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UK Board 9th Class English – (Supplementary Reader) – Chapter 5 The Happy Prince

UK Board 9th Class English – (Supplementary Reader) – Chapter 5 The Happy Prince

UK Board Solutions for Class 9th English – (Supplementary Reader) – Chapter 5 The Happy Prince

THE HAPPY PRINCE (Oscar Wilde)
[प्रसन्न राजकुमार एक सुन्दर मूर्ति थी। वह सोने से आच्छादित था । उसकी आँखों के स्थान पर नीलम लगे हुए थे, और उसकी तलवार में लाल मणि लगी थी। वह अपने सारे स्वर्ण और मूल्यवान हीरों को क्यों छोड़ना चाहता था ? ]
SUMMARY OF THE STORY
The Happy Prince was a beautiful statue. He stood on a tall column high above the city. His statue was gilded with thin leaves of fine gold. He had sapphires for eyes. He had a ruby in his sword.
One night a little swallow flew over the city. He. flew down to spend the night between the feet of the Happy Prince. He was ready to sleep. Just then a large drop of water fell on him. It was curious as there were no clouds in the sky. Then another drop of rain fell on him. The swallow decided to look for another place. A third drop fell on him before he opened his wings to fly. He looked up and saw that those were the tear drops from the eyes of the Happy Prince. It filled the swallow with pity.
The Happy Prince told the swallow that he lived in a palace while he was alive. There was no sorrow at all. After his death he had been set up on a high pillar. His heart of lead wept at the sight of ugliness and misery of his city.
He told the swallow that a little boy of a seamstress was sick. He was crying. His poor mother could not give him oranges to eat. He asked the swallow to give his ruby to the poor woman. The swallow was going to Egypt. But he agreed to carry out the command of the Happy Prince. He flew to the house of the poor woman and laid the ruby on the table.
Then the Happy Prince saw a writer. He was cold and hungry. He had no food and firewood. The Happy Prince asked the swallow to give his one sapphire to the writer. The swallow obeyed him unwillingly.
Later on the Happy Prince saw a match girl crying over her matches fallen into a gutter. At his command the swallow plucked out his other sapphire. He slipped the sapphire into the palm of the match girl. Then the Happy Prince allowed the swallow to fly away to Egypt. But the swallow decided to stay with the blind Prince for ever.
The swallow reported about the sufferings of the starving people. At the command of the Happy Prince the swallow took off the golden leaves from the statue and distributed them among the poor. Now the statue was dull and grey. The frost made the swallow colder and colder and he was about to die. He flew to the Happy Prince who bade him kiss him on the lips. The swallow fell down dead at the feet of the statue. The lead heart of the Prince broke into two. ***
The Mayor ordered that the statue should be pulled down because it was neither beautiful nor useful. The broken lead heart did not melt in the furnace. It was thrown away on a dustheap where the dead swallow was also lying.
God asked his angels to bring the two most precious things in the city. God praised the angel’s choice in bringing him the leaden heart of the Happy Prince and the dead swallow.
सम्पूर्ण कहानी का हिन्दी रूपान्तर
प्रसन्न राजकुमार की मूर्ति एक ऊँचे स्तम्भ पर नगर में बहुत ऊँचाई पर खड़ी थी। वह सोने के वर्क से आच्छादित था, आँखों के स्थान पर दो चमकीले नीलम लगे थे, और उसकी तलवार की मूठ में एक बहुत बड़ी लाल मणि चमकती थी।
एक रात्रि एक छोटा-सा अबाबील नगर पर उड़ रहा था। उसके मित्र छह सप्ताह पूर्व मिस्र जा चुके थे, परन्तु वह पीछे रुक गया था तब उसने भी मिस्रं जाने का निर्णय लिया।
वह पूरे दिन उड़ता रहा, , और रात्रि के समय वह नगर में आ गया।
“मैं कहाँ ठहरूंगा?” उसने कहा । ” आशा है कि नगर ने तैयारियाँ कर ली होंगी।”
तब उसने ऊँचे स्तम्भ पर मूर्ति देखी।
“मैं वहाँ रहूँगा,” वह चिल्लाया, “यह सुन्दर स्थल है, यहाँ बहुत ताजी हवा है।” अतः वह प्रसन्न राजकुमार के चरणों के ठीक बीच उतरा।
“मेरा सोने का कक्ष स्वर्णिम है,” चारों ओर देखते हुए उसने धीरे से अपने मन में कहा, और वह सोने के लिए तैयार हो गया, किन्तु जैसे ही वह अपने पंखों के नीचे अपना सिर रख रहा था, उसके ऊपर पानी की एक बूँद पड़ी। “क्या विचित्र बात है!” वह बोला। “आकाश में एक भी बादल नहीं है, तारे बिल्कुल साफ और चमकीले हैं, फिर भी वर्षा हो रही है। “
दूसरी बूँद पड़ी।
“मूर्ति का क्या लाभ है यदि वह वर्षा से रक्षा नहीं कर सकती ?” उसने कहा, “मुझे किसी अच्छी चिमनी की तलाश करनी चाहिए।” और उसने दूर उड़ने का निर्णय लिया।
परन्तु इससे पहले कि वह अपने पंख खोलता, तीसरी बूंद पड़ी और उसने ऊपर देखा, उसने पाया – अरे, उसने क्या देखा?
