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UK Board Class 9 Hindi – कारक चिह्नों का प्रयोग

UK Board Class 9 Hindi – कारक चिह्नों का प्रयोग

UK Board Solutions for Class 9 Hindi – कारक चिह्नों का प्रयोग

कारक और कारक चिह
कारक मुख्य रूप से छह होते हैं, जिनका परिचय इस प्रकार है-
(1) कर्त्ता कारक – वाक्य में क्रिया करनेवाले को कर्त्ता कहते हैं। इसका चिह्न ‘ने’ है। वाक्य में ‘ने’ कारक चिह्न का प्रयोग सकर्मक क्रिया के साथ होता है, जहाँ पर क्रिया अकर्मक होती है, वहाँ कर्त्ता के साथ इसका प्रयोग कभी नहीं होता है। सकर्मक क्रियाओं के साथ भी प्रायः वर्तमानकाल में कर्त्ता के साथ ‘ने’ का प्रयोग नहीं किया जाता, जबकि भूतकाल की क्रिया के साथ इसका प्रयोग अनिवार्यतः होता है; जैसे-
(क) राम सोता है।
(अकर्मक क्रिया, ‘ने’ -रहित कर्त्ता )
(ख) राम फल खाता है।
(वर्तमानकाल सकर्मक क्रिया, ‘ने’ रहित कर्त्ता )
(ग) राम ने फल खाया।
(भूतकाल सकर्मक क्रिया, ‘ने’ सहित कर्त्ता)
(2) कर्म कारक – वाक्य में जिस पर क्रिया का प्रभाव अथवा फल पड़ता है, उसे कर्म कहते हैं। यह भी कहा जा सकता है कि कर्ता को जो सर्वाधिक अभीष्ट होता है, वह कर्म कहलाता है। इसका चिह्न ‘को’ है। वाक्य में इस चिह्न का प्रयोग प्रायः वैकल्पिक होता है; जैसे-
(क) विवेक पत्र लिखता है।
(‘ को ‘ – रहित प्रयोग )
(ख) विवेक पत्र को लिखता है।
(‘को’ – सहित प्रयोग )
सर्वनाम ‘कर्म’ के साथ ‘को’ चिह्न का प्रयोग न करके प्रायः जैसेइसके स्थान पर ‘ए’ तथा ‘एँ’ का प्रयोग भी किया जाता है; जैसे-
(क) विवेक उसको बुलाता है।
( ‘ को ‘ सहित प्रयोग )
(ख) विवेक उसे बुलाता है।
(‘को’ के स्थान पर ‘ए’ का प्रयोग)
(ग) विवेक हमें बुलाता है।
(‘को’ के स्थान पर ‘एँ’ का प्रयोग )
(3) करण कारक – क्रिया की सिद्धि में जो साधन सहायक होते हैं, उन्हें करण कारक कहते हैं। अर्थात् जिन साधनों के द्वारा कर्त्ता किसी क्रिया को सम्पन्न करता है, उन्हें करण कारक कहा जाता है। इसके चिह्न ‘से’ ‘के द्वारा (द्वारा)’ हैं। करण कारक के साथ इन चिह्नों का प्रयोग अनिवार्य रूप से होता है; जैसे-
(क) गीता कलम से पत्र लिखती है।
(ख) गीता ने फोन द्वारा अपनी माँ को सूचित कर दिया है।
(4) सम्प्रदान कारक — दान के कर्म द्वारा कर्त्ता जिसे प्रसन्न करना चाहता है, वह सम्प्रदान है। अर्थात् जिसके लिए क्रिया की जाए अथवा जिसे कोई वस्तु दी जाए और वापस न ली जाए उसे सम्प्रदान कहते हैं। इसका चिह्न ‘को’, ‘के लिए’ है। संज्ञा शब्दों के साथ तो इन्हीं चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, किन्तु सर्वनामों के साथ इनके स्थान पर ‘ए’ तथा ‘ऐं’ का प्रयोग किया जाता है; जैसे-
(क) माँ भिखारी को भिक्षा देती है।
(ख) माँ भिखारी के लिए वस्त्र लाई ।
(ग) पिताजी ने मुझे पुस्तक दी।
(‘को’ के स्थान पर ‘ए’ का प्रयोग
(घ) पिताजी ने तुम्हें पुस्तक दी।
(‘कों’ के स्थान पर ‘एँ’ का प्रयोग)
(5) अपादान कारक – जिससे किसी वस्तु का अलग होना पाया जाता है, अर्थात् जहाँ पर एक वस्तु दूसरी से अलग होती है अथवा जिससे निकलती है तो जिससे अलग हुआ जाता है, उसे अपादान कहा जाता है। इसका चिह्न ‘से’ (अलग होने में) है। अपादान कारक के साथ सदैव इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है; जैसे-
(क) पेड़ से पत्ता गिरता है।
( अलग होने में ‘से’ का प्रयोग)
(ख) हिमालय से गंगा निकलती है।
(निकलने में ‘से’ का प्रयोग )
(6) अधिकरण कारक – क्रिया के सम्पन्न होने का जो आधार होता है, उसे अधिकरण कारक कहते हैं। क्रिया के होने का यह आधार कोई स्थान अथवा समय होता है। इसके चिह्न ‘में’, ‘पर’, ‘ऊपर’ होते हैं। जहाँ क्रिया का आधार कोई स्थान होता है, वहाँ इन चिह्नों का प्रयोग अनिवार्यत: होता है, किन्तु जहाँ आधार समय होता है, वहाँ इनका प्रयोग वैकल्पिक होता है। अर्थात् समयवाची आधार के साथ इनका प्रयोग किया भी जा सकता है और नहीं भी; जैसे-
