UK 10TH ENGLISH

UK Board 10th Class English – (Supplementary Reading) – Chapter 5 Footprints Without Feet

UK Board 10th Class English – (Supplementary Reading) – Chapter 5 Footprints Without Feet

UK Board Solutions for Class 10th English – (Supplementary Reading) – Chapter 5 Footprints Without Feet

Read and Find Out-1
(पढ़ो और ढूँढो)
Q. 1. How did the invisible man first become visible?
( अदृश्य व्यक्ति सबसे पहले किस प्रकार दिखायी दिया? )
Ans. The invisible man first become visible mysteriously when Mrs Hall went to him in Iping.
( अदृश्य व्यक्ति रहस्यमय तरीके से उस समय दिखायी दिया जब श्रीमती हॉल आईपिंग में उसके पास गई। )
Q. 2. Why was he wandering the streets?
( वह गलियों में क्यों घूम रहा था ? )
Ans. He was wandering the streets of London because two boys had been following him. They had seen his footprints but no man was there. Then Griffin had been wandering in London streets for a safer place.
( वह लन्दन की गलियों में इसलिए घूम रहा था क्योंकि दो लड़के उसका पीछा कर रहे थे। उन्होंने उसके पैरों के चिह्न देखे थे लेकिन कोई व्यक्ति वहाँ नहीं था। तब ग्रिफिन लन्दन की गलियों में सुरक्षित स्थान की तलाश में घूम रहा था। )
Read and Find Out – 2
(पढ़ो और ढूँढो)
Q. 1. Why does Mrs Hall find the scientist eccentric?
(श्रीमती हॉल को वैज्ञानिक सनकी क्यों लगा ? )
Ans. Mrs Hall found the scientist eccentric because she wanted to be friendly with him. She desired to talk to him. But he did not show any interest in that. He told her that he desired solitude.
( श्रीमती हॉल ने वैज्ञानिक को सनकी इसलिए पाया क्योंकि वह उससे मित्रता करना चाहती थी। वह उससे बात करना चाहती थी । लेकिन उसने उसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। उसने उनसे कहा कि वह एकान्त चाहता है ।)
Q.2. What curious episode occurs in the study ?
( अध्ययन में कौतूहलपूर्ण प्रसंग क्या है ? )
Ans. The curious episode occurs in the study. One early morning the clergyman and his wife found that someone has taken away the chink of money from the desk. But there was no one around there.
( अध्ययन में कौतूहलपूर्ण प्रसंग है। एक बहुत सुबह एक पादरी और उसकी पत्नी ने देखा कि डेस्क से कोई धन निकालकर ले गया है। लेकिन वहाँ चारों ओर कोई नहीं था। )
Q. 3. What other extraordinary things happened at the inn ?
( सराय में दूसरी असाधारण चीज क्या घटित हुई ? )
Ans. Many other extraordinary things happened in the inn. The landlord and his wife found the scientist’s door open but there was no one in the room. Then Mrs. Hall heard sniff close to her ear. After a moment the hat on the bedpost leapt up and dashed itself into her face. The chair began moving automatically. These things made people furious.
( अन्य अनेक असाधारण चीजें सराय में घटित हुईं। मकान मालिक ‘और उसकी पत्नी ने देखा कि वैज्ञानिक का द्वार खुला है लेकिन कमरे में कोई नहीं है। तब श्रीमती हॉल को अपने कान के समीप साँस लेने की आवाज सुनाई दी। कुछ क्षण बाद टोप उनके बिस्तर पर आकर और बदलकर उनके चेहरे पर लगा। कुर्सी स्वतः हिलने लगी। इन चीजों ने लोगों को क्रोधित कर दिया।)

SUMMARY OF THE LESSON

Griffin was a brilliant scientist. He discovered à rare drug. It could make an man invisible. Griffin was disliked by his landlord. He wanted to eject Griffin out of his house. Griffin set the house of his landlord on fire. Then he took the drug. He removed his clothes. He became invisible.
