UK Board 9 Class Hindi Chapter 4 – नन्दाराजयात्रा (संस्कृत विनोदिनी)
UK Board 9 Class Hindi Chapter 4 – नन्दाराजयात्रा (संस्कृत विनोदिनी)
UK Board Solutions for Class 9th Hindi Chapter 4 – नन्दाराजयात्रा (संस्कृत विनोदिनी)
नन्दाराजयात्रा (नन्दाराज की यात्रा)
पाठ का सार
यात्रा का परिचय — हिमालय की पुत्री नन्दा देवी (पार्वती) उत्तराखण्ड निवासियों की आराध्य देवी है। यहाँ नन्दा देवी के अनेक मन्दिर और उससे सम्बन्धित पूज्यस्थान हैं, जहाँ प्रत्येक वर्ष बहुत-से मेलों और उत्सवों का आयोजन किया जाता है। ऐसा ही एक पवित्र स्थान चमोली जिले का नौटी नामक गाँव है। यहाँ स्थित नन्दा देवी के अतिप्राचीन मन्दिर से ही नन्दाराज यात्रा आरम्भ होती है। कहते हैं कि नवीं शताब्दी में उत्तराखण्ड के चाँदपुरगढ़ के राजा शालीपाल ने यहाँ श्रीयन्त्र की स्थापना की थी और उसके संरक्षण के लिए अपने छोटे भाई को नियुक्त किया था। ऐसी धारणा है कि जब यहाँ के राजवंशियों के घर में चार सींगोंवाली भेड़ (मेष) जन्म लेती है, तब नन्दाराज यात्रा होती है। वर्तमान में यह यात्रा बारह वर्ष में आयोजित की जाती है।
नन्दा देवी का आगमन — पुराणों के अनुसार नन्दा (पार्वती) का विवाह भगवान् शिव के साथ हुआ था। भगवान् शिव क्योंकि कैलाश पर्वत की ऊँची चोटियों पर निवास करते हैं; अतः भगवती नन्दा बार-बार अपने पिता के घर नहीं आ पातीं, अपितु प्रत्येक बारह वर्ष में अपने पिता के घर आती हैं। नन्दा के पिता के गृहागमन पर यहाँ के लोग एक उत्सव का आयोजन करते हैं।
नन्दा का पतिगृहगमन — कुछ समय पश्चात् नन्दा की विदाई का समय आ जाता है। देवी के पतिगृहगमन के अवसर पर ही नन्दाराज यात्रा का आयोजन किया जाता है। यह यात्रा चमोली जिले के नौटी गाँव से आरम्भ होकर मध्य हिमालय की सुरम्य और हरी-भरी पर्वत श्रृंखलाओं, नदी, पर्वत, सरोवर और वनों से होती हुई उच्च हिमालय क्षेत्र में प्रवेश करती है। इसी यात्रा मार्ग में अत्यन्त प्रसिद्ध पौराणिक रूपकुण्ड है।
रूपकुण्ड का परिचय – कहा जाता है कि यहाँ के सुरम्य कानन में शिव के साथ विहार करती नन्दा को जब प्यास लगी तो भगवान् शिव ने उनकी प्यास बुझाने के लिए अपने त्रिशूल से इस सरोवर को खोदा था। इस सरोवर के निर्मल जल से प्यास बुझाने के लिए जब देवी नन्दा यहाँ आईं तो सरोवर के जल में अपने रूप-सौन्दर्य को देखकर अत्यन्त प्रसन्न हुईं। तभी से इस सरोवर को रूपकुण्ड कहा जाने लगा।
नन्दा का पतिगृह पहुँचना ( यात्रा का समापन ) – रूपकुण्ड में पूजा-अर्चना के पश्चात् यात्रा आगे बढ़ जाती है और देवी नन्दा पतिगृह पहुँच जाती हैं। उन्नीस दिन की इस यात्रा में न केवल भारतीय, अपितु विदेशी भी सम्मिलित होते हैं। यह यात्रा उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, धर्म, इतिहास, परम्परा और विश्वास की वाहिका है।
पाठाधारित अवबोधन-कार्य एवं भावानुवाद
निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत-
(1) जनश्रुत्यनुसारं ………… वर्षेषु आयोज्यते ।
