UK 10TH ENGLISH

UK Board 10th Class English – (Supplementary Reading) – Chapter 2 The Thief’s Story

UK Board 10th Class English – (Supplementary Reading) – Chapter 2 The Thief’s Story

UK Board Solutions for Class 10th English – (Supplementary Reading) – Chapter 2 The Thief’s Story

Read and Find Out – 1
(पढ़ो और ढूँढो)
Q. 1. Who does I’ refer to in this story ?
(इस कहानी में ‘आई’ किस सन्दर्भ में है ? )
Ans. In this story ‘I’ is in the reference of narrator.
(इस कहानी में ‘I’ वक्ता के सन्दर्भ में है। )
Q. 2. What is he “a fairly successful hand” at?
(वह क्या है “एक सफल हाथ सफाई वाला’ ? )
Ans. He is ‘a fairly successful hand’ at stealing things (because he is a thief)
(वह चीजों को चुराने में सफल हाथ सफाई वाला है। (क्योंकि वह एक चोर है ।)
Q.3. What does he get from Anil in return for his work ?
(अनिल से उसे अपने कार्य के बदले में क्या प्राप्त हुआ ? )
Ans. He gets from Anil in return for his work a place to sleep and food to eat.
(अनिल से उसे अपने कार्य के बदले में सोने के लिए स्थान और खाने के लिए भोजन प्राप्त हुआ । )
Read and Find Out – 2
(पढ़ो और ढूँढो)
Q.1. How does the thief think Anil will react to. the theft ?
( चोर ने क्या सोचा कि अनिल चोरी के प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा ? )
Ans. The thief thinks that Anil would be sad when he would discover the theft.
( चोर ने सोचा कि अनिल दुःखी होगा जब वह चोरी की खोज करेगा।)
Q. 2. What does he say about the different reactions of people when they are robbed ?
(जब वे लूटे जाएँगे तो विभिन्न लोगों की प्रतिक्रिया के बारे में वह क्या कहेगा ? )
Ans. He says that a greedy man shows fear. A rich man shows anger. A poor man shows acceptance. There are different reactions of people when they are robbed.
( वह कहता – एक लालची व्यक्ति डर गया। धनाढ्य क्रोध बताता । गरीब आदमी अपनी स्वीकृति बताता। लोगों की विभिन्न प्रतिक्रियाएँ होतीं, जब वे लूटे जाते । )
Q. 3. Does Anil realise that he has been robbed ?
(क्या अनिल ने अनुभव किया कि वह लूटा गया है ? )
Ans. I think Anil does realise that he has been robbed. Persons like Anil have a large heart. They do not attach importance to money. Anil reviews the situations and decides to overlook Hari Singh’s theft.
(मैं सोचता हूँ कि अनिल ने यह अनुभव किया कि वह लूटा गया । अनिल जैसे लोग बड़ा हृदय रखते हैं। वे पैसे को महत्त्व नहीं देते। अनिल ने स्थिति का जायजा लिया और हरिसिंह की चोरी को नजरअन्दाज करने का निर्णय लिया। )

SUMMARY OF THE STORY

It is a story of a thief who was a boy of fifteen. The thief is the narrator of the story himself. He assumed the name Hari Singh.
He says though he was only fifteen, he was an experienced and fairly successful thief.
At a wrestling match he meets a man named Anil. He offers to work for Anil only for food. He starts living with Anil at his house. His main purpose was to rob Anil.
Anil shows full trust in the boy. He gives him the key of his house. Anil knows that the boy makes money in his daily purchases. But Anil does not mind it. He teaches the boy how to write.
One day Anil sells a book to a publisher. He brings home a small bundle of notes. While sleeping Anil tucks the money under the mattress. The boy sees all this. He steals the money and runs with it in the night. He wants to catch Lucknow Express which leaves at 10-30 in the night. But he hesitates to jump into the carriage for some reasons unknown to us.