Griffin had no money. He had no clothes. The air was very cold. He entered a big London store for warmth. He broke open boxes and wrappers. He put on warm clothes, shoes and a hat. He ate cold meat, took coffee and wine. Then he slept in quilts. The next morning the servants opened the store. His eyes opened. He ran away. He took off his clothes and became invisible. Thus he saved himself.
It was cold January. He entered a stock of a theatrical company. He wore dark glasses, a false nose and whiskers to cover his face. He hit the shopkeeper and stole his money.
Griffin wanted to leave London. He took a train to the village Iping. He hired two rooms in the inn of the village. He told the landlady Mrs Hall that he loved solitude. When his stolen money was spent, he stole the money from a_clergyman’s desk. The clergyman and his wife heard the chink of money. But they found no one in the room. The money was missing all the same.
Mrs Hall saw the door of the room of Griffin wide open next morning. She and her husband tried to search his room. She heard a sniff near her ear. Soon the hat on the bedpost leapt up and struck her face. The chair rose up and pushed them out of the room.
People began to suspect that Griffin had a hand in the theft of the clergyman. A constable was secretly sent for. Meanwhile Mrs Hall picked up a quarrel with Griffin. He removed the articles from his face and head. He was now a headless person. The constable arrived. He tried to grasp the headlessman. He became more and more invisible. He hit the people. They were frightened. The constable was knocked down unconscious. The invisible man shook himself free and went his way.

सम्पूर्ण पाठ का हिन्दी रूपान्तर

बिना पदों के पद-चिह
क्या एक आदमी अदृश्य हो सकता है? यह एक वैज्ञानिक की कहानी है जिसने यह खोज की कि स्वयं को अदृश्य कैसे बनाया जा सकता है। क्या उसने अपनी खोज का उपयोग किया अथवा दुरुपयोग किया?
नंगे पाँव के कीचड़ से सने ताज़े पद चिह्न देखकर दो लड़के विस्मय में पड़ गए। नंगे पैर वाला कोई व्यक्ति लन्दन के मध्य में स्थित एक मकान की सीढ़ियों पर क्या कर रहा था? और वह व्यक्ति था कहाँ ?
लड़के ध्यान से देख ही रहे थे कि उन्हें एक महत्त्वपूर्ण दृश्य देखने को मिला। पता नहीं कहाँ से एक नया पद – चिह्न प्रकट हुआ।
उसके आगे सीढ़ियों से उतरते हुए तथा नीचे गली में जाते हुए एक-एक करके अनेक पद चिह्न बनने लगे। लड़के कौतूहलवश उनका पीछा करने लगे, जब तक कि कीचड़ भरे चिह्न क्षीण होते-होते अन्ततोगत्वा पूर्णतया लुप्त न हो गए।
इस रहस्य का स्पष्टीकरण वास्तव में बहुत सरल था। हक्के-बक्के लड़के एक वैज्ञानिक का पीछा कर रहे थे, जिसने मानव शरीर को पारदर्शक बनाने की विधि की खोज कर ली थी।
