UK 9th Hindi

UK Board Class 9 Hindi – मुहावरे

UK Board Class 9 Hindi – मुहावरे

UK Board Solutions for Class 9 Hindi – मुहावरे

मुहावरों का वाक्यों में शुद्ध एवं अर्थयुक्त प्रयोग
साधारणतः देखा जाता है कि मुहावरों का ‘अर्थ और वाक्य में प्रयोग’ पूछे जाने पर छात्र उनका अर्थ तो बता देते हैं, परन्तु वाक्य में प्रयोग उचित प्रकार से नहीं कर पाते। मुहावरों का प्रयोग करते समय हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हमारे वाक्य-प्रयोग से उनका अर्थ बिल्कुल स्पष्ट हो जाए। सामान्य रूप से छात्र किसी भी मुहावरे आदि से पूर्व मैं, तुम या किसी व्यक्ति का नाम रखकर वाक्य को पूरा कर देते हैं। इस प्रकार का प्रयोग उचित व अर्थ को स्पष्ट करनेवाला नहीं होता; जैसे-
(1) अपनी खिचड़ी अलग पकाना – सबसे पृथक् काम करना। वाक्य- प्रयोग — वह अपनी खिचड़ी अलग पकाता है।
(2) आँखों में धूल झोंकना — धोखा देना ।
वाक्य- प्रयोग — तुमने उसकी आँखों में धूल झोंक दी।
उपर्युक्त उदाहरणों में दिए गए वाक्य प्रयोगों में मुहावरों का अर्थ पूर्णतया स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। वास्तव में इनके स्थान पर शुद्ध, अर्थयुक्त और पूर्ण वाक्यों का प्रयोग किया जाना चाहिए; यथा—
शुद्ध एवं अर्थयुक्त वाक्य-प्रयोग
(1) अपनी खिचड़ी अलग पकाना – सबसे पृथक् काम करना । वाक्य-प्रयोग – रवि मिलकर कार्य करने के स्थान पर अपनी खिचड़ी अलग पकाना पसन्द करते हैं।
(2) आँखों में धूल झोंकना — धोखा देना ।
वाक्य-प्रयोग — हमारे भाई यद्यपि रेलयात्रा में पर्याप्त सतर्क रहते हैं, तथापि लखनऊ के स्टेशन पर किसी ने उनसे पचास रुपये ठगकर उनकी आँखों में धूल झोंक दी।
महत्त्वपूर्ण मुहावरे एवं उनका वाक्य में प्रयोग
(1) अंगारे बरसना – अत्यधिक गरमी पड़ना ।
जून मास की दोपहरी में अंगारे बरसते प्रतीत होते हैं।
(2) अंगारों पर पैर रखना- कठिन कार्य करना ।
युद्ध के मैदान में हमारे सैनिकों ने अंगारों पर पैर रखकर विजय प्राप्त की।
(3) अंगारे सिर पर धरना- विपत्ति मोल लेना ।
सोच-समझकर काम करना चाहिए। उससे झगड़ा लेकर व्यर्थ ही अंगारे सिर पर मत धरो ।
(4) अँगूठा चूसना – बड़े होकर भी बच्चों की तरह नासमझी की बात करना।
कभी तो समझदारी की बात किया करो। ऐसे कब तक अँगूठा चूसते रहोगे ?
(5) अन्धे की लाठी (लकड़ी) होना – एकमात्र सहारा होना ।
निराशा में प्रतीक्षा करना ही अन्धे की लाठी है।
(6) अन्धे के हाथ बटेर लगना – भाग्यवश इच्छित वस्तु की प्राप्ति होना ।
तृतीय श्रेणी में स्नातक लोकेन्द्र को क्लर्क की नौकरी क्या मिली, मानो अन्धे के हाथ बटेर लग गई।
(7) अक्ल का अन्धा – मूर्ख |
वह लड़का तो अक्ल का अन्धा है, उसे कितना ही समझाओ, मानता ही नहीं है।
(8) अक्ल पर पत्थर पड़ना – बुद्धि नष्ट होना ।
राजा दशरथ ने कैकेयी को बहुत समझाया कि वह राम को वन भेजने का वरदान न माँगे, परन्तु उसकी अक्ल पर पत्थर पड़े हुए थे; अतः वह न मानी।
(9) अक्ल के पीछे लाठी लिए फिरना – मूर्खतापूर्ण कार्य करना।
तुम स्वयं तो अक्ल के पीछे लाठी लिए फिरते हो, हम तुम्हारी क्या सहायता करें।
(10) अपना उल्लू सीधा करना-अपना काम निकालना।
कुछ लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए दूसरों को हानि पहुँचाने से भी नहीं चूकते।
(11) अपना राग अलापना — दूसरों की अनसुनी करके अपने ही स्वार्थ की बात कहना।
कुछ व्यक्ति सदैव अपना ही राग अलापते रहते हैं, दूसरों के कष्ट को नहीं देखते।
(12) अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना – अपनी प्रशंसा स्वयं करना।
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बननेवाले का सम्मान धीरे-धीरे कम हो जाता है।