प्रसन्न राजकुमार की आँखें आँसुओं से भरी हुई थीं, तथा आँसू उसके सुनहरे गालों से नीचे लुढ़क रहे थे। चाँदनी में उसका चेहरा इतना अधिक सुन्दर लगता था कि छोटा अबाबील करुणा से ओत-प्रोत हो गया।
“तुम कौन हो ?” उसने कहा ।
“मैं प्रसन्न राजकुमार हूँ। “
” तब तुम क्यों रो रहे हो?” अबाबील बिल्कुल ही भिगो दिया । ” पूछा। “तुमने मुझको
“जब मैं जीवित था और मेरा हृदय मुनष्य का था”, मूर्ति ने उत्तर दिया, “मैं आँसुओं को जानता भी नहीं था, क्योंकि मैं महल में रहता था, जहाँ दुःख प्रवेश नहीं कर सकता था। मेरे दरबारी मुझे प्रसन्न राजकुमार कहा करते थे, और मैं वास्तव में प्रसन्न था। मैं प्रसन्नता में जीवित रहा और प्रसन्नता से मरा और चूँकि अब मैं मृत हूँ, तो उन्होंने मुझे इतनी ऊँचाई पर स्थापित कर दिया कि मैं अपने नगर की कुरूपता तथा गरीबी देख सकता हूँ और यद्यपि मेरा हृदय सीसे का बना है फिर भी रोए बिना नहीं रह सकता।”
“क्या! क्या वह ठोस सोना नहीं है?” अबाबील ने अपने मन में कहा। वह इतना विनम्र था कि उसने कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की।
“बहुत दूर”, धीमी संगीतमयी आवाज से मूर्ति कहती गई, “बहुत दूर, एक छोटी-सी गली में एक जीर्ण-शीर्ण घर है। उसकी एक खिड़की खुली है और मैं उसके अन्दर एक औरत को मेज के पास बैठा हुआ देख रहा हूँ। उसका चेहरा कमजोर और थका हुआ है और हाथ रूखे तथा लाल हैं, जो हर जगह सुई से छिदे हुए हैं, क्योंकि वह एक दर्जिन है। रानी की कुमारी दासियों में सबसे सुन्दर दासी को अगले दरबारी नृत्य में जिस साटन के गाउन को पहनना है, वह उस पर फूल निकाल रही है। कमरे के एक कोने में एक बिस्तर पर उसका छोटा-सा लड़का बीमार पड़ा है। उसे बुखार है और वह अपनी माँ से संतरे माँग रहा है। माँ के पास नदी के जल के अतिरिक्त उसे देने के लिए कुछ भी नहीं है; इसलिए वह रो रहा है। अबाबील, अबाबील, हे छोटे अबाबील, क्या तुम मेरी तलवार की मूठ में लगी लाल मणि को उस औरत तक नहीं पहुँचाओगे ? मेरे पैर इस चबूतरे में जकड़े हैं और मैं हिल नहीं सकता।”
“मेरी प्रतीक्षा मिस्र में हो रही है”, अबाबील ने कहा, “बड़े-बड़े कमल प्रसूनों से बातें करते हुए मेरे मित्रगण नील नदी के ऊपर उड़ रहे हैं। वे शीघ्र ही सो जाएँगे।”
राजकुमार ने अबाबील से उसके साथ एक रात्रि रुककर अपना दूत बनने के लिए कहा। “लड़का अत्यधिक प्यासा है और उसकी माँ अत्यन्त दुःखी,” वह बोला ।
“मैं नहीं सोचता हूँ कि मैं लड़कों को चाहता हूँ”, अबाबील ने उत्तर दिया, “मैं मिस्र जाना चाहता हूँ।”
परन्तु प्रसन्न राजकुमार इतना उदास हो गया कि वह छोटा-सा अबाबील भी दुःखी हो गया । “यहाँ बहुत ठंड है”, वह बोला । परन्तु वह एक रात्रि रुकने और उसका दूत बनने को राजी हो गया।
“धन्यवाद, छोटे अबाबील ।” राजकुमार बोला।
अबाबील ने अपनी चोंच से उस बहुमूल्य लाल मणि को राजकुमार की तलवार से निकाल लिया और उसे अपनी चोंच में पकड़कर वह नगर की छतों के ऊपर से उड़ गया।