यह सिद्ध करने के लिए कि मानव शरीर को अदृश्य किया जा सकता है; ग्रिफिन नामक वैज्ञानिक ने अनेक प्रयोग किए थे। अन्त में उसने कुछ दुर्लभ औषधियाँ खा लीं तथा उसका शरीर एक शीशे की चादर की तरेह पारदर्शक बन गया। यद्यपि वह शीशे की तरह ठोस भी रहा।
यद्यपि ग्रिफिन एक कुशाग्र बुद्धि वैज्ञानिक था, फिर भी वह एक स्वेच्छाचारी व्यक्ति था । उसका मकान मालिक उसे पसन्द नहीं करता था और उसे अपने मकान से निकालना चाहता था। प्रतिशोध लेने के लिए ग्रिफिन ने मकान में आग लगा दी। अदृश्य होकर भाग जाने के लिए उसे अपने वस्त्र उतारने पड़े। इस प्रकार वह एक बेघर अदृश्य व्यक्ति हो गया। बिना कपड़ों और बिना धड़ के वह इधर-उधर भटकने लगा कि उसके पाँव कीचड़ में पड़ गए और चलते-चलते उसके पाँव के चिह्न बनने लगे थे।
उसने उन लड़कों से सरलता से पीछा छुड़ा लिया, जो लन्दन में उसके पद चिह्नों का पीछा कर रहे थे। परन्तु उसके साहसिक कार्य अभी पूरे नहीं हुए थे। बिना वस्त्र पहने लन्दन में घूमने के लिए उसने वर्ष का गलत समय चुना था। अभी सर्दी का मौसम आधा व्यतीत हुआ था। वायु बहुत अधिक शीतल थी और वह वस्त्रों के बिना नहीं रह सकता था । गलियों में इधर-उधर घूमने की बजाय उसने गरमाहट के लिए लन्दन में एक बड़े स्टोर के अन्दर जाने का फैसला किया।
स्टोर बन्द होने का समय हो गया। जैसे ही द्वार बन्द हुए ग्रिफिन को बिना किसी प्रकार का खर्च किए ही वस्त्र पहनने तथा खाने-पीने का आनन्द लेने का अवसर मिल गया। उसने सन्दूकों और आवरणों को खोला और अपने को गर्म कपड़ों से सुसज्जित कर लिया। वह जूते, ओवर-कोट और एक चौड़ी किनारी वाला टोप पहनकर पूर्णतया सुसज्जित एवं गोचर व्यक्ति बन गया। रेस्तरां के रसोइघर में उसे ठण्डा मांस तथा कॉफी मिली। भोजन करने के पश्चात् उसने किराने के भण्डार से प्राप्त मिठाइयों तथा मदिरा का सेवन किया। अन्त में वह रजाइयों के एक ढेर पर सो गया ।
यदि वह समय से उठ गया होता तो उसे कठिनाई का सामना न करना पड़ता। परन्तु अगले दिन प्रातः जब स्टोर में काम करने वाले नौकरों का आना शुरू हो गया, तब उसकी आँखें खुलीं।
जब उसने दो नौकरों को अपनी ओर आते देखा, तो वह घबरा गया और भागने लगा। स्वाभाविक रूप से उन्होंने उसका पीछा किया। अन्त में नए पहने कपड़ों को उतार कर ही वह वहाँ से बच निकलने में सफल हो सका। अत: जनवरी की शीतमय हवा में एक बार पुनः वह निर्वस्त्र हो ‘अदृश्य हो गया था।
इस बार उसने एक नाटक कम्पनी के भण्डार को आजमाने का निश्चय किया। उसे आशा थी कि उसे वहाँ केवल वस्त्र ही नहीं मिलेंगे बल्कि कन्धों के ऊपर का खुला भाग (मुख और सिर) ढकने का सामान भी मिल जाएगा। सर्दी से ठिठुरते हुए वह नाटक संसार के केन्द्र ‘डूअरी लेन’ की ओर भागा।
उसे शीघ्र ही एक उपयुक्त दुकान मिल गई। थोड़ी देर पश्चात् वह अपने माथे के चारों ओर पट्टी बाँधकर, काला चश्मा, नकली नाक, बड़ी घनी डूअरी मूँछे तथा बड़ा टोप पहनकर बाहर आ गया। अदृश्य रूप से भाग निकलने के लिए, उसने पीछे से दुकानदार पर निष्ठुरतापूर्वक आक्रमण कर दिया और उसके पश्चात् उसने उसका सारा धन लूट लिया, जो उसे मिल सकता था।