He realizes that Anil will see this act of stealing as an act of betraying. The boy leaves the platform. But he does not know where to pass the night. He knows no other man than Anil. He starts for Anil’s house. On his way he is drenched to the skin by a heavy rain. The notes are also damp. He hurries back to Anil’s room. He opens the door. He finds Anil still asleep. He put the wet notes under the mattress of Anil.
Next morning the boy awakes late. Anil has already made the tea. Anil gives the boy a fifty rupee note, saying he made some money yesterday and the boy will be paid regularly.
Anil knew about the dishonest act of the boy. All the same he did not reveal his feelings. He said to the boy, “Today we’ll start writing sentences.”
The kind action of Anil changes the heart of the boy.

सम्पूर्ण पाठ का हिन्दी रूपान्तर

चोर की कहानी
अनिल एक नवयुवक से मित्रता करता है जो चोर है। वह उसको अपने कमरे में रहने की अनुमति देता है। अनिल उस पर विश्वास करता है। क्या चोर विश्वासघात करता है?
जब मैं अनिल से मिला, मैं तब भी चोर था। यद्यपि मेरी आयु केवल पन्द्रह वर्ष की थी, मैं एक अनुभवी और औसतन रूप से सफल चोर था ।
जब मैं अनिल के पास पहुँचा, वह दंगल में कुश्ती देख रहा था। वह लगभग पच्चीस वर्ष का था, लम्बा और पतला आदमी था। वह आरामतलब, दयालु और मेरे उद्देश्य के लिए पर्याप्त सीधा दिखाई देता था। कुछ दिन से मैं चोरी का माल प्राप्त नहीं कर सका था और मैंने सोचा कि मैं युवा आदमी का विश्वास जीतने में सफल हो सकूँ।
“आप स्वयं भी एक पहलवान जैसे लगते हैं” मैंने कहा। थोड़ी-सी चापलूसी मित्रता करने में सहायता करती है।
उसने उत्तर दिया, “तुम भी पहलवान जैसे लगते हो।” इस बात ने मुझे पल भर के लिए निरुत्तर कर दिया क्योंकि उस समय मैं अपेक्षाकृत पतला था।
मैंने विनम्रतापूर्वक कहा, “ठीक, मैं थोड़ी-सी पहलवानी तो करता हूँ।”
” तुम्हारा नाम क्या है?”
मैं झूठ बोला, “हरि सिंह।” मैं हर माह नया नाम ग्रहण करता हूँ। उससे मैं पुलिस और अपने पहले मालिकों के हाथ नहीं आता।
इस परिचय के बाद, अनिल ने चिकने चुपड़े पहलवानों के बारे में बात की जो घुरड़-घुरड़ कर रहे थे, एक-दूसरे को उठा रहे थे और फेंक `रहे थे। मेरे पास कुछ कहने के लिए नहीं था। अनिल चल दिया। मैं आराम से और निश्चिन्त होकर उसके पीछे-पीछे चल दिया।
उसने कहा, “पुन: हैलो ।”
मैं बहुत आकर्षक ढंग से मुस्कराया। मैंने कहा, “मैं आपके पास काम करना चाहता हूँ।”
” पर मैं तुम्हें वेतन नहीं दे सकता। “
मैंने इस बात पर एक मिनट विचार किया। शायद मैंने अपने आदमी के बारे में गलत निर्णय किया। मैंने पूछा, “क्या आप मुझे भोजन दे सकते हैं? “
“क्या तुम खाना बना सकते हो?”
