UK Board 9 Class Hindi Chapter 8 – चन्द्रसिंहस्य गर्जनम् (संस्कृत विनोदिनी)
UK Board 9 Class Hindi Chapter 8 – चन्द्रसिंहस्य गर्जनम् (संस्कृत विनोदिनी)
UK Board Solutions for Class 9th Hindi Chapter 8 – चन्द्रसिंहस्य गर्जनम् (संस्कृत विनोदिनी)
चन्द्रसिंहस्य गर्जनम् (चन्द्रसिंह की गर्जना )
पाठ का सार
चन्द्रसिंह की चिन्ता और सैनिकों को प्रेरणा-सैनिक शिविर में चन्द्रसिंह गढ़वाली चिन्तामग्न हैं, वह अपने साथियों वीरसिंह और भीमसिंह आदि से कहते हैं कि इस समय अनेक युवा देशभक्त मेरे मित्र हो गए हैं। ये देशभक्त स्वतन्त्रता-प्राप्ति के लिए प्राणपण से प्रयत्नशील हैं। अंग्रेज शासकों ने इन देशभक्तों को मारने के लिए यहाँ सेना को बुलाया है। मगर उनका यह मनोरथ पूरा नहीं होगा । भीमसिंह और वीरसिंह भी उससे सहमत होकर पूछते हैं कि हमें इस समय क्या करना चाहिए? इस पर चन्द्रसिंह कहते हैं कि समय आने पर देशभक्त अपने प्राणोत्सर्ग से भी पीछे नहीं हटते। वह बताते हैं कि कल सभी देशभक्त दलों के नेताओं की यहाँ क गोष्ठी होगी और अंग्रेज उन पर क्रोधित हैं।
कैप्टेन रिकेट के मन्तव्य का उद्घाटन — इसी समय कैप्टेन रिकेट अपने मन में यह सोचता हुआ आता है कि वह भारतीय सैनिकों से ही गोली चलवाकर इन देशभक्तों को मरवा देगा। वह सभी सैनिकों से कहता है कि कल 23 अप्रैल को सभी सैनिक अपनी बन्दूकों से सज्जित होकर आएँ और अगले आदेश की प्रतीक्षा करें। चन्द्रसिंह कैप्टन के छल के विषय में अन्य सैनिकों को बताते हैं। सभी सैनिक क्रान्ति के लिए तैयार हो जाते हैं।
किस्साखानी बाजार में आन्दोलनकारियों का प्रदर्शन – 23 अप्रैल को किस्साखानी बाजार में आन्दोलनकारियों की भीड़ विरोध प्रदर्शन के लिए जमा होती है। कैप्टेन रिकेट उन्हें विरोध- प्रदर्शन करने पर गोली चलाने की चेतावनी देता हुआ उनसे वापस चले जाने के लिए कहता है।
कैप्टेन रिकेट का गोली चलाने का आदेश- जब आन्दोलनकारियों पर कैप्टेन की चेतावनी का कोई प्रभाव नहीं होता तो वह सैनिकों को गोली चलाने का आदेश देता है, किन्तु कोई भी सैनिक गोली नहीं चलाता। इस पर रिकेट पुन: चिल्लाकर क्रोध से गोली चलाने के लिए सैनिकों से कहता है।
चन्द्रसिंह की गर्जना — रिकेट के चिल्लाने पर चन्द्रसिंह गर्जन कर उठते हैं, कोई भी गोली नहीं चलाए । यह सुनकर सभी सैनिक बन्दूकें भूमि पर फेंक देते हैं। वे रिकेट से स्पष्ट कह देते हैं कि कोई भी सैनिक देशभक्तों पर शस्त्र नहीं चलाएगा। रिकेट इसे देशद्रोह बताकर दण्ड की धमकी देता है । इस पर चन्द्रसिंह कहते हैं कि यह देशद्रोह नहीं, बल्कि राजद्रोह है और इसके लिए हम मरने से नहीं डरते; क्योंकि श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि “मरकर स्वर्ग को प्राप्त करोगे ……. ” सभी सैनिक गोली चलाने से मना करके वीर चन्द्रसिंह की जय, भारतमाता की जय का उद्घोष कर उठते हैं।
सभी को जेल में डालना — कैप्टेन रिकेट सबको अपराधी घोषित करता हुआ उनसे बन्दूकों को शस्त्रागार जमा करने के लिए कहता है। वह अंग्रेज सैनिकों से उन सबको जेल ले जाने के लिए भी कहता है। अनेक भारतीय सैनिक इसका विरोध करते हैं, किन्तु चन्द्रसिंह के आदेश से सभी बन्दूकों के साथ समर्पण कर देते हैं। सभी वन्दे मातरम् के उद्घोष के साथ जेल चले जाते हैं।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर
निर्देशः – अधोलिखितं नाट्यांशं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत-
(1) चन्द्रसिंह : – वीराः युवानः …………. कोऽत्र विलम्बः ?