वह गिरजाघर की उस मीनार के पास से गुजरा, जिस पर संगमरमर के देवदूत बने हुए थे। वह महल के पास से गुजरा और उसने, नृत्य की आवाज सुनी। एक सुन्दर लड़की अपने प्रेमी के साथ बालकनी पर बाहर आई।
“आशा है कि शाही नृत्य से पूर्व मेरी पोशाक तैयार हो जाएगी”, उसने उत्तर दिया । ” मैंने उस पर फूल काढ़ने का आदेश दिया है, परन्तु ये दर्जिनें बहुत सुस्त होती हैं। “
लटकती हुई लालटेनें देखीं। अन्त में वह उस जीर्ण-शीर्ण मकान पर आया वह नदी के ऊपर से गुजरा और उसने जलपोतों के मस्तूलों से और अन्दर झाँका । बुखार की बेचैनी में बालक बिस्तर पर करवटें बदल रहा था, और उसकी अत्यन्त थकी हुई माँ सो चुकी थी। अबाबील फुदककर अन्दर पहुँचा और उस बहुमूल्य लाल मणि को उस औरत के अंगुश्ताने के पास मेज पर रख दिया। फिर वह अबाबील बालक के मस्तक पर अपने पंखों से हवा करते हुए उसके बिस्तर के चारों ओर धीरे से उड़ा। ,“मैं कितना अच्छा (ठंडा) अनुभव कर रहा हूँ।” लड़के ने कहा, “अवश्य ही तबीयत ठीक हो रही है।” और वह मधुर नींद में डूब गया।
फिर अबाबील उड़कर प्रसन्न राजकुमार के पास वापस आया और उसको बतलाया कि उसने क्या किया । “विचित्र बात है”, वह बोला, ” यद्यपि बहुत सर्दी है, फिर भी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। “
“उसका कारण है क्योंकि तुमने एक अच्छा कार्य किया है”, राजकुमार ने कहा और छोटा अबाबील सोचने लगा, और फिर सो गया। उसको सोचने से हमेशा नींद आया करती थी।
जब दिन निकला, वह उड़कर नदी पर गया और स्नान किया। अबाबील ने कहा, ” आज रात में मैं मिस्र जाऊँगा । “
और अबाबील इस आसार पर उत्साहित था। उसने सभी स्मारकों का . दौरा किया और गिरजाघर की चोटी पर बहुत समय तक बैठा रहा ।
चन्द्रमा उदय होने पर वह प्रसन्न राजकुमार के पास वापस उड़कर आया। “क्या आपको मिस्र में कोई काम है?” वह चिल्लाया । “मैं अभी जा रहा हूँ।”
“अबाबील, अबाबील, छोटे अबाबील”, राजकुमार ने कहा, “क्या तुम मेरे साथ एक रात और ठहरोगे ?”
“मिस्र में मेरी प्रतीक्षा हो रही है”, अबाबील ने उत्तर दिया।
“अबाबील, अबाबील, छोटे अबाबील’, राजकुमार ने कहा, “बहुत दूर नगर के पार मुझे एक बरसाती में एक युवक दिखाई दे रहा है। वह कागज़ों से भरी मेज पर झुका हुआ है, और उसके पास रखे हुए गिलास में मुरझाए हुए वायलेट पुष्पों का गुलदस्ता है। उसके बाल भूरे तथा घुँघराले हैं, उसके होंठ अनार की तरह लाल हैं, और उसके नेत्र बड़े तथा स्वप्निल हैं। वह नाट्यशाला के निर्देशक के लिए एक नाटक को पूरा करने का प्रयास कर रहा है, परन्तु उसे इतनी ठंड लग रही है कि वह और लिख नहीं सकता। उसकी अँगीठी में आग नहीं ‘और भूख ने उसको मूच्छित – सा कर दिया है।”
“मैं तुम्हारे साथ एक रात्रि और रुकूँगा”, अबाबील ने कहा—वास्तव में अबाबील सुहृदय था। उसने पूछा कि क्या नाटककार के पास दूसरी लाल मणि ले जानी है?
