UK 9th Social Science

UK Board 9th Class Social Science – (इतिहास) – Chapter 3 नात्सीवाद और हिटलर का उदय

UK Board 9th Class Social Science – (इतिहास) – Chapter 3 नात्सीवाद और हिटलर का उदय

UK Board Solutions for Class 9th Social Science – सामाजिक विज्ञान – (इतिहास) – Chapter 3 नात्सीवाद और हिटलर का उदय

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1 – वाइमर गणराज्य के सामने क्या समस्याएँ थीं?
उत्तर— सन् 1914 के प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् जर्मनी का सम्राट कैसर विलियम द्वितीय देश छोड़कर भाग गया। जर्मनी में राजतन्त्र का पतन हो गया। इसके पश्चात् वहाँ गणराज्य की स्थापना हो गई। जर्मनी के इतिहास में यह गणराज्य ‘वाइमर गणराज्य’ के नाम से विख्यात है। वाइमर गणराज्य को शीघ्र ही कुछ बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जो निम्नलिखित थीं-
  1. इसे वर्साय की अपमानजनक सन्धि पर हस्ताक्षर करने पड़े।
  2. इसे मित्र – राष्ट्रों को युद्ध की क्षतिपूर्ति के रूप में भारी धनराशि देनी पड़ी।
  3. देश में मुद्रा स्फीति के कारण कीमतों में अत्यधिक वृद्धि हो चुकी थी । वाइमर सरकार मूल्य वृद्धि को रोकने में पूर्णतः असफल रही।
  4. देश में बेरोजगारी बढ़ गई थी तथा उद्योग व व्यापार पिछड़ गए थे।
  5. मित्र-राष्ट्रों ने जर्मनी को कमजोर करने के लिए इसका विसैन्यीकरण कर दिया।
  6. युद्ध अपराध न्यायाधिकरण ने जर्मनी को युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराने के साथ- साथ मित्र – राष्ट्रों को हुए नुकसान के लिए भी उत्तरदायी ठहराया।
अतः इसके साथ-साथ सेना में असन्तोष बढ़ने लगा। जर्मन जनता का वाइमर सरकार से मोह भंग हो गया। परिणामस्वरूप उक्त असन्तोषजनक स्थिति हिटलर के उत्कर्ष में सहायक रही।
प्रश्न 2 – इस बारे में चर्चा कीजिए कि 1930 तक आते-आते जर्मनी में नात्सीवाद को लोकप्रियता क्यों मिलने लगी?
उत्तर – प्रथम विश्वयुद्ध के उपरान्त पराजित जर्मनी के लिए वर्साय की सन्धि बड़ी अपमानजनक थी। इसकी कठोरता के कारण जर्मनी में नाजीवाद का उत्थान हुआ। इसके नेता हिटलर ने वर्साय के सन्धि-पत्र की अपमानजनक शर्तों की धीरे-धीरे अवहेलना करनी शुरू कर दी। वह उपनिवेशवाद, सैन्यवाद व विस्तारवाद में विश्वास करता था। जर्मनी में जिन कारकों ने नाजीवाद के उत्थान में योगदान दिया, वे निम्नलिखित थे –
  1. जर्मनी में राजनीतिक अस्थिरता – हिटलर के उत्थान से पूर्व जर्मनी पर वाइमर गणराज्य का शासन था। इसके शासनकाल में देश में बेरोजगारी बढ़ गई तथा क़ीमतों में अत्यधिक वृद्धि हुई। इससे सेना में भी असन्तोष फैल गया। हिटलर ने ऐसी स्थिति का पूरा-पूरा लाभ उठाया। उसने जर्मनी की जनता को विश्वास दिलाया कि वह राष्ट्र का खोया हुआ सम्मान पुनः वापस लाएगा। जर्मनी की सभी समस्याओं का समाधान करके वह उसे विश्व की नई शक्ति बनाएगा ।
