UK Board 10th Class Social Science – (आपदा प्रबन्धन) – Chapter 2 सुनामी : जानलेवा समुद्री लहरे
UK Board 10th Class Social Science – (आपदा प्रबन्धन) – Chapter 2 सुनामी : जानलेवा समुद्री लहरे
UK Board Solutions for Class 10th Social Science – सामाजिक विज्ञान – (आपदा प्रबन्धन) – Chapter 2 सुनामी : जानलेवा समुद्री लहरे
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
• I. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1 – सुनामी क्या है?
उत्तर – ‘सुनामी’ जापानी मूल का शब्द है जो ‘सु’ तथा ‘नामी’ के संयोग से बना है। इसमें ‘सु’ का अर्थ बन्दरगाह तथा ‘नामी’ का अर्थ लहरें है । अत: समुद्री भूकम्प, ज्वालामुखी या भू-स्खलन के कारण उत्पन्न ऐसी लहरें जो सागर से बन्दरगाह या तट की ओर प्रवाहित होती हैं ‘सुनामी’ कहलाती हैं। ये अत्यन्त विनाशकारी लहरें होती हैं। इनके कारण समुद्री तटवर्ती भागों में कभी-कभी भारी विनाश का सामना करना पड़ता है।
प्रश्न 2 – सुनामी का जन्म किस प्रकार होता है?
उत्तर – वास्तव में, समुद्री लहरें उसी तरह उत्पन्न होती हैं, जैसे तालाब में कंकड़ फेंकने से गोलाकार लहरें किनारों की ओर बढ़ती हैं। मूल रूप से इन लहरों की उत्पत्ति में सागरीय जल का बड़े पैमाने पर विस्थापन ही प्रमुख कारण है । भूकम्प या भू-स्खलन के कारण जब कभी भी सागर की तलहटी में कोई बड़ा परिवर्तन आता है या हलचल होती है तो उसे स्थान देने के लिए उतना ही ज्यादा समुद्री जल अपने स्थान से हट जाता है ( विस्थापित हो जाता है) और लहरों के रूप में किनारों की ओर चला जाता है। यही जल ऊर्जा के कारण लहरों में परिवर्तित होकर सुनामी लहरें कहलाता है। अतः दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि समुद्री लहरें सागर में आए बदलाव को सन्तुलित करने का प्राकृतिक प्रयास मात्र हैं।
प्रश्न 3 – सुनामी के उत्पन्न होने के कारणों को समझाइए ।
उत्तर— सुनामी उत्पन्न होने के तीन कारण
सुनामी के उत्पन्न होने के तीन कारण महत्त्वपूर्ण हैं जो निम्नलिखित हैं—
- भूकम्प – जब समुद्रों में तीव्र शक्तिशाली भूकम्प आता है तो समुद्रों का जल तट की ओर प्रवाहित होने लगता है और विनाशकारी सुनामी लहरें उत्पन्न हो जाती हैं।
- ज्वालामुखी विस्फोट — समुद्रों या उनके तटवर्ती भाग पर यदि शक्तिशाली ज्वालामुखी का विस्फोट होता है तब समुद्र के जल में विनाशकारी सुनामी लहरें उत्पन्न हो जाती हैं।
- भू-स्खलन – जब भूकम्प या ज्वालामुखी विस्फोट के कारण समुद्रतटवर्ती चट्टानों में दरार उत्पन्न हो जाए और ये चट्टानें टूटकर समुद्र में गिरने लगें तो इस भू-स्खलन के कारण समुद्री लहरें सुनामी लहरों में बदल जाती हैं और संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
प्रश्न 4 – छिछले जल में समुद्री तरंगों के सम्पीडन का कारण क्या है?
उत्तर – जब छिछले जल में समुद्री भूकम्प उत्पन्न होता है तो समुद्र की आन्तरिक सतह पर हलचल के कारण समुद्री तरंगों में सम्पीडन का अनुभव किया जाता है। अत: छिछले जल में हलचल ही समुद्री तरंगों के सम्पीडन का मुख्य कारण है क्योंकि उथले सागर में सुनामी लहरों की रफ्तार कम हो जाती है।
प्रश्न 5 – सुनामी किस प्रकार विध्वंस करती है?