शब्दार्थाः – जनश्रुत्यनुसारम् = (जनश्रुति + अनुसारम्) लोकमान्यता (किंवदन्ति) के अनुसार; आराध्या = पूजनीया; विविधेषु = विविध, अनेक पर; अतीव = अत्यधिक; इतः = यहाँ से; आरभ्यते = आरम्भ होती है; उच्यते = कहा जाता है; नवमशताब्द्याम् = नवीं शताब्दी में; संरक्षणाम = रक्षा करने के लिए: कनिष्ठं भ्रातरम् = छोटे भाई को; न्ययोजयत् = नियुक्त कियाः एतादृशी = ऐसी; राजवंशीयानाम् = राजा के वंशजों के; चतुःशृंगी = चार सीगवाली: मेषः = भेड़; जायते = उत्पन्न होती है : साम्प्रतिके = वर्तमान में; द्वादशसु = बारह में; आयोज्यते = आयोजित की जाती है।
सन्दर्भः – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘संस्कृत विनोदिनी (भाग-प्रथमः ) ‘ के ‘नन्दाराजयात्रा’ नामक पाठ से उद्धृत है।
प्रसंग:- प्रस्तुत गद्यांश में उत्तराखण्ड राज्य में आयोजित होनेवाली नन्दाराज यात्रा के आरम्भ होने का परिचय दिया गया है।
हिन्दी – भावानुवादः – जनश्रुति ( लोक-मान्यता) के अनुसार पर्वतों के राजा हिमालय की पुत्री भगवती नन्दा मुख्य रूप से उत्तराखण्ड के निवासियों की पूज्या देवी है। उत्तराखण्ड के विभिन्न स्थानों पर भगवती नन्दा देवी के मन्दिर और पूज्य स्थान हैं। प्रत्येक वर्ष विभिन्न मेले, उत्सव और पर्व विभिन्न स्थानों पर होते हैं। उनमें चमोली जिले का नौटी नामक गाँव प्रसिद्ध है। यहाँ भगवती नन्दा देवी का अत्यन्त प्राचीन मन्दिर है । यहीं से नन्दाराज यात्रा आरम्भ होती है। ऐसा कहा जाता है कि उत्तराखण्ड के चाँदपुरगढ़ के राजा शालीपाल ने नवीं शताब्दी में नौटी ग्राम में श्रीयन्त्र की स्थापना की थी। उसने श्रीयन्त्र की रक्षा के लिए (अपने छोटे भाई को नियुक्त किया था। ऐसी धारणा है कि राजा के वंशजों के घर में जब चार सींगोंवाली भेड़ उत्पन्न होती है, तब नन्दाराज यात्रा होती है। आधुनिक (वर्तमान) समय में यह यात्रा बारह वर्षों में आयोजित होती है।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) हिमालयस्य पुत्री का अस्ति ?
(ख) कः ग्रामः प्रसिद्धः अस्ति ?
(ग) कः राजा श्रीयन्त्रस्य स्थापनाम् अकरोत् ?
(घ) राजवंशीयानां कीदृशः मेषः जायते ?
(ङ) नन्दाराज यात्रा कतिपयेषु वर्षेषु आयोज्यते ?
उत्तरम् – (क) नन्दा, (ख) नौटी, (ग) शालीपाल:, (घ) चतु:शृंगी, (ङ) द्वादशसु ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) जनश्रुत्यनुसारम् उत्तराखण्ड – निवासिनाम् आराध्या देवी का अस्ति ?
(ख) नौटीनामकः ग्रामः कुत्र अस्ति ?
(ग) नौटीग्रामे का अस्ति ?
(घ) शालीपालः श्रीयन्त्रस्य संरक्षणाय किम् अकरोत् ?
(ङ) नन्दाराजयात्रा कदा भवति ?
उत्तरम् –
(क) जनश्रुत्यनुसारं पर्वतराजहिमालयस्य पुत्री भगवती नन्दा उत्तराखण्ड – निवासिनाम् आराध्या देवी अस्ति।
(ख) नौटीनामकः ग्रामः चमोलीजनपदे अस्ति ।
(ग) नौटीग्रामे भगवत्याः नन्दादेव्याः अतीव प्राचीनं मन्दिरम् अस्ति ।
(घ) शालीपाल : श्रीयन्त्रस्य संरक्षणाय कनिष्ठं भ्रातरं न्ययोजयत्।
(ङ) यदा राजवंशीयानां गृहे चतु:शृंगी मेषः जायते, तदा नन्दाराजयात्रा भवति ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘जनश्रुत्यनुसारम्’ अस्मिन् पदे सन्धिच्छेदं कुरुत ।
(ख) ‘मेला + उत्सव’ अत्र सन्धि कुरुत ।
(ग) ‘मन्दिरम्’ अस्य विशेषणपदं किम् अत्र प्रयुक्तम् ?
