UK Board 10th Class English – (Supplementary Reading) – Chapter 9 Bholi
UK Board 10th Class English – (Supplementary Reading) – Chapter 9 Bholi
UK Board Solutions for Class 10th English – (Supplementary Reading) – Chapter 9 Bholi
Read and Find Out – 1
(पढ़ो और ढूँढो)
Q.1. Why is Bholi’s father worried about her ?
(भोली के पिता उसके लिए क्यों चिन्तित हैं ? )
Ans. Ramlal was worried about Bholi because she had neither ‘ good looks nor intelligence. All the children except Bholi were healthy and strong. His daughters were good looking, healthy girls. It was not difficult to find bridegrooms for them.
(रामलाल भोली के बारे में चिन्तित था क्योंकि न तो वह सुन्दर थी और न ही वह बुद्धिमान थी । भोली के सिवाय सभी बच्चे स्वस्थ और मजबूत थे। उसकी पुत्रियाँ सुन्दर और स्वस्थ लड़कियाँ थीं। उनके लिए दूल्हे ढूँढने कठिन नहीं था । )
Q. 2. For what unusual reasons is Bholi sent to school?
(किस असामान्य कारण से भोली स्कूल भेजी गई ? )
Ans. The Tehsildar came to Ramlal’s village to perform the opening ceremony of a primary school for girls. He told Ramlal that as a government representative in the village he must set an example to the villagers and send his daughters to school.
(तहसीलदार रामलाल के गाँव में लड़कियों के प्राइमरी स्कूल का उद्घाटन करने आया था। उसने रामलाल से कहा कि सरकार के प्रतिनिधि के रूप में उसे गाँव वालों के सामने उदाहरण बनना चाहिए और अपनी लड़कियों को स्कूल पढ़ने भेजना चाहिए । )
Read and Find Out – 2
(पढ़ो और ढूँढो)
Q.1. Does Bholi enjoy her first day at school ?
(क्या भोली ने अपना पहला दिन स्कूल में आनन्द से व्यतीत किया ? )
Ans. Bholi enjoyed her first day in school. She was glad to find so many girls of her own age present there. She hoped that one of these girls might become her friend. The colours of the pictures on the wall made her happy on this very day.
(भोली ने स्कूल में पहले दिन आनंद लिया। वह यह देखकर प्रसन्न थी कि वहाँ बहुत-सी लड़कियाँ, जो उसके आयुवर्ग की थीं उपस्थित हैं। उसे आशा थी कि उन लड़कियों में से कोई एक उसकी सहेली बन सकती है। दीवारों पर चित्रों के रंगों ने पहले ही दिन भोली को आकर्षित किया। इससे वह प्रसन्न हुई । )
Q. 2. Does she find her teacher different from the people at home?
(क्या उसने अपनी अध्यापिका को घर के लोगों से अलग प्रकार का पाया?)
Ans. All the family members at home despised and ignored Bholi. But her teacher spoke with Bholi .in a soothing and affectionate voice. She encouraged her lovingly. Thus Bholi found her teacher different from the people at home.
(घर पर परिवार के सभी सदस्य भोली की उपेक्षा करते थे, कोई उसकी ओर ध्यान नहीं देता था। पर उसकी शिक्षिका भोली से सांत्वना देने वाली और स्नेहयुक्त आवाज से बोली। उसने भोली को प्यार से उत्साहित किया। इस प्रकार भोली को अपनी शिक्षिका घर के लोगों से भिन्न लगी।)
Read and Find Out – 3
(पढ़ो और ढूँढो)
Q.1. Why do Bholi’s parents accept Bishamber’s marriage proposal?
(भोली के माता-पिता ने विशम्भर का विवाह प्रस्ताव क्यों स्वीकार कर लिया?)
Ans. Bholi’s parents accepted Bishamber’s marriage proposal because he was a well-to-do bridegroom. He owned a big shop, a house of his own and had a good amount of money in the bank. Moreover, he was not demanding any dowry.
(भोली के माता-पिता ने विशम्बर का विवाह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया क्योंकि वह धनाढ्य दूल्हा था। उसकी बड़ी दुकान थी, उसका अपना मकान था और बैंक में उसके खाते में मोटी रकम थी। इसके अतिरिक्त, वह दहेज की माँग नहीं कर रहा था। )
Q.2. Why does the marriage not take place ?
(विवाह क्यों नहीं हो पाया? )
Ans. Bishamber was an old widower. He was about fifty. He wanted a dowry of Rs. 5,000 for marrying Bholi who had pock-marks on her face. So Bholi looked at him with cold contempt and refused to get married to him.
(विशम्बर एक वृद्ध विधुर था। उसकी आयु लगभग 50 वर्ष थी। उसने भोली, जिसके चेहरे पर चेचक के दाग थे, से शादी करने के लिए उसके पिता से पाँच हजार रुपये दहेज में माँगे । अतः भोली ने उसकी ओर निष्ठुर घृणा से देखा और उससे शादी करने से मना कर दिया।)
SUMMARY OF THE LESSON
From her very childhood Bholi was a little slow. She had small pox marks on her face and she stammered. She was the seventh and the youngest child of Numberdar Ramlal.