उसने कहा, “अफसोस ! अब मेरे पास कोई लाल मणि नहीं है”, राजकुमार ने कहा। “मेरे पास केवल मेरे नेत्र शेष हैं । वे उन दुर्लभ नीलम से बने हैं, जो एक हजार वर्ष पूर्व भारत से लाई गई थीं। “
उसने अबाबील को आदेश दिया कि वह उनमें से एक को निकालकर नाटककार के पास ले जाए । “वह उसे जौहरी को बेच देगा, और कुछ लकड़ियाँ जलाने के लिए क्रय करेगा और अपना नाटक पूरा कर सकेगा।”
“प्रिय राजकुमार”, अबाबील बोला, “मैं ऐसा नहीं कर सकता”, और वह रोने लगा।
“अबाबील, अबाबील, छोटे अबाबील”, राजकुमार ने कहा, “मेरी आज्ञा का पालन करो। “
अत: अबाबील ने राजकुमार की आँख निकाल ली और विद्यार्थी की बरसाती की ओर उड़ा। अन्दर प्रवेश सुगम था, क्योंकि छत में एक छेद था। वह उसके अन्दर तेजी से प्रविष्ट हुआ और कमरे में आ गया। नवयुवक अपने सिर को हाथों में लिए हुए था; अतः उसने पक्षी के पंखों का फड़फड़ाना नहीं सुना। और उसने जब दृष्टि ऊपर उठाई तो उसने देखा कि वायलेट के मुरझाए हुए फूलों पर एक सुन्दर नीलम रखी हुई है।
” मेरी सराहना होने लगी है”, वह चिल्लाया । “यह किसी बड़े प्रशंसक का उपहार है। अब मैं अपना नाटक समाप्त कर सकता हूँ,” और वह बहुत प्रसन्न प्रतीत होता था ।
अगले दिन अबाबील उड़कर बन्दरगाह पर गया । वह एक बड़े जलयान के मस्तूल पर बैठ गया और नाविकों को कार्य करते देखा । “मैं मिस्र जा रहा हूँ”, अबाबील चिल्लाया, परन्तु किसी ने उसकी परवाह नहीं की, और जब चन्द्रोदय हुआ वह उड़कर प्रसन्न राजकुमार के पास गया।
“मैं आपको अलविदा करने आया हूँ,” वह चिल्लाया।
“अबाबील, अबाबील, छोटे अबाबील”, राजकुमार ने कहा, “क्या ने तुम मेरे पास एक रात्रि और नहीं रुकोगे?”