(घ) ‘इतः नन्दाराजयात्रा आरभ्यते’ अत्र क्रियापदं किम् ?
(ङ) ‘जायते’ अत्र धातुनिर्देशं कुरु ।
(च) ‘सदने’ अस्य पर्यायवाचिपदं गद्यांशात् चिनुत ।
उत्तरम् – (क) जनश्रुति + अनुसारम्, (ख) मेलोत्सव, (ग) प्राचीनम्, (घ) आरभ्यते, (ङ) जन्, (च) गृहे ।
(2) पुराणेषु ………… पतिगृहम् गच्छति ।
शब्दार्थाः- कथितम् = कहा गया है; यत् = कि; पुत्र्याः = पुत्री का; कैलाशवासिना = कैलाश पर रहनेवाले के साथ; गहनासु = दुर्गम में, गहरी में; उपत्यकासु = तलहटियों में; स्वपितुः = अपने पिता के; आगन्तुम् = आने के लिए: शक्नोति = सकती है; तत्रत्याः = वहाँ के; अतीव = ( अति + इव) अत्यधिक; भूत्वा = होकर; लोकोत्सवान् = सामाजिक उत्सव; एतादृशः = ऐसा; समागच्छति = आ जाता है।
प्रसंग : – प्रस्तुत गद्यांश में नन्दाराजयात्रा के आयोजन के कारण पर प्रकाश डाला गया है।
हिन्दी – भावानुवादः – पुराणों में कहा गया है कि पर्वतराज हिमालय की पुत्री नन्दा (पार्वती) का विवाह कैलाश पर रहनेवाले भगवान् शिव के साथ हुआ। शिव का आवास (घर) हिमालय की दुर्गम तलहटियों में है । वहाँ से वह भगवती नन्दा बार-बार अपने पिता के घर नहीं आ सकतीं; अतः प्रत्येक बारह वर्षों में अपने पिता के घर आती हैं। नन्दा के अपने पिता के घर आने से वहाँ के लोग अत्यधिक प्रसन्न होकर सामाजिक उत्सव आयोजित करते ( मनाते) हैं, परन्तु फिर ऐसा अवसर भी आता है, जब नन्दा फिर पति के घर जाती है।
प्रश्नोत्तर
प्रश्ना:- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) कैलाशवासी कः अस्ति ?
(ख) नन्दा कस्य गृहं वारं वारम् आगन्तुं न शक्नोति ?
(ग) प्रसन्नाः जनाः कान् आयोजयन्ति ?
उत्तरम् – (क) शिव:, (ख) स्वपितुः, (ग) लोकोत्सवान् ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) पुराणेषु किं कथितम् ?
(ख) शिवस्य आवासः कुत्र विद्यते ?
(ग) नन्दा वारं वारं स्वपितुः गृहं कथम् आगन्तुं न शक्नोति ?
(घ) जनाः कथम् अतीव प्रसन्नाः भवन्ति ?
उत्तरम्-
(क) पुराणेषु कथितम् अस्ति यत् पर्वतराज हिमालयस्य पुत्र्याः नन्दायाः विवाहः कैलाशवासिना भगवता शिवेन सह अभवत् ।
(ख) शिवस्य आवासः हिमालयस्य गहनासु उपत्यकासु विद्यते।
(ग) नन्दायाः पत्युः आवासः गहनासु उपत्यकासु विद्यते; अतः नन्दा वारं वारं स्वपितुः गृहं कथम् आगन्तुं न शक्नोति।
(घ) नन्दाया: स्वपितुः गृहागमनेन जनाः अतीव प्रसन्नाः भवन्ति।
3. निर्देशांनुसारम् उत्तरत-
(क) ‘कथितम्’ अस्य प्रकृति-प्रत्ययनिर्देशं कुरु ।
(ख) ‘शक्नोति’ अस्य क्रियापदस्य कर्तृपदं किम् ?