When Bholi was seven years old, a primary school was opened in their village. Bholi was sent to school. Her teacher took special interest in Bholi. She could speak without least stammer. Bholi took interest in her study.
The years passed. The village became a small town. The little primary school became a high school. Other developments took place in the village.
One night, after dinner, Ramlal asked his wife if he should accept Bishamher’s proposal for marriage with Bholi. Bishamber was a rich grocer who lived in other village. But he was as old as Ramlal and he linked. She stressed that he should definitely accept the proposal.
Bishamber Nath came with a big marriage party with pomp and show. Ramlal was overjoyed to see such pomp and splendour.
When the auspicious moment came the priest said, “Bring in bride”. Bholi, did in red silken bridal dress, was led to the bride’s place near the sacred fire. When the bridegroom was about to garland the bride, a woman slipped back the silkenveil from the bride’s face. Bishamber took a quick glance. He saw the small pox mark on the face of the bride. He said if he was to marry her, her father must given him five thousand rupees. Ramlal gave him the money for his honour.
Then Bishamber was again to garland the bride. The bride unveiled her face and her hand struck out like a streak of lightning and the garland was flung into to sacred fire.
She asked her father in a clear loud voice, “Pitaji, take back your money. I will not merry this man who is mean, greedy and contemptible.” The orthodox people reacted in their usual manner, saying that. Bholi was shawless, though they thought her like a dumb driven con.
Bishamber Nath started to go back with his party. Ramlal was thunderstruck. Every one had left the place. Ramlal turned to Bholi and said, “But what about you, no one will ever marry you now ? What shall we do with you ?”
Bholi said in a calm and steady voice, “Don’t worry, Pitaji! In your old age, I will serve you and Mother I will teach in the same school where I learned so much.”
सम्पूर्ण पाठ का हिन्दी रूपान्तर
भोली
| बचपन शुरू से ही भोली थोड़ी सुस्त थी । उसके चेहरे पर चेचक के दाग थे और वह हकलाती थी। उसकी शिक्षिका ने उसमें विशेष रुचि क्यों ली? क्या भोली अपनी शिक्षिका की उम्मीद के अनुरूप थी? |
उसका नाम सुलेखा था, पर उसके बचपन से ही हरेक उसको भोली, मूर्ख कहता रहा था।
वह नंबरदार रामलाल की चौथी पुत्री थी। जब वह दस माह की थी, वह सिर के बल चारपाई से गिर गई थी और शायद इससे उसके मस्तिष्क का कोई भाग क्षतिग्रस्त हो गया हो। यह कारण था कि वह मन्दबुद्धि बच्ची रही और वह भोली, मूर्ख के रूप में जानी गई।
पैदा होने के समय वह सुन्दर और आकर्षक थी। पर जब वह दो वर्ष की थी, उसके ऊपर चेचक का प्रहार हुआ, केवल उसकी आँखें बचीं, पर पूरे शरीर पर चेचक के गहरे काले दाग स्थायी रूप से बन गए। नन्हीं सुलेखा पाँच वर्ष की होने पर बोल सकी, और जब बहुत बाद में उसने बोलना सीखा, वह हकलाती थी। दूसरे बच्चे प्रायः उसका मज़ाक बनाते थे और उसकी नकल करते थे, परिणामस्वरूप वह बहुत कम बोलती थी।
रामलाल के सात बच्चे थे— तीन पुत्र और चार पुत्रियाँ और उनमें सबसे छोटी भोली थी। वह सम्पन्न कृषक परिवार था और वहाँ खाने-पीने की कोई कमी नहीं थी। भोली के सिवाय सभी बच्चे स्वस्थ और तन्दुरुस्त थे। पुत्रों को पढ़ने के लिए नगर में भेज दिया गया था, वे पहले स्कूल में पढ़ें और बाद में कॉलेज में। लड़कियों में, राधा सबसे बड़ी थी और उसकी पहले ही शादी हो चुकी थी। दूसरी पुत्री मंगला की शादी तय हो चुकी थी और जब वह शादी हो चुकेगी, तब रामलाल तीसरी पुत्री चम्पा के विषय में सोचेगा। वे लड़कियाँ देखने में सुन्दर थीं और स्वस्थ थीं और उनके लिए दूल्हे ढूँढना कठिन नहीं था ।
पर रामलाल भोली के बारे में चिन्तित था। न तो उसका रंगरूप अच्छा था और न ही उसमें बुद्धि थी।
जब मंगला की शादी हुई, भोली सात वर्ष की थी। उसी वर्ष उनके गाँव में लड़कियों का प्राइमरी स्कूल खुला था। उसका उद्घाटन करने के लिए तहसीलदार साहब आए थे। उसने रामलाल से कहा, “नंबरदार होने के नाते, तुम गाँव में सरकार के प्रतिनिधि हो । अतः तुमको गाँव के लोगों के सामने एक उदाहरण पेश करना है । तुम्हें अपनी पुत्रियों को स्कूल भेजना चाहिए।”
उस रात जब समलाल ने अपनी पत्नी से परामर्श किया, वह चिल्लाई, “क्या तुम पागल हो? यदि लड़कियाँ स्कूल जाएँगी तो उनसे कौन शादी करेगा?”
