UK Board 9 Class Hindi Chapter 5 – नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया (गद्य-खण्ड)
UK Board 9 Class Hindi Chapter 5 – नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया (गद्य-खण्ड)
UK Board Solutions for Class 9th Hindi Chapter 5 – नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया (क्षितिज : गद्य-खण्ड)
I. लेखिका – परिचय
प्रश्न- चपला देवी का साहित्यिक परिचय दीजिए।
उत्तर- चपला देवी
चपला देवी अपने समय की गुमनाम लेखिकाओं में से हैं। उनका जीवन-परिचय अभी तक कहीं उपलब्ध नहीं होता है। उनकी रचना को पढ़कर उनकी निम्नलिखित साहित्यिक विशेषताएँ प्रकट होती हैं-
युग संघर्ष की अभिव्यक्ति : प्रमुख भाव – चपला देवी का साहित्य अपने युग के संघर्ष को अभिव्यक्ति देता है। उन्होंने स्वतन्त्रता-संग्राम के अछूते विषय को जिस प्रकार से अभिव्यक्ति दी है, उससे उनका राष्ट्रप्रेम एवं निर्भीकता प्रकट होती है। देवी मैना के चरित्र को उजागर करनेवाली घटना, प्रधान रूप से स्वतन्त्रता संग्राम में अंग्रेजों के भारतीयों पर अत्याचार का जीता-जागता प्रमाण है। इसे पढ़कर स्वतन्त्रता-संग्राम के दीवानों के प्रयास की झाँकी आँखों के सामने साकार हो उठती है।
भाषा-शैली- चपला देवी की भाषा संस्कृतप्रधान है। उदाहरणतया –
” ‘अर्द्ध रात्रिके समय चाँदनीमें एक बालिका स्वच्छ उज्ज्वल वस्त्र पहने हुए नानासाहबके भग्नावशिष्ट प्रासादके ढेरपर बैठी रो रही थी । “
संस्कृत के अतिरिक्त उनकी भाषा में उर्दू तथा अंग्रेजी के शब्द भी यदा-कदा देखने को मिल जाते हैं। उनकी शैली में भावोद्वेलन की अद्भुत क्षमता है।
II. अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – निम्नलिखित गद्यांशों से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
1. सन् 1857 ई० …………….. कर देता है।
प्रश्न –
(क) कहानी तथा कहानीकार का नाम लिखिए।
(ख) गद्यांश क आशय स्पष्ट कीजिए।
(ग) मैना बिटूर के महल में क्यों रहती थी?
(घ) मैनां का किस अपराध में आग में भस्म कर डाला गया?
(ङ) ‘निरीह ‘ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और क्यों ?
(च) पाषाण हृदय से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
(क) कहानी – नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया। कहानीकार – चपला देवीं ।
(ख) आशय सन् 1857 ई० में भारत में प्रथम स्वतन्त्रता-संग्राम हुआ था। उसमें विद्रोही नेताओं की अग्रिम पंक्ति में धुन्धूपन्त नाना साहब भी थे। उस समय कानपुर उनकी गतिविधियों का केन्द्र था। भारत की स्वतन्त्रता के लिए किए गए इस विद्रोह को अंग्रेजों ने बड़ी बर्बरता से कुचला । असफल हो जाने पर नाना साहब कानपुर छोड़कर भाग निकले। भागने की जल्दी में वे अपने साथ अपनी बेटी मैना को बिठूर से न ले जा सके। मैना उन्हीं के साथ बिठूर के महल में रहती थी।
जब स्वतन्त्रता संग्राम शान्त हो गया तो अंग्रेजों ने नाना साहब की बेटी मैना को पकड़ लिया। उस निरपराध कन्या को अंग्रेजों ने बड़ी क्रूरता के साथ दहकती आग में जलाकर भस्म कर डाला। उसके इस प्रकार जलाए जाने की घटना इतनी बीभत्स और कारुणिक थी कि उसको सुनकर कठोर से कठोर हृदयवाले व्यक्ति का मन भी पिघले बिना न रहता।
