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UK Board 9th Class English – (Supplementary Reader) – Chapter 2 The Adventures of Toto

UK Board 9th Class English – (Supplementary Reader) – Chapter 2 The Adventures of Toto

UK Board Solutions for Class 9th English – (Supplementary Reader) – Chapter 2 The Adventures of Toto

THE ADVENTURES OF TOTO (Ruskin Bond)
[क्या आपने कभी शिशु वानर को पालतू जानवर के रूप में रखा है? टोटो एक शिशु वानर है। आओ जाने कि क्या टोटो शरारती है या विनीत । ]
SUMMARY OF THE STORY
Toto is a baby monkey. The grandfather of the narrator bought him for five rupees from a tonga driver. Grandfather decided to add Toto to his private zoo. Toto was a pretty monkey. He was proud of his mischief. He frightened elderly Anglo-Indian ladies. Toto was kept in a little closet. He was tied to the wall-peg. Toto wrenched peg from its socket. He tore the narrator’s school blazer. He tore off the wall paper also.
Toto was kept with pets in servants’ quarters in a big cage. But he did not let the other pets sleep at night.
Grandfather put Toto in a strong canvas bag and took him to Saharanpur. When grandfather was producing his ticket at the railway turnstile, Toto suddenly poked his head out of the bag and gave the ticket-collector a wide grin. The ticket collector charged the ticket of Toto. It was a sum of rupees three.
Returning home grandfather placed Toto in the stable with a pet donkey, Nana by name. Toto held Nana’s ears with his sharp teeth.
Toto took bath with soap and warm water. When the water became cold, Toto would get out and run to the kitchen fire in order to dry himself.
One day Toto jumped into a large kettle. Water was boiling in it. When the temperature rose, he jumped up and down. By chance grandmother arrived and hauled him half boiled out of the kettle.
Toto’s brain was stuffed with mischiefs. He tore things to pieces. He broke plates and utensils.
One day Toto entered the dining room. He found a plate of pullao on the dining table. He started eating. Suddenly grandmother screamed, Toto threw the plate on her.
In frustration, grandfather sold Toto back to the same tonga driver for three rupees and heaved a sigh of relief.
सम्पूर्ण कहानी का हिन्दी रूपान्तर
दादा जी ने टोटो को एक ताँगा ड्राइवर से पाँच रुपये में खरीदा था । ताँगा ड्राइवर उस छोटे लाल वानर को घोड़े की नाँद में बाँधे रखता था और वानर वहाँ अटपटा लगता था। दादा जी ने निर्णय लिया कि वे उस छोटे प्राणी को अपने निजी चिड़ियाघर से जोड़ेंगे।
टोटो प्रिय वानर था। उसकी चमकीली आँखें उसकी घनी भौंहों के नीचे शरारत से चमका करती थीं। उसके दाँत जो मोती के समान थे, प्रायः मुस्कान में दिखाई दिया करते थे जिससे वयोवृद्ध एंग्लो इंडियन महिलाएँ बहुत डरती थीं। पर उसके हाथ शुष्क प्रतीत होते थे जैसे कि वे बहुत वर्षों तक धूप में रचाए गए हों। फिर भी उसकी उंगलियाँ बहुत तेज और शरारतपूर्ण थीं। उसकी दुम जो उसकी सुन्दरता में वृद्धि करती थी (दादा जी का विश्वास था कि दुम किसी की भी सुन्दरता में वृद्धि करती है), उसके तीसरे हाथ का काम करती थी। वह उसका प्रयोग शाखा से लटकने के लिए कर सकता था और वह इतनी सक्षम थी कि जो नाज़ुक चीज उसके हाथों की पहुँच से बाहर होती थी, वह उसको उठा सकती थी।