भीड़ भरे लन्दन से भाग निकलने की इच्छा से उसने आइपिंग नामक गाँव के लिए गाड़ी पकड़ी, जहाँ उसने एक स्थानीय सराय में दो कमरे किराए पर ले लिए।
शिशिर ऋतु में किसी अजनबी का सराय में आना एक असाधारण घटना थी। असाधारण बाह्य आकृति वाले उस अजनबी के विषय में सभी लोग तरह-तरह की बातें करने लगे। सराय के मालिक की पत्नी श्रीमती हाल ने उससे मैत्री करने का हर सम्भव प्रयास किया, परन्तु ग्रिफिन उससे ‘कोई बात नहीं करना चाहता था। ग्रिफिन ने उससे कहा, “मेरा आइपिंग आने का एकमात्र कारण एकान्त प्राप्त करने की इच्छा है। मैं नहीं चाहता कि मेरे कार्य में कोई विघ्न डाले। इसके अतिरिक्त एक दुर्घटना ने मेरे चेहरे को प्रभावित किया है। “
इस बात से सन्तुष्ट होकर कि उसका अतिथि एक सनकी वैज्ञानिक है और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि उसने किराया भी पेशगी दे दिया है, श्रीमती हाल उसकी विचित्र बातों तथा चिड़चिड़े स्वभाव की उपेक्षा करने को तैयार हो गई थी। परन्तु उसका चुराया हुआ धन अधिक देर तक न चल सका और शीघ्र ही ग्रिफिन को उन्हें बताना पड़ा कि उसके पास नकद धनराशि नहीं है । परन्तु उसने यह बहाना बनाया कि उसे शीघ्र ही एक चेक की प्राप्ति होने वाली है।
थोड़ी देर पश्चात् एक विचित्र घटना घटी। बहुत सवेरे पादरी और उसकी पत्नी अध्ययन कक्ष में शोर सुनकर जाग गए। सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए उन्होंने पादरी के डेस्क से निकाले जा रहे सिक्कों की खनखनाहट सुनी।
बिना शोर किए और अपने हाथ में मजबूती से सरिया पकड़े हुए पादरी ने एकाएक द्वार खोल दिया, और चिल्लाया,
” आत्मसमर्पण करो। “
तब पादरी को इस अहसास से आश्चर्य हुआ कि कमरा खाली है। उसने और उसकी पत्नी ने डेस्क के नीचे, पर्दों के पीछे, ऊपर चिमनी में भी देखा। कोई भी नहीं था। फिर भी डेस्क खुला हुआ था और घर का खर्चा चलाने के लिए रखा धन गायब था।
पादरी सारा दिन यही कहता रहा – ” बड़ी विचित्र बात है ।”
परन्तु यह उतनी विचित्र बात नहीं थी, जितनी कि थोड़ी देर बार श्रीमती हाल के कमरे के फर्नीचर की स्थिति पर हुई ।
सराय का मालिक और उसकी पत्नी सुबह शीघ्र जाग गए थे और वैज्ञानिक के कमरे का द्वार एकदम खुला देखकर उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ। प्रायः द्वार बन्द ही रहता था और उस पर ताला लगा रहता था। यदि कोई उसके कमरे में प्रवेश करता, तो वैज्ञानिक बहुत क्रुद्ध होता था। अवसर इतना अच्छा था कि वे उसे खोना नहीं चाहते थे। उन्होंने दरवाजे से ही कमरे में चारों ओर झाँका परन्तु कोई दिखाई न दिया। उन्होंने छानबीन करने का निश्चय किया । पलंग पर बिछे वस्त्र ठण्डे थे, जिससे यह स्पष्ट था कि वैज्ञानिक को बिस्तर छोड़े पर्याप्त समय हो गया है और आश्चर्य की बात यह थी कि वस्त्र और पट्टियाँ जिन्हें वैज्ञानिक सदैव पहने रहता था, कमरे में बिखरी पड़ी थीं।
अचानक श्रीमती हाल ने अपने कान के निकट नाक से गहरी साँस खींचने की आवाज सुनी। एक क्षण पश्चात् पलंग के पाए पर लटका हुआ हैट उछला और उसके चेहरे पर आकर लगा। इसके बाद शयन कक्ष की कुर्सी हिल उठी। हवा में उछल कर वह सीधी श्रीमती हाल की ओर बढ़ी, कुर्सी की टाँगें आगे की ओर थीं। जैसे ही वह और उसका पति भयभीत होकर जाने के लिए मुड़े, उस असाधारण कुर्सी ने उन्हें कमरे से बाहर धकेल दिया और झटके के साथ द्वार बन्द करके कमरे का ताला लगा दिया।
