जर्मनी का एकीकरण

जर्मनी का एकीकरण 1870 के पूर्व नॉर्डिक-ट्युटन प्रजातियों का देश जर्मनी अनेक छोटे-बड़े राज्यों, रजवाड़ों में विभक्त था। यह सही मायने में एक राष्ट्र नहीं, बल्कि जर्मनभाषी राज्यों का एक समूह था। इसमें 300 राज्य और प्रशासनिक इकाइयाँ थीं। मोटे तौर पर जर्मनी तीन भागों में विभाजित था-उत्तरी, मध्य और दक्षिणी। उत्तरी भाग में प्रशा … Read more

इटली का एकीकरण

इटली का एकीकरण इटली का एकीकरण 19वीं शताब्दी के यूरोपीय इतिहास की दो महत्त्वपूर्ण घटनाएँ थीं- इटली और जर्मनी का एकीकरण। इनके परिणामस्वरूप यूरोप के मानचित्र पर दो नए राष्ट्रों का उदय हुआ— इटली और जर्मनी। प्रथम विश्वयुद्ध के पूर्व एवं बाद के वर्षों में इन राष्ट्रों ने यूरोपीय राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1815 … Read more

1848 की क्रांतियाँ

1848 की क्रांतियाँ 1848 की क्रांतियाँ फ्रांस , इटली , जर्मनी , ऑस्ट्रिया , हंगरी , बोहेमिया , पोलैंड 1830 के बाद 1848 में यूरोप के अनेक राष्ट्रों में पुन: क्रांतियाँ हुईं। 1830 की क्रांतियों ने प्रतिक्रियावादी तत्त्वों को दुर्बल तो कर दिया था, परंतु उनका प्रभाव पूर्णरूपेण समाप्त नहीं हो सका था। 1830 के … Read more

यूनान का स्वतंत्रता संग्राम

यूनान का स्वतंत्रता संग्राम स्वतंत्रता संग्राम के कारण-यूनान प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र था। इसका अतीत गौरवमय था। यहाँ की साहित्यिक, कलात्मक, दार्शनिक, वैज्ञानिक एवं चिकित्सा-संबंधी उपलब्धियों से पूरा यूरोप प्रभावित हुआ था। पुनर्जागरण काल में यूनानी सभ्यता-संस्कृति अनेक राष्ट्रों के लिए प्रेरणादायक बन गई। 15वीं शताब्दी में यूनान ऑटोमन साम्राज्य के अंतर्गत … Read more

1830 की यूरोपीय क्रांतियाँ

1830 की यूरोपीय क्रांतियाँ क्रांतियों का दौर (1830-48) 1830 तक यूरोप में उदारवाद-राष्ट्रवाद और रूढ़िवाद-प्रतिक्रियावाद में संघर्ष अनिवार्य हो गया। जैसे-जैसे प्रतिक्रियावादी अपना प्रभाव बढ़ाते गए, वैसे-वैसे राष्ट्रवादी भी इनका विरोध करने को उतारू हो गए। फलत:, 1830-48 के मध्य अनेक यूरोपीय राष्ट्रों में राष्ट्रवादी क्रांतियाँ हुईं। इनका उद्देश्य पुरातन व्यवस्था को समाप्त कर नई … Read more

रूढ़िवाद की पुनर्स्थापना

रूढ़िवाद की पुनर्स्थापना रूढ़िवाद की पुनर्स्थापना ◊वियना काँग्रेस ◊ वियना की संधि ◊ यूरोपीय कन्सर्ट ◊ मेटरनिक-व्यवस्था वियना काँग्रेस-1815 में वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन बोनापार्ट की निर्णायक रूप से पराजय हुई। इसके साथ ही यूरोप में पुन: एक नई व्यवस्था की स्थापना की गई जिसमें फ्रांसीसी क्रांति की उपलब्धियों को बदलने का प्रयास किया … Read more

राष्ट्रवाद की अवधारणा – यूरोप में राष्ट्रवाद

राष्ट्रवाद की अवधारणा – यूरोप में राष्ट्रवाद राष्ट्रवाद आधुनिक राजनीति की देन है। यह राजनीतिक चेतना का प्रतिफल है। इसके द्वारा क्षेत्रविशेष अथवा सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में निवास करनेवालों में एकता की भावना का विकास होता है। यद्यपि राष्ट्रवाद की अवधारणा पुनर्जागरण काल में ही जन्म ले चुकी थी, परंतु 18वीं और 19वीं शताब्दियों … Read more

प्रथम विश्वयुद्ध के परिणाम

प्रथम विश्वयुद्ध के परिणाम प्रथम विश्वयुद्ध के परिणाम राजनीतिक परिणाम (i) साम्राज्यों का अंत (ii) विश्व मानचित्र में परिवर्तन (iii) सोवियत संघ का उदय (iv) उपनिवेशों में जागरण (v) विश्व राजनीति पर से यूरोप का प्रभाव कमजोर पड़ना (vi) अधिनायकवाद का उदय (vii) विचार-अभिव्यक्ति पर नियंत्रण का प्रयास (viii) द्वितीय विश्वयुद्ध का बीजारोपण (ix) विश्वशांति … Read more

प्रथम विश्वयुद्ध की विशेषताएँ

प्रथम विश्वयुद्ध की विशेषताएँ प्रथम विश्वयुद्ध की विशेषताएँ 1914-18 के युद्ध को अनेक कारणों से प्रथम विश्वयुद्ध कहा जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं- (i) यह प्रथम युद्ध था, जिसमें विश्व के लगभग सभी शक्तिशाली राष्ट्रों ने भाग लिया। यह यूरोप तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि एशिया, अफ्रीका और सुदूरपूर्व में भी लड़ा … Read more

प्रथम विश्वयुद्ध की प्रमुख घटनाएँ

प्रथम विश्वयुद्ध की प्रमुख घटनाएँ प्रथम विश्वयुद्ध की प्रमुख घटनाएँ युद्ध का आरंभिक चरण- 28 जुलाई 1914 को ऑस्ट्रिया द्वारा सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा होते ही युद्ध का बिगुल बज गया। रूस ने सर्बिया के समर्थन में और जर्मनी ने ऑस्ट्रिया के समर्थन में सैनिक कार्रवाई आरंभ कर दी। रूस के समर्थन में … Read more