UK Board Class 9 Hindi – पर्यायवाची, विलोम, श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द
UK Board Class 9 Hindi – पर्यायवाची, विलोम, श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द
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पर्यायवाची शब्द
जो शब्द अर्थ की दृष्टि से समान होते हैं, ‘पर्यायवाची’ शब्द कहलाते हैं; जैसे—दूध के पर्यायवाची हैं- दुग्ध, क्षीर, पय, गोरस ।
पर्यायवाची शब्द अर्थ में समान अवश्य होते हैं किन्तु ये वाक्य-प्रयोग में सर्वथा एक-दूसरे के स्थान पर प्रयुक्त नहीं हो सकते। इनका प्रयोग सदैव औचित्य पर निर्भर करता है, अन्यथा अर्थ का अनर्थ हो जाता है; यथा-
राजीव लोचन श्रीराम को देखकर सीता मुग्ध हो गईं।
इस वाक्य में ‘राजीव’ कमल का पर्यायवाची है, किन्तु इसके स्थान पर हम कमल के अन्य पर्यायवाची शब्द ‘पंकज’ का प्रयोग नहीं कर सकते; क्योंकि पंकज का अर्थ होता है ‘कीचड़ में उत्पन्न’ । अब यदि हम उपर्युक्त वाक्य के स्थान पर यह कहें कि ‘पंकज – लोचन श्रीराम को देखकर सीता मुग्ध हो गई।’ तो ‘पंकज’ का यह प्रयोग अर्थ का अनर्थ कर देता है।
इस प्रकार अर्थ की समानता होते हुए भी पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग एक-दूसरे के स्थान पर नहीं हो सकता।
प्रमुख पर्यायवाची शब्द इस प्रकार हैं—
अतिथि – अभ्यागत, मेहमान, पाहुना, आगन्तुक ।
अन्धकार – तिमिर, अँधेरा, तम।
अमृत – सुधा, अमी, पीयूष, सोम।
असुर – दानव, दनुज, दैत्य, राक्षस, निशाचर, मनुजाद, यातुधान।
आँख – नयन, लोचन, चक्षु, अक्षि, दृग, नेत्र
आग – अग्मि, अनल, पावक, ज्वाला, हुताशन, कृशानु, वैश्वानर ।
आभूषण – गहना, भूषण, अलंकार, जेवर ।
आकाश – गगन, नभ, व्योम, अम्बर, आसमान, शून्य।
इन्द्र – महेन्द्र, देवराज, सुरेन्द्र, सुरपति, सुरेश, पुरन्दर, शक्र, देवेन्द्र |
ईश्वर – परमात्मा, परमेश्वर, भगवान्, प्रभु, जगदीश, सर्वेश |
उपवन -उद्यान, वाटिका, बाग, बगीचा, आराम।
कमल – राजीव, सरोज, पंकज, जलज, नीरज, पयोज, नलिन ।
कपड़ा – वस्त्र, वसन, पट, चीर, अम्बर।
किनारा – तट, तीर, कूल, कगार ।
किरण – कर, अंशु, लेखा ।
कृष्ण – केशव, श्याम, गोपाल, माधव, गिरिधर, नन्दनन्दन, यशोदानन्दन ।
गंगा – भागीरथी, मन्दाकिनी, त्रिपथगा, जाह्नवी, देवनदी, सुरसरिता ।
घर – गृह, भवन, सदन, आगार, गेह, निकेतन ।
घोड़ा – अश्व, हय, बाजि, तुरंग ।
चतुर – कुशल, निपुण, दक्ष, पटु, प्रवीण ।
चन्द्रमा – शशि, चाँद, निशाचर, विधु, इन्दु, सुधाकर, सोम|
