1917 की बोल्शेविक क्रांति (अक्टूबर क्रांति) के कारण

1917 की बोल्शेविक क्रांति (अक्टूबर क्रांति) के कारण रूस की बोल्शेविक क्रांति अनेक कारणों का परिणाम थी। ये कारण वर्षों से संचित हो रहे थे। इस क्रांति के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे—— 1917 की वोल्शेविक क्रांति (अक्टूवर क्रांति) के कारण राजनीतिक कारण ⊗ निरंकुश एवं अत्याचारी शासन ⊗ रूसीकरण की नीति ⊗ राजनीतिक दलों का … Read more

रूस की क्रांति

रूस की क्रांति रूस में दो क्रांतियाँ हुई– (i) 1905 में और (ii) 1917 में। 1905 में रूस की जनता ने अत्याचारी जारशाही को समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन यह प्रयास विफल हो गया। जार (रूसी सम्राट) का शासन पूर्ववत चलता रहा। 1917 में रूस में पुनः क्रांति हुई। इस बार दो क्रांतियाँ हुईं। … Read more

वन्य समाज और उपनिवेशवाद

वन्य समाज और उपनिवेशवाद वन और मानवजीवन का अटूट संबंध है। मानव अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जंगल और इसके उत्पादों पर आज भी आश्रित है। भारत में वनों की बहुलता है। इनमें अनेक जनजातियाँ निवास करती हैं। ऐसा माना जाता है कि ये जनजातियाँ भारत की मूल निवासी हैं। इसीलिए, इन्हें ‘आदिवासी’ … Read more

नाजीवादी दर्शन

नाजीवादी दर्शन नाजीवादी दर्शन (i) प्रजातीय स्तरीकरण (ii) भौगोलिक-राजनीतिक दृष्टिकोण (iii) सर्वाधिकारवाद का प्रसार एवं गणतंत्र की आलोचना (iv) उग्र राष्ट्रवाद का समर्थक (v) समाजवाद का विरोध (vi) महान नेता का गुणगान (vii) यहूदी-विरोधी नीति (viii) सैन्यवाद को प्रोत्साहन नाजी दर्शन हिटलर की विचारधाराओं पर केंद्रित था। विश्व और मानव समुदाय के प्रति उसका एक … Read more

नाजीवाद का प्रभाव

नाजीवाद का प्रभाव नाजीवाद का प्रभाव नाजीवाद ने जर्मनी के इतिहास पर अमिट छाप छोड़ी। जर्मनी की आंतरिक एवं विदेश नीति पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा। पूरे विश्व पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ा। नाजीवाद ने विश्व के अन्य भागों में स्वतंत्रता-विरोधी भावनाओं को बलवती किया। इससे तानाशाही प्रवृत्ति को समर्थन मिला। नाजियों के बढ़ते … Read more

समाजवाद और साम्यवाद

समाजवाद और साम्यवाद समाजवाद 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने समाज और अर्थव्यवस्था की पुनर्रचना से संबद्ध नई विचारधाराओं को जन्म दिया। सामंती व्यवस्था और चर्च के आधिपत्य को समाप्त कर इसने स्वतंत्रता और समानता की भावना पर बल दिया। फलतः, सामाजिक बदलाव से संबद्ध विभिन्न विचारधाराओं का उदय हुआ। इनमें उदारवादी अथवा रैडिकल, रूढ़िवादी या … Read more

हिटलर (नाजीवाद) के उत्कर्ष के कारण

हिटलर (नाजीवाद) के उत्कर्ष के कारण हिटलर (नाजीवाद) के उत्कर्ष के कारण (i) 1919 की वर्साय की अपमानजनक संधि (ii) आर्थिक मंदी (iii) साम्यवाद का बढ़ता प्रभाव (iv) यहूदी-विरोधी भावना (v) जर्मनी में अंतर्निहित सैनिक प्रवृत्ति (vi) जर्मनी में गणतंत्र की विफलता (vii) हिटलर को सभी वर्गों का समर्थन (viii) हिटलर का व्यक्तित्व जर्मनी में … Read more

हिटलर के उदय की पृष्ठभूमि

हिटलर के उदय की पृष्ठभूमि प्रथम विश्वयुद्ध के बाद की राजनीति की दो महत्त्वपूर्ण घटनाएँ हैं- इटली में बेनिटो मुसोलिनी के नेतृत्व में फासीवाद एवं जर्मनी में एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में नाजीवाद का उदय और विकास। इनका उदय दो विश्वयुद्धों के मध्य की अवधि में हुआ। इन दोनों घटनाओं का विश्वव्यापी प्रभाव पड़ा और … Read more

द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम

द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम (i) धन-जन का भीषण संहार (ii) औपनिवेशिक युग का अंत (iii) फासीवादी शक्तियों का सफाया (iv) इंगलैड की स्थिति का कमजोर पड़ना (v) सोवियत संघ और अमेरिका की शक्ति में वृद्धि (vi) साम्यवाद का तेजी से प्रसार (vii) विश्व का दो खेमों में विभाजन (viii) गुटनिरपेक्षता की … Read more

द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-45)

द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-45) प्रथम विश्वयुद्ध की विभीषिका से त्रस्त होकर तथा भविष्य में इसे रोकने के लिए 1919 में राष्ट्रसंघ की स्थापना की गई थी, परंतु यह द्वितीय विश्वयुद्ध को रोकने में पूर्णतः विफल रहा। 20 वर्षों की छोटी अवधि में ही दूसरा विश्वयुद्ध हुआ जो पहले से भी अधिक प्रलयंकारी था। इस युद्ध के … Read more