(13) अपना सा मुँह लेकर रह जाना – लज्जित होना ।
अपनी झूठी बात की वास्तविकता का पता चलने पर वह अपना सा मुँह लेकर रह गया।
(14) अपना घर समझना – संकोच न करना ।
राम अपने मित्र के घर को अपना घर समझता है, इसलिए वहाँ वह अपनी सब परेशानियाँ कह देता है ।
(15) अपने पैरों पर खड़ा होना – स्वावलम्बी होना।
जब तक लड़का अपने पैरों पर खड़ा न हो जाए, तब तक उसकी शादी करना उचित नहीं है।
(16) अपने पाँव में कुल्हाड़ी मारना – अपने अहित का काम स्वयं करना।
तुमने अपने मन की बात प्रकट करके अपने पाँव में स्वयं कुल्हाड़ी मारी है।
(17) अक्ल के घोड़े दौड़ाना – हवाई कल्पनाएँ करना ।
परीक्षा में सफलता परिश्रम करने से ही मिलती है, केवल अक्ल के घोड़े दौड़ाने से नहीं ।
(18) आँख चुराना -बचना, छिप जाना।
मुझसे रुपये उधार लेने के बाद मोहन निरन्तर आँख चुराता रहता है, मेरे सामने नहीं आता।
(19) आँखें बिछाना – आदरपूर्वक किसी का स्वागत करना।
यहाँ कोई ऐसा नहीं है, जो तुम्हारे लिए आँखें बिछाए बैठा रहेगा, व्यर्थ के भुलावे में न रहो।
(20) आँख का तारा – अत्यन्त प्यारा ।
प्रत्येक सुपुत्र अपने माता-पिता की आँखों का तारा होता है।
(21) आँख दिखाना – क्रुद्ध होना ।
उधार लेते समय प्रत्येक व्यक्ति बड़े प्रेम से बात करता है, किन्तु वापस करते समय आँख दिखाना साधारण-सी बात है।
(22) आग-बबूला होना— अत्यधिक क्रोध करना ।
नौकरानी से टी-सेट टूट जाने पर मालकिन एकदम आग-बबूला हो गई।
(23) आठ-आठ आँसू रोना- फूट-फूटकर रोना ।
सुभाष अपने पिता के स्वर्गवास पर आठ-आठ आँसू रोया।
(24) आड़े हाथों लेना – शर्मिन्दा करना ।
मोहन बहुत बढ़-चढ़कर बातें कर रहा था, परन्तु मैंने उसे जब आड़े हाथों लिया तो उसकी बोलती बन्द हो गई।
(25) आधा तीतर आधा बटेर – अधूरा ज्ञान ।
या तो हिन्दी बोलिए या अंग्रेजी। यह क्या, आधा तीतर आधा बटेर ।
(26) आपे से बाहर होना-सामर्थ्य से अधिक क्रोध प्रकट करना।
अपने साथी की पिटाई का समाचार सुनते ही छात्र आपे से बाहर हो गए।
(27) आसमान से बातें करना – बहुत ऊँचा होना ।
आसमान से बातें करते देवदार भला किसको प्रेरित नहीं करते।
(28) आसमान पर दिमाग होना— अत्यधिक घमण्ड होना।
परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने से आज रमेश का दिमाग आसमान पर है।
(29) आस्तीन का साँप – कपटी मित्र ।
प्रदीप से अपनी व्यक्तिगत बात मत कहना, वह तो आस्तीन का साँप है; क्योंकि आपकी सभी बातें वह अध्यापक महोदय को बता देता है।
(30) ईंट से ईंट बजाना – हिंसा का करारा जवाब देना, खुलकर लड़ाई करना ।
तुम मुझको कमजोर मत समझो, समय आने पर मैं ईंट से ईंट बजाने के लिए भी तैयार हूँ।
(31) ईमान बेचना – बेईमानी करना ।
ईमान बेचकर धन कमाना मनुष्य को शोभा नहीं देता ।
(32) ईद का चाँद होना— कभी-कभी दर्शन देना ।
नौकरी पर चले जाने के बाद दीपक बहुत दिनों पश्चात् अपने मित्र से मिला। इस पर मित्र ने कहा कि यहाँ से जाने के बाद तो तुम ईद के चाँद ही हो गए।
(33) उँगली उठाना – दोषारोपण करना ।
कल तक प्रदीप की निष्ठा और सच्चाई पर किसी को सन्देह नहीं था, किन्तु अब तो लोग उस पर भी उँगली उठाने लगे हैं।
(34) उँगली पकड़ते-पकड़ते पौंहचा पकड़ना – थोड़ा-सा सहारा पाकर विशेष की प्राप्ति के लिए प्रयास करना ।
पहले सुरेश कभी-कभी पुस्तक माँगकर ले जाता था, किन्तु अब उसने उँगली पकड़ते-पकड़ते पौंहचा पकड़ लिया है। अब तो वह कोई भी पुस्तक ले जाता है और मुझे बताने का कष्ट भी नहीं करता ।
(35) उँगली पर नचाना — इच्छानुसार कार्य कराना ।
रमेश अपनी पत्नी को उँगलियों पर नचाता है।
(36) उड़ती चिड़िया पहचानना – रहस्य को दूर से भाँप लेना ।
दारोगा ने सिपाही से कहा, “ऐसा अनाड़ी नहीं हूँ, उड़ती चिड़िया पहचानता हूँ।”
