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UK Board 9 Class Hindi Chapter 7 – विज्ञानस्य उपलब्धयः (संस्कृत विनोदिनी)

UK Board 9 Class Hindi Chapter 7 – विज्ञानस्य उपलब्धयः (संस्कृत विनोदिनी)

UK Board Solutions for Class 9th Hindi Chapter 7 – विज्ञानस्य उपलब्धयः (संस्कृत विनोदिनी)

विज्ञानस्य उपलब्धयः (विज्ञान की उपलब्धियाँ)
पाठ का सार
लक्ष्मीकान्त और उमापति दो मित्र जब मिलते हैं तो परस्पर अभिवादन के पश्चात् कल न मिल पाने के विषय में पूछने पर लक्ष्मीकान्त मित्र उमापति को बताता है कि कल वह रूड़की में जनपदीय भाषण-प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए गया था। उसके भाषण का विषय ‘विज्ञान की उपलब्धियाँ’ था और उसने उस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उमापति उससे उसके भाषण के सन्दर्भ में पूछता है, उसने अपने भाषण में क्या कहा? लक्ष्मीकान्त उसे अपने भाषण के सन्दर्भ में इस प्रकार बताता है—
मैंने विज्ञान के विविध उपकरणों— कम्प्यूटर, दूरदर्शन, अन्तरिक्षयात्रा, टेलीफोन (मोबाइल फोन), वायुयान और मैट्रो आदि को मन में रखकर अपना भाषण दिया। प्रक्षेपास्त्र के विषय में मैंने सबको बताया कि यह आज युद्ध का मुख्य अस्त्र है। इसके निर्माण में हमारी स्थिति विकसित देशों जैसी ही है। उमापति पूछता है कि तुमने कम्प्यूटर के विषय में क्या कहा? लक्ष्मीकान्त बताता है कि ‘ई मेल’ से हम कोई भी सूचना कहीं भी बहुत कम समय में भेज सकते हैं। ऋतु सम्बन्धी भविष्यवाणी भी इसके द्वारा होती है। रेलवे आरक्षण जैसे अन्य कार्य तो इसके बिना हो ही नहीं सकते।
विश्व में कहीं भी घटी कोई घटना हो, ज्ञान-विज्ञान का विषय हो और मनोरंजन के कार्यक्रम दूरदर्शन के द्वारा हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं। ऐसे ही विद्युत् पर हमारा जीवन निर्भर हो गया है। इसके अतिरिक्त सिनेमा, प्रकाशन, वस्त्र और खिलौना निर्माण के उद्योगों आदि में सभी जगह विज्ञान की उपलब्धियाँ दृष्टिगत होती हैं।
अपने भाषण के उपसंहार के विषय में लक्ष्मीकान्त बताता है कि विज्ञान के दो रूप हैं—एक मंगलकारी और दूसरा संहारक रूप । वस्तुतः विज्ञान के संहारक रूप के लिए विज्ञान नहीं, बल्कि व्यक्ति की सोच उत्तरदायी है। यह ठीक है कि अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा – नागासाकी नगरों को परमाणु अस्त्र से नष्ट कर दिया, किन्तु उसी परमाणु शक्ति ने कृषि उत्पादन, विद्युत् निर्माण और रोगों के उन्मूलन में महान् उपलब्धियाँ प्राप्त कराई हैं, जिनसे मनुष्य का जीवन सुखी हो गया है। विज्ञान की शक्ति से हम सब लोग मिलकर विश्व से गरीबी, दुःख, दीनता को हटाकर सर्वत्र सुख – शान्ति स्थापित कर सकते हैं। उमापति अपने मित्र की ये बातें सुनकर कहता है कि हमें विज्ञान के लोकमंगलकारी रूप की ही उपासना करनी चाहिए ।
पाठाधारित अवबोधन-कार्य एवं भावानुवाद