प्रथमं दृश्यम्
शब्दार्थाः – सैन्यशिविरे = सेना के शिविर में; चिन्तामग्नः = चिन्ता में डूबा; सन् = हुए; समवेतान् = इकट्ठे हुए, मिले हुए; युवानः = युवकों; साम्प्रतम् = अब, इस समय; आपन्नाः = ग्रस्त हो गए हैं, बन गए हैं; स्वातन्त्र्यार्थम् = स्वतन्त्रता के लिए; प्राणपणेन = प्राणों की कीमत से; शनैः = धीरे से; श्रूयते = सुना जाता है; अत्रागत्य = यहाँ आकर; उपरिः = ऊपर; अर्धोक्ते = आधा कहने पर, बीच में ही; कुप्यन् = क्रोधित होता हुआ; षड्यन्त्रम् = दुश्चक्र, छल से युक्त योजना; अभिधीयताम् = कहो, अभिव्यक्त करो, बताओ; शृणु = सुनो; आनीतम् = लाया गया है; मारणाय = मारने के लिए; कारयित्वा = कराकर; समापयितुम् : = समाप्त करने के लिए; मनोरथ: = मन की इच्छा; साधु = उत्तम, ठीक; भणितम् = कहा गया है; अनुमीयेत = अनुमान हो रहा है; आपतितम् = आ पड़ा है; समयः प्राप्तः = समय आने पर; दायमानार्थम् = उत्तराधिकार के लिए; प्राणोत्सर्गम् = प्राण त्याग; परितः = चारों ओर; विलोक्य = देखकर; आज्ञापयतुं = आज्ञा दें।
सन्दर्भः – प्रस्तुत नाट्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘संस्कृत विनोदिनी (भाग-प्रथमः ) ‘ के ‘चन्द्रसिंहस्य गर्जनम्’ नामक पाठ से उद्धृत है। यह नाट्यांश वस्तुतः डॉ० अशोक डबराल रचित नाटक – संग्रह ‘दायाद्यम्’ से संकलित है।
प्रसंग : – प्रस्तुत नाट्यांश में सैन्य शिविर में चन्द्रसिंह चिन्तामग्न हैं। उन्हें अंग्रेजों के इस षड्यन्त्र का पता चल चुका है कि उनके सैन्य दल को वहाँ देशभक्तों पर गोली चलाने के लिए बुलाया गया है। वे मिलकर इस बात पर विचार कर रहे हैं कि इस स्थिति में उन्हें क्या करना चाहिए, जिससे अंग्रेजों का मनोरथ न पूर्ण हो सके।
हिन्दी- भावानुवादः –
प्रथम दृश्य
(सेना के शिविर में एकत्रित हुए सैनिकों के बीच में चन्द्रसिंह चिन्ता में डूबा हुआ एकत्रित सैनिकों से कहता है ।)
चन्द्रसिंह – वीर युवको, इस समय अनेक देशभक्त मेरे मित्र हो गए हैं। यहाँ अनेक मित्र भारत की स्वतन्त्रता लिए प्राणपण से प्रयत्नशील हैं। ( धीरे से कानों में) यह भी सुना गया है कि अंग्रेज शासक और अंग्रेज सैनिक यहाँ आकर देशभक्तों के ऊपर ( यह आधा कहने पर अर्थात् बीच में रोककर ……. सैनिकों के बीच से वीरसिंह क्रोधित होकर)
वीरसिंह – अरे चन्द्र ! षड्यन्त्र ? स्पष्ट बताओ ।
चन्द्रसिंह – सुनो रे हमारा जो सैन्यदल यहाँ लाया गया है, वह ‘देशभक्तों को मारने के लिए ही लाया गया है। अंग्रेज-शासक हमारे बीच में आपस में संघर्ष कराकर क्रान्ति को ही समाप्त करने के लिए प्रयत्नशील हैं, किन्तु उनका मनोरथ कभी पूर्ण नहीं होगा ।
भीमसिंह – आपके द्वारा उचित कहा गया है। मेरे द्वारा भी यही अनुमान किया जा रहा है।
वीरसिंह – तात (भाई)! हमारे द्वारा ( हमको) यहाँ क्या करना होगा ?
चन्द्रसिंह – क्या करने (करणीय) को पूछते हो? अरे करणीय तो सामने आ ही पड़ा है, समय आने पर जब देशभक्त अपने उत्तराधिकार के लिए प्राणों. का परित्याग करते हैं। आपके द्वारा यह नहीं सुना गया है कि “माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान् होती हैं। “
भीमसिंह – (चारों ओर देखकर) आज्ञा दें, यहाँ क्या देर है ?