(37) ऊँची दुकान फीके पकवान- प्रसिद्ध स्थान की निकृष्ट वस्तु होना ।
हम यह सोचकर बड़ी मिल का कपड़ा लाए थे कि वह अधिक दिन चलेगा, किन्तु धोते ही उसका रंग निकल गया। यह तो वही हुई कि ऊँची दुकान फीके पकवान ।
(38) ऊँट के मुँह में जीरा – आवश्यकता से बहुत कम मात्रा कोई वस्तु होना।
मोहनलाल प्रतिदिन दस रोटियाँ खाता है, उसे दो रोटियाँ देना तो मानो ऊँट के मुँह में जीरे के समान है।
(39) उल्लू सीधा करना – स्वार्थ सिद्ध करना ।
फसाद करानेवाले लोग दूसरों को लड़ाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं।
(40) एक अनार सौ बीमार – एक वस्तु की प्राप्ति के लिए बहुत-से व्यक्तियों द्वारा प्रयत्न करना ।
मेरे पास पुस्तक एक है और माँगनेवाले दस छात्र है। यह तो वही बात हुई कि एक अनार सौ बीमार ।
(41) एक और एक ग्यारह होना— एकता में शक्ति होना ।
उनको कमजोर मत समझो, आवश्यकता पड़ने पर वे एक और एक ग्यारह हो जाते हैं।
(42) ओखली में सिर देना- जान-बूझकर अपने को मुसीबत में डालना।
उस नामी गुण्डे को छेड़कर क्यों ओखली में सिर दे रहे हो।
(43) कंगाली में आटा गीला होना- विपत्ति में और विपत्ति आना।
उनके घर में चोरी हो गई। वास्तव में कंगाली में आटा गीला होना इसे बेचारे गुप्ताजी की पहले तो नौकरी छूट गई और उसके बाद ही कहते हैं।
(44) कच्चा चिट्ठा खोलना – गुप्त भेद खोलना ।
आपात्कालीन स्थिति ने बड़े-बड़े सफेदपोशों का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया।
(45) कमर टूटना — हिम्मत पस्त होना।
पहले तो रमेश के पिताजी का स्वर्गवास हो गया और अब व्यापार में हानि होने से उसकी कमर टूट गई।
(46) कलेजा छलनी होना-कड़ी बात से जी दुःखना।
अपनी सौतेली माँ के व्यंग्य बाणों से दीपक का कलेजा छलनी हो गया है।
(47) कलेजा धक-धक करना — भयभीत होना ।
घने जंगल में घूमते समय हम सभी के कलेजे धक-धक कर रहे थे।
(48) कलेजा मुँह को आना – अत्यधिक व्याकुल होना।
अपने मित्र के स्वर्गवास का समाचार सुनकर मोहन का कलेजा मुँह को आने लगा ।
(49) कलेजे पर पत्थर रखना- धैर्य धारण करना ।
पुत्र की मृत्यु का दुःख उसने कलेजे पर पत्थर रखकर सहन किया।
(50) कसाई के खूँटे से बाँधना- निर्दयी व्यक्ति को सौंपना ।
रमेश से विवाह के बाद शीला बहुत दुःखी है। यदि हमें पता होता तो हम उसे कसाई के खूँटे से कभी नहीं बाँधते ।
(51) काँटों पर लोटना- ईर्ष्या से जलना, बेचैन होना ।
मोहन ने सुना कि रमेश नई कार लाया है। इस समाचार से मोहन की बेचैनी बढ़ गई, तभी किसी ने कहा कि व्यर्थ काँटों पर क्यों लोटते हो।
(52) कागजी घोड़े दौड़ाना- कोरी कागजी कार्यवाही करना ।
किसी भी योजना की ठोस रूपरेखा बनाए बिना, केवल कागजी घोड़े दौड़ाने से समस्या हल नहीं हो सकती।
(53) काठ का उल्लू होना – मूर्ख होना ।
उससे बात करना बिल्कुल व्यर्थ है। वह तो निरा काठ का उल्लू है।
(54) कान काटना – चालाक होना, बढ़कर होना ।
आजकल के बच्चों का क्या कहना, वे बड़ों-बड़ों के कान काटते हैं।
(55) कान खड़े होना— सचेत होना।
अपने सम्बन्ध में बात होते देखकर उसके कान खड़े हो गए।
(56) कान पर जूँ न रेंगना – बार-बार कहने का भी प्रभाव न होना ।
अब अनुत्तीर्ण हो जाने पर क्यों रोते हो, जब मैं पढ़ने के लिए बार-बार कहता था, तब तो तुम्हारे कानों पर जूँ भी न रेंगती थी।
(57) कान भरना – चुगली करना ।
मोहन ने सोहन से कहा कि आज साहब नाराज हैं, किसी ने उनके कान भरे हैं।
(58) काया पलट देना – स्वरूप में आमूल परिवर्तन कर देना ।
बढ़ते विद्युत् उत्पादन ने तो देश की काया ही पलट दी है।
(59) काला अक्षर भैंस बराबर – बिल्कुल अनपढ़ ।
संगीत के विषय में मेरी स्थिति काला अक्षर भैंस बराबर है।
(60) कुत्ते की मौत मरना- – बुरी तरह मरना ।