निर्देशः — अधोलिखितं वार्त्तालापं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत—
(1) लक्ष्मीकान्तः – अहो मित्र ! ……….. मेट्रो इत्यादीनि ।
शब्दार्थाः – सम्यक् = भली-भाँति; कथम् = कैसे; ह्यः = बीता हुआ कल; ग्रहीतुम् = लेने के लिए; गतवान् आसम् = गया था; शोभनम् = सुन्दर; उपलब्धयः = उपलब्धियाँ; बहुसमीचीनम् = बहुत प्रासंगिक, समकालिक; वर्धापनम् = बधाई; तर्हि = तो; भाषितम् = कहा गया; श्रावयतु = सुनाओ; किंञ्चित् = कुछ; साम्प्रतम् = इस समय; दृश्यन्ते = दिखाई देते हैं; मनसि = मन में; निधाय = रखकर; सङ्गणकम् = कम्प्यूटर; अन्तरिक्षगमनम् = अन्तरिक्षयात्रा; दूरवाणी = टेलीफोन (मोबाइल फोन ) ।
सन्दर्भ: – प्रस्तुत वार्त्तालाप हमारी पाठ्यपुस्तक ‘संस्कृत विनोदिनी ( भाग – प्रथमः )’ के ‘विज्ञानस्य उपलब्धयः’ नामक पाठ से उद्धृत है।
प्रसंग : – प्रस्तुत वार्त्तालाप में दो मित्र लक्ष्मीकान्त तथा उमापति मिलते हैं। कुशलक्षेम के पश्चात् उमापति प्रश्न पूछता है कि मित्र कल तुम कहाँ थे? इस पर लक्ष्मीकान्त उमापति को बताता है कि वह कल एक भाषण – प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए रूड़की गया था। उस प्रतियोगिता में उसने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उसका विषय ‘विज्ञान की उपलब्धियाँ’ था। उमापति उससे भाषण के विषय में कुछ बताने के लिए कहता है। इन्हीं सब बातों का वर्णन यहाँ किया गया है।
हिन्दी- भावानुवादः-
लक्ष्मीकान्त – अरे मित्र ! नमस्कार ।
उमापति – नमस्कार, आप कैसे हो?
लक्ष्मीकान्त – मैं ठीक हूँ। आप कैसे हैं?
उमापति – मैं भी कुशलपूर्वक हूँ। आप कल कहाँ थे?
लक्ष्मीकान्त – कल तो मैं जनपदीय – भाषण – प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए रूड़की नगर गया था।
उमापति – सुन्दर, आपके भाषण का क्या विषय था ?
लक्ष्मीकान्त – विज्ञान की उपलब्धियाँ ।
उमापति – बहुत प्रासंगिक है। आपने कौन-सा स्थान प्राप्त किया?
लक्ष्मीकान्त – प्रथम स्थान |
उमापति – बधाई, तो वहाँ आपके द्वारा क्या कहा गया, कुछ सुनाओ?
लक्ष्मीकान्त – इस समय तो विज्ञान के उपकरण ही सब जगह दिखाई देते हैं, उनको ही मन में रखकर मैंने भाषण दिया; यथा – कम्प्यूटर, दूरदर्शन, अन्तरिक्ष- यात्रा, मोबाइल फोन, वायुयान (हवाई जहाज), मेट्रो इत्यादि ।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः – 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) भाषण – प्रतियोगिता कीदृशी आसीत्?
(ख) कस्मिन् नगरे आसीत् भाषण- प्रतियोगिता ?
(ग) लक्ष्मीकान्तेन किं स्थानं प्राप्तम् ?
(घ) सर्वत्र कानि दृश्यन्ते ?
उत्तरम् —
(क) जनपदीय,
(ख) रूडकीनगरे,
(ग) प्रथमम्,
(घ) विज्ञानोपकरणानि ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) लक्ष्मीकान्तः ह्यः कुत्र आसीत् ?
(ख) भाषणस्य विषयः कः आसीत्?
(ग) उमापतेः मत्यौ प्रतियोगितायाः विषयः कीदृशः आसीत् ?
(घ) लक्ष्मीकान्तः किं मनसि निधाय भाषणं दत्तवान् ?