श्रीमती हाल लगभग बेहोश होकर सीढ़ियों से नीचे गिर पड़ी। उसे विश्वास हो गया कि कमरा भूत-प्रेतों का बसेरा हो गया है और अजनबी ने किसी तरह उनको उनके फर्नीचर में प्रविष्ट करा दिया है।
” बेचारी मेरी माँ उस कुर्सी पर बैठा करती थीं”, उसने कराह कर कहा । “यह सोचना कितना दुःखद है कि वही कुर्सी मेरे विरुद्ध उठेगी।”
पड़ोसियों की धारणा थी कि इस मुसीबत का कारण जादू-टोना है। परन्तु जादू-टोने की बात छोड़कर, जब पादरी के घर की चोरी का समाचार फैला, तो यह प्रबल सन्देह किया जाने लगा कि इसमें विचित्र वैज्ञानिक का हाथ है। जब उसने नकद धन प्रस्तुत किया तो वह सन्देह और भी प्रबल हो गया, क्योंकि कुछ समय पूर्व ही उसने स्वीकार किया था कि उसके पास नकद धनराशि नहीं है।
गोपनीय ढंग से गाँव के सिपाही को बुलाया गया। सिपाही की प्रतीक्षा करने के स्थान पर श्रीमती हाल वैज्ञानिक के पास गई, जो बड़े रहस्यमय ढंग से अपने रिक्त शयनकक्ष से प्रकट हो गया था।
उसने पूछा, “मैं जानना चाहती हूँ कि तुम ऊपर मेरी कुर्सी से क्या करते रहे और मैं जानना चाहती हूँ कि रिक्त कक्ष में से तुम कैसे बाहर आए और तुमने बन्द कमरे में किस प्रकार प्रवेश किया।”
वैज्ञानिक को सदैव शीघ्र ही क्रोध आ जाता था, अब वह क्रोध से लाल-पीला हो गया।
वह चिल्लाया, “तुम नहीं समझती कि मैं कौन हूँ। ठीक है – मैं तुम्हें दिखाऊँगा ।”
अकस्मात् उसने अपनी पट्टियाँ, मूँछें, चश्मा और नाक भी फेंक दीं। ऐसा करने में उसे केवल एक मिनट लगा। तत्पश्चात् बार (मधुशाला) में उपस्थित भयभीत लोग बिना सिर के मनुष्य को घूर घूरकर देखने लगे ।
पुलिस का सिपाही श्री जैफर्स अब आ चुका था और वह यह जानकर बहुत आश्चर्यचकित हुआ कि उसे बिना सिर के मनुष्य को गिरफ्तार करना है । परन्तु श्री जैफर्स को अपना कर्त्तव्य निभाने से आसानी से रोका नहीं जा सकता था । यदि मजिस्ट्रेट ने किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का वारन्ट जारी किया हो, तो उस व्यक्ति को पकड़ना ही होता है, चाहे उसका सिर हो या नहीं।
यह एक विचित्र दृश्य था जब सिपाही एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ने का प्रयास कर रहा था, जो एक के बाद एक वस्त्र उतार कर अधिकाधिक अदृश्य होता जा रहा था। अन्त में एक कमीज हवा में उड़ी और सिपाही ने अपने को एक ऐसे व्यक्ति से संघर्ष करते हुए पाया, जिसे वह कदापि नहीं देख सकता था। कुछ लोगों ने सिपाही की सहायता करने का प्रयास किया, परन्तु उन पर घूँसे पड़ने लगे, जो पता नहीं कहाँ से आ रहे थे।
जैसे ही जैफर्स ने अदृश्य वैज्ञानिक को पकड़ने का अन्तिम प्रयास किया, उसको बेहोशी की अवस्था में नीचे गिरा दिया गया।
घबराहट भरी और उत्तेजनापूर्ण चीखें आईं, “उसे पकड़ो।” परन्तु ऐसा कहना करने की अपेक्षा सरल था। ग्रिफिन ने स्वयं को मुक्त कर लिया और कोई नहीं जानता था कि उसे कहाँ से पकड़ा जाए।
Think about it
(इस बारे में सोचिए)