चन्द्रिका – ज्योत्स्ना, कौमुदी, शशिकला, चाँदनी।
जंगल – अरण्य, वन, विपिन, कानन, कान्तार।
जल – पानी, नीर, सलिल, वारि, पय।
तलवार – असि, खड्ग, करवाल, चन्द्रहास ।
तारा – सितारा, नक्षत्र, उडु, तारक।
तालाब – सर, सरोवर, जलाशय, ताल, तड़ाग।
तीर – वाण, शर, इषु, विशिख ।
दिन – दिवस, वासर, वार, दिवा।
दुष्ट – दुर्जन, अधम, नीच, खला
देवता -अमर, विबुध, सुर, देव, अजर।
देह – काया, शरीर, तन, गात्र, वपु, तनु ।
धनुष – चाप, कोदण्ड, धनु, कार्मुक, शरासन।
नदी – सरित, सरिता, तटिनी, तरंगिणी, निर्झरिणी ।
नौका – नाव, तरणी, तरी, बेड़ी।
पत्थर – पाषाण, पाहन, प्रस्तर, अश्म।
पक्षी – विहग, विहंगम, खग, द्विज।
पति – भर्त्ता, स्वामी, कान्त, प्राणनाथ।
पत्ता – किसलय, पल्लव, पर्ण, पत्र।
पत्नी – भार्या, गृहिणी, घरवाली, सहधर्मिणी, अर्धांगिनी ।
पहाड़ – पर्वत, गिरि, अचल, शैल, भूधर, नग।
पिता – बाप, जनक, तात।
पुत्र – सुत, तनय, तनुज, आत्मज, बेटा।
पुत्री – सुता, तनया, तनुजा, आत्मजा, बेटी।
पृथ्वी – धरती, भू, भूमि, धरा, अवनी, मही, वसुधा।
प्रकाश – ज्योति, द्युति, कान्ति, उजाला।
फूल – पुष्प, सुमन, कुसुम, प्रसून।
बन्दर – वानर, कपि, शाखामृग, मर्कट।
बादल – मेघ, घन, वारिद, जलद, जलधर, पयोद।
बिजली – दामिनी, तड़ित, चंचला, चपला, विद्युत् ।
ब्राह्मण -द्विज, भूसुर, भूदेव, विप्र ।
भौंरा – भ्रमर, अलि, द्विरेफ, मधुप, मधुकर, षट्पद ।
मदिरा – सुरा, पय, मधु, शराब।
मनुष्य – मानव, नर, मनुज, आदमी, मर्त्य।
माता – माँ, जननी, जाया, अम्बा।
मित्र – दोस्त, सखा, सहचर, गीत ।
मुख – वदन, आनन, मुँह।
यमुना – सूर्यसुता, कालिन्दी, सूर्यतनया, तरणितनूजा, रविसुता ।
युद्ध – संग्राम, लड़ाई, समर, रण।
राजा – नृप, भूप, भूपति, नरेश, नृपति, महीप।
रात – रात्रि, रजनी, निशा, विभावरी, यामिनी ।
राक्षस – दनुज, रजनीचर, निशाचर, दैत्य, दानव ।
लक्ष्मी – पद्म, रमा, कमला, श्री, चंचला ।
वायु – अनिल, वात, पवन, समीर, हवा।
वृक्ष – पेड़, पादप, विटप, द्रुम, तरु।
शत्रु – अरि, वैरी, दुश्मन, विपक्षी, रिपु ।
संसार – विश्व, जगत्, दुनिया ।
सर्प – साँप, भुजंग, नाग, अहि, विषधर, व्याल, फणि।
समुद्र – सागर, सिन्धु, रत्नाकर, जलधि, जलनिधि, नदीश, उदधि, पयोधि ।
सरस्वती – गिरा, वाणी, शारदा, वीणापाणि, वागेश्वरी, महाश्वेता ।
सवेरा – सूर्योदय, अरुणोदय, प्रातः, ऊषा, भोर ।
सिंह – शेर, मृगपति, वनराज ।
सुन्दर – रम्य, केसरी, काम्य, कमनीय, मनोहर, ललाम, ललित, अभिराम ।
सुगन्ध – सौरभ, सुरभि, खुशबू, महक ।