पर रामलाल में इतना साहस नहीं था कि वह तहसीलदार की बात की अवहेलना करे । अन्त में उसकी पत्नी ने कहा, “मैं तुम्हें बताऊँगी कि • क्या करना है। भोली को स्कूल भेजो। वर्तमान स्थिति में, उसकी शादी का कोई अवसर नहीं क्योंकि वह कुरूप और मूर्ख है। स्कूल के शिक्षकों को उसके बारे में चिन्ता करने दो।”
अगले दिन रामलाल ने भोली का हाथ पकड़ा और कहा, “मेरे साथ आओ। मैं तुम्हें स्कूल ले चलूँगा।” भोली भयभीत हो गई। वह नहीं जानती थी कि स्कूल कैसा होता है।
उसे याद आया कि कुछ दिन पूर्व उनकी गाय, लक्ष्मी को घर से बाहर निकाल दिया गया था और बेच दिया गया था।
वह आतंकित होकर चिल्लाई, “न…..न न…..नो नो…..नो,” और उसने अपने पिता की पकड़ से अपना हाथ छुड़ा लिया।
रामलाल चिल्लाया, “तुम्हें क्या हो गया, तुम मूर्ख हो? मैं तुम्हें केवल स्कूल ले जा रहा हूँ।” तब उसने अपनी पत्नी से कहा, “आज उसे अच्छे कपड़े पहनने दो, यदि ऐसा नहीं होगा, शिक्षक और स्कूल की अन्य लड़कियाँ जब उसको देखेंगी तो वे हमारे बारे में क्या सोचेंगे?”
भोली के लिए नए वस्त्र कभी बनाए ही नहीं गए थे। उसकी बहनों के पुराने कपड़े उसको दे दिए जाते थे। उसके कपड़ों की मरम्मत करने या धोने की कोई चिन्ता नहीं करता था। पर आज वह सौभाग्यशाली थी कि उसे स्वच्छ वस्त्र प्राप्त हुए जो कई बार धोने के बाद सिकुड़ गए थे और उलझे हुए बालों तेल लगाया गया। तब केवल उसे विश्वास होने लगा कि उसको घर की अपेक्षा कहीं अच्छी जगह ले जाया जा रहा है।
जब वे स्कूल पहुँचे, बच्चे पहले ही अपनी कक्षाओं में थे। रामलाल ने अपनी पुत्री को प्रधानाध्यापिका के हवाले किया। वह अकेली रह गई, बेचारी लड़की ने भय से बोझिल आँखों से अपने चारों ओर देखा। बहुत से कमरे थे और प्रत्येक कमरे में उस जैसी लड़कियाँ चटाइयों पर पालथी मारे बैठी थीं, किताबें पढ़ रही थीं या स्लेटों पर लिख रही थीं। प्रधानाध्यापिका ने भोली से कहा कि तुम किसी कमरे के कोने में बैठ जाओ ।
भोली नहीं जानती थी कि वास्तव में स्कूल कैसा होता है और वहाँ क्या होता है, पर उसे यह देखकर प्रसन्नता हुई कि लगभग उसकी आयु की बहुत-सी लड़कियाँ वहाँ उपस्थित थीं।
उसे आशा थी कि इन लड़कियों में से कोई उसकी मित्र बन सकती है। शिक्षिका कक्षा में लड़कियों को कुछ कह रही थी पर भोली कुछ नहीं समझ सकी। वह दीवार पर चित्रों की ओर देखती थी। रंग उसको आकर्षित करते थे – घोड़ा भूरा था। ठीक उस घोड़े के समान जिस पर तहसीलदार उनके गाँव का निरीक्षण करने आए थे; बकरी काली थी, वह उनके पड़ोसियों की बकरी के समान थी, तोता हरा था, वह उन तोतों के समान था जो उसने आम के बाग में देखे थे; और गाय ठीक वैसी ही थी जैसी उनकी लक्ष्मी। अकस्मात भोली ने देखा कि शिक्षिका उसके पास खड़ी है और उसकी ओर मुस्करा रही है।
“छोटी बच्ची, तुम्हारा क्या नाम है?”