मैंने पुनः झूठ बोला, “मैं खाना बना सकता हूँ।”
“यदि तुम खाना बना सकते हो, तब मैं तुम्हें खाना खिला सकता हूँ।”
वह मुझे जमना स्वीट शॉप के ऊपर अपने कमरे में ले गया और मुझसे कहा कि मैं छज्जे पर सो सकता हूँ। पर उस रात मैंने जो भोजन बनाया था वह बहुत ही बुरा रहा होगा क्योंकि अनिल ने उसे एक आवारा कुत्ते को खिलाया और मुझे वहाँ से चले जाने के लिए कहा। पर मैं वहाँ इधर-उधर घूमता रहा, मैं अपने बहुत आकर्षक ढंग से मुस्कराता रहा, और वह हँसे बिना नहीं रह सका।
बाद में उसने मेरा सिर थपथपाया और कहा चिन्ता न करो, वह मुझे खाना बनाना सिखाएगा। उसने मुझे मेरा नाम भी लिखना सिखाया और कहा कि वह मुझे पूरे वाक्य लिखना भी सिखाएगा और गिनती जोड़ना भी सिखाएगा। मैं कृतज्ञ था। मैं जानता था कि यदि एक बार मैं शिक्षित आदमी के समान लिखना सीख गया तो जो मैं प्राप्त कर सकता था उसकी कोई सीमा नहीं होगी।
अनिल के लिए काम करने में बहुत आनन्द आता था। मैं सुबह चाय बनाता था और तब मैं दिन के लिए आवश्यक आपूर्ति की चीजें खरीदने में समय लगाता था, मैं सामान्यतः प्रतिदिन एक रुपये का मुनाफा कमा लेता था। मैं सोचता हूँ कि वह जानता था कि मैं इस तरह थोड़ा पैसा कमा लेता हूँ पर वह इसकी चिन्ता नहीं करता था ।
अनिल अनियमित रूप से पैसे कमाता था। वह एक सप्ताह उधार लेता था और दूसरे सप्ताह उधार लौटाता था। उसे अपने दूसरे चैक की चिन्ता नहीं रहती थी, पर जैसे ही वह चैक आता था, वह बाहर जाता था और आनन्द मनाता था। ऐसा लगता है कि वह पत्रिकाओं के लिए लिखता था— जीविका उपार्जन करने का विचित्र तरीका ।
एक दिन शाम को वह नोटों का छोटा बण्डल लेकर घर आया, उसने बताया कि उसने अभी प्रकाशक को एक पुस्तकं बेची है। रात में मैंने उसको गद्दे के नीचे पैसा रखते देखा।
मुझे अनिल के लिए काम करते हुए लगभग एक माह हो गया था, खरीदारी करने में उसको धोखा देने के अतिरिक्त, मैंने अपना चोरी करने के धन्धे का कोई काम नहीं किया। मुझे ऐसा करने के लिए बहुत अवसर मिलते थे। अनिल ने मुझे दरवाजे की एक चाबी दी थी और मैं अपनी इच्छानुसार आ-जा सकता था जितने आदमियों से मैं मिला हूँ वह सबसे अधिक विश्वास करने वाला आदमी था।
और यही कारण है उसको लूटना इतना कठिन है। लोभी आदमी को लूटना सरल है, क्योंकि उसके पास लुटने के लिए पर्याप्त पैसा हो सकता है, पर एक लापरवाह आदमी को लूटना कठिन है— कभी-कभी वह यह भी नहीं देख पाता कि वह लुट गया है और इससे उस काम का पूरा आनन्द ही समाप्त हो जाता है ।
अच्छा, कुछ वास्तविक कार्य करने का अब समय है, मैंने अपने मन में कहा : अब मुझे अभ्यास नहीं रहा। और यदि मैं यह धन नहीं लेता तो वह उसे अपने दोस्तों पर केवल व्यर्थ खर्च करेगा। वैसे भी, वह मुझे वेतन तो नहीं देता।
अनिल सोया हुआ था। चन्द्रमा की किरणों का एक पुंज छज्जे पर पड़ा और बिस्तर पर भी पड़ा। मैं फर्श पर बैठ गया, स्थिति का मूल्यांकन करता रहा। यदि मैं पैसा लूँ तो मैं लखनऊ जाने वाली 10:30 वाली एक्सप्रेस पकड़ सकता हूँ। कम्बल से बाहर निकल कर मैं रेंगकर बिस्तर के पास गया। अनिल शान्तिपूर्वक सो रहा था । उसका चेहरा स्पष्ट था, उस पर कोई झुर्री नहीं थी, जबकि मेरे चेहरे पर अधिक निशान थे यद्यपि मेरे चेहरे पर अधिकांश चोटों के निशान थे।