सूर्य – सूरज, रवि, आदित्य, दिनकर, भानु, भास्कर, दिनेश, दिवाकर।
सेना – अनी, कटक, चमू, फौज, दल।
सोना – स्वर्ण, हेम, कनक, कंचन, कुन्दन ।
स्त्री – नारी, महिला, अबला, रमणी, ललना, कान्ता, वामा।
विलोम/विपरीतार्थक शब्द
किसी शब्द से विपरीत अर्थ देनेवाला शब्द उसका विलोम अथवा विपरीतार्थक शब्द कहलाता है; जैसे- ‘सुख’ और ‘दुःख’ परस्पर विरोधी शब्द हैं; अतः ये परस्पर विलोम शब्द हैं।
प्रमुख विपरीतार्थक शब्द इस प्रकार हैं-



श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द
वर्तनीगत भिन्नता रहते हुए भी कुछ शब्दों में उच्चारणगत इतना कम अन्तर होता है कि वे प्राय: समान सुनाई देते हैं, किन्तु उनमें अर्थगत कोई साम्य नहीं होता। ऐसे शब्द, जिनकी वर्तनी में कुछ अन्तर होने के कारण उच्चारण में तो समानता का आभास होता हो, परन्तु अर्थ की दृष्टि से उनमें कोई समानता न हो, श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं; जैसे—अभिहत-अभिहित की श्रुति समान है, परन्तु इनके अर्थ भिन्न-भिन्न ‘अभिहत’ का अर्थ है – पीटा हुआ, ‘अभिहित का अर्थ है— कहा हुआ, उक्त, आबद्ध । यहाँ ऐसे ही कुछ शब्द दिए जा रहे हैं। इन्हें पढ़िए, समझिए और याद कीजिए।
1. अँगना— आँगन ।
अंगना – स्त्री ।
2. अन्त- समाप्ति ।
अन्त्य — अन्तिम, आखिरी ।
3. अन्तर— फर्क ।
अनन्तर— पश्चात्, बाद।
4. अम्बुज – कमल ।
अम्बुद — बादल |
5. अंश – भाग, हिस्सा ।
अंस — कन्धा ।
6. अग – सूर्य, अचल।
अघ — पाप ।
7. अगम- दुर्गम ।
आगम – उत्पत्ति, शास्त्र ।
8. आणि— तलवार की धार ।
अणि – अनी, सिरा, नोक, सेना।
9. अतल – जिसका तल न हो।
अतुल – जिसके समान कोई नहीं ।
10. अधूत – निडर ।
अवधूत — योगी ।
11. अनल-आग।
अनिल — वायु !
12. अनिष्ट – हानि।
अनिष्ठ — निष्ठाहीन ।
13. अनुसार — अनुकूल, मुताबिक ।
अनुस्वार – स्वर के बाद उच्चरित हलन्त अनुनासिक वर्ण।
14. अपेक्षा – तुलना में, चाह ।
उपेक्षा — तिरस्कार, त्याग ।
15. अब्ज — कमल ।
अब्द- वर्ष ।
16. अभय – निर्भय ।
उभय-दोनों, दोनों में से प्रत्येक ।
17. अभिमान—गर्व ।
अभियान — व्यवस्थित आन्दोलन ।
18. अभिज्ञ – जानकार ।
अनभिज्ञ – अनजान।
19. अभिराम – सुन्दर ।
अविराम – निरन्तर ।
20. अभिहत – पीटा गया, पराभूत ।
अभिहित – सम्बोधित या पुकारा गया, आबद्ध ।
21. अवलम्ब – सहारा ।
अविलम्ब – बिना विलम्ब, तुरन्त ।
22. अमित – बहुत अधिक।
अमीत — दुश्मन।
23. अरथी – टिकठी, झाँजी ।
अर्थी – आकांक्षी, धनी, गरजमन्द, अर्थयुक्त ।
24. अरबी – अरब देश का, अरब देश की भाषा।
अरवी – एक कन्द।
25. अर्ध- आधा ।