” सर्दी का मौसम है”, अबाबील ने उत्तर दिया, “और यहाँ शीघ्र ही हिमपात होने लगेगा। मिस्र में खजूर के वृक्षों के सूर्य की धूप उष्ण है और कीचड़ में पड़े मगरमच्छ सुस्ती से चारों ओर देख रहे हैं।”
“नीचे प्रांगण में”, प्रसन्न राजकुमार ने कहा, “ माचिस बेचने वाली छोटी-सी लड़की खड़ी है। उसकी सारी माचिसें नाली में गिर गई हैं और वे सब बेकार हो गई हैं । यदि वह अपने घर कुछ पैसे लेकर नहीं जाएगी, तो उसका पिता उसे पीटेगा, और वह रो रही है। उसके पास न जूते हैं न मोजे और उसका छोटा-सा सिर नंगा है।
मेरी दूसरी आँख निकाल लो और उसको दे आओ, और उसके पिता उसको नहीं पीटेंगे।”
“मैं एक रात्रि आपके पास और रुकूँगा”, अबाबील ने कहा, “परन्तु मैं आपकी आँख नहीं निकाल सकता। आप नेत्रहीन हो जाएँगे ।”
“अबाबील, अबाबील, छोटे अबाबील”, राजकुमार ने कहा, “मैं जैसा कहता हूँ, वैसा ही करो। “
अत: अबाबील ने राजकुमार की दूसरी आँख निकाल ली और उसको लेकर तेजी से चल पड़ा। वह झपट्टा मारकर माचिस बेचने वाली लड़की से आगे निकल गया और उसकी हथेली पर वह नगीना रख दिया।
” कितना सुन्दर शीशे का टुकड़ा।” छोटी लड़की चिल्लाई, और वह हँसती हुई घर की ओर भाग गई।
तब अबाबील राजकुमार के पास लौट आया। “अब तुम नेत्रहीन हो गए हो”, उसने कहा, “अतः मैं सदैव तुम्हारे पास रहूँगा । “
“नहीं, छोटे अबाबील”, बेचारे राजकुमार ने कहा, “तुम्हें मिस्र अवश्य जाना चाहिए।”
“नहीं, मैं सदैव तुम्हारे पास रहूँगा,” अबाबील ने कहा, और वह राजकुमार के चरणों में सो गया ।
अगले पूरे दिन वह राजकुमार के कन्धे पर बैठा रहा, और उसने राजकुमार को वे कहानियाँ सुनाईं, जो उसने परिचित देशों में देखी थीं।
“प्रिय छोटे अबाबील “, राजकुमार ने कहा, “तुम मुझे आश्चर्यजनक बातें कहते हो, किन्तु किसी भी चीज की अपेक्षा पुरुषों और स्त्रियों का कष्ट अधिक आश्चर्यजनक है। दुःख से बढ़कर कोई रहस्य नहीं है। छोटे अबाबील, मेरे नगर पर उड़ो, और मुझे बताओ जो तुम वहाँ देखते हो ।”
अतः अबाबील विशाल नगर के ऊपर उड़ा, और देखा कि धनी लोग अपने सुन्दर मकानों में आनन्द मना रहे हैं, जबकि भिखारी लोग दरवाजों पर बैठे रहते हैं। वह अँधेरी गलियों में उड़ा और उसने देखा कि भुखमरी के शिकार बच्चे, जिनके चेहरे सफेद पड़ गए हैं, उदास होकर अँधेरी गलियों की ओर देख रहे हैं। एक पुल की मेहराब के नीचे दो छोटे-से लड़के अपने को गर्म रखने के प्रयास में एक-दूसरे की भुजाओं में पड़े थे। “हम कितने भूखे हैं।” वे बोले । “तुम्हें यहाँ नहीं लेटना चाहिए”, चौकीदार चिल्लाया और वे बाहर वर्षा में घूमने लगे। “
तब वह उड़कर वापस आया और उसने राजकुमार को बताया कि उसने क्या देखा ।
“मेरे शरीर पर सुन्दर सोना मढ़ा है”, राजकुमार बोला, “तुम इसको पत्रक – पत्रक करके उतार लो और उन गरीबों को दो। जीवित व्यक्ति सदैव सोचते हैं कि स्वर्ण उन्हें प्रसन्न रख सकता है। “
अबाबील ने पत्रक – पत्रक करके सुन्दर सोने को उतार लिया, यहाँ तक कि प्रसन्न राजकुमार बिल्कुल भद्दा और स्लेटी दिखाई देने लगा। पत्रक – पत्रक करके उसने सुन्दर सोना गरीबों को लाकर दे दिया।
और बच्चों के चेहरे अधिक गुलाबी हो गए और वे हँसने लगे तथा गली में खेलने लगे। “अब हमारे पास रोटी है ।” वे चिल्लाए ।
तब हिमपात हुआ और तत्पश्चात् पाला पड़ा। गलियाँ ऐसी प्रतीत हो रही थीं जैसे कि चाँदी की बनी हों। सभी अच्छे कपड़े पहने हुए थे और छोटे बालक लाल रंग की टोपी पहने बर्फ पर स्केटिंग कर रहे थे।
बेचारे छोटे अबाबील के लिए ठंड लगातार बढ़ती जा रही थी, परन्तु वह राजकुमार से इतना अधिक प्रेम करने लगा था कि उसको छोड़कर नहीं जा सकता था। वह बेकरी वाले के दरवाजे पर पड़े टुकड़े तब उठा लिया करता था जब बेकरी वाले की दृष्टि उस ओर नहीं होती थी, तथा पंख फड़फड़ाकर अपने को गर्म रखने का प्रयत्न करता था।
परन्तु अन्त में वह जान गया कि वह मरने वाला है। उसमें केवल इतनी शक्ति शेष थी कि एक बार वह उड़कर राजकुमार के कन्धे तक आ सका। “अलविदा, प्रिय राजकुमार ।” वह बड़बड़ाया, “क्या तुम अपना हाथ चूमने की अनुमति दोगे ?”
