UK 10th Social Science

UK Board 10th Class Social Science – (राजनीति विज्ञान) – Chapter 7 लोकतन्त्र के परिणाम

UK Board 10th Class Social Science – (राजनीति विज्ञान) – Chapter 7 लोकतन्त्र के परिणाम

UK Board Solutions for Class 10th Social Science – सामाजिक विज्ञान – (राजनीति विज्ञान) – Chapter 7 लोकतन्त्र के परिणाम

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1 – लोकतन्त्र किस प्रकार उत्तरदायी, जिम्मेवार तथा वैध सरकार का गठन करता है?
उत्तर- लोकतन्त्र : उत्तरदायी, जिम्मेवार तथा वैध सरकार का गठन
लोकतन्त्र निम्न प्रकार से उत्तरदायी, जिम्मेवार तथा वैध सरकार का गठन करता है-
  1. लोकतन्त्र में सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी तथा जवाबदेह ‘होती है। सरकार का निर्माण मतदाताओं के मतों के आधार पर होता है। नागरिक अपने ऊपर शासन करने वाले प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। अतः उनको यह अधिकार प्राप्त होता है कि वे शासनकाल में उनके कार्यकलापों तथा नीतियों के सम्बन्ध में पूछताछ कर सकते हैं।
  2. लोकतन्त्र में सरकार वैध होती है क्योंकि सरकार का निर्माण मतपत्रों द्वारा होता है। जनता जिस भी राजनीतिक दल की नीतियों तथा कार्यक्रमों से सन्तुष्ट है, उसे अपना मत प्रदान करती है। अतः लोकतन्त्र में सरकार नागरिकों की निष्ठा तथा विश्वास को जीत लेती है।
  3. अनेक देशों में ऐसे तरीकों को अपनाया जा रहा है जहाँ नागरिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में सहभागिता रखते हैं क्योंकि सरकार के निर्णय सभी नागरिकों को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार से लोकतन्त्र का मौलिक परिणाम यह होता है कि यह ऐसी सरकार नागरिकों को प्रदान करती है, जो अन्ततोगत्वा नागरिकों के प्रति उत्तरदायी होती है।
  4. लोकतन्त्र में जिम्मेदार सरकार होती है। यह अपने देश के नागरिकों, मतदाताओं तथा निर्वाचन मण्डल के प्रति जिम्मेदार होती है। यह अपने नागरिकों की राय, आवश्यकताओं एवं उम्मीदवारों के प्रति सचेत रहती है।
  5. लोकतन्त्र वैधानिक सरकार होती है क्योंकि सरकार निश्चित अवधि के लिए सत्ता में बनी रहती है। यह अवधि सामान्यतया 5 वर्ष की होती है। अवधि समाप्त होने के पूर्व ही यह मतदाताओं से पुनः कार्य करने की स्वीकृति प्राप्त करती है। चुनाव के उपरान्त संविधान के अनुसार कार्य करती है। जब सरकार विधायिका में बहुमत खो देती है तो वह तुरन्त त्यागपत्र दे देती है तथा मतदाताओं से पुनः जनादेश प्राप्त करने के लिए चुनाव मैदान में आ जाती है।
प्रश्न 2 – लोकतन्त्र किन स्थितियों में सामाजिक विविधता को सँभालता है तथा उनके बीच सामंजस्य बैठाता है?
उत्तर – लोकतन्त्र : सामाजिक विविधताएँ
लोकतन्त्र निम्नलिखित स्थितियों में सामाजिक विविधता को सँभालने का प्रयास करता है-
  1. विश्व के अधिकांश देशों में जिनमें लोकतान्त्रिक व्यवस्था को अपनाया गया है, उनमें अनेक प्रकार की सामाजिक विविधताएँ देखने को मिलती हैं । लोकतन्त्र शान्तिपूर्ण एवं सद्भावना के वातावरण में सामाजिक विभिन्नताओं को उचित स्थान देता है, उन्हें अपनाता है। भारत तथा बेल्जियम दोनों ही लोकतान्त्रिक देश हैं। इन दोनों देशों में भाषा तथा संस्कृति के आधार पर विविधताएँ देखने को मिलती हैं। परन्तु लोकतान्त्रिक शासन पद्धति ने भाषा तथा संस्कृति की समस्याओं का समाधान संविधान के प्रावधानों के अधीन किया है जिसमें उसको पर्याप्त सफलता प्राप्त हुई है।
  2. लोकतन्त्र में वार्तालाप, विचार-विमर्श तथा वादं विवाद के आधार पर निर्णय लिया जाता है। लोकतन्त्र में सामान्यतया प्रतियोगिता सम्पन्न कराने के लिए एक तरीका विकसित कर लिया जाता है। इससे लोगों के मध्य तनाव कम होते हैं जिससे हिंसा भड़कने अथवा रक्तपात होने की सम्भावनाएँ क्षीण हो जाती हैं।
  3. लोकतन्त्र में सामाजिक विविधताओं उत्पन्न समस्याओं के समाधान करने की क्षमता निहित होती है। राज्य की अत्यधिक जनसंख्या होने के कारण व्यक्तियों के आचार-विचार, हित, दृष्टिकोण तथा दर्शन भिन्न-भिन्न होते हैं। इनके बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए लोकतान्त्रिक व्यवस्था ही सर्वथा उपयुक्त है।