अर्घ्य-पूजाद्रव्य |
26. अर्चन – पूजा ।
अर्जन-संग्रह |
27. अलि- भौंरा ।
अली / आली – सखी ।
28. अलिजिह्व — कौआ ( uvula ) ।
उपालिजिह्न – गलबिल (Pharynx) ।
29. अशक्त- असमर्थ ।
असक्त – विरक्त, उदासीन, सांसारिक बन्धनों से मुक्त।
आसक्त – लिप्त, वासनायुक्त ।
30. आकर-खान।
आकार-रूप।
31. अचार – मसालेदार, खट्टा या मीठा पदार्थ ।
आचार – नियम, रीति – व्यवहार, चरित्र |
32. आदि- आरम्भ ।
आदी – अभ्यस्त, आदतवाला ।
33. आभरण – आभूषण, जेवर |
आवरण-पट, परदा।
34. आयत — लम्बा-चौड़ा ।
आयात- बाहर से आया हुआ, आगत।
35. आसन – बैठने का स्थान या वस्त्र ।
आसन्न – निकंट।
36. आहूत – आमन्त्रित, बुलाया हुआ।
आहुति — बलि।
37. इति — अन्त ।
ईति – आपदा ।
38. इन्दिरा – लक्ष्मी ।
इन्द्रा- इन्द्राणी का तद्भव, शची।
39. उद्धत – अक्खड़, प्रचण्ड।
उद्यत — तैयार ।
40. उद्धार – कष्ट से मुक्ति ।
उधार — कर्ज।
41. उपयुक्त – उचित, वाजिब ।
उपर्युक्त – ऊपर कहा हुआ ।
42. उपकार – भलाई।
अपकार – बुराई ।
43. उपल— पत्थर ।
उपला- कण्डा।
उत्पल — कमल ।
44. उपस्थित – विद्यमान, हाजिर।
उपस्थिति — हाजिरी ।
45. हँस – एक क्रिया ।
हँस- एक पक्षी ।
46. उबारना – बचाना।
उभारना — स्पष्ट करना, ऊँचा करना।
47. ऋत-सत्य।
ऋतु — मौसम |
48. ओटना – बिनोले अलग करना।
औटना — खौलने की क्रिया ।
49. ओर — तरफ ।
और — तथा ।
50. कँटीला – काँटेदार ।
कटीला – तीक्ष्ण, काट करनेवाला।
51. कंकाल – अस्थिपंजर |
कंगाल — दरिद्र, भूखा ।
52. कटौती – कमी |
कठौती – काठ का बरतन ।
53. कटिबन्ध – कमरबन्द, नाड़ा।
कटिबद्ध – तत्पर, तैयार ।
54. कड़ाई – कड़ापन, सख्ती ।
कढ़ाई – काढ़ने का काम ।
कड़ाही — लोहे का एक बर्तन ।
55. कड़ी – ठोस, सख्त ।
कढ़ी – मट्ठा या दही और बेसन को सालन ।
56. कथा— कहानी ।
कत्था — खैर की लकड़ी का सत।
57. करण- साधन ।
कर्ण – कान।
58. किला – गढ़ |
कीला – खूँटा, कील |
59. कुच – स्तन ।
कूच – जाना, प्रस्थान, रवानगी।
कूचा — गली |
60. कुमार — कुँवर |
कुम्हार — बरतन बनानेवाला ।
61. कृति — रचना ।
कृती – पुण्यात्मा ।
62. कृपण – कंजूस।
कृपाण – तलवार, कटार ।
63. केश – बाल |
केस – मुकदमा (Case)।
64. द्रव – तरल पदार्थ ।
द्रव्य – धन-सम्पत्ति ।
65. कोड़ी – बीस का समूह, बीस।
कोढ़ी – कोढ़ का रोगी ।
कौड़ी — कपर्दिका ।
66. कोर – किनारा ।
कौर — निवाला, ग्रास ।
67. कोश – शब्दकोश ।
कोष -खजाना ।
कोस – लगभग दो मील की दूरी ।
68. कोशल – अवध प्रदेश |
कौशल – नैपुण्य |
69. क्षात्र – क्षत्रिय – सम्बन्धी ।