उत्तर— सुनामी समुद्रतटीय क्षेत्रों में विध्वंस के लिए विख्यात है। इनका दुष्प्रभाव लम्बे समय तक क्षेत्र विशेष को प्रभावित करता है । सुनामी प्रभावित क्षेत्रों में भवन, सड़कें, संचार साधन, परिवहन एवं अन्य आवश्यक सेवाएँ और संसाधन नष्ट हो जाते हैं। इन समुद्री लहरों द्वारा तटीय क्षेत्र पूरी तरह नष्ट हो जाता है क्योंकि इनकी विध्वंस शक्ति समुद्री तटों की ओर प्रवाह के समय बहुत अधिक हो जाती है। इसका प्रमुख कारण इन लहरों का समुद्री तट की ओर तेज गति से चलना और लगातार इनकी आवृत्ति बनी रहना है। तट के निकट आने पर इन लहरों की ऊँचाई 15 मीटर या अधिक हो जाती है। तेज गति से लहरें टकराने के कारण भौतिक संरचनाओं की क्षति होती है तथा तेज वेग से ही पानी के वापस लौटने के समय मानव, पशु या अन्य पदार्थ जल के साथ समुद्र में पहुँचकर नष्ट हो जाते हैं।
प्रश्न 6 – 26 दिसम्बर, 2004 ई० को आए भूकम्प का अभिकेन्द्र (Epicentre) कहाँ था और इसकी तीव्रता (Magnitude) कितनी थी? इनका उल्लेख करते हुए यह बताइए कि इसने किस प्रकार और कितनी तबाही की?
उत्तर – 26 दिसम्बर, 2004 ई० को आए भूकम्प का अभिकेन्द्र इण्डोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के निकट तट पर बताया जाता है। इस भूकम्प की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 9 मापी गई थी। एक अनुमान के अनुसार इस भूकम्प से उत्पन्न सुनामी लहरों की ऊर्जा हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 350 गुना ज्यादा मानी गई है। इस समुद्री भूकम्प से उठे सुनामी तूफान द्वारा 2 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई तथा हजारों करोड़ रुपये की सम्पत्ति नष्ट हो गई।
प्रश्न 7 – दिसम्बर 2004 ई० की सुनामी ने कितने देशों को प्रभावित किया? प्रत्येक विध्वंस का एक-एक कारण भी लिखिए।
उत्तर— भारत तथा उसके निकट समुद्रीद्वीपीय देश श्रीलंका, थाईलैण्ड, मलयेशिया, बंगलादेश, मालदीव, इण्डोनेशिया और म्यांमार सहित कई देशों में 26 दिसम्बर, 2004 को प्रलयकारी सुनामी ने करोड़ों रुपये की सम्पत्ति का विनाश कर लाखों लोगों को काल का ग्रास बनाया था। इस प्रलयकारी सुनामी की उत्पत्ति का मुख्य कारण सुमात्रा के पास सागर में आया भूकम्प था। रिएक्टर पैमाने पर इस भूकम्प की तीव्रता 9 मापी गई थी। इस भूकम्प से सुनामी लहरें ही उत्पन्न नहीं हुई बल्कि इससे आस-पास के भूगोल में भी परिवर्तन अंकित किया गया। समुद्र तटीय भागों भूकम्प के झटकों से समस्त भौतिक संरचनाएँ नष्ट हो गईं तथा सुनामी के कारण बन्दरगाह और सागर के निकट की समस्त बस्तियाँ तबाह हो गई थीं। में
प्रश्न 8 – दिसम्बर 2004 ई० की सुनामी से हुई जानमाल की क्षति का वर्णन कीजिए ।
उत्तर- 26 दिसम्बर, 2004 को भारत तथा दक्षिण पूर्व एशिया में शक्तिशाली भूकम्प के कारण जब समुद्र में सुनामी लहरें उत्पन्न हुईं तो इनसे 2 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी। एक सामान्य अनुमान के अनुसार इस आपदा से लगभग 9 देशों की समुद्रतटीय भाग में बसी जनसंख्या प्रभावित हुई तथा हजारों करोड़ रुपये की सम्पत्ति नष्ट हो गई। कुछ देशों में इस आपदा के कारण संचार, परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाएँ कई महीनों तक व्यवस्थित नहीं हो सकीं और मृत्यु से बचे व्यक्तियों को इस तबाही के कारण नया जीवन शुरू करने में बहुत समय लग गया। सुनामी प्रभावित इन क्षेत्रों में भवन, सड़कें व बन्दरगाह सहित अन्य संसाधन जो नष्ट हो गए हैं उनके पुनः निर्माण में अत्यधिक समय व धन व्यय हो रहा है।
