UK Board 9th Class English – (Supplementary Reader) – Chapter 1 The Lost Child
UK Board 9th Class English – (Supplementary Reader) – Chapter 1 The Lost Child
UK Board Solutions for Class 9th English – (Supplementary Reader) – Chapter 1 The Lost Child
THE LOST CHILD (Mulk Raj Anand)
[एक बच्चा अपने माता-पिता के साथ मेले में जाता है। वह प्रसन्न और उत्तेजित है और वहाँ रखी हुई मिठाई और खिलौने लेना चाहता है। पर उसके माता-पिता उसको वे चीजें खरीदकर नहीं देते। जब कोई अन्य व्यक्ति बच्चे को वे चीजें देना चाहता है तो वह उनको लेने से क्यों मना करता है?]
SUMMARY OF THE STORY
It was the festival of spring. A child walked along with his parents to the fair. Sometimes he remained behind his parents when he was drawn towards some attractive things displayed on his way. He saw a toy shop. He wanted a toy. But his father looked at him with red-eyes. Then he moved on with the parents.
They reached the fair. They came across a sweetmeat seller. The child’s mouth began to water for burfi. He asked for burfi but his request was not heeded. So he walked on farther.
A flower seller hawked, “A garland of gulmohur.” He murmured, “I want that garland”. His wish was not fulfilled. He moved on.
A man was selling balloons of different colours. The child desired to have them all. His request was not heard. So he walked on farther.
A snake-charmer stood playing a flute to a snake. The child went towards him. But returned and proceeded farther.
There was a roundabout in full swing. The child watched it intently and then he made a bold request, “I want to go on the roundabout.” But there was no reply. His parents had gone farther. Thus the child was lost.
His all desires ended. There was now only one desire ‘My mother, my father’. He went to the temple in search of his parents. There was very much crowd. The child might have been trampled underfoot if a man had not lifted him up.
The man tried to console the child but to no effect. He offered him every opportunity he had desired. But he failed him to keep him quiet. He went on crying for his parents.
The only thing he desired was his parents.
सम्पूर्ण कहानी का हिन्दी रूपान्तर
वसन्त का उत्सव था। जाड़े की ऋतु के धुंधलके में गली और कूचों से सजे-धजे वस्त्रों में लोग बाहर आ रहे थे। कुछ पैदल चल रहे थे, कुछ घोड़ों पर सवार थे, अन्य लोग बाँस- गाड़ियों और बैल – गाड़ियों में सवारी कर रहे थे। उत्साह और प्रसन्नता से ओतप्रोत एक छोटा लड़का अपने माता-पिता की टाँगों के बीच दौड़ रहा था ।
सड़क के किनारे बनी दुकानों पर खिलौनों से आकर्षित वह लड़का जैसे ही पीछे रह गया, उसके माता-पिता ने आवाज लगाई, “आओ, बच्चे, आओ।”
वह बच्चा अपने माता-पिता की ओर तेजी से चला, उसके पैर अपने माता-पिता की पुकार के प्रति आज्ञावान थे, उसकी आँखें अब भी उन पीछे रखे हुए खिलौनों पर टिकी हुई थीं। जैसे ही वह उस स्थान पर पहुँचा जहाँ उसके माता-पिता उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे, वह अपने मन की इच्छा को रोक न सका यद्यपि उसे उनकी मनाही करने वाली रूखी आँखों का आभास था।
उसने निवेदन किया, “मुझे वह खिलौना चाहिए। “
उसके पिता ने उसकी ओर अपनी लाल आँखों से देखा जैसा उसका जाना-पहचाना निर्दयी तरीका था। उसकी माँ का दिल पिघल गया क्योंकि ऐसा ही माहौल था। अपनी उँगली पकड़ाते हुए वह बोली, “देखो, बेटे तुम्हारे सामने क्या है?”