तस्कर व डाकू जब पुलिस के चंगुल में पड़ जाते हैं तो कुत्ते की मौत मारे जाते हैं।
(61) कूप-मण्डूक होना—संकुचित विचारवाला होना।
समुद्र पार करने का निषेध करके हमारे पुरखों ने हमें कूप-मण्डूक बना रहने दिया।
(62) कोल्हू का बैल – अत्यन्त परिश्रमी ।
मजदूर रात-दिन कोल्हू के बैल की तरह जुटे रहने पर भी भरपेट रोटी प्राप्त नहीं कर पाते।
(63) खटाई में डालना — काम का स्थगित हो जाना ।
मेरे मामले का निर्णय अभी तक नहीं हुआ, लिपिक महोदय ने जान-बूझकर उसे खटाई में डाल दिया है।
(64) खांक छानना — भटकना ।
मेरा शोध-विषय इतना जटिल है कि इसके लिए मुझे दर-दर की खाक छाननी पड़ रही है।
(65) खाक में मिलाना — नष्ट करना ।
अयोग्य सन्तान अपने पिता की इज्जत को तनिक सी देर में खाक में मिला देती है।
(66) खून का प्यासा होना— जानी दुश्मन होना ।
जब सरदार भगत सिंह ने लाला लाजपतराय की मृत्यु का समाचार सुना तो वे अंग्रेजों के खून के प्यासे हो गए।
(67) खून सूख जाना — भयभीत होना ।
रमेश अपने पिता से बिना कहे सिनेमा देखने चला गया, परन्तु सिनेमाहाल में अचानक अपने पिता को आया देख उसका तो खून ही सूख गया।
(68) खरी-खोटी सुनाना — फटकारना ।
अध्यापक द्वारा खरी-खोटी सुनाने पर भी निर्लज्ज छात्र पर कोई प्रभाव न पड़ा।
(69) खून- पसीना एक करना — कठोर परिश्रम करना ।
मुकेश परीक्षा में सफलता पाने के लिए खून-पसीना एक कर दिया।
(70) खेत रहना – लड़ाई में मारा जाना।
भारत और चीन के युद्ध में शत्रुओं के कई हजार सैनिक खेत रहे।
(71) गड़े मुर्दे उखाड़ना – दबी-दबाई बहुत पुरानी बातें उठाना ।
गड़े मुर्दे उखाड़ने से किसी समस्या का हल नहीं मिलता। वस्तुतः हमें वर्तमान सन्दर्भ में ही समस्या का समाधान खोजना चाहिए।
(72) गागर में सागर भरना – थोड़े शब्दों में अधिक बात कहना।
बिहारी ने अपनी सतसई के दोहों में गागर में सागर भर दिया है।
(73) गाल बजाना — डींग मारना ।
कभी भी गाल बजाने से सफलता नहीं मिल सकती, इसके लिए परिश्रम भी परम आवश्यक है।
(74) गुड़ – गोबर करना – काम बिगाड़ना ।
कवि-सम्मेलन बड़े आनन्द से चल रहा था श्रोता रसमग्न होकर कविताएँ सुन रहे थे कि अचानक आई तेज वर्षा ने सारा गुड़-गोबर कर दिया।
(75) गूलर का फूल होना— अलभ्य वस्तु होना।
आज के युग में ईमानदारी गूलर का फूल हो गई है।
(76) घर का दीपक — घर की शोभा अथवा कुल की कीर्ति को बढ़ानेवाला।
एकमात्र पुत्र की मृत्यु पर संवेदना व्यक्त करने आए प्रत्येक व्यक्ति ने यही कहा कि उनके घर का तो दीपक ही बुझ गया।
(77) घर की खेती — सहज में मिलनेवाला पदार्थ ।
बाल काट देने पर इतना क्यों रोते हो? यह तो घर की खेती है। कुछ दिन में फिर बढ़ जाएगी।
(78) घर फूँक तमाशा देखना- क्षणिक आनन्द के लिए बहुत अधिक खर्च करना।
सेठ भोलामल का बड़ा लड़का शराब व जुए में सम्पत्ति नष्ट करके घर फूँक तमाशा देख रहा है।
(79) घाट-घांट का पानी पीना – अनेक स्थलों का अच्छा-बुरा अनुभव प्राप्त करना, चालाक होना।
जिसने घाट घाट का पानी पिया हो, उसे जीवन में कौन धोखा दे सकता है।
(80) घाव पर नमक छिड़कना – दुःखी व्यक्ति के हृदय को और दुःख पहुँचाना।
परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो जाने पर रमेश वैसे ही दुःखी है, अब अपशब्द कहकर आप उसके घाव पर नमक छिड़क रहे हैं।
(81) घाव हरा होना— भूले दुःख की याद आना।
मैं तो अपना दुःख भूल चुका था, किन्तु आज आपको वैसे ही कष्ट में देखकर मेरा घाव हरा हो गया।
(82) घी के दीये जलाना – खुशी मनाना ।
अपने प्रतिद्वन्द्वी की हार पर सुनील ने घी के दीये जलाए।
(83) घोड़े बेचकर सोना — निश्चिन्त होना।
किशन परीक्षा समाप्त होते ही घोड़े बेचकर सोता है।
(84) चाँद पर थूकना — निर्दोष को दोष देना।