(ग) ‘प्रत्येकस्मिन् ‘ अस्मिन् पदे सन्धिच्छेदं कुरु ।
(घ) ‘नन्दायाः’ अस्य पर्यायवाचिपदम् अत्र किं प्रयुक्तम् ?
(ङ) ‘उपत्यकासु’ अस्य विशेषणपदं चिनुत ।
उत्तरम्— (क) √ कथ् + क्त, (ख) भगवती नन्दा, (ग) प्रति + एकस्मिन्, (घ) पार्वत्याः, (ङ) गहनासु ।
(3) नन्दायाः पतिगृहं …………. पौराणिकं रूपकुण्डम्।
शब्दार्था:- प्रेषणस्य = भेजने का; एषा = यह; पुरातनकालादेव = प्राचीनकाल से ही; प्रचलन्ती = प्रचलित; आरभ्य = आरम्भ करके; रमणीयासु = रमणीय, सुन्दर; हरितमयेषु = हरियाली युक्त में; शाद्वलेषु = घासों में; उन्नतम् = ऊँचे; नानाविधानि = अनेक प्रकार के; निर्मलसरोवराः = स्वच्छ तालाब (सरोवर); हिमाच्छादिताः = हिम से ढकी; पर्वतशृंखलाः = पर्वत की चोटियाँ ।
प्रसंग:- प्रस्तुत गद्यांश में नन्दा – यात्रा के मार्ग के प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन किया गया है।
हिन्दी – भावानुवादः – नन्दा के पति के घर भेजने का अवसर ही नन्दाराजयात्रा नामक उत्सव के रूप में आयोजित किया जाता है। नन्दाराजयात्रा की यह सांस्कृतिक परम्परा प्राचीनकाल से ही प्रचलित है। यह यात्रा चमोली जनपद के नौटी ग्राम से आरम्भ होकर मध्य हिमालय की रमणीय पर्वतशृंखलाओं में, हरी-भरी घासों में विचरती हुई नदी – पर्वतसरोवर – वन-बगीचों में होकर ऊँचे हिमालय क्षेत्र में प्रवेश करती है। इस यात्रा के मार्ग में अनेक प्रकार के पुष्प उद्यान, स्वच्छ जल के सरोवर, हिमाच्छादित पर्वत-शृंखलाएँ हैं। यहीं पर प्रसिद्ध पौराणिक रूपकुण्ड है।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) नन्दाराजयात्रायाः परम्परा कीदृशी अस्ति?
(ख) नन्दाराजयात्रा कुत: आरभते ?
(ग) यात्रामार्गे किं कुण्डम् अस्ति ?
उत्तरम् – (क) सांस्कृतिक, (ख) नौटीग्रामात्, (ग) रूपकुण्डम् ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तर-
(क) कः अवसरः नन्दाराजयात्रा इति नाम्ना उत्सवरूपेण आयोज्यते ?
(ख) पुरातनकालादेव प्रचलन्ती का ?
(ग) यात्रामार्गे के के सन्ति?
(घ) रूपकुण्डं किम् अस्ति ?
उत्तरम् –
(क) नन्दाया: पतिगृहं प्रेषणस्य अवसर : नन्दाराजयात्रा इति नाम्ना उत्सव रूपेण आयोज्यते ।
(ख) नन्दाराजयात्रायाः सांस्कृतिकी परम्परा पुरातनकालादेव प्रचलन्ती अस्ति ।
(ग) यात्रामार्गे नानाविधानि पुष्पकाननानि निर्मलसरोवराः हिमाच्छादिता: पर्वत श्रृंखलाः सन्ति ।
(घ) रूपकुण्डं यात्रामार्गे प्रसिद्धं पौराणिकम् एकं कुण्डम् अस्ति ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘सांस्कृतिकी’ अस्य विशेष्यपदं गद्यांशात् चित्वा लिखत ।
(ख) ‘ल्यप्’ प्रत्ययान्तम् एकं पदं चिनुत ।
(ग) ‘अवनतम् ‘ इत्यस्य विपरीतार्थकपदम् अत्र किम् ?
(घ) ‘हिमेन आच्छादिता:’ इत्यर्थे प्रयुक्तं पदम् अत्र किम् ?