छात्र — विद्यार्थी ।
70. भोज्य- भोजन।
भोग्य — विलासिता की वस्तु ।
71. गाड़ी — यान ।
गाढ़ी – घनी (Dense, Thick)।
72. गिरि- पर्वत ।
गिरी – बीज के अन्दर का गूदा ।
73. गूँधना – सानना (आटा गूंधना ) ।
गूँथना – पिरोना ( माला गूंथना)।
74. गृह — घर ।
ग्रह — चन्द्र, सूर्य इत्यादि नक्षत्र ।
75. गेय – गाने योग्य।
ज्ञेय – जानने योग्य, जो जाना जा सके।
76. चक्रवाक – चकवा पक्षी।
चक्रवात- बवण्डर ।
77. चपत – थप्पड़, आर्थिक हानि ।
चम्पत – गायब।
78. चरस – गाँजा जैसा नशीला पदार्थ |
चरसा – चमड़े का बड़ा डोल, जिससे सिंचाई के लिए कुएँ से पानी निकालते हैं।
79. चित्त-मन ।
चित- पीठ के बल पड़ा हुआ।
80. चिर- दीर्घ ।
चीर – वस्त्र ।
81. जगत्-संसार ।
जगत- -कुएँ के ऊपर का चबूतरा ।
82. जन्ता – चक्की ।
जनता — लोग |
83. जरठ- बूढ़ा |
जठर- पेट |
84. जरा – बुढ़ापा ।
ज़रा-थोड़ा, अल्प |
85. सुना-सुनना क्रिया भूतकालिक रूप।
सूना — निर्जन, एकान्त ।
86. जुड़ा – ‘जोड़ना’ का भूतकालिक रूप ।
जूड़ा – खोपा, केशों का बन्धन विशेष ।
87. जूठा – उच्छिष्ट भोजन ।
झूठा — असत्यवादी ।
88. डीठ — दृष्टि |
ढीठ — निडर, धृष्ट।
89. डोल-पानी रखने का लोहे का गोल बरतन ।
डौल — ढाँचा |
90. ढलाई – ढालने की क्रिया ।
ढिलाई – शिथिलता ।
91. तरंग – लहर |
तुरंग — घोड़ा।
92. तरणि— सूर्य ।
तरणी – नाव |
तरुणी- युवती ।
93. ताक — देखने की क्रिया ( अवसर की प्रतीक्षा में ) ।
ताक़ – दीवार का आला ।
94. तोशा — सम्बल, पाथेय।
तोष- सन्तोष |
95. दशा – अवस्था ।
दिशा — तरफ ।
96. दारु – लकड़ी।
दारू – मदिरा, शराब ।
97. दिन- दिवस |
दीन— दयनीय ।
98. दिया- ‘देना’ का भूतकालिक रूप।
दीया – दीपक ।
99. द्वीप – टापू । द्विप- हाथी ।
दीप — दीपक ।
100. देव-देवता।
दैव — भाग्य ।
101. द्वारा — मार्फत ।
दारा, दार- भार्या, पत्नी ।
102. नत – झुका हुआ।
नित – प्रतिदिन |
नीत – लाया हुआ।
नीति – व्यवहार की विधि (Policy), कार्यविधि ।
103. नमित – झुका हुआ।
निमित्त — हेतु ।
104. नाड़ी – शिरा (Vein ) ।
नारी – स्त्री ।
नाली – छोटा नाला।
105. नावक— मधुमक्खी का डंक, छोटा बाण |
नाविक — मल्लाह |
106. नाहर सिंह, बाघ ।
नहर – पानी की कुल्या ।
107. नाश— मिट जाना, अस्तित्वहीनता।
नास – नासिका से सूँघी जानेवाली दवा, सुँघनी ।
108 नियत — निश्चित ।
नीयत — इरादा, मंशा ।
नियति – भाग्य, प्रारब्ध।
नियुत – दस लाख |
109. निरा – बिना मिलावट का, विशुद्ध ।
नीरा-ताड़ के वृक्ष का रस ।
110. निवृत्ति-मुक्ति, मोक्ष।