वह फूली सरसों का खेत था, पिघले हुए सोने के समान पीला था, वह समतल भूमि पर मीलों तक फैला हुआ था।
ड्रैगनफ्लाई का एक समूह, जो अपने चमकीले और बैंगनी पंखों पर दौड़-धूप कर रहा था, अकेली मधुकर या तितली जो फूलों से मकरंद पाने के लिए जा रही थी, के रास्ते को काट रहा था। बच्चा हवा में टकटकी लगाकर उनका पीछा कर रहा था कि उनमें से एक ने पंखों को बंद कर लिया और रुक गई, और बच्चे ने उसे पकड़ने का प्रयत्न किया। पर वह अस्थिर होकर उड़ते हुए, ऊपर-नीचे जाती हुई, हवा में उड़ गई जबकि बच्चा उसको अपने हाथों में पकड़ने ही वाला था। तब बच्चे की माँ ने उसको सतर्क करते हुए आवाज लगाई, “आओ, बेटे, आओ, पगडण्डी पर आओ”।
बच्चा प्रसन्नतापूर्वक अपने माता-पिता की ओर दौड़ा और कुछ देर उनके आगे-आगे चला, फिर भी वह पीछे रह गया क्योंकि वह रास्ते पर उन छोटे कीट-पतंगों की ओर आकर्षित हो गया जो अपने छिपने के स्थानों से धूप का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में बाहर आ रहे थे।
उसके माता-पिता ने, जो पेड़ों के समूह के नीचे एक कुएँ के किनारे बैठे हुए थे, वहाँ से पुकारा, “आओ बेटे, आओ।” बच्चा उनकी ओर दौड़ा।
जैसे ही बच्चे ने पेड़ों के झुरमुट में प्रवेश किया, उसके ऊपर पुष्पों की वर्षा हुई और वह अपने माता-पिता को भूलकर ऊपर से बरसती हुई फूलों की पंखुड़ियों को अपने हाथों में समेटने लगा। पर देखो। उसने फाख्ताओं की आवाज सुनी और वह अपने माता-पिता की ओर पुकारता हुआ दौड़ा, “फाख्ता ! फाख्ता !” उसके विस्मृत हाथों से पंखुड़ियाँ नीचे गिर गईं।
उन्होंने बच्चे को पुकारा, “आओ, बेटे, आओ” अब बच्चा बरगद के पेड़ के चारों ओर अठखेलियाँ करते हुए दौड़ रहा था। उसको साथ लेकर उन्होंने एक तंग, घुमावदार रास्ता पकड़ा जो सरसों के खेतों से गुजरता हुआ मेले में जाता था ।
जब वे लोग, गाँव के समीप पहुँचे तो बच्चे ने अनेकानेक रास्ते देखे जो भीड़ से ठसाठस भरे हुए थे और मेले में एक बवंडर – सा दिखाई पड़ रहा था। वह इस गड्डमड्ड होती दुनिया से एक साथ ही आकर्षित और विकर्षित हुआ, जिसमें वह अब प्रवेश करने वाला था।
एक मिठाई बेचने वाला चिल्लाया, “गुलाबजामुन, रसगुल्ला, बर्फी जलेबी | “
वह प्रवेश द्वार के एक कोने पर खड़ा था। उसके काउण्टर पर भीड़ बढ़ रही थी जहाँ नाना प्रकार की रंगीन मिठाइयाँ थीं और वे चाँदी और सोने के वर्कों से सजाई गई थीं। बच्चा खुली आँखों से टकटकी लगाकर देख रहा था और बर्फी, जो उसकी प्रिय मिठाई थी, को देखकर उसके मुँह में पानी आ गया। वह धीरे से बुदबुदाया, “मुझे वह बर्फी चाहिए ।” पर जैसे ही उसने निवेदन किया वह आगे की बात जानता था कि उसकी विनती पर ध्यान नहीं दिया जाएगा क्योंकि वह जानता था कि उसके माता-पिता कहेंगे कि बच्चा लालची है। अतः उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना वह आगे बढ़ गया।
एक फूल विक्रेता चिल्लाया, “गुलमोहर की माला, गुलमोहर की. माला ।” ऐसा प्रतीत हुआ कि बच्चा एक-दम उसकी ओर आकर्षित हो गया। वह उस टोकरी के पास गया जहाँ फूलों का ढेर लगा हुआ था और धीरे से बुदबुदाया, “मुझे वह माला चाहिए ।” पर वह अच्छी तरह से जानता था कि उसके माता-पिता उन फूलों को खरीदने से मना कर देंगे कि वे फूल घटिया किस्म के हैं। अत: उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना बढ़ गया।