Q. 1. “Griffin was rather a lawless person.” Comment.
( “ग्रिफिन वस्तुत: एक विधिहीन ( स्वेच्छाचारी) व्यक्ति था।” टिप्पणी कीजिए।)
Ans. Griffin is considered to be a lawless person for the following reasons:
  1. His landlord did not like him and wanted to eject him. In revenge Griffin set fire to his house. He became invisible and got away without being seen.
  2. He slipped into a big London store. He was able to give himself the pleasure of clothing and feeding himself without regard to expense. When in the morning, the servants arrived, he panicked and ran away.
  3. He entered into a theatrical shop. He wore bandages round his forehead, dark glasses, false nose, big bushy side-whiskers and a large hat. He callously attacked the shopkeeper from behind and robbed him of all money.
  4. He stole the money of clergyman. When the constable came to arrest him, he became invisible. He knocked the constable unconscious and shook him self free.
(ग्रिफिन को स्वेच्छाचारी व्यक्ति समझा जाता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं—
  1. उसका मकान मालिक उसे पसन्द नहीं करता था और उसको मकान से निकालना चाहता था। प्रतिशोध में ग्रिफिन ने उसके मकान में आग लगा दी। वह अदृश्य बन गया और बिना दिखे भाग गया।
  2. वह एक बड़े लन्दन स्टोर में घुस गया। उसने बिना व्यय किए कपड़े पहने और खाना खाने का आनन्द लिया। प्रातःकाल जब नौकर आए, वह भयभीत हुआ और भाग गया।
  3. वह एक थियट्रिकल दुकान में घुस गया। उसने माथे पर पट्टियाँ लपेटी, काला चश्मा पहना, नकली नाक लगाया। बड़ी-बड़ी मूँछें लगाई और एक बड़ा हैट लगाया। उसने निर्दयता से दुकानदार पर पीछे से आक्रमण किया और उसका सारा पैसा लूट लिया।
  4. उसने पादरी का पैसा चुराया । जब पुलिस का सिपाही उसे गिरफ्तार करने आया, वह अदृश्य बन गया। उसने सिपाही को मारकर बेहोश करके नीचे डाल दिया और भाग गया। )
Q.2. How would you assess Griffin as a scientist ?
(ग्रिफिन का वैज्ञानिक के रूप में आप मूल्यांकन कैसे करेंगे?)
Ans. Griffin was indeed a good scientist. He had successfully discovered how to make the human body transparent. He had carried out experiment after experiment to prove that the human body could become invisible. Finally he swallowed certain rare drugs and his body became as transparent as a sheet of glass, but had been as solid as glass. So there is no denying the fact the Griffin was a brilliant scientist.
He had the ability to make great inventions and discoveries. But we regret for his being lawless.