प्रश्न 9 – दिसम्बर 2004 ई० की सुनामी से क्या शिक्षा मिली? इसका वर्णन कीजिए।
उत्तर- दिसम्बर 2004 ई० की सुनामी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि प्रकृति की शक्ति और विनाशलीला के सामने मनुष्य बेबस है। हम अभी इतने सक्षम नहीं हुए कि इस प्रकार की आपदा का पूर्वानुमान कर सकें फिर भी यदि हम प्रकृति की शक्ति को समझकर आवश्यक उपाय और आपदा न्यूनीकरण प्रबन्धन की नीतियों का पालन करें और इस प्रकार के आपदा सम्भावित क्षेत्रों में आवश्यक उपायों का उपयोग करें तो जो तबाही इस सुनामी के कारण हुई है उसे न्यूनतम अवश्य कर सकते हैं।
• II. प्रत्येक में अन्तर बताइए
1. धरती पर आए भूकम्प और अन्तः सागरीय भूकम्प ।
2. सुनामी और एक तरंग
3. धरती के प्लेटों का अपसरण और धँसाव
4. विध्वंसात्मक प्लेट सीमा और रचनात्मक प्लेट सीमा।
उत्तर-
1. धरती पर आए भूकम्प और अन्तःसागरीय भूकम्प
| क्र०सं० | धरती पर आए भूकम्प | अन्तः सागरीय भूकम्प |
| I. | इस भूकम्प का प्रभाव धरातल पर प्रकट होता है। | अन्तः सागरीय भूकम्प महासागरों एवं समुद्रतटीय भागों में प्रकट होता है। |
| II. | धरती पर आए भूकम्पों के प्रभाव से मानव बस्तियों वाले क्षेत्रों में भौतिक संरचनाएँ सीमित रूप से प्रभावित होती हैं क्योंकि इस भूकम्प का प्रभाव केवल निकटवर्ती क्षेत्रों में ही अधिक होता है। | अन्तः सागरीय भूकम्प बहुत अधिक विनाशकारी होता है क्योंकि इस प्रकार के भूकम्प से सागरों में सुनामी तूफान उत्पन्न होता है जो सागर तटीय क्षेत्रों की ओर प्रभावित होकर मानव बस्तियों को क्षतिग्रस्त कर देता है। यह भूकम्प अपने सुनामी तूफान से वृहत् क्षेत्रों को प्रभावित करता है। |
| III. | धरती के भूकम्प रचनात्मक एवं विनाशत्मक दोनों प्रकार का प्रभाव उत्पन्न करता है। | अन्त: सागरीय भूकम्पों का प्रभाव विनाशात्मक अधिक एवं रचनात्मक प्रभाव अपेक्षाकृत होता है। |
2. सुनामी और एक तरंग में अन्तर
सागरों में सुनामी की उत्पत्ति अन्तः सागरीय भूकम्प, ज्वालामुखी विस्फोट एवं जलीय भू-स्खलन के कारण होती है। जबकि तरंग सागरीय जल में वायु के कारण नियमित रूप से उत्पन्न होती है। तरंगें बाह्य हलचलों का परिणाम हैं परन्तु सुनामी मुख्यतः पृथ्वी की आन्तरिक हलचलों से उत्पन्न होती है। वास्तव में सुनामी एक आपदा है जबकि तरंग आपदा नहीं है क्योंकि सुनामी में विशाल ऊर्जा होती है किन्तु तरंग में विशाल ऊर्जा नहीं होती है।
3. धरती की प्लेटों का अपसरण और धँसाव में अन्तर
धरती अर्थात् हमारी पृथ्वी विभिन्न भू- प्लेटों का समूह है इस पर भू- प्लेटों का अपसरण अर्थात् उठाव से ऊर्ध्वामुखी हलचलें उत्पन्न होती रहती हैं। पर्वतों में उभार इसी का परिणाम है किन्तु धँसाव से पृथ्वी में अधोगति प्रक्रिया सक्रिय होती है जिससे विशाल गर्तों का निर्माण होता है।
4. विध्वंसात्मक प्लेट सीमा और रचनात्मक प्लेट सीमा में अन्तर
विध्वंसात्मक प्लेट सीमा – जब एक भारी घनत्व वाली प्लेट तथा दूसरी हल्के घनत्व वाली प्लेट एक दूसरे की ओर हुई गति से परस्पर टकरा जाती है तब भारी घनत्व वाली प्लेट का हल्के घनत्व वाली प्लेट के नीचे क्षेपण हो जाती है। इससे धरातल पर स्थलाकृतियों का विनाश होता है। प्लेट के किनारों का ह्रास होता है (चित्र 21-अ)
रचनात्मक प्लेट सीमा – विपरीत दिशाओं में गति करने वाली दो प्लेट के मध्य पृथ्वी के अन्तराल का तप्त तथा तरल मैग्मा ऊपरी भाग में नई परत का निर्माण जिन किनारों के सहारे करता है उन्हें रचनात्मक प्लेट कहा है। इन प्लेटों से धरातल का निर्माण होता है विनाश नहीं (चित्र 2-1–ब)।