एक आदमी एक बाँस लिए खड़ा था उस पर पीले, लाल, हरे और बैंगनी रंग के गुब्बारे उड़ रहे थे। बच्चा उनकी रेशमी रंगों की इन्द्रधनुष की सुन्दरता से आकर्षित हो गया। उसके ऊपर ऐसी इच्छा हावी हुई कि वह उन सबको प्राप्त करना चाहता था। पर वह जानता था कि उसके माता-पिता उसको कभी गुब्बारे खरीद कर नहीं देंगे, वे कहेंगे कि वह इतना बड़ा है कि ऐसे खिलौनों से नहीं खेलेगा। अतः आगे चलता बना।
एक सपेरा साँप के सामने बीन बजा रहा था। साँप एक टोकरी में कुण्डली लगाए बैठा था और उसका सिर हंस की गर्दन के समान एक मोहक मोड़ बनाते हुए खड़ा था जबकि संगीत उसके अदृश्य कानों में प्रवेश कर रहा था जैसे किसी अदृश्य जलप्रपात का मंद-मंद कलरव सुनाई पड़ रहा हो। बच्चा सपेरे के पास गया। पर, यह जानते हुए कि उसके माता-पिता ने उसको ऐसा भद्दा संगीत जो सपेरा बजा रहा था सुनने से मना किया हुआ है बच्चा आगे बढ़ गया।
एक बड़ा झूला पूरे ज़ोर से घूम रहा था। आदमी, औरतें और बच्चे भँवर के चक्र के समान घूम रहे थे, वे किलकारियाँ भर रहे थे और विमूढ़ हँसी से चिल्ला रहे थे। बच्चे ने बड़े ध्यान से उसको देखा और तब उसने साहस के साथ प्रार्थना की, “मेरे अच्छे पापा, मम्मी मैं उस झूले पर झूलना चाहता हूँ ।”
कोई उत्तर नहीं आया। वह अपने माता-पिता की ओर देखने के लिए घूमा। वे वहाँ नहीं थे, उसके आगे भी नहीं थे। वह उनको देखने के लिए चारों तरफ मुड़ा। वे वहाँ भी नहीं थे। उसने अपने पीछे देखा। उनका कोई चिह्न नहीं था।
बच्चे के सूखे गले से गहरी, पूरी चीख निकली और वह जहाँ खड़ा था’ वहाँ से शरीर को झटका देकर दौड़ पड़ा। वह सचमुच डर से चिल्ला रहा था, “मम्मी! पापा!!” उसकी आँखों से आँसू बहने लगे, वे आँसू गर्म थे और तीव्र थे। उसका चमकता चेहरा डर के मारे ऐंठ गया। सहमा हुआ बच्चा पहले एक दिशा में दौड़ा फिर दूसरी दिशा में, इधर-उधर सभी दिशाओं में दौड़ा, वह नहीं जानता था कि कहाँ जाए। वह दुःख के साथ चिल्लाया, “मम्मी! पापा!!” उसकी पीली पगड़ी खुल गई और उसके कपड़े गंदे हो गए।
कुछ देर वह इधर-उधर रोष में दौड़ने के बाद हारकर खड़ा हो गया। उसकी चीखें दबकर सिसकियों में बदल गईं। थोड़ी दूरी पर उसने अपने अश्रुपूरित नेत्रों से हरी घास पर बैठे आदमी और औरतों को बातें करते देखा। उनके चमकीले पीले कपड़ों के बीच जिज्ञासा से देखने का प्रयत्न किया, पर उन लोगों में उसके माता-पिता का कोई आभास नहीं मिला, उसे ऐसा लगा कि वे लोग हँसी और बातों के लिए ही हँस रहे थे और बातें कर रहे थे।
वह पुन: तेजी से दौड़ा, इस बार एक मंदिर पर दौड़कर गया जहाँ लोगों की भीड़ जमा हो रही थीं। उस जगह का चप्पा-चप्पा आदमियों से भरा पड़ा था, पर वह लोगों की टाँगों से होकर दौड़ा।