उत्तरम्-
(क) लक्ष्मीकान्तः ह्य: जनपदीय – भाषण – प्रतियोगितायां भागं ग्रहीतुं रूडकीनगरं गतवान् ।
(ख) भाषणस्य विषयः ‘विज्ञानस्य उपलब्धयः’ इति आसीत् ।
(ग) उमापतेः मत्यौ प्रतियोगितायाः विषयः बहु समीचीनम् आसीत् ।
(घ) साम्प्रतं तु विज्ञानोपकरणानि एव सर्वत्र दृश्यन्ते तानि एव मनसि निधाय लक्ष्मीकान्तः भाषणं दत्तवान् ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘तुमुन्’ प्रत्ययान्तम् एकपदं वार्त्तालापात् चित्वा लिखत ।
(ख) ‘उपलब्धयः’ अस्मिन् पदे विभक्ति-वचननिर्देशं कुरु ।
(ग) ‘अशोभनम्’ अस्य विलोमपदं प्रयुक्तम् अत्र किम् ?
(घ) ‘विज्ञानोपकरणानि अत्र सन्धिच्छेदं कुरुत ।
उत्तरम् – (क) ग्रहीतुम्, (ख) प्रथमा, बहुवचनम्, (ग) शोभनम्, (घ) विज्ञान + उपकरणानि ।
(2) उमापतिः – किं भवता …………. न शक्यते ।
शब्दार्था: – प्रक्षेपास्त्रविषये = मिसाइल के विषय में; किमपि = कुछ भी; उक्तम् = कहा गया; यतोहि = क्योंकि निश्चय ही; अद्यत्वे = आज के; क्रियते = किया जाता है; विकसितदेशैः = विकसित देशों के; उक्तवान् = कहा; कामपि = कोई भी; कुत्रापि = कहीं भी; अल्पसमयेन = थोड़े से ही समय द्वारा; परं संगणकम् = सुपर कम्प्यूटर; उत = चाहे; अन्यत् = दूसरा।
प्रसंग: – प्रस्तुत वार्त्तालाप में उमापति द्वारा मिसाइल और कम्प्यूटर के विषय में पूछे जाने पर लक्ष्मीकान्त उसे इनके विषय में संक्षिप्त रूप से समझाता है कि आज इनका क्या महत्त्व
हिन्दी- भावानुवादः-
उमापति – क्या आपके द्वारा मिसाइल के विषय में कुछ भी नहीं कहा गया?
लक्ष्मीकान्त – क्यों नहीं कहा गया; क्योंकि निश्चय ही आज के युद्ध में मुख्य रूप से मिसाइलों का ही प्रयोग किया जाता है।
मिसाइल के निर्माण के विषय में भारत की स्थिति विकसित देशों के समान ही है।
उमापति – कम्प्यूटर के विषय में आपने क्या कहा ?
लक्ष्मीकान्त – ‘ई मेल’ के द्वारा हम कोई भी सूचना कहीं भी थोड़े-से (अल्प) समय में भेज सकते हैं, भारत द्वारा निर्मित सुपर कम्प्यूटर ऋतु सम्बन्धी भविष्यवाणी करता है, आज तो रेलवे आरक्षण हो, चाहे (वैसा) अन्य (दूसरा) कोई भी कार्य कम्प्यूटर के बिना नहीं किया जा सकता ।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) अद्यत्वे युद्धे मुख्यरूपेण केषां प्रयोगः क्रियते ?
(ख) कस्मिन् विषये भारतस्य स्थिति: विकसितदेशैः समाना अस्ति ?
(ग) परं संगणकं कां भविष्यवाणीं करोति ?
(घ) किम् आरक्षणं संगणकेन भवति ?
उत्तरम् –
(क) प्रक्षेपास्त्राणाम्,
(ख) प्रक्षेपास्त्रनिर्माणविषये,
(ग) ऋतुविषयकीम्,
(घ) रेलवे – आरक्षणम् ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) कुत्र प्रक्षेपास्त्राणाम् एव प्रयोगः क्रियते ?
(ख) प्रक्षेपास्त्रनिर्माणविषये भारतस्य स्थितिः कीदृशी अस्ति ?
(ग) ‘ई मेल’ द्वारा वयं किं कर्तुं शक्नुम: ?
(घ) भारतेन निर्मितं परं संगणकं किं करोति ?
