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WBBSE 10th Class Hindi Solutions Chapter 1 उसने कहा था

WBBSE 10th Class Hindi Solutions Chapter 1 उसने कहा था

West Bengal Board 10th Class Hindi Solutions Chapter 1 उसने कहा था

West Bengal Board 10th Hindi Solutions

लेखक- परिचय

पंडित चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ का जन्म जयपुर के एक विद्वता-संपन्न परिवार में सन् 1883 में हुआ था। इनके पूर्वज गुलेर (काँगड़ा) के राजा के पुरोहित थे इसलिए इनके नाम के साथ ‘गुलेरी’ उपनाम जुड़ गया। गुलेरी जी मुख्यतः कहानीकार और निबंधकार थे। इसके अलावा ये पुरातत्व, दर्शन, ज्योतिष, इतिहास, साहित्य तथा भाषा विज्ञान के भी विद्वान थे।
गुलेरी जी ने केवल तीन कहानियाँ लिखी हैं-
(क) ‘सुखमय जीवन’ (ख) ‘बुद्ध का काँटा’ और (ग) ‘उसने कहा था’। ‘उसने कहा था’ इनकी अमर रचना है। हिन्दी के प्राय: सभी विद्वान इस कहानी को हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ कहानी मानते हैं।
‘कछुआ धर्म’, ‘मारेसि मोहि कुठाऊँ’ – ये दो निबंध गुलेरी जी के लोकप्रिय निबंध हैं। कहानी हो या निबंध, गुलेरी जी की भाषा प्रौढ़ और परिमार्जित है। अपने निबंधों में इन्होंने गंभीर विषय को भी रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

1. किस घटना को याद कर सूबेदारनी रोने लगी?
उत्तर : सूबेदारनी ने बोधा सिंह के अलावे चार और पुत्रों को जन्म दिया था लेकिन उनमें से कोई नहीं बचा। उसी घटना को याद कर सूबेदारनी रोने लगी ।
2. वजीरा सिंह कौन है?
उत्तर : वजीरा सिंह नं० 77 सिख राइफल्स में सैनिक था । वह अपने पल्टन का विदूषक भी था क्योंकि सबको अपनी बातों से हँसता रहता था ।
3. घोड़े की पीठ को चाबुक से धुनते हुए इक्केवाले किससे अपना निकट का संबंध स्थिर करते हैं ?
उत्तर : वे घोड़े की नानी से अपना निकट का संबंध स्थिर करते हैं।
4. संसार भर की ग्लानि, निराशा और क्षोभ का अवतार किसे बताया गया है?
उत्तर : इक्के गाड़ीवालों को संसार भर की ग्लानि, निराशा और क्षोभ का अवतार बताया गया है।
5. ‘अमृतसर में उनकी बिरादरीवाले’ से किसे संकेतित किया गया है ?
उत्तर : अमृतसर में उनकी बिरादरीवाले से इक्के-गाड़ीवाले को संकेतित किया गया है।
6. अमृतसर के इक्केवाले लोगों को रास्ते से हटाने के लिए कहने के लिए किन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं ?
उत्तर : अमृतसर के इक्केवाले लोगों को रास्ते से हटाने के लिए ‘बचो खालसा जी’, ‘हटो भाई जी’, ‘ठहरना भाई’, ‘आने दो लाला जी’, ‘हटो बाछा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।
7. यदि कोई बुढ़िया बार-बार चेतावनी देने पर भी रास्ते से नहीं हटती है तो तांगेवाले उन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर : बार-बार चेतावनी देने पर भी यदि कोई बुढ़िया रास्ते से नहीं हटती है तो तांगेवाले कहते हैं – “हट जा जीणे जोगिए, हट जा करमा वालिए, हट जा पुत्तां प्यारिए, हट जा लम्बी उमर वालिए।”
8. “हट जा जीणे जोगिये, हट जा करमा वालिए, हट जा पुत्तां प्यारिए, हट जा लम्बी उमर वालिए” का क्या अर्थ है ?
उत्तर : तू जीने योग्य है, तू भाग्यों वाली है, पुत्रों को प्यारी है, लम्बी उमर तेरे सामने है, तू क्यों मेरे तांगे के पहिए के नीचे आना चाहती है?
9. ‘उसने कहा था’ – में लड़का और लड़की कहाँ पर मिलते हैं ?
उत्तर : अमृतसर के चौक की एक दुकान पर ।
10. कैसे पता चलता था लड़का और लड़की दोनों सिख हैं ?
उत्तर : लड़के के बालों से तथा लड़की के ढ़ीले पाजामे से यह जान पड़ता था कि दोनों सिख हैं।
11. लड़का दुकान पर क्या लेने आया था ?
उत्तर : लड़का दुकान पर मामा के केश धोने के लिए दही लेने आया था।
12. लड़की दुकान पर रसोई के लिए क्या लेने आई थी ?
उत्तर : लड़की दुकान पर रसोई के लिए बड़ियाँ लेने आई थी।
13. लड़का और लड़की कहाँ के थे ?
उत्तर : लड़का नगरे का और लड़की माँझे की थी।
14. लड़की के मामा का क्या नाम था ?
उत्तर : लड़की के मामा का नाम अतर सिंह था।
15. लड़के के मामा का घर कहाँ था ?
उत्तर : लड़के के मामा का घर अमृतसर के गुरूबाजार में था।
16. लड़के ने लड़की से मुस्कराकर क्या पूछा ?
उत्तर : लड़के ने लड़की से मुस्कराकर यह पूछा – “तेरी कुड़माई हो गई ?”
17. लड़का और लड़की अक्सर कहाँ मिल जाते थे ?
उत्तर : लड़का और लड़की अक्सर सब्जीवाले या दूधवाले के यहाँ मिल जाते थे।
18. लड़की कुड़माई होने की बात पर क्या कहकर भाग जाती थी ?
उत्तर : लड़की कुड़माई होने की बात पर ‘धत्’ कहकर दौड़ जाती थी।
19. लड़की की कुड़माई होने की बात सुनकर लड़के पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर : जैसे ही लड़की की कुड़माई होने की बात लड़के ने सुनी उसे बहुत बुरा लगा। उसने रास्ते में एक लड़के को नाली में धकेला, एक ठेलेवाले के दिनभर की कमाई खोई, एक कुत्ते को पत्थर मारा, एक गोभीवाले ठेले में दूध उँडेल दिया और किसी वैष्णवी से टकराकर अंधे की उपाधि पाई ।
20. बालक लहना सिंह ने किससे अंधे की उपाधि पाई ?
उत्तर : नहाकर आती हुई एक वैष्णवी से टकराकर बालक लहना सिंह ने अंधे की उपाधि पाई।
21. गैबी गोले किसे कहा गया है ?
उत्तर : जर्मनों द्वारा फेंके जाने बमों को गैबी गोले कहा गया है ?
22. कौन सैनिकों पर फल और दूध की वर्षा कर देती है ?
उत्तर : फिरंगी मेम सैनिकों पर फल और दूध की वर्षा कर देती है।
23. फिरंगी मेम ‘राजा’ किसे कहती है ?
उत्तर : फिरंगी मेम भारतीय सैनिकों को ‘राजा’ कहती है ।
24. “पाजी कहीं के” किसे कहा गया है ?
उत्तर : यह जर्मन सैनिकों को कहा गया है।
25. “कलों के घोड़े” किसे कहा गया है ?
उत्तर : यह जर्मन सैनिकों के लिए कहा गया है।
26. हजारा सिंह अपने रेजिमेंट में किस पद पर हैं ?
उत्तर : हजारा सिंह अपने रेजिमेंट में सूबेदार के पद पर हैं।
27. पल्टन का ‘विदूषक’ किसे कहा गया है ?