उसकी सिसकी बनी रही, “मम्मी! पापा!!” फिर भी मंदिर के द्वार के पास भीड़ और अधिक घनी हो गई, आदमी धक्कम धक्का हो रहे थे, वे भारी लोग थे, उनकी आँखें चमकती हुई खूनी थीं, उनके कंधे भारी भरकम थे। बेचारे बच्चे ने उनके पैरों के बीच से होकर आगे जाने के लिए संघर्ष किया, पर उन लोगों की निर्दयी गति के कारण वह इधर-उधर गिरता रहा । वह पैरों के नीचे कुचल गया होता यदि वह पूरे जोर से चीख न मारता, “मम्मी ! पापा!!” एक आदमी ने उस बढ़ती भीड़ में, बड़ी कठिनाई से नीचे झुककर उसको अपनी बाँहों में उठाया।
जब वह आदमी बच्चे को लेकर भीड़ से बाहर आया, तो उसने पूछा, बच्चे तुम यहाँ कैसे आए? तुम किसके बच्चे हो ? अब बच्चा पहले से कहीं अधिक फूट-फूटकर रोया, “मुझे अपनी मम्मी चाहिए, मुझे अपने पापा चाहिए। “
उस आदमी ने उसको शान्त करने का प्रयत्न किया। वह उसको बड़े झूले पर ले गया। वह जैसे ही झूले की रिंग के पास पहुँचा उसने धीरे से कहा, “क्या तुम घोड़े पर सवार होगे?” बच्चे के गले से बहुत जोर की और चुभती हुई हजारों सिसकियाँ निकलीं और वह केवल चिल्लाया, “मुझे अपनी मम्मी चाहिए और मुझे अपने पापा चाहिए ।”
वह आदमी उस स्थान की ओर बढ़ा जहाँ अब भी सपेरा फन हिलाने वाले नाग को बीन बजाकर सुना रहा था। उस आदमी ने निवेदन किया, “बच्चे, इस मधुर संगीत को सुनो।” पर बच्चे ने अपनी उँगलियों से कान बंद कर लिए और अपनी चीख को दुगुना करके चिल्लाया, “मुझे अपनी मम्मी चाहिए, मुझे अपने पापा चाहिए।” यह सोचते हुए कि गुब्बारों के चमकीले रंग उसका ध्यान बटाएँगे और उसको शांत करेंगे, वह आदमी गुब्बारों के पास उस बच्चे को ले गया। उस आदमी ने फुसलाते हुए पूछा, “क्या तुम इन्द्रधनुष के रंग का गुब्बारा पसंद करोगे?” बच्चे ने अपनी आँखें उड़ते हुए गुब्बारों से घुमा लीं और केवल सिसकी भरकर कहा, “मुझे अपनी मम्मी चाहिए, मुझे अपने पापा चाहिए ।”
अब भी बच्चे को प्रसन्न करने का प्रयत्न करते हुए, वह आदमी उसको उस द्वार पर ले गया जहाँ फूल विक्रेता बैठा था। ‘देखो! बच्चे क्या तुम उन अच्छे फूलों की गंध लेना चाहोगे? क्या तुम अपने गले में एक माला पहनोगे?”
बच्चे ने अपनी नाक टोकरे से दूर हटा ली और अपनी सिसकी पुनः दोहराई, “मुझे अपनी मम्मी चाहिए, मुझे अपने पापा चाहिए।”
यह सोचते हुए कि मिठाई का उपहार उसकी अधीरता को कम करेगा, वह आदमी उसको मिठाई की दुकान पर ले गया। उस आदमी ने पूछा, “बच्चे, तुम किस मिठाई को पसंद करोगे?” बच्चे ने अपना चेहरा मिठाई की दुकान से घुमा लिया और सिसकी भरकर केवल यह कहा, “मुझे अपनी मम्मी चाहिए, मुझे अपने पापा चाहिए।”
LONG ANSWER TYPE QUESTIONS
(To be answered in about 100 words)
Q. 1. What are the things the child sees on his way to the fair? Why does he lag behind?
(बच्चा मेले में जाता हुआ रास्ते में क्या-क्या चीजें देखता है? वह पीछे क्यों रह जाता है ? )
Ans. The child sees the following things on his way to the fair :
(1) The toys : The child was attracted by the coys in the shops that lined the way. He therefore lagged behind. When his parents called him, he hurried towards them, his eyes still lingering on the receding toys.