जब दादा जी घर में कोई नया पक्षी या पशु लाते थे, तो दादी जी सदा आपत्ति करती थीं। अतः यह तय किया गया कि टोटो की उपस्थिति दादी जी से गुप्त रखी जाए जब तक विशेष रूप से अच्छी मनोदशा में न हो । दादा जी और मैंने उसको अपने शयन कक्ष की दीवार में एक खुले आले में रख दिया और उसको वहाँ सुरक्षित ढंग से (या हमने ऐसा सोचा ) दीवार में एक खूँटी से बाँध दिया।
कुछ घण्टे बाद, जब दादा जी और मैं टोटो को स्वतन्त्र करने के लिए आए, हमने देखा कि दीवारें जो दादा जी द्वारा चयनित किए गए आलंकारिक कागज से आच्छादित थीं, अब वे नंगी ईंटों और प्लास्टर के रूप में खड़ी दिखाई दीं। दीवार में जो खूँटी थी वह उसके सॉकर से ऐंठकर निकाल दी गई थी, और मेरा स्कूल ब्लेजर जो वहाँ लटक रहा था उसके चिथड़े – चिथड़े हो गए थे।
मुझे आश्चर्य हो रहा था कि दादी जी क्या कहेंगी। पर दादा जी ने चिंता नहीं की। ऐसा प्रतीत हुआ कि वे टोटो के कार्य से प्रसन्न थे ।
दादा जी ने कहा, “वह चतुर है। यदि उसको समय दिया जाए, मैं आश्वस्त हूँ कि वह तुम्हारे ब्लेजर की फटे टुकड़ों को बाँधकर एक रस्सी बना लेगा, और खिड़की से होकर बचकर भाग निकलेगा । “
उसकी उपस्थिति अब भी घर में गुप्त ही थी। टोटो को अब नौकरों क्वार्टरों में एक बड़े पिंजड़े में स्थानान्तरित किया गया। वहाँ दादा जी के बहुत से पालतू पक्षी और पशु बहुत मिल-जुलकर रहते थे – एक कछुआ, खरगोशों का एक जोड़ा, एक पालतू गिलहरी और मेरी पसंदीदा पालतू बकरी भी । पर वानर ने अपने साथियों को रात में सोने नहीं दिया। अतः दादा जी ने, जो कल देहरादून से सहारनपुर जाकर अपनी पेंशन प्राप्त करेंगे, टोटो को अपने साथ ले जाने का फैसला किया।
दुर्भाग्य से मैं दादा जी के साथ सैर पर नहीं जा सका, पर उन्होंने मुझे बाद में बतलाया। टोटो के लिए कैनवास का बड़ा किट जुटाया गया। उसकी तली में कुछ पुराल डाल दी गई, यह टोटो का नया निवास बन गया।
जब थैला बन्द कर दिया जाता था, निकलने का कोई रास्ता नहीं रह जाता था। टोटो सुराखों में से अपने हाथ नहीं निकाल सकता था और कैनवास इतनी मज़बूत थी कि वह रास्ते में उसको काट नहीं सकता था। उसके बाहर निकलने का केवल यह प्रभाव होता था कि फर्श पर वह थैला लुढ़क सकता था या वह यदाकदा थैले सहित हवा में कूद सकता था । – यह प्रदर्शन था जिसने देहरादून के रेलवे प्लेटफार्म पर दर्शकों की जिज्ञासु भीड़ को आकर्षित किया।
टोटो सहारनपुर तक थैले में रहा। पर दादा जी ने रेलवे टर्नस्टाइल पर अपना टिकट दिखाने के लिए निकाला, टोटो ने यकायक अपना सिर थैले से बाहर निकाला और टिकट कलेक्टर की ओर विस्तृत मुस्कान से देखा।
वह बेचारा चकित रह गया। पर अपनी बुद्धिमत्ता से और दादा जी को क्रोध दिलाने के लिए, उसने कहा, “श्रीमान जी, आपके साथ कुत्ता है। आपको नियमानुसार उसका किराया देना पड़ेगा।”
दादा जी ने व्यर्थ में टोटो को थैले से बाहर निकाला और व्यर्थ में यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया कि वानर को कुत्ते की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता और न ही वह चौपाया है। टिकट कलेक्टर ने टोटो को कुत्ते की श्रेणी में रखा और किराए के रूप में तीन रुपये की धनराशि दी गई।
तब दादा जी ने, केवल अपनी बात को बड़ा बनाने के लिए, अपनी जेब से अपने पालतू कछुए को बाहर निकाला और कहा, “मुझे इसके लिये क्या भुगतान करना चाहिए क्योंकि आप सभी पशुओं पर टिकट लगाते हैं?”