उत्तर : वजीरा सिंह को पल्टन का विदूषक कहा गया है।
28. “निमोनियाँ से मरनेवालों को मुख्बे नहीं मिला करते” – वक्ता और श्रोता का नाम लिखें।
उत्तर : वक्ता वज़ीरा सिंह है तथा श्रोता लहना सिंह है।
29. ‘मरें जर्मन और तुरक’ – वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता वजीरा सिंह है।
30. “कँपकपी छूट रही है। रोम-रोम में तार दौड़ रहे हैं।” – वक्ता कौन है?
उत्तर : वक्ता वजीरा सिंह है।
31. “गुरू उनका भला करें” – यहाँ किसके भले की बात कही जा रही है?
उत्तर : यहाँ विलायत के मेमों के भले की बात कही जा रही है।
32. लहना सिंह की खाई से पूरब जर्मनों की खाई कितनी दूरी पर थी ?
उत्तर : मील भर की दूरी पर।
33. धावे के समय बोधा सिंह को जाने से किसने रोका और क्यों ?
उत्तर : धावे के समय बोधा सिंह को जाने से लहना सिंह ने रोका क्योंकि उसे तेज बुखार था ।
34. क्या देखकर लहना सिंह का माथा ठनका ?
उत्तर : जब लहना सिंह ने लपटन साहब के चेहरे तथा बाल को देखा तो उसका माथा उनका।
35. लपटन से लहना सिंह ने किस खानसामा का जिक्र किया ?
उत्तर : लपटन से लहना सिंह ने अब्दुला नामक खानसामा का जिक्र किया।
36. लहना सिंह अंधेरे में किस सो रहे सैनिक से टकराया ?
उत्तर : लहना सिंह अंधेरे में सो रहे वजीरा सिंह से टकराया।
37. “अब मारे गए। धोखा है।’ वक्ता कौन है?
उत्तर : वक्ता लहना सिंह है 1
38. ‘एक-एक अकालिया सिख सवा लाख के बराबर होता है” – वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता लहना सिंह है।
39. लहना सिंह ने लपटन साहब से कौन-सी बातें सीखने की बात कही ?
उत्तर : लहना सिंह ने लपटन साहब से निम्नलिखित बातें सीखने की बात कहीं-
(क) कि सिख सिगरेट पीते हैं।
(ख) कि जगाधारी के जिले में नीलगायें होती हैं।
(ग) कि नीलगाय के सींग दो फुट चार ईंच के होते हैं।
(घ) कि मुसलमान खानसामा मूर्त्तियों पर जल चढ़ाते हैं।
(ङ) कि लपटन साहब खोते पर चढ़ते हैं।
40. लहना सिंह के गाँव का नाम क्या है?
उत्तर : लहना सिंह के गाँव का नाम माँझे हैं।
41. लहना सिंह के गाँव में तीन महीने पहले कौन आया था ?
उत्तर : लहना सिंह के गाँव में तीन महीने पहले एक तुर्की मौलवी आया था।
42. तुर्की मौलवी क्या करता था ?
उत्तर : तुर्की मौलवी गाँव की औरतों को बच्चे होने की ताबीज बाँटता था और बच्चों को दवाई देता था।
43. तुर्की मौलवी जर्मनों के बारे में क्या कहता था ?
उत्तर : तुर्की मौलवी जर्मनों के बारे में कहता था कि जर्मन वाले बड़े पंडित हैं। वेद पढ़कर उन्हें विमान चलाना आ गया है। गायों को नहीं मारते। जब वे हिन्दुस्तान आ जाएंगे तो गो-हत्या बंद करवा देंगे।
44. लहना सिंह के गाँव के डाक बाबू का नाम क्या था ?
उत्तर : लहना सिंह के गाँव के डाक बाबू का नाम पोल्हूराम था।
45. तुर्की मौलवी मण्डी के बनियों को क्या बहकता था ?
उत्तर : तुर्की मौलवी मण्डी के बनियों को बहकाते हुए कहता था कि सरकार का राज्य जाने वाला है इसलिए डाकखाने से रुपये निकाल लो ।
46. लहना सिंह ने तुर्की मौलवी के साथ क्या किया ?
उत्तर : लहना सिंह ने तुर्की मौलवी की दाढ़ी मूँड़ दी थी और फिर गाँव में पाँव न रखने की शर्त पर उसे भगा दिया था।
47. लहना सिंह ने लपटन की तलाशी लेते समय किसकी तलाशी नहीं ली थी ?
उत्तर : पतलून के जेबों की ।
48. लहना सिंह की खाई पर कितने जर्मन सैनिकों ने धावा किया ?
उत्तर : सत्तर ।
49. हमले में कितने जर्मन मारे गए ?
उत्तर : तिरसठ जर्मन मारे गए।
50. जर्मनों के हमले में कितने सिक्खों के प्राण गए ?
उत्तर : पंद्रह ।
51. लहना सिंह के बारे में किसी को क्या खबर नहीं हुई ?
उत्तर : लहना सिंह के बारे में किसी को यह खबर नहीं हुई कि उसे दूसरा घाव-भारी घाव लगा है।
52. धावे के समय जो बर्फीली हवा चल रही थी, वह बाणभट्ट की भाषा में क्या कहलाती ?
उत्तर : धावे के समय चलने वाली बर्फीली हवा बाणभट्ट की भाषा में ‘दन्तवीणोदेशाचार्य’ कहलाती।
53. किसके न होने से सिख रेजीमेंट के सारे सैनिक मारे जाते ?
उत्तर : लहना सिंह के न होने से सिख रेजीमेंट के सारे सैनिक मारे जाते।
54. सूबेदार हजारा सिंह किसे छोड़कर अस्पताल की गाड़ी में नहीं जाना चाहते थे ?
उत्तर : सूबेदार हजारा सिंह लहना सिंह को छोड़कर अस्पताल की गाड़ी में नहीं जाना चाहते थे।
55. अस्पताल की गाड़ी में जाने के लिए लहना सिंह ने सूबेदार हजारा सिंह को क्या कसम दी?
उत्तर : “तुम्हें बोधा की कसम है और सूबेदारनी जी की सौगंध है, इस गाड़ी में चले जाओ।”
56. अस्पताल की गाड़ी पर लेटे बोधा सिंह से लहना सिंह ने क्या कहा ?
उत्तर : लहना सिंह ने बोधा सिंह से कहा कि मुझसे जो उन्होंने कहा था, वह मैंने कर दिया।
57. मृत्यु के कुछ समय पहले क्या होता है ?
उत्तर : मृत्यु के कुछ समय पहले स्मृति बहुत साफ हो जाती है। जीवन-भर की घटनाएँ एक-एक कर सामने आती हैं। सारे दृश्यों के रंग साफ होते हैं, समय की धुन्ध बिल्कुल उस पर से हट जाती है।
58. जिस समय लहना सिंह पहली बार लड़की से मिला, उस समय दोनों की उम्र क्या थी ?
उत्तर : पहली बार मिलने के समय लहनासिंह की उम्र बारह तथा लड़की की उम्र आठ वर्ष थी।
59. लड़की की कुड़माई हो जाने के कितने वर्षों बाद लहना सिंह फिर उससे मिला ?
उत्तर : पचीस वर्ष के बाद।
60. बचपन में मिली लड़की लहना सिंह के सामने किस रूप में आई ?
उत्तर : बचपन में मिली लड़की लहना सिंह के सामने उसके सूबेदार की पत्नी के रूप में आई
61. लहना सिंह कितने दिनों की छुट्टी लेकर जमीन के मुकदमे की पैरवी करने के लिए घर गया था ?
उत्तर : सात दिनों की ।
62. लहना सिंह को गाँव में किसकी चिट्ठी मिली ? उस चिट्ठी में क्या लिखा था ?
