अदानी ग्रुप और इसके चेयरमैन को जानिए | Adani Group

अदानी ग्रुप और इसके चेयरमैन को जानिए | Adani Group and its chairman

अदानी ग्रुप और इसके चेयरमैन को जानिए | Adani Group and its chairman

फर्श पर पड़ा कोई असफल व्यक्ति कभी नजर नहीं आता, हर कोई उगते सूरज को सलाम करता है। और कहीं वह दोपहर के सूरज की तरह तप रहा हो, सबकी आंखें चौंधिया देता है। ऐसी ही एक कामयाब शख्सियत का नाम है गौतम अडानी, जिनका जन्म निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ, कभी घर की माली हालत खराब होने से बीच ही में पढ़ाई छोड़नी पड़ी, आज गिनती विश्व के चुनिंदा सौ अरबपतियों में है।

अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी 10 अरब डॉलर की संपत्ति के मालिक हैं और अहमदाबाद के अरबपतियों में शुमार हैं। आज अदानी ग्रुप देश की सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कंपनियों में से एक है।

पहली पीढ़ी के उद्यमियों की सूची में अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी का बड़ा नाम है। कमोडिटी के आयात और ओजीएल लाइसेंस की ट्रेडिंग से आगे बढ़कर अदानी ने पिछले 20 सालों में एक ऐसा औद्योगिक साम्राज्य खड़ा किया है, जिसका नाम टाटा, बिड़ला और अंबानी के साथ लिया जाता है।

अदानी ग्रुप को स्थापित करने वाले गौतम अदानी का शुरुआती जीवन आसान नहीं था। शुरुआत में दो साल तक उन्होंने डायमंड सॉर्ट महिंद्रा ब्रॉस में नौकरी की। इसके बाद उन्होंने झावरी बाजार से अपने बिजनेस की शुरुआत की। आज हिंदुस्तान के सबसे अमीर व्यक्ति में उनका नाम शुमार होता है।

अदानी का जन्म अहमदाबाद के निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था और वे कुल सात भाई-बहन थे। पढ़ाई लिखाई करने से पहले रोजी-रोटी का सवाल आ गया। नतीजा यह हुआ कि कॉलेज की पढ़ाई के बाद उन्होंने गुजरात यूनिवर्सिटी में बीकॉम में एडमिशन तो ले लिया, लेकिन पढ़ाई आगे बढ़ नहीं पाई।

उन्होंने हार नहीं मानी। जिंदगी में कुछ कर गुजरने की तमन्ना लिए मुंबई पहुंच गए। 18 वर्ष की उम्र में पैसे कमाने के लिए मुंबई भाग आए और एक डायमंड कंपनी में तीन-चार सौ रुपये की नौकरी पर लग गए। दो साल वहां काम करने के बाद गौतम अदानी ने झावेरी बाजार में खुद का डायमंड ब्रोकरेज आउटफिट खोला।

यहीं से उनकी जिंदगी पलटनी शुरू हो गई। वर्ष 1981 में अदानी के बड़े भाई मनसुखभाई ने प्लाटिक की एक यूनिट अहमदाबाद में लगाई और उन्होंने गौतम को कंपनी चलाने के लिए कहा।

इसके बाद उन्होंने बड़े भाई की पीवीसी यूनिट संभाली और धीरे-धीरे कारोबार आगे बढ़ाया। 1988 में उन्होंने एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कंपनी अदानी इंटरप्राइजेज की स्थापना की। अदानी ग्रुप का कारोबार दुनिया भर में फैला हुआ है।
अदानी की पत्नी का नाम प्रीति है जो पेशे से डेंटिस्ट हैं और अदानी फाउंडेशन की हेड हैं। अदानी के दो पुत्र हैं-करण और जीत। इतना ही नहीं अदानी के पास दो प्राइवेट जेट हैं, जिसे उन्होंने बीचक्रॉफ्ट जेट 2005 में और हॉकर 2008 में खरीदी।