उत्तरम् – (क) परम्परा, (ख) आरभ्य, (ग) उन्नतम्, (घ) हिमाच्छादिता।
(4) उच्यते यत् ………….. वदन्ति जनाः ।
शब्दार्था:- उच्यते = कहते हैं; एकदा = एक बार; विहरति स्म = विहार (भ्रमण) कर रही थी; पिपासिता = प्यासी; कुत्राऽपि = कहीं भी; निवारयितुम् = दूर करने के लिए; खननं कृतम् = खुदाई की; विकसन्ति स्म = खिलते थे; निर्मलम् = स्वच्छ; प्रकटिता = प्रकट हुई, दिखाई दी; पीत्वा = पीकर; तमेव = उसे ही।
प्रसंग :- प्रस्तुत गद्यांश में रूपकुण्ड की उत्पत्ति पर प्रकाश डाला गया है।
हिन्दी- भावानुवादः- कहा जाता है कि एक बार भगवती नन्दा भगवान् शिव के साथ इस उद्यान में आनन्दपूर्वक विहार करती थीं । विहार के समय में नन्दा को प्यास लगी, परन्तु कहीं भी जल का सरोवर न था । नन्दा की प्यास को मिटाने के लिए भगवान् शिव के द्वारा त्रिशूल से इस दिव्य (पवित्र) सरोवर को खोदा गया। उस सरोवर में अनेक प्रकार के कमल खिलते थे, निर्मल और मधुर जल था। भगवती नन्दा जब प्यास मिटाने के लिए सरोवर के निकट गईं, तब सरोवर के निर्मल जल में भगवती नन्दा के रूप-सौन्दर्य की छाया प्रकट हुई। उस सरोवर में अपने रूप-सौन्दर्य को देखकर भगवती नन्दा अत्यधिक प्रसन्न हुईं। उन्होंने सरोवर का जल पीकर प्यास को मिटाया। तब से लेकर उसी सरोवर को लोग रूपकुण्ड ऐसा कहते हैं।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) नन्दा केन सह कानने विहरति स्म ?
(ख) विहारसमये नन्दा का अभवत्?
(ग) निर्मलं मधुरं च किम् आसीत् ?
(घ) सरोवरस्य जले कस्याः रूपसौन्दर्यस्य छाया प्रकटिता ?
(ङ) तमेव सरोवरं किं वदन्ति जनाः ?
उत्तरम् – (क) शिवेन, (ख) पिपासिता, (ग) जलम्, (घ) नन्दाया:, (ङ) रूपकुण्डम्।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) भगवती नन्दा केन सह कुत्र विहरति स्म ?
(ख) विहारसमये का अभवत्?
(ग) नन्दायाः पिपासां निवारयितुं भगवता शिवेन किं कृतम् ?
(घ) कदा नन्दाया: रूपसौन्दर्यस्य छाया प्रकटिता ?
(ङ) नन्दा कथं प्रसन्ना अभवत्?
उत्तरम्-
(क) भगवती नन्दा भगवता शिवेन सह अस्मिन् कानने आनन्देन विहरति स्म ।
(ख) विहारसमये नन्दा पिपासिता अभवत् ।
(ग) नन्दायाः पिपासां निवारयितुं भगवता शिवेन त्रिशूलेन एकस्य दिव्यसरोवरस्य खननं कृतम् ।
(घ) यदा नन्दा पिपासां निवारयितुं सरोवरस्य निकटम् अगच्छत्, तदा सरोवरस्य निर्मले जले नन्दायाः रूपसौन्दर्यस्य छाया प्रकटिता ।
(ङ) सरोवरे स्वरूपसौन्दर्यं दृष्ट्वा भगवती नन्दा अतीव प्रसन्ना अभवत् ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘विहरति स्म’ अत्र प्रयुक्तः लकारः कः ?
(ख) कृतम्’ अस्य कर्तृपदं चित्वा लिखत ।
(ग) ‘समीपम्’ अस्य पर्यायवाचिपदं किम् अत्र प्रयुक्तम् ?
(घ) ‘नन्दा ……. प्रसन्ना अभवत्।’ अत्र रिक्तस्थानं पूरयत ।
(ङ) ‘शिवेन सह’ अत्र कस्मात् कारणात् ‘शिवेन’ इति पदे तृतीया विभक्तिः प्रयुक्ता ?