(2) Dragon-flies : The child saw a group of dragon-flies over a flowering mustard-field. The child followed them in the air with his gaze. One of them would still its wings and rest, and the child would try to catch it. But it would go fluttering, flapping, up into the air.
(3) Little insects and worms : The child was next attracted by the little insects and worms along the footpath that were teeming out from their hiding places to enjoy the sunshine.
(4) Young flowers : A shower of young flowers fell upon the child as he entered the grove. He began to gather the raining petals in his hands. When the child heard the cooing of doves, he shouted, “The dove! The dove!” As he ran towards his parents, the raining petals dropped from his forgotten hands.
These things made the child lag behind his parents.
( बच्चा मेले में जाते हुए रास्ते में निम्नलिखित चीजें देखता है-
(1) खिलौने – रास्ते के किनारे दुकानों में रखे खिलौनों ने बच्चे को आकर्षित किया। अतः वह पीछे रह गया। जब उसके माता-पिता ने उसको बुलाया वह तेजी से उनके पास गया, पर उसकी आँखें अभी भी पीछे हटते हुए खिलौनों पर टिकी हुई थीं।
(2) चिउरे – बच्चे ने सरसों के पुष्पित खेत के ऊपर ड्रैगनफ्लाई का एक समूह देखा। उन पर दृष्टि लगाए बच्चे ने हवा उनका पीछा किया। एक ड्रैगनफ्लाई ने अपने पंख रोके और आराम किया, बच्चे ने उसको पकड़ने का प्रयत्न किया। पर वह पंख फड़फड़ाते हुए हवा में उड़ गया।
(3) छोटे कीट-पतंगे और कृमि – बच्चा पुनः रास्ते पर छोटे कीट-पतंगों और कृमियों की ओर आकर्षित हुआ जो धूप का आनंद लेने के लिए अपने छिपे स्थानों से बहुत बड़ी संख्या में बाहर निकल रहे थे।
(4) छोटे फूल – बच्चे ने जैसे ही कुंज में प्रवेश किया, उसके ऊपर छोटे और नए फूलों की वर्षा हुई। वह अपने हाथ में गिरते हुए पुष्पों की पंखुड़ियाँ एकत्र करने लगा। जब बच्चे ने फाख्ताओं को कूजते हुए सुना, वह चिल्लाया, “फाख्ता ! फाख्ता ।” जैसे ही वह अपने माता-पिता की ओर दौड़ा, उसके विस्मृत हाथों से फूलों की पंखुड़ियाँ नीचे गिर गई। इन चीजों के कारण बच्चा अपने माता-पिता से पीछे रह गया। )
Q. 2. When does the child realise that he has lost his way? How have his anxiety and insecurity been described?
(बच्चा कब अनुभव करता है कि वह अपने रास्ते से विचलित हो गया? उसकी चिन्ता और असुरक्षा का वर्णन किस प्रकार किया गया है? )
Ans. The child realised at the roundabout that he had lost his way. When he made a bold request, he got no reply. He turned to look at his parents. They were not there, ahead of him. He turned to look on either side. They were not there. He looked behind. There was no sign of them.
A full, deep cry rose within his dry throat. With a sudden jerk of his body he ran away, crying in real fear, “Mother, Father”. Tears rolled down from his eyes. The tears were hot and fierce. His flushed face was convulsed with fear. Panic-stricken, he ran to one side first, then to the other in all directions. “Mother, Father”, he wailed.