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) चिन्तामग्नः कः ?
(ख) देशभक्तानां मारणाय किम् आनीतम् ?
(ग) के क्रान्तिमेव समापयितुं प्रयत्नशीलाः ?
(घ) देशभक्ताः किमर्थं प्राणोत्सर्गं कुर्वन्ति ?
उत्तरम्- (क) चन्द्रसिंह:, (ख) सैन्यदलम्, (ग) आङ्ग्लशासकाः, (घ) दायमानार्थम् ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) के चन्द्रसिंहस्य मित्रत्वम् आपन्ना: ?
(ख) अनेकानि मित्राणि किमर्थं प्राणपणेन प्रयत्नशीला: ?
(ग) सैन्यदलं किमर्थम् आनीतम् ?
(घ) आङ्ग्लशासकाः किं कारयित्वा क्रान्तिमेव समापयितुं प्रयत्नशीलाः ?
(ङ) क: कदापि पूर्ण न भविष्यति ?
(च) समय: प्राप्ता: देशभक्ताः किं कुर्वन्ति ?
(छ) भवद्भिः किं न श्रुतम् ?
उत्तरम् —
(क) अनेके देशभक्ताः चन्द्रसिंहस्य मित्रत्वम् आपन्नाः ।
(ख) अनेकानि मित्राणि भारतस्य स्वातन्त्र्यार्थं प्राणपणेन प्रयत्नशीलाः ।
(ग) देशभक्तानां मारणाय सैन्यदलम् आनीतम् ।
(घ) आङ्ग्लशासकाः अस्माकं मध्ये परस्परं संघर्षं कारयित्वा क्रान्तिमेव समापयितुं प्रयत्नशीलाः ।
(ङ) आङ्ग्लशासकानां मनोरथः कदापि पूर्ण न भविष्यति ।
(च) समय: प्राप्ता: देशभक्ता: दायमानार्थं प्राणोत्सर्गं कुर्वन्ति ।
(छ) भवद्भिः इदं न श्रुतम् — “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी । “
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘युवानः साम्प्रतम् अनेके ……… आपन्नाः ?’ अत्र प्रयुक्तम् अव्ययपदं किम् ?
(ख) ‘प्रेषितम्’ अस्य पदस्य विलोमपदं चित्वा लिखत ।
(ग) ‘क्रुध्यन्’ इत्यस्य पर्योयवाचिपदम् अत्र प्रयुक्तम् ।
(घ) ‘युवानः’ अस्य विशेषणपदं किम् ?
(ङ) ‘समापयितुम्’ अत्र प्रयुक्तः प्रत्ययः कः ?
(च) ‘एकत्रितानां’ इति स्थाने किं पदं प्रयुक्तम् ?
(छ) ‘प्राणोत्सर्गम्’ अस्य सन्धिच्छेदं कुरुत ?
उत्तरम् –
(क) साम्प्रतम्,
(ख) आनीतम्,
(ग) कुप्यन्,
(घ) वीराः,
(ङ) ‘तुमुन्’
(छ) प्राण + उत्सर्गम् ।
(च) समवेतानाम्,
(2) चन्द्रसिंहः – अरे वीराः ………. प्रति प्रस्थितः ।
शब्दार्था: – गढ़देशीयाः = गढ़वाल के; संगताः = मिले हैं; जुटे हैं; आपत्कालिकी = आपात्कालीन; गोष्ठी = सभा; दलपतय: = दलों के प्रमुख; अहोभाग्यम् = धन्य भाग्य; द्रक्ष्यन्ति = देखेंगे; प्राचण्ड्यम् = प्रचण्डता को; नालास्त्रम् = बन्दूक; अनुगम्यमानः = अनुगमन किया जाता हुआ; स्वगतम् = मन-ही-मन में; वञ्चयित्वा = ठगकर, धोखा देकर; चालयित्वा = चलाकर; विचिन्त्य = सोचकर, विचारकर; श्वः = आनेवाला कल; भूत्वा = होकर; प्रयाणार्थम् = कूच करने के लिए; अग्रिमादेशस्य = (अग्रिम आदेशस्य) अगले आदेश की; निर्गच्छति = चला जाता है; वमितम् = उगला गया है; कपटचेष्टितम् = कपट की इच्छा; वञ्चकम् = धोखेबाज को; स्वदेशमानार्थम् = अपने देश के सम्मान के लिए; समुत्सुकाः = उत्सुक हैं; निष्क्रान्ता: = निकल जाते हैं; त्रयोविंशतितमे = तेईस; द्विसप्तति = बहत्तर; हाटकम् = बाजार को; प्रस्थितः = प्रस्थान कर गया।
प्रसंग:- कैप्टेन के मन्तव्य को जानकर सभी सैनिक अंग्रेजों के विरोध के लिए तत्पर हो जाते हैं, उधर रिकेट सैनिकों को 23 अप्रैल को बन्दूकों से सुसज्जित होने का आदेश देकर चला जाता है। सैनिक देश के सम्मान के लिए प्राणों का बलिदान करने का संकल्प लेते हैं। 23 अप्रैल की प्रातः रिकेट 72 रॉयल गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों के साथ किस्साखानी बाजार के लिए प्रस्थान करता है। इन्हीं सब बातों का वर्णन प्रस्तुत नाट्यांश में किया गया है।
हिन्दी- भावानुवाद:-
चन्द्रसिंह – अरे वीरो, गढ़वाल के जवानो, जहाँ पहले हम संगठित हुए हैं, मिले हैं; वहीं एक आपात्कालीन सभा होगी। सब दलों के दलपति (मुख्य नेता) वहाँ आएँगे।
भीमसिंह – (उन) वीरों का धन्य भाग्य !