  4. इसका भी अनुभव किया जा सकता है कि विभिन्न सामाजिक समूहों में पूर्णतया तथा स्थायी तौर पर संघर्षों अथवा टकरावों को सदैव के लिए कोई भी समाज हल नहीं कर सकता परन्तु यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि हम विभिन्नताओं को शान्तिपूर्ण तरीके से सुन सकते हैं, विविधताओं को यथोचित सम्मान दे सकते हैं तथा लोकतान्त्रिक तरीके से ऐसी व्यवस्था विकसित कर सकते हैं, जिसके द्वारा मतभेदों को आसानी से सुलझाया जा सकता है।
  5. अलोकतान्त्रिक सरकारें समस्याओं का समाधान शक्ति के बल पर करना चाहती हैं जिससे समस्याएँ सुलझाने के स्थान पर और भी उलझती चली जाती हैं।
  6. लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था विभिन्न विचारों के बीच तभी सामंजस्य स्थापित करने में सफल हो सकती है जब बहुसंख्यक समुदाय अल्पसंख्यकों की राय तथा विचारों को सुने तथा समझे । लोकतन्त्र को भाषायी, जातिगत तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों को देश में उचित स्थान तथा सम्मानपूर्वक स्थिति प्रदान करनी चाहिए । अल्पसंख्यकों को भी देश के सर्वोच्च पद या सम्मान प्राप्त होने चाहिए। यदि जन्म के आधार पर किसी व्यक्ति को बहुसंख्यक स्थिति में आने से रोक दिया जाता है तो हम यह मानते हैं कि ऐसे लोगों या ऐसे समूहों को सदैव के लिए बहुमत की स्थिति में आने से रोक दिया जाता है।
प्रश्न 3 – निम्नलिखित कथनों के पक्ष या विपक्ष में तर्क दीजिए-
  1. औद्योगिक देश ही लोकतान्त्रिक व्यवस्था का भार उठा सकते हैं पर गरीब देशों को आर्थिक विकास के लिए तानाशाही चाहिए।
  2. लोकतन्त्र अपने नागरिकों के बीच की असमानता को कम नहीं कर सकता।
  3. गरीब देशों की सरकार को अपने ज्यादा संसाधन गरीबी को कम करने तथा आहार, कपड़ा, स्वास्थ्य तथा शिक्षा पर लगाने की ain उद्योगों तथा बुनियादी आर्थिक ढाँचे पर खर्च करने चाहिए।
  4. नागरिकों के बीच आर्थिक समानता अमीर और गरीब, दोनों तरह के लोकतान्त्रिक देशों में है।
  5. लोकतन्त्र में सभी को एक ही वोट का अधिकार है। इसका मतलब है कि लोकतन्त्र में किसी तरह का प्रभुत्व तथा टकराव नहीं होता ।
उत्तर —
  1. विरोध में — मैं इस कथन से सहमत नहीं हूँ क्योंकि यह पूर्णतया सत्य नहीं है कि एक औद्योगिक देश लोकतान्त्रिक देश भी हो। अनेक औद्योगिक रूप से सम्पन्न देशों में तानाशाही शासन व्यवस्थाओं का अस्तित्व रहा है। गरीब देश को आर्थिक विकास के लिए तानाशाही की आवश्यकता नहीं होती है। लोकतन्त्र तो जीवन-दर्शन है जिसकी समान रूप से सभी को आवश्यकता होती है।
  2. विरोध में —यह कथन उचित प्रतीत नहीं होता है कि लोकतन्त्र अपने नागरिकों के बीच असमानता को कम नहीं कर सकता है। लोकतन्त्र ही एकमात्र ऐसी पद्धति है जो समाज में व्यक्त विभिन्नताओं को समाप्त करके समानता स्थापित कर सकती है। लोकतान्त्रिक व्यवस्था कानून तथा कुशल प्रशासन द्वारा विभिन्न नागरिकों में आय की असमानता को कम कर सकती है।
  3. विरोध में – मैं इस कथन से सहमत नहीं हूँ कि गरीब देशों में सरकार को भोजन, वस्त्र, स्वास्थ्य, शिक्षा पर कम खर्च करना चाहिए तथा औद्योगिक तथा विकास की आन्तरिक सुविधाओं पर अधिक धन खर्च करना चाहिए क्योंकि बिना भोजन के लोग जीवित नहीं रह सकते हैं, बिना उचित वस्त्रों के वे अपने शरीर की सुरक्षा नहीं कर सकते तथा अच्छी शिक्षा के बिना देश में अच्छे नागरिक नहीं बन सकते हैं। जब तक व्यक्ति की बुनियादी आवश्यकताएँ पूर्ण नहीं होंगी, तब तक आर्थिक एवं औद्योगिक विकास का स्वप्न अधूरा ही रहेगा ।
  4. विरोध में – नागरिकों के बीच आर्थिक समानता कहीं भी नहीं है। समाज में असमानता ही दिखाई देती है। मैं इस कथन से सहमत नहीं हूँ ।
  5. समर्थन में – मैं इस कथन का समर्थन करता हूँ क्योंकि लोकतन्त्र राजनीतिक तथा सामाजिक समानता पर टिका हुआ है। अतः लोकतन्त्र में एक निश्चित आयु प्राप्ति के उपरान्त बिना किसी भेदभाव के मताधिकार प्राप्त होना चाहिए। यह समानता धनी लोगों के वर्चस्व के साथ-साथ लोगों के टकराव को भी रोकती है।
