अन्तर्गत आर्थिक व्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र में सहकारी पद्धति और न्याय पद्धति का प्रयोग किया जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को जीविका के साधन उपलब्ध कराए जाएँगे तथा नागरिकों को चहुँमुखी विकास के लिए अपेक्षित स्वतन्त्रताएँ प्रदान की जाएँगी। समाजवाद के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु दल अहिंसात्मक साधनों को अपनाने पर भी जोर देता रहा है।
इस दल के नेताओं का कहना है कि निर्धनता तथा व्यक्ति द्वारा व्यक्ति के शोषण को दूर किया जाना अति आवश्यक है तथा ऐसी सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर बल दिया जाना चाहिए, जिससे जीवन कुछ मानकों तथा मूल्यों द्वारा मार्गदर्शित हो ।
बारहवीं लोकसभा के चुनावों में भाजपा को 179 स्थानों पर तथा उसके सहयोगी दलों को 73 सीटों पर सफलता प्राप्त हुई थी। सन् 1999 में हुए तेरहवीं लोकसभा के चुनावों में भी भाजपा को केवल 182 सीटें प्राप्त हुईं। किन्तु उसने अपने सहयोगी दलों की सीटों के आधार पर लोकसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की। तेरहवीं लोकसभा के गठन के पूर्व इस दल ने राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठन किया था। चौदहवीं लोकसभा के चुनावों में इस गठबन्धन को 188 स्थान प्राप्त हुए थे। पन्द्रहवीं लोकसभा (2009) में भारतीय जनता पार्टी को मात्र 116 स्थान प्राप्त हुए। वर्ष 2014 में सम्पन्न 16वीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा को 282 स्थान प्राप्त हुए। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को 303 स्थान प्राप्त हुए ।
• लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – भारतीय साम्यवादी दल एवं साम्यवादी दल मार्क्सवादी की स्थापना तथा नीतियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर— भारतीय साम्यवादी दल की स्थापना 1924 ई० में हुई थी। स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान यह दल कभी कांग्रेस के पक्ष में रहा तो कभी विरोध में । इस दल का झुकाव रूस की तरफ रहा है। यह दल लेनिन तथा मार्क्स द्वारा प्रतिपादित विचारधारा में विश्वास रखता है तथा श्रमिकों की सरकार बनाना चाहता है। 1964 ई० में इस दल में फूट पड़ गई थी तथा यह दो भागों में विभाजित हो गया। एक दल का नाम भारतीय साम्यवादी दल ही रहा तथा दूसरे दल का नाम भारतीय साम्यवादी दल (मार्क्सवादी) रख दिया गया।
दलों की प्रमुख नीतियाँ – दलों की प्रमुख नीतियाँ निम्न प्रकार हैं –
  1. ये दल साम्राज्यवादी तथा पूँजीवादी नीतियों के विरोधी हैं।
  2. ये पूँजीवादी लोकतन्त्र के विरुद्ध हैं तथा ऐसे लोकतन्त्र की स्थापना करना चाहते हैं जिसमें श्रमिकों तथा किसानों की सरकार हो ।
  3. समस्त बड़े उद्योगों, बीमा कम्पनियों व बैंकों का राष्ट्रीयकरण करना।
  4. निःशुल्क अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था करना ।
  5. महिलाओं को पुरुषों के समान लोकतान्त्रिक अधिकार प्रदान करना।
प्रश्न 2 – राजनीतिक दल जनमत के निर्माण में किस प्रकार की भूमिका निभाते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – जनमत के निर्माण में राजनीतिक दलों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। राजनीतिक दल सरकार की नीतियों तथा कार्यक्रमों को जनसंचार के साधनों तथा प्रेस (समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं) के माध्यम से जनता तक पहुँचाते हैं। सरकार की अनुचित तथा स्वार्थपूर्ण नीतियों की वे विधायिकाओं में तथा विधायिकाओं के बाहर आलोचना करते हैं। राजनीतिक दल सभाओं, प्रदर्शनों तथा रैलियों का आयोजन करके अपने विचार जन-सामान्य तक पहुँचाते हैं। वे विभिन्न मुद्दों को उठाते हैं तथा उन पर बहस करते हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के लाखों कार्यकर्त्ता सम्पूर्ण देश में बिखरे रहते हैं। अनेक बार राजनीतिक दल जनता की विभिन्न समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से आन्दोलनों का भी संचालन करते हैं। यह देखा गया है कि विभिन्न दलों के विचारों के अनुरूप ही समाज के लोगों की राय बनती है। करती जनमत यदि दल कार्य
प्रश्न 3 – प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर- प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों का महत्त्व
प्रजातन्त्रात्मक शासन के लिए राजनीतिक दलों का होना अनिवार्य है। गिलक्राइस्ट के अनुसार, “प्रजातन्त्र शासन जनता का शासन न होकर जनता के प्रतिनिधियों का ही शासन होता है।” लॉर्ड ब्राइस के अनुसार, “प्रजातन्त्र में राजनीतिक दल अनिवार्य हैं। कोई भी विशाल स्वतन्त्र देश उनके बिना नहीं रह सका है। कोई भी यह स्पष्ट नहीं कर सका है कि उनके अभाव में प्रतिनिध्यात्मक शासन किस प्रकार चलाया जा सकता है।” लीकॉक के अनुसार, “केवल दलीय प्रणाली ही ऐसा माध्यम हैं जो लोकतन्त्रीय शासन को सम्भव बनाती है।” प्रजातन्त्ररूपी इंजन को चलाने के लिए राजनीतिक दल पटरी के रूप में कार्य करते हैं।