चन्द्रसिंह -अब अंग्रेज देशभक्तों की प्रचण्डता देखेंगे।
(इसके पश्चातु बन्दूकधारी सैनिकों से अनुगमन किया जाता हुआ सेना का अधिकारी कैप्टेन रिकेट प्रवेश करता है।)
कैप्टेन रिकेट – ( मन-ही- – मन में) कैसे मैं इन भारतीय सैनिकों को धोखा देकर इनके ही हाथों से बन्दूक चलवाकर आन्दोलनकारियों का सर्वनाश करता हूँ। (क्षणभर सोचकर प्रकट रूप में)
वीर जवानो आप लोग सुनें, कल 23 अप्रैल की तिथि में प्रात:काल सबके द्वारा बन्दूकों से सुसज्जित होकर कूच करने के अगले आदेश की प्रतीक्षा की जानी चाहिए।
(यह कहकर कैप्टेन रिकेट चला जाता है।)
चन्द्रसिंह — अरे वीर जवानो! रिकेट के द्वारा जो भी विष उगला गया है, वह सब इसकी कपट- चेष्टा है।
सभी सैनिक – धिक्कार है उस धोखेबाज को ! धिक्कार है अंग्रेजी – शासन को, वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् ।
चन्द्रसिंह – अपने देश के सम्मान के लिए तो हम सब प्राणार्पण करने के लिए उत्सुक हैं।
सभी सैनिक – प्राणदान करेंगे, करेंगे, करेंगे, वीरचन्द्रसिंह की जय हो, भारतमाता की जय हो ।
(सब निकल जाते हैं)
सन् 1930 ई० की 23 अप्रैल की तिथि को प्रातः काल में कैप्टेन रिकेट 72 रॉयल गढ़वाल रायफल्स के सैनिकों के साथ किस्साखानीबाजार को प्रस्थान करता है।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) आपत्कालिकी का भविष्यति ?
(ख) के प्राचण्ड्यं द्रक्ष्यन्ति ?
(ग) सैन्याधिकारी क: ?
(घ) सर्वै: कस्य प्रतीक्षा कर्त्तव्या ?
(ङ) वयं कां दातुं समुत्सुकाः ?
(च) रिकेटः कं प्रति प्रस्थित: ?
उत्तरम् –
(क) गोष्ठी,
(ख) आङ्ग्लाः,
(ग) कैप्टेन रिकेट:,
(घ) अग्रिमादेशस्य,
(ङ) प्राणदक्षिणाम्,
(च) किस्साखानी – हाटकम् ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) गोष्ठीस्थले के आगमिष्यन्ति ?
(ख) साम्प्रतम् आङ्ग्लाः किं द्रक्ष्यन्ति ?
(ग) कीदृशः सैन्याधिकारी प्रविशति ?
(घ) रिकेटः मनसि किं विचिन्त्यति?
(ङ) सैनिकाः किमर्थं समुत्सुकाः ?
(च) कैप्टेन रिकेट: कैः सह किस्साखानी हाटकं प्रति प्रस्थित: ?