“भ- भो भो ।” वह इसके आगे हकला नहीं सकी।
तब वह चिल्लाने लगी और उसकी आँखों से असहाय बाढ़ के रूप में आँसू बहने लग। जैसे ही वह अपने कोने में बैठी, उसने अपना सिर नीचे ही किए रखा, वह लड़कियों की ओर ऊपर देखने का साहस नहीं कर सकी, वह जानती थी कि वे लड़कियाँ उसका अब भी मजाक बना रही हैं।
जब स्कूल की छुट्टी की घंटी बजी, सभी लड़कियाँ कमरों से तेज़ी से बाहर दौड़ीं, पर भोली ने अपना कोना छोड़ने का साहस नहीं किया। उसका सिर नीचे लटका हुआ था और वह सिसक रही थी ।
“भोली ।”
शिक्षिका की आवाज़ मुलायम तथा शान्ति प्रदान करने वाली थी। पूरे. जीवन में भोली को इस प्रकार कभी नहीं पुकारा गया। इसने उसका हृदय स्पर्श किया।
शिक्षिका ने कहा, “उठ आओ।” यह आदेश नहीं था, पर यह केवल मैत्रीपूर्ण सुझाव था। भोली उठ गई ।
“अब तुम मुझे अपना नाम बताओ।”
भोली के शरीर से पसीना फूट पड़ा। क्या उसकी हकलाने वाली जीभ पुनः उसका अपमान करेगी? फिर भी, उस दयालु स्त्री के लिए उसने प्रयास करने का निश्चय किया। उसकी आवाज़ ऐसी शान्तिप्रद थी कि वह भोली का मज़ाक नहीं बनाएगी । ·
भोली ने हकलाना शुरू किया, “भ-भ- भो-भो । “
शिक्षिका ने भोली को उत्साहित किया, “शाबाश, शाबाश अब पूरा नाम बोलो।”
“भ-भ- भो – भोली । ” अन्त में वह यह कहने में सफल रही और उसे राहत का अनुभव हुआ जैसे कि वह महान उपलब्धि थी।
“शाबाश । ” शिक्षिका ने स्नेहपूर्वक भोली की पीठ थपथपाई और कहा, “अपने हृदय से डर निकाल दो और तुम किसी भी अन्य व्यक्ति के समान बोल सकोगी।”
भोली ने ऊपर की ओर देखा जैसे कि वह पूछना चाहती थी, ” वास्तव में?”
“हाँ, हाँ, वह बहुत आसान होगा। बस तुम केवल स्कूल प्रतिदिन आओ। क्या तुम आओगी?”
भोली ने स्वीकारात्मकं गर्दन हिलाई ।
“नहीं, इसको जोर से कहो। “
“हाँ।” और भोली को स्वयं आश्चर्य हुआ कि वह उसको कह संकी।
“क्या मैंने तुम्हें नहीं कहा था? अब यह पुस्तक लो।”
पुस्तक में सुन्दर चित्र थे और चित्र रंगीन थे – कुत्ता, बिल्ली, बकरी, घोड़ा, तोता, बाघ और एक गाय जो लक्ष्मी जैसी थी। और प्रत्येक चित्र के साथ एक शब्द था जो बड़े काले अक्षरों था।
“एक माह में तुम इस पुस्तक को पढ़ लोगी। तब मैं तुम्हें इससे बड़ी पुस्तक दूँगी। तब और बड़ी पुस्तक दूँगी। कुछ समय में तुम गाँव के किसी भी व्यक्ति की अपेक्षा अधिक विद्वान् हो जाओगी। तब कोई भी तुम्हारा मज़ाक नहीं उड़ा सकेगा। लोग आदर के साथ तुम्हारी बात सुनेंगे और तुम बिना किसी ज़रा सी हकलाहट के बोल सकोगी। समझे? अब घर जाओ, और कल सुबह जल्दी वापस आना । “
भोली को अनुभव हुआ जैसे कि गाँव के मन्दिर की सब घंटियाँ बज रही हैं और स्कूल के भवन के सामने वृक्षों पर बड़े-बड़े लाल फूल खिल आए हैं। उसका हृदय नई आशा और नए जीवन के साथ धड़क रहा था।
इस प्रकार वर्ष बीतते गए।
गाँव एक छोटा-सा कस्बा बन गया। छोटा प्राइमरी स्कूल हाईस्कूल बन गया। अब टिनशेड में एक सिनेमा भी बन गया था और कपास ओटने वाली एक मशीन भी लग गई थी। उनके रेलवे स्टेशन पर डाकगाड़ी भी रुकने लगी थी।
एक रात, भोजन के बाद, रामलाल ने अपनी पत्नी से कहा, “तब, क्या मैं विशम्बर का प्रस्ताव स्वीकार कर लूँ?”