नोटों की तलाश करते हुए मेरा हाथ गद्दे के नीचे फिसला । जब मुझे वे मिल गए, तो मैंने बिना आवाज किए उनको बाहर निकाला। अनिल ने अपनी नींद में गहरी साँस ली और मेरी ओर करवट बदली। मैं चौंक गया और तेज़ी से कमरे के बाहर रेंगकर निकल गया।
जब मैं सड़क पर आया, मैंने दौड़ना शुरू किया। मैंने नोटों को अपनी कमर में पायजामे के इजारबन्द से बाँध रखा था। मैं धीरे-धीरे चलने लगा और मैंने नोटों को गिना : छह सौ रुपये के पचास-पचास के नोट थे। – मैं एक चिकने चुपड़े अरब के समान एक-दो सप्ताह रह सकता था।
जब मैं स्टेशन पहुँचा, मैं टिकट ऑफिस पर नहीं रुका ( मैंने अपने जीवन में कभी टिकट नहीं खरीदा था ) मैं सीधे दौड़कर प्लेटफार्म पर गया। लखनऊ एक्सप्रेस अभी चली ही थी। रेलगाड़ी को अभी गति पकड़नी थी और किसी एक डिब्बे में कूद कर बैठ सकता था, पर मैं झिझका – कुछ ऐसे कारण थे जिनको मैं बता नहीं सकता था- और मैंने भाग जाने का अवसर गँवा दिया।
जब रेलगाड़ी चली गई, मैंने अपने आपको निर्जन प्लेटफार्म पर खड़ा पाया। मेरे मन में कोई विचार नहीं था कि मैं रात कहाँ गुजारूँ। मेरा कोई मित्र नहीं था, मेरा विश्वास था कि मित्र सहायता की अपेक्षा अधिक समस्या होते हैं। स्टेशन के निकट किसी छोटे होटल में ठहरकर मैं किसी की जिज्ञासा उत्पन्न नहीं करना चाहता था । मात्र व्यक्ति जिसको मैं वास्तविक रूप से अच्छी तरह जानता था वही आदमी था जिसको मैंने लूटा था। स्टेशन छोड़कर, मैं बाजार से होकर धीरे-धीरे चला ।
चोर के रूप में अपने छोटे व्यवसाय में, मैंने आदमियों के चेहरों का अध्ययन किया था जब उनका सामान गुम हो गया था। लोभी आदमी भय प्रदर्शित करते थे, धनी आदमी क्रोध प्रदर्शित करते थे, गरीब आदमी सहमति प्रदर्शित करते थे। पर मैं जानता था जब अनिल को चोरी का पता चलेगा, उसके चेहरे पर चिन्ता का कोई लक्षण दिखाई देगा। धन की हानि के कारण नहीं, पर विश्वास के खोए जाने के कारण।
मैं मैदान में पहुँच गया और एक बैंच पर बैठ गया। रात बहुत ठण्डी थी — नवम्बर का आरम्भ था — और हल्की बूंदाबांदी ने मेरी परेशानी बढ़ा दी। जल्दी ही मूसलाधार वर्षा होने लगी। मेरी कमीज़ और पायजामा मेरी चिपक गए और ठण्डी हवा ने मेरे चेहरे के आर-पार वर्षा की बौछार की। त्वचा
मैं पुन: बाजार गया और घण्टाघर की छाया में जा बैठा। घड़ी रात के बारह बजा रही थी। मैंने रुपयों को देखा। वे बारिश में गीले हो गए थे।
वह अनिल के पैसे थे। प्रातः वह शायद सिनेमा जाने के लिए मुझे दो या तीन रुपये देता, पर अब मेरे पास सारा पैसा है। मैं अब उसका खाना नहीं बना सकूँगा, बाजार में नहीं जा सकूँगा और पूरे वाक्य लिखना नहीं सीख सकूँगा।
चोरी की उत्तेजना में मैं उन सारी बातों को भूल चुका था। मैं जानता था कि पूरे वाक्य एक दिन मेरे पास सैकड़ों रुपयों की अपेक्षा कहीं अधिक रुपये ला सकते थे। यह चोरी करने की एक साधारण बात थी और कभी-कभी पकड़े जाने की भी इतनी ही साधारण बात थी। पर वास्तव में बड़ा आदमी, चतुर और आदरणीय आदमी होना कुछ और ही बात थी। मुझे अनिल के पास वापस जाना चाहिए, मैंने अपने मन में कहा, यदि मैं -पढ़ना और लिखना सीखना चाहता हूँ ।