टिकट-कलेक्टर ने निकटता से कछुए की ओर देखा, और अपनी तर्जनी से उसको पीछे हटाया। उसने दादा जी को एक प्रसन्न और विजयी दृष्टि देखा, और कहा, “कोई किराया नहीं। यह कुत्ता नहीं है । “
जब टोटो को अन्ततोगत्वा दादा जी ने स्वीकार कर लिया, उसको अस्तबल में रहने की सुविधाजनक जगह दे दी गई जहाँ हमारे परिवार का गधा जिसका नाम नाना था उसका साथी बन गया। अस्तबल में टोटो की पहली रात पर, दादा जी उसको देखने गए कि क्या वह सुविधा से है। दादा जी को आश्चर्य हुआ, नाना बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के अपने मोहरे को खींचे हुए है और वह सूखी घास के बंडल से अपना सिर उतनी दूर रखे हुए है जितना संभव हो सकता था।
दादा जी ने नाना के पुट्ठे पर एक थप्पड़ लगाया और वह झटका देकर पीछे हटा और उसके साथ टोटो भी खिंचा हुआ आया। वह नांना के लम्बे कानों पर अपने पैने छोटे दाँत गड़ाए हुए था।
टोटो और नाना में कोई मित्रता नहीं हुई।
जाड़े की ऋतु की ठंडी रातों में टोटो को एक अचानक उपहार मिल गया। दादी जी टोटो को स्नान करने के लिए गर्म पानी का एक बड़ा कटोरा (ब) देने लगी। टोटो बहुत चतुराई से अपने हाथ से पानी का ताप देखता था। तब वह धीरे-धीरे स्नान करता था। पहले टब में एक पैर रखता था, तब दूसरा (जैसा उसने मुझे करते देखा था), जब तक गर्दन तक वह पानी में डूबता नहीं था ।
एक बार जब वह आराम से होता था, वह अपने हाथों या पैरों में साबुन लेता था और अपने शरीर पर उसे रगड़ता था। जब पानी ठंडा हो जाता था, वह बाहर निकल आता था और बहुत तेजी से रसोईघर में जल रही आग की ओर भागता था ताकि वह अपना शरीर सुखा सके। यदि इस क्रिया के बीच कोई उसका मजाक उड़ाता था, टोटो की भावनाओं को चोट पहुँचती थी और वह स्नान करने से मना कर देता था। एक दिन टोटो लगभग अपने को जीवित ही उबालने में सफल रहा।
आग पर बड़ी केतली रखी गई थी कि चाय के लिए पानी उबल जाएगा और टोटो ने यह देखकर कि वह इससे बेहतर और कुछ नहीं कर सकता, केतली का ढक्कन हटाने का निश्चय किया। यह देखकर पानी स्नान करने के लिए पर्याप्त गर्म है वह उसमें कूद पड़ा । अपना सिर केतली बाहर निकाल लिया। थोड़ी देर तक तो यह अच्छा लगा, जब तक पानी उबलने नहीं लगा। तब टोटो थोड़ा ऊपर उठा, पर, बाहर ठंड पाकर पुन: बैठ गया। कुछ देर तक वह ऊपर-नीचे उछलता रहा, जब तक कि दादी जी नहीं आई और उन्होंने उसको आधा उबला हुआ केतली से बाहर निकाला।
यदि मस्तिष्क का कोई ऐसा भाग है जो विशेष रूप से शरारत के लिए अर्पित है, तो वह भाग बड़े पैमाने पर टोटो में विकसित है।
वह सदा चीजों के टुकड़े-टुकड़े कर उन्हें फाड़ देता था। जब कभी मेरी कोई बुआ उसके पास आती थी, वह हर संभव प्रयास करता था कि उसके कपड़े पकड़े और उसमें छेद कर दे।
एक दिन दोपहर के भोजन के समय डाइनिंग टेबल के केन्द्र में पुलाव की बड़ी तश्तरी रखी हुई थी। हमने कमरे में प्रवेश किया तो देखा टोटो चावल खा रहा है। मेरी दादी चिल्लाई और टोटो ने तश्तरी उसकी ओर फेंकी। मेरी एक बुआ दौड़कर आगे आई और उसके चेहरे पर पानी का गिलास पड़ा। जब दादा जी आए, टोटो ने पुलाव की तश्तरी उठाई और एक खिड़की से बाहर निकल गया। हमने देखा कि वह कटहल की शाखाओं पर बैठा है और हाथों में अब भी तश्तरी थी। वह पूरे तीसरे पहर वहीं बैठा रहा और धीरे-धीरे चावल खाता रहा, उसने अपने मन में निश्चय कर लिया था कि वह प्रत्येक दाने को समाप्त करेगा। और तब, दादी जी जो उसके ऊपर चीखी थीं को चिढ़ाने के लिए पेड़ से नीचे तश्तरी फेंक दी और जब उसके टुकड़े-टुकड़े हो गए तो वह प्रसन्नता से चहकने लगा।
स्पष्ट रूप से टोटो इस प्रकार का पालतू पशु नहीं था जिसको लम्बे समय तक रखा जा सके। दादा जी ने भी यह बात महसूस की। हम धनी नहीं थे और तश्तरी, कपड़े, पर्दे और वाल पेपर की बार-बार होने वाली हानि को सहन नहीं कर सकते थे। अतः दादा जी ने तांगा- ड्राइवर को ढूंढा और तीन रुपये में टोटो को वापस बेच दिया।
LONG ANSWER TYPE QUESTIONS
(To be answered in about 100 words)
Q.1. Why does grandfather take Toto to Saharanpur and how? Why does the ticket collector insist on calling Toto a dog?