Having run to and fro in a rage of running for a while, he stood defeated. His cries suppressed into sobs: Thus he felt his anxiety and insecurity.
( बच्चे ने बड़े झूले पर महसूस किया कि वह अपने रास्ते से विचलित हो गया है। जब उसने साहसपूर्ण विनती की, उसे कोई वे उत्तर नहीं मिला। वह अपने माता-पिता को देखने के लिए घूमा। उसके आगे नहीं थे। वह दाएँ-बाएँ घूमा। वे वहाँ नहीं थे। उसने पीछे देखा। वहाँ उनका कोई संकेत नहीं मिला।
उसके सूखे गले से पूर्ण, गहरी चीख निकली। एकदम शरीर को झटका देकर वह दौड़ा, वह वास्तविक भय से चिल्लाया, “माँ, “पिता ।” उसकी आँखों से आँसू लुढ़क गए। उसके आँसू गर्म और भयानक थे। उसका दमकता हुआ चेहरा भय से ऐंठ गया। भय का मारा, वह पहले एक ओर दौड़ा, तब दूसरी सभी दिशाओं में दौड़ा। उसने विलाप किया, “माँ, पिता । “
कुछ देर इधर-उधर दौड़ने के बाद वह हारकर खड़ा हो गया। उसकी चीखें दबकर सुबकी में बदल गई। इस प्रकार उसने अपनी चिंता और असुरक्षा को महसूस किया।)
Q. 3. Why does the lost child lose interest in the things that he had wanted earlier?
( बच्चे ने अपने माता-पिता के खोए जाने के बाद उन चीजों में रुचि क्यों नहीं ली जिनको वह पहले प्राप्त करना चाहता था । ? )
Ans. The child loves his parents most. The dearest objects in the world for the child are his father and mother. If they are not with him, he feels no interest in sweets, garlands, balloons and other things. The lost child in the story has got a liking for sweets, balloons, music etc. as long as his parents are with him. But when he loses his father and mother, and is not able to trace them in the fair. The child finds no attraction in the balloons and the flowers. The only thing that he does is to weep and cry, “I want my mother…..”
Thus the story-writer points out that the things which appear beautiful and charming, lovely and attractive to the child in the presence of his father and mother lose their interest when his parents are not with him.
( बच्चा अपने माता-पिता को सर्वाधिक प्रेम करता है। बच्चे के लिए दुनिया में सबसे अधिक प्रिय चीजें उसके पिता और माता हैं। यदि वे उसके साथ नहीं हैं, वह मिठाई, माला, गुब्बारे और अन्य चीजों में कोई रुचि महसूस नहीं करता। कहानी में बच्चा जिसके माता-पिता उससे खो गए हैं, मिठाई, गुब्बारे, संगीत आदि में तभी तक रुचि लेता है, जब तक उसके माता-पिता उसके साथ हैं। पर जब उसके पिता और माता खो जाते हैं और वह उनको मेले में ढूँढ नहीं सकता, बच्चा गुब्बारों और फूलों में कोई आकर्षण नहीं पाता। एक मात्र चीज जो वह करता है वह है “मुझे माँ चाहिए, मुझे पिता चाहिए” इसके लिए वह रोता है और चिल्लाता है।
इस प्रकार कहानीकार संकेत करता है कि वे चीजें जो बच्चे को अपने पिता और माता की उपस्थिति में सुन्दर और सुहावनी, प्रिय और आकर्षक लगती हैं, जब बच्चे के साथ उसके माता-पिता नहीं होते, उन चीजों बच्चे की रुचि भी समाप्त हो जाती है।)
SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS
of interpretative and evaluative nature
(To be answered in 30-40 words)
Q.1. When does the child realise that he has lost his way ?
(बच्चा कब महसूस करता है कि वह रास्ते से विचलित हो गया है ? )
Ans. The child makes a bold request: “I want to go on the roundabout, please, father, mother.” There is no reply. He turns to look at his parents. They are not there, ahead of him. He turns to look on either side. They are not there. He looks behind. They are not there. Then he realises that he has lost his way.