  2. आर्थिक संकट – प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी को गहरे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। इस युद्ध में जर्मनी को अपार जन एवं धन की हानि उठानी पड़ी। इसके शहर एवं कस्बे, व्यापार एवं वाणिज्य, कारखानों एवं उद्योगों को पूर्णतया नष्ट कर दिया गया था। सन् 1929 के आर्थिक संकट ने जर्मनी की आर्थिक स्थिति पर और भी कुप्रभाव डाला। जर्मनी की गणतन्त्रीय सरकार देश की आर्थिक समस्याओं का समाधान करने में असफल रही।
  3. जर्मन जनता का प्रजातन्त्र में अविश्वास – जर्मनी के लोगों का स्वभाव से ही प्रजातन्त्र में विश्वास नहीं था । प्रजातन्त्र उनकी सभ्यता और परम्पराओं के विरुद्ध था। वे पार्लियामेंटरी संस्थाओं व उसके क्रिया-कलापों को समझने में असमर्थ थे। अतः जर्मनी में वाइमर संविधान बड़े प्रतिकूल वातावरण में लागू हुआ, जिसका सफल होना भी सम्भव नहीं था। अत: वहाँ के लोगों की मनोवृत्ति नाजीदल के विकास और हिटलर के अधिनायक बनने में सहायक सिद्ध हुई।
  4. साम्यवाद का खतरा – जर्मनी में साम्यवाद का प्रसार दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा था। जर्मनी में साम्यवादियों ने सन् 1917 की रूसी क्रान्ति के अनुरूप क्रान्ति करने का प्रयास किया। साम्यवादी विचारधारा जर्मनी की राष्ट्रीयता के लिए भारी खतरा थी। इस कारण से जर्मन पूँजीवादियों ने हिटलर की नाजी पार्टी को पूर्ण समर्थन दिया। परिणामस्वरूप एक विशाल जन-समूह श्रमिक-साम्यवाद के खतरों से बचने के लिए नाजीदल में शामिल हो गया।
  5. दलीय संघर्ष से नाजीवाद को लाभ – जर्मनी में अनेक राजनीतिक दल थे जिनमें साम्यवादी, प्रजातन्त्रवादी, राष्ट्रवादी और समाजवादी प्रमुख थे। प्रत्येक राजनीतिक दल ने शक्ति प्राप्ति का प्रयास किया। सन् 1919 से 1933 तक जर्मनी में गणतन्त्र का इतिहास विभिन्न दलों का सत्तारूढ़ होने के लिए दलीय संघर्ष का इतिहास है। इसका परिणाम यह हुआ कि जर्मनी की वाइमर गणतन्त्रीय सरकार अत्यधिक कमजोर हो गई और नाजीवाद को राजसत्ता पर अधिकार करने का अच्छा अवसर मिल गया।
  6. हिटलर के व्यक्तित्व का प्रभाव -हिटलर एक असाधारण एवं प्रभावशाली व्यक्तित्व का स्वामी था। वह उच्चकोटि का शक्तिशाली एवं ओजस्वी वक्ता था। वह साम्यवाद का कटु आलोचक था। उसने अपने देश की जनता को यह विश्वास दिलाया कि यदि वह सत्ता में आता है तो वह अपने राष्ट्र को स्वाभिमान तथा सम्मान दिलाएगा। परिणामस्वरूप नाजीदल अधिक लोकप्रिय होता गया और उसके सदस्यों की संख्या में वृद्धि होती गई।
अतः उपर्युक्त कारण नात्सीवाद की लोकप्रियता में सहायक सिद्ध हुए।
प्रश्न 3 – नात्सी सोच के खास पहलू कौन-से थे?