(दादा जी टोटो को सहारनपुर क्यों और कैसे ले गए? टिकट कलेक्टर ने टोटो को कुत्ता कहने की जिद क्यों की?)
Ans. Introduction: Grandmother always fussed when grandfather brought home some new bird or animal.
Why : Grandfather had to go to Saharanpur to collect his pension. He decided to take Toto with him to keep its presence a secret from the grandmother.
How : A big black canvas kit-bag was provided for Toto. Some straw was put at its bottom. It was Toto’s new home. When the bag was closed, there was no escape for Toto. Toto could not get his hands through the opening. The canvas was too strong for him to bite his way through.
Conclusion: While grandfather was producing his ticket at the railway turnstile, Toto suddenly poked his head out of the bag and gave the ticket collector a wide grin. He insisted that my grandfather would have to pay for the dog accordingly. He insisted that a monkey is classified as a dog. Grandfather had to pay rupees three for Toto as if it was a dog.
[भूमिका – जब दादा जी किसी नए पक्षी या पशु को घर लाते थे तो दादी जी सदा झमेला खड़ा कर देती थीं।
क्यों – दादा जी को अपनी पेन्शन लेने के लिए सहारनपुर जाना था। उन्होंने दादी जी से इसकी उपस्थिति को गुप्त रखने के लिए टोटो को अपने साथ ले जाने का निर्णय लिया।
कैसे – टोटो के लिए एक बड़ा काला कैनवास का किट बैग जुटाया गया। उसकी तली में कुछ भूसा रखा गया। वह टोटो का नया निवास था। जब थैले को बन्द कर दिया गया, टोटो बाहर नहीं निकल सकता था। टोटो खुली जगहों से अपना हाथ बाहर नहीं निकाल सकता था। कैनवास इतना मजबूत था कि टोटो उसे काटकर बाहर नहीं आ सकता था।
निष्कर्ष – जब दादा जी रेलवे टर्नस्टाइल पर टिकट दे रहे थे, टोटो ने अचानक ही थैले के बाहर अपना सिर निकाला और टिकट कलेक्टर की ओर विस्तृत मुस्कान फेंकी। उसने जिद की – कि नियमानुसार मेरे दादा जी को कुत्ते का किराया देना पड़ेगा। उसने ज़िद की कि बन्दर को कुत्ते के वर्ग में रखा जाता है। दादा जी को टोटो को कुत्ते के वर्ग में आने पर उसके लिए तीन रुपये देने पड़े।]
Q.2. How does Toto take a bath ? Where has he learnt to do this? How does Toto almost boil himself alive ?
(टोटो किस प्रकार स्नान करता था? उसने स्नान करना कहाँ से सीखा? टोटो ने स्वयं अपने को जीवित लगभग कैसे उबाल लिया?)
Ans. Toto was given a large bowl of warm water during cold winter evenings. He would cunningly test the temperature with his hand, then gradually step into the bath, first one foot, then the other, until he was into the water up to his neck. Then he would take the soap in his hands and rub himself all over.
He learnt to take bath from the narrator..
One day Toto nearly succeeded in boiling himself alive. Toto found a large kitchen kettle left on the fire to boil for tea. Toto decided to remove the lid. Finding the water just warm enough for a bath, he got in. This was just fine for a while, until the water began to boil. He continued hopping up and down for sometime. Then grandmother arrived and hauled him, half-boiled, out of the kettle.
[सर्दियों में ठण्डी संध्याओं में टोटो को गर्म पानी का एक बड़ा ब दिया जाता था। वह चतुराई से अपने हाथ से पानी के ताप की जाँच करता था, तब धीरे-धीरे टब में कदम रखता था, पहले एक पैर, तब दूसरा पैर, जब तक पानी उसकी गर्दन तक नहीं आ जाता था। तब वह अपने हाथों में साबुन लेता था और सारे शरीर पर उसको मलता था।
उसने स्नान करना कहानीकार से सीखा था।
एक दिन टोटो अपने आपको उबालने में लगभग सफल रहा। टोटो ने रसोई की बड़ी केतली आग पर रखी देखी जिसमें चाय के लिए पानी उबालना था। टोटो ने उसके ढक्कन को हटाने का निश्चय किया। यह देखकर पानी स्नान करने के लिए पर्याप्त उष्ण है, वह केतली में घुस गया। यह कुछ देर तक तो ठीक रहा, फिर पानी उबलने लगा। वह कुछ समय तक ऊपर-नीचे उछलता रहा। तब . दादी जी आईं, उन्होंने टोटो को आधी उबली हुई अवस्था में केतली से बाहर निकाला।]
SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS
of interpretative and evaluative nature
(To be answered in 30-40 words)