“छोटे अबाबील, मैं प्रसन्न हूँ कि तुम अन्ततः मिस्र जा रहे हो”, राजकुमार ने कहा । “तुम यहाँ बहुत समय तक रुके परन्तु तुमको मेरे होंठों को चूमना होगा, क्योंकि मैं तुमसे प्रेम करता हूँ।”
“मैं मित्र नहीं जा रहा हूँ’, अबाबील बोला। “मैं मृत्यु के घर जा रहा हूँ। मृत्यु निद्रा का भाई है, है ना?”
और उसने प्रसन्न राजकुमार के होंठों का चुम्बन लिया और उसके चरणों पर गिरकर मर गया।
उसी क्षण मूर्ति अन्दर से कुछ अजीब-सी चटखने की आवाज आई जैसे कि कुछ टूट गया हो। तथ्य यह था कि सीसे का दिल टूटकर ठीक दो टुकड़े हो गए थे। निश्चित रूप से भयानक पाला पड़ा था।
अगले दिन प्रातः ही नगर का महापौर नगर पार्षदों के साथ वहाँ नीचे प्रांगण में सैर कर रहा था। जब वे लोग स्तम्भ के निकट से गुजरे तो उसने ऊपर मूर्ति की ओर देखा । “अरे सुनो! प्रसन्न राजकुमार कितना भद्दा लग रहा है।” वह बोला ।
“वास्तव में, बहुत भद्दा ।” वे नगर पार्षद चिल्लाए जो सदैव महापौर की हाँ में हाँ मिलाते थे और आगे बढ़कर उस मूर्ति को देखने लगे ।
“लाल मणि उसकी तलवार से बाहर गिर चुकी है, उसकी आँखें विदा हो चुकी हैं, और वह अब सुनहरा भी नहीं है”, महापौर बोला, “सच तो यह है कि वह किसी भिखारी से बेहतर नहीं है । “
“भिखारी से थोड़ा अच्छा”, नगर पार्षद बोला ।
“और वास्तव में उसके पैरों में एक मृत पक्षी पड़ा है!” महापौर कहता गया । “हमें अवश्य ही यह घोषणा करवानी चाहिए कि पक्षियों को यहाँ मरने की आज्ञा नहीं होगी।” और नगर लिपिक ने इस सुझाव को लिख लिया।
अतः उन्होंने प्रसन्न राजकुमार की मूर्ति को गिरा दिया। “क्योंकि अब वह सुन्दर नहीं था, वह अब उपयोगी भी नहीं रहा”, विश्वविद्यालय के कला विभाग के प्रोफेसर ने कहा । ‘
तब उन्होंने मूर्ति को भट्ठी में पिघलाया। ‘क्या विचित्र चीज़ है । ‘ फाउण्ड्री के कारीगरों के ओवरसीयर ने कहा । “यह टूटा हुआ सीसे का हृदय भट्ठी में नहीं पिघलेगा। हमें इसको फेंक देना चाहिए।” अतः उन्होंने उसको धूल के ढेर पर फेंक दिया जहाँ मृत अबाबील भी पड़ा हुआ था ।
“नगर से मुझे दो सबसे अधिक मूल्यवान चीजें लाकर दो”, ईश्वर ने अपने देवदूतों में से एक से कहा; और वह देवदूत ईश्वर के पास सीसे का हृदय तथा मृत पक्षी ले गया।
“तुमने ठीक रूप से चुना है”, ईश्वर ने कहा, “क्योंकि मेरे स्वर्ग के उद्यान में यह छोटा-सा पक्षी सदैव के लिए गाता रहेगा और मेरे स्वर्ण नगर में प्रसन्न राजकुमार मेरी अवश्य प्रशंसा करेगा।”
LONG ANSWER TYPE QUESTIONS
(To be answered in about 100 words)
Q.1. What does the swallow see when it flies over the city ?
( जब अबाबील नगर के ऊपर उड़ा, तो उसने क्या देखा ? )
Ans. Introduction: The Prince asked the swallow to fly over his city and tell him what it saw there.