(ग) जिन दिनों नाना साहब कानपुर में रहकर स्वतन्त्रता-संग्राम का संचालन कर रहे थे, उन दिनों उनकी बेटी मैना बिठूर के राजमहल में रह रही थी। स्वतन्त्रता संग्राम असफल हो गया। नाना साहब को कानपुर छोड़कर भागना पड़ा। उचित व्यवस्था के अभाव और जल्दबाजी में वे अपनी बेटी को साथ न ले जा सके। इस कारण मैना बिठूर के महल में ही रहती रही ।
(घ) मैना निरपराध कन्या थी। उसका कुसूर केवल इतना था कि वह स्वतन्त्रता संग्राम के विद्रोही नेता धुन्धूपन्त नाना साहब की बेटी थी । नाना साहब से अंग्रेज सरकार बुरी तरह चिढ़ी हुई थी। नाना साहब से बदला लेने के लिए अंग्रेज सरकार ने नाना साहब की बेटी मैना को जलती आग में जिन्दा भस्म कर दिया।
(ङ) ‘निरीह’ का अर्थ है – मासूम, बेचारा । यह शब्द मैना के लिए प्रयुक्त हुआ है।’ क्योंकि मैना का कोई अपराध नहीं था, वह तो हालात की मारी बेचारी बेसहारा कन्या थी ।
(च) ‘पाषाण हृदय’ का तात्पर्य है— कठोर दिलवाला, क्रूर, अत्याचारी ।
2. ” बड़े दुःख का …………. देना चाहिये।”
प्रश्न –
(क) कहानी तथा कहानीकार का नाम लिखिए।
(ख) अंग्रेज नाना साहब को ‘दुर्दान्त’ क्यों मानते थे ?
(ग) सेनापति ‘हे’ की किस बात के कारण हँसी उड़ाई गई?
(घ) सेनापति ‘हे’ को किसने कलंकित कहा और क्यों?
(ङ) नाना साहब की बेटी मैना पर अंग्रेज सरकार के कोप का कारण क्या था?
उत्तर :
(क) कहानी – नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया। कहानीकार — चपला देवी ।
(ख) सन् 1857 ई० के स्वतन्त्रता संग्राम में विद्रोही सैनिकों के साथ-साथ आम जनता की भी भागीदारी थी। अंग्रेज नर-नारियों की भी हत्याएँ आन्दोलनकारियों ने की थीं। इन सबके नेता थे- नाना साहब । नाना साहब की प्रेरणा से ही क्रान्तिकारियों ने ये हत्याकाण्ड किए थे, इसीलिए अंग्रेज नाना साहब को ‘दुर्दान्त’ मानते थे ।
(ग) सेनापति ‘हे’ अंग्रेज सरकार से देवी मैना पर दया करने और उसे छोड़ देने की प्रार्थना की थी, परन्तु बदले की भावना से जल रहे अंग्रेजों की पार्लियामेण्ट की ‘हाउस ऑफ लार्ड्स’ सभा के सदस्यों ने इस दया – याचना को मूर्खता कहकर सेनापति ‘हे’ की हँसी उड़ाई।
(घ) लन्दन के पत्र ‘टाइम्स’ में छपे एक लेख के लेखक ने सेनापति के दया – प्रस्ताव को उसके लिए कलंक की बात कहा था; क्योंकि ‘टाइम्स’ में छपे लेख के लेखक की दृष्टि में अंग्रेज नर-नारियों का क्रूर हत्याकाण्ड कराने में नाना साहब की सक्रिय भूमिका थी। इसलिए उस लेखक के मतानुसार उसे ( नाना साहब को ) सबक सिखाने के लिए बदले की भावना से नाना साहब के प्रत्येक सम्बन्धी का वध कर देना चाहिए। दूसरे उस लेखक ने सर ‘हे’ का उपहास करने के लिए यह तक कह डाला कि अब वृद्धावस्था में आकर सेनापति ‘हे’ एक महाराष्ट्रीय बालिका के सौन्दर्य पर मोहित हो गए हैं।
(ङ) नाना साहब की बेटी मैना पर अंग्रेज सरकार के कोप का कारण उसका नाना साहब की बेटी होना ही था। अंग्रेज नाना साहब से चिढ़े हुए थे; क्योंकि कानपुर में अंग्रेज नर-नारियों के हत्याकाण्ड के प्रेरणास्त्रोत नाना साहब ही थे। अंग्रेज सरकार उन्हें पकड़ नहीं पा रही थी, क्योंकि वे भूमिगत हो गए थे। अंग्रेज नाना साहब पर गुस्सा नहीं उतार पा रहे थे, इसलिए उनकी बेटी पर ही कोप करके अपने मन को शान्त कर रहे थे।
3. सन् 57 के ……………… देती थी।
प्रश्न –
(क) कहानी तथा कहानीकार का नाम लिखिए।
(ख) कौन बालिका कहाँ पर क्यों रो रही थी?