(च) ‘सा’ इति सर्वनामस्थाने संज्ञाप्रयोगः करणीयः ।
उत्तरम् – (क) लङ्लकारः, (ख) शिवेन, (ग) निकटम्, (घ) अतीव, (ङ) ‘सह’ इति पदस्य संयोगात्, (च) नन्दा |
(5) नन्दाराजयात्रायां ………… वाहिका अस्ति ।
शब्दार्थाः – विशिष्टस्थानम् = विशेष स्थान; कृत्वा = करके; अग्रे = आगे; अनन्तरम् = इसके पश्चात्; प्राप्नोति = प्राप्त होती है; ऊनविंशतिदिनात्मिकायाम् = उन्नीस दिनों तक चलनेवाली; अपितु = बल्कि; लोकसंस्कृतेः = लोक-संस्कृति की; वाहिका = वहन करनेवाली।
प्रसंग: – प्रस्तुत गद्यांश में नन्दाराज यात्रा के समापन और उत्तराखण्ड में उसके महत्त्व को दर्शाया गया है।
हिन्दी – भावानुवादः – नन्दाराज यात्रा में रूपकुण्ड का विशेष स्थान है। रूपकुण्ड में पूजा-अर्चन करके यात्रा आगे जाती है। इसके पश्चात् भगव नन्दा पतिगृह को प्राप्त होती है। अर्थात् नन्दा पतिगृह पहुँच जाती है। उन्नीस दिनों तक चलनेवाली इस यात्रा में न केवल भारतीय, वरन् विदेशी भी सम्मिलित होते हैं। यह यात्रा उत्तराखण्ड की लोक-संस्कृति की, धर्म की, इतिहास की, परम्परा की और विश्वास की वाहिका है।
प्रश्नोत्तर
प्रश्नाः- 1. एकपदेन उत्तरत-
(क) रूपकुण्डस्य कीदृशं स्थानम् अस्ति ?
(ख) अनन्तरं नन्दा किं प्राप्नोति ?
(ग) नन्दाराजयात्रा कतिदिनानि चलति ?
उत्तरम् – (क) विशिष्टस्थानम्, (ख) पतिगृहम्, (ग) ऊनविंशतिः ।
2. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(क) कस्यां रूपकुण्डस्य विशिष्टस्थानम् अस्ति ?
(ख) किं कृत्वा यात्रा अग्रे गच्छति ?
(ग) कस्यां न केवलं भारतीयाः, अपितु वैदेशिकाः अपि सम्मिलिताः भवन्ति ?
(घ) नन्दाराजयात्रा कस्य वाहिका अस्ति ?
उत्तरम्-
(क) नन्दाराजयात्रायां रूपकुण्डस्य विशिष्टस्थानम् अस्ति ।
(ख) रूपकुण्डे पूजार्चनं कृत्वा यात्रा अग्रे गच्छति ।
(ग) ऊनविंशतिदिनात्मिकायां नन्दाराजयात्रायां न केवलं भारतीयाः, अपितु वैदेशिकाः अपि सम्मिलिताः भवन्ति ।
(घ) नन्दाराजयात्रा उत्तराखण्डस्य लोकसंस्कृतेः, धर्मस्य, इतिहासस्य, परम्परायाः विश्वासस्य च वाहिका अस्ति ।
3. निर्देशानुसारम् उत्तरत-
(क) ‘पूजार्चनम् ‘ अत्र सन्धिच्छेदं कुरु ।
(ख) ‘लोकसंस्कृतेः’ अस्मिन् पदे प्रयुक्ता विभक्ति: का?
(ग) ‘तत्पश्चात्’ इत्यर्थे प्रयुक्तं अव्ययपदं किम् अत्र प्रयुक्तम् ?
(घ) ‘भवन्ति’ अस्य कर्तृपदं गद्यांशात् चिनुत ।
उत्तरम् – (क) पूजा + अर्चनम्, (ख) षष्ठी, (ग) अनन्तरम्, (घ) वैदेशिका: ।
सम्पूर्णपाठाधारिताः अभ्यासप्रश्नाः
(1) रिक्तस्थानानि पूरयत-
(क) चमोलीजनपदस्य ………… नामको ग्रामः प्रसिद्धः अस्ति ।
(ख) इतः ……….. आरभ्यते ।
(ग) नन्दाराजयात्रायां …………. विशिष्टस्थानम् अस्ति ।
(घ) सरोवरस्य निर्मले जले ………… छाया प्रकटिता।
(ङ) एषा यात्रा …………. वर्षेषु आयोज्यते ।
उत्तरम् —
(क) चमोलीज़नपदस्य नौटी नामको ग्रामः प्रसिद्धः अस्ति ।
(ख) इत: नन्दाराजयात्रा आरभ्यते ।
(ग) नन्दाराजयात्रायां रूपकुण्डस्य विशिष्टस्थानम् अस्ति ।
(घ) सरोवरस्य निर्मले जले भगवत्याः नन्दायाः रूपसौन्दर्यस्य छाया प्रकटिता ।
(ङ) एषा यात्रा द्वादशसु वर्षेषु आयोज्यते ।
(2) एकपदेन उत्तरत-
(क) हिमालस्य पुत्री का ?
