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UK Board Class 9 Hindi – वाक्य-रचना – वाक्य के अंग, अर्थ के अनुसार वाक्य भेद

UK Board Class 9 Hindi – वाक्य-रचना – वाक्य के अंग, अर्थ के अनुसार वाक्य भेद

UK Board Solutions for Class 9 Hindi – वाक्य-रचना – वाक्य के अंग, अर्थ के अनुसार वाक्य भेद

वाक्य के अंग
प्रत्येक वाक्य के दो अंग होते हैं-
1. उद्देश्य,
2. विधेय।
1. उद्देश्य – जिसके विषय में कुछ कहा जाता है, उसे ‘उद्देश्यकहते हैं; जैसे—
रामू भोजन पका रहा है।
इस वाक्य में ‘रामू’ उद्देश्य है।
2. विधेय— उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाता है, उसे ‘विधेय’ कहते हैं; जैसे-
रामू भोजन पका रहा है।
इस वाक्य में ‘रामू’ उद्देश्य के विषय में यह बताया जा रहा है कि वह ‘भोजन पका रहा है इसलिए यह विधेय है।
उद्देश्य तथा विधेय एक-एक पद के भी हो सकते हैं; जैसे— मोहन खेलेगा। रमा खाएगी। आदि वाक्यों में एक-एक उद्देश्य है— ‘मोहन’ और ‘रमा’ तथा उनका एक – एक विधेय हैं— ‘खेलेगा’ और ‘खाएगी’।
यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि ‘उद्देश्य’ का मूल है— ‘कर्त्ता’ तथा ‘विधेय’ का मूल है – ‘क्रिया’ । अधिकांशतः प्रत्येक वाक्य में उद्देश्य और विधेय होता ही है। कभी-कभी प्रश्नों के उत्तर के रूप में एक शब्द भी वाक्य का कार्य करता है; जैसे-
— तुम खाना खाओगी क्या?
— नहीं।
यहाँ ‘नहीं’ अपने आप में सम्पूर्ण वाक्य है और पूर्णार्थ दे रहा है कि ‘वह खाना नहीं खाएगी ।
वाक्य के भेद या प्रकार
वाक्य के भेद या प्रकार निर्धारण के दो प्रमुख आधार हैं-
(अ) रचना के आधार पर
(ब) अर्थ के आधार पर।
पाठ्यक्रम में अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद ही निर्धारित हैं; अतः हम यहाँ केवल इन्हीं प्रकारों का अध्ययन करेंगे।
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद
अर्थ – प्राप्ति के आधार पर वाक्य के निम्नलिखित छह भेद हैं-
(1) विधानवाचक या निश्चयवाचक वाक्य — जिन वाक्यों में कार्य के होने की निश्चित सूचना दी होती है, उन्हें विधानवाचक अथवा निश्चयवाचक वाक्य कहा जाता है; जैसे-
1. मेरा विद्यालय प्रात: आठ बजे खुलता है।
2. दीपावली अक्टूबर या नवम्बर में मनाई जाती है।
3. सुरेश को कल बुखार था।
(2) निषेधात्मक वाक्य – जिन वाक्यों में कार्य के न होने का बोध होता है; उन्हें निषेधात्मक वाक्य कहते हैं; जैसे—
1. मेरा मित्र आज स्कूल नहीं आया।
2. आप बाहर न जाएँ।
3. मैं यह काम नहीं कर सकता।
(3) आज्ञार्थक वाक्य — जिन वाक्यों में आज्ञा का या अनुमति का बोध होता है; उन्हें आज्ञार्थक वाक्य कहते हैं; जैसे—
1. मोहन को बुलाओ।
2. यहाँ शोर मत करो।
3. यह पत्र डाकखाने में डाल देना ।
(4) विस्मयादिबोधक अथवा मनोवेगात्मक वाक्य — जिन वाक्यों में हर्ष, सुख, खुशी, शोक, कामना, इच्छा, आशीर्वाद आदि मनोभावों का बोध होता है; उन्हें विस्मयादिबोधक अथवा मनोवेगात्मक वाक्य कहते हैं;
1. अहा! कितना सुन्दर दृश्य है।
2. ईश्वर आपकी यात्रा सफल करे !
3. शायद आज बारिश हो !
4. छिः ! कितना गन्दा स्थान है।
(5) प्रश्नवाचक वाक्य — जिन वाक्यों में वक्ता श्रोता से केवल प्रश्न पूछता है; उन्हें प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैं; जैसे—
1. क्या आप कल मेरे यहाँ आए थे?
2. तुम्हारा नाम क्या है?
3. क्या तुम्हारा स्कूल कल बन्द रहेगा?
(6) संकेतवाचक वाक्य – जिस वाक्य में दो क्रियाएँ हों तथा एक क्रिया दूसरी पर निर्भर हो, उसे संकेतवाचक वाक्य कहते हैं; जैसे- –