आप सत्यता के साथ अपने कार्य को कीजिए । आप पर दोष लगानेवाले स्वयं चुप हो जाएँगे; क्योंकि चाँद पर थूकने से उसका कुछ बिगड़ता नहीं है।
(85) चूना लगाना — हानि पहुँचाना।
उसने मुझे रिश्तेदारी का हवाला दिया और मैं पिघल गया। बेबात में उसने मुझे सौ रुपये का चूना लगा दिया।
(86) चाँदी काटना-अधिक लाभ प्राप्त करना ।
छापे पड़ने से पूर्व काले धन्धों में लगे व्यक्ति आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी उत्पन्न करके चाँदी काट रहे थे। अब सभी के होश ठिकाने आ गए हैं।
(87) चिकना घड़ा होना — निर्लज्ज होना ।
वह पूरा चिकना घड़ा है। उस पर आपकी बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(88) चिकनी-चुपड़ी बातें करना – चालबाजी से भरी मीठी बातें करना।
उसकी बातों में न आना। वह चिकनी-चुपड़ी बातें करके अपना मतलब सिद्ध करने में बड़ा चतुर है।
(89) चुल्लूभर पानी में डूब मरना – तहुत ही लज्जाजनक स्थिति में होना, लज्जा से मुँह न दिखाना।
रमेश ने अपनी बहन की सम्पत्ति पर भी कब्जा करने की कोशिश की। जब सम्बन्धियों को पता चला तो उन्होंने उसे लज्जित करते हुए कहा कि जाओ, चुल्लूभर पानी में डूब मरो ।
(90) चोर की दाढ़ी में तिनका- वास्तविक अपराधी का बिना पूछे बोल उठना।
छात्रों ने श्यामपट्ट पर एक कार्टून बना दिया था। अध्यापक ने उसके सम्बन्ध में छात्रों से पूछा। इसी बीच एक छात्र खड़ा होकर कहने लगा कि यह कार्टून मैंने नहीं बनाया। सब छात्र कहने लगे कि चोर की दाढ़ी में तिनका ।
(91) छक्के छुड़ाना- हिम्मत पस्त कर देना ।
व्यापारमण्डल ने मेरें प्रस्ताव को स्वीकार करके मेरे विरोधियों के छक्के छुड़ा दिए।
(92) छठी का दूध याद कराना – बहुत अधिक कष्ट देना।
सतपाल ने अखाड़े में बड़े-बड़े पहलवानों को भी छठी का दूध याद करा दिया।
(93) छाती पर मूँग दलना — जान-बूझकर किसी का दिल दुःखाना।
माँ ने नाराज होकर बच्चों से कहा कि मेरी छाती पर ही मूँग दलते रहोगे या कुछ पढ़ोगे – लिखोगे भी।
(94) छाती पर पत्थर रखना – दुःख सहने के लिए हृदय कठोर करना।
अपनी छाती पर पत्थर रखकर उसने अपना पुश्तैनी मकान भी वेच दिया।
(95) छाती पर साँप लोटना — ईर्ष्या से हृदय जल उठना।
किसी की उन्नति की चर्चा सुनकर उसकी छाती पर साँप लोटने लगते हैं।
(96) जहर उगलना -कठोर, जली-कटी बातें कहना ।
उन्हें जब देखो, तब जहर उगलते रहते हैं। उन्हें किसी की उन्नति तनिक भी नहीं सुहाती ।
(97) जली-कटी कहना – व्यंग्यपूर्ण दुःख देनेवाली बातें कहना।
जब देखो जली-कटी कहते रहते हो। कभी तो प्रेम के साथ बोला करो।
(98) जहाज का पंछी होना – ऐसी मजबूरी होना, जिससे वही आश्रय लेने के लिए बाध्य होना पड़े।
पति से नाराज होकर सरला अपने सभी परिचितों के यहाँ आश्रय पाने के लिए भटकती रही और अन्ततः जहाज के पंछी की भाँति पति के घर ही लौट आई।
(99) जीती मक्खी निगलना -अहित की बात स्वीकार करना ।
मोहना को भली प्रकार ज्ञात था कि घर और वर दोनों उसके अनुरूप नहीं हैं, फिर भी माता-पिता की विवशता देखकर उसने जीती मक्खी को निगल लिया।
(100) जोड़-तोड़ करना — दाँव-पेंचयुक्त उपाय करना ।
किसी भी तरह जोड़-तोड़ करके रमेश उत्तीर्ण हो ही गया।
(101) झख मारना – व्यर्थ समय गँवाना, विवश होना।
झख मारकर उसे उधार चुकाना ही पड़ा।
(102) टस से मस न होना- विचलित न होना ।
कितनी ही विपत्तियाँ आईं, किन्तु रमेश टस से मस नहीं हुआ । अन्ततः जीत उसी की हुई ।
(103) टका-सा जवाब देना – साफ इनकार करना ।
मैंने कितनी ही बार उसकी सहायता की, किन्तु आवश्यकता पड़ने पर उसने मुझे टका-सा जवाब देने में तनिक भी संकोच नहीं किया।
(104) टपक पड़ना – सहसा बिना बुलाएं आ पहुँचना ।
अरे! अभी तुम्हारी ही बात हो रही थी, तुम एकदम कहाँ से टपक पड़े?