उत्तरम् – नन्दा (पार्वती) ।
(ख) नन्दायाः पतिः कः अस्ति ?
उत्तरम् – शिवः ।
(ग) नौटीग्रामात् किम् आरभ्यते ?
उत्तरम् – नन्दाराजयात्रा ।
(घ) सांस्कृतिक चेतनायाः वाहिका का ?
उत्तरम् – नन्दाराजयात्रा ।
(ङ) शिवेन त्रिशूलेन कस्य खननं कृतम् ?
उत्तरम् — रूपकुण्डस्य ।
(च) नन्दाराजयात्रा कदा भवति?
उत्तरम् — द्वादशवर्षेषु ।
(3) निर्दिष्टैः प्रश्नवाचकपदैः उचितं प्रश्नं निर्मापयत-
(कस्य, कदा, कुत्रत्याः, कुतः )
(क) इतः नन्दाराजयात्रा आरभ्यते ।
(ख) नन्दा प्रत्येकस्मिन् द्वादशे वर्षे पितुः गृहम् आगच्छति ।
(ग) तत्रत्याः जनाः प्रसन्नाः भवन्ति ।
(घ) भारतस्य सांस्कृतिकी परम्परा अस्ति ।
उत्तरम् —
(क) कुतः नन्दाराजयात्रा आरभ्यते ?
(ख) नन्दा कदा पितुः गृहम् आगच्छति ?
(ग) कुत्रत्याः जनाः प्रसन्नाः भवन्ति ?
(घ) कस्य सांस्कृतिकी परम्परा अस्ति ।
(4) एकवाक्येन उत्तरत-
(क) उत्तराखण्डस्य आराध्या देवी का ?
उत्तरम् – भगवती नन्दा उत्तराखण्डस्य आराध्या देवी अस्ति ।
(ख) श्रीयन्त्रस्य स्थापनां कः अकरोत् ?
उत्तरम् — श्रीयन्त्रस्य स्थापनाम् उत्तराखण्डस्य चाँदपुरगढस्य राजा शालीपालः अकरोत् ।
(ग) नन्दाराजयात्रा कदा भवति ?
उत्तरम्— राजवंशीयानां गृहे यदा चतुःशृंगी मेषः जायते तदा नन्दाराजयात्रा भवति । साम्प्रतिके काले एषा यात्रा द्वादशसु वर्षेषु आयोज्यते ।
(घ) पुराणेषु किम् उक्तम् ?
उत्तरम् – पुराणेषु उक्तम् अस्ति यत् पर्वतराज हिमालयस्य पुत्र्याः नन्दायाः विवाहः कैलाशवासिना भगवता शिवेन सह अभवत्।
(ङ) नन्दाराजयात्रा कुत्र भूत्वा उन्नतं हिमालयक्षेत्रं प्रविशति ?
उत्तरम् — नन्दाराजयात्रा मध्यहिमालयस्य रमणीयासु पर्वतश्रृंखलासु, हरितमयेषु शाद्वलेषु विचरन्ती नदीपर्वतसरोवरवनकाननेषु भूत्वा उन्नतं हिमालयक्षेत्रं प्रविशति।
(च) शिवस्य आवासः कुत्र विद्यते ?
उत्तरम् — शिवस्य आवास: हिमालयस्य गहनासु उपत्यकासु विद्यते ।
(5) पाठे प्रयुक्तानां षष्ठीविभक्तेः शब्दानां सूचीं निर्मापयत-
यथा- पर्वतराज हिमालयस्य
उत्तरम् –
(1) उत्तराखण्डस्य
(2) भगवत्याः नन्दादेव्याः
(3) श्रीयन्त्रस्य
(4) राजवंशीयानाम्
(5) पुत्र्याः नन्दाया:
(6) स्वपितुः
(7) प्रेषणस्य
(8) परम्परायाः ।