उत्तर : लहना सिंह को गाँव में रेजीमेंट अफसर की चिट्ठी मिली। उस चिट्ठी में लिखा था कि फौज लाम (लड़ाई) पर जाती है। फौरन चले आओ।
63. लहना सिंह को रेजीमेंट अफसर की चिट्ठी के साथ किसकी चिट्ठी मिली ? उसमें क्या था?
उत्तर : लहना सिंह को रेजीमेंट अफ़सर की चिट्ठी के साथ-साथ सूबेदार हजारा सिंह की चिट्ठी मिली कि मैं और बोधा सिंह भी लाम पर जाते हैं, लौटते हुए हमारे घर होते जाना। साथ चलेंगे।
64. सूबेदार हजारा सिंह किसे बहुत चाहते थे ?
उत्तर : सूबेदार हजारा सिंह जमादार लहना सिंह को बहुत चाहते थे।
65. बोधा सिंह किसका पुत्र था ?
उत्तर : बोधा सिंह सूबेदार हजारा सिंह का पुत्र था।
66. सूबेदारनी ने लहनासिंह को देखते ही क्या कहा ?
उत्तर : सूबेदारनी ने लहना सिंह को देखते ही कहा कि, “मैंने तेरे को आते ही पहचान लिया”।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. कौन-सा बहाना बनाकर लहनासिंह खंदक में घुसा ?
(क) खाना लाने का
(ख) दियासलाई लाने का
(ग) राईफल लाने का
(घ) पानी लाने का
उत्तर : (ख) दियासलाई लाने का।
2. गुलेरी जी का पूरा नाम क्या है ?
(क) चन्द्रधर गुलेरी
(ख) पं० चन्द्रधर शर्मा गुलेरी
(ग) चन्द्रधर पंडित गुलेरी
(घ) पं० चन्द्रशर्मा गुलेरी
उत्तर : (ख) पं० चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ।
3. गुलेरी जी का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) जयपुर में
(ख) कोलकाता में
(ग) पटना में
(घ) बनारस में
उत्तर : (क) जयपुर में ।
4. गुलेरी जी का जन्म कब हुआ ?
(क) सन् 1860 में
(ख) सन् 1880 में
(ग) सन् 1885 में
(घ) सन् 1883 में
उत्तर : (घ) सन् 1883 ।
5. गुलेरी जी किस विषय के प्रकांड विद्वान थे ?
(क) हिन्दी
(ख) बंगला
(ग) मराठी
(घ) संस्कृत
उत्तर : (घ) संस्कृत।
6. गुलेरी जी किस पद पर कार्यरत् थे ?
(क) अध्यापक
(ख) प्राचार्य
(ग) इतिहासविद्
(घ) निदेशक
उत्तर : (क) अध्यापक।
7. गुलेरी जी कहाँ के प्रधानाध्यापक थे ?
(क) काशी संस्कृत महाविद्यालय
(ख) अंग्रेजी विद्यालय
(ग) गुजराती पाठशाला
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर : (क) काशी संस्कृत महाविद्यालय ।
8. गुलेरी जी द्वारा प्रकाशित पत्र का नाम क्या था ?
(क) मतवाला
(ख) माधुरी
(ग) समालोचक
(घ) आलोचक
उत्तर : (ग) समालोचक ।
9. गुलेरी जी की पहली कहानी कौन-सी है
(क) उसने कहा था
(ख) सुखमय जीवन
(ग) बुद्ध का काँटा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर : (ख) सुखमय जीवन ।
10. गुलेरी जी की पहली कहानी किस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी ?
(क) चाँद में
(ख) सरस्वती में
(ग) भारत मित्र में
(घ) समालोचक में
उत्तर : (ग) भारत मित्र में।
11. गुलेरी जी की दूसरी कहानी कौन-सी है ?
(क) उसने कहा था
(ख) बुद्ध का काँटा
(ग) सुखमय जीवन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर : (ख) बुद्ध का काँटा।
12. गुलेरी जी की तीसरी कहानी कौन-सी है ?
(क) उसने कहा था
(ख) सुखमय जीवन
(ग) बुद्ध का काँटा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर : (क) उसने कहा था।
13. ‘उसने कहा था’ सर्वप्रथम किस पत्रिका में प्रकाशित हुई ?
(क) माधुरी
(ख) चाँद
(ग) सरस्वती
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर : (ग) सरस्वती।
14. गुलेरी जी ने कुल कितनी कहानियाँ लिखीं ?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
उत्तर : (ख) तीन ।
15. ‘उसने कहा था’ कहानी सर्वप्रथम कब प्रकाशित हुई ?
(क) सन् 1915 में
(ख) सन् 1916 में
(ग) सन् 1917 में
(घ) सन् 1918 में
उत्तर : (क) सन् 1915 में ।
16. ‘मारेसि मोहि कुठाऊँ’ (निबंध) किसकी रचना है ?
(क) प्रेमचंद की
(ख) रामचंद्र शुक्ल की
(ग) गुलेरी जी की
(घ) इनमें से किसी की नहीं
उत्तर : (ग) गुलेरी जी।
17. गुलेरी जी की सर्वश्रेष्ठ कहानी कौन-सी है ?
(क) सुखमय जीवन
(ख) उसने कहा था
(ग) बुद्ध का काँटा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर : (ख) उसने कहा था।
18. गुलेरी जी मुख्य रूप से क्या थे ?
(क) कहानीकार और निबंधकार
(ख) पुरातत्व शास्त्री एवं दार्शनिक
(ग) ज्योतिषी एवं साहित्यकार
(घ) साहित्यकार एवं भाषा विज्ञानी
उत्तर : (क) कहानीकार और निबंधकार ।
19. गुलेरी जी की कहानी-कला की प्रौढ़ता उनकी किस कहानी में झलकती है ?
(क) सुखमय जीवन
(ख) बुद्ध का काँटा
(ग) उसने कहा था
(घ) इनमें से किसी में नहीं
उत्तर : (ग) उसने कहा था।
20. गुलेरी जी की किस कहानी की गिनती हिन्दी की श्रेष्ठतम कहानियों में की जाती है ?
(क) उसने कहा था
(ख) बुद्ध का काँटा
(ग) सुखमय जीवन
(घ) इनमें से किसी की नहीं
उत्तर : (क) उसने कहा था।
21. ‘उसने कहा था’ किस विधा की रचना है ?
(क) निबंध
(ख) संस्मरण
(ग) रिपोर्ताज
(घ) कहानी
उत्तर : (घ) कहानी।
22. “मीठी छुरी की तरह” किसे कहा गया है ?
(क) तांगेवाले को
(ख) तांगे को
(ग) तांगेवाले की जबान को
(घ) लोगों को
उत्तर : (ग) तांगेवाले की जबान को।
23. “हट जा जीणे जोगिये” — का अर्थ है :
(क) तू हट जा
(ख) तू जीने योग्य है
(ग) तू भाग जा
(घ) तू जीने लायक नहीं है
उत्तर : (ख) तू जीने योग्य है।
24. “हट जा करमा वालिए” — का अर्थ है :
(क) तू काम से हट जा
(ख) तू कर्महीन है
(ग) तू कर्मों वाली है
(घ) तू भाग्योंवाली है
उत्तर : (घ) तू भाग्योंवाली है।
25. “हट जा पुत्तां प्यारिये” — का अर्थ है :
(क) पुत्रों को लेकर हट जा
(ख) तू पुत्रों को प्यारी है
(ग) पति को प्यारी है
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर : (ख) तू पुत्रों को प्यारी है।
26. लड़का और लड़की पहली बार कहाँ मिले ?
(क) घर में
(ख) बाग में
(ग) चौक की दुकान में
(घ) बैठक में
उत्तर : (ग) चौक की दुकान में ।
27. लड़के की उम्र क्या थी ?