(105) टाँग अड़ाना – दखल देना।
उसे कुछ आता-जाता तो है नहीं, किन्तु टाँग हर बात में अड़ाता रहता है।
(106) टेढ़ी खीर – कठिन कार्य ।
परीक्षा में प्रथम श्रेणी के अंक प्राप्त करना टेढ़ी खीर है।
(107) ठगा-सा रह जाना – चकित रह जाना।
साईं बाबा के चमत्कार देखकर मैं ठगा सा रह गया।
(108) ठोकर खाना – असावधानी के कारण नुकसान उठाना।
रमेश हमेशा सुरेश को समझाता रहता था कि यदि बुरी राह चलोगे तो ठोकर खाओगे, लेकिन सुरेश न माना।
( 109 ) डूबते को तिनके का सहारा-संकट में छोटी-सी • सहायता का संकटमोचन बनकर आना ।
भूख के कारण उसके प्राण निकले जा रहे थे। तभी किसी ने उसे एक रोटी देकर मानो डूबते को तिनके का सहारा दिया ।
(110) ढिंढोरा पीटना — बात का खुलेआम प्रचार करना ।
रमा के पेट में कोई बात नहीं पचती, वह तुरन्त बात का ढिंढोरा पीट देती है।
(111) तकदीर फूट जाना — भाग्यहीन होना ।
युवावस्था में विधवा होने पर स्त्री की तो मानो तकदीर ही फूट जाती है।
(112) तलवे चाटना — खुशामद करना ।
रमेश में तनिक भी स्वाभिमान नहीं है। वह सदैव अपने अधिकारी के तलवे चाटता रहता है।
(113) तिल का ताड़ करना – छोटी-सी बात को तूल देकर विवाद की स्थिति उत्पन्न करना।
आपस बात तो बहुत छोटी-सी थी, किन्तु उन्होंने तिल का ताड़ करके में झगड़ा करा दिया।
(114) तीन-तेरह करना — गायब करना, तितर-बितर करना ।
छापा पड़ने से पहले ही लालाजी ने अपने सारे कागजों को तीन-तेरह कर दिया।
(115) थूककर चाटना — कहकर मुकर जाना, कही हुई बात पर अमल न करना।
पहले तो आवेश में तुमने नौकरी से त्याग पत्र दे दिया, अब उसी के लिए पुन: आवेदन करना तो थूककर चाटना ही है।
(116) दाँत खट्टे करना – हरा देना ।
भारतीय सैनिकों ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों के दाँत खट्टे कर दिए।
(117) दाँत पीसकर रह जाना – क्रोध रोक लेना ।
रमेश की बदतमीजी पर पिताजी को क्रोध तो बहुत आया, किन्तु अपने मित्रों के सामने वे दाँत पीसकर रह गए।
(118) दाँतों तले उँगली दबाना – आश्चर्यचकित होना ।
लक्ष्मीबाई के रणकौशल को देखकर अंग्रेजों ने दाँतों तले उँगली दबा ली।
(119) दाने-दाने को तरसना – भूखों मरना ।
जिन लोगों ने देश की स्वतन्त्रता के लिए सर्वस्व अर्पित कर दिया, उनके बच्चे आज दाने-दाने को तरस रहे हैं।
(120) दाल न गलना – युक्ति में सफल न होना।
जब अधिकारी के सामने लिपिक की दाल न गली तो वह निराश होकर लौट आया।
(121) दिल भर आना – दुःखी होना ।
जाड़े की रात में भिखारिन और उसके बच्चे को ठिठुरते हुए देखकर मेरा दिल भर आया।
(122) दूध की मक्खी की तरह निकाल देना- किसी व्यक्ति को अनुपयोगी मानकर व्यवस्था से अलग कर देना ।
रामसिंह ने लालाजी की जीवनभर सेवा की, किन्तु उन्होंने बुढ़ापे में उसे दूध की मक्खी की तरह निकाल दिया।
(123) दुम दबाकर भागना /चल देना- डरकर हट जाना ।
पुलिस की ललकार सुनकर चोर दुम दबाकर भाग गए।
(124) दो नावों पर पैर रखना- दो अलग-अलग पक्षों से मिलकर रहना ।
जो व्यक्ति दो नावों पर पैर रखकर चलते हैं, वे ठीक मझधार में डूबते हैं।
(125) दो टूक बात कहना – स्पष्ट कहना ।
मोहन किसी से भी नहीं डरता, वह हर व्यक्ति के सामने उचित बात को दो टूक कह देता है।
(126) दिन-दो दिन का मेहमान होना— जीवन के थोड़े ही दिन शेष रहना।
वकील साहब का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। वे अब दिन दो दिन के मेहमान हैं, इसलिए सब मिलकर उनकी सेवा करें।
(127) धूप में बाल सफेद नहीं होना— अनुभवी होना ।
तुम मुझे धोखा नहीं दे सकते, मेरे बाल धूप में सफेद नहीं हुए है।
(128) नकेल हाथ में होना – नियन्त्रण अपने हाथ में होना ।
चिन्ता न करो, उसकी नकेल मेरे हाथ में है। वह तुम्हारा विरोध नहीं कर सकता।
(129) नजर से गिरना – प्रतिष्ठा खो देना ।
कुकर्मों के प्रकट होने के बाद प्रवीण सभी की नजरों से गिर गया।
