UK 9th Hindi

UK Board Class 9 Hindi – शब्द निर्माण

UK Board Class 9 Hindi – शब्द निर्माण

UK Board Solutions for Class 9 Hindi – शब्द निर्माण

(1) उपसर्ग द्वारा शब्द – निर्माण

उपसर्ग – मूल शब्द के प्रारम्भ में जब कोई शब्दांश जोड़ा जाता है तो वह उपसर्ग कहलाता है, अर्थात् वे लघुतम सार्थक शब्द-खण्ड, जो अन्य शब्दों के आदि ( आरम्भ / पूर्व) में जुड़कर उनका अर्थ बदल देते हैं, ‘उपसर्ग’ कहलाते हैं। उपसर्ग का स्वतन्त्र रूप से प्रयोग नहीं किया जाता, किन्तु फिर भी इनकी स्वतन्त्र सत्ता है।
एक उपसर्ग का एक ही अर्थ न होकर भिन्न अर्थ और भिन्न प्रयोग भी होते हैं। उदाहरणार्थ – ‘नि’ उपसर्ग ‘निषेध’ (नि + षेध) के रूप में भी प्रयोग होता है और ‘नियम’ (नि + यम) के रूप में भी। इसी प्रकार ‘वि’ उपसर्ग के प्रयोग से ‘विशिष्ट’ (वि + शिष्ट) और ‘वियोग’ (वि + योग) दोनों ही शब्द बनते हैं।
हिन्दी में तीन प्रकार के उपसर्ग प्रयुक्त होते हैं-
(क) तत्सम उपसर्ग, (ख) तद्भव उपसर्ग, (ग) आगत उपसर्ग ।
(क) तत्सम उपसर्ग -जो उपसर्ग संस्कृत से हिन्दी में आए हैं और तत्सम शब्दों के साथ जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें तत्सम उपसर्ग कहा जाता है। कुछ प्रमुख तत्सम उपसर्ग और उनसे बननेवाले मुख्य शब्दों के उदाहरण इस प्रकार हैं—
(ख) तद्भव उपसर्ग – हिन्दी में संस्कृत के उपसर्गों से कुछ उपसर्ग विकसित हो गए हैं। ये उपसर्ग वस्तुतः संस्कृत के उपसर्गों के ही परिवर्तित रूप हैं। संस्कृत के उपसर्गों से विकसित यही उपसर्ग तद्भव उपसर्ग कहलाते हैं। कुछ प्रमुख तद्भव उपसर्ग और उनसे निर्मित कतिपय शब्दों के उदाहरण इस प्रकार हैं-
(ग) आगत उपसर्ग—हिन्दी में जिस प्रकार अनेक विदेशी भाषाओं के शब्द प्रयुक्त होते हैं, उसी प्रकार विदेशी भाषाओं के अनेक उपसर्ग भी हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं। विदेशी भाषाओं के यही उपसर्ग आगत उपसर्ग कहलाते हैं। हिन्दी के आगत उपसर्गों में अरबी-फारसी तथा अंग्रेजी भाषाओं के सर्वाधिक उपसर्ग प्रयुक्त होते हैं। कुछ प्रमुख आगत उपसर्ग और उनसे निर्मित कतिपय शब्दों के उदाहरण इस प्रकार हैं-
(2) प्रत्यय द्वारा शब्द – निर्माण
प्रत्यय – प्रत्यय शब्द के अन्त में जोड़े जाते हैं और इनसे शब्द का अर्थ परिवर्तित होकर नए शब्द का निर्माण होता है। जैसे— यदि ‘फल’ शब्द में ‘वाला’ प्रत्यय जोड़ दिया जाए तो यह शब्द ‘फलवाला’ बन जाता है। इस प्रकार जो शब्दांश धातुरूप या शब्दों के अन्त में जुड़कर नए शब्द का निर्माण करते हैं, वे ‘ प्रत्यय’ कहलाते हैं ।
मूल शब्द में एक बार में केवल एक ही प्रत्यय जोड़ा जाना चाहिए। जैसे- ‘पूजा’ शब्द में दो अलग-अलग प्रत्यय जोड़कर ‘पूज्य’. तथा ‘पूजनीय’ शब्द तो बना सकते हैं, किन्तु ‘पूज्यनीय’ नहीं।
प्रत्यय भेद – प्रत्यय के दो भेद होते हैं— (1) कृत् प्रत्यय, (2) तद्धित प्रत्यय।
इन दोनों प्रकार के प्रत्ययों का सोदाहरण परिचय इस प्रकार है-
1. कृत् प्रत्यय – जो शब्दांश धातुओं के अन्त में जुड़कर नए शब्द ‘बनाते हैं, उन्हें ‘कृत्’ प्रत्यय कहते हैं; जैसे- घिस + आई = घिसाई । कृत प्रत्ययों से निर्मित शब्द कृदन्त कहलाते हैं। हिन्दी में प्रयुक्त प्रमुख कृत् प्रत्यय और उनसे निर्मित कतिपय शब्द इस प्रकार हैं-
2. तद्धित प्रत्यय – जो शब्दांश शब्दों के अन्त में जुड़कर नए शब्द बनाते हैं, उन्हें ‘तद्धित’ प्रत्यय कहते हैं; जैसे—मन + औती = मनौती । तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, विशेष्य तथा अव्यय सभी शब्द भेद के साथ जुड़ते हैं। इन प्रत्ययों से निर्मित शब्द संज्ञा और विशेषण होते हैं तथा तद्धितान्त कहलाते हैं। हिन्दी में प्रयुक्त प्रमुख तद्धित प्रत्यय और उनसे निर्मित कतिपय शब्द इस प्रकार हैं-
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1 – निम्नलिखित उपसर्गों से दो-दो शब्दों का निर्माण कीजिए-
अन्, अन, अनु, अधि, उप, अभि, वि, सम् ।
उत्तर- उपसर्ग        उपसर्ग से निर्मित शब्द
अन्              अनाधिकार, अनादि
अन              अनपढ़, अनहोनी
अनु              अनुभव, अनुमान
अधि             अधिनायक, अधिपति
उप               उपदेश, उपवन
अभि             अभिशाप, अभिनव
वि                 विज्ञान, विशुद्ध
सम्               संयोग, सम्भव
प्रश्न 2 – निम्नलिखित प्रत्ययों से शब्दों का निर्माण कीजिए-
ता, त्व, ईय, इक, इयल, आई, आर, हार ।
उत्तर- प्रत्यय          प्रत्ययों से निर्मित शब्द 
ता                  बहता, मारता, सुन्दरता, विशेषता ।
त्व                  महत्त्व, अस्तित्व, व्यक्तित्व।
ईय                भारतीय, शासकीय, स्वर्गीय ।
इक               सामाजिक, धार्मिक, दैनिक, साहित्यिक ।
इयल             सड़ियल, मरियल, अड़ियल ।
आई              पिटाई, लिखाई, कमाई, पढ़ाई।
आर              सुनार, लुहार, कुम्हार |
हार                होनहार, खेलनहार, तारनहार।

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