प्रश्न 4 – नीचे दिए गए ब्यौरों में लोकतन्त्र की चुनौतियों की पहचान करें। ये स्थितियाँ किस तरह नागरिकों के गरिमापूर्ण, सुरक्षित और शान्तिपूर्ण जीवन के लिए चुनौती पेश करती हैं । लोकतन्त्र को मजबूत बनाने के लिए नीतिगत-संस्थागत उपाय भी सुझाएँ—
  1. उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद ओडिशा में दलितों तथा गैर-दलितों के प्रवेश के लिए अलग-अलग दरवाजा रखने वाले एक मन्दिर को एक ही दरवाजे से सबको प्रवेश की अनुमति देनी पड़ी।
  2. भारत के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे हैं।
  3. जम्मू-कश्मीर के गंडवारा में मुठभेड़ बताकर जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा तीन नागरिकों की हत्या करने के आरोप को देखते हुए इस घटना के जाँच के आदेश दिए गए।
उत्तर-
  1. लोकतन्त्र में सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए जाते हैं । लोकतन्त्र जाति, धर्म, समुदाय तथा लिंग के आधार पर व्यक्ति-व्यक्ति में कोई भेदभाव नहीं करता है। उच्च न्यायालय ने एक ही दरवाजे से दलितों तथा गैर दलितों के प्रवेश की व्यवस्था करके लोकतन्त्र की सुरक्षा की। सभी हिन्दुओं को मन्दिर में प्रवेश की स्वतन्त्रता तथा समानता है। न्यायालय के धार्मिक स्वतन्त्रता के अधिकार की रक्षा की।
  2. अपनी आर्थिक तंगी अथवा बदहाली के कारण भारत अनेक राज्यों के किसान आत्महत्या करने पर विवश हो रहे हैं, यह भारत के नागरिकों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। अतः सरकार को किसानों को तुरन्त आर्थिक सहायता (ऋण) प्रदान करना चाहिए। उनको कम ब्याज पर ऋण देना चाहिए।
  3. लोकतन्त्र में किसी व्यक्ति को मनमाना व्यवहार करने का अधिकार है। पुलिस ने झूठी मुठभेड़ में तीन नागरिकों की हत्या कर दी। ऐसा आरोप जनता ने पुलिस पर लगाया। घटना की जाँच के उपरान्त ही सत्यता अथवा असत्यता का पता लगाया जा सकता है। जाँच का आदेश देकर | लोकतन्त्र में नागरिकों के विश्वास को और भी गहरा बनाया गया है।
प्रश्न 5 – लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं के सन्दर्भ में इनमें से कौन-सा विचार सही है – लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं ने सफलतापूर्वक –
(क) लोगों के बीच टकराव को समाप्त कर दिया है।
(ख) लोगों के बीच की आर्थिक असमानताएँ समाप्त कर दी है।
(ग) हाशिए के समूहों से कैसा व्यवहार हो, इस सम्बन्ध में सारे मतभेद मिटा दिए हैं।
(घ) राजनीतिक गैर बराबरी के विचार को समाप्त कर दिया है।
उत्तर- (क) गलत, (ख) गलत, (ग) सही, (घ) सही।
प्रश्न 6—लोकतन्त्र के मूल्यांकन के लिहाज से उनमें कोई एक चीज लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं के अनुरूप नहीं है। उसे चुनें-
(क) स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष चुनाव ।
(ख) व्यक्ति की गरिमा ।
(ग) बहुसंख्यकों का शासन।’
(घ) कानून के समक्ष समानता ।
उत्तर— (ग) बहुसंख्यकों का शासन ।
प्रश्न 7 – लोकतान्त्रिक व्यवस्था के राजनीतिक तथा सामाजिक असमानताओं के बारे में किए गए अध्ययन बताते हैं कि-
(क) लोकतन्त्र तथा विकास साथ ही चलते हैं।
(ख) लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं में असमानताएँ बनी रहती हैं।
(ग) तानाशाही में असमानताएँ नहीं होतीं
(घ) तानाशाहियाँ लोकतन्त्र से बेहतर साबित हुई हैं।
उत्तर- (ख) लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं में असमानताएँ बनी रहती हैं।
प्रश्न 8 – नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़ें-