उत्तरम् —
(क) गोष्ठीस्थले सर्वेषां दलानां दलपतयः आगमिष्यन्ति।
(ख) साम्प्रतम् आङ्ग्लाः देशभक्तानां प्राचण्ड्यं द्रक्ष्यन्ति ।
(ग) नालास्त्रसैनिकैः अनुगम्यमानः सैन्याधिकारी प्रविशति ।
(घ) रिकेट : मनसि विचिन्त्यति — ” कथम् एतान् भारतीय सैनिकान् वञ्चयित्वा एतेषामेव हस्तैः नालास्त्र चालयित्वा आन्दोलनकारिणां सर्वनाशं कुर्याम् । “
(ङ) सैनिका: स्वदेशमानार्थं प्राणदक्षिणां दातुं समुत्सुकाः ।
(च) कैप्टेन रिकेट : द्विसप्तति रॉयल गढवाल राइफल्स सैनिकैः सह किस्साखानी हाटकं प्रति प्रस्थितः ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘गढदेशीयाः’ इत्यस्य विशेष्यपदं चिनुत ।
(ख) ‘औग्र्यम्’ इत्यर्थे किं पदं प्रयुक्तम् अत्र ?
(ग) ‘ग्रहीतुम्’ अस्य विपरीतार्थकपदं नाट्यांशात् चिनुत ।
(घ) ‘विचिन्त्य’ अस्य प्रकृति-प्रत्ययनिर्देशं कुरुत ।
(ङ) ‘कुर्याम्’ अस्य कर्तृपदम् अत्रं किम् ?
(च) ‘स्वदेशमानार्थम्’ अस्य सन्धिच्छेदं कुरुत ।
उत्तरम् –
(क) युवानः,
(ख) प्राचण्ड्यम्,
(ग) दातुम्,
(घ) वि + √चिन्त् + ल्यप्,
(ङ) अहं (रिकेट :),
(च) स्वदेशमान + अर्थम् ।
द्वितीयं दृश्यम्
(3) (किस्साखानी ………… गुलिकाप्रहारं कुरुत ।
शब्दार्था: — बलाधिपतिः = सैन्याधिकारी; नीत्वा = लेकर; घोषम् = नाद को, नारे को; पूरयन् = पूरा करते हुए; सम्मर्दः = भीड़; समागच्छति = समीप आती है; समागतान् = आए हुओं को; साग्रहम् = आग्रहपूर्वक; आदिशति = आदेश देता है; स्मारयति = याद दिलाता है; निर्गच्छन्तु = चले जाएँ; अन्यथा = नहीं तो; गुलिकाप्रयोगः = गोली का प्रयोग; श्रुत्वा = सुनकर; बिभेति = डरता है; एते = ये; मरणाद् = मरने से; बिभ्यति = डर रहे हैं; दक्ष = सावधान; गुलिकास्त्रैः = बन्दूकों से; त्रिवारम् = तीन बार ; गुलिकाप्रहारम् = गोली का प्रहार; सक्रोधम् = क्रोध के साथ; तारस्वरेण = चिल्लाने के स्वर से; आदिश्यते = आदेश दिया जाता है।
प्रसंग:– सैन्याधिकारी शौम्सन कैप्टेन रिकेट के साथ अंग्रेजी सेना लेकर किस्साखानी बाजार पहुँचता है, जहाँ विरोध-प्रदर्शन के लिए आन्दोलनकारियों की भीड़ एकत्रित है। रिकेट आन्दोलनकारियों से वहाँ से चले जाने के लिए कहता है और न जाने पर गोली चलाने की चेतावनी देता है, किन्तु आन्दोलनकारियों पर उसका कोई प्रभाव नहीं होता, तब वह सैनिकों को गोली चलाने का आदेश देता है, किन्तु सैनिक गोली नहीं चलाते। इस पर रिकेट क्रोधित होकर चिल्लाने लगता है। इन्हीं सब बातों का वर्णन प्रस्तुत नाट्यांश में हुआ है।
हिन्दी- भावानुवादः—
द्वितीय दृश्य
(किस्साखानी बाजार में सैन्याधिकारी शौम्सन कैप्टेन रिकेट के साथ अंग्रेजी फोर्स (बल) को लेकर प्रवेश करता है। ‘वन्दे मातरम्’ इस नारे को पूरा करते हुए आन्दोलनकारी लोगों की भीड़ समीप आती है। कैप्टेन रिकेट विरोध-प्रदर्शन के लिए आन्दोलन में आए लोगों को आग्रहपूर्वक आदेश देता है और दण्ड का स्मरण कराता है।)
कैप्टेन रिकेट – यहाँ आए हुए सभी लोग आन्दोलन को त्यागकर इस स्थान से शीघ्र ही चले जाएँ, नहीं तो शक्ति का प्रयोग होगा, गोली का प्रयोग भी ।
( सुनकर कोई भी नहीं डरता । )
कैप्टेन रिकेट- :- ( मन-ही-मन में) कैसे ये लोग मरने से भी नहीं डरते हैं। (मुझे) क्या करना चाहिए? ज्ञात होता है, शस्त्र – प्रयोग के बिना ये नहीं जाएँगे। ( प्रकट रूप में) सैनिको! सावधान ( तैयार ) बन्दूकों से तीन बार गोली का प्रहार करो।
( किन्तु कोई भी गोली का प्रहार नहीं करता, ( वह) फिर क्रोधपूर्वक जोर से चिल्लाने के स्वर में आदेश देता है।)
जवानो! मेरे द्वारा आदेश दिया गया है कि गोली का प्रहार करो।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) बलाधिपतिः कः ?