उत्तर – नात्सी सोच ( विचारधारा) एक निरंकुश व बर्बर तानाशाही विचारधारा है। प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् जर्मनी में वर्साय की सन्धि द्वारा जो कठोर व अपमानजनक व्यवहार किया गया, उसके परिणामस्वरूप जर्मनी में नाजीवाद के नाम से एक तानाशाही राज्य स्थापित हो गया। इसका नेता हिटलर था। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं-
  1. राज्य सर्वोच्च है। नाजीवाद के अनुसार – ” लोग राज्य के लिए हैं, न कि राज्य लोगों के लिए। “
  2. यह साम्यवाद, समाजवाद व उदारवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना चाहता था ।
  3. यह युद्ध को उचित ठहराता था और शक्ति के प्रयोग की सराहना करता था।
  4. नाजीवाद सभी प्रकार की संसदीय संस्थाओं को समाप्त करने के पक्ष में था और एक महान् नेता के नेतृत्व में विश्वास रखता था।
  5. नाजीवाद जर्मन की सैनिक शक्ति को बढ़ाना चाहता था और उसे विश्व की महान शक्ति के रूप में देखना चाहता था ।
  6. नाजीवाद जर्मनी साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था और उन सभी बस्तियों को वापस लेना चाहता था जो प्रथम विश्वयुद्ध से पूर्व जर्मनी के अधीन थीं।
  7. नाजीवाद यहूदियों का कट्टर विरोधी था । उसकी धारणा थी कि यहूदी स्वार्थी तथा धन के लोभी हैं। उन्हीं के कारण ही जर्मनी को प्रथम विश्वयुद्ध में पराजय का मुँह देखना पड़ा था।
स्पष्ट है कि नात्सी सोच निरंकुश थी। यह विचारधारा यहूदियों को समूल नष्ट करने की पक्षधर थी।
प्रश्न 4 – नात्सियों का प्रोपेगैंडा यहूदियों के खिलाफ नफरत पैदा करने में इतना असरदार कैसे रहा?
उत्तर – जर्मन समाज जातीय आधार पर विभाजित था। नाजीवादी स्वयं को शुद्ध रक्त के आर्य मानते थे। अत: उन्होंने यहूदियों के विरुद्ध खूब घृणा का वातावरण बना दिया। उनका यहूदियों के विरुद्ध प्रचार निम्नलिखित रूप से प्रभावी सिद्ध हुआ-
  1. नाजियों ने यहूदियों के प्रति उस घृणा को अपनी कार्यवाही का आधार बनाया जो ईसाई लोग उनके विरुद्ध रखते थे। ईसाई लोग यहूदियों को ‘ईसा मसीह’ का हत्यारा मानते हैं। मध्ययुग तक यहूदियों पर जमीन खरीदने पर पूरी पाबन्दी थी। सन् 1933 से 1938 तक नाजियों ने यहूदियों पर अनेक प्रकार के अत्याचार किए। उन्हें देश से भगा दिया गया व गैस चैम्बरों में बन्द करके बड़ी संख्या में उनकी हत्या कर दी गई।
  2. नाजियों द्वारा इस बात का प्रचार किया गया कि यहूदी घटिया शारीरिक रचना वाले लोग हैं। अतः उन्हें समाज के अवांछित वर्ग का दर्जा दिया जाना ही उचित है।
  3. नाजियों द्वारा यह व्यक्त किया गया कि यहूदी धन के लोभी हैं। वे लोगों को पैसा उधार देकर अत्यधिक ब्याज वसूल करते हैं।
  4. एडोल्फ हिटलर जर्मन यहूदियों से अत्यधिक घृणा करता वह प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की पराजय का कारण यहूदियों को था। ही मानता था ।
  5. नाजी लोगों ने यहूदियों के प्रति घृणा – भावना का प्रचार स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों से ही करना शुरू कर दिया। स्कूलों से यहूदी अध्यापकों को निकाल दिया गया। अतः जर्मनी की नई पीढ़ी में यहूदियों के प्रति घृणा व द्वेष भाव पहले से ही भर दिए गए।
  6. नाजियों ने विश्व की प्रतिक्रिया से बचने के लिए यहूदियों के लिए सांकेतिक भाषा का प्रयोग किया। जैसे—सामूहिक हत्याओं के लिए ‘विशेष व्यवहार’ शब्द को प्रयोग में लाया जाता था।
उपर्युक्त बिन्दुओं से स्पष्ट है कि नात्सियों का प्रोपेगैंडा यहूदियों के विरुद्ध ईर्ष्या उत्पन्न करने में पूर्णतया सफल रहा। इस ईर्ष्या के कारण यहूदियों को बिना अपराध के मौत के घाट उतारा गया।