( बच्चा साहसपूर्ण विनती करता है, “हे पिता, हे माता, मैं बड़े झूले पर झूलना चाहता हूँ।” कोई उत्तर नहीं। वह अपने माता-पिता को देखने के लिए घूमता है। वे वहाँ नहीं हैं। वे उसके सामने नहीं हैं। वह उनको देखने के लिए दोनों ओर घूमता है। वे वहाँ नहीं हैं। वह पीछे घूमता है। वे वहाँ नहीं हैं। तब वह अनुभव करता है कि वह रास्ते से विचलित हो गया है। )
Q.2. How have the child’s anxiety and insecurity been described?
( बच्चे की चिन्ता और असुरक्षा का वर्णन किस प्रकार किया गया है ? )
Ans. A full, deep cry rose within the child’s dry throat. With a sudden jerk of his body he ran away, crying in real fear, “Mother, Father.” Tears rolled down from his eyes, hot and fierce. Panic-stricken, he ran to one side first, then to the other, here and there in all directions.
( बच्चे के सूखे गले से एक पूर्ण और गहरी चीख निकली। शरीर को झटका देकर वह वहाँ से भागा। वह “माँ, पिता” वास्तविक डर से चिल्लाया। गर्म और भयानक आँसू उसकी आँखों से लुढ़के। भय से मारा, पहले वह एक दिशा में भागा, फिर दूसरी दिशा में, वह चारों ओर भागा। )
Q.3. What do you think happens in the end ? Does the child find his parents?
( आपके विचार से अन्त में क्या घटना घटती है? क्या बच्चे को उसके माता-पिता मिल जाते हैं ? )
Ans. The man, who rescues the child from the crowd, takes the child to the counter of the sweet shop in the end. The child turns his face from the sweet shop and only sobs, “I want my mother, I want my father.”
But I think the child finds his parents in the end with the help of the police.
( अन्त में, भीड़ से बच्चे को बचाने वाला व्यक्ति उसको मिठाई की दुकान पर ले जाता है । बच्चा मिठाई की दुकान से मुँह मोड़ लेता है और सुबकी भरके कहता है, “मुझे अपनी माता चाहिए, मुझे अपने पिता चाहिए। ”
पर मेरे विचार से, अन्त में पुलिस की सहायता से बच्चे को उसके माता-पिता मिल जाते हैं।)
VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS
based on factual aspects of the lesson
(To be answered in 20-30 words)
Q.1. What are the things the child sees on his way to the fair? Why does he lag behind?
( बच्चा मेले में जाते समय रास्ते में क्या चीजें देखता है? वह पीछे क्यों रह जाता है ? )
Ans. On his way to the fair, the child sees the following things :
Toys in the shops, dragon-flies over the mustard fields, little insects and worms, shower of young flowers and the dove.
The child lags behind because he is attracted by the above things and wants to possess some of these things.
( बच्चा, मेले में जाते हुए रास्ते में निम्नलिखित चीजें देखता है-
दुकानों में खिलौने, सरसों के खेतों के ऊपर चिउरा, छोटे कीट-पतंग और कृमि, छोटे फूलों की वर्षा और फाख्ता ।
बच्चा पीछे रह जाता है क्योंकि वह उपर्युक्त चीजों द्वारा आकर्षित होता है और उनमें से कुछ को प्राप्त करना चाहता है।)
Q.2. In the fair the child wants many things. What are they? Why does he move on without waiting for an answer?
( मेले में बच्चा बहुत-सी चीजें चाहता है। वे क्या हैं? वह उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना आगे क्यों बढ़ जाता है ? )
Ans. The child wants the following things in the fair: Burfi, a garland of gulmohur, balloons, music of the snake charmer, swing on a roundabout.
The child knows that his parents would not buy these things for him. He therefore moves on without waiting for an answer.
( बच्चा मेले में निम्नांकित चीजें चाहता है-
बर्फी, गुलमोहर की माला, गुब्बारे, बीन का संगीत, बड़े झूले में झूलना।
बच्चा जानता है कि उसके माता-पिता उसको ये चीजें खरीदकर नहीं देंगे। अत: वह उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना आगे बढ़ जाता है।)