उत्तरम् –
(क) अद्यत्वे युद्धे मुख्यरूपेण प्रक्षेपास्त्राणाम् एव प्रयोगः क्रियते ।
(ख) प्रक्षेपास्त्रनिर्माणविषये भारतस्य स्थिति: विकसितदेशैः समाना एव अस्ति ।
(ग) ‘ई मेल’ द्वारा वयं कामपि सूचनां कुत्रापि अल्पसमयेन प्रेषयितुं शक्नुमः ।
(घ) भारतेन निर्मितं परं संगणकं ऋतुविषयकीं भविष्यवाणीं करोति ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘उक्तम्’ अस्मिन् पदे प्रयुक्तः प्रत्ययः कः ?
(ख) ‘निर्माणस्य विषये’ अत्र समासं कुरुत ।
(ग) ‘ह्यः’ अस्य विपरीतार्थकपदं किम् अत्र प्रयुक्तम् ?
(घ) ‘करोति’ अस्य क्रियापदस्य कर्तृपदं किम् ?
उत्तरम्— (क) क्त, (ख) निर्माणविषये, (ग) अद्य, (घ) परं संगणकम् ।
(3) उमापतिः – अन्यत् किं कथितं …….. उपसंहारं कथम् अकरोत् ?
शब्दार्था:- उक्तवान् = कहा; अंगभूतम् = अंग हुई; संजातम् = हो गई; स्थातुम् = रहना, ठहरना; अस्माभिः = हमारे द्वारा; सततम् = निरन्तर; संरक्षणम् = बचत; करणीयम् = करनी चाहिए; चलचित्रोद्योगः = (चलचित्र + उद्योगः ) सिनेमा उद्योग; क्रीडनकादीनाम् = खिलौने आदियों के; दरीदृश्यन्ते = दिखाई पड़ती हैं।
प्रसंग : – प्रस्तुत वार्त्तालाप में लक्ष्मीकान्त अपने मित्र उमापति को विज्ञान की दूरदर्शन, विद्युत् आदि उपलब्धियों के महत्त्व के विषय में बताता है कि औद्योगिक क्षेत्र तो केवल विज्ञान की उपलब्धियों पर ही निर्भर है।
हिन्दी- भावानुवादः –
उमापति – आपके द्वारा (और) अन्य क्या कहा गया ?
लक्ष्मीकान्त – दूरदर्शन के विषय में मैंने कहा कि विश्व की कोई घटना हो, ज्ञान-विज्ञान का विषय हो, चाहे मनोरंजक कार्यक्रम; दूरदर्शन तो हमारे जीवन का अभिन्न अंग हो गया है। इसी प्रकार विद्युत् के बिना तो एक क्षण भी रहा नहीं जा सकता है, न ही घरों में जल, न ही प्रकाश, हमारा जीवन ही उस पर निर्भर है।
उमापति – आपने सत्य कहा है, इसलिए हमारे द्वारा निरन्तर विद्युत् की बचत की जानी चाहिए।
लक्ष्मीकान्त – चलचित्र उद्योग, प्रकाशन उद्योग, वस्त्र और खिलौने आदि का निर्माण, सब जगह विज्ञान की उपलब्धियाँ ही दिखाई पड़ती हैं।
उमापति – लक्ष्मीकान्त ! आपने भाषण का उपसंहार कैसे किया?
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः – 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) किं जीवनस्य अंगभूतं संजातम् ?
(ख) अस्माकं जीवनं कस्यां निर्भरं विद्यते ?
उत्तरम् – (क) दूरदर्शनम्, (ख) विद्युति ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) कं विना क्षणमेकमपि स्थातुं न शक्यते ?
(ख) कथम् अस्माकं जीवनं विद्युति निर्भरं विद्यते ?
(ग) अस्माभिः किं करणीयम् ?
(घ) कुत्र विज्ञानस्य उपलब्धयः दरीदृश्यन्ते ?
उत्तरम्-
(क) विद्युतं विना क्षणमेकमपि स्थातुं न शक्यते ।
(ख) विद्युतं विना नैव गृहेषु जलं, नैव प्रकाशः भवति, एवम् अस्माकं जीवनं विद्युति निर्भरं विद्यते ।
(ग) अस्माभिः सततं विद्युतः संरक्षणं करणीयम् ।
(घ) चलचित्रोद्योग:, प्रकाशनोद्योगः, वस्त्र – क्रीडनकादीनां निर्माणं च सर्वत्र विज्ञानस्य उपलब्धयः एव दरीदृश्यन्ते ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘दूरदर्शनम्’ अस्य क्रियापदं प्रयुक्तम् अत्र किम् ?