प्रश्न 5- नात्सी समाज में औरतों की क्या भूमिका थी? फ्रांसीसी क्रान्ति और नात्सी शासन में औरतों की भूमिका के बीच क्या फर्क था? एक पैराग्राफ में बताएँ ।
उत्तर- नात्सी समाज में महिलाओं की भूमिका
नात्सी समाज में लड़कियों को यह सलाह दी गई कि वे अच्छी माताएँ सिद्ध हों और ऐसी सन्तानों को जन्म दें जिनकी रगों में शुद्ध आर्य रक्त का प्रवाह हो। इसके अतिरिक्त घर की देखभाल करें और बच्चों को नात्सी सिद्धान्तों से परिपक्व करें। जो महिलाएँ यहूदियों से विवाह करके निकृष्ट सन्तान पैदा करती थीं, उन्हें कठोर दण्ड भी दिए | जाते थे। इस काल में रूस व पोलैण्ड के निवासियों से विवाह करना भी वर्जित था। ऐसी महिलाओं को अनेक प्रकार की यातनाएँ दी जाती थीं। नात्सियों द्वारा अपनाए गए इन अपमानजनक कृत्यों का जनता हिस्सा थी ।
फ्रांसीसी क्रान्ति के दौर में फ्रांसीसी समाज में परिवर्तन लाने में वहाँ की महिलाओं की अहम भूमिका थी। इसके विपरीत नात्सी जर्मनी में महिलाओं को अच्छी माँ बनने के लिए प्रेरित किया जाता था ताकि वे आर्य नस्ल की अच्छी सन्तानें पैदा कर सकें। फ्रांसीसी क्रान्ति के दौरान महिलाओं ने पुरुषों का सभी क्षेत्रों में सहयोग किया, इसके विपरीत नात्सी सोच में स्त्री व पुरुष की समानता को स्वीकार नहीं किया गया।
प्रश्न 6 – नात्सियों ने जनता पर पूरा नियन्त्रण हासिल करने के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाए ?
उत्तर – जर्मनी के नाजी राज्य द्वारा वहाँ के लोगों पर पूर्ण नियन्त्रण स्थापित करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए-
  1. हिटलर ने जर्मनी की सत्ता सँभालते ही सारी शक्तियों को स्वयं में समेट लिया। उसने एक शक्तिशाली केन्द्रीय सरकार की स्थापना की। उसने धीरे-धीरे प्रजातन्त्रीय व्यवस्था को धराशायी कर दिया। नाजी पार्टी ने स्वेच्छाचारी शासन द्वारा जर्मनी में ‘राष्ट्रीय एकता’ लाने का प्रयत्न किया।
  2. जर्मनी को एक पुलिस राज्य में बदल दिया गया। देश में साम्यवादियों, समाजवादियों व अन्य विरोधियों को यातना शिविरों में मरने के लिए छोड़ दिया गया।
  3. जर्मनी में ‘ट्रेड यूनियनों’ को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया।
  4. नाजी पार्टी के अतिरिक्त अन्य सभी राजनीतिक दलों पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। हिटलर द्वारा अपने दल के सदस्यों पर सन्देह होने पर उन्हें दण्ड से मुक्त नहीं किया गया।
  5. नाजी सरकार ने संचार के सभी माध्यम; जैसे— प्रेस, समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें, थियेटर आदि अपने कठोर नियन्त्रण में ले लिए।
  6. धर्म को भी राज्य के अन्तर्गत लाया गया, जिससे चर्च भविष्य में राज्य के लिए समस्या न बन सके।
  7. सरकार द्वारा सभी विश्वविद्यालय व अन्य शिक्षण संस्थाओं पर पूर्ण नियन्त्रण स्थापित किया गया। छात्रों को नाजीदल के सिद्धान्तों व आदर्शों से अवगत कराया जाने लगा, जिससे वे भविष्य में इसका समर्थन करें।
  8. हिटलर ने साम्यवादी दल पर प्रतिबन्ध लगा दिया तथा उसकी सम्पत्ति जब्त कर ली। सन् 1933 में संसद भवन में आग के लिए साम्यवादियों को जिम्मेदार ठहराया गया और उन्हें नजरबन्दी शिविरों में भेज दिया गया।
अतः हिटलर के प्रयत्नों के परिणामस्वरूप जर्मन राज्य पर नाजी शासन का कठोर नियन्त्रण स्थापित हो गया। सेना में अनिवार्य रूप से नौजवानों की भर्ती, सैन्यीकरण तथा हथियारबन्दी शुरू की गई ।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
• विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की पराजय किन कारणों से हुई ?