नन्नू एक दिहाड़ी मजदूर है। वह पूर्वी दिल्ली की एक झुग्गी-बस्ती वेलकम मजदूर कालोनी में रहता है। उसका राशन कार्ड गुम हो गया और जनवरी 2006 में उसने डुप्लीकेट राशन कार्ड बनवाने के लिए अर्जी दी। अगले तीन महीनों तक उसने राशन विभाग के दफ्तर के कई चक्कर लगाए, लेकिन वहाँ तैनात किरानी तथा अधिकारी उसका काम करने या उसकी अर्जी की स्थिति बताने की कौन कहे, उसको देखने तक के लिए तैयार न थे। आखिरकार उसने सूचना के अधिकार का उपयोग करते हुए अपनी अर्जी की दैनिक प्रगति का • ब्यौरा देने का आवेदन किया। इसके साथ ही उसने इस अर्जी पर काम करने वाले अधिकारियों के नाम तथा क्राम न करने की सूरत में उनके खिलाफ होने वाली कार्यवाही का ब्यौरा भी माँगा । सूचना के अधिकार वाला आवेदन देने के हफ्ते भर के अन्दर खाद्य विभाग का एक इन्स्पेक्टर उसके घर आया और उसने नन्नू को बताया कि तुम्हारा राशन कार्ड तैयार है तुम दफ्तर आकर उसे ले जा सकते हों। अगले दिन जब नन्नू राशन कार्ड लेने गया तो उस इलाके के खाद्य तथा आपूर्ति विभाग के सबसे बड़े अधिकारी ने गर्मजोशी के साथ उसका स्वागत किया। इस अधिकारी ने उसे चाय की पेशकश की तथा कहा कि अब आपका काम हो गया है। इसलिए सूचना के अधिकार वाला अपना आवेदन आप वापस ले लें।
नन्नू का उदाहरण क्या बताता है? नन्नू के इस आवेदन का अधिकारियों पर क्या असर हुआ? अपने माँ-पिताजी से पूछिए कि अपनी समस्याओं के लिए सरकारी कर्मचारियों के पास जाने का उनका अनुभव कैसा रहा है?
उत्तर—
  1. नन्नू का उदाहरण इस तथ्य की ओर संकेत करता है कि जो सरकारी अधिकारी नन्नू के प्रार्थना-पत्र पर विचार नहीं कर रहे थे तथा उसकी पूर्ण उपेक्षा कर रहे थे। वे उसको देखना भी पसन्द नहीं कर रहे थे परन्तु जब नन्नू ने सूचना के अधिकार का प्रयोग किया तो सरकारी अधिकारियों का नन्नू के प्रति व्यवहार भी अच्छा हो गया तथा उन्होंने उसका राशन कार्ड भी शीघ्र ही तैयार कर दिया।
  2. नन्नू के साथ अच्छा व्यवहार किया जाना तथा उसको अपेक्षित सूचना दिए जाने की स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई क्योंकि सरकारी अधिकारियों को सूचना पाने के अधिकार के अन्तर्गत जवाब देना ही पड़ता है। यदि वे लापरवाही दिखाएँगे तो उन पर कानूनी तथा विभागीय कार्यवाही हो सकती है।
  3. सरकारी अधिकारियों तथा कर्मचारियों के पास किसी कार्य के लिए जाने का अनुभव कड़वा होता है क्योंकि सरकारी अधिकारी भ्रष्टाचार तथा रिश्वतखोरी के कारण नागरिकों की समस्याओं पर उचित ध्यान नहीं देते हैं। परन्तु जब उनके विरुद्ध न्यायालय अथवा आयोगों में शिकायत की जाती है, तब वे नागरिकों के कार्य करने को तत्पर हो जाते हैं।
उपर्युक्त उदाहरण से यह आभास होता है कि सूचना के अधिकार सम्बन्धी अधिनियम (कानून) ने नागरिकों को बहुत सशक्त बना दिया है। लोकतन्त्र का यह विशेष गुण है कि वह जनसामान्य को सशक्त बनाने का प्रयास करता है।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
• विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – लोकतन्त्र को हम सबसे अच्छी शासन-व्यवस्था क्यों कह सकते हैं? इस व्यवस्था की कुछ विशेषताएँ बताइए । 
अथवा एक लोकतान्त्रिक सरकार की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
अथवा भारतीय लोकतन्त्र की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
अथवा लोकतन्त्र के गुण-दोषों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- लोकतन्त्र के गुणों या विशेषताओं की विवेचना निम्न प्रकार से की जा सकती है-
  1. लोकतन्त्र नागरिकों के अधिकारों तथा स्वतन्त्रताओं को बनाए रखता है तथा उनको उचित सम्मान भी प्रदान करता है।
  2. लोकतन्त्र सहमति का शासन है। लोकतन्त्र में जनता यह अनुभव करती है कि वह स्वयं अपने ऊपर शासन कर रही है। अतः लोकतन्त्र में नागरिक सरकार के साथ पूर्ण सहयोग करते हैं।
  3. लोकतन्त्र में कानून जन- इच्छाओं तथा आकांक्षाओं का प्रतिरूप होते हैं। कानून जनता की इच्छाओं के अनुरूप बनाए जाते हैं। यदि सरकार जन-विरोधी कानूनों का निर्माण करती है तो जनता को ऐसे कानूनों का विरोध करने का भी अधिकार प्राप्त होता है।
  4. लोकतन्त्र नैतिकता तथा आदर्श पर बल देता है। अतः लोकतान्त्रिक शासन-व्यवस्था समस्याओं का समाधान शान्तिपूर्ण तरीकों से करती है। लोकतन्त्र विश्व शान्ति, मानवता तथा प्रेम के मार्ग को प्रशस्त करता है।
  5. लोकतन्त्र में स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष न्यायपालिका होती है जो शासन की शक्ति को मर्यादित तथा नियन्त्रित करती है।
  6. लोकतन्त्र राष्ट्रवाद तथा अन्तर्राष्ट्रवाद में भी समन्वय स्थापित करता है।