(ख) ‘संजातम्’ अत्र प्रयुक्तः उपसर्गः कः ?
(ग) ‘न एव’ इत्यर्थे प्रयुक्तं पदं किम् ?
(घ) ‘करणीयम्’ अत्र प्रकृति – प्रत्ययनिर्देशं कुरुत ।
उत्तरम् – (क) संजातम्, (ख) सम्, (ग) नैव, (घ) √कृ + अनीयर् ।
(4) लक्ष्मीकान्तः – अन्ते अहम् ………… रूपमेवोपासनीयम् ।
शब्दार्थाः – अन्ते = अन्त में; रूपद्वयम् = दो रूप; विश्वमंगलकरम् = विश्व का कल्याण करनेवाला; संहारकम् = विनाश करनेवाला; कदापि = कभी; कृते = के लिए; चिन्तनम् = सोच; परमाण्वस्त्रम् = (परमाणु + अस्त्रम्) परमाणु अस्त्र (हथियार); निर्माय = बनाकर; नाशितवान् = नाश कर दिया; परमाणुशक्त्या = परमाणु शक्ति के; कृष्युत्पादने = ( कृषि + उत्पादने) कृषि के उत्पादन में; रोगोन्मूलने = ( रोग + उन्मूलने) रोग के नाश में; महत्य: = महती, बड़ी; सम्मिल्य = मिलकर; दारिद्र्यम् = गरीबी को; दैन्यम् = दीनता; अपाकृत्य = दूर करके; रूपमेवोपासनीयम् = (रूपम् + एव + उपासनीयम्) रूप की ही उपासना करनी चाहिए।
प्रसंग :- प्रस्तुत वार्त्तालाप में लक्ष्मीकान्त अपने मित्र उमापति को अपने भाषण के उपसंहार के विषय में बताता है कि विज्ञान का कल्याणकारी अथवा संहारकारी रूप सब मनुष्य की सोच पर निर्भर है।
हिन्दी- भावानुवादः-
लक्ष्मीकान्त – अन्त में मैंने कहा कि विज्ञान के दो रूप हैं— विश्वकल्याणकारी और संहारकारी । जब कभी विज्ञान के संहारक रूप की चर्चा होती है, तब उसके लिए विज्ञान उत्तरदायी नहीं है, अपितु मनुष्य की सोच ही (उत्तरदायी) है। परमाणु हथियार को बनाकर अमेरिका देश ने हिरोशिमा – नागासाकी नगरों को नष्ट किया, किन्तु उसके द्वारा ही परमाणु शक्ति से कृषि उत्पादन में, विद्युत् के निर्माण में और रोगों के उन्मूलन में महती उपलब्धियाँ प्राप्त की गई हैं, जिससे मानव का जीवन सुखकारी और दीर्घायु हो गया; अतः मानवों को मिलकर विज्ञान की शक्ति का विश्व की गरीबी, दुःख और दीनता को दूर करके सबके लिए कल्याणकारी, सुखकारी और शान्ति प्रदान करनेवाले विश्व की रचना करनी चाहिए।
उमापति – धन्य, लक्ष्मीकान्त धन्य । हम सबके द्वारा भी विज्ञान का लोकमंगलकारी रूप ही उपासना करने योग्य है।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) विज्ञानस्य कतिरूपं वर्तते ?
(ख) परमाण्वस्त्रं निर्माता क: देश: ?
(ग) केभ्यः शान्तिप्रदं विश्वं रचनीयम् ?
(घ) विज्ञानस्य किं रूपम् उपासनीयम् ?
उत्तरम् – (क) रूपद्वयम्, (ख) अमेरिकादेशः, (ग) सर्वेभ्यः, (घ) लोकमङ्गलकरम् ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत
(क) विज्ञानस्य रूपद्वयं के ?
(ख) विज्ञानस्य संहारक – रूपस्य कृते उत्तरदायि किम् अस्ति ?
(ग) अमेरिका देशः के नाशितवान् ?