(ग) सैनिक बालिका के पास क्यों पहुँचे ?
(घ) बालिका सैनिकों के प्रश्नों के उत्तर क्यों नहीं दे रही थी?
(ङ) ‘ भग्नावशिष्ट प्रासाद’ से क्या आशय है?
उत्तर :
(क) कहानी – नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया। कहानीकार – चपला देवी ।
(ख) नाना साहब की बेटी देवी मैना अपने बिठूरवाले खण्डहर राजमहल के मलबे के ढेर पर बैठकर रो रही थी। उसे अपने महल से प्रेम था। अब वह पिता से अलग थी और उसके रहने का स्थान वह महल भी नष्ट हो गया था; अतः वह अपनी दुरवस्था व विवशता पर रो रही थी।
(ग) नाना साहब के टूटे महल के पास अंग्रेज सैनिक ठहरे थे। मैना के आधी रात में रोने के स्वर को सुनकर वे उसके पास पहुँच गए।
(घ) बालिका मैना दुःख में डूबी हुई थी। वह सदमे की स्थिति में थी। जो कुछ हुआ था वह उसके लिए अकल्पनीय था; अत: वह अवाक् थी। वह न कुछ बोल पा रही थी, न सुन पा रही थी। इस प्रकार वह उत्तर देने की स्थिति में थी ही नहीं ।
(ङ) ‘भग्नावशिष्ट प्रासाद’ से आशय है—टूटा-फूटा महल ।
4. इसके बाद …………. गिरफ्तार किया। “
प्रश्न –
(क) कहानी तथा कहानीकार का नाम लिखिए।
(ख) जनरल अउटरम कौन था? उसे कराल रूपधारी क्यों कहा गया है?
(ग) जनरल अउटरम ने देवी मैना को क्यों गिरफ्तार किया?
(घ) बालिका की मानसिक स्थिति एवं हार्दिक वेदना का वर्णन कीजिए।
(ङ) बालिका क्यों नहीं डरी?
उत्तर :
(क) कहानी— नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया। कहानीकार — चपला देवी ।
(ख) जनरल अउटरम अंग्रेज सेना का जनरल था। वह सन् 1857 ई० के स्वतन्त्रता संग्राम के विद्रोह को दबाने और विद्रोहियों का हौसला पस्त करने के उद्देश्य से भारत आया था। विद्रोहियों को दमन की चक्की में पीसने में उसका भयंकर रूप भी कम भागीदार नहीं था। उसका रूप बहुत डरावना था, इसीलिए उसे कराल रूपधारी कहा गया है।
(ग) जनरल अउटरम ने देवी मैना को केवल इसलिए गिरफ्तार किया कि वह नाना साहब की बेटी थी। अंग्रेज सरकार ने आदेश दिया था कि नाना साहब के पुत्र, कन्या, सम्बन्धी जो भी मिले, सबको तत्काल कत्ल कर दिया जाए।
(घ) बालिका मैना बिठूर का महल टूट जाने तथा पिता के भूमिगत हो जाने से मानसिक रूप से टूट गई थी। उस पर दोहरे दुःख की मार पड़ी थी। वह सदमे की स्थिति में थी । उसका दिल टूट चुका था। संसार ने उस पर दया नहीं की थी। वह इसीलिए अब भयमुक्त हो चुकी थी। उसके हृदय पर गहरी निराशा छा गई थी, इसीलिए वह आँख उठाकर न देख रही थी, न कुछ सुन रही थी।
(ङ) बालिका मैना को भय से भी मुक्ति मिल गई थी। जब इतना बड़ा महल ध्वस्त किया जा सकता था, तब फिर उसकी क्या बिसात थी। इसलिए वह डरी नहीं ।
5. मैना उसके …………… प्रणाम किया । “
प्रश्न –
(क) कहानी तथा कहानीकार का नाम लिखिए।
(ख) गद्यांश के आधार पर अंग्रेजों की क्रूरता का वर्णन कीजिए।
(ग) मैना की हत्या किस प्रकार की गई ?