उसकी पत्नी ने कहा, “हाँ, मिश्चित रूप से। भोली भाग्यशाली होगी कि उसे ऐसा धनी दूल्हा मिलेगा। बड़ी दुकान, उसका अपना मकान और मैंने सुना है कि बैंक में उसके कई हज़ार रुपये जमा हैं। इसके अतिरिक्त वह कोई दहेज भी नहीं माँग रहा है। “
“यह तो ठीक है, पर वह इतना जवान नहीं है, तुमको ज्ञात होगा कि वह मेरी आयु का है – और वह लंगड़ाता भी है। इसके अतिरिक्त, उसकी पहली पत्नी से हुए बच्चे बिलकुल नौजवान हो गए हैं। “
उसकी पत्नी ने उत्तर दिया, “तो इससे क्या फर्क पड़ता है? पैंतालीस या पचास — आदमी के लिए कोई ज्यादा आयु नहीं है। हम भाग्यशाली हैं कि वह दूसरे गाँव में रहता है और वह भोली के चेचक के दागों और उसकी बुद्धिहीनता के बारे में नहीं जानता है। यदि हम इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते, भोली सारे जीवन अविवाहित रह सकती है। “
“हाँ, पर मुझे आश्चर्य है कि भोली क्या कहेंगी।”
“वह बुद्धिहीन क्या कहेगी? वह मूक गाय के समान है। “
रामलाल बड़बड़ाया, “हो सकता है तुम सही हो । “
आँगन के दूसरे कोने में, भोली अपनी चरपाई पर जागी हुई लेटी थी, वह अपने माता-पिता की फुसफुसाहट सुन रही थी ।
विशम्बर नाथ एक धनी पंसारी था। वह विवाह के लिए अपने साथ मित्रों और रिश्तेदारों की एक बड़ी पार्टी लाया। दूल्हा एक सुसज्जित घोड़े पर सवार था, बरात जुलूस के आगे-आगे पीतली बैण्ड एक भारतीय फिल्म का लोकप्रिय गाना गाते हुए चल रहा था। रामलाल ऐसी शान-शौकत देखकर अत्यधिक प्रसन्न था। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी चौथी पुत्री की ऐसी शानदार शादी होगी । भोली की बड़ी बहनें जो उस अवसर पर आई हुई थीं भोली के भाग्य से ईर्ष्या कर रही थीं ।
जब शुभ मुहूर्त आया पुरोहित ने कहा, “दुल्हन को लाओ।”
दुल्हन की लाल वेशभूषा पहने, भोली को पवित्र अग्नि के निकट लाया गया।
विशम्बर नाथ के एक मित्र ने उसे उत्साहित किया, “दुल्हन को माला पहनाओ।”
दूल्हे ने पीले गेंदे की माला उठाई। एक स्त्री ने दुल्हन के चेहरे से रेशमी घूँघट पीछे सरका दिया। विशम्बर ने पैनी दृष्टि से देखा । माला उसके हाथों में ही टंगी रही। दुल्हन ने धीरे से अपने चेहरे पर घूँघट कर लिया।
विशम्बर ने अपने पास खड़े मित्र से कहा, “क्या तुमने उसको देखा है ? उसके चेहरे पर चेचक के दाग हैं। “
“तो क्या हुआ ? तुम भी तो जवान नहीं हो।”
“हो सकता है। पर यदि मैं उससे शादी करता हूँ, उसके पिता को मुझे पाँच हजार रुपये देने होंगे।”
रामलाल आगे आया और उसने अपनी पगड़ी—अपनी इज्जत – विशम्बर के पैरों पर रखी, “इस प्रकार मेरा अपमान न करो। दो हज़ार रुपये ले लो।”
“नहीं, पाँच हज़ार, वरना हम वापस जाते हैं। अपनी लड़की को संभालो ।”
” कृपया कुछ तो विचारशील बनो। यदि आप वापस जाते हो, मैं कभी भी गाँव में अपना चेहरा दिखाने लायक नहीं रहूँगा । “
“तब पाँच हजार दो।”
उसके चेहरे पर अश्रुधारा बह रही थी, रामलाल घर में गया, अपनी तिजोरी खोली और नोटों की गिनती की। उसने नोटों का बंडल दूल्हे के पैरों में रख दिया।
विशम्बर के लालची चेहरे पर विजय की मुस्कान प्रकट हुई। उसने जुआ खेला और उसकी जीत हुई। उसने कहा, “मुझे माला दो।”
एक बार पुनः दुल्हन के चेहरे से घूँघट पीछे सरका, पर इस समय उसकी आँखें नीचे झुकी हुई नहीं थीं। वह ऊपर की ओर देख रही थी, वह अपने होने वाले पति की ओर सीधी दृष्टि से देख रही थी और भोली की आँखों में न तो क्रोध था और न ही घृणा थी, केवल यह भावना थी कि वह व्यक्ति मूल्यहीन है।
विशम्बर ने दुल्हन के गले में माला डालने के लिए माला को ऊपर उठाया, पर इससे पहले वह माला डाल पाता, भोली का हाथ तड़ित की कौंध के समान तेज गति से आगे बढ़ा और माला आग में गिर गई। वह उठी और उसने आवरण दूर फेंक दिया।
“पिता जी!” भोली ने स्पष्ट ऊँची आवाज में कहा, और उसके पिता, माता, बहनें, भाई, रिश्तेदार और पड़ोसी उसको तनिक सी हकलाहट के बिना बोलते हुए सुनकर चौंक गए।
“पिता जी, अपना पैसा वापस लो। मैं इस आदमी से शादी नहीं करूँगी।”
रामलाल तड़ित का मारा सा रह गया। मेहमान कानाफूसी करने लगे, “इतनी बेशर्म ! इतनी बदसूरत और इतनी बेशर्म !”