(क) दस साल
(ख) ग्यारह साल
(ग) अट्ठारह साल
(घ) बारह साल
उत्तर : (घ) बारह साल।
28. लड़की की उम्र थी ?
(क) आठ साल
(ख) नौ साल
(ग) दस साल
(घ) सोलह साल
उत्तर : (क) आठ साल।
29. लड़की क्या लेने दुकान पर आयी थी ?
(क) दही
(ख) आटा
(ग) बड़ियाँ
(घ) बेसन
उत्तर : (ग) बड़ियाँ ।
30. लड़का क्या लेने दुकान पर आया क्या था ?
(क) दही
(ख) मिठाई
(ग) चावल
(घ) सब्जी
उत्तर : (क) दही।
31. लड़की के मामा का नाम है ?
(क) बलजीत सिंह
(ख) वजीरा सिंह
(ग) अतर सिंह
(घ) मांझे सिंह
उत्तर : (ग) अतर सिंह ।
32. लड़के के मामा का घर कहाँ है ?
(क) गोरखा बाजार में
(ख) गुरूनानक बाजार में
(ग) गुरूबाजार में
(घ) गौर बाजार में
उत्तर : (ग) गुरूबाजार में ।
33. लड़के ने लड़की से मुस्कराकर क्या पूछा ?
(क) मेरे तो भाग फूट गए
(ख) सरकार ने बहादुर का खिताब दिया है
(ग) तेरी कुड़माई हो गई
(घ) पानी पिला दे
उत्तर : (ग) तेरी कुड़माई हो गई।
34. लड़के ने मोरी में किसे धकेला ?
(क) कुत्ते को
(ख) लड़के को
(ग) वैष्णवी को
(घ) लड़की को
उत्तर : (ख) लड़के को ।
35. तेरी कुड़माई हो गई के जबाव में लड़की ने क्या कहा ?
(क) धत्
(ख) तुम राजा हो
(ग) मेरे मुल्क को बचाने आए हो
(घ) इनमें से कुछ नहीं
उत्तर : (क) धत् ।
36. लड़के ने किसकी दिनभर की कमाई खोई ?
(क) वैष्णवी की
(ख) लड़की को
(ग) जर्मन की
(घ) छाबड़ी वाले की
उत्तर : (घ) छाबड़ी वाले की।
37. लड़के ने किसे पत्थर मारा ?
(क) एक लड़के को
(ख) कुत्ते को
(ग) वैष्णवी को
(घ) अतर सिंह को
उत्तर : (ख) कुत्ते को ।
38. बालक लहना सिंह ने किससे अंधे की उपाधि पाई ?
(क) लड़की से
(ख) लड़के से
(ग) छाबडी वाले से
(घ) वैष्णवी से
उत्तर : (घ) वैष्णवी से।
39. लड़के ने किसके ठेले में दूध उड़ेल दिया ?
(क) गोल-गप्पे वाले के
(ख) चाट वाले के
(ग) गोभी वाले के
(घ) आलूवाले के
उत्तर : (ग) गोभी वाले।
40. लड़की ने लड़के को संभावना के विरुद्ध क्या कहा ?
(क) हाँ, हो गई
(ख) नहीं, नहीं हुई
(ग) हाँ, होनेवाली है.
(घ) शायद, नहीं होगी
उत्तर : (क) हाँ, हो गई।
41. लुधियाने से दसगुणा जाड़े’ की बात कहाँ के लिए की गई है ?
(क) दिल्ली के लिए
(ख) बेल्जियम के लिए
(ग) फ्रांस के लिए
(घ) जापान के लिए
उत्तर : (ग) फ्रांस के लिए।
42. ‘जलजला’ का क्या अर्थ है ?
(क) जलमग्न
(ख) जलप्लावन
(ग) भूकंप
(घ) जलना
उत्तर : (ग) भूकंप।
43. कौन भारतीय सैनिकों के लिए फल और दूध की वर्षा कर देती है।
(क) लड़की
(ख) होरां
(ग) फिरंगी मेम
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर : (ग) फिरंगी मेम ।
44. “लाख कहते हैं, दाम नहीं लेती” – कोई नहीं वक्ता कौन है ?
(क) लहना सिंह
(ख) वजीरा सिंह
(ग) सूबेदार हजारा सिंह
(घ) बोधा सिंह
उत्तर : (ग) सूबेदार हजारा सिंह ।
45. “चार दिन तक पलक नहीं झँपी” – किसका कथन है ?
(क) लड़की का
(ख) सूबेदारनी का
(ग) फिरंगी मेम का
(घ) लहना सिंह का
उत्तर : (घ) लहना सिंह का ।
46. “तीन दिन और हैं” – वक्ता कौन है ?
(क) सूबेदारनी
(ख) लड़की
(ग) लहना सिंह
(घ) सूबेदार हजारा सिंह
उत्तर : (घ) सूबेदार हजारा सिंह ।
47. “पाजी कहीं के, कलों के घोड़े” – कौन, किसे कह रहा है ?
(क) लहना सिंह सूबेदार को
(ख) लहना सिंह जर्मन सैनिकों को
(ग) लहना सिंह तांगेवाले को
(घ) लप्टन – लहना सिंह को
उत्तर : (ख) लहना सिंह जर्मन सैनिकों को ।
48. वजीरा सिंह पल्टन का क्या था ?
(क) सूबेदार
(ख) जमादार
(ग) लप्टन
(घ) विदूषक
उत्तर : (घ) विदूषक ।
49. “अपनी बाड़ी के खरबूजों में पानी दो” – कौन, किसे कह रहा है ?
(क) सूबेदार सूबेदारनी को
(ख) लहना सिंह लड़की को
(ग) लहना सिंह वजीरा सिंह को
(घ) सूबेदार लहना सिंह से
उत्तर : (ग) लहना सिंह वजीरा सिंह को ।
50. आज तक मैं उसे समझा न सका कि—
(क) सिख गाना नहीं गाते
(ख) सिख झटका नहीं करते
(ग) सिख हमला नहीं करते
(घ) सिख सिगरेट नहीं पीते
उत्तर : (घ) सिख सिगरेट नहीं पीते ।
51. “मेरा डर मत करो” — वक्ता कौन है ?
(क) वजीरा सिंह
(ख) कीरत सिंह
(ग) लहना सिंह
(घ) सूबेदार हजारा सिंह
उत्तर : (ग) लहना सिंह।
52. “निमोनिया से मरने वालों को मुरब्बे नहीं मिला करते” — वक्ता कौन है ?
(क) फील्ड अस्पताल का डॉक्टर
(ख) वजीरा सिंह
(ग) अब्दुल
(घ) सूबेदार हजार सिंह
उत्तर : (ख) वजीरा सिंह।
53. “रोम-रोम में तार दौड़ रहे हैं” – किसका कथन है ?
(क) लहना सिंह का
(ख) सूबेदार सिंह का
(ग) वजीरा सिंह का
(घ) बोधा सिंह का
उत्तर : (घ) बोधा सिंह का।
54. “आज सवेरे ही आई है” – किसके बारे में कहा जा रहा है ?
(क) सूबेदारनी
(ख) लड़की
(ग) अस्पताल की गाड़ी
(घ) जरसी
उत्तर : (घ) जरसी।
55. “गुरू उनका भला करें” – उनका से कौन संकेतित है ?
(क) जर्मन
(ख) सूबेदारनी
(ग) बोधा
(घ) विलायती मेम
उत्तर : (घ) विलायती मेम।
56. “देखो इसी दम धावा करना होगा” – वक्ता कौन है ?
(क) लपटन.
(ख) लहना सिंह
(ग) सूबेदार हजारा सिंह
(घ) बोधा सिंह
उत्तर : (क) लपटन।
57. “हम यहाँ रहेगा” – वक्ता कौन है ?