  7. लोकतन्त्र में क्रान्ति की सम्भावनाएँ बहुत कम होती हैं क्योंकि लोकतन्त्र में जनता को विभिन्न माध्यमों द्वारा अपनी आवाज को उठाने की स्वतन्त्रता होती है।
  8. लोकतन्त्र में अल्पसंख्यकों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं क्योंकि लोकतन्त्र अल्पसंख्यकों की बहुसंख्यकों के अत्याचारों से सुरक्षा करता है।
लोकतन्त्र के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं-
  1. लोकतन्त्र में शासन व्यवस्था कमजोर होती है क्योंकि सरकार के विरुद्ध निरन्तर प्रदर्शन तथा धरने चलते रहते हैं । लोकतन्त्र में निर्णय बहुमत के द्वारा लिए जाते हैं। बहुमत का निर्णय प्राप्त करना बहुत कठिन है।
  2. संकटकालीन स्थिति का तत्कालीन समाधान करने में लोकतन्त्र अधिक सफल नहीं रहता है क्योंकि लोकतन्त्र में निर्णय लेने में काफी समय नष्ट हो जाता है।
  3. लोकतन्त्र पूँजीपतियों का गढ़ होता है। लोकतन्त्र में पूँजीपतियों द्वारा सरकारों का निर्माण किया जाता है। पूँजीपति राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ने के लिए धन की व्यवस्था करते हैं।
  4. लोकतन्त्र को आलोचकों ने मूर्खों के शासन की भी संज्ञा प्रदान की है। उनका तर्क यह है कि समाज में बहुसंख्यक अनपढ़, गरीब तथा निरक्षर हैं। अतः इनके मतों के आधार पर ही लोकतन्त्र में सरकारों का गठन होता है। ये मतदाता जाति, धर्म, सम्प्रदाय, क्षेत्र आदि की संकीर्ण मनोवृत्तियों से प्रभावित होते हैं।
  5. जब लोकतन्त्र में विकृतियाँ उत्पन्न हो जाती हैं तो वह भीड़तन्त्र में परिणत हो जाता है।
  6. लोकतन्त्र को बहुमत के शासन की संज्ञा दी जाती है, परन्तु व्यवहार में अल्पमत बहुमत के ऊपर शासन करता है।
  7. लोकतन्त्र में इस बात पर बल दिया जाता है कि यह जनता का शासन है परन्तु इसमें जनता शासन न करके, जनता का छोटा-सा समूह शासन करता है जिसको अभिजन कहा जाता है।
प्रश्न 2—लोकतन्त्र के आदर्शों, सिद्धान्तों एवं नियमों को कार्यान्वित करने अथवा व्यावहारिक स्वरूप प्रदान करने के लिए आवश्यक दशाओं (परिस्थितियों) की विवेचना कीजिए ।
उत्तर- लोकतन्त्र के लिए आवश्यक दशाएँ
वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व के लिए लोकतन्त्र एक नारा अथवा विचार बन गया है। विश्व के सभी राष्ट्र लोकतन्त्र का चोला पहनना चाहते हैं चाहे उनके यहाँ लोकतन्त्र को लागू करने के लिए आवश्यक दशाओं का अभाव ही क्यों न हो । लोकतन्त्र के आदर्शों, सिद्धान्तों एवं नियमों को लागू करने के लिए निम्नलिखित आवश्यक दशाएँ हैं-
  1. शिक्षा एवं साक्षरता का उच्च स्तर – लोकतन्त्र उन राष्ट्रों अथवा समाजों में अच्छी तरह से फल-फूल सकता है जहाँ लोग अधिक संख्या में शिक्षित एवं साक्षर होते हैं। शिक्षित व्यक्ति ही मत के मूल्य को समझते हैं तथा ऐसे उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करते हैं जो योग्य, कुशल तथा चरित्रवान हो। पढ़े-लिखे व्यक्ति ही चुनाव के समय राजनीतिक दलों द्वारा जारी किए गए घोषणा पत्रों का विश्लेषण कर सकते हैं। शिक्षित व्यक्ति ही जागरूक तथा स्वस्थ जनमत का निर्माण कर सकते हैं। अशिक्षित जनता को देश की समस्याओं का उचित ज्ञान भी नहीं होता है।
  2. सहनशीलता — लोकतन्त्र सहमति का शासन है। लोकतन्त्र में विचारों में विभिन्नता होना स्वाभाविक है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को स्वतन्त्र रूप से अपने को अभिव्यक्त करने की स्वतन्त्रता प्राप्त होती है। लोकतन्त्र में आलोचना तथा प्रत्यालोचना का वातावरण बना रहता है। अतः लोकतान्त्रिक व्यवस्था तभी उचित रूप से कार्य कर सकती है जबकि लोगों में सहनशीलता, सहयोग अथवा सामंजस्य करने की क्षमता विद्यमान हो । जब एक दल सत्तारूढ़ हो जाता है तो उसका यह दायित्व हो जाता है कि वह अपने देश के सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार करे, चाहे उनमें से कुछ उसके विरोधी ही क्यों न हो।