यह है एक कॉलेज ड्रॉपआउट स्टूडेंट्स की कामयाबी की एक रियल कहानी। उन्होंने साबित कर दिया कि बड़ा बनने के लिए कॉलेज की डिग्री की नहीं, बल्कि बड़ी सोच की जरूरत होती है।

परिचय
नाम : गौतम अदानी
जन्म :  24 जून 1962, अहमदाबाद
नागरिकता : भारतीय
पढ़ाई : गुजरात यूनिवर्सिटी (ड्रॉपआउट कॉमर्स कोर्स)
कार्य : एग्जिक्यूटव चेयरमैन और फाउंडर अदानी ग्रुप
धर्म : हिंदू
पत्नी : प्रीति
बगो : करण और जीत
माता-पिता : शांतिलाल, शांताबेन अदानी

गौतम अडानी का जन्म 24 जून 1962 को अहमदाबाद के गुजराती जैन परिवार में हुआ था। अपने सात भाई-बहनों में एक अडानी के पिता कभी आजीविका के लिए थराड़ कस्बे से गुजरात के इस उत्तरी हिस्से में आ बसे थे। अडानी कहते हैं, ‘आज हमारे पास चार हेलिकॉप्‍टर हैं। गुजरात सरकार के मुख्यमंत्री भी उनके चॉपर का इस्‍तेमाल करते हैं। इसके लिए वह भुगतान करते हैं। जहां तक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सवाल है, वह भी उनका हेलिकॉप्‍टर कोई फ्री में नहीं, शुल्क अदा कर इस्‍तेमाल करते हैं।

‘ बात सन् 1980 के दशक की है। उस वक्त अडानी अपने अहमदाबाद शहर में बचपन के साथी मलय महादेविया के स्कूटर पर पीछे बैठे लोगों को दिख जाया करते थे। इस दोस्ती की एक खास वजह अडानी को कमजोर लेकिन महादेविया की अच्छी इंग्लिश भी रही। बाद में महादेविया उनके बिजनेस पार्टनर हो गए। अडानी भारत के उन गिने-चुने कामयाब उद्योगपतियों में एक हैं, जिन्होंने फर्श से उठकर अर्श पर पहुंचने की ‘अरबपति कामयाबी’ हासिल की है। माली हालत खराब होने से ही उनके पिता अहमदाबाद के पोल इलाके की शेठ चॉल में रहते थे। आज उनका कारोबार पूरी दुनिया के कोयला व्यापार, खनन, तेल एवं गैस वितरण, बंदरगाह, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक, बिजली उत्पादन-पारेषण तक फैला हुआ है।

इस वक्त वह लगभग दस अरब डॉलर की संपत्ति के स्वामी हैं। उनके पास देश की सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कंपनी है। उन्होंने खुद का बीचक्रॉफ्ट जेट 2005 में और हॉकर जेट 2008 में खरीदा था। उनको यह सब महज साढ़े तीन दशक में हासिल हुआ है। अडानी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में 35 हजार करोड़ के निवेश का एलान किया है। उनकी पत्नी प्रीति पेशे से डेंटिस्ट हैं और अडानी फाउंडेशन की हेड भी। उनके दो पुत्र करण और जीत हैं।

हमारे देश में शीर्ष अंबानी साम्राज्य के जनक आज के उद्योगपति मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी नहीं, बल्कि उनके पिता धीरू भाई अंबानी रहे हैं। इसी तरह टाटा-बिड़ला का साम्राज्य भी उनके पुरखों का बनाया हुआ है लेकिन गौतम अडानी खुद के बूते इस मोकाम पर पहुंचे हैं। जिस समय वह गुजरात यूनिवर्सिटी में बीकॉम की पढ़ाई के लिए दाखिल हुए, उन्हीं दिनो घर के सामने रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ। चिंताजनक स्थितियों में पढ़ाई छूट गई। वह कॉलेज से मुंह मोड़कर पैसा कमाने के चुनौतीपूर्ण सफर पर निकल पड़े। अपना शहर छोड़कर मुंबई चले गए और वहां एक डॉयमंड कंपनी में बड़ी मामूली सी पगार पर नौकरी करने लगे।