What the swallow saw: The swallow flew over the great city. He saw the rich making merry in their beautiful houses, while the beggars were sitting at the gates. He flew into dark lanes. He saw the white faces of starving children looking out listlessly at the black streets.
Under the archway of a bridge two little boys were lying in each other’s arms to try and keep themselves warm. They said, “How hungry we are!”
“You must not lie here”, shouted the watchman and they wandered out into the rain.
Conclusion: Then the swallow flew back and told the Prince what he had seen.
[ भूमिका – राजकुमार ने अबाबील से नगर पर उड़ने के लिए कहा और उसने जो देखा उसको बताने के लिए कहा।
अबाबील ने क्या देखा – अबाबील महान नगर के ऊपर उड़ा। उसने देखा कि अमीर लोग अपने सुन्दर मकानों में आनंद मना रहे हैं, जबकि भिखारी दरवाजों पर बैठे हुए हैं। वह अँधेरी गलियों में उड़ा। उसने भुखमरी के शिकार बच्चों के सफेद चेहरे देखे जो अँधेरी गलियों की ओर उदास होकर देख रहे थे।
एक पुल के मेहराब के नीचे दो छोटे लड़के अपने को गर्म रखने के प्रयास में एक-दूसरे की भुजाओं में पड़े थे। वे बोले, “हम कितने भूखे हैं!”
“तुम्हें यहाँ लेटना नहीं चाहिए”, चौकीदार चिल्लाया और वे बाहर वर्षा में घूमने लगे।
निष्कर्ष – तब अबाबील उड़कर वापस राजकुमार के पास आया और उसने जो देखा, वह उसको बतलाया ।]
Q. 2. What are the precious things mentioned in the story ? Why are they percious ?
(कहानी में बताई गई मूल्यवान वस्तुएँ क्या हैं? वे क्यों मूल्यवान हैं? )
Ans. Introduction: One day God said to one of his Angels, “Bring me the two most precious things in the city.”
The precious things: The Angel brought Him the leaden heart and the dead bird. God appreciated the choice made by the Anger God said, “You have rightly chosen, for in my garden of Paradise. This little bird shall sing for ever more and in my city of gold the Happy Prince shall praise me.”
Why precious: The Happy Prince was sad to see the ugliness and all the misery of his city. The swallow was going to Egypt. He gave up his mission and became the messenger of the Happy Prince. He implemented and executed the wish of the Happy Prince. The Happy Prince gave his ruby, sapphires and leaves of gold that covered his body for the sake of the poor people of the city. The swallow grew colder and colder, but he did not leave the Prince. He loved him too well. He picked up crumbs outside the baker’s door and tried to keep himself warm by flapping his wings. He died and fell at the Prince’s feet.
Conclusion: The Happy Prince and the swallow sacrificed their lives for the service of the poor.
[ भूमिका – एक दिन ईश्वर ने अपने एक देवदूत से कहा, “नगर में जो सबसे अधिक मूल्यवान दो चीजें हैं, उनको मेरे पास लाओ ।”
मूल्यवान वस्तुएँ — देवदूत ईश्वर के पास सीसे का हृदय और मृत चिड़िया लाया। ईश्वर ने देवदूत की चुनी हुई चीजों की सराहना की। ईश्वर ने कहा, “तुमने ठीक रूप से चुना है, क्योंकि स्वर्ग के मेरे उद्यान में यह छोटी चिड़िया सदैव गाती रहेगी और मेरी सोने की नगरी में प्रसन्न राजकुमार मेरी प्रशंसा करेगा । “
मूल्यवान क्यों – प्रसन्न राजकुमार अपने नगर की कुरूपता और गरीबी देखकर दुःखी था। अबाबील मिस्र जा रहा था। उसने अपना लक्ष्य छोड़ दिया और प्रसन्न राजकुमार का दूत बन गया। उसने प्रसन्न राजकुमार की इच्छा को कार्यान्वित किया। प्रसन्न राजकुमार ने अपनी लाल मणि, नीलम और स्वर्णपत्र जिनसे उसका शरीर ढका हुआ था नगर के गरीब लोगों की भलाई के लिए दे दिए।
अबाबील अधिकाधिक ठण्डा होता गया, पर उसने राजकुमार को नहीं छोड़ा। वह राजकुमार को बहुत अधिक प्रेम करता था। वह नानबाई के दरवाजे के बाहर पड़े छोटे-छोटे टुकड़े चुनता था और अपने पंख फड़फड़ाकर अपने को गर्म रखने का प्रयास करता था । वह मर गया और राजकुमार के चरणों में गिर गया।
निष्कर्ष – प्रसन्न राजकुमार और अबाबील ने गरीबों की सेवा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया ।]
SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS
of interpretative and evaluative nature
(To be answered in 30-40 words)