(क) लहना सिंह
(ख) विलायती मेम
(ग) लपटन
(घ) बोधा सिंह
उत्तर : (ग) लपटन।
58. लपटन साहब कितने वर्षों से सिख रेजीमेंट में थे ?
(क) दो वर्ष
(ख) तीन वर्ष
(ग) चार वर्ष
(घ) पाँच वर्ष
उत्तर : (घ) पाँच वर्ष ।
59. खानसामा का नाम क्या था ?
(क) रहमान
(ख) रहीम
(ग) अब्दुला
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर : (ग) अब्दुला।
60. “जरा तो आँख लगने दी होती” – वक्ता कौन है?
(क) सूबेदारनी
(ख) लड़की
(ग) सूबेदार
(घ) वजीरा सिंह
उत्तर : (घ) वजीरा सिंह।
61. “धोखा है” – वक्ता कौन है ?
(क) लहना सिंह
(ख) लड़की
(ग) विलायती मेम
(घ) सूबेदारनी
उत्तर : (क) लहना सिंह।

वस्तुनिष्ठ सह व्याख्यामूलक प्रश्नोत्तर

1. “भावों की टकराहट से मूर्च्छा खुली। कटवट बदली पसली का घाव बह निकला।”
प्रश्न : किसको मूर्च्छा आ गई थी ?
उत्तर : लहनासिंह को मूर्च्छा आ गई थी।
प्रश्न : सूबेदारनी ने लहना सिंह से आँचल पसारकर क्या माँगा था?
उत्तर : सूबेदारनी ने लहना सिंह से आँचल पसारकर यह माँगा था कि जिस तरह एकबार मेरे प्राप्त बचाने के लिए अपनी जान की परवाह न की थी उसी प्रकार मेरे पति और पुत्र के प्राणों की रक्षा करना।
2. यह बात नहीं कि उनकी जीभ चलती ही नहीं, चलती है,
     पर मीठी छुरी की तरह महीन वार करती है।
प्रश्न : पंक्ति के रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर : पंक्ति के रचनाकार पं० चन्द्रधर शर्मा गुलेरी हैं।
प्रश्न : कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : गुलेरी जी ने कहना चाहा है कि ऐसी बात नहीं कि अन्य बड़े शहरों के तांगेवालों की तरह अमृतसर के तांगेवाले की जबान नहीं चलती। उनकी जबान भी चलती है और खूब चलती है। फर्क केवल इतना है कि उनकी बातें सुनने वाले पर सीधे-सीधे प्रहार नहीं करती। इनकी बातें मीठी छुरी की तरह वार करती हैं कि सुनने वाला कुछ कहने की स्थिति में नहीं रहता।
3. हट जा जीणे जोगिए, हट जा करमा वालिए,
    हट जा पुत्तां प्यारिए, हट जा लम्बी उमर वालिए।
प्रश्न : यह कथन किसका है ?
उत्तर : यह कथन अमृतसर के बम्बूकार्ट (तांगेवाले) वालों का है।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : अमृतसर की भीड़-भरी चक्करदार गलियों में तांगेवाले की बात अनसुनी कर चलने वाली कोई बूढ़ी जब रास्ता नहीं छोड़ती तो तांगेवाले कुछ इस लहजे में उसे ये कहते हैं। पंक्ति का आशय है – “तू जीने योग्य है, तू भागोंवाली है, पुत्रियों को प्यारी है, लम्बी उमर तेरे सामने है, तू क्यों मेरे पहिये के नीचे आना चाहती है ? बच जा।”
4. ऐसे बम्बूकार्टवालों के बीच में होकर एक लड़का और एक लड़की चौक की एक दुकान पर आ मिले।
प्रश्न : रचना और रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर : रचना ‘उसने कहा था’ है तथा रचनाकार पं० चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ हैं।
प्रश्न : लड़का और लड़की कौन हैं? वे चौक की दुकान पर किस प्रकार आ मिले ?
उत्तर : लड़का लहना सिंह है तथा लड़की होरां है।
लड़का अपने मामा के केश धोने के लिए दही लेने आया था तथा लड़की रसोई के लिए बड़ियाँ लेने आयी थी। एक ही दुकान से सामान लेने के कारण वे चौक की एक ही दुकान पर आ मिले।
5. तेरी कुड़माई हो गई ?
प्रश्न : वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता लहना सिंह है।
प्रश्न : वक्ता का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : लहना सिंह अक्सर उस लड़की से दूसरे-तीसरे दिन सब्जीवाले या दूधवाले के दुकान पर मिल जाता था। उसे छेड़ने के ख्याल से ही वह उसे यह कहकर छेड़ता था कि “क्या तेरी कुड़माई हो गई।” लहना सिंह केवल उसे चिढ़ाने के लिए ही ऐसा कहता था क्योंकि लड़कियाँ अपनी शादी की बात सुनते ही शरमा जाती हैं।
6. महीने भर यही हाल रहा।
प्रश्न : प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से ली गई है ?
उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति पं० चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ की कहानी ‘उसने कहा था’ से ली गई है।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : बालक लहना सिंह अक्सर उस लड़की से जो अपने मामा के यहाँ आई थी, से सब्जीवाले या दूधवाले के यहाँ मिल जाया करता था। धीरे-धीरे दोनां में परिचय बढ़ा और लहना सिंह उसे ‘तेरी कुड़माई हो गई’ कहकर चिढ़ा दिया करता था। लड़की जबाब में आँखें चढ़ाकर ‘धत्’ कहकर भाग जाया करती थी। यही सिलसिला महीने भर चला।
7. कल, देखते नहीं, यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू।
प्रश्न : वक्ता और श्रोता कौन हैं?
उत्तर : वक्ता लड़की है और श्रोता बालक लहना सिंह है।
प्रश्न : वक्ता का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : बालक लहना सिंह लड़की को बार-बार ‘तेरी कुड़माई हो गई’ कहकर छेड़ता था। लड़की धत् कहकर भाग जाती थी। लेकिन आशा के विपरीत एक दिन लड़की ने उत्तर में यह कहा, हाँ उसकी कुड़माई हो गई। प्रमाण के तौर पर उसने रेशम से कढ़ा हुआ सालू दिखाया।
8. लड़के ने घर की राह ली।
प्रश्न : लड़का कौन है ?
उत्तर : लड़का बालक लहना सिंह है।
प्रश्न : लड़के ने किस परिस्थिति में घर की राह ली ?
उत्तर : संभावना के विरुद्ध जब लड़के को लड़की के कुड़माई होने का पता चला तो मानों उसका दिल ही टूट गया। उसका मन मानों बुझ-सा गया और बुझे हुए मन से तथा निराशा व खीझ के साथ उसने अपने घर की राह ली।
9. कहती है, तुम राजा हो, मेरे मुल्क को बचाने आए हो।
प्रश्न : वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता लहना सिंह है।
प्रश्न : वक्ता का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : लहना सिंह यहाँ फ्रांसीसी मेम के बारे में कहता है। वह कहता है कि मेम से मिलने पर वह फलों और दूधों की वर्षा कर देती है। इनके पैसे लेने से भी इन्कार कर देती है। कहती है कि तुम राजा हो। तुम मेरे मुल्क को बचाने आए हो। इसलिए वह भारतीय सैनिकों की सेवा करना अपना कर्त्तव्य समझती है।
10. बिना फेरे घोड़ा बिगड़ता है और बिना लड़े सिपाही ।
प्रश्न : वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता लहना सिंह है।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें ।
उत्तर : लहना सिंह चाहता है कि बीच-बीच में आक्रमण करने का मौका मिलता रहे। युद्ध न होने से ऐसा लगता है कि मानो उसके शरीर में जंग-सी लग गई हो। उदाहरण के तौर पर वह कहता है कि बिना फेरे (खरहरा करना, ब्रश करना) घोड़ा बिगड़ जाता है और बिना लड़े सिपाही। यही कारण है कि वह बीच-बीच में धावा करने का अवसर चाहता है।
11. वजीरा सिंह पलटन का विदूषक था।
प्रश्न : रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर : रचनाकार पं० चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ हैं।
प्रश्न : वजीरा सिंह किस पलटन में था ?