मैं घबराता हुआ कमरे पर भागा गया, क्योंकि कोई चीज़ चुराना कहीं अधिक आसान है अपेक्षाकृत बिना पता चले उसको लौटाना। मैंने चुपचाप दरवाज़ा खोला, तब दरवाजे के बीच खड़ा हो गया, चाँदनी बादलों से प्रभावित थी। अनिल अब भी सोया हुआ था। मैं बिस्तर के सिरहाने की ओर रेंगकर गया और मैंने अपने हाथ में नोट निकाले। मेरे हाथ पर उसका साँस अनुभव हुआ । मैं एक मिनट शान्त रहा। तब मेरा हाथ गद्दे के किनारे पर पहुँच गया और उसके नीचे नोटों सहित फिसल गया।
मैं अगली प्रातः देर से उठा, मैंने देखा अनिल पहले ही चाय बना चुका था। उसने मेरी ओर अपना हाथ बढ़ाया। उसकी अंगुलियों के बीच पचास रुपये का नोट था। मेरा हृदय बैठ गया। मैंने सोचा मेरी चोरी का पता चल गया।
उसने बतलाया, “मैंने कल कुछ पैसा कमाया था, अब तुम्हें नियमित रूप से वेतन मिलेगा। “
मेरा उत्साह बढ़ गया। पर जब मैंने नोट लिया, मैंने देखा कि रात की वर्षा से उस समय भी भीगा हुआ था।
उसने कहा, “आज हम वाक्य लिखना आरम्भ करेंगे।”
वह जान गया था। पर न तो उसके होठों ने और न ही उसके नेत्रों ने कोई बात प्रदर्शित की। मैं अपने बहुत ही आकर्षक तौर से अनिल की ओर मुस्कराया। मुस्कान बिना किसी प्रयास के स्वयं प्रकट हुई।
– रस्किन बॉण्ड
Think about it
(इसके बारे में सोचिए )
Q.1. What are Hari Singh’s reactions to the prospect of receiving an education? Do they change over time ? (Hint. Compare, for example, the thought : “I knew that once I could write like an educated man there would be no limit to what I could achieve” with these later thoughts : “Whole sentences, I knew, could one day bring me. more than a few hundred rupees. It was a simple matter to steal-and sometimes just as simple to be caught. But to be a really big man, a clever and respected man, was something else.”) What makes him return to Anil ?
(हरिसिंह की क्या प्रतिक्रिया होगी शिक्षा प्राप्त करने के सन्दर्भ में? (संकेत – उदाहरण के लिए विचारों की तुलना करें, “मैं जानता हूँ कि एक बार मैं शिक्षित व्यक्ति के रूप में लिख सका तो मैं क्या प्राप्त कर पाऊँगा कोई सीमा नहीं होगी” बाद के विचारों के साथ – “सभी वाक्य, मैं जानता हूँ एक दिन कुछ सौ रुपयों से अधिक कुछ नहीं होगा। चोरी के लिए यह एक बहुत साधारण विषय है और कभी-कभी पकड़े जाने पर भी साधारण होगा। लेकिन वास्तव में एक बड़े व्यक्ति, एक चतुर और सम्मानित व्यक्ति का विचार कुछ अलग होगा।” ) अनिल के पास उसकी वापसी उसे क्या बनाएगी ? )
Ans. Hari Singh’s reactions to the prospect of receiving an education undergo a change. In the beginning he thinks that if he wrote like an educated man he could achieve limitless success or money. His later thoughts prove this change. Later he feels that if he wrote whole sentences, they could bring him more than a few hundred rupees. Money doesn’t hold much attraction for him now. What he wants from education is to become a big man, a clever and respected man. May be Anil is his idol in that. This makes him return to Anil because only Anil could teach him as he wants.