  3. आर्थिक समानता – यदि समाज में गरीबी, बेरोजगारी तथा भुखमरी की स्थिति व्याप्त है तो उसमें लोकतन्त्र का सफल संचालन बाधित हो जाता है। अतः लोकतन्त्र के लिए गरीब-अमीर की खाई बहुत चौड़ी नहीं होनी चाहिए। गरीब व्यक्ति अपने मत का सही प्रयोग नहीं कर सकता। अधिकांश गरीब लोग धन के लालच में अपने मतों को बेच देते हैं। अतः लोकतन्त्र की सफलता के लिए जनता का आर्थिक स्तर ऊँचा होना चाहिए। विद्वानों का यह मत उचित प्रतीत होता है कि आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतन्त्रता का कोई मूल्य नहीं है।
  4. शान्ति तथा सुव्यवस्था का वातावरण – देश के आर्थिक विकास के लिए समाज में कानून व्यवस्था तथा शान्ति की आवश्यकता होती है। लोकतन्त्र ऐसे देश में सफल नहीं होता है जहाँ हर समय क्रान्ति, हिंसा, उपद्रव तथा अशान्ति का वातावरणं विद्यमान हो।
  5. विचारों को अभिव्यक्त करने की स्वतन्त्रता – लोकतन्त्र तभी सम्भव हो सकता है जब नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के स्वतन्त्र रूप से विचारों को अभिव्यक्त करने का अधिकार हो, व्यक्ति को स्वतन्त्र रूप से मतदान का अधिकार हो, प्रेस तथा जनसंचार के साधनों को पूर्ण स्वायत्तता हो ।
  6. जन-जागृति- लोकतन्त्र में जनता को अपने अधिकारों के प्रति सचेत करना चाहिए। यदि उनके अधिकारों एवं स्वतन्त्रताओं का अतिक्रमण किया जाता है तो जनता को संगठित होकर उसका विरोध करना चाहिए। निरन्तर सतर्कता बनाए रखने के लिए ही लोकतन्त्र की सुरक्षा की जा सकती है। अतः लोकतन्त्र के सफल संचालन के लिए नागरिकों में राजनीतिक जागृति का होना आवश्यक है।
  7. स्थानीय स्वायत्त शासन को प्रोत्साहन – लोकतन्त्र को सफल बनाने के लिए स्थानीय स्वायत्त शासन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। लोकतन्त्र को सतही स्तर ( Grass-root level) पर लागू करके ही उसको | मजबूत बनाया जा सकता है।
प्रश्न 3 – ” भारत में लोकतन्त्र वांछनीय आशाओं को प्राप्त कर रहा है।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं?
उत्तर- ऐसे अनेक तथ्य विद्यमान हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि भारत में लोकतन्त्र नागरिकों की उम्मीदों पर खरा उतर रहा है। यह उनकी आशाओं तथा विश्वासों के अनुरूप कार्य कर रहा है। हम उपर्युक्त कथन से सहमत हैं तथा इसके पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं-
  1. सरकारों तथा स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रयासों से जनता का आर्थिक स्तर सुधर रहा है। नागरिकों को जीवन की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए गए हैं । स्वतन्त्रता प्राप्ति के उपरान्त स्थिति में क्रान्तिकारी परिवर्तन हुए हैं परन्तु फिर भी देश के कुछ भागों में लोग ठीक प्रकार से भोजन, आवास तथा वस्त्रों को प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
  2. शिक्षा का सर्वसुलभीकरण तथा सार्वभौमीकरण किया जा रहा है। बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। अब भारत में साक्षरता का प्रतिशत बढ़ा है।
  3. सरकार द्वारा प्रारम्भ किए गए अनेक रोजगारपरक कार्यक्रमों द्वारा बेरोजगारी की समस्या का समाधान करने के सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
  4. किसानों को महाजनों के चंगुल से बचाने के लिए बैंकों, वित्तीय संस्थानों तथा सहकारी समितियों के द्वारा किसानों को कम ब्याज पर ऋण देने की व्यवस्था की जा रही है। परन्तु देश के अनेक भागों में अब भी किसानों की आर्थिक स्थिति सन्तोषजनक नहीं है। अनेक किसानों को आत्महत्या करने के लिए विवश होना पड़ा है।
  5. शासन, सामाजिक एवं धार्मिक सुधार संस्थाओं, महिला संगठनों तथा जागरूकता संगठनों के प्रयासों से समाज की अनेक बुराइयों का अन्त हुआ है। महिलाओं को पुरुषों के समान स्तर प्राप्त हुआ है। महिला – शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा, बहुपत्नी विवाह, सती प्रथा तथा बाल-विवाह जैसी कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई जा रही है तथा आन्दोलन किए जा रहे हैं।
  6. हमारी लोकतान्त्रिक व्यवस्था आतंकवाद जैसी समस्याओं का समाधान करने में अधिक सफल नहीं हुई है परन्तु विभिन्न तरीकों से आतंकवाद को जड़ से समाप्त किए जाने के प्रयास चल रहे हैं।
• लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – लोग लोकतन्त्र क्यों अधिक पसन्द करते हैं? चार कारण देकर स्पष्ट कीजिए ।
अथवा लोकतन्त्र शासन की अन्य व्यवस्थाओं से बेहतर क्यों है? समझाइए |
उत्तर- लोग लोकतन्त्र को निम्नलिखित कारणों से अधिक पसन्द करते हैं—
  1. लोकतन्त्र एक पारदर्शी शासन व्यवस्था है। लोकतन्त्र में इस बात की पूर्ण व्यवस्था होती है कि निर्णय विधिसम्मत होंगे और अगर कोई नागरिक यह जानना चाहे कि निर्णय लेने में नियमों का पालन हुआ है या नहीं तो वह इसका पता कर सकता है।
  2. नियमित और निष्पक्ष चुनाव, प्रमुख नीतियों और नये कानूनों पर सार्वजनिक बहस और सरकार तथा इसके काम-काज के विषय में जानकारी पाने का नागरिकों का ‘सूचना का अधिकार’ इसे और अधिक लोकप्रिय बनाता है।
  3. लोकतान्त्रिक शासन-व्यवस्था वैध शासन-व्यवस्था है क्योंकि लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था लोगों की अपनी शासन-व्यवस्था है।
प्रश्न 2 – लोकतन्त्र का क्या अर्थ है? इसकी चार प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर – अब्राहम लिंकन के अनुसार, “लोकतन्त्र जनता का, जनता के लिए तथा जनता द्वारा शासन है।” लोकतन्त्र की चार प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
  1. लोकतन्त्र नागरिक्क़ों के अधिकारों तथा स्वतन्त्रताओं को बनाए रखता है तथा उनको उचित सम्मान भी प्रदान करता है।
  2. लोकतन्त्र सहमति का शासन है। लोकतन्त्र में जनता यह अनुभव करती है कि वह स्वयं अपने ऊपर शासन कर रही है। अतः लोकतन्त्र में नागरिक सरकार के साथ पूर्ण सहयोग करते हैं।
  3. लोकतन्त्र में कानून जन- इच्छाओं तथा आकांक्षाओं का प्रतिरूप होते हैं। कानून जनता की इच्छाओं के अनुरूप बनाए जाते हैं। यदि सरकार जन-विरोधी कानूनों का निर्माण करती है तो जनता को ऐसे कानूनों का विरोध करने का भी अधिकार प्राप्त होता है।
  4. लोकतन्त्र नैतिकता तथा आदर्श पर बल देता है। अतः लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था समस्याओं का समाधान शान्तिपूर्ण तरीकों से करती है। लोकतन्त्र विश्व शान्ति, मानवता तथा प्रेम के मार्ग को प्रशस्त करता है।
प्रश्न 3 – ‘ सन् 1950 में भारत में लोकतन्त्र को लागू करना एक क्रान्ति का कार्य था । ” संक्षिप्त व्याख्या कीजिए ।
उत्तर— भारत को सन् 1947 में स्वतन्त्रता प्राप्त हुई तथा 26 जनवरी, 1950 को संविधान सभा द्वारा निर्मित संविधान को देश में लागू . किया गया। संविधान द्वारा शासन व्यवस्था संचालित करने में अपरिपक्व देश में लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था को अपनाना एक क्रान्तिकारी कदम था। उस समय देश की आन्तरिक तथा बाह्य परिस्थितियाँ भी अच्छी नहीं थीं। भारत औद्योगिक रूप से पिछड़ा हुआ, कृषि प्रधान देश था। भारत एक गरीब देश था। समाज में आर्थिक विषमता थी । भारतीय कृषि, उद्योग, लोग निरक्षर तथा अशिक्षित थे। संविधान निर्माताओं ने भारत के लिए यातायात, परिवहन एवं संचार के साधन आदि पिछड़े हुए थे। अधिकांश संसदीय लोकतन्त्र को चुना। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार द्वारा भारत के सर्वसाधारण को मताधिकार प्राप्त हुआ, उसे नई पहचान मिली तथा नई आशाओं का संचार हुआ। 1952 से प्रारम्भ हुई प्रथम चुनाव की प्रक्रिया के बाद अब तक (2014 तक) 16 आम आम चुनाव हो चुके हैं। ये चुनाव निर्धारित समय पर, शान्तिपूर्वक तथा कुशलता से सम्पन्न कराए गए हैं। नागरिक की लोकतन्त्र से आशा तथा विश्वास ने भारत में लोकतन्त्र की जड़ों को भी बहुत मजबूत कर दिया है।
प्रश्न 4 – भारतीय सामाजिक व्यवस्था पर औद्योगीकरण का क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर – भारतीय सामाजिक व्यवस्था पर औद्योगीकरण के प्रभाव को निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है-
  1. औद्योगिक व्यवस्था के कारण समाज में जातिगत बन्धन बहुत ढीले हो गए हैं। ऊँच-नीच तथा छोटे-बड़े का भेद समाप्त हो गया है।