Q. 1. “Toto was a pretty monkey.” In what sense is Toto pretty ?
(“टोटो एक सुन्दर बन्दर था।” किस अर्थ में टोटो सुन्दर था ? )
Ans. Toto was a pretty monkey because he was a little one with bright eyes. His teeth were white as a pearl. His long tail added to his good look.
(टोटो एक सुन्दर बन्दर था क्योंकि वह छोटा था, उसकी आँखें चमकीली थीं। उसके दाँत मोती के समान सफेद थे। उसकी लम्बी दुम उसके अच्छे हुलिए में वृद्धि करती थी । )
Q. 2. Why does grandfather take Toto to Saharanpur and how ? 
(दादा जी टोटो को सहारनपुर क्यों ले गए और कैसे ? )
Ans. Grandfather took Toto to Saharanpur because he Iwanted to keep his presence a secret to grandmother.
A big black canvas kit-bag was provided for Toto. Toto was closed in the bag. Toto remained in the bag as far as Saharanpur.
(दादा जी टोटो को सहारनपुर ले गए क्योंकि वे टोटो की उपस्थिति दादी से गुप्त रखना चाहते थे।
काली कैनवास का एक बड़ा किट बैग टोट के लिए जुटाया गया। टोटो को उसमें बंद कर दिया गया। टोटो सहारनपुर तक थैले ही में रहा । )
Q.3. Why does the author say, “Toto was not the sort of pet we could keep for long”?
(लेखक क्यों कहता है, “टोटो इस प्रकार का पालतू पशु नहीं था जिसको हम अधिक समय तक रख सकते”?)
Ans. According to the author, Toto couldn’t be kept as a pet for a long time for the following reasons:
1. Toto was a source of mischief. He was always tearing things to pieces.
2. He was a nuisance to other pets kept in the house.
3. He was also a nuisance for the family members of the author.
(लेखक के अनुसार, टोटो को पालतू पशु के नाते निम्नलिखित कारणों से अधिक समय तक नहीं रखा जा सकता-
1. टोटो शरारत का स्रोत था। वह सदा चीजों को टुकड़ों में फाड़ता रहता था।
2. घर में रखे गए अन्य पालतू पशुओं के लिए वह लोकोत्पात था।
3. वह लेखक के परिवारजन के लिए भी लोकोत्पात था।)
VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS
based on factual aspects of the lesson
(To be answerd in 20-30 words)
Q.1. How does Toto come to grandfather’s private zoo ? 
(टोटो दादा जी के व्यक्तिगत चिड़ियाघर में कैसे आया? )
Ans. Grandfather bought Toto from a tonga-driver for the sum of five rupees. Toto looked so out of place with the tonga driver that grandfather decided to add him to his private zoo.
(दादा जी ने टोटो को पाँच रुपये में एक ताँगे वाले से खरीदा। टोटो ताँगे वाले के साथ इतना भद्दा लगता था कि दादा जी ने निर्णय लिया कि वह उसे अपने प्राइवेट चिड़ियाघर में रखेंगे। )
Q.2. How does Toto take a bath ? Where has he learnt to do this?
(टोटो किस प्रकार स्नान करता था? उसने इस प्रकार स्नान करना कहाँ से सीखा ?)
Ans. Toto was provided a large bowl of warm water during cold winter evenings. First he tested the temperature with his hand. Then grandually stepped into the bowl, until he was into the water upto his neck. Then he would take the soap in his hands and rub it all over his body.
He learnt this from the author.
(सर्दियों की ठण्डी संध्याओं के दौरान टोटो को गर्म पानी का एक बड़ा कटोरा दिया जाता था। पहले वह हाथ से ताप की जाँच करता था। तब धीरे-धीरे वह टब में पैर टेकता था जब तक कि पानी . उसकी गर्दन तक न आ जाए। तब वह अपने हाथों में साबुन लेता था और उसे अपने शरीर पर मलता था। उसने यह लेखक से सीखा था । )

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