( हरिसिंह की प्रतिक्रिया इस सन्दर्भ में शिक्षा प्राप्त कर बदलने की होगी। शुरू में वह सोचता है कि यदि वह एक शिक्षित व्यक्ति के रूप में लिखेगा तो वह असीम सफलता अथवा पैसा प्राप्त कर सकेगा। उसके बाद के विचार – उसमें परिवर्तन को सिद्ध करते हैं। बाद में वह अनुभव करता है कि यदि वह सम्पूर्ण वाक्य लिख देगा, तो वे कुछ सौ रुपये उसके लिए ला सकेंगे। अब रुपया उसके लिए कोई आकर्षण नहीं था। वह शिक्षा से एक बड़ा, समझदार तथा सम्मानित व्यक्ति बनना चाहता था। इसमें अनिल उसका आदर्श हो ‘सकता है। अनिल के पास लौटने पर वह यह बन सकेगा क्योंकि सिर्फ अनिल उसे पढ़ाएगा जैसा वह चाहता है | )
Q. 2. Why does not Anil hand the thief over to the police? Do you think most people would have done so? In what ways is Anil different from such employers?
(अनिल ने चोर को पुलिस के हवाले क्यों नहीं किया? आप क्या सोचते हैं कि अधिकांश व्यक्ति ऐसा ही करेंगे? उस प्रकार नियोक्ताओं अनिल किस प्रकार भिन्न है ? ).
Ans. I feel that Anil is a large-hearted person. First, he does realise that he has been robbed. But he reviews the whole situation. He thinks that if he hands the thief ever to the police, he will be a hardened criminal. He decides to reform the thief differently by showing grace, kindness and sympathy.
Most people could not do so like Anil. They could have handed over such persons to the police after beating them themselves. Anil is different because he decides to reform the thief through kindness and sympathy.
(मैं सोचता हूँ कि अनिल विशाल हृदय वाला व्यक्ति है। प्रथम, वह अनुभव करता है कि उसे लूटा गया है। लेकिन वह सम्पूर्ण स्थिति . का जायजा लेता है। वह सोचता है कि यदि वह चोर को पुलिस के हवाले कर देगा, तो वह पक्का अपराधी बन जाएगा। वह चोर को सभा करके, दया दिखाकर और सहानुभूति से सुधारने का निर्णय लेता है।
अधिकांश लोग अनिल की भाँति नहीं कर सकते। वे ऐसे लोगों को स्वयं मारपीट करके पुलिस के हवाले कर देते हैं। अनिल अलग है क्योंकि वह चोर को दया और सहानुभूति से सुधारने का प्रयत्न करता है।)
Talk about It
(इसके बारे में बात कीजिए)
Q. 1. Do you think people like Anil and Hari Singh are found only in fiction, or are there such people in real life?
(क्या आप सोचते हैं कि अनिल और हरिसिंह जैसे लोग कहानियों में पाए जाते हैं अथवा क्या वास्तविक जीवन में इस प्रकार के व्यक्ति पाए जाते हैं? )
Ans. I think people like Anil and Hari Singh are found in real life also. But their number is very small.
(मैं सोचता हूँ कि अनिल और हरिसिंह जैसे लोग वास्तविक जीवन में भी पाए जाते हैं। लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है।)
Q. 2. Do you think it a significant detail in the story that Anil is a struggling writer? Does this explain his behaviour in any way?