रामलाल चिल्लाया, “भोली, क्या तुम पागल हो? तुम अपने परिवार का अपमान करना चाहती हो? क्या तुम्हारे मन में हमारी इज्जत का कोई विचार नहीं है। “
भोली ने कहा, “आपकी इज्जत के लिए मैं इस लंगड़े बूढ़े आदमी से शादी करने के लिए तैयार हूँ । पर मैं ऐसे नीच, लालची और मूल्यहीन कायर को अपना पति नहीं बनाऊँगी।” मैं उसे पति नहीं बनाऊँगी, नहीं बनाऊँगी, नहीं बनाऊँगी।”
“कितनी बेशर्म लड़की है! हम सब सोचते थे कि वह हानि न पहुँचाने वाली गूँगी गाय है । “
भोली उस वृद्ध स्त्री की ओर क्रोध से मुड़ी, “हाँ, चाची, आप सही हैं। आप सब सोचते हैं कि मैं गूँगी गाय हूँ जिसको कहीं भी हाँककर ले जाया जा सकता है। यही कारण है कि तुम मुझे इस हृदयहीन प्राणी के सुपुर्द | करना चाहते थे। पर अब मूक गाय, हकलाने वाली मूर्ख, बोल रही है। क्या तुम कुछ और सुनना चाहती हो?”
विशम्बर नाथ पंसारी, ने अपनी बरात के साथ वापस जाना शुरू कर दिया। दुविधा में पड़े बैंड बाजे वालों ने सोचा कि यह विवाह का अन्त है. और उन्होंने समाप्ति करने वाला गाना बजाया ।
रामलाल जमीन में गड़ा हुआ खड़ा रहा, उसका सिर दुःख और शर्म के भार से झुका हुआ था।
पवित्र अग्नि की लपटें बुझ चुकी थीं। हर व्यक्ति चला गया था। रामलाल भोली की ओर मुड़ा और कहा, “पर तुम्हारा क्या होगा, अब कोई भी तुमसे शादी नहीं करेगा। हम तुम्हारा क्या करेंगे?’
और सुलेखा ने शान्त और स्थिर आवाज़ में कहा, “चिन्ता न करो, पिता जी। आपकी वृद्धावस्था में मैं आपकी और माँ की सेवा करूंगी। मैं उसी स्कूल में पढ़ाऊँगी जहाँ मैंने इतना सारा सीखा है। मैडम, क्या यह सही नहीं है।”
शिक्षिका शुरू से ही एक कोने में खड़ी नाटक देख रही थी। उसने उत्तर दिया, “हाँ, भोली, वास्तव में तुम ठीक कहती हो।” और उसकी मुस्कान भरी आँखों में गहरे सन्तोष का प्रकाश था जो एक कलाकार अनुभव करता है जब वह अपनी सर्वश्रेष्ठ कृति के समापन का अवलोकन करता है।
– के० ए० अब्बास
Think about it
(इस बारे में सोचिए)
Q. 1. Bholi hau many apprehensions about going to school. What made her feel that she was going to a better place than her home?
(भोली को स्कूल जाने के बारे में अनेक आशंकाएँ थीं। फिर भी भोली को क्यों अनुभव हुआ कि वह अपने घर से अधिक अच्छे स्थान पर जा रही है? )
Ans. Bholi did not know what a school was like. She remembered how their old cow had been turned out of the house and sold. Therefore she was frightened and was reluctant to go to school with her father. .
She felt that she was going to a better place. Bholi get a clean dress to wear. It was unusual event for her. She was bathed. Oil was rubbed into her dry hair. These things were new to her, These things made her feel that she was going to a better place than her house.
(भोली नहीं जानती थी कि स्कूल क्या है। उसे याद है कि कैसे उसकी पुरानी गाय को घर से बाहर निकाल दिया गया था और बेच दिया गया था। अत: वह डरी हुई थी और अपने पिता के साथ स्कूल जाने की अनिच्छुक थी ।
वह अनुभव करती थी कि वह अच्छे स्थान पर जा रही है। भोली को पहनने को साफ कपड़े मिले। यह उसके लिए एक असामान्य घटना थी। उसे नहलाया गया। उसके सूखे बालों में तेल लगाया गया। यह सब चीजें उसके लिए नई थीं। इन चीजों ने उसे यह अनुभव कराया कि वह अपने घर से अच्छे स्थान पर जा रही है। )
Q.2. How did Bholi’s teacher play an important role in changing the course of her life?
(उसके जीवन का मार्ग बदलने में भोली की अध्यापिका ने कैसी भूमिका निभाई ? )
Ans. This is aptly proved in the story of Bholi who gets a completely new personality and identity all because of the sincere and genuine efforts of her teacher. Her teacher’s loving words touched the innocent heart of Bholi. They instilled in her the confidence to come up to her teacher’s expectations because she did not want to let down such a kind goddess.