(घ) मैना ने जनरल अउटरम से कौन-सी अन्तिम इच्छा व्यक्त की?
(ङ) मैना की अन्तिम इच्छा पर जनरल अउटरम ने क्या किया?
(च) कानपुरवासियों ने किसे देवी मानकर प्रणाम किया और क्यों?
उत्तर :
(क) कहानी — नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया। कहानीकार – चपला देवी ।
(ख) अंग्रेज जनरल अत्यन्त क्रूर थे। उनके हृदय में एक बालिका के लिए भी दया नहीं थी। उन्होंने नाना साहब की इकलौती बेटी, जो बिठूर में अकेले छूट गई थी, को कुछ देर रोकर अपना हृदय हल्का करने के लिए भी समय नहीं दिया; उसकी अन्तिम इच्छा भी पूरी न की । इससे पता चलता है कि वे पाषाणहृदय थे, परन्तु उनकी अमानवीयता एवं क्रूरता का पूर्ण ज्ञान उस समय होता है, जब उसके कोमल शरीर को लोहे की हथकड़ियों में जकड़कर, वे पहले उसे किले में कैद कर देते हैं और फिर बाद में जलती हुई आग में झोंक देते हैं।
(ग) मैना को पहले तो बिठूर से गिरफ्तार किया गया, फिर कानपुर के किले में कैद कर दिया गया और अन्ततः उसे जलती हुई आग में भस्म कर दिया गया।
(घ) मैना ने जनरल अउटरम से निम्नलिखित रूप में अपनी अन्तिम इच्छा व्यक्त की-
“मुझे कुछ समय दीजिए, जिसमें आज मैं यहाँ जी भरकर रो लूँ।”
(ङ) मैना की अन्तिम इच्छा की जनरल अउटरम ने तनिक भी परवाह न की। उल्टे उसने निर्दयतापूर्वक उसे हथकड़ी डालकर गिरफ्तार करके कानपुर के किले में कैद में डाल दिया।
(च) कानपुरवासियों ने नाना साहब की बेटी को जलती आग में भस्म होते देखा। अग्नि में भस्म होती एक सरलमूर्ति अनुपमा बालिका को देखकर उन्होंने उसे देवी मानकर प्रणाम किया।
III. पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1 – बालिका मैना ने सेनापति ‘हे’ को कौन-कौन-से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया?
उत्तर – बालिका मैना ने सेनापति ‘हे’ को महल की रक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए निम्नलिखित तर्क दिए—
1. अंग्रेज सरकार और सैनिकों के विरुद्ध हथियार उठानेवाले लोग दोषी माने जा सकते हैं, परन्तु यह निर्जीव महल नहीं ।
2. यह महल उसे बहुत प्रिय है।
प्रश्न 2 – मैना जड़ पदार्थ मकान को बचाना चाहती थी, पर अंग्रेज उसे नष्ट करना चाहते थे। क्यों?
उत्तर— मैना जड़ पदार्थ मकान अर्थात् अपने राजमहल को बचाना चाहती थी; क्योंकि उसी राजमहल में वह पली-बढ़ी थी। राजमहल के साथ उसके माता-पिता, भाई-बहन व सखी-सहेली आदि की अनेक स्मृतियाँ जुड़ी हुई थीं। वह राजमहल निर्जीव या जड़ पदार्थ अवश्य था, परन्तु सबकी यादें उससे जुड़ी होने के कारण वह सजीव हो उठा था। मैना के लिए वह उसकी पूरी जिन्दगी से जुड़े लोगों का जीवन्त प्रतीक ही था । दुःख के इस समय में यदि कोई उसे मानसिक शान्ति दे सकता था तो केवल वह राजमहल और उससे जुड़ी यादें । इसलिए वह उसे हर हाल में बचाना चाहती थी, लेकिन अंग्रेज उसे नष्ट करना चाहते थे; क्योंकि वह विद्रोही नेता नाना साहब का एक महत्त्वपूर्ण स्मृति चिह्न था ।
प्रश्न 3 – सर टामस ‘हे’ के मैना पर दया भाव के क्या कारण थे?