(130) नमक मिर्च लगाना — बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना ।
कुछ लोगों की आदत होती है कि वे हर बात को नमक मिर्च लगाकर ही कहते हैं।
(131) नमकहरामी करना – कृतघ्नता करना ।
यदि कोई व्यक्ति हमारी भलाई करता है तो हमें उसका कृतज्ञ होना चाहिए, किन्तु बहुत-से व्यक्ति सरासर नमकहरामी करते हैं।
(132) नाक रख लेना- इज्जत रख लेना ।
मुकेश ने अपने बड़े भाई की बात मानकर उनकी नाक रख ली।
(133) नौ-दो ग्यारह होना — गायब हो जाना ।
पुलिस को आता देखकर गिरहकट नौ-दो ग्यारह हो गए।
(134) पगड़ी उछालना — बेइज्जती करना ।
किसी इज्जतदार आदमी की पगड़ी उछालना इनसानियत की बात नहीं है।
(135) पसीना-पसीना होना – बहुत घबरा जाना।
लालाजी बड़े आराम से सो रहे थे, परन्तु अचानक आँख खुलने पर अपने चारों ओर खड़े भयंकर डाकुओं को देखकर वे पसीना-पसीना हो गए।
(136) पहाड़ टूट पड़ना – मुसीबतें आना ।
राम के पिता की मृत्यु से उसके परिवार पर मानो पहाड़ टूट पड़ा।
(137) पत्थर की लकीर – अमिट बात ।
महापुरुषों की बातें पत्थर की लकीर के समान अटल होती हैं।
(138) पाँचों उँगली घी में होना-आनन्द-ही-आनन्द होना ।
दीपक की मम्मी के आ जाने पर आजकल उसकी पाँचों उँगली घी में हैं।
(139) पानी उतर जाना- इज्जत समाप्त हो जाना।
रमेश की चोरी पकड़े जाने के बाद से जनता की निगाह में उसका पानी उतर गया।
(140) पापड़ बेलना – कष्ट झेलना ।
राम को नौकरी प्राप्त करने के लिए बड़े पापड़ बेलने पड़े।
(141) पीठ दिखाना — हारकर भाग जाना ।
भारतीय सेना के सम्मुख पाकिस्तानी सिपाही पीठ दिखाकर भाग गए।
(142) पेट में दाढ़ी होना— कम अवस्था में ही अधिक बुद्धिमान् / चतुर- चालाक होना ।
श्याम की आयु केवल पन्द्रह साल की है, किन्तु वह अपने चाचा से राजनीति की चर्चा कर रहा था। यह देखकर वहाँ बैठे एक व्यक्ति ने कहा कि इस लड़के के पेट में तो दाढ़ी है।
(143) पौ बारह होना – खूब लाभ प्राप्त होना ।
आपात्काल की घोषणा से पहले गल्ला व्यापारियों के पौ बारह हो रहे थे।
(144) प्राण हथेली पर रखना – मरने के लिए तैयार रहना।
भारतीय सैनिक प्राण हथेली पर रखकर अपने शत्रुओं का सामना करते हैं।
(145) फूटी आँखों न देखना- ईर्ष्या रखना ।
अधिकतर विमाताएँ अपने सौतेले पुत्र को फूटी आँखों नहीं देख सकतीं।
(146) फूला न समाना – अत्यधिक प्रसन्न होना ।
अपनी प्यारी बहन मीरा के मिलने पर विमल फूला न समाया ।
(147) बगुला भगत होना- साधु के वेश में ठग, पाखण्डी ।
आजकल अनेक लोग गेरुए वस्त्र धारण करके बगुला भगत बने बैठे हैं।
(148) बगलें झाँकना — निरुत्तर होना ।
अध्यापक के प्रश्न को सुनकर तथा उत्तर समझ में न आने पर छात्रगण बगलें झाँकने लगे।
(149) बाल की खाल निकालना – बारीकी से जाँच-पड़ताल करना।
मोहन का स्वभाव ऐसा ही है कि वह हर बात में बाल की खाल निकालता है।
(150) बाल बाँका न होना- कुछ भी हानि न पहुँचना ।
बाल इस मुकदमे में तुम चाहे कितना ही धन व्यय करो, किन्तु उनका बाँका नहीं हो सकता।
(151) बे – सिर-पैर की बात करना – निरर्थक बात करना ।
उन्हें काम कुछ है नहीं, हर समय बे सिर पैर की बात करते हैं।
(152) मक्खियाँ मारना – – बेकार बैठे रहना ।
जब से यहाँ आया हूँ, बैठा-बैठा मक्खियाँ मारा करता हूँ।
(153) मन के मोदक खाना-काल्पनिक बातों से प्रसन्न होना ।
उनके पास पैसा तो है नहीं, वे मन के मोदक खाकर ही प्रसन्न हो लेते हैं।
(154) मन खट्टा हो जाना – मन घृणा से भर जाना ।
उधर तो दीपक के पिता की लाश पड़ी थी, इधर उसका छोटा भाई बँटवारे के लिए झगड़ रहा था। यह देखकर उसके प्रति दीपक का मन खट्टा हो गया।
(155) मन मारकर बैठना-विवशता के कारण निराश होना।
हामिद के पास तीन पैसे थे, उनसे वह मिठाई कैसे खरीदता । बेचारा साथियों को मिठाई खाता देख मन मारकर रह गया।
(156) मिट्टी के मोल बिकना – अत्यन्त कम मूल्य पर बिकना ।
विवश होकर प्रेमचन्दजी को अपने उपन्यास प्रकाशकों के हाथ मिट्टी के मोल बेचने पड़े।