उत्तर : वजीरा सिंह नं० 77 सिख राइफल्स पलटन में था।
प्रश्न : वजीरा सिंह को पलटन का विदूषक क्यों कहा गया है ?
उत्तर : वजीरा सिंह जिंदादिल इन्सान है। लडाई के मैदान में भी वह चिंतित नहीं होता है। वह ऐसी-ऐसी बातें करता है कि उसके सैनिक साथी चाहे-अनचाहे हँसने के लिए विवश हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर – “मैं पाधा बन गया हूँ। करो जर्मनी के बादशाह का तर्पण।”
12. कहीं तुम न माँदे (बीमार पड़ जाना।
प्रश्न : वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता वजीरा सिंह है।
प्रश्न : वक्ता ऐसा किससे और क्यों कह रहा है ?
उत्तर : वजीरा सिंह यह गौर करता है कि लहना सिंह अपनी सेहत तथा ठंड का ख्याल न रखकर बोधा सिंह का विशेष ध्यान रखता है। वह अपना कंबल भी उसे उढ़ा देता है तथा खुद सिगड़ी के सहारे ठंड काटता है। वह बोधा सिंह के बदले खुद पहरा दे देता है तथा उसे तख्त पर सुलाकर खुद कीचड़ में पड़ा रहता है। वजीरा सिंह कहता है कि उसे अपने स्वास्थय का भी ध्यान रखना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि वह खुद बीमार पड़ जाय ।
13. मैं तो बुलेल की खड्ड के किनारे मरूँगा।
प्रश्न : रचना और रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर : रचना ‘उसने कहा था’ है और रचनाकार गुलेरी जी हैं ।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : वजीरा सिंह के यह समझने पर कि वह बोधा सिंह का ध्यान रखने के क्रम में अपना ध्यान रखना ही भूल गया है। कहीं ऐसा न हो कि खुद बीमार पड़ जाय। इतनी ठंड में लापरवाही से उसे निमोनिया हो सकता है तथा निमोनिया से मरनेवालों को स्वर्ग में मुरब्बे नहीं मिला करते हैं।
14. मेम की जरसी की कथा केवल कथा थी।
अथवा
15. गुरू उनका भला करें।
प्रश्न : प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से ली गई है ?
उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति ‘उसने कहा था’ पाठ से ली गई है।
प्रश्न : वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता लहना सिंह है।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : सूबेदारनी ने लहना सिंह को अपने पति और पुत्र बोध सिंह की रक्षा करने की भिक्षा माँगी थी। लहना सिंह इसीलिए अपनी परवाह न कर बोधा सिंह का विशेष ध्यान रखता है। वह अपनी गरम जरसी भी बोधा सिंह को पहना देता है। मना करने पर वह बोधा सिंह को झूठी कहानी सुना देता है कि उसके पास दूसरी गरम जरसी है। विलायत से मेमें ये जरसी बुन-बुनकर भेज रही है। गुरूजी मेमों का भला करें।
16. तब उसका माथा ठनका।
प्रश्न : रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर : रचना ‘उसने कहा था’ तथा रचनाकार पं० चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ हैं।
प्रश्न : कब किसका माथा ठनका और क्यों ?
उत्तर : जमादार लहनासिंह का माथा ठनका।
जब लहना सिंह ने लपटन साहब का चेहरा और बाल सिगड़ी के उजाले में देखा तो तभी उसे शक हुआ कि हो न हो, दाल में कुछ काला है। लपटन साहब पाँच वर्षों से उसके रेजीमेंट में थे और वह उन्हें जानता था। अपने संदेह को दूर करने `लिए उसने नकली लपटन साहब की एक मनगढ़ंत कहानी सुनाई, जिससे उसका संदेह विश्वास में बदल गया।
17. क्या कयामत आ गई ?
अथवा,
18. कयामत आई है और लपटन साहब की वर्दी पहनकर आई है।
प्रश्न : रचना और रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर : रचना ‘उसने कहा था’ और रचनाकार पं० चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ हैं।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : जब लहना सिंह का शक विश्वास में बदल जाता है तो वह सूबेदार तक खबर भिजवाने के लिए जल्दी से खाई के अंदर आता है। तभी अंधेरे में वह सो रहे वजीरा सिंह से टकरा जाता है। नींद में खलल पहुँचने पर वजीरा सिंह झल्लाकर कहता है कि क्या कयामत आ गई है ? उत्तर में लहना सिंह कहता है कि हाँ कयामत ही आई है और वो भी लपटन साहब की वर्दी पहनकर ।
19. अब मारे गए। धोखा है।
प्रश्न : वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता लहना सिंह है।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : जमादार लहना सिंह देखता है कि नकली जर्मन लपटन की बातों में आकर उसके दल के सैनिक आगे जाकर हमला करने चले गए हैं तो उसे लगता है कि उसके रेजीमेंट के साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। अब उसके रेजीमेंट के सैनिकों पर दोतरफा हमला होगा और सबके सब मारे जाएँगे।
20. खन्दक की बात झूठ है।
प्रश्न : वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता लहना सिंह है।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें ।
उत्तर : लहना सिंह वजीरा सिंह को सावधान करता हुआ कहता है कि जर्मन लपटन की यह बात कि मील भर की दूरी पर एक जर्मन खाई है – बिल्कुल झूठ है। लपटन ने ऐसा इसलिए कहा ताकि हमलोगों पर जर्मन दो तरफा हमला कर सकें। इसलिए जितनी जल्द हो सके सूबेदार हजारा सिंह को वापस लौट आने को कहो।
21. एक-एक अकालिया सिख सवा लाख के बराबर होता है।
प्रश्न : प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से ली गई है ?
उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति ‘उसने कहा था’ पाठ से ली गई है।
प्रश्न : वक्ता कौन है?
उत्तर : वक्ता लहना सिंह है।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : जब वजीरा सिंह से लहना सिंह यह कहता है कि वह जाकर सूबेदार को वापस आने को कहो, तब तक लहना सिंह लपटन साहब की खबर लेगा। यह सुनकर वजीरा सिंह चिंता व्यक्त करते हुए कहता है कि लेकिन यहाँ तो तुम केवल आठ ही हो। इसपर लहना सिंह उसे आश्वस्त करते हुए कहता है कि आठ नहीं, सवा लाख हैं। क्योंकि एक-एक अकालिया सिख सवा लाख के बराबर होता है। उल्लेखनीय है कि अकालिया का गठन गुरू गोविंद सिंह ने सिख धर्म की रक्षा के लिए किया था और कहा था –
“सवा लाख पर एक चढ़ाऊँ, गुरु गोविंद निज नाम कहाऊँ।”
22. आज मैंने बहुत-सी बातें सीखीं।
प्रश्न : वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता लहना सिंह है।
प्रश्न : वक्ता ने किससे, कौन-सी बहुत सारी बातें सीखी ?
उत्तर : वक्ता अर्थात् लहना सिंह जर्मन लपटन साहब ने निम्नलिखित बहुत सारी बातें सीखीं –
(क) यह कि लपटन साहब खोते (गधे) की सवारी करते हैं।
(ख) यह कि मुसलमान मंदिरों में जल चढ़ाते हैं।
(ग) यह कि नीलगायों के दो-दो फुट के सींग होते हैं।
(घ) यह कि सिख सिगरेट पीते हैं।
23. एक हड़का हुआ कुत्ता आया था, मार दिया।
प्रश्न : वक्ता कौन है ? ‘हड़का हुआ कुत्ता’ किसे कहा गया है ?