(क) माँ कमरे में बैठी है।
(स्थान आधार के साथ ‘में’ का प्रयोग)
(ख) छत पर बिल्ली है।
(स्थान आधार के साथ ‘पर’ का प्रयोग )
(ग) प्रातःकाल भौरे गुनगुनाते हैं।
(समय आधार के साथ ‘में’ रहित प्रयोग)
(घ) प्रातः काल में लोग घूमने जाते हैं।
(समय आधार के साथ ‘में’ सहित प्रयोग)
अनेक विद्वान् कारक के ‘सम्बन्ध’ और ‘सम्बोधन’ ये दो भेद और मानते हैं, किन्तु सभी विद्वान् इन्हें कारक मानने पर एकमत नहीं हैं। इनका विवेचन इस प्रकार है-
(1) सम्बन्ध कारक- क्रिया के अतिरिक्त अन्य शब्दों का जो पारस्परिक सम्बन्ध है, उसे ही सम्बन्ध कारक कहते हैं। इसके चिह्न ‘का’, ‘की’, ‘के’ आदि हैं। सम्बन्ध को दर्शाने के लिए इन चिह्नों का प्रयोग अनिवार्यतः किया जाता है। सर्वनामों के साथ इन चिह्नों के स्थान पर ‘रा’, ‘री’, रे’, ‘ना’, ‘नी’, ‘ने’ का भी प्रयोग किया जाता है; जैसे—
(क) यह रहने का कमरा है।
(‘का’ चिह्न का प्रयोग )
(ख) राम की माँ बीमार है।
(‘की’ चिह्न का प्रयोग )
(ग) सुरेश के दो बेटे हैं।
(‘के’ चिह्न का प्रयोग )
(घ) मेरी किताब खो गई है।
(‘की’ के स्थान पर ‘री’ का प्रयोग )
(ङ) तुम्हारे पिता कहाँ गए हैं?
(‘के’ के स्थान पर ‘रे’ का प्रयोग )
(च) तुम अपने घर जाओ।
(‘के’ के स्थान पर ‘ने’ का प्रयोग)
(2) सम्बोधन कारक — जिसे पुकारा जाता है, वह सम्बोधन कारक होता हैं। इसके चिह्न ‘हे’, ‘ओ’, ‘अरे’ आदि हैं। इनका प्रयोग वैकल्पिक होता है। इनके प्रयोग के बिना भी सम्बोधन हो जाता है, इसीलिए इन्हें परसर्ग के अन्तर्गत नहीं रखा जाता, वरन् स्वतन्त्र शब्द माना जाता है; जैसे—
(क) हे भगवान्! यह तुमने क्या कर दिया।
(ख) ओ लड़के! इधर आओ।
(ग) अरे बच्चो ! अब बैठकर पढ़ो।
(घ) अरे! सुनो।
(‘अरे’ का स्वतन्त्र रूप में प्रयोग )
इन सभी कारकों और उनके चिह्नों को संक्षिप्त रूप में इस प्रकार समझा जा सकता है-
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1 – निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप ( परसर्ग रहित ) लिखिए –
दरवाजा, नदी, आँख, डाकू, कक्षा, कुरसी, मुनि, माला।
उत्तर-
प्रश्न 2 – निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप (परसर्गसहित ) लिखिए-
आदमी (ने), लड़की (को), कमरा (में), कवि (से), (पर), पशु (को), बहन (ने), बहू (को)
उत्तर—
प्रश्न 3 – कारक किसे कहते हैं? इसके भेद उदाहरणसहित बताइए |
उत्तर— कारक — वाक्य में क्रिया तथा संज्ञा सर्वनाम शब्दों के मध्य जो सम्बन्ध होता है, उसे कारक कहते हैं।
भेद – कारक के मुख्य रूप से छह भेद माने गए हैं-
(1) कर्त्ता कारक — राम ने फल खाया।
(2) कर्म कारक — विवेक पत्र लिखता है।
(3) करण कारक — गीता कलम से पत्र लिखती है।
(4) सम्प्रदान कारक — माँ भिखारी के लिए वस्त्र लाई ।
(5) अपादान कारक — हिमालय से गंगा निकलती है।
(6) अधिकरण कारक — छत पर बिल्ली बैठी है।
कुछ विद्वान् सम्बन्ध और सम्बोधन को भी कारक मानते हैं-
(1) सम्बन्ध – तुम्हारे पिता कहाँ गए हैं?
(2) सम्बोधन – अरे बच्चो ! अब बैठकर पढ़ो।
प्रश्न 4 – निम्नलिखित वाक्यों के खाली स्थानों को उपयुक्त परसर्गों से पूरा कीजिए-
(1) सुरेश …………. कई सेब खाए ।
(2) गंगा हिमालय …………. निकलती है।
(3) माँ बच्चे …………. खिलौना लाती है।
(4) शीला ने भाई …………. पत्र लिखा।
(5) नौकर …………. बुलाओ।
(6) मोहन ने राम …………. डाँटा |
(7) मैंने सुरेश …………. बोलना बन्द कर दिया।
(8) उसने चाकू …………. फल काटे ।
उत्तर-
(1) सुरेश ने कई सेब खाए ।
(2) गंगा हिमालय से निकलती है।
(3) माँ बच्चे के लिए खिलौना लाती है।
(4) शीला ने भाई को पत्र लिखा ।
(5) नौकर को बुलाओ।
(6) मोहन ने राम को डाँटा ।
(7) मैंने सुरेश से बोलना बन्द कर दिया।
(8) उसने चाकू से फल काटे ।

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