उत्तर- प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की पराजय के कारण
प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की पराजय के अग्रलिखित कारण थे –
  1. दीर्घकालीन युद्ध – जर्मनी ने यह योजना बनाई थी कि वह दो माह के अन्दर ही फ्रांस और रूस को पराजित करने में सफल हो जाएगा, किन्तु उसकी यह योजना विफल हो गई। उसे दीर्घकाल तक मित्र – राष्ट्रों से युद्ध करना पड़ा। इतना ही नहीं, जर्मन सेनाओं को अनेक के मोर्चों पर मित्र – राष्ट्रों की सेनाओं से लड़ना पड़ा। इतने लम्बे युद्ध लिए उसके पास पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं थे। इस कारण उसे अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके विपरीत अमेरिका के सहयोग के कारण मित्र राष्ट्रों के पास जन और धन की कोई कमी न थी। अतः जर्मनी को पराजय का मुख देखना पड़ा।
  2. धन तथा युद्ध सामग्री की कमी – मित्र – राष्ट्रों की तुलना में जर्मनी के पास धन और युद्ध सामग्री कम थी। इसलिए सीमित आर्थिक साधनों और युद्ध सामग्री की कमी के कारण जर्मनी को युद्ध में पराजय का सामना करना पड़ा।
  3. मित्र – राष्ट्रों की शक्ति का गलत अनुमान – जर्मनी के राजनीतिज्ञ और सेनापति मित्र राष्ट्रों की वास्तविक शक्ति का अनुमान लगाने में असफल रहे। इस गलती के कारण ही जर्मनी को पराजय कर सामना करना पड़ा।
  4. नौसेना की दुर्बलता – जर्मनी की नौ सेना, ब्रिटिश नौ-सेना की तुलना में बहुत दुर्बल थी। इस दुर्बलता के कारण समुद्री युद्ध में जर्मनी, इंग्लैण्ड के समक्ष न टिककर पराजित हो गया।
  5. रूस की क्रान्ति का प्रभाव – रूस की साम्यवादी क्रान्ति ने भी जर्मनी के पतन को लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  6. अमेरिका का युद्ध में प्रवेश – अमेरिका विश्व का एक समृद्ध और शक्तिशाली देश बन चुका था। अमेरिका के युद्ध में प्रवेश करने से मित्र – राष्ट्रों की शक्ति और साहस बहुत अधिक बढ़ गया। यदि अमेरिका युद्ध में प्रवेश न करता तो फ्रांस की पराजय हो जाती और इंग्लैण्ड तथा जर्मनी के मध्य गतिरोध बना रहता। फिलिप द्वितीय, लुई 14वाँ और नेपोलियन बोनापार्ट तो इंगलिश चैनल के पार इंग्लैण्ड से सहायता पहुँचने पर परास्त हुए थे, परन्तु बीसवीं शताब्दी में जर्मनी उस समय तक परास्त न हो सका जब तक कि अटलाण्टिक पार से सहायता नहीं पहुँची। यह अमेरिका की सैन्यशक्ति का सबसे प्रबल प्रमाण है।
प्रश्न 2 – वर्साय की सन्धि’ क्या है? इस सन्धि की प्रमुख धाराओं का उल्लेख कीजिए। इसे द्वितीय विश्वयुद्ध के लिए उत्तरदायी क्यों माना गया ?