उत्तर : वक्ता लहना सिंह है। ‘हड़का हुआ कुत्ता’ जर्मन लपटन को कहा गया है।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : लहना सिंह ने जर्मन लपटन की पूरी-पूरी तलाशी नहीं ली थी। मौके का फायदा उठाकर लपटन साहब ने जेब की रिवाल्वर से लहना सिंह पर फायर कर दिया। गोली लहना सिंह की जाँघ में लगी। लहना सिंह ने जबाव में अपनी बंदूक हैमरी मार्टिन से दो फायर करके लपटन साहब को हमेशा-हमेशा के लिए सुला दिया। फायर की आवाज सुनकर सब दौड़ पड़े। बोधा सिंह के पूछने पर लहना सिंह ने कहा कि “एक हड़का (भटका) हुआ कुत्ता आया था, मार दिया।”
24. और हवा ऐसी चल रही थी, जैसे कि वाणभट्ट की भाषा में ‘दन्तवीणोपदेशाचार्य’ कहलाती ।
प्रश्न : प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से ली गई है ?
उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति ‘उसने कहा था’ पाठ से ली गई है।
प्रश्न : वाणभट्ट कौन थे ?
उत्तर : वाणभट्ट भारत के ज्योतिषी तथा गणित के विद्वान थे।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति में गुलेरी जी ने फ्रांस के कड़ाके का सर्दी की वर्णन किया है। सर्दी के मारे दाँत तो ऐसे बज रहे थे जैसे वीणा की तार झंकृत होती है ।
25. तू न होता, तो आज सब मारे जाते।
प्रश्न : रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर : रचना ‘उसने कहा था’ है तथा रचनाकार पं० चंद्रधर शर्मा गुलेरी हैं।
प्रश्न : ‘तू’ से किसे संकेतित किया गया है?
उत्तर : ‘तू’ से जमादार लहना सिंह को संकेतित किया गया है।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : एक जर्मन सैनिक लपटन साहब का वेश धारणकर आया था। एक जर्मन खाई पर हमले की बात कहकर उसने अधिकांश सिख सैनिकों को खाई से बाहर भेज दिया था। यदि लहना सिंह ने अपनी कुशाग्र (तेज) बुद्धि से काम न लिया होता तो भारतीय सैनिकों पर जर्मन सैनिकों का दो तरफा हमला होता और सब के सब मारे जाते। इसीलिए सूबेदार हजारा सिंह लहना सिंह के प्रति कृतज्ञता जाहिर करते हुए कहते हैं कि यदि लहना सिंह न होता तो सब के सब मारे जाते।
26. तुम्हें बोधा की कसम है और सूबेदारनी जी की सौगन्ध है, इस गाड़ी में चले जाओ।
प्रश्न : वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता जमादार लहना सिंह है।
प्रश्न : पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर : जर्मन सैनिकों के हमले में कई सैनिक घायल हुए और कई मारे गए। घायल सैनिकों की गाड़ी में लहना सिंह ने बोधा सिंह को चढ़ा दिया। वह तेज बुखार में था। उसने सूबेदार हजारा सिंह को भी बोधा सिंह के साथ जाने को कहा। सूबेदार लहना सिंह को छोड़कर नहीं जाना चाहते थे क्योंकि वह भी बुरी तरह घायल था। लेकिन लहना सिंह ने सूबेदार को बोधा और सूबेदारनी की कसम देकर उन्हें जाने के लिए बाध्य कर दिया।
27. सूबेदारनी होरौँ को चिट्ठी लिखो तो मेरा मत्था टेकना लिख देना ।
अथवा
28. जब घर जाओ तो कह देना कि मुझसे जो उन्होंने कहा था, वह मैंने कर दिया।
प्रश्न : वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता जमादार लहना सिंह है।
प्रश्न : सूबेदारनी ने किससे क्या कहा था ? उसने उसे कैसे पूरा किया ?
उत्तर : सूबेदारनी ने लहना सिंह से कहा था कि, ……….. “तुमने उस दिन मेरे प्राण बचाए थे। ……… ऐसे ही इन दोनों को बचाना, यह मेरी भिक्षा है। तुम्हारे आगे मैं आँचल पसारती हूँ।”
लहना सिंह ने अपने प्राण देकर भी सूबेदार हजारा सिंह और बोधा सिंह के प्राण बचाकर अपना वचन पूरा किया।
29. उसने क्या कहा था ?
अथवा
30. मैंने जो कहा, वह लिख देना और कह भी देना।
प्रश्न : प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से ली गई है ?
उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति ‘गुलेरी’ जी कहानी ‘उसने कहा था’ से ली गई है।
प्रश्न : पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : सूबेदारनी ने लहना सिंह से लाम पर जाते समय कहा था कि उसने जिस तरह एक बार उसके प्राणों की रक्षा की थी उसी प्रकार मेरे पति और पुत्र के प्राणों की रक्षा करना। इसलिए लहना सिंह ने सूबेदार से कहा कि सूबेदारनी ने जो उससे कहा था, वह उसने कर दिया। अगर वे सूबेदारनी को चिट्ठी लिखें तो लहना सिंह की इस बात का जिक्र जरूर कर दें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : ‘उसने कहा था’ कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न – 2 : कहानी-कला की दृष्टि से ‘उसने कहा था’ की विशेषताओं का उल्लेख करें।
अथवा
प्रश्न – 3 : ‘उसने कहा था’ के शीर्षक की सार्थकता पर विचार करें।
अथवा
प्रश्न – 4 : ‘उसने कहा था’ में निहित संदेश को अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न – 5 : ‘उसने कहा था’ कहानी के उद्देश्य को लिखें।
अथवा
प्रश्न – 6 : ‘उसने कहा था’ कहानी की समीक्षा करें।
अथवा
प्रश्न – 7 : ‘उसने कहा था’ लहना सिंह के प्रेम के बलिदान की कहानी है – समीक्षा करें।
अथवा
प्रश्न – 8: ‘उसने कहा था’ जिन विशेषताओं के कारण आपको अच्छी लगती है उसका वर्णन करें।
उत्तर : ‘उसने कहा था’ कहानी सन् 1915 में ‘सरस्वती’ में प्रकाशित हुआ था। इसमें कहानी-कला का पूर्ण विकसित रूप दिखाई पड़ता है। कहानी की शुरूआत में ही अमृतसर के बाज़ार का मनोरम वातावरण पाठकों का मन मोह लेता है। यहीं बालक लहना सिंह का मिलन उस लड़की से होता है जिससे वह मन ही मन प्रेम करने लगता है। इन दोनों की आपस की बातचीत पाठकों के हृदय में एक आकर्षण पैदा कर देती है-
‘तेरी कुड़माई हो गई ?”