संक्षेप में प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों का महत्त्व निम्नलिखित दृष्टियों से है-
  1. स्वस्थ लोकमत का निर्माण करना।
  2. निर्वाचनों का संचालन करना।
  3. सभी वर्गों के हितों का प्रतिनिधित्व करना ।
  4. मतों एवं सिद्धान्तों का प्रचार एवं प्रसार करना ।
  5. सरकार का निर्माण और संचालन करना।
  6. शासन सत्ता को मर्यादित रखना।
  7. शासन के विभिन्न अंगों में समन्वय स्थापित करना।
वर्तमान में कोई भी लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था दलों के अभाव में कार्य नहीं कर सकती है। नेपाल में कुछ समय पूर्व दलविहीन लोकतन्त्र के सिद्धान्त को अपनाने का प्रयास किया गया परन्तु यह प्रयास पूर्णतया असफल हो गया।
प्रश्न 4 – लोकतन्त्र में विरोधी दल की भूमिका की विवेचना कीजिए।
उत्तर – लोकतन्त्र में सत्तारूढ़ दल के साथ-साथ विरोधी दलों की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। इनकी भूमिका को निम्न प्रकार विवेचित किया जा सकता है-
  1. सत्तारूढ़ दल सदैव अपने हितों की पूर्ति करने वाले कानूनों का | निर्माण करना चाहता है। वह उनको स्वेच्छाचारी ढंग से लागू करना चाहता है। कभी-कभी सत्तारूढ़ दल लोकतन्त्र का गला भी घोंटना चाहता है। ऐसी परिस्थितियों में विरोधी दल ही सरकार का विरोध करके लोकतन्त्र के प्राणों की सुरक्षा करता है।
  2. यह जनता के अधिकारों तथा स्वतन्त्रताओं को बनाए रखने का प्रयास करता है और जब कभी भी सत्ता इनके अतिक्रमण करने का प्रयास है तो विरोधी दल सत्ता का विरोध करते हैं।
  3. विरोधी दल जनमत का भी निर्माण करते हैं। जागरूक तथा स्वस्थ लोकतन्त्र की सुरक्षा कर सकता है।
  4. विरोधी दल सरकार में शून्यता की स्थिति उत्पन्न नहीं होने देते हैं। किसी कारणवश सत्तारूढ़ दल को त्याग-पत्र देना पड़ता है तो विरोधी सरकार का निर्माण करके प्रशासन का संचालन करते हैं।
  5. विरोधी दल द्वारा जनता में राजनीतिक चेतना जाग्रत करने का भी किया जाता है।
• अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – भारत के किन्हीं दो वामपन्थी दलों के नाम लिखिए।
उत्तर- (1) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, (2) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी।
प्रश्न 2 – किन्हीं दो क्षेत्रीय दलों के नाम लिखिए ।
उत्तर – (1) शिवसेना, (2) अकाली दल ।
प्रश्न 3 – राजनीतिक दल के तीन प्रमुख हिस्सों के नामों का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर – (1) नेता (नेतृत्व), (2) सक्रिय कार्यकर्त्ता, (3) अनुयायी ।
प्रश्न 4 – द्वि-दलीय पद्धति किन दो देशों में पायी जाती है?
उत्तर – (1) ब्रिटेन, (2) अमेरिका ।
प्रश्न 5 – चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त दो राष्ट्रीय तथा दो क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नाम लिखिए।
अथवा भारत के दो राष्ट्रीय राजनीतिक दलों का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर-  राष्ट्रीय दल – (1) भारतीय जनता पार्टी, (2) कांग्रेस (इ)।
क्षेत्रीय दल – (1) अकाली दल, (2) शिवसेना ।
• बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1 – एक लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सबसे अलग दिखाई देने वाली संस्था है-
(अ) राजनीतिक दल
(ब) हित समूह
(स) दबाव समूह
(द) ये सभी।
उत्तर- (अ) राजनीतिक दल ।
प्रश्न 2 – निम्नलिखित में से राजनीतिक दल का कार्य है-
(अ) दल चुनाव लड़ते हैं
(ब) दल अलग-अलग नीतियों और कार्यक्रमों को मतदाताओं के समक्ष रखते हैं
(स) दल ही सरकार बनाते और चलाते हैं
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर – (द) उपर्युक्त सभी।
प्रश्न 3 – निम्नलिखित में से जनमत निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है—
(अ) राष्ट्रपति
(ब) मुख्यमन्त्री
(स) प्रधानमन्त्री
(द) राजनीतिक दल ।
उत्तर- (द) राजनीतिक दल ।
प्रश्न 4 – भारत में …….. व्यवस्था है।
(अ) बहुदलीय
(ब) एकदलीय
(स) गठबन्धन
(द) द्विदलीय ।
उत्तर- (अ) बहुदलीय।
प्रश्न 5 – निम्नलिखित में से कौन-सी पार्टी राष्ट्रीय पार्टी है-
(अ) राष्ट्रीय जनता दल
(ब) भारतीय जनता पार्टी
(स) समाजवादी पार्टी
(द) समता पार्टी |
उत्तर- ( ब ) भारतीय जनता पार्टी ।
प्रश्न 6 – चीन में शासन करने वाली अकेली पार्टी कौन-सी है –
(अ) कम्युनिस्ट पार्टी
(ब) सोशलिस्ट पार्टी
(स) पीपुल्स पार्टी
(द) कांग्रेस पार्टी |
उत्तर – (अ) कम्युनिस्ट पार्टी ।
प्रश्न 7 – निम्नलिखित में से किस देश में द्विदलीय व्यवस्था है –
(अ) भारत
(ब) फ्रांस
(स) संयुक्त राज्य अमेरिका
(द) पाकिस्तान ।
उत्तर – ( स ) संयुक्त राज्य अमेरिका ।

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