औपनिवेशिक शासन के पूर्व हिंदचीन का इतिहास

औपनिवेशिक शासन के पूर्व हिंदचीन का इतिहास औपनिवेशिक शासन के पूर्व हिंदचीन का इतिहास दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदचीन में फ्रांसीसी उपनिवेशवाद के अंतर्गत पाँच प्रशासनिक और राजनीतिक इकाइयाँ–(i) कोचीन-चीन (ii) तोकिन (iii) अन्नाम (iv) लाओस तथा (v) कंबोडिया थीं। इन सबको मिलाकर फ्रेंच-इंडो-चाइना की स्थापना की गई। इस संपूर्ण भूभाग का क्षेत्रफल लगभग 2.80 लाख … Read more

राष्ट्रसंघ की उपलब्धियाँ

राष्ट्रसंघ की उपलब्धियाँ राष्ट्रसंघ की उपलब्धियाँ राष्ट्रसंघ का इतिहास सफलताओं और विफलताओं का इतिहास है। यह छोटी-छोटी राजनीतिक समस्याओं और कम शक्तिशाली राष्ट्रों के मामलों का समाधान कर सका, परंतु बड़े और शक्तिशाली राष्ट्रों के मामलों में निःसहाय बना रहा। और-राजनीतिक कार्यों में इसने अवश्य सराहनीय कार्य किए। राष्ट्रसंघ की सफलता • 1. राजनीतिक कार्य-अपने … Read more

राष्ट्रसंघ

राष्ट्रसंघ प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध अत्यधिक विनाशकारी थे। इन युद्धों में धन-जन की असीम क्षति हुई। मानव समाज एवं विश्व पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा। इसलिए, विश्व में शांति की स्थापना एवं विनाशकारी युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की आवश्यकता पड़ी। विश्वशांति के लिए प्रयास प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद ही आरंभ … Read more

लेनिन के बाद सोवियत संघ

लेनिन के बाद सोवियत संघ लेनिन के बाद सोवियत संघ जॉसेफ स्टालिन के अधीन सोवियत संघ-लेनिन की मृत्यु के बाद भी सोवियत संघ प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होता रहा। आर्थिक विकास के लिए सतत प्रयास किए गए। लेनिन के बाद सत्ता स्टालिन (1879-1953) के हाथों में आई। स्टालिन का अर्थ है स्टील का आदमी … Read more

प्रमुख जनजातीय आंदोलन और विद्रोह

प्रमुख जनजातीय आंदोलन और विद्रोह 18वीं और 19वीं शताब्दियों में भारत के विभित्र भागों में अनेक आदिवासी विद्रोह हुए। इनमें प्रमुख हैं-चुआर विद्रोह, पहाड़िया विद्रोह (तिलका माँझी का विद्रोह), खेरवार विद्रोह, कोल विद्रोह, संथाल विद्रोह तथा बिरसा मुंडा का विद्रोह। 20वी शताब्दी में टाना भगत आंदोलन हुआ। झारखंड के आदिवासियों के ही समान भारत के … Read more

वोल्शेविक क्रांति का महत्त्व एवं परिणाम

वोल्शेविक क्रांति का महत्त्व एवं परिणाम वोल्शेविक क्रांति का महत्त्व एवं परिणाम क्रांति का सोवियत संघ पर प्रभाव ⊕ स्वेच्छाचारी जारशाही का अंत ⊕ सर्वहारा वर्ग के अधिनायकवाद की स्थापना ⊕ नई प्रशासनिक व्यवस्था की स्थापना ⊕ नई सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था ⊕ धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना ⊕ रूसीकरण की नीति का परित्याग क्रांति का विश्व पर … Read more

उपनिवेशवाद के विरुद्ध जनजातीय गोलबंदी एवं आंदोलन

उपनिवेशवाद के विरुद्ध जनजातीय गोलबंदी एवं आंदोलन उपनिवेशवाद के विरुद्ध जनजातीय गोलबंदी एवं आंदोलन तत्कालीन बंगाल में अँगरेजों का उद्देश्य 18वीं शताब्दी में बंगाल में अँगरेजी सत्ता की स्थापना एवं दीवानी की प्राप्ति के समय वर्तमान झारखंड (तत्कालीन बिहार) बंगाल प्रेसीडेंसी के अंतर्गत था। अतः, ईस्ट इंडिया कंपनी के संचालक इस क्षेत्र से भी राजस्व … Read more

लेनिन और रूस का नवनिर्माण

लेनिन और रूस का नवनिर्माण लेनिन और रूस का नवनिर्माण आंतरिक व्यवस्था ⊗ युद्ध की समाप्ति ⊗ प्रतिक्रांति का दमन ⊗ आर्थिक व्यवस्था ⊗ सामाजिक सुधार ⊗ प्रशासनिक सुधार ⊗ नए संविधान का निर्माण ⊗ नई आर्थिक नीति विदेश नीति ⊗ गुप्त संधियों की समाप्ति ⊗ राष्ट्रीयता का सिद्धांत ⊗ साम्राज्यवाद-विरोधी नीति कौमिन्टर्न की स्थापना … Read more

1917 की फरवरी क्रांति

1917 की फरवरी क्रांति 1917 की फरवरी क्रांति तत्कालीन परिस्थिति से क्षुब्ध होकर मार्च 1917 (ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार तथा जूलियन कैलेंडर के अनुसार फरवरी 1917) में मजदूरों ने पेट्रोग्राद (लेनिनग्राद) में एक विशाल जुलूस निकाला। वे रोटी देने, युद्ध बंद करने, निरंकुश शासन समाप्त करने की मांग कर रहे थे। जार ने सैनिकों को … Read more

1905 की रूसी क्रांति के कारण

1905 की रूसी क्रांति के कारण 1905 की रूसी क्रांति के कारण रूसी क्रांति 1905 क्रांति के कारण, 1905 ki rusi kranti ke karan 1905 की रूसी क्रांति के लिए जो परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं, उनका विवरण है – रूस का औद्योगिक विकास  रूसी जार अलेक्जेण्डर तृतीय (1881-94 ई.) का शासन निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी होते हुए … Read more