(घ) अमेरिकादेशेन परमाणुशक्त्या काः उपलब्धयः सम्प्राप्ताः सन्ति ?
(ङ) मानवै: सम्मिल्य किं करणीयम् ?
(च) अस्माभिः कस्य कीदृशं रूपम् उपासनीयम् ?
उत्तरम् –
(क) विज्ञानस्य रूपद्वयं वर्तते — विश्वमङ्गलकरं संहारकरं च ।
(ख) विज्ञानस्य संहारक – रूपस्य कृते उत्तरदायि विज्ञानं नास्ति, अपितु मनुष्यस्य चिन्तनमेव अस्ति ।
(ग) अमेरिकादेश: हिरोशिमा – नागासाकी – नगरे नाशितवान् ।
(घ) अमेरिकादेशेन परमाणुशक्त्या कृष्युत्पादने, विद्युतः निर्माणे, रोगोन्मूलने च महत्य: उपलब्धयः सम्प्राप्ताः सन्ति ।
(ङ) मानवै: सम्मिल्य विज्ञानशक्त्या विश्वस्य दारिद्र्यं दुःखं दैन्यं च अपाकृत्य सर्वेभ्यः मङ्गलकरं सुखकरं शान्तिप्रदं च विश्वं रचनीयम्।
(च) अस्माभिः विज्ञानस्य लोकमङ्गलकरं रूपम् एव उपासनीयम्।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘परमाण्वस्त्रम्’ अत्र सन्धिच्छेदं कुरुत ।
(ख) ‘कृषि उत्पादने’ अत्र सन्धि कुरुत ।
(ग) ‘सम्मिल्य’ अस्य प्रकृति-प्रत्ययनिर्देशं कुरुत ।
(घ) ‘अल्पम्’ अस्य विलोमपदं चिनुत ।
(ङ) ‘पूजनीयम्’ इत्यस्य पर्यायवाचिपदं किम् अत्र प्रयुक्तम् ?
उत्तरम्- (क) परमाणु + अस्त्रम्, (ख) कृष्युत्पादने, (ग) सम् + मिल् + ल्यप्, (घ) दीर्घम्, (ङ) उपासनीयम्।
सम्पूर्णपाठाधारिताः अभ्यासप्रश्नाः
(1) एकपदेन उत्तरत—
(क) अहो मित्र ! इति कः कं वदति?
उत्तरम् — लक्ष्मीकान्तः उमापतिम् ।
(ख) लक्ष्मीकान्तः किं नगरं गतवान्?
उत्तरम् — रूडकीनगरम् ।
(ग) लक्ष्मीकान्तः कस्यां प्रतियोगितायां भागं ग्रहीतुं गतवान्?
उत्तर— भाषण-प्रतियोगितायाम् ।
(घ) भाषणस्य विषयः कः आसीत्?
उत्तर – विज्ञानस्य उपलब्धयः ।
(ङ) लक्ष्मीकान्तः किं स्थानं प्राप्तवान् ?
उत्तरम् — प्रथमम् ।
(च) उमापतिः विद्युतः विषये किम् उक्तवान्?
उत्तरम्– अस्माभिः सततं विद्युतः संरक्षणं करणीयम्।
(छ) विज्ञानस्य रूपद्वयं किम् अस्ति ?
उत्तरम् — विश्वमङ्गलकरं संहारकरं च ।
(2) रिक्तस्थानानि पूरयत-
(क) अहं तु ………… जनपदीय भाषणप्रतियोगितायां भागं ग्रहीतुं रूडकीनगरं गतवान् । (अद्य/ह्यः)
(ख) भवता ………. विषये किमपि न उक्तम् ? (प्रक्षेपास्त्रम्/वस्त्रम्)
(ग) अस्माभिः ……….. संरक्षणं करणीयम्। (जलस्य/विद्युत:)
(घ) साम्प्रतं तु विज्ञानोपकरणानि एव ……… दृश्यन्ते। ( यत्र तत्र / सर्वत्र)
(ङ) अस्माभिः सर्वैरपि …………… लोकमङ्गल रूपमेवोपासनीयम्। (ज्ञानस्य / विज्ञानस्य )
(च) परमाणुशक्त्या कृष्युत्पादने विद्युतः निर्माणे रोगोन्मूलने च महत्य: …….. सम्प्राप्ताः सन्ति । (उपलब्धयः/सफलता: )
उत्तरम् —
(क) अहं तु ह्यः जनपदीयभाषणप्रतियोगितायां भागं ग्रहीतुं रूडकीनगरं गतवान् ।
(ख) भवता प्रक्षेपास्त्रं विषये किमपि न उक्तम् ?