Her teacher plays a very pivotal role in her life to give her the courage to stand up for her own self respect and fight for her own right which her always been denied by man.
(यह तथ्य भोली की कहानी में सिद्ध हो जाता है। भोली पूरी तरह से नया व्यक्तित्व और पहचान प्राप्त करती है। इसका एक मात्र कारण उसकी शिक्षिका का गम्भीर और वास्तविक प्रयास है। उसकी शिक्षिका के स्नेहयुक्त शब्दों ने भोली के भोले-भाले हृदय को स्पर्श किया। उन शब्दों ने भोली में आत्म-विश्वास पैदा किया कि वह अपनी शिक्षिका की उम्मीद के अनुकूल ऊपर उठी क्योंकि भोली नहीं चाहती थी कि वह एक दयावान देवी का तिरस्कार करे ।
उसकी शिक्षिका ने भोली के जीवन में निर्णायक भूमिका का निर्वाह किया। उसने उसको साहस दिया ताकि वह अपने आत्म-सम्मान के लिए संघर्ष करे और अपने अधिकार के लिए लड़े जिसको पुरुष सदैव उसको स्वीकार करने से मना करता आया है। )
Q. 3. Why did Bholi at first agree to an unequal match ? Why did she later reject the marriage? What does this tell us about her?
(पहले भोली अनमेल विवाह के लिए क्यों तैयार हो गई? बाद में उसने विवाह से क्यों इनकार कर दिया? यह हमें उसके बारे में क्या दर्शाता है ? )
Ans. First Bholi accepted Bishamber’s marriage proposal because he was a well-to-do bridegroom. He owned a big shop, a house of his own and had a good amount of money in the bank. Moreover, he was not demanding any dowry. Bholi was also a well behaved and obedient daughter of her parents. So she agreed to an unequal match for the sake of her parents.
But when Bholi’s husband saw the pock-marks on her face than demanded five thousand rupees as dowry from her father! Bholi refused to have such a mean, greedy and contemptible man as her husband.
We came to this conclusion that she is not a dumb-driven cow.
( पहले भोली ने विशम्बर का विवाह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया क्योंकि वह धनाढ्य दूल्हा था। उसकी बड़ी दुकान थी, उसका अपना मकान था और बैंक में उसके खाते में मोटी रकम थी। इसके अतिरिक्त, वह दहेज की माँग नहीं कर रहा था। इसके अतिरिक्त भोली एक व्यवहार कुशल और अपने माता-पिता की आज्ञाकारी पुत्री थी। इसलिए पहले वह अपने माता-पिता के लिए अनमेल विवाह को तैयार हो गई थी।
लेकिन जब भोली के पति ने उसके चेहरे पर चेचक के दाग देखे तब उसने उसके पिता से पाँच हजार रुपये दहेज में माँगे। भोली ने ऐसे नीच, लालची और घृणित व्यक्ति को अपना पति चुनने से मना कर दिया ।
हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि वह मूक गाय नहीं है।)
Q. 4. Bholi’s real name is Sulekha. We are told this right at the beginning. But only in the last but one paragraph of the story is Bholi called Sulekha again. Why do you think she is called Sulekha at that point in the story?
(भोली का वास्तविक नाम सुलेखा है। हमें यह आरम्भ में बताया गया है। किन्तु कहानी के अन्त में भोली को पुनः सुलेखा नाम से सम्बोधित किया गया है। आप क्यों सोचते हैं कि कहानी के उस मोड़ पर उसे सुलेखा कहकर क्यों पुकारा गया है ? )
Ans. At the end of the story Bholi is called Sulekha, because now she is not Bholi. The meaning of “Bholi’ is simple hearted person. But now Bholi is a self confident girl so she is called by her real name.
( कहानी के अन्त में भोली को सुलेखा कहा गया है, क्योंकि अब वह भोली नहीं है । भोली का अर्थ है सरल हृदय का व्यक्ति। लेकिन अब भोली एक आत्मविश्वासी लड़की है, अतः उसे उसके वास्तविक नाम से पुकारा गया है।)
Talk about it
(इस बारे में बात कीजिए)
Q. 1. Bholi’s teacher helped her overcome social barriers by encouraging and motivating her. How do you think you can contribute towards changing the social attitudes illustrated in this story?
(भोली की अध्यापिका ने उसे प्रोत्साहित करके सामाजिक बुराई को दूर करने की कोशिश की। आप किस तरह से सोचते हैं कि इस कहानी में दर्शाई गई सामाजिक बुराई आप कैसे दूर कर सकते हो ? )
Ans. Bholi’s teacher had indeed played an important role. She gave such encouragement to Bholi which made her face the world. When Bholi was brought to the school she could hardly speaked her name. The teacher provided all help to her and inspired her. She developed the qualities of confidence in Bholi. It was her effort which made her challenge the dowry seeker.