(157) मिट्टी में मिलाना — पूरी तरह नष्ट कर देना ।
कुपुत्र अपने पूर्वजों के यश को मिट्टी में मिला देते हैं।
(158) मुँह पर कालिख लगना-कलंक लगना ।
चन्दर के बेटे के चोरी के अपराध में रंगे हाथों पकड़े जाने पर उसके मुँह पर कालिख लग गई।
(159) मुँह की खाना – परास्त होना, अपमानित होना ।
दारासिंह से बड़े-बड़े पहलवानों ने मुँह की खाई ।
(160) मुँह में पानी भर आना – जी ललचाना।
मिठाइयों का नाम सुनते ही उसके मुँह में पानी भर आया।
(161) मूँछों पर ताव देना – शक्ति पर घमण्ड करना ।
रमेश के पिता बाहुबली सांसद हैं; अतः वह मूँछों पर ताव दिए फिरता है।
(162) रंग जमाना – धाक जमाना।
किसी समय फिल्मी दुनिया में दिलीप कुमार ने अपना रंग जमा रखा था।
(163) रंग में भंग – आनन्द में विघ्न पड़ना ।
सिनेमाहाल में झगड़ा होने पर दर्शकों के रंग में भंग पड़ गया।
(164) राई को पर्वत करना -छोटी बात को बहुत बढ़ाकर प्रस्तुत करना।
साम्प्रदायिक दंगों के समय समाज-विरोधी तत्त्व राई जैसी बातों को पर्वत बनाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति करते हैं।
(165) रास्ते का काँटा बनना – मार्ग में बाधा डालना ।
देश की प्रगति के रास्ते में काँटा बननेवालों को समाप्त कर देना चाहिए।
(166) लकीर का फकीर होना – रूढ़िवादी होना ।
आधुनिक विज्ञान के युग में लकीर का फकीर होना समझदारी का प्रमाण नहीं है।
(167) लाल-पीला होना – क्रोधित होना ।
रामू से दूध बिखर जाने पर उसकी माँ उस पर खूब लाल-पीली हुई।
(168) लोहा लेना – साहसपूर्वक सामना करना ।
हमें अपने शत्रुओं से डटकर लोहा लेना चाहिए ।
(169) लोहे के चने चबाना – अत्यधिक कठिन काम करना ।
किसी भी व्यापार को आरम्भ करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को लोहे के चने चबाने पड़ते हैं, तब कहीं सफलता मिलती है।
(170) श्रीगणेश करना — कार्य आरम्भ करना ।
इस शुभ कार्य का श्रीगणेश तुरन्त कर देना चाहिए।
(171) सफेद झूठ – बिल्कुल असत्य |
उसके प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने का समाचार सफेद झूठ है।
(172) सिर उठाना – विरोध में खड़े होना, बगावत करना ।
भगवान् श्रीकृष्ण के सम्मुख जब कंस जैसे अनेक दुराचारियों ने सिर उठाया तो वे उनके द्वारा मार दिए गए।
(173) सिर खाना – परेशान करना ।
इस समय मैं अपनी परीक्षा की तैयारी में लगा हूँ, बार-बार प्रश्न पूछकर मेरा सिर मत खाओ।
(174) सितारा चमकना – उन्नति पर होना ।
हमारे वैज्ञानिकों के प्रयत्नों से विज्ञान के क्षेत्र में भी हमारा सितारा चमक रहा है।
(175) सीधे मुँह बात न करना – अकड़कर बोलना ।
सरकारी कार्यालय के लिपिक सीधे मुँह बात ही नहीं करते ।
(176) सौ बात की एक बात — सार तत्त्व ।
सौ बात की एक बात है कि मैं आज सिनेमा नहीं जा सकता, मुझे कई जरूरी काम निपटाने हैं।
(177) साँप-छछूंदर की गति होना – दुविधा में पड़ना ।
रावण के प्रस्ताव से मारीच की गति साँप-छछूंदर की – सी हो गई।
(178) हवा से बातें करना – बहुत तेजगति से दौड़ना ।
चेतक राणा प्रताप के सवार होते ही हवा से बातें करने लगता था।
(179) हाँ में हाँ मिलाना – चापलूसी करना ।
स्वार्थी लोग अधिकारियों की हाँ में हाँ मिलाकर अपना काम निकाल लेते हैं।
(180) हाथ-पाँव फूलना – भय से घबरा जाना ।
डाकुओं को देखकर यात्रियों के हाथ-पाँव फूल गए।
(181) हाथ पीले करना — विवाह करना ।
कमला अपने पति की मृत्यु के पश्चात् बड़ी मुश्किल से अपनी बेटी के हाथ पीले कर सकी।
(182) हाथ-को-ह – हाथ न सूझना – बहुत अँधेरा होना ।
हाथ-को- हाथ नहीं सूझ रहा है, वहाँ कैसे जाऊँ?
(183) हाथ मलते रह जाना – पश्चात्ताप करना ।
पहले तो परिश्रम नहीं किया, अब अनुत्तीर्ण हो जाने पर हाथ मलने से क्या होता है।
(184) होश उड़ जाना — घबरा जाना ।
सामने से शेर को आता देखकर शिकारी के होश उड़ गए।

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