(ग) अस्माभिः विद्युतः संरक्षणं करणीयम् ।
(घ) साम्प्रतं तु विज्ञानोपकरणानि एव सर्वत्र दृश्यन्ते ।
(ङ) अस्माभिः सर्वैरपि विज्ञानस्य लोकमङ्गलकरं रूपमेवोपासनीयम्।
(च) परमाणुशक्त्या कृष्युत्पादने विद्युतः निर्माणे रोगोन्मूलने च महत्य: उपलब्धयः सम्प्राप्ताः सन्ति ।
(3) पाठाधारेण सत्यम् (√) असत्यं (×) च चिनुत-
(क) साम्प्रतं यत्र तत्र विज्ञानोपकरणानि न दृश्यन्ते ।
(ख) प्रक्षेपास्त्रविषये भारतस्य स्थिति: विकसितदेशैः समाना अस्ति ।
(ग) विद्युतं विना किमपि कार्यं भवितुम् अर्हति ।
(घ) तस्याः अपव्ययः रोधनीयः ।
(ङ) विज्ञानस्य एकमेव रूपम् अस्ति ।
(च) विज्ञानस्य विश्वमङ्गलकरं संहारकरं च रूपद्वयं वर्तते ।
(छ) लोकमङ्गलकरं रूपं न उपासनीयम्।
उत्तरम् – (क) (×), (ख) (√), (ग) (×), (घ) (√), (ङ) (×), (च) (√) (छ) (×)।
(4) एतेषां प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत—
(क) लक्ष्मीकान्तः किमर्थं रूडकीनगरं गतवान्?
उत्तरम् – लक्ष्मीकान्तः जनपदीय – भाषण – प्रतियोगितायां भागं ग्रहीतुं रूडकीनगरं गतवान् ।
(ख) प्रक्षेपास्त्रविषये भारतस्य स्थितिः कीदृशी ?
उत्तरम् — प्रक्षेपास्त्रविषये भारतस्य स्थिति: विकसितदेशैः समाना एव अस्ति।
(ग) ‘ ई मेल’ द्वारा कः लाभः ?
उत्तरम् – ‘ई मेल’ द्वारा वयं कामपि सूचनां कुत्रापि अल्पसमयेन प्रेषयितुं शक्नुमः ।
(घ) दूरदर्शनस्य कः लाभः वर्णितः अस्ति?
उत्तरम् – दूरदर्शनेन विश्वस्य कापि घटना भवेत्, ज्ञानविज्ञानस्य विषयः उत मनोरंजककार्यक्रमः अस्माकं जीवनस्य अंगभूतं संजातम्।
(ङ) विद्युता किं भवति ?
उत्तरम् – विद्युता ग्रहेषु जलं, प्रकाशः भवति, समस्तोद्योगाः विद्युता उत्पादनं कुर्वन्ति । एवमेव विद्युतं विना तु क्षणमेकमपि स्थातुं न शक्यते ।
(च) विज्ञानस्य संहारकरूपस्य उत्तरदायि कः ?
उत्तरम् – विज्ञानस्य संहारकरूपस्य उत्तरदायि मनुष्यस्य चिन्तनमेव अस्ति ।
(छ) परमाणुशक्त्या केषु क्षेत्रेषु महत्यः उपलब्धयः प्राप्ताः सन्ति?
उत्तरम् — परमाणुशक्त्या कृष्युत्पादने, विद्युतः निर्माणे, रोगोन्मूलने च महत्यः उपलब्धयः सम्प्राप्ताः सन्ति ।
(ज) कीदृशं विश्वं रचनीयम् ?
उत्तरम् — सर्वेभ्यः मङ्गलकरं सुखकरं शान्तिप्रदं च विश्वं रचनीयम् ।

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