(क्या आप कहानी के विस्तृत अध्ययन के बाद सोचते हैं कि अनिल एक संघर्षरत लेखक है? क्या किसी रूप में यह उसके व्यवहार की विवेचना करता है ? )
Ans. It is a significant detail in the story that Anil is a struggling writer. His getting little money from time to time shows this. Then he has a kind heart as mostly the writers have, when they get money, they become liberal and spend it lavishly. They are infact, the gems of humanity. ( कहानी में यह महत्त्वपूर्ण विवरण है कि अनिल एक संघर्षशील लेखक है। उन्हें समय-समय पर थोड़ा-थोड़ा पैसा मिल जाना यह बताता है। उनका हृदय दयापूर्ण है जैसा कि सामान्यतः लेखकों का होता है। जब उन्हें पैसा मिल जाता है— वे बहुत उदार हो जाते हैं और उसे उदारता से व्यय करते हैं। वास्तव में वे मानवता के लिए रत्न हैं।)
Q.3. Have you met anyone like Hari Singh ? Can you think and imagine the circumstances that can turn a fifteen year old boy into a thief ?
(क्या आप कभी हरिसिंह जैसे किसी (व्यक्ति) से मिले हैं? क्या आप उन परिस्थितियों को सोच और कल्पना कर सकते हैं जिनमें एक 15 वर्ष का लड़का चोर बन गया ? )
Ans. Yes, I have met a boy like Hari Singh. I think the circumstances make one a thief. For example, if one’s family has sources of livelihood and family is normal, a boy or a child in it can’t be a thief. But if the family is poor, there is no food to eat regularly. There is no source of income to fulfil the needs of the family, the children shall surely be thieves one day. Food and its lack makes a human being a thief.
(हाँ, मैं हरिसिंह जैसे लड़के से मिला हूँ। मैं उन परिस्थितियों को सोच सकता हूँ जो चोर बनाती हैं। उदाहरणार्थ, यदि किसी परिवार के पास जीवन-यापन साधन हैं और परिवार सामान्य है, उस परिवार का एक लड़का या बच्चा कभी चोर नहीं बन सकता। लेकिन यदि परिवार गरीब है, नियमित रूप से करने के लिए भोजन नहीं है, परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आय के कोई साधन नहीं हैं, तो बच्चे निश्चित एक दिन चोर बनेंगे। खाने की कमी मनुष्य को चोर बनाती है । )
Q.4. Where is the story set ? Which language or languages are spoken in these places? Do you think the characters in the story spoke to each other in English?
(कहानी कहाँ की है? इन स्थानों में कौन-सी भाषा या भाषाएँ बोली जाती हैं? क्या आप सोच सकते हैं कि कहानी के पात्र एक- दूसरे से ‘अंग्रेजी में बात करते हैं?.)
Ans. The story is set in Delhi. This city is the capital of India. The clues are: The ‘Jamuna sweet shop’, railway station. Hindi, English and other Indian languages are spoken in it. Other Indian languages are mostly spoken by the natives of these states among themselves.
I do not think the characters in the story spoke to each other in English. However, they might have used some English words like ‘time’, ‘train’, ‘clock tower’. These words are now parts of Hindi. language as well.
(कहानी दिल्ली की है। यह शहर भारत की राजधानी है। संकेत हैं— ‘जमुना स्वीट शॉप’, ‘रेलवे स्टेशन’ । हिन्दी, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाएँ इसमें बोली जाती हैं। अन्य भारतीय भाषाएँ अधिकांश पड़ोसी राज्यों के उन लोंगों द्वारा बोली जाती हैं— जो यहाँ रहते हैं।
मैं नहीं सोचता कि कहानी के पात्र एक-दूसरे से अंग्रेजी में बात करते हैं। फिर भी, वे कुछ अंग्रेजी शब्दों का उपयोग कर सकते हैं, जैसे ‘टाइम’, ‘ट्रेन’ ‘क्लॉक टॉवर’। ये शब्द अब हिन्दी भाषा का हिस्सा हैं।)

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