निर्वृत्ति-निष्पत्ति |
111. निशान – चिह्न |
निसान – झण्डा |
112. निहत – मारा हुआ।
निहित-छिपा।
113. नीड़ – घोंसला ।
नीर – पानी ।
114 नेति — अनन्त, जिसकी इति न हो।
नेती-मथनी की रस्सी ।
115. पट— वस्त्र |
पट्ट – तख्ती ( यथा— श्यामपट्ट, सूचनापट्ट ) |
116. पड़ना — गिरना ।
पढ़ना – पढ़ाई करना ।
117. पतन— नीचे गिरने की क्रिया ।
पत्तन— नगर, कस्बा (Town ), बन्दरगाह ।
118. पता-ठिकाना (Address) ।
पत्ता- पर्ण।
119. पथ — मार्ग।
पन्थ – मत।
पथ्य-सुपाच्य सादा भोजन ।
120. परदेश – पराया देश ।
प्रदेश – प्रान्त |
121. परवाह — ध्यान।
प्रवाह – बहाव ।
122. परिचारक — सेवक ।
प्रचारक – प्रचार करनेवाला ।
123. परिणाम — निदान ।
परिमाण – मात्रा |
124. परिमित — सीमित ।
परिमिति — परिमाण, सीमा।
125. प्रणत- झुका हुआ।
प्रणति – प्रणाम, निवेदन ।
प्रणय- प्रेम, विश्वास ।
126. प्रणाम – पूज्यजनों के प्रति अभिवादनपरक शब्द ।
प्रमाण – सबूत |
127. परिणति — परिणाम |
परिणत – रूपान्तरित ।
परिणय- विवाह |
128. परिवर्तन-बदलाव ।
प्रवर्तन – प्रचलित या प्रारम्भ करना।
129. परिहार — त्याग।
प्रहार – आघात, चोट ।
130. पाश- फन्दा
पास — निकट |
131. पीड़ा – दर्द |
पीढ़ा – चौकी।
132. पुरी — नगरी |
पूरी-पूड़ी।
133. – पुरुष – मर्द |
परुष — कठोर |
134. पूछ— पूछने की क्रिया ।
पूँछ—पुच्छ, दुम।
135. प्रकार – भेद, भाँति, किस्म।
प्राकार- चहारदीवारी ।
परकार — वृत्त खींचने का उपकरण ।
136. प्रकृत—यथार्थ, मूल ।
प्रकृति — स्वभाव, कुदरत ।
प्राकृत — मध्य भारतीय आर्यभाषा का नाम ।
137. प्रणय-प्रेम |
परिणय- विवाह |
138. प्रसाद — कृपा, धार्मिक अनुष्ठान के समय बनाभेज जो देवता को चढ़ाकर लोगों में बाँटा जाता है।
प्रासाद- महल |
139. प्रेषित — भेजा हुआ।
प्रोषित — प्रवासी।
140. बहन — सहोदरा।
वहन—ढोना ।
141. बहु — बहुत ।
बहू — पुत्रवधू ।
142. बाड़— सुरक्षा के लिए झाड़ी आदि का बनाया हुआ घेरा।
बाढ़ – सैलाब, नदी आदि के जल का किनारों को लाँघकर बहना ।
143. बाण – तीर ।
बान — आदत।
144. बार— दफा।
वार — प्रहार |
145. बास- गन्ध।
वास — निवास |
146. बाग – बगीचा, घोड़े की लगाम ( वल्गा) ।
बाघ – भारत का राष्ट्रीय पशु ।
147. बात — वार्त्ता ।
वात- वायु ।
148. बुरा – खराब।
बूरा-शक्कर।
149 ब्याज-सूद।
व्याज- छल, बहाना।
150. भारती- सरस्वती।
भारतीय — भारतवासी ।
151. भीति — डरा हुआ।
भित्ति- दीवार ।
152 मणि— रल |
मणी—साँप।
153. मिट्टी – धूल |
मट्ठी- एक व्यंजन, जो मैदा से तैयार होता है।