“धत् ।
पाठक अतृप्त भाव से कहानी की सरस और उत्तेजक घटनाओं को आगे-आगे पढ़ने के लिए ललायित हो उठता है। नायक और नायिका का प्रारंभिक मिलन दिखलाकर कहानीकार ने लड़ाई के मैदान के जीवन का बडा ही सजीव चित्रण किया है। लड़ाई की क्रूर और गतिमय पृष्ठभूमि में इस नाजुक सी प्रेम कहानी की गंभीरता और भी निखर उठती है।
पचीस वर्षों के बाद अमृतसर के बाजार की वही लड़की लहना सिंह से मिलती है। लेकिन अब वह सूबेदार हजारा सिंह की पत्नी है। सूबेदारनी ने पूरी कहानी में अपने संक्षिप्त परिचय के अलावे केवल दो वाक्य बोलती हैं – “तेरी कुड़माई हो गई ?” के जवाब में – “देखते नहीं यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू ?” और फिर पच्चीस वर्ष बाद औपचारिक बातों के साथ सूबेदारनी के ये वाक्य ‘ऐसे ही इन दोनों को बचाना’ लहना सिंह की आत्मा में गुंथ जाते हैं, उसकी जीवन-धारा को ही मोड़ देते हैं। पत्नी और माँ की भारतीय मर्यादा के बीच प्यार की यह सरस्वती पचीस वर्षों तक न जाने सूबेदारनी के मन में कितनी गहराई से बहती रही होगी। तभी तो उसने नि:संकोच लहना सिंह से उसका जीवन माँग लिया है। लहना सिंह अपने प्राण देकर सूबेदार हजारा सिंह तथा बोधा सिंह के प्राण बचाता है और बोधा सिंह से कहता है – “जब घर जाओ तो कह देना कि मुझसे जो उन्होंने कहा था, वह मैंने कर दिया।”
लहना सिंह के बचपन की प्रेमिका सूबेदारनी ने न किसी को मोरी में ढ़केला, न किसी की दिनभर की कमाई खोई, लड़ाई के मैदान में जाकर गोली भी नहीं खाई; चुपचाप कुड़माई कराके बहू और माँ बन गई, लेकिन उसके बचपन के प्यार और विश्वास ने ही लहना सिंह को एक अपराजेय गरिमा दे दी। लहना सिंह को सूबेदारनी याद न दिलाती तो कौन जाने लड़ाई की भाग-दौड़ में इस सिपाही को कभी ‘रेशम के सालू’ वाली लड़की का ध्यान आता या नहीं ……..?
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि ‘उसने कहा था’ की घटना साधारण है, जैसी अक्सर होती है लेकिन उसके भीतर से प्रेम का स्वर्गिक स्वरूप झांक रहा है। इसकी घटनाएं ही बोल रही हैं, पात्रों के बोलने की आवश्यकता महसूस नहीं होती। – प्रेम के इस स्वर्गिक स्वरूप को ही प्रकाशित करना ‘गुलेरी जी’ का उद्देश्य रहा है।
वातावरण की सजीवता, कहानी की लाक्षणिक भंगिमा, फ्लैश बैक (पूर्व दीप्ति) की यह शैली और कथा-शिल्प का जो संगम इस कहानी में दिखाई पड़ता है – वह दूसरी कहानियों में दुर्लभ है। भले ही देवदास का त्याग और बलिदान वर्षों तक पाठकों को रूलाता जरूर रहा, लेकिन कहानी का यह शिल्प-कौशल उसमें भी नहीं है। इन सारी विशेषताओं के कारण इस कहानी का शीर्षक भी सर्वथा उपयुक्त है क्योंकि कहानी का सार इसके शीर्षक में खुशबू की तरह रचा-बसा है।
प्रश्न – 9 : ‘उसने कहा था’ कहानी के जिस पात्र ने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया है उसका चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न – 10 : ‘उसने कहा था’ के प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न – 11 : ‘उसने कहा था’ के लहना सिंह का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न – 12 : लहना सिंह का प्रेम आदर्श प्रेम है – के आधार पर उसका चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न – 13 : लहना सिंह का चरित्र-चित्रण अपने शब्दों में करें।
अथवा
प्रश्न – 14 : ‘उसने कहा था’ कहानी के आधार पर लहना सिंह का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर : लहना सिंह ‘उसने कहा था’ के प्रमुख पात्र होने के साथ-साथ इस कहानी का नायक भी है। कहानी के प्रारंभ से अंत तक उसकी उपस्थिति अत्यंत प्रभावशाली है – यही कारण है कि मैं लहना सिंह के चरित्र से सबसे ज्यादा प्रभावित हूँ। लहना सिंह आम प्रेम-कहानी के नायकों से बिल्कुल भिन्न है। भिन्न इस अर्थ में कि वह एकसाथ व्यक्तिगत प्रेम और कर्त्तव्य-प्रेम को बखूबी निभाता है। लहना सिंह के चरित्र की जितनी भी खूबियों को गिनाया जाय, कम है। फिर भी उसके चरित्र की कुछ खास विशेषताओं को हम इन शीर्षकों के अंतर्गत देख सकते हैं –
(क) चंचल व शरारती बालक : जब बारह वर्षीय लहना सिंह आठ वर्षीया लड़की से दुकान में मिलता है तो अनायास ही उसकी ओर आकर्षित हो जाता है। बाल-सुलभ चपलता से वह उसे यह कहकर – “तेरी कुड़माई हो गई ?” – छेड़ता है और लड़की ‘धत’ कहकर आँखें चढ़ाकर भाग जाती है। एक दिन जब वह जबाव में कहती है – “हाँ, हो गई।” – तब इसकी जो प्रतिक्रिया लहना सिंह पर होती है उससे यह पता चलता है कि वह मन ही मन चाहने लगा था – ‘लड़के ने घर की राहु ली। रास्ते में एक लड़के को मोरी में ढकेल दिया, एक छाबड़ी वाले की दिनभर की कमाई खोई, एक कुत्ते पर पत्थर मारा – किसी वैष्णवी से टकराकर अन्धे की उपाधि पाई, ……….।”
(ख) सच्चा सिख :- फौज में रहने तथा लड़ाई के मैदान में रहने पर भी लहना सिंह धर्म से विमुख नहीं होता। इस बात का पता फिरंगी मेम के प्रसंग से चलता है, जब वह कहता है – “आज तक मैं उसे समझा न सका कि सिख तम्बाकू नहीं पीते। वह सिगरेट पीने में हठ करती है, ओठों में लगाना चाहती है, और मैं पीछे हटता हूँ, तो समझती है कि राजा बुरा मान गया ………।”
(ग) वीर और कुशाग्र बुद्धि : लहना सिंह वीर है। वह युद्ध से छुटकारा नहीं चाहता बल्कि चाहता है कि बीच-बीच में मार्च करने का हुक्म मिलता रहे क्योंकि “बिना फेरे घोड़ा बिगड़ता है और बिना लड़े सिपाही।”
यह लहनासिंह की कुशाग्र बुद्धि का ही फल है कि वह नकली लपटन साहब को पहचान कर अपने साथी सैनिकों की जान बचाता है अन्यथा सब के सब मारे जाते।
(घ) मानवीय संवेदना से भरपूर : लहना सिंह कठोर सैनिक होने के साथ-साथ मानवीय संवेदना से भी भरपूर है। यही कारण है कि वह बुखार में तप रहे बोधा सिंह को अपनी जर्सी तक पहना देता है तथा उसके बदले पहरा भी देता है। इतना ही नहीं वह अपने घाव की परवाह न कर पहले बोधा सिंह को उपचार के लिए अस्पताल की गाड़ी में भेज देता है।
(ङ) आदर्श त्यागी प्रेमी : लहना सिंह न केवल आदर्श प्रेमी है बल्कि प्रेम के लिए वह अपने प्राणों तक को न्योछावर कर देता है। सूबेदारनी बचपन के प्रेम की याद दिलाते हुए उससे पति तथा पुत्र के प्राणों की रक्षा का जो वचन लेती है, वह उसे अपनी जान देकर चुकाता है –
“फ्रांस और बेलजियम – 68 वीं सूची – मैदान में घावों से मरा – नं. 77 सिख राईफल्स जमादार लहनासिंह।”
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि लहना सिंह ‘उसने कहा था’ का आदर्श चरित्र है। पूरी की पूरी कहानी उसके त्याग और प्रेम में बलिदान होने की कहानी है। लहना सिंह अपनी इन्हीं चारित्रिक विशेषताओं के कारण हिन्दी कहानी का अमर पात्र बन गया है।

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