This story play a very important role in given message to those people who keep their daughter uneducated. The society should understand that education can do any wonder and can help us to do away with curse like dowry. Bholi has shocked the world with her confidence.
(भोली की अध्यापिका की वास्तव में महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। उसने भोली को ऐसा प्रोत्साहित किया कि वह दुनिया का सामना कर सके। जब भोली को स्कूल ले जाया गया तो वह अपना नाम भी कठिनाई से बोल पाती थी। अध्यापिका ने उसको हर सहायता उपलब्ध कराई और उसे प्रेरित किया। उसने भोली में विश्वास के गुण का विकास किया। यह उसी का प्रयास था कि दहेज माँगने वाले की चुनौती का सामना किया।
इस कहानी की अब लोगों को सन्देश देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। जो अपनी बेटियों को अशिक्षित रखना चाहते हैं। समाज को यह समझना चाहिए कि शिक्षा कोई भी आश्चर्य कर सकती है और हमें दहेज जैसे अभिशाप से दूर रखने में सहायता कर सकती है। भोली ने अपने विश्वास से संसार को चौंका दिया। )
Q.2. Should girls be aware of their rights, and assert them? Should girls and boys have the same rights, duties and privileges ? What are some of the way in which society treats them differently? When we speak of ‘human rights’, do we differentiate between girls’ rights and boys’ rights ?
(क्या लड़कियों को अपने अधिकारों के प्रति सचेत होना चाहिए और उन्हें प्राप्त करना चाहिए? क्या लड़कियों और लड़कों के अधिकार, कर्तव्य और सुविधाएँ सम्भव हैं? कौन-से ऐसे तरीके हैं। जिसमें समाज उनसे भिन्न व्यवहार करता है? जब हम मानव अधिकार की बात करते हैं तो क्या हम लड़कियों के अधिकार और लड़कों के अधिकार में अन्तर करते हैं? )
Ans. Girls rights are very significant. In fact girls are the backbone of the country and it is requirea that they are aware of their rights. They have always been exploited and have become victims of system. The right and duties are two faces of a coin. Right to equality, Right to liberally, Right to education, Right to constitutional rights are very important for every girl. There should be equality between rights and duties of girls and boys. By making a distinction, we will be doing wrong. Although in many fields girls are given privilege but that is meant to bring both the sex together.
It is a must that girl education should be given a priority. If we are educating a girl we are educating the whole family.
(लड़कियों में अधिकार बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। वास्तव में लड़कियाँ देश की रीढ़ हैं और यह आवश्यक है कि वे अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहें। उनका सदैव शोषण हुआ है और वे व्यवस्था की शिकार हुई हैं। अधिकार और कर्तव्य एक सिक्के के दो पहलू हैं। समानता का अधिकार, स्वतन्त्रता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, संवैधानिक अधिकार प्रत्येक लड़की के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। लड़के व लड़कियों के अधिकारों व कर्त्तव्यों में समानता होनी चाहिए। दोनों में ‘अन्तर करके हम गलत कर रहे हैं। यद्यपि अनेक क्षेत्रों में लड़कियों को सुविधाएँ दी गई हैं लेकिन इसका अर्थ है दोनों को साथ लाना।
यह आवश्यक है कि लड़कियों की शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए। यदि हम एक लड़की को शिक्षित कर रहे हैं तो हम एक पूरे परिवार को शिक्षित कर रहे हैं। )
Q. 3. Do you think the characters in the story were speaking to each other in English? If not, in which language were they speaking? (You can get clues from the names of the persons and the non-English words used in the story.)
(क्या आप सोचते हैं कि कहानी के पात्र एक-दूसरे से अंग्रेजी में बात कर रहे थे? यदि नहीं, तो किस भाषा में वे बात कर रहे थे (आप व्यक्तियों के नाम और कहानी में प्रयुक्त गैर- अंग्रेजी शब्दों से संकेत प्राप्त कर सकते हैं। )
Ans. The story is set in a rural background. In this story the main character are village Tehsildar and Nambardar, who do not seen to possess much education. The name such as Laxmi for cow and Ramlal for head of the family give reflection of rural life. In such rural background the language spoken must be Hindi. It is a very new experience for Bholi to go to school and learned small English word. The dialect must be in rural accent.
(कहानी की पृष्ठभूमि ग्रामीण है। इस कहानी में मुख्य पात्र हैं ग्रामीण तहसीलदार और नम्बरदार जो अधिकं शिक्षित नहीं होते। गाय का नाम लक्ष्मी और परिवार के मुखिया का नाम रामलाल ग्रामीण जीवन की झलक देते हैं। इस प्रकार की ग्रामीण पृष्ठभूमि में बोलने वाली भाषा हिन्दी होनी चाहिए। भोली को स्कूल जाने और अंग्रेजी के कुछ अक्षर सीखने का नया अनुभव है, अतः बोली भी ग्रामीण भूमिका की ही होगी। )