154. मूल जड़।
मूल्य- कीमत |
155. मैदा – बारीक आटा ।
मेदा – पेट ।
मेद— चर्बी |
156. मेघ – यज्ञ ।
मेधा – समझने एवं स्मरण रखने की शक्ति (बुद्धि)।
157. रसा – शोरब, तर, भूमि ।
रस्सा — मोटी रस्सी ।
158. लक्ष — लाख |
लक्ष्य- ध्येय ।
159. वंशी – मुरली ।
बंसी- मछली फँसाने की कँटिया ।
160. वदन — चेहरा, मुखड़ा, भाषण।
बदन—शरीर ।
161. वादी – मुद्दई, वक्ता ।
बादी – वायु विकार पैदा करनेवाला, गरिष्ठ।
162. वस्तु – चीज।
वास्तु- मकान, गृह, भवन।
163. विजन — एकान्त |
व्यजन — पंखा ।
164. विट — कामुक, जो भोगविलास में सर्वस्व गँवा चुका हो।
बीट – विष्ठा ।
165. विलक्षण – अद्भुत ।
विचक्षण – चतुर ।
166. वृन्त— डुण्ठल ।
वृन्द — समूह |
167. व्यंग — अपंग |
व्यंग्य – उपालम्भ, उलाहना, ताना।
168. व्यंजन — वर्ण ।
व्यजन् — पंखा ।
169. शंकर – शिव ।
संकर — मिश्रित |
170. शकट — बैलगाड़ी।
शकठ-मचान।
171. शकल — खण्ड |
सकल – सारा, सम्पूर्ण ।
शक्ल-सूरत।
शगल-काम-धन्धा, व्यापार ।
172. शप्त- शाप पाया हुआ।
सप्त-सात ।
173. सम—समान ।
शम-शान्ति, क्षम, मोक्ष।
174. शर—बाण।
सर-सरोवर |
175. शशधर—चन्द्रमा ।
शशिधर – शिव ।
176. शाम — सायं ।
साम – गेय वेद – मन्त्र, मीठी बातों से विपक्षी को ” वश में करना।
177. श्याम – काला, कृष्ण।
स्याम – एशिया का एक देश ।
178. शाला- घर |
श्यांला, साला – पत्नी का भाई ।
179. श्वपच — चाण्डाल।
स्वपच — स्वयंपाकी ।
180. शिरा – नाड़ी।
सिरा — छोर, किनारा।
181. श्वजन – कुत्ते का बच्चा ।
स्वजन — सम्बन्धी, मित्र।
182. शुक्ल — सफेद ।
शुल्क — फीस ।
सुकुल – अच्छे कुलवाला।
183. शूर—वीर।
सूर-सूर्य
184. षष्टि – 60 वर्ष ।
षष्ठी – छठी।
185. संकरी – भिन्न जातियों से उत्पन्न स्त्री ।
सँकरी — संकुचित |
186. संखिया — एक विषैला पत्थर ।
संख्या—अंक।
187. सजा — दण्ड |
सज्जा-सजावट।
188. सत्त्व—सार ।
स्वत्व — अधिकार ।
189. सन्देह — शक |
सदेह — सशरीर ।
190. सवर्ण- समान जाति का ।
सुवर्ण-अच्छे रंगवाला।
स्वर्ण- सोना ।
191. स्रोत – उत्स, पानी का सोता ।
श्रोत्र – कान।
स्तोत्र – स्तुति |
192. सास— पति या पत्नी की माँ।
साँस—श्वास |
193. सागर- संमुद्र ।
सगर — एक पौराणिक चरित्र ।
194. सुधि – स्मरण ।
सुधी- समझदार |
195. सौगन्ध — शपथ ।
सुगन्ध — अच्छी गन्ध ।
196. सुराज्य – अच्छी राज्य-व्यवस्था ।
स्वराज, स्वराज्य — अपना राज्य ।
197. हँसमुख – प्रसन्न रहनेवाला ।
हंस – मुख- हंस का मुँह ।
198. हँसी-हँसने की क्रिया ।
हंसी – हंस का स्त्रीवाची शब्द |