उत्तर- वर्साय की सन्धि अथवा जर्मनी पर प्रथम विश्वयुद्ध का प्रभाव
मित्र – राष्ट्रों ने जर्मनी को प्रथम विश्वयुद्ध का उत्तरदायी बताकर उसे वर्साय की अपमानजनक सन्धि (28 जून, 1919 ई०) को मानने के लिए विवश किया। सम्मेलन में जर्मन प्रतिनिधियों के साथ अमानुषिक व्यवहार किया गया। उन्हें युद्ध की धमकी देकर वर्सा सन्धि-पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए विवश किया गया। इस सन्धि-पत्र में 15 भाग और 440 धाराएँ थीं।
मुख्य धाराएँ – वर्साय की सन्धि की प्रमुख धाराएँ निम्नलिखित थीं-
  1. जर्मनी की सेना 1 लाख तक सीमित कर दी गई।
  2. उसकी नौ सेना पर कठोर प्रतिबन्ध लगा दिया गया।
  3. जर्मनी से आल्सेस, लॉरेन, यूपेन, माल्मेडी, मेल, पोसेन, अपर साइलीशिया आदि प्रदेश छीनकर फ्रांस, बेल्जियम, लिथुआनिया तथा पोलैण्ड को दे दिए गए।
  4. जर्मनी का डेन्जिंग बन्दरगाह लीग ऑफ नेशन्स के नियन्त्रण में आ गया।
  5. जर्मनी की राइन नदी की किलेबन्दी को तोड़ दिया गया।
  6. जर्मनी की ‘सार’ घाटी पर फ्रांस का अधिकार हो गया।
  7. चीन, मिस्र, मोरक्को तथा साइबेरिया आदि से जर्मनी को अपने व्यापारिक अधिकार छोड़ने पड़े।
  8. जर्मनी के समस्त उपनिवेशों पर मित्र – राष्ट्रों का अधिकार हो गया।
  9. जर्मनी पर युद्ध का भारी हर्जाना थोपा गया।
  10. जर्मनी की नदियों का अन्तर्राष्ट्रीयकरण कर दिया गया ।
द्वितीय विश्वयुद्ध के लिए उत्तरदायी – यह सन्धि बहुत ही कठोर, अपमानजनक तथा प्रतिशोधात्मक थी। इस सन्धि की कठोर शर्तों के रूप में जर्मन प्रतिनिधियों का घोर अपमान किया गया था। जर्मनी का निःशस्त्रीकरण, उसके उपनिवेशों का अपहरण, कठोर आर्थिक प्रतिबन्ध, क्षतिपूर्ति की भारी राशि आदि बातों ने जर्मन जनता के हृदय मित्र – राष्ट्रों के प्रति घृणा की भावना उत्पन्न कर दी ।
जर्मनी में हिटलर की तानाशाही स्थापित हुई, यह आश्चर्य की बात नहीं है। वर्साय की सन्धि की शर्तें ही ऐसी थीं जिनके कारण कोई भी देश अपने अपमान का बदला लेने के लिए तत्पर हो सकता था। मित्र-राष्ट्रों ने इस सन्धि से घृणा को जन्म दिया और यही घृणा आगे चलकर एक भयानक युद्ध का कारण बन गई।
• लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1— उन कारकों का उल्लेख करो जिनके फलस्वरूप जर्मनी में हिटलर का उत्कर्ष हुआ।
उत्तर – जर्मनी में हिटलर के उत्कर्ष में अनेक तत्त्वों सहायता पहुँचाई, जिनका वर्णन निम्नलिखित है—
  1. जर्मनी में राजतन्त्र के पतन के बाद भी अनेक शक्तिशाली राजतन्त्र समर्थक थे। इनमें बड़े उद्योगपति, जमींदार तथा सैनिक अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने हिटलर का समर्थन किया।
  2. हिटलर एक महान वक्ता, प्रभावशाली व्यक्तित्व का स्वामी तथा योग्य नेता था। उसने शासनतन्त्र, युद्ध तथा उग्रराष्ट्रीयता का गुणगान किया। जर्मनी की जनता ने उसके सिद्धान्तों का स्वागत किया।
  3. जर्मनी के अन्य राजनीतिक दलों में एकता का अभाव था। अतः इससे हिटलर के उत्कर्ष को बल मिला।
  4. वर्साय की अपमानजनक सन्धि से जर्मनी आहत था। हिटलर ने लोगों को विश्वास दिलाया कि यदि वह सत्ता में आया तो वह अपमान का बदला लेगा।
  5. 1929 ई० में आर्थिक संकट के कारण जर्मनी के 80 लाख मजदूर बेरोजगार हो गए। हिटलर ने उन्हें अपने पक्ष में कर लिया।
प्रश्न 2 – वर्साय की सन्धि द्वितीय विश्वयुद्ध का एक बड़ा कारण कैसे बनी ?