(ग्रिफिन वास्तव में अच्छा वैज्ञानिक था। उसने सफलतापूर्वक खोज की कि मानव शरीर को किस प्रकार पारदर्शक बनाया जा सकता है। यह सिद्ध करने के लिए कि मानव शरीर अदृश्य बनाया जा सकता है । वह एक प्रयोग के बाद दूसरा प्रयोग करता रहा। अन्त में उसने कुछ असाधारण औषधियाँ निगलीं और उसका शरीर काँच की चादर के समान पारदर्शक हो गया, पर वह काँच के समान ठोस बना रहा। अतः कोई भी इस तथ्य से मना नहीं कर सकता कि ग्रिफिन प्रतिभाशाली वैज्ञानिक था ।
उसमें बड़े आविष्कार तथा खोज करने की योग्यता थी। पर उसके स्वेच्छाचारी और सनकी होने का हमें खेद है | )
Talk about It
(इस बारे में बात कीजिए)
Q. 1. Would you like to become invisible ? What advantages and disadvantages do you foresee, if you did ?
(क्या आप अदृश्य होना पसन्द करेंगे ? आप यदि ऐसा करते हैं, तो क्या लाभ और हानि आप देखते हैं ? )
Ans. Yes, I like to become invisible. If I can become invisible, then I would punish those who cause troubles to others for their selfish motives. There are so many advantages and disadvantages to become invisible. Some of them are as under :
Advantages :
  1. Wrong functions of society would be checked.
  2. Harmful things could be checked.
  3. Depraved and vagrant shall be extracted from the society.
Disadvantages:
  1. There will be no sympathy, love and fellow-feeling in the society.
  2. Honesty will disappear from the society.
  3. More and more depraved and vagrant persons will be in society.
  4. Everywhere in the society would be lawlessness. Everywhere in the society will be disorder, chaos and confusion.
(हाँ, मैं अदृश्य बनना पसन्द करूँगा। यदि मैं अदृश्य हो सका तो मैं उन लोगों को दण्डित करूँगा जो अपने स्वार्थपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति के लिए दूसरों को कष्ट पहुँचाते हैं। अदृश्य बनने के अनेक लाभ और नुकसान हैं। उसमें से कुछ निम्नानुसार हैं-
लाभ-
  1. समाज के गलत कार्यों को रोका जा सकेगा।
  2. हानिकारक वस्तुओं को रोका जा सकेगा।
  3. दुराचारियों और स्वेच्छाचारियों को समाज से निकाला जा ‘सकेगा।
हानियाँ-
  1. समाज में सहानुभूति, प्रेम और सद्भाव नहीं रहेगा।
  2. समाज से ईमानदारी समाप्त हो जाएगी।
  3. समाज में अधिक से अधिक दुराचारी और स्वेच्छाचारी होंगे।
  4. समाज में चारों ओर अफरा-तफरी होगी। समाज में चारों ओर अव्यवस्था, उपद्रव और उलझन होगी । )
Q. 2. Are there forces around us that are invisible, for example, magnetism ? Are there aspects of matter that are ‘invisible’ or not visible to the naked eye? What would the world be like if you could see such forces or such aspects of matter?
( क्या हमारे चारों ओर ऐसी शक्तियाँ हैं जो अदृश्य हैं। उदाहरणार्थ – चुम्बक ? क्या ऐसे तत्त्व हैं जो अदृश्य हैं और जो नंगी आँखों से दिखाई नहीं देते ? यह दुनिया कैसी होगी अगर तुम ऐसी । शक्तियों या ऐसे तत्त्वों के पहलुओं की छानबीन कर सको ? )
Ans. There are so many forces around us that are invisible. For example-magnetism or the gravitational force is the force which we can feel but cannot see. It is the existence of such a force which has held the planets in their respective position and make the things fall to the earth.
Some heavenly bodies can be seen with the help of the naked eye. There are so many such stars which cannot be seen with the help of naked eyes. Such stars are so far off that visibility is not possible.
If we could see such forces then the world would be surrounded by various rays which will be crossing each other like a maze. The confusion will be so great that one will not be able to understand which path to follow or which is restricted.