Q. 1. Why do the courtiers call the prince ‘The Happy Prince’ ? Is he really happy ? What does he see all around him?
(दरबारी लोग राजकुमार को ‘प्रसन्न राजकुमार’ क्यों कहते हैं? क्या वह वास्तव में प्रसन्न है? वह अपने चारों ओर क्या देखता है? )
Ans. The courtiers called the prince ‘The Happy Prince’ because he lived in the palace where he did not know what sorrow was, while he was alive.
He is really not happy.
He sees the ugliness and misery of his city all around him.
(दरबारी राजकुमार को ‘प्रसन्न राजकुमार’ कहते थे क्योंकि वह जब जीवित था, वह महल में रहता था और उसे यह भी पता नहीं. था कि दुःख क्या होता है।
वह वास्तविक रूप से प्रसन्न नहीं है।
वह चारों ओर अपने नगर की कुरूपता और गरीबी देखता है।)
Q.2. Why did the swallow not leave the prince and go to Egypt ?
(अबाबील ने राजकुमार को क्यों नहीं छोड़ा और वह मिस्र क्यों ने नहीं गया ? )
Ans. The swallow did not leave the prince and go to Egypt for the following reasons:
(1) The prince had become total blind.
(2) The prince sacrificed his all for the service of the poor.
(3) The swallow loved him too well.
( अबाबील ने राजकुमार को नहीं छोड़ा और वह मिस्र नहीं गया; इसके निम्नलिखित कारण हैं-
(1) राजकुमार बिल्कुल अन्धा हो गया था ।
(2) राजकुमार ने गरीबों की सेवा के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर दिया था।
(3) अबाबील राजकुमार को बहुत अधिक प्रेम करता था । )
VERY SHORT ANSWER TYPE QUESTIONS
based on factual aspects of the lesson
(To be answered in 20-30 words)
Q1. Why does the Happy Prince send a ruby for the seamstress? What does the swallow do in the seamstress’ house ?
[प्रसन्न राजकुमार दर्जिन के पास लाल मणि क्यों भेजता है? अबाबील दर्जिन के घर में क्या करता है ? )
Ans. The Happy Prince sends a ruby for the seamstress because she is too poor to afford oranges for her ill son.
The swallow puts the ruby on the table in the house of the seamstress and flys gently round the bed, fanning the boy’s forehead with his wings.
(प्रसन्न राजकुमार दर्जिन के लिए लाल मणि भेजता है क्योंकि : वह इतनी गरीब हैं कि अपने बीमार लड़के के लिए संतरे प्रदान नहीं कर सकती।
अबाबील दर्जिन के कमरे में मेज पर लाल मणि रख देता है और लड़के के माथे पर अपने पंखों से हवा करने के लिए उसके. बिस्तरे के चारों ओर धीरे से उड़ता है। )
Q.2. For whom does the prince send the sapphires and why?
(राजकुमार किसके लिए नीलम भेजता है और क्यों ? )
Ans. The Prince sends the sapphires for the young playwright because he is hungry and cold; and for the match girl to save her from her father’s beating.
(राजकुमार युवा नाटककार के लिए नीलम भेजता है क्योंकि वह भूखा है और उसे ठण्ड लग रही है; दूसरी नीलम माचिस बेचने वाली लड़की के पास भेजता है ताकि उसका पिता उसकी पिटाई न करे।)
Q.3. What does the swallow see when it flies over the city ?
(जब अबाबील नगर के ऊपर उड़ता है तो वह क्या देखता है? )
Ans. When the swallow flies over the city, it sees the rich making marry in their beautiful houses, the beggars sitting at the gates. The poor children are suffering from starvation.
(जब अबाबील नगर पर उड़ता है, वह अमीरों को अपने सुन्दर घरों में आनंद लेते हुए देखता है, भिखारियों को दरवाजों पर बैठे देखता है। गरीब बच्चे भुखमरी के शिकार हैं। )

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