उत्तर – वर्साय का सन्धि-पत्र, जिसके द्वारा युद्ध की समाप्ति हुई थी, वस्तुतः अन्याय पर आधारित था। इस संन्धि-पत्र द्वारा पराजित राष्ट्रों में विशेषकर जर्मनी के साथ बड़ा अपमानजनक व्यवहार किया गया था। जर्मनी को अपने साम्राज्य के अनेक भागों और सभी उपनिवेशों से हाथ धोना पड़ा था। पोलैण्ड के लाभ के लिए जर्मन राज्य के दो टुकड़े कर दिए गए। जर्मनी पर इतना बड़ा आर्थिक भार डाला गया, जिसे चुका पाना असम्भव था। उसकी सेना में बहुत कमी कर दी गई। जर्मनी पर यह सन्धि बलपूर्वक थोपी गई थी। उससे जो व्यवहार किया गया, वह पूर्णतया बदले की भावना पर आधारित था । इस सन्धि में न्याय का कोई भी दृष्टिकोण जर्मनी के प्रति नहीं अपनाया गया। अतः वर्साय की सन्धि जर्मनी के लोगों के लिए एक कलंक था, जिसे वे हर स्थिति में धो डालना चाहते थे। ऐसी स्थिति में युद्ध अनिवार्य था ।
प्रश्न 3 – ‘नाजीवाद’ से आप क्या समझते हैं? नाजी पार्टी का कार्यक्रम लिखिए।
उत्तर – नाजीवाद एक उग्र तानाशाही आन्दोलन था, जो एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में जर्मनी में चलाया गया था । इसका स्वरूप फासीवाद से अधिक भयंकर था। इस आन्दोलन के बल पर ही हिटलर 1930 ई० में जर्मनी का तानाशाह बना था। नाजी पार्टी का कार्यक्रम निम्नलिखित था—
(1) वर्साय की सन्धि का अन्त करना।
(2) जर्मनी से अलग हुए उपनिवेशों को पुनः प्राप्त करना ।
(3) जर्मनी की सैनिक शक्ति का विस्तार करना ।
(4) साम्यवादियों, समाजवादियों और यहूदियों को कुचलना ।
(5) देश की जनता का पूरी तरह जर्मनीकरण करना तथा विदेशी हस्तक्षेप समाप्त करना ।
(6) महान जर्मन साम्राज्य का निर्माण करना ।
प्रश्न 4 – द्वितीय विश्वयुद्ध ‘विश्वव्यापी’ कैसे बना? संक्षिप्त विवरण दीजिए ।
अथवा द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका के प्रवेश का वर्णन कीजिए।
उत्तर – 1 सितम्बर, 1939 ई० को द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारम्भ हुआ, परन्तु 1940 ई० तक यह धीमी गति से ही चलता रहा। इसका क्षेत्र भी सीमित रहा, परन्तु 1941 ई० में कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं जिन्होंने इसे एक विश्वव्यापी युद्ध बना दिया। जून 1941 ई० में जर्मनी ने सोवियत संघ के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। उस पर लेनिनग्राद, मास्को व स्टालिनग्राद अर्थात् तीन ओर से आक्रमण कर दिया गया। जापान ने दिसम्बर 1941 में प्रशान्त महासागर में हवाई द्वीप में स्थित अमेरिकी नौसैनिक बेड़े पर्ल हार्बर पर आक्रमण कर दिया और उसे भारी नुकसान पहुँचाया। अतः बाध्य होकर संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इसी वर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका के विरुद्ध जर्मनी और इटली ने युद्ध की घोषणा कर दी। अतः 1941 ई० के अन्त तक यह युद्ध ‘विश्वव्यापी युद्ध’ में बदल गया।
• अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 – नाजीवाद का उदय किस देश में हुआ था? इसका प्रवर्त्तक कौन था ?
उत्तर – नाजीवाद का उदय जर्मनी में हुआ था। इसका प्रवर्त्तक हिटलर था।
प्रश्न 2 – नाजी पार्टी का पूरा नाम क्या था ?