वह शुरू से ही मेहनती और प्रतिभा संपन्न थे, बमुश्किल उस कंपनी डायमंड सॉर्ट महिंद्रा ब्रॉस में साल-दो-साल ही उनके पांव थमे, नौकरी छोड़कर झावेरी बाजार में उन्होंने खुद का डायमंड ब्रोकरेज आउटफिट खोल लिया। वर्ष 1981 में मनसुखभाई ने प्लाटिक की एक यूनिट अहमदाबाद में लगाई तो गौतम अडानी को कंपनी चलाने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने बड़े भाई की पीवीसी यूनिट संभाली और धीरे-धीरे कारोबार आगे बढ़ाया। वर्ष 1988 में उन्होंने एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कंपनी अडानी इंटरप्राइजेज की स्थापना की। ऐसा भी कहा जाता है कि जिस अडानी ने मारुति-800 से अपना व्यावसायिक सफर शुरू किया था और आज उनके पास बीएमडब्ल्यू गाड़ियों का झुंड है, फरारी है, कुल तीन हेलिकॉप्टर, तीन बोम्बार्डियर, बीचक्राफ्ट विमान हैं।

एक सबसे सफल बिजनेसमैन के इस सफर में गौतम अडानी को यह सफलता कोई आसानी से हासिल नहीं हुई है। खास तौर से नरेंद्र मोदी के देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद से उनको तरह-तरह के उलाहनों और आरोपों का भी सामना करना पड़ रहा है। कहा जाता है कि नरेंद्र मोदी ने अप्रैल, 2014 में जब प्रधानमंत्री का पद संभाला था, अडानी की पर्सनल वेल्थ लगभग पांच अरब डॉलर थी, जो आज ब्लूमबर्ग बिलेनायर इंडेक्स के मुताबिक 63 हजार करोड़ रुपए हो चुकी है।

देश के बाहर भी कई मोरचों पर उनके सामने कठिन हालात आज भी बने हुए हैं। उनको ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में सबसे बड़ी करीब 16.6 अरब डॉलर की लागत वाली कोयला खदान से खनन का अवसर मिला, जिसके लिए उन्हें ऑस्ट्रेलिया सरकार ने लगभग एक अरब डॉलर का कर्ज भी दिया लेकिन प्रोजेक्ट विवादों में आ गया। ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरणवादी कहने लगे कि ये प्रोजेक्ट पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। इस प्रोजेक्ट पर केंद्रित विवाद आज भी थमा नहीं है। इसी तरह मध्य प्रदेश में उनका एक हीरा खदान का प्रोजेक्ट भी आजकल मीडिया की सुर्खियों में है। बताया जा रहा है कि अडानी ग्रुप और अरबपति अनिल अग्रवाल के नियंत्रण वाले वेदांता रिसोर्सेज ग्रुप मिलकर 59 हजार करोड़ के डायमंड प्रोजेक्ट के लिए बिड लगाने वाले हैं।

आगामी नवंबर में इसके लिए बिड्स आमंत्रित किए जा सकते हैं। इस खदान में 3.2 करोड़ कैरेट डायमंड होने का अनुमान है। सचाई तो यह बताई जाती है कि अडानी पर नरेंद्र मोदी से नजदीकियों का भले आरोप लगे लेकिन ओडिशा, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान में अपने उद्योग-धंधों का विस्तार करने के दौरान कांग्रेस नीत सरकारों में उनके कई दोस्त रहे हैं। शरद पवार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ से भी उनकी नजदीकियां बताई जाती रही हैं।

 

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