(ख) केषां जनानां सम्मर्दः समागच्छति ?
(ग) रिकेट : किं स्मारयति ?
(घ) एते जनाः कस्मात् न बिभ्यति ?
(ङ) रिकेटः कतिवारं गुलिकाप्रहारं कर्तुम् आदिशति ?
उत्तरम् – (क) शौम्सन:, (ख) आन्दोलनकारिणाम्, (ग) दण्डम्, (घ) मरणाद्, (ङ) त्रिवारम्।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) बलाधिपतिः शौम्सनः केन सह आङ्ग्लबलं नीत्वा कुत्र प्रविशति ?
(ख) किं पूरयन् आन्दोलनकारिणां सम्मर्दः समागच्छति ?
(ग) कैप्टेन रिकेटः कान् साग्रहम् आदिशति?
(घ) रिकेट: का चेतावनी अददात् ?
(ङ) मनसि रिकेट : किं विचारयति ?
(च) रिकेट : सैनिकान् किम् आदिशति ?.
उत्तरम् –
(क) बलाधिपतिः शौम्सनः कैप्टेन रिकेटेन सह आङ्ग्लबलं नीत्वा किस्साखानी – हाटके प्रविशति ।
(ख) वन्दे मातरम् इति घोषं पूरयन् आन्दोलनकारिणां सम्मर्दः समागच्छति ।
(ग) कैप्टेन रिकेट : विरोधप्रदर्शनाय आन्दोलने समागतान् जनान् साग्रहम् आदिशति ।
(घ) रिकेट: चेतावनी अददात् — अत्र समागताः सर्वे जनाः आन्दोलनं त्यक्त्वा अस्मात् स्थानात् शीघ्रमेव निर्गच्छन्तु, अन्यथा शक्तिप्रयोगः भविष्यति गुलिकाप्रयोगः अपि।
(ङ) मनसि रिकेटः विचारयति – एते जनाः मरणाद् अपि न बिभ्यति । किं करवाणि ? भवतु ज्ञातम्, शस्त्रप्रयोगं विना एते न गमिष्यन्ति ।
(च) रिकेटः सैनिकान् आदिशति – गुलिकास्त्रैः त्रिवारं गुलिकाप्रहारं कुरुत |
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘बिभ्यति’ अस्मिन् क्रियापदे प्रयुक्तं वचनं किम् ?
(ख) ‘करवाणि’ अस्मिन् पदे प्रयुक्तः लकारः कः ?
(ग) ‘सकोपम्’ अस्य समानार्थकपदं नाट्यांशात् चित्वा लिखत ।
(घ) ‘सैन्याधिकारी’ इत्यर्थे किं पदं प्रयुक्तम् अत्र ?
(ङ) ‘नीचैः’ अस्य विलोमपदं लिखत ।
(च) ‘पूरयन्’ अत्र प्रयुक्तः प्रत्ययः कः ?
उत्तरम् – (क) बहुवचनम्, (ख) लोट्लकारः, (ग) सक्रोधम्, (घ) बलाधिपतिः, (ङ) उच्चैः, (च) शतृ ।
(4) चन्द्रसिंह :- (सक्रोधम्) युद्धं ……….. जयतु भारतमाता ।
शब्दार्था: – मा = मत; भूमौ = भूमि पर; पातयन्ति = गिरा देते हैं; देशद्रोहस्य = देश के प्रति शत्रुता का; विहस्य = हँसकर; हतः = मरे हुए; सममेव = एक समान ही, एक साथ ही; प्राप्स्यसि = प्राप्त करोगे।
प्रसंग :- सैनिकों द्वारा अपने आदेश की अवहेलना करने पर कैप्टेन रिकेट क्रोधित हो उठता है और वह उनके इस कृत्य को देशद्रोह बताकर उसका दण्ड दिखाकर उन्हें विचलित करना चाहता है, किन्तु चन्द्रसिंह इसे राजद्रोह बताकर इसके लिए प्राणदण्ड पाने को भी तैयार है। सभी सैनिक ‘बन्दूक फेंककर गोली न चलाने के संकल्प के साथ चन्द्रसिंह और भारतमाता का जयनाद कर उठते हैं। इसी का वर्णन प्रस्तुत नाट्यांश में किया गया है।
हिन्दी- भावानुवाद:-
चन्द्रसिंह – (क्रोध के साथ) युद्ध मत करो, गोली का प्रहार मत करो। (सुनकर सब बन्दूकें भूमि पर गिरा देते हैं। चन्द्रसिंह फिर कैप्टेन रिकेट से कहता है।) तुम्हारे द्वारा नहीं सुना गया “चन्द्रसिंह की गर्जना ” ! हम सब मातृभक्तों के ऊपर शस्त्र – प्रयोग नहीं करेंगे।
कैप्टेन रिकेट – ( क्रोध के साथ) तुम देशद्रोह का फल जानते हो चन्द्रसिंह ?