  2. औद्योगीकरण ने भारत में सामाजिक सफलता तथा न्याय को मजबूत किया है।
  3. औद्योगीकरण के कारण कोई भी गरीब व्यक्ति अपने परिश्रम, बुद्धि एवं कौशल के बल पर कालान्तर में धनी हो सकता हैं। अब एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति का जन्म से ही शोषण किया जाना असम्भव है। बँधुआ मजदूरी समाप्त हो चुकी है।
  4. औद्योगीकरण ने सम्पूर्ण समाज को एक दृष्टि से दो परस्पर विरोधी गुटों में विभाजित कर दिया है, ये दो गुट — पूँजीपतियों तथा श्रमिकों के वर्ग हैं। पूँजीवादी व्यवस्था निरन्तर मजबूत होती जा रही है । उदारीकरण, किया है। अब भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था को समाप्त करने के प्रयास निजीकरण तथा वैश्वीकरण की प्रक्रिया ने पूँजीवाद को और भी मजबूत तेज कर दिए हैं।
  5. कुछ विद्वानों का यह मत है कि औद्योगीकरण ने पूँजीवाद को बढ़ावा दिया जिसका परिणाम यह हुआ कि अब नए ढंग से राष्ट्रीय संसाधनों का शोषण किया जाने लगा है। गरीब, मजदूरों, बच्चों तथा महिला श्रमिकों का दिन-प्रतिदिन शोषण बढ़ रहा है। उन्हें वर्तमान में बहत कम वेतन दिया जा रहा है तथा उद्योगपतियों द्वारा जो सुविधाएँ उन्हें तुरन्त मिलनी चाहिए थीं, उनसे उन्हें वंचित रखा गया है।
• अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – नागरिकों की लोकतन्त्र से क्या आशाएँ हैं? किन्हीं चार का उल्लेख कीजिए ।
अथवा लोकतन्त्र की दो विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर- (1) राजनीतिक गतिविधियों में सहभागिता,
(2) सन्तुलित विकास,
(3) कमजोर एवं पिछड़े वर्गों का उत्थान एवं कल्याण,
(4) जीवनयापन की सुखद परिस्थितियाँ ।
प्रश्न 2 – लोकतन्त्र की परिभाषा दीजिए।
अथवा लोकतन्त्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर – अब्राहम लिंकन के अनुसार, “लोकतन्त्र जनता का, जनता के लिए तथा जनता के द्वारा शासन है ।”
प्रश्न 3 – निम्नलिखित में कौन-सी शासन व्यवस्था सामान्यतः बेहतर मानी जाती है-
(i) राजतन्त्र, (ii) तानाशाही, (iii) लोकतन्त्र ।
उत्तर – (iii) लोकतन्त्र।
प्रश्न 4 – किस प्रकार की शासन व्यवस्था में कायदे-कानून द्वारा शासन देखने को मिलता है?
अथवा कानून का शासन किस शासन व्यवस्था में देखने को मिलता है?
अथवा ‘कानून का शासन’ किस शासन-व्यवस्था का नाम है?
उत्तर— लोकतन्त्रात्मक शासन व्यवस्था में कायदे-कानून से शासन का संचालन देखने को मिलता है।
• बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1 – लोकतन्त्र शासन की अन्य व्यवस्थाओं से श्रेष्ठ है क्योंकि यह-
(अ) नागरिकों में समानता को बढ़ावा देता है
(ब) व्यक्ति की गरिमा को बढ़ाता है
(स) इसमें गलतियों को सुधारने की गुंजाइश होती है।
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर – (द) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 2 – वर्तमान में विश्व में निम्नलिखित में से किस प्रकार की सरकारों की संख्या अधिक है-
(अ) राजतन्त्रात्मक सरकार
(ब) लोकतन्त्रात्मक सरकार
(स) तानाशाही सरकार
(द) सीमित राजतन्त्रात्मक सरकार ।
उत्तर- (ब) लोकतन्त्रात्मक सरकार ।
प्रश्न 3 – वैध शासन व्यवस्था के मामले में ………. शासन व्यवस्था निश्चित रूप से अन्य शासनों से बेहतर है।
(अ) तानाशाही
(ब) भ्रष्टाचारी
(स) लोकतान्त्रिक
(द) ये सभी।
उत्तर- (स) लोकतान्त्रिक।
प्रश्न 4 – उस प्रक्रिया को क्या कहते हैं जिसमें लोकतन्त्र के निर्णय कायदे-कानून के अनुसार लिए जाते हैं-
(अ) पारदर्शी प्रक्रिया
(ब) तानाशाही प्रक्रिया
(स) मनमानी प्रक्रिया
(द) अपारदर्शी प्रक्रिया।
उत्तर- (अ) पारदर्शी प्रक्रिया ।
प्रश्न 5 – लोकतान्त्रिक सरकारों में नहीं होता है-
(अ) पारदर्शिता
(ब) नियमित और निष्पक्ष चुनाव
(स) त्वरित निर्णय
(द) कानून निर्माण पर खुली चर्चा ।
उत्तर— (स) त्वरित निर्णय ।
प्रश्न 6 – लोकतान्त्रिक व्यवस्था आधारित होती है-
(अ) राजनीतिक समानता पर
(ब) राजनीतिक विषमता पर
(स) न्यायपूर्ण वितरण पर
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर- (अ) राजनीतिक समानता पर ।

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