( हमारे चारों ओर अनेक शक्तियाँ हैं जो अदृश्य हैं। उदाहरणार्थ – चुम्बकत्व अथवा गुरुत्वाकर्षण शक्ति – जिसे हम अनुभव तो करते हैं लेकिन देख नहीं सकते। यह इस प्रकार की शक्ति का अस्तित्व है जो उपग्रहों को उनके सही स्थान पर रखती है और पृथ्वी पर गिरने से रोकती है। कुछ स्वर्गिक पिण्ड नंगी आँखों की सहायता से देखे जा सकते हैं। अनेक तारे ऐसे भी हैं जिन्हें नंगी आँखों की सहायता से नहीं देखा जा सकता। यह तारे इतनी दूर हैं कि उनका देखा जाना सम्भव नहीं है।
यदि हम इस प्रकार की शक्तियों को देख सकते तो संसार विभिन्न प्रकार की किरणों से चारों ओर घिर जाता और यह किरणें एक-दूसरे को भूल-भुलइयों की भाँति काट रही होतीं । अत्यधिक विभ्रम की स्थिति होती कि कोई भी यह समझने की स्थिति में नहीं होता कि किस मार्ग का अनुसरण किया जाए और किसे छोड़ दिया जाए।)
Q.3. What makes glass or water transparent (what is the scientific explanation for this)? Do you think it would be scientifically possible for a man to become invisible, or transparent? (Keep in mind that writers of science fiction have often turned out to be prophetic in their imagination!)
(शीशे और पानी को क्या पारदर्शक बनाता है (इसके लिए वैज्ञानिक व्याख्या क्या है ? ) क्या आप सोचते हैं कि वैज्ञानिकता से मनुष्य को अदृश्य अथवा पारदर्शक बनाना सम्भव है? (मस्तिष्क में यह ध्यान रखिए कि वैज्ञानिक कथाओं के लेखक अक्सर अपनी कल्पना में भविष्य सूचक / पैगम्बर बन जाते हैं। )
Ans. Glass or water are substances in which the molecules are not rigid. Such flexibility in the molecules give them ability of free movement. When they move freely cohesive forces are weakened. Such an aspect makes them invisible or transparent.
The man becoming invisible is just a figment of imagination. It would not be possible and can just be imagined and felt. There are some things. We can feel but can’t see. Scientifically it would not be possible for a man to be invisible. It is like an imagination. We have wings of fancy and touch the limitless horizons and soar higher. But these are just thought which have made us believe that we are soaring higher but actually we are on the ground. So this is just a kind of hypnotism of our feelings and thoughts.
(शीशा अथवा पानी ऐसे तत्त्व हैं जिनमें परमाणु कठोर नहीं होते । परमाणुओं से इस प्रकार का लचीलापन उन्हें मुक्त गति के योग्य बनाता है। जब वे मुक्त रूप से गतिशील होते हैं तो संयुक्त करने वाली शक्तियाँ कमजोर हो जाती हैं। इस प्रकार का पहलू उन्हें अदृश्य अथवा पारदर्शक बनाता है।
मनुष्य अदृश्य हो सकता है – यह एक कल्पना की उड़ान है। यह सम्भव नहीं होगा यह केवल कल्पना होगी। कुछ चीजें हैं – जिनका हम अनुभव कर सकते हैं किन्तु देख नहीं सकते। वैज्ञानिकदृष्ट मनुष्य का अदृश्य होना असम्भव है। यह एक कल्पना के समान है। हम कल्पना की उड़ान से असीमित क्षितिज को छू सकते हैं और ऊँचा उड़ सकते हैं। हम सिर्फ सोच सकते हैं कि हम ऊँचा उड़ रहे: हैं लेकिन वास्तविक रूप में हम धरती पर ही होते हैं। यह एक प्रकार से हमारी भावनाओं और विचारों का सम्मोहन है।)

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