चन्द्रसिंह – (हँसकर) जानता हूँ श्रीमन् ! भली-भाँति जानता हूँ।
कैप्टेन रिकेट – क्या ?
चन्द्रसिंह – प्राणदण्ड ।
कैप्टेन रिकेट – फिर भी देशद्रोह करते हो?
चन्द्रसिंह – हाँ श्रीमन्, किन्तु देशद्रोह नहीं, अपितु राजद्रोह कहो ।
कैप्टेन रिकेट – (हँसकर) राजद्रोह का फल भी मृत्यु है।
चन्द्रसिंह – मैं मरने से भी नहीं डरता हूँ। मेरे कृष्ण कहते हैं- ” मारे गए तो स्वर्ग को प्राप्त करोगे……।’
सैनिक – (एक साथ ही ) हम भी प्राणदान करेंगे, किन्तु फिर भी गोली का प्रहार नहीं करेंगे । वन्दे मातरम्। भारतमाता विजयी हो, वीरचन्द्रसिंह की जय हो, भारतमाता की जय हो ।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) सर्वे कानि भूमौ पातयन्ति ?
(ख) देशद्रोहस्य फलं किं भवति ?
(ग) हतो वा किं प्राप्स्यसि ?
उत्तरम् – (क) बन्दूकास्त्राणि, (ख) प्राणदण्डम्, (ग) स्वर्गम् ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) चन्द्रसिंहः सक्रोधं किं कथयति ?
(ख) सर्वे श्रुत्वा किं कुर्वन्ति ?
(ग) चन्द्रसिंहस्य गर्जनं किम् ?
(घ) कृष्णः किं वदति ?
(ङ) सर्वे सैनिकाः किं न करिष्यन्ति ?
उत्तरम् –
(क) चन्द्रसिंह : सक्रोधं कथयति— युद्धं मा कुरुत, गुलिकाप्रहारं मा कुरुत ।
(ख) सर्वे श्रुत्वा बन्दूकास्त्राणि भूमौ पातयन्ति ।
(ग) ‘वयं मातृभक्तानाम् उपरि शस्त्रप्रयोगं न करिष्यामः । ‘ इति चन्द्रसिंहस्य गर्जनम् ।
(घ) कृष्णः वदति – “हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्ग…..।”
(ङ) सर्वे सैनिकाः प्राणदानं करिष्यन्ति, किन्तु कदापि गुलिकाप्रहारं न करिष्यन्ति ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘क्रोधेन सहितम्’ अस्य समस्तपदं नाट्यांशात् चित्वा लिखत ।
(ख) ‘युद्धं मा कुरुत’ अत्र अव्ययपदं किम् ?
(ग) ‘भूमौ’ अस्मिन् पदे प्रयुक्ता विभक्तिः का?
(घ) ‘कुरुत’ अस्य कर्तृपदं किम् ?
(ङ) ‘क्त’ प्रत्ययान्तम् एकं पदं नाट्यांशात् चिनुत ।
(च) ‘विहस्य’ अत्र कः उपसर्ग: प्रयुक्तः ?