उत्तर – नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी ।
प्रश्न 3 – नाजियों द्वारा यहूदियों के सर्वनाश को क्या नाम दिया गया?
उत्तर – नाजियों द्वारा यहूदियों के सर्वनाश को ‘अन्तिम समाधान’ नाम दिया गया।
प्रश्न 4 – नाजी पार्टी के दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर – (1) नाजी पार्टी हिंसात्मक संघर्ष व शक्ति में विश्वास रखती थी।
(2) नाजी पार्टी पूँजीवाद व मार्क्सवाद की विरोधी थी।
प्रश्न 5 – हिटलर जर्मनी का चांसलर कब बना? उसके द्वारा लिखित पुस्तक कौन-सी थी ?
उत्तर — हिटलर 23 फरवरी, 1933 ई० को जर्मनी का चांसलर बना। उसके द्वारा लिखित पुस्तक ‘मेन कैम्फ’ (Mein Kampf ) थी।
प्रश्न 6 – जर्मनी में वाइमर रिपब्लिक की स्थापना कब हुई तथा इसका प्रथम प्रधानमन्त्री कौन था?
उत्तर – सन् 1919 में जर्मनी में वाइमर रिपब्लिक की स्थापना हुई। इसका प्रथम प्रधानमन्त्री फिलिप शीडमैन था।
प्रश्न 7 – द्वितीय विश्वयुद्ध में मित्र राष्ट्र कौन-से थे?
उत्तर- द्वितीय विश्वयुद्ध में इंग्लैण्ड, फ्रांस, सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका मित्र राष्ट्र थे।
प्रश्न 8- राष्ट्रीय समाजवाद क्या है?
उत्तर— नाजी विचारधारा के अनुसार यह एक ओर तो बड़े पूँजीवाद अथवा अमेरिकी अर्थव्यवस्था से तथा दूसरी ओर मार्क्स की अर्थव्यवस्था से बहुत भिन्न है।
प्रश्न 9 — आर्थिक महामन्दी’ कब शुरू हुई ?
उत्तर— ‘आर्थिक महामन्दी’ सन् 1929 ई० में शुरू हुई।
• बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1 – प्रथम विश्वयुद्ध ( 1914-18) में जर्मनी का सहयोगी देश था –
(a) फ्रांस
(b) ऑस्ट्रिया
(c) इंग्लैण्ड
(d) रूस।
उत्तर— (b) ऑस्ट्रिया
प्रश्न 2 – प्रथम विश्वयुद्ध में मित्र राष्ट्र थे- 
(a) रूस-इंग्लैण्ड-फ्रांस
(b) जापान – इटली – जर्मनी
(c) ऑस्ट्रिया – जर्मनी-रूस
(d) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर— (a) रूस-इंग्लैण्ड-फ्रांस
प्रश्न 3 – हिटलर द्वारा लिखित पुस्तक जिसमें नात्सीवाद के सिद्धान्त दिए गए हैं कौन-सी है—
(a) मेरा संघर्ष (मेन कैम्फ)
(b) वैल्थ ऑफ नेशन्स
(c) द स्पिरिट ऑफ द लाज
(d) नाजीतन्त्र ।
उत्तर— (a) मेरा संघर्ष (मेन कैम्फ)
प्रश्न 4 – हिटलर जर्मनी का चांसलर कब बना- 
(a) 30 जनवरी, 1929 ई०
(b) 28 फरवरी, 1933 ई०
(c) 30 जनवरी, 1933 ई०
(d) 3 मार्च, 1933 ई० ।
उत्तर— (c) 30 जनवरी, 1933 ई०
प्रश्न 5 – जर्मनी में नात्सीवाद एक जनव्यापी आन्दोलन बना- 
(a) प्रथम महायुद्ध के दौरान
(b) महामन्दी के दौरान
(c) महामन्दी के बाद
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर— (b) महामन्दी के दौरान
प्रश्न 6 – जर्मन संसद क्या कहलाती थी-
(a) राइख
(b) ड्यूमा
(c) गास्टैपो
(d) रीशस्टाँग।
उत्तर— (d) रीशस्टाँग।

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