उत्तर – कहानी में प्रस्तुत घटनाओं से प्रतीत होता है कि सर टामस ‘हे’ एक दयावान् व्यक्ति रहे होंगे। उस एकान्त सन्नाटे में एक किशोरी को अकेली देख अवश्य उनके मन में उसके प्रति जिज्ञासा जगी होगी। वह किशोरी सुन्दरी और कोई नहीं नाना साहब की बेटी मैना थी।
मैना उनकी स्वयं की बेटी ‘मेरी’ की सखी थी। मैना के द्वारा यह बताए जाने पर कि वह और उनकी बेटी ‘मेरी’ पक्की सहेली थीं और ‘मेरी’ की मृत्यु पर वह बहुत रोई थी, निश्चय ही मानवीयता की भावना सर टामस ‘हे’ के मन में जाग गई होगी।
इसके अतिरिक्त मैना की करुणामयी बातें और तर्क उन्हें प्रभावित कर गए।
प्रश्न 4 – मैना की अंतिम इच्छा थी कि वह उस प्रासाद के ढेर पर बैठकर जी भरकर रो ले, लेकिन पाषाण हृदयवाले जनरल ने किस भय से उसकी इच्छा पूर्ण न होने दी?
उत्तर – जनरल अउटरम के मन में यह भय रहा होगा कि उसने यदि नाना साहब की बेटी पर दया दिखाई तो उसे ब्रिटिश सरकार का कोपभाजन बनने में देर न लगेगी। हो सकता है उसे दण्ड भी दिया जाए। क्रोध से पागल होकर सामान्य अंग्रेज नागरिक भी उस पर नाराजगी प्रकट करेंगे। इसलिए उसने मैना की यह छोटी-सी और अन्तिम इच्छा पूर्ण न होने दी।
प्रश्न 5- बालिका मैना के चरित्र की कौन-कौन सी विशेषताएँ आप अपनाना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर – बालिका मैना के चरित्र की अपनाने योग्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं- ‘
1. साहस — बालिका मैना साहसी थी। जब सेनापति ‘हे’ अपने सैनिकों को लेकर उसके राजमहल को तोड़ने आया तो उसने साहसपूर्वक उसका सामना किया। उसे अपने पकड़े जाने का भय अवश्य रहा होगा, परन्तु वह साहसपूर्वक उससे बात करने आई।
2. बुद्धिमती – संकट आ पड़ने पर भी मैना घबराई नहीं । बुद्धिमानी से उसने तर्क दिया कि राजमहल ने अंग्रेजों का क्या बिगाड़ा है, जो उसे दण्ड दिया जा रहा है। उसने सेनापति ‘हे’ को अपनी और उसकी बेटी ‘मेरी’ की मित्रता का वास्ता देकर उसके मन में अपने प्रति करुणा जगा दी।
3. स्वगृह – प्रेम – राजमहल से उसका प्रेम स्वाभाविक और अनुकरणीय है। इसलिए महल के ध्वस्त होने की कल्पनामात्र से ही वह दुःखी थी। टूट जाने पर भी वह अपने खण्डहर राजमहल के मलबे के ढेर पर बैठकर, रोकर अपना मन हल्का करना चाहती है। मैना का चरित्र अल्पवय में भी महानता का स्पर्श लिए हुए है।
प्रश्न 6 – ‘टाइम्स’ पत्र ने 6 सितंबर को लिखा था- ‘बड़े दुःख का विषय है कि भारत सरकार आज तक उस दुर्दात नाना साहब को नहीं पकड़ सकी।’ इस वाक्य में ‘भारत सरकार’ से क्या आशय है?
उत्तर- ‘टाइम्स’ पत्र के इस समाचार में ‘भारत सरकार’ से आशय है— ब्रिटिश शासन के अन्तर्गत चलनेवाली भारत सरकार, जिसे ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के निर्देश पर अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारी चलाते थे।