उत्तरम् –
(क) सक्रोधम्,
(ख) मा,
(ग) सप्तमी,
(घ) यूयम् (सैनिका:),
(ङ) श्रुतम्,
(च) वि।
(5) चन्द्रसिंह :- श्रीमन् वयं ………… उद्घोषयन्ति । )
शब्दार्था: – वीरभूमेः = वीरों की भूमि के; अविलम्बमेव = शीघ्र ही, बिना देर किए ही; समागतानाम् = आए हुओं पर, सम्मिलित होनेवालों पर; निःशस्त्रजनानाम् = बिना शस्त्रवालों पर; समर्पयन्तु = सौंप दें; इमान् = इन सबको; कारागारम् = जेल; नयत = ले जाओ; केचन = कुछ; क्षिप्त्वा = फेंककर; निरुद्धान् कुर्वन्ति = बन्द करते हैं।
प्रसंग :- रिकेट की मृत्युदण्ड की धमकी को सुनकर चन्द्रसिंह कहते हैं कि तुम्हें जो करना हो, कर लो, किन्तु हम निहत्थे लोगों पर गोली नहीं चलाएँगे। रिकेट सैनिकों को अपनी बन्दूकें सौंप देने के लिए कहता है और अंग्रेज सैनिकों से उन्हें जेल में डालने का आदेश देता है। कुछ सैनिक इसका विरोध करते हैं, किन्तु चन्द्रसिंह के आदेश से सभी बन्दूकें फेंक देते हैं। सभी वन्दे मातरम् के उद्घोष के साथ जेल चले जाते हैं। इन्हीं सब बातों का वर्णन प्रस्तुत नाट्यांश में किया गया है।
हिन्दी- भावानुवादः-
चन्द्रसिंह – श्रीमन् हम सब वीरों की भूमि के निवासी हैं। जो कुछ भी आप करना चाहते हैं, वह शीघ्र ही करो। हम सब प्राण दे देंगे, किन्तु आन्दोलन में आए निहत्थे लोगों के ऊपर प्रहार नहीं करेंगे।
कैप्टेन रिकेट – ( क्रोध के साथ) शीघ्र ही सब अपनी बन्दूकें शस्त्रागार में सौंप दें। तुम सब अब अपराधी हो ।
(अंग्रेज सैनिकों से ) तुम इन्हें जेल ले जाओ।
( कुछ सैनिक विरोध-प्रदर्शन करते हैं, किन्तु चन्द्रसिंह के आदेश से अपनी बन्दूकें भूमि पर फेंककर जाते हैं। अंग्रेज सैनिक उनको जेल में बन्द करते हैं। चन्द्रसिंह के साथ जेल में बन्द सैनिक एक साथ ही वन्दे मातरम् का उद्घोष करते हैं।)
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) वयं कस्य निवासिन: ?
(ख) सैनिकाः केषां प्रहारं न करिष्यन्ति ?
(ग) केचन सैनिकाः किं कुर्वन्ति ?
(घ) आङ्ग्लसैनिकाः तान् कुत्र निरुद्धान् कुर्वन्ति ?
उत्तरम् – (क) वीरभूमें:, (ख) निःशस्त्रजनानाम्, (ग) विरोधप्रदर्शनम्, (घ) कारावासे ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) वयं प्राणान् दास्यामः, किन्तु किं न करिष्यामः ?
(ख) रिकेट : किं समर्पयितुं कथयति ?
(ग) चन्द्रसिंहस्य आदेशात् सैनिकाः किं कुर्वन्ति ?
(घ) चन्द्रसिंहेन सह कारागारे निरुद्धाः सैनिकाः किं कुर्वन्ति ?
उत्तरम् –
(क) वयं प्राणान् दास्यामः, किन्तु आन्दोलने समागतानां निःशस्त्र जनानाम् उपरि प्रहारं न करिष्यामः ।
(ख) रिकेटः सर्वान् स्वबन्दूकास्त्राणि शस्त्रभाण्डारे समर्पयितुं कथयति।
(ग) चन्द्रसिंहस्य आदेशात् सैनिकाः स्वबन्दूकास्त्राणि भूमौ क्षिप्त्वा गच्छन्ति ।
(घ) चन्द्रसिंहेन सह कारागारे निरुद्धाः सैनिकाः सममेव वन्दे मातरम् उद्घोषयन्ति ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘समागतानां नि:शस्त्रजनानाम्’ अत्र विशेषणपदं किम् ?
(ख) ‘तान् कारावासे निरुद्धान् कुर्वन्ति’ अत्र ‘तान्’ इति सर्वनामस्थाने संज्ञाप्रयोगः करणीयः ?
(ग) क्षिप्त्वा’ इत्यस्य प्रकृति-प्रत्ययनिर्देशं कुरुत ।
(घ) ‘वीराणाम् भूमेः’ इत्यर्थे प्रयुक्तं पदं किम् ?
(ङ) ‘शीघ्रम्’ इति पदस्य पर्यायः कः ?
उत्तरम् –
(क) समागतानाम्,
(ख) सैनिकान्,
(ग) √क्षिप् + क्त्वा,
(घ) वीरभूमेः,
(ङ) अविलम्बम् ।
सम्पूर्णपाठाधारिताः अभ्यासप्रश्नाः
(1) एकपदेन उत्तरत-
(क) ‘दायाद्यम्’ नाम नाटकस्य रचयिता कः अस्ति?
उत्तरम् – डॉ० अशोकडबरालः ।
(ख) ‘वीरचन्द्रसिंहस्य गर्जनम्’ नाम्नि नाटके कति पात्राणि सन्ति?
उत्तरम् – सप्तपात्राणि ।