1. यदि वर्षा होती तो फसल होती।
2. यदि तुम परिश्रम करते तो सफल हो जाते।
कुछ विद्वान् वाक्य के निम्नलिखित दो भेद और मानते हैं-
(7) सन्देहवाचक वाक्य – जिनमें शंका या सन्देह हो; जैसे—
1. शायद मैं कल न आ सकूँ।
2. सम्भवत: तीन दिन का अवकाश रहेगा।
(8) इच्छावाचक वाक्य – जिनमें कामना, प्रार्थना आदि हो; जैसे-
1. ईश्वर तुम्हें सफल करे ।
2. काश मैं भी करोड़पति होता !
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1 – वाक्य में उद्देश्य और विधेय से क्या अभिप्राय है? उदाहरणसहित समझाइए । 
उत्तर- उद्देश्य एवं विधेय
वाक्य में जिसके सम्बन्ध में कुछ कहा जाए वह उस वाक्य का ‘उद्देश्य’ होता है तथा उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाता है वह ‘विधेय’ कहलाता है; जैसे—
मेरा बेटा बहुत शालीन है।
इस वाक्य में ‘मेरा बेटा’ के विषय में कुछ बताया जा रहा है, इसलिए यह वाक्य का ‘उद्देश्य’ है तथा ‘मेरा बेटा’ के विषय में ‘बहुत शालीन हैं यह बताया जा रहा है; अतः यह वाक्य का ‘विधेय’ है। ‘बेटा’ कर्त्ता का विस्तार ‘मेरा’ हैं और शालीन का प्रविशेषण ‘बहुत’ है; अत: यह स्पष्ट होता है कि कर्त्ता तथा कर्त्ता का विस्तार वाक्य में ‘उद्देश्य’ होता है तथा ‘विधेय’ के अन्तर्गत क्रिया, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, अधिकरण आदि आ जाते हैं।
प्रश्न 2 – अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद उदाहरणसहित समझाइए |
उत्तर- अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद
अर्थ की दृष्टि से वाक्य के छह भेद उदाहरणसहित निम्नलिखित हैं-
(1) विधानवाचक या निश्चयवाचक वाक्य – जिस वाक्य से कार्य के होने की निश्चित सूचना मिलती है, उसे ‘विधानवाचक या निश्चयवाचक वाक्य’ कहते हैं; जैसे-
मैं अब घर जा रहा हूँ।
(2) नकारात्मक या निषेधात्मक वाक्य – जिस वाक्य से कार्य के न होने की सूचना प्राप्त हो, वह ‘निषेधात्मक वाक्य’ कहलाता है; जैसे-
मैं अभी घर नहीं जा रहा हूँ।
(3) आज्ञार्थक वाक्य — जिस वाक्य से आज्ञा, आदेश, निर्देश या अनुमति दिए जाने का बोध होता है, वह ‘आज्ञार्थक वाक्य’ कहलाता है; जैसे-
बहुत हुआ, अब घर जाओ।
(4) विस्मयादिबोधक वाक्य — जिस वाक्य से हर्ष, शोक, आनन्द, आश्चर्य आदि प्रकट हो उसे ‘विस्मयादिबोधक वाक्य’ कहते हैं; जैसे—
ओफ-ओह! गाड़ी पंक्चर है।
(5) प्रश्नवाचक वाक्य – जिस वाक्य से प्रश्न पूछे जाने की क्रिया सम्पन्न हो रही हो, वह ‘प्रश्नवाचक वाक्य’ होता है; जैसे-
अब मैं घर कैसे जाऊँगा?
(6) संकेतवाचक वाक्य- जिस वाक्य में एक क्रिया दूसरी क्रिया पर निर्भर हो, उसे ‘संकेतवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे-
कोई लेने आ गया तो चला जाऊँगा ।
प्रश्न 8 – निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए-
(क) तुम उसको देखे हो ।
उत्तर – तुमने उसको देखा है।
(ख) मैंने घर जाना है।
उत्तर – मुझे घर जाना है।
(ग) शीला तुम्हारे से नहीं डरती।
उत्तर – शीला तुमसे नहीं डरती ।
(घ) थॉमस के द्वारा किताब फाड़ दी गई।
उत्तर- थॉमस द्वारा किताब फाड़ी गई ।
(ङ) कृपया मुझे छुट्टी प्रदान करने की कृपा करें।
उत्तर – कृपया मुझे छुट्टी प्रदान करें ।
अथवा मुझे छुट्टी प्रदान करने की कृपा करें।
(च) उसे एक फूलों की माला खरीदनी है।
उत्तर – उसे फूलों की एक माला खरीदनी है ।
(छ) मैंने यह किताब पचास रुपये को खरीदी है।
उत्तर – मैंने यह किताब पचास रुपये में खरीदी है।

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